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बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन जांच के बाद ही मिलेगा परीक्षा केंद्र में प्रवेश

जयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रयोगशाला सहायक (Lab Assistant) एवं कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant) के कुल 804 पदों पर भर्ती परीक्षा को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इस बार सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए हैं. हाईटेक जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बार अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने के लिए 'डबल लेयर' सुरक्षा जांच से गुजरना होगा. अभ्यर्थियों की न केवल बायोमेट्रिक जांच की जाएगी, बल्कि फेस रिकग्निशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. इन दोनों प्रक्रियाओं के मिलान के बाद ही परीक्षार्थी को अपनी सीट पर बैठने की अनुमति दी जाएगी. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध परीक्षा  केंद्र के भीतर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, कैलकुलेटर, स्मार्ट घड़ी, बैग या किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाना पूरी तरह मना है.  इसके अलावा किताबें या सादा कागज ले जाने पर भी पाबंदी रहेगी. बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सुरक्षित परिवहन और वीडियोग्राफी परीक्षा सामग्री (क्वेश्चन पेपर और ओएमआर शीट) की सुरक्षा के लिए विशेष 'उप समन्वयक दल' तैनात किए गए हैं.  यह दल कोषागार (Treasury) से पेपर बॉक्स को सीधे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा समाप्ति के बाद सामग्री को सुरक्षित वापस जमा कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके साथ ही, हर परीक्षा केंद्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीडियोग्राफी भी अनिवार्य की गई है.  एक घंटे पहले बंद होंगे गेट प्रशासन ने परीक्षार्थियों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है कि वे परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय से कम से कम 1 से 2 घंटे पहले केंद्र पर पहुंच जाएं. बोर्ड के नियमों के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने से ठीक एक घंटे पहले प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे.  इसके बाद किसी भी स्थिति में किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, 804 पदों के लिए हो रही परीक्षा राजस्थान प्रयोगशाला सहायक एवं कनिष्ठ सहायक के कुल 804 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी कर घोषणा की गई थी.  जारी अधिसूचना के अनुसार राजस्थान प्रयोगशाला सहायक आवेदन 2026 (Rajasthan Lab Assistant Application 2026) प्रक्रिया 27 जनवरी से 25 फरवरी तक चली थी.

25 किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा में ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंजा पूरा क्षेत्र

 ब्यावर जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों से लोहा लेते हुए मातृभूमि पर प्राण न्यौछावर करने वाले अग्निवीर जवान युवराज सिंह चौहान की पार्थिव देह जब उनके गृह नगर ब्यावर पहुंची तो पूरा क्षेत्र गमगीन हो उठा. शहादत को नमन करने के लिए सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा. करीब 25 किलोमीटर लंबी इस गौरवमयी अंतिम यात्रा में शामिल हजारों लोग हाथों में तिरंगा थामे 'भारत माता की जय' और 'युवराज अमर रहे' के नारे लगा रहे थे. चार महीने बाद होना था रिटायरमेंट युवराज सिंह 17 फरवरी 2022 को भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती हुए थे. उन्होंने अपनी सेवा के दौरान जबलपुर, गोवा और पठानकोट जैसे महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में अपनी वीरता का परिचय दिया. वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू के अखनूर सेक्टर में थी. परिवार के लोगों ने बताया कि 5 मई की रात ड्यूटी पर जाने से पहले युवराज ने परिवार से फोन पर बात की थी. उन्होंने सभी का हालचाल पूछा और ढेर सारी बातें कीं. अगले दिन सुबह जब परिजनों ने फोन लगाया तो मोबाइल बंद मिला. दोपहर होते-होते शहादत की खबर घर पहुंच गई थी. दु:खद बात यह है कि उनकी सेवा के मात्र चार महीने ही शेष थे और इसके बाद उनका रिटायरमेंट होने वाला था लेकिन उससे पहले ही उन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया. पैतृक गांव में नम आंखों से विदाई शहीद की अंतिम यात्रा ब्यावर शहर से उनके पैतृक गांव लगेतखेड़ा पहुंची. पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर वीर सपूत का स्वागत किया. गांव पहुंचते ही माहौल पूरी तरह मातमी हो गया. अपने लाड़ले को तिरंगे में लिपटा देख मां बार-बार बेहोश हो रही थी और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था. बूढ़ी दादी और पिता प्रताप सिंह की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार गांव के मुक्तिधाम में सेना की टुकड़ी ने शहीद को सशस्त्र सलामी दी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से स्थानीय विधायकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. पिता, माता और बहन बबीता ने अपने वीर योद्धा को अंतिम सैल्यूट किया. राष्ट्रभक्ति के गीतों और जयकारों के बीच युवराज पंचतत्व में विलीन हो गए.

राजस्थान SI भर्ती में बड़ा अपडेट: परीक्षा निरस्त, सितंबर 2026 में फिर से एग्जाम संभव

जयपुर राजस्थान लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021 को निरस्त कर दिया है. भर्ती परीक्षा फिर से होगी, जिसकी रूपरेखा भी तय हो गई है. आरपीएससी अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू के मुताबिक, परीक्षा में केवल वे 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी ही शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहले आयोजित लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्र दिए थे. 16 मई से अभ्यर्थियों को फॉर्म में सुधार का अवसर दिया जाएगा. इस दौरान जानकारी में आवश्यक सुधार के अलावा अपडेट भी कर सकेंगे. संशोधन प्रक्रिया 30 मई 2026 तक चलेगी, जिसमें मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस और एड्रेस में बदलाव किया जा सकेगा. यह अपडेट भी जानना है जरूरी परीक्षा ओटीआर और पात्रता संशोधन से पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की केवाईसी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा. एसएसओ आईडी बदलने वाले अभ्यर्थी फेच एप्लीकेशन फॉर्म विकल्प से पुराना डेटा नए प्रोफाइल में ट्रांसफर कर सकेंगे. फॉर्म में बदलाव नहीं फिर भी करना होगा ये काम आयोग ने साफ किया है कि आयु, आरक्षण और शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण 2021 के आवेदन के समय की स्थिति के आधार पर ही होगा. परीक्षा और प्रक्रिया में अगर किसी अभ्यर्थी को आवेदन में कोई बदलाव नहीं करना है. तब भी उसे एडिट मोड में जाकर ‘संशोधन की आवश्यकता नहीं' वाली घोषणा और बायोमेट्रिक उपयोग की सहमति देनी होगी. इसके बाद ओटीपी सत्यापन के जरिए आवेदन सबमिट होगा. निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. सितंबर में हो सकती है परीक्षा एसआई भर्ती 2021 परीक्षा के लिए 3 फरवरी 2021 को नोटिफिकेशन जारी हुआ. 859 पदों के लिए 13 से 15 सितंबर 2021 को भर्ती परीक्षा आयोजित हुई. इसमें 3 लाख 80 हजार अभ्यर्थी लिखित परीक्षा के बाद 20 हजार 359 अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट के लिए पास हुए. 3 हजार 291 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए चयनित हुए. 1 जून 2023 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया. परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली के बाद मामला कोर्ट पहुंच गया था. हाल ही में 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एसआई भर्ती 2021 को रद्द रखने का फैसला बरकरार रखा था. भर्ती परीक्षा का आयोजन सितंबर-2026 में होने की संभावना है.

जल जीवन मिशन घोटाला: मास्टरमाइंड संजय बड़ाया थाईलैंड फरार, जांच तेज

 जयपुर राजस्थान की पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान हुए 960 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली से पूर्व रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद, अब पूर्व मंत्री महेश जोशी एसीबी की गिरफ्त में हैं और 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. एसीबी की पूछताछ में इस घोटाले के तार विदेश तक जुड़ते नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और मुख्य दलाल संजय बड़ाया (Sanjay Badaya) गिरफ्तारी के डर से थाईलैंड भाग गया है. संजय बड़ाया क्या करता था? सूत्रों के मुताबिक, संजय बड़ाया इस पूरे घोटाले की अहम कड़ी है. वह पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल, दोनों का बेहद करीबी माना जाता है. एसीबी की जांच में सामने आया है कि बड़ाया के जिम्मे पैसों के लेन-देन का प्रबंधन करना, अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली खाना, अपने चहेते लोगों को PWD विभाग में लगवाना और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करवाकर ठेके दिलवाना जैसे काम थे. एसीबी की टीम को भनक लगने से पहले ही वह एक शादी में शामिल होने के बहाने थाईलैंड भाग गया. अब एसीबी उसके भारत लौटते ही उसे गिरफ्तार करने की तैयारी में है. कैसे हुआ 960 करोड़ का फर्जीवाड़ा? साल 2023 में दर्ज हुए इस मुकदमे में जांच एजेंसियों ने पाया कि मंत्री रहते हुए महेश जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं. 'मैसर्स गणपति ट्यूबवेल' और 'मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल' को नियमों के विपरीत जाकर करोड़ों के टेंडर बांटे गए. इन दोनों कंपनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल (Ircon International) के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर गैर-कानूनी तरीके से ये टेंडर हासिल किए थे. एसीबी इन दोनों कंपनियों के मालिकों सहित अब तक 11 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है. महेश जोशी से ACB पूछ रही ये सवाल एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, महेश जोशी से गहन पूछताछ जारी है. एसीबी की टीम मुख्य रूप से इन तीन सवालों के जवाब तलाश रही है. पहला सवाल- घोटाले का पैसा कहां गया और उसे कहां ठिकाने लगाया गया है? दूसरा सवाल- टेंडर प्रक्रिया में किस प्रकार की शिकायतें थीं और पद का दुरुपयोग कैसे किया गया? तीसरा सवाल- संजय बड़ाया और अन्य फरार आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन की क्या व्यवस्था थी?

भीषण गर्मी में स्वास्थ्य विभाग का फैसला, अब शाम 5 से 7 बजे तक भी मिलेगा इलाज

 जयपुर राजस्थान में भीषण गर्मी और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने OPD (आउटडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) का 1 अप्रैल से बढ़ा दिया है. इस नए शेड्यूल से उन हजारों मरीजों को सीधे तौर पर राहत मिल रही है, जिन्हें तेज धूप में लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था. लेकिन शुक्रवार को सबसे बड़ी राहत जयपुर के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) में आने वाले मरीजों को दी गई है, जहां अब शाम की ओपीडी भी शुरू कर दी गई है. इवनिंग OPD का समय क्या रहेगा? अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अब मरीज शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक भी डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे. पहले चरण में यह व्यवस्था 'जनरल मेडिसिन' विभाग में लागू की गई है. इस नई पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सुबह के समय होने वाली भारी भीड़ काफी हद तक कम हो जाएगी. साथ ही, नौकरीपेशा लोग भी अपने काम के बाद आसानी से अस्पताल जाकर इलाज करा सकेंगे. रविवार को भी मिलेगी 2 घंटे की OPD गर्मी के ध्यान में रखते हुए 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों का समय बदला गया है. राजस्थान के सभी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएचसी (CHC) और पीएचसी (PHC) में अब ओपीडी सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक संचालित हो रही है. मरीजों की परेशानी को समझते हुए सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रविवार और अन्य सरकारी छुट्टियों के दिन भी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं रहेंगी. अवकाश वाले दिनों में भी मरीज सुबह 9:00 बजे से 11:00 बजे के बीच अस्पताल पहुंचकर अपना इलाज करवा सकते हैं. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में दो शिफ्ट की व्यवस्था शहरी क्षेत्रों में बने 'आयुष्मान आरोग्य मंदिरों' (जिन्हें पहले जनता क्लिनिक कहा जाता था) में भी मरीजों की सहूलियत के लिए समय में अहम बदलाव किए गए हैं. अब इन केंद्रों पर मरीजों को दो अलग-अलग शिफ्ट में सेवाएं दी जा रही हैं. पहली शिफ्ट में मरीज सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आ सकते हैं, जबकि दूसरी शिफ्ट शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक संचालित की जा रही है. लंबी कतारों से बचें, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें सरकार ने मरीजों को अस्पताल की भीड़ और लाइनों से बचाने के लिए एक बेहतरीन डिजिटल सुविधा भी दी है. अब आप अस्पताल जाने से पहले IHMS (Integrated Health Management System) पोर्टल के जरिए घर बैठे अपने मोबाइल से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं. ऑनलाइन पर्ची कटवाने से आपका समय बचेगा और आप सीधे अपने निर्धारित समय पर डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे.

कालीबाई और देवनारायण स्कूटी योजना में DBT लागू, 70 हजार रुपये सीधे ट्रांसफर

जयपुर राजस्थान सरकार ने छात्राओं के लिए चलाई जा रही अपनी महत्वाकांक्षी स्कूटी योजनाओं में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है. अब मेधावी छात्राओं को स्कूटी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि सरकार सीधे उनके बैंक खाते में स्कूटी की रकम ट्रांसफर करेगी. कालीबाई भील और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत लिया गया यह फैसला न केवल सरकारी टेंडर और खरीद की जटिलताओं को खत्म करेगा, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश को भी पूरी तरह समाप्त कर देगा. 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर चलते हुए सरकार का लक्ष्य अब छात्राओं को यह आजादी देना है कि वे अपनी पसंद की गाड़ी खुद चुन सकें और योजना का लाभ बिना किसी देरी के सीधे उनके हाथों में पहुंचे. छात्राओं को मिलेगा DBT के जरिए लाभ भजनलाल सरकार के फैसले के बारे में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से सभी छात्राओं को योजना का लाभ दिया जाएगा. हमने योजना में यह महत्वपूर्ण बदलाव किया है. इसका उद्देश्य लोगों तक योजना का फायदा सीधे पहुंचना है. बीच में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को खत्म करना भी इसका उद्देश्य है. राज्य सरकार ने कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने के बजाय उनके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करेगी. स्कूटी के लिए सरकार की तरफ से छात्राओं को 70 हजार रुपये बैंक खाते में जमा किए जाएंगे. इससे विभाग को टेंडर प्रक्रिया, खरीद, भंडारण और वितरण जैसी जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी. पहले 26 हजार छात्रों के खाते में भेजा जाएगा पैसा मंत्री अविनाश गहलोत का कहना है कि इस नए बदलाव के तहत सबसे पहले 2024-25 सत्र की 26 हजार छात्राओं के खाते में राशि भेजी जाएगी. इसके बाद 2025-26 सत्र की 25 हजार से अधिक छात्राएं लाभान्वित होंगी. कुल मिलाकर इन योजनाओं के तहत करीब 350 करोड़ रुपये छात्राओं के खातों में डाले जाएंगे.  उन्होंने कहा कि योजना को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह से चरणबद्ध प्लानिंग की गई है. यह पैसा बालिकाओं के खाते में वाउचर के माध्यम से ही दिया जाएगा. ताकि बालिकाएं अपनी पसंद की स्कूटी खरीद सकें. साथी भ्रष्टाचार पर भी जीरो टॉलरेंस की नीति हमारी बनी रहेगी. छात्राओं को क्या करना होगा काम इस बड़े बदलाव के लिए कॉलेज शिक्षा विभाग में छात्रवृत्ति के संयुक्त निदेशक ने सभी प्राचार्य और जिला नोडल अधिकारी को पत्र लिखा है. जिसमें निर्देश दिया गया कि वर्ष 2024-25 की स्थाई वरीयता सूची में चयनित 25977 छात्राओं के आनलाइन आवेदन पत्रों को निम्न सूचनाएं आनलाइन आवेदन पत्र पर अपडेट किये जाने के लिए सम्बन्धित छात्राओं के स्तर पर फॉरवर्ड किया जायेगा.     खाताधारक का नाम     बैंक नाम     खाता संख्या     IFSC कोड     मोबाइल नंबर     छात्रा द्वारा आनलाइन आवेदन पत्र में Passbook/ Cancel Cheque अपलोड किया जायेगा. छात्रा द्वारा उपरोक्त सूचना अंकित करने के बाद आवेदन पत्र जिला नोडल महाविद्यालय को फारवर्ड किये जायेंगें. सभी प्राचार्य/नोडल अधिकारी उक्त सूचनाओं की जांच चयनित छात्राओं के आनलाइन आवेदन पत्र में अपलोड किये गये पासबुक/कैन्सिल चैक से की जायेगी. ध्यान दें कि आवेदन पत्र में अंकित खाता सम्बन्धित छात्रा का ही हो.

भदवासिया में गोवंश जलने की घटना, CCTV से सच तलाश रही पुलिस

जोधपुर  राजस्थान के जोधपुर जिले के भदवासिया 80 फीट रोड पर गुरुवार शाम को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्थानीय लोगों ने एक जला हुआ गोवंश देखा. घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए. सूचना पर पहुंची पुलिस ने संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत गोवंश को कब्जे में लिया और रात को ही पशु चिकित्सालय भिजवाया. पुलिस प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए रात में ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करवाई. थाने पर हंगामा, रात में हुआ पोस्टमार्टम पोस्टमार्टम के बाद जब गोवंश को दोबारा माता का थान थाना लाया गया, तो वहां मौजूद गोभक्तों का गुस्सा फूट पड़ा. गोभक्त और पुलिस के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक और बहस होती रही. गोभक्तों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए जांच की मांग की. पुलिस अधिकारियों की समझाइश और काफी मशक्कत के बाद मामला शांत हुआ. इसके बाद पुलिस की भारी मौजूदगी में गोवंश का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार करवाया गया. CCTV फुटेज में छिपा है सच पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच हर एंगल से कर रही है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोवंश जला कैसे? पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह किसी शॉर्ट सर्किट या कूड़े में लगी आग की वजह से हुआ कोई हादसा था, या फिर किसी शरारती तत्व ने शहर का माहौल बिगाड़ने के लिए जानबूझकर इस वारदात को अंजाम दिया है. फिलहाल माता का थान थाना पुलिस ने इलाके में लगे आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है. पुलिस ने की शांति बनाए रखने की अपील पुलिस का कहना है कि फुटेज के जरिए गोवंश के जलने के सही कारणों का पता लगाया जा रहा है. अधिकारियों ने आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

सीकर के जाजोद गांव में मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान, स्कूल में शुरू होगा विज्ञान संकाय

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का “गांव चली सरकार” अभियान के तहत शुक्रवार (7 मई) को सीकर जिले के जाजोद गांव में पहुंचे. गुरुवार (6 मई) देर रात तक ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाने के बाद मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह सूरज निकलते ही गांव की गलियों में पहुंच गए. ग्रामीण जब अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने मुख्यमंत्री को गांव की सड़कों और गलियों में पैदल घूमते हुए पाया. इसी दौरान उन्होंने गांव की छात्राओं की उस मांग को भी पूरा कर दिया, जो रात्रि चौपाल में उनके सामने रखी गई थी. सरकार की योजनाओं का लिया फीडबैक सीएम ने बिना औपचारिकता के गांव के बुजुर्गों, महिलाओं,  किसानों, पशुपालकों, फल-सब्जी विक्रेताओं और युवाओं से आत्मीय संवाद किया. उन्होंने ग्रामीणों से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लिया और गांव की मूलभूत समस्याओं की जानकारी भी जुटाई. छात्राओं ने साझा की थी पीड़ा गुरुवार को रात्रि चौपाल के दौरान छात्राओं ने सीएम से कहा था कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विज्ञान संकाय की सुविधा नहीं है. जिसके कारण उन्हें या तो मजबूरी में अन्य विषयों से पढ़ाई करनी पड़ती है या फिर विज्ञान पढ़ने के लिए घर से काफी दूर जाना पड़ता है. छात्राओं की बात सुनते ही सुनकर मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके स्कूल में विज्ञान संकाय अवश्य खोला जाएगा. रात को ही उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे दिए. इसी सत्र से पढ़ाई शुरू शुक्रवार सुबह जब बालिकाएं स्कूल जाते समय मुख्यमंत्री से एक बार फिर मिलीं और अपनी मांग दोहराई. मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बताया कि जाजोद के स्कूल में विज्ञान संकाय शुरू हो चुका है. राज्य सरकार की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं. अब इस विद्यालय में आप गणित और जीव विज्ञान, दोनों में से अपनी रुचि अनुसार विषय चुनकर इसी साल से पढ़ाई कर सकती हैं. मुख्यमंत्री के मुंह से खुशखबरी सुनकर बच्चियों के चेहरे खिल उठे. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया. उनका कहना था कि उन्हें यकीन ही नहीं हो पा रहा कि उनकी मांग इतनी जल्दी पूरी होगी.

कुत्तों के हमले से दहशत में राजस्थान, मासूम बच्ची की मौत ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

डीग राजस्थान के डीग जिले में आवारा कुत्तों ने कोहराम मचा रखा है. 8 मई को सामने आई स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले अप्रैल माह के भीतर जिले में 3000 से ज्यादा लोगों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है. डीग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की तरफ से जारी ये आंकड़े यह बताते हैं कि जिले में हालात कितने भयावह हैं. हर दिन औसतन 100 लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. बूंदी में कुत्तों ने ली मासूम की जान डीग के ये आंकड़े तब और डरावने हो जाते हैं जब हम 4 मई की उस घटना को याद करते हैं, जिसने राजस्थान को शर्मसार कर दिया था. बूंदी जिले के तालेड़ा क्षेत्र में एक 10 वर्षीय मासूम बच्ची को कुत्तों के झुंड ने उस वक्त नोच-नोच कर मार डाला था, जब वह खुले में शौच के लिए गई थी. उस घटना के बाद सरकार ने पीड़ित परिवार को 1 लाख के मुआवजे का ऐलान तो किया, लेकिन डीग के आंकड़े बताते हैं कि जमीन पर सुरक्षा के इंतजाम अब भी सिफर हैं. शहरों में ज्यादा 'खूंखार' हुए कुत्ते हालिया RTI आंकड़ों ने इस संकट की गंभीरता को और बढ़ा दिया है. साल 2024 के मुकाबले 2025 में राजस्थान में कुत्तों के हमले के मामले करीब दोगुने हो चुके हैं. सबसे ज्यादा असर राजधानी जयपुर समेत कोटा और डीग जैसे इलाकों में दिख रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्ते ज्यादा हिंसक और आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं, जिसका सबसे आसान शिकार छोटे बच्चे बन रहे हैं. 'हमें मुआवजा नहीं, सुरक्षा चाहिए' डीग में बढ़ते मामलों को देखते हुए पूर्व पार्षद कैलाश मिश्रा और अन्य जनप्रतिनिधियों ने नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उनकी मांग है कि नसबंदी और शेल्टर होम के नाम पर हो रही खानापूर्ति बंद हो और सड़कों पर घूम रहे हिंसक कुत्तों को तुरंत हटाया जाए. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करता रहता है. डॉक्टर बोले- ये गलती पड़ेगी भारी बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों ने सख्त हिदायत दी है कि कुत्ता काटने पर 15 मिनट की लापरवाही जान ले सकती है. डॉक्टर्स का कहना है कि अगर कुत्ता काट ले, तो घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं और किसी भी तरह के अंधविश्वास या झाड़-फूंक में समय न गंवाते हुए सीधे सरकारी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज टीका लगवाएं. आवारा कुत्तों की शिकायत करें यदि आपके इलाके में भी कुत्ते हिंसक हो रहे हैं, तो आप राजस्थान संपर्क पोर्टल के टोल-फ्री नंबर 181 पर कॉल कर सकते हैं. इसके अलावा स्थानीय नगर निगम के कंट्रोल रूम में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. जागरूक रहें, क्योंकि आपकी सतर्कता ही आपकी जान बचा सकती है.

जैसलमेर में पारा 45 पार, कई जिलों में येलो अलर्ट जारी, धूलभरी हवाओं की चेतावनी

जयपुर राजस्थान में मई की शुरुआत के साथ ही मौसम ने उथल-पुथल मचा रखी है. एक तरफ जहां तापमान लगातार ऊपर चढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आंधी-बारिश ने मौसम को अस्थिर बना दिया है. गुरुवार (7 मई) को कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई. सबसे गर्म इलाके जैसलमेर में पारा 45.1 डिग्री तक पहुंच गया. पश्चिमी राजस्थान के अन्य जिलों में भी तपिश बरकरार है. बाड़मेर में 44.2, फलोदी में 43.6 और बीकानेर में 43 सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. शुक्रवार (8 मई) के लिए कई जिलों में आंधी-बारिश का भी अलर्ट है.   कोटा-जयपुर में पारा 40 डिग्री के पार चित्तौड़गढ़, कोटा और जयपुर में भी पारा 40 डिग्री के पार दर्ज किया गया. इन शहरों में दिनभर तेज गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है. बारां, धौलपुर, डीग, भरतपुर और अलवर जिलों में येलो अलर्ट है. इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की-मध्यम वर्षा की संभावना है. मौसम विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी 2 से 3 दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है.   जोधपुर संभाग में धूलभरी हवाओं से बढ़ेगी मुश्किल मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले तीन से चार दिनों में जोधपुर संभाग और आसपास के क्षेत्रों में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी हवाएं चल सकती हैं. गर्मी के साथ-साथ तेज हवाओं का असर भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है. इसके साथ ही कई हिस्सों में आंधी और हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है, जिससे मौसम का मिजाज और अधिक अस्थिर रह सकता है. वहीं, 9 मई से पश्चिमी राजस्थान में एक बार फिर हीटवेव का नया दौर शुरू होने की आशंका जताई गई है. खासतौर पर जोधपुर संभाग के सीमावर्ती इलाकों में तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है.