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राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजे जारी, 7 में से 6 मेयर पद BJP के नाम

जयपुर राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में सोमवार को महापौर, सभापति और नगर पालिकाध्यक्ष के चुनाव के साथ ही शहरों की नई राजनीतिक तस्वीर साफ होने लगी। प्रदेश के 10 नगर निगमों में से सात में महापौर पद का फैसला हुआ, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा। आज हुए पांच महापौर पद के चुनावों में चार पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। इस तरह सात में से छह पर भाजपा का कब्जा हो गया है, वहीं केवल एक पर ही कांग्रेस जीती है। दोपहर बाद आए परिणामों में भाजपा की बढ़त का असर पूरे प्रदेश के निकाय प्रमुखों के चुनाव में भी दिखाई दिया। दोपहर दो बजे तक 273 निकायों में 179 निकाय प्रमुखों के परिणाम घोषित हो चुके थे। इनमें भाजपा के 122 और कांग्रेस के 53 निकाय प्रमुख चुने जा चुके थे। अलवर में निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा का बोर्ड अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस की अनामिका शर्मा को हराकर महापौर पद हासिल किया। सुमलता को 42 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 23 वोट मिले। अलवर में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और 13 निर्दलीय तथा एक बसपा पार्षद हैं। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। ऐसे में निर्दलीय और बसपा पार्षदों का समर्थन निर्णायक रहा। पाली में त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा आगे पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया महापौर चुनी गईं। उन्हें 33 वोट मिले। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की सुमित्रा जैन को तीन वोट मिले। यहां कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय पार्षद थे। लिहाजा मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी की मौजूदगी ने पूरे चुनाव को रोचक बना दिया। पाली को पहली महिला महापौर भी मिली है। बीकानेर में कांग्रेस ने पलटा गणित बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला 50 वोट लेकर महापौर बने। भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। बीकानेर में कांग्रेस के पास पार्षदों का बहुमत होने के कारण कांग्रेस का बोर्ड बनना पहले से ही मजबूत स्थिति में था। उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी महापौर उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी को 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले। भाजपा के पास 53 पार्षद थे और सिंघवी को दो अतिरिक्त वोट मिले। इस परिणाम में निर्दलीयों की भूमिका भी सामने आई। अजमेर में फिर भाजपा, भरतपुर-भीलवाड़ा में निर्विरोध अजमेर में भाजपा की अनामिका शर्मा ने कांग्रेस की किरण गढ़वाल को हराकर महापौर पद हासिल किया। यहां कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय पार्षद थे। बहुमत के लिए 41 वोट चाहिए थे, इसलिए निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक रहा। भाजपा ने आठवीं बार बोर्ड और महापौर बनाया। भरतपुर में भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध महापौर चुनी गईं और सोमवार को उन्होंने पद एवं गोपनीयता की शपथ भी ली। भीलवाड़ा में भी भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी जा चुकी हैं। अब सबकी नजरें जयपुर, जोधपुर व कोटा पर अब सबसे ज्यादा नजर जयपुर, जोधपुर और कोटा पर रहेगी। इन तीनों बड़े नगर निगमों में महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा। इसके साथ ही आज के परिणामों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि किन निकायों में क्रॉस वोटिंग हुई, निर्दलीयों ने किसका साथ दिया और अब उपमहापौर व उपाध्यक्ष पदों के लिए किस तरह के नए राजनीतिक समीकरण बनते हैं। राजस्थान के 10 नगर निगमों में महापौर चुनाव की स्थिति क्रम    नगर निगम    परिणाम/स्थिति    महापौर    पार्टी    प्रमुख तथ्य 1    जयपुर    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना 2    जोधपुर    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना 3    कोटा    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना 4    भरतपुर    निर्विरोध    अनुराधा सिंह    भाजपा    निर्विरोध चुनी गईं, आज शपथ ली 5    अलवर    भाजपा की जीत    सुमलता अग्रवाल    भाजपा    42 वोट; कांग्रेस को 23 वोट 6    पाली    भाजपा की जीत    नमिता बुबकिया    भाजपा    33 वोट; निर्दलीय राजबाला को 29, कांग्रेस को 3 7    बीकानेर    कांग्रेस की जीत    अनिल कल्ला    कांग्रेस    50 वोट; भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 8    उदयपुर    भाजपा की जीत    पारस सिंघवी    भाजपा    55 वोट; कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 9    अजमेर    भाजपा की जीत    अनामिका शर्मा    भाजपा    बीजेपी को 43 और कांग्रेस को 37 वोट मिले 10    भीलवाड़ा    निर्विरोध    जसवंत कंवर    भाजपा    निर्विरोध निर्वाचन; अब उपमहापौर पर मंथन

जयपुर से बाहर भी मिलेंगी विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं, राजस्थान में बनेगा नया हेल्थ मॉडल

 जयपुर  राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अब केवल नए अस्पताल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार का फोकस ऐसा एकीकृत स्वास्थ्य तंत्र विकसित करने पर है, जिसमें छोटे शहरों और क्षेत्रीय केन्द्रों तक विशेषज्ञ चिकित्सक, आधुनिक जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और डिजिटल हेल्थ की सुविधा पहुंच सके। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था के केंद्र में मरीज और उसका कल्याण होना चाहिए। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा। मुख्य सचिव जयपुर में एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन-2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘अगले दशक के लिए राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण’ विषय पर राज्य की भावी स्वास्थ्य कार्ययोजना साझा की। जयपुर से आगे बढ़ेगी आधुनिक चिकित्सा की पहुंच श्रीनिवास ने कहा कि उन्नत चिकित्सा सुविधाएं केवल जयपुर और बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। क्षेत्रीय केन्द्रों और छोटे शहरों में अस्पतालों के साथ विशेषज्ञ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और मजबूत रेफरल सिस्टम विकसित करना जरूरी है। इससे गंभीर बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। साथ ही छोटे शहरों में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक पहुंच, सार्वजनिक वित्त पोषण और नीतिगत दिशा देती है, जबकि निजी क्षेत्र निवेश, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ सेवाओं और नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों क्षेत्रों को मरीजों के हित में साझेदार के रूप में काम करना होगा। अस्पतालों की संख्या के साथ गुणवत्ता भी जरूरी मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के साथ होना चाहिए। संक्रमण नियंत्रण, पारदर्शी उपचार परिणाम, चिकित्सकीय जवाबदेही और निरंतर गुणवत्ता सुधार को अस्पतालों की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की इमारत और उपकरण अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन कुशल डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और स्वास्थ्य प्रबंधक तैयार करने में लंबा समय लगता है। इसलिए अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सतत चिकित्सा शिक्षा पर जोर देना होगा। डिजिटल हेल्थ में राजस्थान की मजबूत मौजूदगी श्रीनिवास ने बताया कि राजस्थान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में 8.37 करोड़ विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पंजीकरण में राजस्थान देश में दूसरे, स्वास्थ्य सुविधा पंजीकरण में पांचवें और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता पहचान संख्या के सृजन में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य का अगला चरण उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल और विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच समन्वय है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड से मरीजों को निर्बाध उपचार सुविधा मिलेगी और डॉक्टरों को मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बेहतर तरीके से उपलब्ध हो सकेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल चिकित्सा और प्रशासनिक निर्णयों में सहायक हो सकता है, लेकिन मानवीय निगरानी और मरीज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों, चिकित्सा शिक्षा, आतिथ्य सुविधाओं और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण राजस्थान में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर्यटन का बड़ा केन्द्र बनने की संभावनाएं हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र आने वाले समय में राज्य में निवेश, रोजगार और कौशल विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

जयपुर बना रियल एस्टेट हब, 5 साल में आवासीय कीमतों में 63% की बढ़ोतरी

जयपुर  देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में घर तेजी से महंगे हो रहे है। सीआइआइ और नाइट फ्रैंक इंडिया की हाल ही जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2021 से 2026 के बीच जयपुर समेत 11 शहरों में आवासीय कीमतें 63 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि शीर्ष आठ शहरों में यह बढ़ोतरी 42 प्रतिशत रही। जयपुर टियर-2 शहरों में दिल्ली-एनसीआर के सबसे करीब है। यहां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है और यह पर्यटन का बड़ा केंद्र है। आसपास से गुजर रहे बड़े हाईवे और एक्सप्रेसवे से शहर जुड़ चुका है या जल्द जुड़ने वाला है। इन फैक्टर्स ने जयपुर को आवासीय और व्यावसायिक, दोनों क्षेत्रों में रियल एस्टेट हब बना दिया है। भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, गोवा, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापत्तनम और कोयंबटूर में 2016 से 2026 के बीच आवासीय कीमतें औसतन 8% सालाना बढ़ीं, जबकि शीर्ष आठ शहरों में यह वृद्धि 4% रही। 2047 तक रियल एस्टेट बाजार 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक रिपोर्ट के अनुसार 2047 तक देश के रियल एस्टेट क्षेत्र का कारोबार 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी 25 से 30 प्रतिशत यानी 1.4 से 1.7 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान इसके लिए रोजगार देने वाला बुनियादी ढांचा, विकसित जमीन, तेज मंजूरी और भरोसेमंद बिजली पानी जरूरी होंगे। सरकारी पूंजीगत खर्च में बुनियादी ढांचे की हिस्सेदारी है। वित्त वर्ष 2015 में 39 प्रतिशत थी, जो 2026 में 55 प्रतिशत हो गई। सरकार की तीन साल की सरकारी-निजी भागीदारी योजना में 17 लाख करोड़ रुपये की 852 परियोजनाएं हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि बढ़त अब महानगरों से आगे फैल रही है। निवेशकों और डेवलपर्स को हर बाजार की आर्थिक ताकत समझकर चुनिंदा तरीके से आगे बढ़ना होगा। गोदाम और शॉपिंग सेंटर में भी विस्तार 2025 में प्रमुख टियर-2 शहरों में 1.12 करोड़ वर्ग फुट गोदाम किराये पर गए। जयपुर, लखनऊ, नागपुर, इंदौर, कोयंबटूर और भुवनेश्वर की हिस्सेदारी करीब आधी यानी 53 लाख वर्ग फुट रही। देश के 32 शहरों में 365 शॉपिंग सेंटर हैं। इनमें 3.6 करोड़ वर्ग फुट जगह 24 टियर-2 शहरों में है। इसमें जयपुर समेत 10 शहरों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है। एक्सपर्ट बताते हैं कि 2011-12 में जिस जमीन का भाव 500 रुपए गज था वह आज 50 हजार रुपए प्रति गज तक पहुंच गई है।

स्मार्ट मीटर के बाद बदली बिजली बिल व्यवस्था, अब ‘बिजली मित्र’ ऐप से देख सकेंगे बिल

उदयपुर बिजली के स्मार्ट मीटर लगने के साथ ही अब घर-घर जाकर मीटर रिडिंग लेने की प्रक्रिया बंद की जा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिजली बिल की हार्ड कॉपी नहीं मिलेगी, बल्कि वे ऑनलाइन ही बिजली खपत देख सकेंगे। चाहे तो बिजली बिल डाउनलोड कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था की शुरुआत के लिए शहर के अशोकनगर, पावर हाउस प्रथम और द्वितीय का चयन किया गया है। इन सबडिविजन के 50 हजार उपभोक्ताओं को अगले माह से बिजली बिल नहीं मिलेंगे। अमूमन महीने की शुरुआत से करीब 15 दिन तक मीटर रीडिंग का काम ही चलता रहता है। ऐसे में उपभोक्ता को बिजली बिल जमा कराने के लिए कम ही समय मिल पाता है। नई व्यवस्था के तहत महीने की पहली तारीख को ही बिल जनरेट हो जाएगा। ऐसे में उपभोक्ता को बिल जमा कराने का भरपूर समय मिलेगा। इससे जहां बिजली निगम के कार्मिकों को आसानी होगी, वहीं उपभोक्ता को दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। 'बिजली मित्र' ऐप डाउनलोड करना जरुरी नई व्यवस्था के तहत बिजली बिल, खपत, भुगतान और शिकायतों से जुड़ी जानकारी के लिए उपभोक्ताओं को बिजली मित्र ऐप डाउनलोड करना होगा। बिजली मित्र ऐप उपभोक्ताओं को बिजली से जुड़ी कई सेवाएं मोबाइल पर उपलब्ध कराएगा। ऐप के जरिए वर्तमान और पुराने बिजली बिल देखे और डाउनलोड किए जा सकते हैं। साथ ही पिछले भुगतानों की जानकारी भी मिल सकेगी। धीरे-धीरे पूरे शहर में यही व्यवस्था लागू होगी। खपत पर भी रख सकेंगे नजर ऐप की मदद से उपभोक्ता पिछले महीनों की बिजली खपत देख सकते हैं। मासिक और औसत खपत की जानकारी मिलने से यह समझने में मदद मिलती है कि किस महीने बिजली का इस्तेमाल कितना बढ़ा या घटा। स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए 'माय स्मार्ट मीटर' सुविधा के जरिए प्रति घंटे, साप्ताहिक और मासिक खपत, रियल टाइम मीटर रीडिंग और ऑन-डिमांड रीडिंग जैसी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। बिल भुगतान और शिकायत की सुविधा ऐप से वर्तमान बिजली बिल का ऑनलाइन भुगतान किया जा सकता है। बिजली आपूर्ति, सुरक्षा, बिजली चोरी या अन्य तकनीकी समस्याओं से संबंधित शिकायत और सुझाव भी दर्ज किए जा सकते हैं। शिकायत दर्ज करने के बाद उसका स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकता है। ऐप पर नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। कई प्रक्रियाओं में कागजी दस्तावेज लेकर कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। डिजिटल ज्ञान नहीं तो परेशानी जिन उपभोक्ताओं को डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी होती है, उनके लिए इन सुविधाओं का लाभ लेना कठिन हो सकता है। एप की सुविधाएं कनेक्शन और मीटर की उपलब्ध सेवाओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। कई घरों में बुजुर्ग ही निवासरत हैं, जो डिजिटल या तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं, उन्हें बिल देखने में परेशानी आएगी। याद नहीं रखने पर भी बिजली उपभोक्ताओं को दिक्कत आ सकती है। इनका कहना है- 'अजमेर मुख्यालय से लिए गए निर्णय के अनुसार फिलहाल तीन सबडिविजन का चयन किया गया है। इन सबडिविजन के क्षेत्र में आने वाले उपभोक्ताओं तक रीडिंग के माध्यम से बिल नहीं पहुंचाए जाएंगे। वे मोबाइल के जरिये खुद ही खपत व बिल देख सकेंगे।' -केआर मीणा, एसइ, एवीवीएनएल उदयपुर सर्कल

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नगर निकाय चुनाव में भाजपा का दमदार प्रदर्शन

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मजबूत रणनीति और नेतृत्व से प्रदेश के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। जिससे नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं में कमल खिला। मुख्यमंत्री की अगुवाई और मार्गदर्शन में मिशन मोड पर यह चुनाव लड़ा गया। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष और विभिन्न मुख्यमंत्रियों ने राजस्थान में भाजपा के दमदार प्रदर्शन और जीत पर मुख्यमंत्री की रणनीति को सराहा और उनकी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव में टिकट वितरण में पार्टी और संगठन को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने चुनाव का मोर्चा खुद संभाला तथा बड़े नेताओं को संभागवार जिम्मेदारी दी और प्रतिदिन फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं चुनावी मैदान में उतरकर 10 नगर निगमों में रोड शो किए। निकाय चुनाव के परिणामों के बाद सभी पार्षदों को एकजुट रखा और निर्दलीयों को साधा। मुख्यमंत्री की इस रणनीति से कांग्रेस की जीत के दावे और उनकी पिक्चर फ्लॉप शो साबित हुई। उनकी अगुवाई में भरतपुर और डीग जिले की 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भाजपा ने अपना बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की और भरतपुर नगर निगम में भी निर्विरोध कमल खिलाया। जयपुर में लगातार सातवीं बार नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने एक बार फिर अपना निर्विवाद नेतृत्व साबित किया है। राजस्थान में इस बार एक साथ सभी 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद सहित 252 नगर पालिकाओं में चुनाव एक साथ हुए हैं। इन निकायों में दमदार जीत सरकार के ढाई साल के काम पर जनता की मोहर है। इससे पहले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए चुनाव में पिछले साल 7 में से 5 उपचुनाव में भाजपा जीती थी। आंकड़े बोलते हैं, फर्क साफ है – कांग्रेस राज (2018-23) में – मात्र 11 निकाय निर्विरोध – 3 भाजपा – 6 कांग्रेस – 2 निर्दलीय भाजपा राज (भजनलाल सरकार) में – 33 निकायों में निर्विरोध – – 30 भाजपा – 2 कांग्रेस – 1 भाजपा समर्थित 11 के मुकाबले 33 – जनता का भरोसा भाजपा के साथ, जयपुर का रोड शो रहा चर्चित – जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में मुख्यमंत्री के रोड शो ने राजधानी की जीत में अहम भूमिका निभाई। परकोटे से ही भाजपा के मेयर पद के प्रत्याशी सुनील कोठारी जीते हैं। मुख्यमंत्री ने रोड शो में परकोटे के लोगों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने लव जिहाद, धर्मांतरण कानून, डिस्टर्ब एरिया बिल, यूसीसी की चर्चा के साथ महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला। विपक्ष की रणनीति को किया फेल – कांग्रेस ने जातिगत समीकरण और होटल पॉलिटिक्स की रणनीति अपनाई, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सोशल इंजीनियरिंग और वन स्टेट-वन इलेक्शन की रणनीति के आगे विपक्ष की हर चाल फेल हो गई। कांग्रेस को पार्षदों को होटलों में बंद करना पड़ा, फिर भी पार्षद भागते रहे, जबकि भाजपा ने पहले ही 33 बोर्ड निर्विरोध बनाकर बढ़त ले ली।

जोधपुर में भारत-जापान की हवाई ताकत, वायुसेना प्रमुखों ने स्वदेशी तेजस में भरी उड़ान

जयपुर राजस्थान की सूर्यनगरी जोधपुर का एयरफोर्स स्टेशन 20 सितंबर 2026 को भारत और जापान के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों और सैन्य कूटनीति के एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना। भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच आयोजित द्विपक्षीय हवाई रक्षा अभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' (Exercise Veer Guardian 2026) के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल टेकहीरो मोरिटा ने भारत के पूरी तरह स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान LCA तेजस (LCA Tejas) में एक साथ आसमान में उड़ान भरी। किसी विदेशी वायुसेना प्रमुख द्वारा भारत में निर्मित फाइटर जेट में इस तरह सॉर्टी (Sortie) लगाना भारत के रक्षा विनिर्माण और 'मेक इन इंडिया' अभियान की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता के रूप में देखा जा रहा है। जोधपुर के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण एयरबेस पर 9 सितंबर से शुरू हुआ यह संयुक्त हवाई युद्धाभ्यास 22 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा। रविवार को अभ्यास की प्रगति और तैयारियों की समीक्षा करने के लिए जोधपुर पहुंचे दोनों मित्र देशों के वायुसेना प्रमुखों ने उड़ान भरने से पहले एयरबेस पर तैनात भारतीय और जापानी सैन्य दस्तों से मुलाकात की, उनका हौसला बढ़ाया और एक यादगार ग्रुप फोटो भी खिंचवाया। इसके बाद भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जापानी जनरल टेकहीरो मोरिटा ने स्वदेशी तेजस ट्रेनर विमान में बैठकर जोधपुर के आसमान में गर्जना की। स्वदेशी LCA तेजस में उड़ान और रक्षा कूटनीति का नया संदेश जोधपुर के एयर स्पेस में तेजस विमान द्वारा भरी गई यह उड़ान केवल एक साधारण अभ्यास सॉर्टी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत रणनीतिक संदेश छिपा हुआ है: भरोसे और तकनीकी क्षमता का प्रतीक: किसी विदेशी मित्र देश के वायुसेना प्रमुख का भारत के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस में सवार होकर उड़ान भरना भारतीय एयरोस्पेस इंजीनियरिंग पर दुनिया के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा: इस ऐतिहासिक सॉर्टी से भारतीय रक्षा उद्योग और तेजस विमान के निर्यात संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा प्रोत्साहन मिला है। चीफ्स की सीधी सहभागिता: दोनों वायुसेना प्रमुखों ने खुद कॉकपिट में बैठकर युद्ध कौशल और विमान की परिचालन क्षमताओं का जायजा लिया। 'वीर गार्जियन 2026' में कौन-कौन से आधुनिक फाइटर जेट्स दिखा रहे हैं दम? राजस्थान के पश्चिमी सीमांत क्षेत्र जोधपुर में आयोजित हो रहे इस 14 दिवसीय युद्धाभ्यास में दोनों देशों के सबसे आधुनिक और खतरनाक लड़ाकू विमान अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं: भारतीय वायुसेना (IAF): भारत की तरफ से स्वदेशी एलसीए तेजस (LCA Tejas), सुखोई (Su-30MKI) और अत्याधुनिक राफेल (Rafale) जैसे फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स इस युद्धाभ्यास में भाग ले रहे हैं। जापान एयरफोर्स (JASDF): जापानी वायुसेना अपने बेहद एडवांस F-2A लड़ाकू विमानों के साथ इस अभ्यास में हिस्सा ले रही है। ऐतिहासिक मील का पत्थर: यह पहला मौका है जब जापानी वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमानों को किसी द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के लिए भारतीय जमीन पर भेजा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और आपसी तालमेल बढ़ाना मुख्य मकसद 'वीर गार्जियन 2026' अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों मित्र राष्ट्रों की वायुसेनाओं के बीच अंतर-संचालन को मजबूत करना और जटिल हवाई युद्ध परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बिठाना है। जोधपुर में चल रहे इस अभ्यास से दोनों देशों के पायलटों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम युद्ध रणनीतियों, हवाई सुरक्षा तकनीकों और मेंटेनेंस प्रक्रियाओं को समझने का शानदार अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही, भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री व हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से भी भारत और जापान के बीच का यह रणनीतिक अभ्यास बेहद अहम माना जा रहा है। जोधपुर मिलिट्री बेस का सामरिक महत्व राजस्थान का जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति और विशाल एयरस्पेस के कारण भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय सामरिक ठिकानों में से एक है। पाकिस्तान सीमा के पास स्थित होने के कारण जोधपुर एयरबेस पर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े युद्धाभ्यास आयोजित होते रहते हैं। 'वीर गार्जियन 2026' के सफल आयोजन और दोनों देशों के प्रमुखों की इस ऐतिहासिक उड़ान से जोधपुर एक बार फिर से वैश्विक रक्षा कूटनीति का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।

राजस्थान में बढ़ रहा मधुमक्खी पालन, भरतपुर-टोंक में बनेंगे एक्सीलेंस सेंटर; निर्यात को मिलेगी रफ्तार

जयपुर राजस्थान में शहद अब सिर्फ मिठास नहीं, रोजगार और निर्यात का जरिया भी बन रहा है। देश-दुनिया में बढ़ती मांग के बीच राजस्थान में मधुमक्खी पालन तेजी से विस्तार ले रहा है। इसी संभावना को देखते हुए सरकार भरतपुर और टोंक में 17.5 करोड़ रुपए की लागत से मधुमक्खी एक्सीलेंस सेंटर तैयार कर रही है। यहां युवाओं को प्रशिक्षण, कॉलोनी व बॉक्स निर्माण, शहद की एक्सपोर्ट क्वालिटी तैयार करने और गुणवत्ता जांच जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। राजस्थान में 2.52 लाख से ज्यादा मधुमक्खी कॉलोनियां पंजीकृत हैं। देशभर में 16 हजार 788 पालक और संस्थाएं पंजीकृत हैं, जबकि कॉलोनियों की संख्या 24,92,101 है। ऐसे में मधुमक्खी पालन का दायरा अब छत्ते और शहद के उत्पादन से आगे बढ़ रहा है। युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण भी दोनों एक्सीलेंस सेंटर में पालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी के साथ कॉलोनी और बॉक्स तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इच्छुक युवाओं के लिए आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा भी होगी। तैयार शहद की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था भी यहीं होगी, ताकि उत्पाद घरेलू के साथ विदेशी बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके। अक्टूबर-नवंबर में कॉलोनी तैयार करने के अनुकूल मौसम को देखते हुए उद्यान विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग 5 हजार कॉलोनी बॉक्स के साथ किट भी वितरित करेगा। बढ़ता बाजार, राजस्थान के लिए अवसर देश में शहद उत्पादन 2014-15 के 80,530 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 1,51,690 मीट्रिक टन हो गया। इसी अवधि में निर्यात 29,600 मीट्रिक टन से बढ़कर 1,14,570.19 मीट्रिक टन पहुंच गया। भारत प्राकृतिक शहद के निर्यात में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। राजस्थान में शुरुआत भरतपुर, कोटा और श्रीगंगानगर तक सीमित थी, लेकिन अब 25 जिलों में मधुमक्खी पालन हो रहा है। सरसों में फूल आने के समय मधुमक्खियां छोड़ने से उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ता है। एक नजर में राजस्थान पंजीकृत मधुमक्खी पालक/संस्थाएं – 1197 पंजीकृत मधुमक्खी कॉलोनियां – 2,52,179 देश में हिस्सेदारी – करीब 10 फीसदी स्वीकृत परियोजनाएं – 584 राज्य के टॉप जिले जिला – कॉलोनियों की संख्या भरतपुर – 1,22,600 अलवर – 35,740 हनुमानगढ़ – 25,547 गंगानगर – 11,577 जहां फूल, वहीं मधुमक्खियों का डेरा मधुमक्खियां मौसम के साथ ठिकाना बदलती हैं। राजस्थान में पालक सालभर फूलों की उपलब्धता के अनुसार कॉलोनियां एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। नवंबर से जनवरी तक सरसों के खेत इनका प्रमुख ठिकाना रहते हैं। फरवरी-मार्च में धनिया और जंगली बबूल के फूलों के बीच पहुंचती हैं। अप्रेल-मई में रंजका और बरसीम के खेतों में इनका डेरा रहता है। 15 मई से जून तक फर्रुखाबाद और कन्रोज क्षेत्रों में मक्का-बाजरा के फूलों के बीच कॉलोनियां पहुंचती हैं। जुलाई से सितंबर तक भरतपुर-करौली के आसपास तिल और बाजरा के फूलों पर मधुमक्खियां मंडराती हैं। अक्टूबर में इनका कारवां ग्वालियर-शिवपुरी क्षेत्र में अजवाइन के खेतों तक पहुंच जाता है। कुछ पालक उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक कॉलोनियां लेकर जाते हैं। अभी भी राज्य की मधुमक्खियां भ्रमण पर हैं।

‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखी भारत-जापान की वायु शक्ति, पहली बार भारत में उड़े जापानी F-2A

 जोधपुर जोधपुर का आसमान इन दिनों भारत और जापान की वायु शक्ति के साझा अभ्यास का गवाह बन रहा है। ‘वीर गार्जियन 2026’ में भारतीय वायुसेना के तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल के साथ जापान के F-2A लड़ाकू विमान उड़ान भर रहे हैं। खास बात यह है कि जापानी लड़ाकू विमानों ने पहली बार भारत में इस द्विपक्षीय हवाई अभ्यास में हिस्सा लिया है। यही बदलाव इस साल के अभ्यास को पहले संस्करण से अलग और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। राजस्थान के जोधपुर में भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच चल रहा संयुक्त युद्धाभ्यास अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। 9 सितंबर से शुरू हुआ ‘वीर गार्जियन 2026’ 22 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमान युद्ध जैसी परिस्थितियों में हवाई अभियानों, मिशन प्लानिंग और आपसी तालमेल से जुड़ी प्रक्रियाओं का अभ्यास कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह 14 दिवसीय अभ्यास दोनों वायुसेनाओं की परिचालन क्षमता और आपसी समझ को मजबूत करने पर केंद्रित है। दोनों देशों के उन्नत लड़ाकू विमान ले रहे हैं हिस्सा इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना ने अपनी अग्रिम पंक्ति की ताकत उतारी है। स्वदेशी एलसीए तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल संयुक्त प्रशिक्षण का हिस्सा हैं। दूसरी तरफ जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स (JASDF) अपने F-2A लड़ाकू विमानों के साथ भारत पहुंची है। जापानी F-2 की मौजूदगी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह पहली बार है जब JASDF के लड़ाकू विमान भारत में ‘वीर गार्जियन’ अभ्यास में शामिल हुए हैं। इससे पहले ‘वीर गार्जियन’ का पहला संस्करण 2023 में जापान में हुआ था। उस समय भारतीय लड़ाकू विमानों ने जापानी धरती पर अभ्यास किया था। इस बार अभ्यास का आयोजन भारत में होने से दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण का दायरा एक कदम आगे बढ़ा है। जापानी F-2 विमानों का भारतीय बेस से संचालन इस सहयोग का एक प्रमुख नया पहलू माना जा रहा है। तकनीकी आदान-प्रदान और रणनीतिक सहयोग अभ्यास केवल आसमान में होने वाली उड़ानों तक सीमित नहीं है। दोनों पक्ष मिशन प्लानिंग कॉन्फ्रेंस, विशेषज्ञों के बीच संवाद, इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और एयरोस्पेस सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी अनुभव साझा कर रहे हैं। ऐसे आदान-प्रदान से दोनों वायु सेनाओं को एक-दूसरे की संचालन पद्धति और तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलता है। जापान के F-2A की भागीदारी का एक और पहलू इसका अलग परिचालन अनुभव है। F-2 जापान और अमेरिका के सहयोग से विकसित विमान है और इसे जापान की जरूरतों के अनुरूप व्यापक बदलावों के साथ तैयार किया गया। भारतीय विमानों के साथ इसके प्रशिक्षण से दोनों पक्षों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म के साथ हवाई अभियानों में समन्वय का अनुभव मिल रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘वीर गार्जियन 2026’ भारत-जापान के गहराते रणनीतिक और रक्षा सहयोग को दर्शाता है। अभ्यास का उद्देश्य केवल युद्धक कौशल को धार देना नहीं, बल्कि दोनों वायु सेनाओं के बीच बेहतर परिचालन तालमेल और पारस्परिक समझ विकसित करना भी है।

राजस्थान के 40 हजार परिवारों को मिलेगा PNG कनेक्शन, सरकार ने तय की 30 सितंबर की डेडलाइन

जयपुर  राजस्थान में सीएनजी सुविधा के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर तक प्रदेश में 60 नए सीएनजी स्टेशन शुरू किए जाएंगे। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं के साथ बैठक में इस लक्ष्य को तय समय में पूरा करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक गैस के नेटवर्क का विस्तार कर अधिक से अधिक परिवारों के साथ औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों को भी पाइप्ड नेचुरल गैस से जोड़ा जाना है। मुख्य सचिव ने कहा कि सीजीडी संस्थाएं उन क्षेत्रों में प्राथमिकता से डोमेस्टिक पाइप्ड नेचुरल गैस (डीपीएनजी) कनेक्शन उपलब्ध कराएं, जहां इसके लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य 30 सितम्बर तक 40 हजार नए परिवारों को डीपीएनजी सुविधा से जोड़ना है। उन्होंने एलपीजी से डीपीएनजी में शिफ्टिंग के लिए सीजीडी संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। राजस्थान में सीएनजी नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने की तैयारी है। मुख्य सचिव ने चालू वित्तीय वर्ष में 60 नए सीएनजी स्टेशन शुरू करने का लक्ष्य दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सीजीडी संस्थाओं को समयबद्ध कार्ययोजना बनानी होगी। सरकार का उद्देश्य सीएनजी की उपलब्धता बढ़ाकर प्रदेश में प्राकृतिक गैस आधारित परिवहन सुविधाओं का विस्तार करना है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक 23 नए सीएनजी स्टेशन शुरू किए जा चुके हैं। 40 हजार परिवारों को डीपीएनजी से जोड़ने का लक्ष्य सरकार के विशेष फोकस के चलते 30 सितम्बर तक 40 हजार नए परिवारों को डीपीएनजी सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार तीन माह में ही 30 हजार से अधिक नए परिवार डीपीएनजी सेवाओं से जुड़ चुके हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आधारभूत सुविधायुक्त क्षेत्रों में कनेक्शन देने को प्राथमिकता दी जाए। जिला स्तर पर जिला रसद अधिकारियों को सीजीडी संस्थाओं के साथ समन्वय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। औद्योगिक और व्यावसायिक कनेक्शन भी बढ़ेंगे प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार का फोकस केवल घरेलू कनेक्शनों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों को भी पीएनजी नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। राजस्थान स्टेट गैस के प्रबंध निदेशक विनय पाटनी के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 99 नए औद्योगिक और 314 व्यावसायिक पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इससे उद्योगों और कारोबारियों को पाइप्ड गैस सुविधा का लाभ मिलेगा। 13 सीजीडी संस्थाएं 17 क्षेत्रों में कर रहीं काम राज्य में 13 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाएं 17 जियोग्राफिकल क्षेत्रों में गैस नेटवर्क विकसित कर रही हैं। इन क्षेत्रों में डीपीएनजी, औद्योगिक एवं व्यावसायिक पीएनजी के साथ सीएनजी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मुख्य सचिव ने राजकीय आवासों को भी डीपीएनजी से जोड़ने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक परिवारों को प्राकृतिक गैस से जोड़ने के साथ हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक गैस नेटवर्क को गति देने पर जोर विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि ने बताया कि विभागीय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और सीजीडी संस्थाओं को आवश्यक सहयोग दिए जाने से डीपीएनजी कनेक्शनों में तेजी आई है। निदेशक पेट्रोलियम अवधेश सिंह ने भी बैठक में प्रगति की जानकारी दी। सरकार अब सीएनजी स्टेशनों के विस्तार के साथ घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक गैस नेटवर्क को गति देने पर जोर दे रही है।

राजस्थान में डिजिटल कनेक्टिविटी को रफ्तार, 4G सेचुरेशन और भारतनेट प्रोजेक्ट पर बड़ा फोकस

जयपुर  राजस्थान के दूरदराज, जनजातीय और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों तक हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में 18वीं स्टेट ब्रॉडबैंड कमेटी की बैठक हुई। इसमें डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार, राइट ऑफ वे नियम-2024 के क्रियान्वयन, 4जी सेचुरेशन परियोजना और केंद्र की पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना के तहत किए जा रहे सुधारों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि सीमांत, जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों में निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कनेक्टिविटी के अभाव में आमजन सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को लंबित कार्यों का मिशन मोड में निस्तारण करने के निर्देश दिए। आरओडब्ल्यू नियमों का समयबद्ध क्रियान्वयन मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 1 जनवरी 2025 से प्रभावी नए राइट ऑफ वे नियम-2024 को सभी नगरीय निकायों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 30 सितम्बर तक अनिवार्य रूप से अंगीकृत किया जाए। उन्होंने ऑफलाइन आवेदन व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर सभी प्रक्रियाएं राज्य आरओडब्ल्यू पोर्टल के माध्यम से संचालित करने को कहा। बैठक में बताया गया कि सात प्रमुख विभाग पहले ही राज्य आरओडब्ल्यू पोर्टल से जुड़ चुके हैं। 150 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का लक्ष्य बैठक में बताया गया कि 31 मार्च 2026 तक के सभी लंबित आरओडब्ल्यू आवेदनों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में आरओडब्ल्यू अनुमतियों के निस्तारण का औसत समय करीब 32 दिन है। मुख्य सचिव ने इसे 45 दिन से कम बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संशोधित भारतनेट परियोजना एडेंडम, कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म और समेकित बिलिंग व्यवस्था से जुड़ी शेष औपचारिकताएं समय पर पूरी करने को कहा, ताकि राज्य को विशेष सहायता योजना के तहत 150 करोड़ रुपए की पूरी प्रोत्साहन राशि मिल सके। 4जी सेचुरेशन परियोजना की समीक्षा के दौरान उदयपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर में मोबाइल टावरों के लिए लंबित राजस्व भूमि आवंटन को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को व्यक्तिगत रुचि लेकर मामलों का निस्तारण करने को कहा। बाड़मेर और श्रीगंगानगर सहित सीमावर्ती जिलों के अनकवर्ड गांवों को प्राथमिकता से नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया गया। दूरसंचार कंपनियों की समस्याओं के समाधान पर भी चर्चा बैठक में दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने स्थानीय निकायों द्वारा अस्वीकृत आवेदनों की प्रोसेसिंग फीस लौटाने पर विचार करने, स्मार्ट मीटरिंग और समूह बिलिंग को आसान बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल टावर स्थापना पर बिना विधिक सुनवाई या आधारहीन शिकायतों के आधार पर एकतरफा रोक नहीं लगाई जाए। ऐसे मामलों का निस्तारण आरओडब्ल्यू नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिला कलेक्टर स्तर पर किया जाए। स्मार्ट सिटी डक्ट और नगरपालिका क्षेत्रों में केबल बिछाने के शुल्कों को व्यावहारिक और मानकीकृत रखने पर भी जोर दिया गया।