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जयपुर: ई-चालान व्यवस्था सख्त, नकद भुगतान पूरी तरह खत्म

जयपुर  राजस्थान की सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। प्रदेश के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने ट्रैफिक चालान के भुगतान को लेकर एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। 27 अप्रैल को जारी एक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब राजस्थान में ट्रैफिक चालान का नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब अगर आपका चालान कटता है, तो आपको अनिवार्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से ही जुर्माना भरना होगा। भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शिता पर जोर सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य चालान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और मैनुअल हैंडलिंग को खत्म करना है। अक्सर सड़कों पर पुलिसकर्मी और वाहन चालकों के बीच लेन-देन को लेकर होने वाले विवाद और भ्रष्टाचार की शिकायतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अब हर ट्रांजेक्शन का एक डिजिटल रिकॉर्ड होगा, जिससे विभाग के पास सटीक डेटा रहेगा कि कितना जुर्माना वसूला गया और किस उल्लंघन के लिए वसूला गया। ITMS पोर्टल पर होगा भुगतान परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'वाहन मालिकों और चालकों को अब अपने ई-चालान का भुगतान सीधे ITMS (Intelligent Traffic Management System) पोर्टल के माध्यम से करना होगा।' इस ऑनलाइन सिस्टम से न केवल जुर्माना जमा करना आसान होगा, बल्कि अधिकारियों के लिए भी इसकी निगरानी करना सरल हो जाएगा। किसे मिला चालान काटने का अधिकार? नए नियमों के तहत अधिकारियों की शक्तियों में भी फेरबदल किया गया है। अब पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल और उससे ऊपर के रैंक के पुलिसकर्मी ही ट्रैफिक उल्लंघन पर चालान काटने के लिए अधिकृत होंगे। उनके साथ परिवहन विभाग के अधिकृत अधिकारी भी यह कार्रवाई कर सकेंगे। शिकायत निवारण के लिए नए प्रावधान अक्सर लोग गलत चालान कटने की शिकायत करते हैं, लेकिन उन्हें समाधान नहीं मिलता था। नई व्यवस्था में इसका भी ध्यान रखा गया है। अधिकारी ने बताया कि यदि किसी को अपने चालान को लेकर कोई आपत्ति या शिकायत है, तो इसके लिए नामित अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। ये अधिकारी शिकायतों की सुनवाई करेंगे, जिससे जनता के लिए विवाद सुलझाना आसान हो जाएगा। क्या अब राजस्व की चोरी रुकेगी? यह आदेश केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 के तहत लागू किया गया है। विभाग का मानना है कि इस डिजिटल शिफ्ट से न केवल राजस्व की चोरी रुकेगी, बल्कि जनता को भी रसीद कटवाने और दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। तो अब अगली बार जब आप घर से बाहर निकलें, तो सुनिश्चित करें कि आपके मोबाइल में डिजिटल पेमेंट की सुविधा चालू हो, क्योंकि अब राजस्थान की सड़कों पर 'नकद' की रसीद नहीं कटेगी।  

राजस्थान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, नागौर स्कूल में बच्चे कर रहे थे सफाई का काम

 नागौर  राजस्थान के नागौर जिले के एक सरकारी स्कूल से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां छोटे बच्चों से मिड-डे मील के बर्तन उठवाने और धुलवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संज्ञान लिया है और संबंधित स्कूल के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। यह घटना रियांबी उपखंड के दासावास गांव में स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। मिड-डे मील के ब्रेक के दौरान आराम करने या खाना खाने के बजाय, कई बच्चों को भारी स्टील के बर्तन उठाते और एक जगह से दूसरी जगह ले जाते देखा गया। इस फुटेज ने स्कूल में निगरानी और छात्रों के कल्याण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमरे में सोते दिखें शिक्षक चिंता की बात यह भी है कि उसी समय चार शिक्षक एक कमरे में सोते हुए पाए गए। स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं, जिनमें से घटना वाले दिन सात शिक्षक मौजूद थे। इसके बावजूद, बर्तनों को संभालने की जिम्मेदारी छात्रों पर ही आती दिखी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और वीडियो से यह भी पता चलता है कि प्रधानाध्यापक सोहनलाल फडोदा वहां मौजूद थे और अपनी कुर्सी पर बैठे थे, जबकि बच्चे काम कर रहे थे। उन्होंने न तो कोई दखल दिया और न ही कर्मचारियों को बच्चों को रोकने का कोई निर्देश दिया। कुछ बच्चों ने दावा किया कि यह कोई एक बार हुई घटना नहीं है, बल्कि यह उनके रोजाना के काम का ही एक हिस्सा है। मामले की जांच शुरू वीडियो वायरल होने के बाद, स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। घटना की जांच करने और दोषियों की पहचान करने के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है। SDM सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि हमें एक शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी रामलाल कराड़ी ने बताया कि यह मामला मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आया है और उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

पूछताछ के दौरान हड़कंप: बाड़मेर में आरोपी ने खुद को किया घायल, पुलिस ने कराया इलाज

बाड़मेर बाड़मेर महिला अपराध एएसपी कार्यालय में पॉक्सो एक्ट के आरोपी ने गला काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया. पुलिस उसको आनन-फानन में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां पर उसका इलाज कराया. आरोपी खून से लथपथ हो गया था. आरोपी ने भी कुछ नहीं बताया. पुलिस ने आरोपी का इलाज कराया, इसके बाद जेल भेज दिया. पॉक्सो का आरोपी गिरफ्तार जानकारी के अनुसार, बाड़मेर की महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, और महिला अपराध अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभुराम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. आज एएसपी कार्यालय में जांच में पूछताछ के दौरान युवक ने अपना गला काट लिया. उसके बाद पुलिस के हाथ पांव फूल गए, और तुरंत उसको घायल अवस्था में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल ले गए. चिकित्सकों ने उसका इलाज किया, उसके बाद पुलिस ने उसे अस्पतावापस ASP कार्यालय लेकर आ गई है. कुछ बोलने से पुलिस का इनकार इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल पहुंचे महिला अपराध अनुसंधान सेल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभु राम ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार कर दिया. आरोपी युवक भी मीड‍िया के सामने कुछ नहीं बोला.   बाड़मेर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निर्देश आर्य का कहना है कि महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश कुमार पुत्र दालाराम निवास गांधीनगर को गिरफ्तार किया था, जिसको आज फिंगरप्रिंट लेने के दौरान टेबल पर रखे पेपर कटर से खुद की गर्दन पार वार कर दिया था. उसके बाद जाब्ते ने उसे अस्पताल ले जाकर ईलाज करवाया, अब उसको जेल भेज दिया है. लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ जांच करवाई जा रही है.

राजस्थान में वन्यजीव सर्वे का नया तरीका, चांदनी रात और कैमरा ट्रैप से होगी गिनती

चित्तौड़गढ़ राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों और परंपराओं पर भी दिखने लगा है. चित्तौड़गढ़ जिले के जंगलों में इस साल 1 मई से शुरू होने वाली वन्यजीव गणना (Wild Life Census) बेहद खास होने वाली है, क्योंकि वन विभाग ने दशकों से चली आ रही परंपरा को बदलते हुए गणना के समय में बड़ा बदलाव किया है. सुबह नहीं, शाम से होगी शुरुआत आमतौर पर वन्यजीवों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होती थी, लेकिन इस बार झुलसा देने वाली गर्मी को देखते हुए वन विभाग ने नया प्लान तैयार किया है. चित्तौड़गढ़ की जिला उप वन संरक्षक मृदुला सिन्हा ने बताया कि पहली बार यह गणना सुबह के बजाय 1 मई को शाम 5 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 2 मई को शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटे चलेगी. यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण का सटीक डेटा मिल सके, क्योंकि गर्मी के कारण जानवर दिन में बाहर निकलने से कतरा रहे हैं. चांदनी रात में 'वॉटरहॉल' तकनीक का सहारा यह गणना बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित की जा रही है. पूर्णिमा की दूधिया चांदनी में वन कर्मियों को बिना किसी कृत्रिम रोशनी या टॉर्च के वन्यजीवों को देखने में आसानी होती है. इसके लिए दो मुख्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पहली वॉटरहॉल तकनीक. चूंकि गर्मी में जानवर पानी पीने जलस्रोतों पर जरूर आते हैं, इसलिए सीतामाता सेंचुरी में 47 और बस्सी सेंचुरी में 24 पानी के कुंड चिह्नित किए गए हैं. वहीं दूसरी, हाई-टेक निगरानी तकनीक. रात के अंधेरे में सक्रिय रहने वाले पैंथर और दुर्लभ उड़न गिलहरी की सटीक पहचान के लिए सीतामाता में 22 और बस्सी में 14 अत्याधुनिक 'कैमरा ट्रैप' लगाए गए हैं. मचान पर 24 घंटे 'पहरा' जंगल के नालों और केनाल के पास विशेष मचान बनाए गए हैं, जहां वन विभाग की टीमें तैनात रहेंगी. एसीएफ राम मोहन मीणा और एसीएफ यशवंत कंवर के निर्देशन में कर्मचारियों को पदचिह्नों (Pugmarks) की पहचान और कैमरा ट्रैप प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग दी गई है. मचान पर बैठने वाले स्टाफ के लिए भोजन और पानी का इंतजाम भी विभाग द्वारा किया गया है.

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कार में आग, राजस्थान में एक ही परिवार के पांच लोग जिंदा जल गए

अलवर   राजस्थान के अलवर में कार में आलग लगने से एक ही परिवार के 5 लोग जिंदा गए। यह घटना बुधवार रात अलवर जिले में लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई। बताया जा रहा है कि यह आग सीएनजी लीक होने की वजह से लगी। पुलिस के अनुसार, पीड़ित मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के चैनपुरा गांव के रहने वाले थे। यह परिवार वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करके घर लौट रहा था और उन्होंने इस यात्रा के लिए एक टैक्सी किराए पर ली थी। जब गाड़ी मौजपुर पहुंची, तो अचानक सीएनजी गैस लीक होने की खबर मिली, जिससे तुरंत आग लग गई और पूरी कार लपटों की चपेट में आ गई। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को बचने का कोई मौका ही नहीं मिला। इस भयानक घटना में तीन महिलाएं, एक पुरुष और एक छोटी बच्ची जिंदा जल गए। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि शव जलकर राख हो गए। गाड़ी का ड्राइवर बड़ी मुश्किल से बच निकला, लेकिन उसे गंभीर रूप से जलने की चोटें आई हैं। उसे पहले स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया और बाद में जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उसका अभी इलाज चल रहा है। सूचना मिलते ही, लक्ष्मणगढ़ पुलिस दमकल की गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंची। आग बुझाने वाली एक गाड़ी तैनात की गई और आग पर काबू पाने की कोशिशें की गईं। हालांकि, जब तक आग बुझाई गई, तब तक पांचों यात्री आग की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके थे। लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना प्रभारी नेकी राम ने पुष्टि की कि गाड़ी सीएनजी और पेट्रोल दोनों पर चल रही थी और आग लगने का कारण गैस लीक होना माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएनजी से लगी आग की तीव्रता बहुत ज्यादा होती है। आग से शव पूरी तरह से नष्ट हुए, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। पीड़ितों की पहचान के लिए डीएनए जांच करने के लिए मौके पर एक मेडिकल टीम बुलाई गई। परिवार के सदस्यों को इस घटना के बारे में सूचित कर दिया गया।पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी भी देर रात स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, वैष्णो देवी से लौट रहा परिवार खत्म

अलवर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना अंतर्गत मौजपुर के चैनल नंबर 115/300 के पास चलती कार में सीएनजी लीकेज होने से लगी आग में एक ही परिवार के 5 लोग जिंदा जलकर राख हो गए. इस घटना में चालक भी बुरी तरह झुलस गया, जिसे जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में इलाज कराया गया है. यह घटना रात देर रात करीब 11 बजे हुई. सूचना पर मौके पर पहुंची लक्ष्मणगढ़ पुलिस और दमकल गाड़ी से आग पर काबू पाने की प्रयास किए गए. आग कि सूचना के बाद अलवर से पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी और डीएसपी कैलाश जिंदल मौके पर पहुंचे.  वैष्णो देवी से लौट रहा था परिवार पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के चैनपुरा गांव निवासी एक परिवार वैष्णो देवी के दर्शन करके वापस अपने घर लौट रहे थे. परिवार इस गाड़ी को किराए पर लेकर आया था, जैसे ही यह अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के मौजपुर में पहुंचे. वहां अचानक सीएनजी गैस का रिसाव हो गया और रिसाव इतना तेज था कि तुरंत ही आग लग गई और आग के चलते गाड़ी में सवार सभी लोग जिंदा जल गए. घटना के समय सभी सो रहे थे आग का गोला बनने के बाद किसी भी सवार को बचाने का मौका नहीं दिया. बताया जा रहा है गाड़ी में सवार परिवार नींद में थे. अगर जगे हुए होते तो शायद चालक की तरह वो बाहर निकल पाते. श्योपुर निवासी चालक विनोद कुमार बड़ी मुश्किल से उसमें निकाल पाया. वो भी काफी जल गया. जिसे पुलिस द्वारा एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर के लिए रेफर किया गया. जहां उसका इलाज चल रहा है. रात 11 बजे हुआ हादसा लक्ष्मणगढ़ की थाना प्रभारी नेकी राम ने बताया कि यह बीती रात करीब 11 बजे के आसपास हुई. टैक्सी पर यह परिवार गाड़ी लेकर आया था. ये श्योपुर के चैनपुर निवासी हैं. सीएनजी और पेट्रोल से चलने वाली इस गाड़ी में गैस रिसाव के कारण यह आग लगी. आग इतनी भयानक थी कि इसमें किसी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. इस हादसे में दो महिलाए, एक पुरुष और दो बच्ची जिंदा जलकर राख हो गए. उनके कंकाल भी नहीं बचे हैं. चालक गरीब 80 फ़ीसदी झुलस गया है, उसे पहले पिनान के अस्पताल ले लाया गया. जहां से हालत खराब होने पर उसे तुरंत जयपुर के लिए रेफर कर दिया गया. मौके पर ही मेडिकल टीम को बुलाया गया है, जिससे डीएनए सैंपल ले लिया गया. उनकी पहचान की गई. DNA टेस्ट में शवों की होगी पहचान मृतकों में परिवार का मुखिया संतोष ( 35 साल) उसकी पत्नी शशि, सास पार्वती और पुत्री रागिनी पुत्री संतोष व साक्षी पुत्री संतोष के रूप में हुई है. पुलिस ने बताया कि परिवार जनों को सूचना दे दी गई है. रात को ही दो दमकल मौके पर बुलाई गई थी. जिसे आग पर काबू पाया आग बुझाने से पहले ही चालक को छोड़कर सभी सवार आग की भेंट चढ़ गए. लक्ष्मणगढ़ सीएचसी के डॉक्टर अमित गुप्ता ने बताया कि डीएनए टेस्ट से मृतकों की पहचान होगी. शव पूरी तरह से राख़ बन चुके हैं. मेडिकल बोर्ड से परिजनों के आने के बाद उनके पोस्टमार्टम में आगे की प्रक्रिया की जाएगी.

SOG की बड़ी कार्रवाई: अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए सरकारी नौकरी का रैकेट फेल

 अजमेर अजमेर में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी पाने के चर्चित मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रूल को गिरफ्तार कर लिया है. इससे पहले इस मामले में पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा को भी पकड़ा जा चुका है, जिनसे पूछताछ के आधार पर यह कार्रवाई की गई. अब तक 11 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार एसओजी के एडिशनल एसपी श्याम सुंदर विश्नोई के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बताया जा रहा है कि आरोपी को जयपुर से पकड़कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के रिमांड पर भेजा गया है.. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फर्जी डिग्रियों पर अंतिम साइन भी आरोपी ही करता था और वह कमीशन के आधार पर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था. पुलिस अब पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. RPSC भर्ती में फर्जी डिग्री का खेल मामले की जांच लोकसेवा आयोग की शिकायत के बाद शुरू हुई थी. आयोग ने बताया था कि स्कूल लेक्चरर (हिंदी) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में चयनित दो युवतियों ने आवेदन के समय वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की डिग्री बताई, लेकिन बाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की. जांच में सामने आया कि दोनों ने एमए की फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल की. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि उन्हें ये डिग्रियां उनके परिजनों के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थीं. इसके बाद एसओजी ने सरकारी शिक्षक दलपत सिंह और डॉक्टर सुरेश विश्नोई सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह है जो फर्जी डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरियां दिलाने का काम कर रहा था. मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.

राजस्थान का पहला एयरपोर्ट, जल संरक्षण में जयपुर इंटरनेशनल ने रचा इतिहास

जयपुर जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने 'वॉटर पॉजिटिव' का दर्जा हासिल किया है, जो सतत (सस्टेनेबल) संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम है.  इस उपलब्धि के साथ जयपुर एयरपोर्ट भारत के चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है, और राजस्थान का पहला एयरपोर्ट बन गया है, जिसने यह मान्यता प्राप्त की है. यह प्रमाण ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनी ब्यूरो वेरिटास ने एयरपोर्ट की जल प्रबंधन प्रणाली के विस्तृत मूल्यांकन के बाद दिया है. वॉटर पॉजिटिव एयरपोर्ट के रूप में, जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपनी प्रभावी जल प्रबंधन व्यवस्था के जरिए जितना पानी उपयोग करता है, उससे अधिक पानी का संरक्षण रीसायक्लिंग एवं पुनर्भरण के माध्यम से करता है. 18 गहरे एक्वीफर रिचार्ज पिट्स स्थापित   जल संकट वाले क्षेत्र में स्थित जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हमेशा से ही जिम्मेदार प्रबंधन, परिचालन स्थिरता और दीर्घकालिक स्थिरता के माध्यम से जल के कुशल प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध रहा है. पिछले कुछ वर्षों में, हवाई अड्डे ने जल के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसी दिशा में वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए 18 गहरे एक्वीफर रिचार्ज पिट्स भी स्थापित किए गए हैं. 100% ट्रीटेड पानी का रीसायकल इस उपलब्धि पर जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रवक्ता ने कहा, "यह उपलब्धि एयरपोर्ट के लगातार प्रयासों का परिणाम है, जो वॉटर पॉजिटिव बनने की दिशा में किए गए हैं.  इस प्रमाणन के पीछे तीन मुख्य आधार है, 100% ट्रीटेड पानी का रीसायकल और पुनः उपयोग, ताजे पानी की खपत में कमी करना, और प्रभावी  वर्षा जल संचयन व्यवस्था." एयरपोर्ट ने सेंसर आधारित नल लगाए जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट 100% अपशिष्ट पानी (wastewater) को रीसायकल कर उसे बागवानी और हरियाली में उपयोग करता है. पानी की खपत कम करने के लिए एयरपोर्ट ने सेंसर आधारित नल लगाए हैं, और वॉटरलेस यूरिनल जैसी तकनीकों को अपनाने पर काम कर रहा है. इसके अलावा, पानी के उपयोग की निगरानी के लिए डिजिटल वॉटर फ्लो मीटर भी लगाए गए हैं, जिससे जल प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सके.

युवा खिलाड़ियों को मिलेगा विदेश में ट्रेनिंग का मौका, RCA की नई पहल

जयपुर  राजस्थान के उभरते हुए क्रिकेट सितारों के लिए एक सुनहरा दौर शुरू होने वाला है. अब हमारे प्रदेश के बच्चे न सिर्फ देश की पिचों पर अपना जलवा बिखेरेंगे, बल्कि सात समंदर पार जाकर विदेशी जमीन पर क्रिकेट के गुर भी सीखेंगे. राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) ने डेनमार्क के साथ एक ऐसी 'ऐतिहासिक डील' की है, जो आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के भविष्य को बदल सकती है. डेनमार्क और राजस्थान के बीच 'क्रिकेट दोस्ती' मंगलवार शाम डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन और RCA एडहॉक कमेटी के बीच एक बेहद खास मुलाकात हुई. इस बैठक का नतीजा यह निकला कि अब राजस्थान और डेनमार्क के बीच क्रिकेट एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है. यह संभवतः भारत के क्रिकेट इतिहास में अपनी तरह की पहली पहल है, जहां एक राज्य की क्रिकेट बॉडी सीधे किसी दूसरे देश के साथ इस स्तर का करार कर रही है. इस समझौते की 3 बड़ी बातें आसान शब्दों में समझें राजस्थान के नन्हे क्रिकेट खिलाड़ी (विशेषकर अंडर-19 पुरुष और महिला टीम) ट्रेनिंग और मैच खेलने के लिए डेनमार्क जाएंगे. इतना ही नहीं, डेनमार्क के खिलाड़ी भी राजस्थान आएंगे, जिससे दोनों तरफ के बच्चों को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का अनुभव मिलेगा. इससे खिलाड़ियों को विदेशी कोचिंग और खेल की नई तकनीकों को समझने का मौका मिलेगा. क्यों खास है यह पहल? RCA एडहॉक कमेटी के संयोजक डॉ. मोहित जसवंत यादव और सदस्य आशीष तिवाड़ी के प्रयासों से यह डील मुमकिन हुई है. आशीष तिवाड़ी ने बताया कि डेनमार्क के राजदूत सवाई मान सिंह स्टेडियम (SMS Stadium) की सुविधाओं को देखकर काफी प्रभावित हुए. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही डेनमार्क क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) के साथ मिलकर इसे एक औपचारिक समझौते का रूप देंगे.

राजस्थान में साइबर क्राइम और एंटी नारकोटिक्स के DSPs की नई पोस्टिंग

जयपुर राजस्थान में पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. बुधवार को प्रदेशभर में 52 उप पुलिस अधीक्षक (DSP) को ट्रांसफर का आदेश थमा दिया गया है. पुलिस निरीक्षक के पद से पदोन्नत हुए 52 उप पुलिस अधीक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का आदेश जारी किया गया है. यह आदेश डीजीपी ऑफिस, जयपुर की तरफ से जारी किया गया है. डीजीपी ऑफिस के आदेश में कहा गया कि पुलिस निरीक्षक से पदोन्नत अधिकारियों का तत्काल प्रभाव ट्रांसफर और पोस्टिंग किया जाता है. रामनिवास मीणा का साइबर क्राइम, अलवर की जिम्मेदारी अजयकांत राठौड़ को पुलिस आयुक्तालय जयपुर से पदोन्नत कर उप पुलिस अधीक्षक, सीआईडी (एसएसबी), मुख्यमंत्री सुरक्षा प्रकोष्ठ, जयपुर लगाया गया है. वहीं, नरेन्द्र कुमार को उप पुलिस अधीक्षक, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, जयपुर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा रामनिवास मीणा को अलवर में साइबर क्राइम के उप पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है. नरपत सिंह ACB जयपुर में बने डिप्टी एसपी रविन्द्र कुमार को उप पुलिस अधीक्षक, राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर में पोस्टिंग दी गई है. DSP के ट्रांसफर लिस्ट में नरपत सिंह चारण को जयपुर एसीबी में डिप्टी एसपी के पद पर लगाया गया है. वहीं, मुकेश शर्मा को भी राजस्थान पुलिस अकादमी के उप पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात किया गया है. महावीर सिंह यादव को उप पुलिस अधीक्षक, एसओजी, जयपुर पद पर जिम्मेदारी सौंपी गई है. मदन लाल को प्रतापगढ़ जिले में साइबर क्राइम का डिप्टी एसपी बनाया गया है. इसके अशोक चौधरी को भी डिप्टी एसपी बनाकर जयपुर एसआईटी में भेजा गया है. आनंद कुमार को श्रीगंगानगर जिले में साइबर क्राइम में डिप्टी एसपी के पद पर ट्रांसफर हुआ है. बुद्धराम को बाड़मेर साइबर क्राइम, पुरुषोत्तम महरिया को भरतपुर जिले में साइबर क्राइम और निरंजन प्रताप सिंह को जालोर जिले में साइबर क्राइम का उप पुलिस अधीक्षक बनाया गया है.