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हेल्थ और बच्चों का भविष्य साथ-साथ: रेडक्रॉस का डबल प्लान, हरियाणा में किफायती लैब शुरू

चंडीगढ़ हरियाणा में आमजन को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। हरियाणा रेडक्रास सोसायटी ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत क्लीनिकल लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन लैब्स में लोगों को बेहद रियायती दरों पर विभिन्न मेडिकल जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सोसायटी के वाइस चेयरमैन अंकुश मिगलानी ने चंडीगढ़ में जानकारी देते हुए बताया कि सिविल अस्पतालों में आमजन को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधा देने के उद्देश्य से जिला स्तर पर लैब खोलने का फैसला लिया गया है। इस पहल से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, रेडक्रास सोसायटी ने जूनियर रेडक्रास कैंप से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूत करने का निर्णय लिया है। कैंप के लिए मिलने वाली राशि को सीधे बच्चों की सुविधाओं और उनके विकास पर खर्च किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 13 जिलों के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें संबंधित जिलों का दौरा करेंगी, जूनियर रेडक्रास कैंप की गतिविधियों का निरीक्षण करेंगी और बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को समझेंगी। इस पहल को स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

राइस मिलर्स के लिए खुशखबरी: बिना फोर्टिफाइड चावल की भी होगी सरकारी खरीद

कैथल. हरियाणा में कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति करने वाले राइस मिलरों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। चावल में एक प्रतिशत फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) के मिलान में छूट दे दी गई है। पहले 100 किलोग्राम चावल में एक किलोग्राम एफआरके का मिलान करना जरूरी था। राइस मिलर्स को इसमें परेशानी आ रही थी, क्योंकि प्रदेश में एफआरके की सप्लाई के लिए तीन राइस मिलों को ही टेंडर मिला था और वे इसकी पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रहे थे। राइस मिलर अपनी इच्छानुसार फोर्टिफाइड या गैर-फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और अन्य खरीद एजेंसियों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दे दी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं के तहत जब तक फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति ज्यादा मात्रा में उपलब्ध नहीं होती, इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। प्रदेश में करीब 1350 राइस मिलरों को सीएमआर नीति के अनुसार चावल धान दिया गया था। 67 प्रतिशत चावल देना अनिवार्य है। मिल मालिकों को 59.41 लाख टन धान दिया गया था।केंद्र सरकार ने फैसला ले दी बड़ी राहत, 40 प्रतिशत चावल दे चुके मिलर lएफआरके की आपूर्ति कम होने से राइस मिलरों को आ रही थी परेशानी पहले एफआरके के भंडार की व्यवस्था होगी केंद्र और प्रदेश सरकार पहले मौजूदा फोर्टिफाइड चावल (एफआरके) के भंडार का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अच्छे तरीके से तैयारी करेंगी। इसके बाद इसे लागू करने का फैसला लिया जा सकता है। चावल डिलीवरी का पहले यह था शेड्यूल नई नीति के तहत मिल मालिकों को दिसंबर तक सीएमआर का 15 प्रतिशत, जनवरी के अंत तक 25 प्रतिशत, फरवरी के अंत तक 20 प्रतिशत, मार्च के अंत तक 15 प्रतिशत, मई के अंत तक 15 प्रतिशत और शेष 10 प्रतिशत जून के अंत तक लगाना होता है। केंद्र सरकार ने एफआरके नियमों में छूट दी है, जिन राइस मिलर के पास एफआरके उपलब्ध है, चावल में मिलाकर कर अपनी गाड़ियां एफसीआई को भेज सकते हैं। जिनके पास उपलब्ध नहीं है, वे भी बिना एफआरके चावल दे सकते हैं। इससे राइस मिलर्स को बड़ी राहत मिली है। -अमरजीत छाबड़ा, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन पोषक तत्वों से भरपूर होता है एफआरके फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) सूक्ष्म पोषक तत्वों (आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन) से भरपूर चावल होता है। जिन्हें ‘एक्सट्रूज़न’ तकनीक से चावल के आटे के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। सामान्य चावल के साथ 1:100 में मिलाकर यह कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में वितरित किया जाता है। सूखे चावल को पीसकर पाउडर बनाया जाता है, जिसमें पोषक तत्व मिलाकर, मशीन द्वारा चावल के रूप में आकार दिया जाता है। इसमें मुख्य रूप से आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन शामिल होते हैं। 100 किलोग्राम सामान्य चावल में एक किलोग्राम एफआरके मिलाया जाता है। यह चावल सामान्य चावल जैसा होता है और खाने में भी अच्छा होता है। चावल लौटाने में अंबाला अव्वल अंबाला को छोड़ किसी भी जिले के मिल मालिकों की ओर से सरकार को चावल देने का निर्धारित लक्ष्य हासिल करना तो दूर उसके आसपास भी चावल वापस नहीं किया। प्रदेश भर में कुल 41,62,553.93 एमटी चावल (सीएमआर) देना है लेकिन 12,72,293.18 एमटी ही एफसीआई तक पहुंचा है। करीब 61.72 प्रतिशत के साथ अंबाला राज्य में नंबर वन है। करनाल 15.69, कुरुक्षेत्र 33.65 प्रतिशत, पानीपत 1.02 प्रतिशत और रोहतक में 6.2 प्रतिशत चावल की डिलीवरी हुई है। पंचकूला ने 52.26 प्रतिशत की प्रगति दिखाई है, जिसकी मिलिंग अंबाला के ही अधीन आती है। यमुनानगर (31.63), कैथल (30.79) और फतेहाबाद (28.27) भी औसत हैं। यमुनानगर 31.63 प्रतिशत, कैथल 30.79 प्रतिशत और फतेहाबाद 28.27 प्रतिशत पर हैं। 30 जून तक चावल लौटाना है। अंबाला में करीब 61 प्रतिशत सीएमआर की डिलीवरी हो चुकी है जोकि प्रदेश में नंबर वन है। बिना एफआरके चावल डिलीवरी की अनुमति दे दी गई है। इसका प्रयोग इथेनाल निर्माण के लिए केवल फैक्ट्रियों में किया जाना है। -निशांत राठी, डीएफएससी। गेहूं भंडारण की सता रही चिंता प्रदेश में लगभग 28,90,260 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी अभी बाकी है। गोदाम खाली नहीं हुए तो नई फसल के भंडारण के लिए जगह का संकट खड़ा हो सकता है।

नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज: कुरुक्षेत्र में 50 लाख का चूरापोस्त जब्त, 2 आरोपी पकड़े गए

पिहोवा/अमृतसर. पुलिस के एंटी नारकोटिक सेल ने नशा तस्करी के आरोप में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से भारी मात्रा में चूरापोस्त भी बरामद हुआ है। आरोपितों की पहचान हिमाचल प्रदेश के चंबा निवासी सतपाल और सोलन निवासी जीतराम के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ इस्माईलाबाद थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि 19 मार्च को एंटी नारकोटिक्स सेल प्रभारी उप निरीक्षक सतविंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम एनएच-152 पर गांव टबरा के पास गश्त पर मौजूद थी। इसी दौरान गुप्त सूचना मिली कि हिमाचल प्रदेश के चंबा निवासी सतपाल और सोलन निवासी जीतराम कैंटर में भारी मात्रा में डोडा-चूरापोस्त लेकर आ रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने जलबेहड़ा के पास नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की। कुछ देर बाद संदिग्ध कैंटर आता दिखाई दिया तो उसे रोक कर जांच की। चालक ने अपना नाम सतपाल और क्लीनर ने जीतराम बताया। राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में तलाशी लेने पर कैंटर से 6 क्विंटल 92 किलो 907 ग्राम चूरापोस्त बरामद हुआ, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने दोनों के एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।

हरियाणा में बेटियों के लिए खास पहल: नवरात्र में मिलेगा सम्मान, CMO करेगा तारीख का ऐलान

चंडीगढ़. हरियाणा में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान से वंचित रही बेटियों को अब नवरात्र में पुरस्कार मिलने की उम्मीद जगी है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जल्द ही समय मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सिरसा में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय योगदान देने वाली महिलाओं और बेटियों को सम्मानित किया जाना था। सभी चयनित महिलाओं को सात मार्च को जिला मुख्यालयों से सूचित भी कर दिया गया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उन्हें सम्मानित करेंगे। बेटियां परिवार के साथ इस कार्यक्रम में पहुंचने की तैयारी में थी कि कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले करीब 100 बेटियों और महिलाओं को सम्मानित करने के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। तब बताया गया कि चंडीगढ़ में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री उन्हें सम्मानित करेंगे। इसके बाद से ही पुरस्कार के लिए चयनित महिलाएं नए कार्यक्रम का इंतजार कर रही हैं, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। चूंकि अब नवरात्र का समय है, ऐसे में बेटियों को सम्मानित किया जाना एक खास मौका होगा। इस संबंध में कई अभिभावकों ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी है।

Haryana Board Update: त्रि-भाषाई फॉर्मूले के साथ 9वीं-10वीं में 7 विषय होंगे जरूरी

भिवानी. हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने राज्य के स्कूलों में त्रि-भाषाई फॉर्मूला लागू करने के साथ ही कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए परीक्षा उत्तीर्णता यानी पास क्राइटेरिया के नए नियम तय कर दिए हैं। ये बदलाव कक्षा 9वीं में सत्र 2025-26 से और कक्षा 10वीं में सत्र 2026-27 से प्रभावी होंगे। अब सात विषय और बेस्ट सिक्स फार्मूला लागू बोर्ड के अनुसार, त्रि-भाषाई व्यवस्था लागू होने के बाद अब छात्रों को कुल सात विषय पढ़ने होंगे। पहले जहां बेस्ट फाइव फॉर्मूला लागू था, वहीं अब उसकी जगह बेस्ट सिक्स फॉर्मूला लागू होगा। विद्यार्थियों का परिणाम सात में से छह विषयों के आधार पर तैयार किया जाएगा। यह नया नियम नए बदलाव लेकर आ रहा है। संस्कृत, उर्दू, पंजाबी बनी अनिवार्य भाषा नई व्यवस्था के तहत छात्रों को संस्कृत, उर्दू या पंजाबी में से किसी एक भाषा का चयन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पहले लागू नियम, जिसमें संस्कृत के जरिए हिन्दी विषय में फेल होने की स्थिति को समायोजित किया जाता था, अब समाप्त कर दिया गया है। आईटीआई छात्रों के लिए भी नियम सख्त बोर्ड ने आठवीं के आधार पर आईटीआई करने वाले छात्रों के लिए भी नियमों में बदलाव किया है। अब कक्षा 10वीं के समकक्ष प्रमाणपत्र के लिए छात्रों को दो के बजाय तीन भाषाएं हिन्दी, अंग्रेजी और एक वैकल्पिक भाषा संस्कृत, उर्दू, पंजाबी उत्तीर्ण करनी होगी। मुक्त विद्यालय में भी लागू होंगे नियम यह नया त्रि-भाषाई फार्मूला केवल नियमित छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा मुक्त विद्यालय के विद्यार्थियों पर भी समान रूप से लागू किया जाएगा। कम्पार्टमेंट नियम में कोई बदलाव नहीं हालांकि विषयों की संख्या बढ़कर सात हो गई है, फिर भी कम्पार्टमेंट, पूरक परीक्षा से संबंधित नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक या दो विषयों में असफल रहने वाले छात्र पहले की तरह कम्पार्टमेंट श्रेणी में ही रहेंगे। कौशल विषय का लाभ जारी रहेगा बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कौशल विषय का लाभ पहले की तरह जारी रहेगा। कोई छात्र गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में अनुत्तीर्ण होता है, तो कौशल विषय के अंक से उसे समायोजित किया जा सकेगा। इन नए नियमों के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे छात्रों को बहुभाषी शिक्षा का लाभ मिलेगा, वहीं परीक्षा प्रणाली भी अधिक व्यापक और संतुलित हो सकेगी। दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए भाषा नियम में रहेगी छूट दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए भाषा छूट नियम में बदलाव किया गया है। अब त्रि-भाषा प्रणाली के तहत केवल एक भाषा में छूट मिलेगी। छात्रों को हिन्दी, अंग्रेजी और एक अन्य भाषा में से दो का चयन करना होगा। सभी विद्यालयों को निर्देश लागू करने के आदेश दिए गए हैं। सुधार के लिए भी कारगर साबित होगा – त्रिभाषा फार्मूला के तहत यह बदलाव किया गया है। यह हरियाणा मुक्त विद्यालय के विद्यार्थियों पर भी लागू होगा। यह बदलाव परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए भी कारगर साबित होगा। – डॉ. पवन कुमार, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड

‘अभेद्य’ ऐप से बदलेगा खेल! हरियाणा पुलिस की नई पहल से रंगदारी कॉल्स पर रोक

चंडीगढ़ हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध, धमकी भरे कॉल्स और रंगदारी (Extortion) की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से ‘अभेद्य’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। यह देश में अपनी तरह का पहला मोबाइल आधारित सुरक्षा प्लेटफॉर्म है, जो नागरिकों को संदिग्ध कॉल्स, धमकी भरे संदेशों, स्टॉकिंग और डिजिटल उत्पीड़न से बचाने में सक्षम होगा। इस पहल के साथ ही हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां पर इस प्रकार की अनूठी पहल की गई है। इस संबंध में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने आज पुलिस मुख्यालय, सेक्टर-6, पंचकूला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ‘अभेद्य’ ऐप के फीचर्स और कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी साझा की। इस दौरान उनके साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर एवं पुलिस आयुक्त पंचकूला शिबास कबिराज तथा डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि बदलते समय में अपराधी इंटरनेट आधारित कॉलिंग, फर्जी नंबरों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को डराने और ठगी करने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में यह ऐप नागरिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा। सिंघल ने कहा कि पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने एक्सटॉर्शन कॉल्स पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए योजनाबद्ध रणनीति के तहत कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत सख्त एवं स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे, जिनके अनुरूप पुलिस ने ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इस मोबाइल ऐप के माध्यम से डॉक्टरों, ठेकेदारों, व्यापारियों सहित आम नागरिकों को व्यापक स्तर पर सुरक्षा और राहत मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति भय और आतंक का माहौल बनाने का प्रयास करता है, उसे आतंकवादी की श्रेणी में रखकर कठोर कार्रवाई की जाएगी। सिंघल ने बताया कि देश के भीतर से आने वाली कॉल्स को ट्रेस करना अपेक्षाकृत सरल होता है, जबकि विदेशी नंबरों से आने वाली कॉल्स एक बड़ी तकनीकी चुनौती पेश करती हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए हरियाणा पुलिस के तकनीकी विशेषज्ञों ने दिन-रात मेहनत कर एक सशक्त समाधान विकसित किया, जिसके सफल परीक्षण के बाद आज इसे लॉन्च किया गया है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि यह पूरी तरह हरियाणा पुलिस की इन-हाउस पहल है, जो उनकी तकनीकी क्षमता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने जानकारी दी कि इस ऐप का ट्रायल 25 चयनित उपयोगकर्ताओं द्वारा किया गया, जिसमें इसकी कार्यक्षमता पूरी तरह सफल पाई गई। भविष्य में आवश्यकतानुसार इसमें और सुधार व अपडेट किए जाएंगे। पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर प्राप्त करे मोबाइल ऐप का एक्सेस   इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक से संपर्क करना होगा, जिसके उपरांत उसे अधिकृत एक्सेस प्रदान किया जाएगा। यह ऐप एंड्रॉयड एवं एप्पल दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। सिंघल ने यह भी बताया कि हरियाणा पुलिस की सक्रिय कार्यवाही के परिणामस्वरूप जनवरी एवं फरवरी 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में एक्सटॉर्शन कॉल्स में लगभग 40 प्रतिशत की कमी तथा अपराध में 8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मोबाइल ऐप के शुरू होने से डिजिटल फ्रॉड, साइबर अपराध और एक्सटॉर्शन कॉल्स पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। ऐप की कार्यप्रणाली ‘अभेद्य’ ऐप अज्ञात और संदिग्ध नंबरों से आने वाली कॉल्स और संदेशों की पहचान कर उन्हें उपयोगकर्ता तक पहुँचने से पहले ही रोक देता है। यह विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय, वर्चुअल और अनसेव्ड नंबरों की निगरानी करता है तथा संदिग्ध पाए जाने पर कॉल को स्वतः रिजेक्ट कर नंबर को ब्लॉक कर देता है। यह ऐप संदिग्ध चैट, वॉयस मैसेज, नोटिफिकेशन और वॉयस नोट को भी डिवाइस से हटा देता है, जिससे उपयोगकर्ता किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव या भय से सुरक्षित रह सके। इतना ही नहीं, विदेशो से आने वाली संदिग्ध कॉल्स पर भी नजर जाएगी। इससे एक तरफ उपयोगकर्ता मानसिक दबाव से दूर रहेगा वही दूसरी तरफ संदिग्ध कॉल करने वाले व्यक्ति को हरियाणा पुलिस द्वारा बैकहैंड से ट्रेस किया जाएगा। अभेद्य-2.0: और मजबूत सुरक्षा प्रणाली प्रेस वार्ता में ‘अभेद्य-2.0’ के बारे में भी जानकारी दी गई, जो इस ऐप का अपडेटेड वर्जन है। इसके माध्यम से न केवल इंटरनेट आधारित  फ्रॉड कॉल्स बल्कि सामान्य कॉल्स पर भी नियंत्रण संभव होगा। इसमें अज्ञात अंतरराष्ट्रीय कॉल्स, संदिग्ध घरेलू कॉल्स (यूजर विकल्प अनुसार), तथा प्राइवेट या हिडन नंबरों को ब्लॉक करने की सुविधा दी गई है, जबकि केवल सेव एवं सत्यापित नंबरों से कॉल की अनुमति होगी। नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ यह ऐप नागरिकों को धमकी भरे कॉल्स, रंगदारी के प्रयासों और साइबर अपराध से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गुमनाम संचार माध्यमों पर रोक लगेगी और उनकी पहचान एवं ट्रैकिंग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अधिक आसान हो सकेगी। डिजिटल अरेस्ट पर कड़ा वार: ड्यूल ओटीपी सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा इसके साथ ही उन्होंने बताया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए हरियाणा पुलिस शीघ्र ही “ड्यूल ओटीपी सिस्टम” लागू करने जा रही है। इस पहल के तहत एचडीएफसी बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और प्रारंभिक चरण में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के खाताधारकों को इसमें शामिल किया जाएगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत किसी भी वित्तीय लेन-देन के लिए आने वाला ओटीपी मूल खाताधारक के साथ-साथ उनके परिजन—जैसे बेटे, बेटी या अन्य विश्वसनीय सदस्य—के पास भी भेजा जाएगा। दोनों की पुष्टि के पश्चात ही ट्रांजेक्शन को स्वीकृति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, खाताधारकों के बैंक लेन-देन की सीमा (ट्रांजेक्शन लिमिट) भी निर्धारित की जाएगी, जिससे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। सिंघल ने कहा कि इस अभिनव व्यवस्था के लागू होने से “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक एवं विभिन्न बैंकों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है। हरियाणा पुलिस का संकल्प डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि हरियाणा पुलिस प्रत्येक अपराधी को ट्रेस कर कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ‘अभेद्य’ ऐप का अधिक से अधिक … Read more

बंपर उत्पादन से किसानों को राहत: हरियाणा में आलू पर भावांतर योजना का बड़ा फायदा

चंडीगढ़. हरियाणा में इस समय आलू की फसल का सीजन चरम है, लेकिन खेतों से लेकर मंडियों तक की स्थिति में काफी विरोधाभास दिख रहा है। किसान आलू की फसल के गिरते दामों को लेकर काफी चिंतित हैं, लेकिन लोगों को बाजार में आलू उस हिसाब से सस्ता नहीं मिल रहा, जिस हिसाब से किसानों से खरीदा जा रहा है। मंडियों में आलू की कम कीमत के चलते काफी किसानों ने कोल्ड स्टोरेज की तरफ रुख किया है, ताकि जून व जुलाई में उन्हें बढ़े हुए रेट मिल सकें। हरियाणा सरकार ने आलू उत्पादक किसानों को राहत प्रदान करने के लिए भावांतर भरपाई योजना लागू की है। इसके तहत 600 रुपये प्रति क्विंटल रेट निर्धारित है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर मंडी में किसान का आलू 600 रुपये प्रति क्विंटल से कम दाम पर बिकता है तो उसके नुकसान की भरपाई राज्य सरकार करेगी। इसके लिए आलू उत्पादक किसान का मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी है। भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत से लेकर अब तक राज्य के तीन लाख 15 हजार 614 आलू उत्पादक किसानों ने स्वयं को पोर्टल पर पंजीकृत कराया है। राज्य के इन किसानों ने फसल उत्पादन के लिए सात लाख एकड़ भूमि को पंजीकृत किया है। अब तक राज्य के 24 हजार 385 आलू उत्पादक किसानों को 110 करोड़ रुपये का लाभ भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत मिल चुका है। भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत 21 बागवानी फसलों में लाभ दिया जाता है। इनमें 14 सब्जियां, पांच फसल और दो मसाले शामिल हैं। किसानों का कहना है कि यदि भावांतर भरपाई योजना में आलू की फसल शामिल नहीं होती तो उनके लिए मुश्किल हो जाता। राज्य की मंडियों में इस समय आलू की फसल 200 से 500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। सफेद आलू के दाम काफी कम हैं, जबकि लाल व डायमंड रंग के आलू के दाम सफेद आलू से अधिक मिल रहे हैं। हरियाणा में किसानों की आलू उत्पादन की लागत आठ से नौ रुपये प्रति किलो आ रही है, उस हिसाब से मंडियों में उन्हें दो से छह या अधिकतर सात रुपये किलो ही भाव मिल पा रहा है, जिससे किसान काफी आहत हैं। उनकी लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। मार्च के महीने में हरियाणा की कुछ मंडियों में आलू का रेट दो रुपये किलो तक भी पहुंचा, जिसके विरोध में कुछ किसान सड़क पर आलू फेंककर प्रदर्शन कर चुके हैं। इस सीजन में फंगल डिजीज से कुछ इलाकों में फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में किसान अब सीधे पेप्सिको और हाइफन जैसी कंपनियों के साथ अनुबंध कर रहे हैं, जहां उन्हें 10 से 12 प्रति किलो का निश्चित रेट मिल रहा है, लेकिन ऐसी स्थिति राज्य के हर जिले में नहीं है। हरियाणा में आलू की खेती अब दो रास्तों पर हरियाणा में आलू की खेती अब दो रास्तों पर खड़ी है। एक तरफ वे किसान हैं जो पारंपरिक आलू उगाकर मंडी के उतार-चढ़ाव में फंस रहे हैं, और दूसरी तरफ वे जो बीज उत्पादन या प्रोसेसिंग वैरायटी (चिप्स वाला आलू) उगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। हरियाणा देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में नौवें स्थान पर आता है। राज्य में आलू की खेती मुख्य रूप से कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, अंबाला और अब दक्षिण-पश्चिमी जिलों जैसे महेंद्रगढ़ में बड़े स्तर पर हो रही है। हरियाणा में इस बार साढ़े सात लाख टन आलू के उत्पादन का अनुमान है। करनाल का 'आलू प्रौद्योगिकी केंद्र' शामगढ़ हरियाणा को 'सीड पोटेटो हब' के रूप में विकसित कर रहा है। यहां एरोपोनिक्स (हवा में आलू उगाना) जैसी तकनीक से वायरस-मुक्त बीज तैयार किए जा रहे हैं।

पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए 3000 करोड़ का प्लान, जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को मिली मंजूरी

चंडीगढ़. हरियाणा में जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को लागू करने के लिए शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। हरियाणा सरकार की ओर से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के आयुक्त एवं सचिव मोहम्मद शाइन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव चंडीगढ़ से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जल जीवन मिशन-2.0 के अंतर्गत राज्य सरकारों व केंद्र सरकार के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यह एमओयू बहुत महत्वपूर्ण है। जल जीवन मिशन के दूसरे चरण में राज्य सरकार का ध्यान केवल जल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी गुणवत्ता, स्थिरता और दीर्घकालिक प्रबंधन पर भी केंद्रित होगा। इसके तहत जल भंडारण टैंकों का आधुनिकीकरण, शेष परिवारों को पाइप लाइन की जल आपूर्ति से जोड़ना और दक्षिण हरियाणा के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों जैसे नूंह, पलवल और महेंद्रगढ़ में विशेष परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इन सभी योजनाओं पर लगभग तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के पहले चरण में हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल और पर्याप्त पेयजल की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने का राज्य सरकार ने जो संकल्प लिया, उसे साकार किया गया। वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की जब शुरुआत हुई थी तब हरियाणा में केवल 58 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में नल का कनेक्शन था, लेकिन सरकार के सतत प्रयासों से छह अप्रैल 2022 को ही सरकार ने शत-प्रतिशत कवरेज हासिल कर देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान बनाया है। जल की गुणवत्ता सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन के तहत हरियाणा राज्य ने उल्लेखनीय कार्य किया है और पहले चरण में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर उत्कृष्टता साबित की। पाटिल ने जल जीवन मिशन–2 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी राज्यों के साथ समन्वय और समझौते को आवश्यक बताते हुए कहा कि इस दिशा में निरंतर बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

‘नियमों के तहत हुए चुनाव’: रिटर्निंग अधिकारी का जवाब, कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज

चंड़ीगढ़. हरियाणा के राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी सीनियर आईएएस पंकज अग्रवाल की भूमिका पर कांग्रेस भले ही सवाल उठा रही है, लेकिन उनका दावा है कि चुनाव में मतदान प्रक्रिया आरंभ होने से लेकर जीत के प्रमाण पत्र बांटने तक उन्होंने नियम और कानून के हिसाब से कार्य किया। उन्होंने चुनाव में अनियमितता, धांधली और किसी पार्टी विशेष के प्रति कथित झुकाव से साफ इनकार किया। उनका कहना है कि हर चुनाव में राजनीतिक प्रोपगेंडा होते ही रहते हैं। वह इनमें नहीं पड़ना चाहते। उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि केंद्रीय चुनाव आयोग भी रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका के रूप में उनकी कार्यप्रणाली से पूरी तरह संतुष्ट है। रिटर्निंग अधिकारी पंकज अग्रवाल ने सवालों के जवाब दिए। सवाल: राज्यसभा की दो सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस आपकी भूमिका पर लगातार सवाल उठा रही है। विपक्ष के नेता भूपेंद्र हुड्डा आपके विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर राज्यपाल से मिलने भी गए? जवाब: कांग्रेस क्यों ऐसे सवाल उठा रही है, इस बारे में तो मैं क्या ही कहूं, लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि मैंने रिटर्निंग अधिकारी के रूप में नियम और कानून के दायरे में रहकर काम किया। पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग हुई है। सब कुछ पारदर्शी तरीके से हुआ। सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मतदान केंद्र में मतगणना तक मौजूद थे। फिर हमारी भूमिका कहां से गलत हो गईं। सवाल: राज्यसभा के चुनाव में एक-एक वोट की कीमत है। कितनी वोट क्रॉस हुई, कितनी रद हुई और रद होने के क्या कारण रहे? जवाब: चुनाव में कुल पांच वोट रद हुए हैं। चार वोट किसके हैं और एक वोट किसका है, यह मैं अधिकृत रूप से नहीं कह सकता। मुझे इतना पता है कि कुल पांच वोट रद हुए हैं। अधिकतर वोटों के रद होने का कारण मतपत्र पर निशान बना है। कुछ सीक्रेसी लीक भी कारण बना। कितनी वोट क्रॉस हुई है, यह देखना, बताना अथवा इस पर निगाह रखना मेरे अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है। यह विशुद्ध रूप से राजनीतिक इश्यू है। चुनाव के एजेंटों को पता होगा कि किस पार्टी के किस विधायक की वोट क्यों क्रास हुई। सवाल: कुछ विधायक आरोप लगा रहे हैं कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया काफी देर तक बाधित रही और इसी दौरान गड़बड़ी की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया ? जवाब: मैंने अभी कहा कि मतदान केंद्र में सभी दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस सूचना में कोई दम नहीं कि मतदान प्रक्रिया बाधित रही। पौने तीन बजे के आसपास तक सभी वोट पड़ चुके थे। सिर्फ दो वोट पड़ने बाकी थे। हमने चार बजे तक उनके आने की प्रतीक्षा की। समय पूरा होने के बाद प्रतीक्षा बंद कर मतगणना की प्रक्रिया चालू की गई। जिन मतों पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई थी, उनका निस्तारण किया गया। इसकी भी एक प्रक्रिया होती है। उसे पूरी तरह से अपनाया गया। केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा समस्त आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद उनकी अनुमति से मतगणना आरंभ कर जीत के प्रमाण पत्र बांटे गए। सवाल: हरियाणा सरकार ने राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होते ही आपका तबादला कर दिया। आपको अधिक महत्व के विभाग सौंपे गए। विपक्ष इसे आपको सरकार द्वारा पावरफुल करने के रूप में प्रचारित कर रहा है? जवाब: मैं कोई राजनीतिक आदमी हूं, जो अधिक पावरफुल या कम पावरफुल होगा। मैं प्रशासनिक अधिकारी हूं। आइएएस अधिकारी के रूप में किसी भी पद पर सेवाएं लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है। सरकार द्वारा सौंपी जाने वाली जिम्मेदारी को पूरा करना हमारा दायित्व है। पहले मेरे पास कृषि और खनन एवं भूगर्भ विभागों का दायित्व था। अब सरकार ने सिंचाई एवं जल संसाधन, सरस्वती हैरिटेज बोर्ड और खनन व भूगर्भ विभाग का काम सौंपा है। इसमें नई बात क्या है। यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में यह रहे नतीजे एक सीट पर भाजपा के संजय भाटिया जीते। कर्मवीर बौद्ध जीते। कर्मवीर बौद्ध की जीत भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल से मात्र 0.44 मतों के अंतर से हुई। कांग्रेस के पांच विधायकों ने सतीश नांदल के समर्थन में वोटिंग की, जिन्हे कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है कांग्रेस के चार और भाजपा के एक विधायक की वोट रद हुई है। राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से भाजपा के 48, कांग्रेस के 37, इनेलो के दो और निर्दलीय तीन विधायक हैं इनेलो के दो विधायकों अर्जुन चौटाला व आदित्य देवीलाल ने स्वयं को इस चुनाव से अलग रखा।

कांग्रेस में टूट की आहट? BJP अध्यक्ष बोले—12 विधायक सतीश नांदल से जुड़े

चंडीगढ़. हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में उजागर हुई कांग्रेस की फूट का भाजपा फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने दावा किया कि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे। इनमें से सिर्फ पांच ने ही सतीश नांदल को वोट दिए। तीन कांग्रेस विधायकों के वोट रद हुए, जबकि एक कांग्रेस विधायक ने अपना वोट भाजपा के अधिकृत चुनाव एजेंट खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम को अपना वोट दिखा दिया था। इस तरह कांग्रेस के कुल चार वोट रद हुए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एक कांग्रेस विधायक के वोट की पर्ची को विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने हाथ से पकड़ा था। राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी को यह वोट भी रद करनी चाहिए थी। अगर कांग्रेस का यह वोट रद हो जाता तो बिना किसी व्यवधान के सतीश नांदल की जीत तय थी और कांग्रेस बुरी तरह पराजित होती। मोहन लाल बड़ौली ने कहा है कि कांग्रेस का अपने विधायकों पर नियंत्रण नहीं है। क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों में से पहले सिर्फ चार के नाम उजागर किए गए, लेकिन एक विधायक का नाम छिपा लिया। बाद में जनता का दबाव बढ़ा तो पांचवें विधायक के नाम को सार्वजनिक किया गया। यह विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा से बड़ा थोड़े ही है, जिसका नाम छिपाने की कोशिश की गई थी। प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि सतीश नांदल ने भाजपा, इनेलो व कांग्रेस के विधायकों से समर्थन मांगा था। बता दें कि गन्नौर के निर्दलीय विधायक देवेंद्र कादियान पहले ही कह चुके हैं कि सतीश नांदल का नामांकन कराने से पहले इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला को भरोसे में लिया गया था और उनकी पार्टी के दोनों विधायक सतीश नांदल को वोट देने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने भी सतीश नांदल को धोखा दे दिया। हालांकि डबवाली के इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल ने देवेंद्र कादियान के इस दावे को खारिज किया, लेकिन सतीश नांदल ने स्वयं आगे बढ़कर कहा कि उन्होंने अभय सिंह चौटाला व इनेलो विधायकों के साथ-साथ कांग्रेस विधायकों से भी वोट मांगे थे।