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हरियाणा में पत्रकारों के कल्याण के लिए मंत्री विज ने दी 31 लाख की सहायता

चंडीगढ़. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए पत्रकारों की स्वतंत्रता अति आवश्यक है क्योंकि लोकतंत्र के चार स्तंभों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया/प्रैस) में से एक स्तंभ भी कमजोर होगा तो लोकतंत्र डगमगा जाएगा। विज ने कहा कि स्वतंत्र लोकतंत्र तभी रह सकता है, जब पत्रकार अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन करें क्योंकि आज के युग में पत्रकार सीसीटीवी की तरह होने चाहिए और समाज की हर गतिविधि को सरकार तक पहुंचाने और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने हेतू एक सेतू की तरह कार्य करें। इसके अलावा, श्री विज ने कहा कि मीडिया जगत में कार्य करने वाले पत्रकारों को डिजीटल/तकनीक का भी सटीक रूप से प्रयोग करना चाहिए ताकि सच दुनिया को बताया जा सकें। विज आज अंबाला में कार्यक्रम में बतौर मुख्य-अतिथि उपस्थित पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने मीडिया वैल बिंग एसोसिएशन की गतिविधियों एवं पत्रकारों के कल्याण हेतू 31 लाख रूपए की राशि अपने ऐच्छिक कोष से देने की घोषणा की। मीडिया समाज का दर्पण है- विज विज ने कहा कि मीडिया समाज का दर्पण होता है तथा सरकार व जनता के बीच मीडिया एक मजबूत कड़ी होता है, जो जनता की आवाज को सरकार तक तथा सरकार की उपलब्धियों एवं जनकल्याणकारी नीतियों को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र प्रणाली में चार स्तंब होते है जिनमें विधायिका, कार्य पालिका, न्याय पालिका और मीडिया/प्रैस होती है तथा मीडिया/प्रैस का विधायिका, कार्य पालिका और न्यायपालिका पर नजर रखने का दायित्व मीडिया/प्रैस का होता है क्योकि मीडिया समाज के दर्पण के रूप में अपना काम करता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल तक पत्रकारिता का मुख्य उदेश्य सामजिक दायित्व को निभाते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करना रहा है।  डिजीटल क्रांति की गति ने नए पहिए लगा दिए- विज ऊर्जा मंत्री ने कहा कि समय के अनुसार मीडिया जगत में आधुनिकता का संलग्न हुआ है और डिजीटल क्रांति ने मीडिया को सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता में डिजीटल क्रांति की गति ने नए पहिए लगा दिए हैं। आज हम डिजीटल क्रांति से जुडक़र ब्रेकिंग न्यूज में जी रहे हैं और इंटरनेट और स्मार्टफोन ने पत्रकारिता को ड्राइंग रूम से निकालकर हर इंसान की हथेली में पहुंचा दिया है क्योंकि कही पर भी यदि कोई घटना होती है तो वह अब मोह्ल्ले या शहर में ना रहकर देश और विदेश में सैकेंडों लोगों तक पहुंच जाती है और यह सब डिजीटल क्रांति की देन है। श्री विज ने कहा कि समाज की हर गतिविधि पर फोक्स रखने के लिए मीडिया का दायित्व रहता है मीडिया को अपने दायित्व को सहजता और सटीकता से निभाना होगा क्योंकि फेक न्यूज, पेड न्यूज और क्लिकबेट पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खडे कर रहे हैं। नए तकनीक/आविष्कारों के साथ चलना होगा- विज विज ने कहा कि उनका मानना है कि आज दुनिया में जो भी नए आविष्कार हो रहे हैं हमें उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा और नई तकनीक को सीखना होगा। उन्होने कहा कि आज यहां पत्रकारिता जगत में युवाओं को लाने पर बल दिया गया है लेकिन उनके अनुसार इस कार्य में ओर भी आवश्यकता है जिस प्रकार विभागों में कार्य की दक्षता बेहतर हो, उसके लिए प्रशिक्षण दिया जाता है, उसी प्रकार जर्नलिस्म के क्षेत्र में भी इसे करने की जरूरत है यानि जिनका जर्नलिस्म में तकनीक अपनाने के साथ-साथ अन्य अनुभव है उनके द्वारा नई तकनीक के बारे में पत्रकारों को जानकारी देना जरूरी है और ऐसा होने से पत्रकारिता ओर सशक्त होगी।

हरियाणा 5700 करोड़ रुपये से बनेगा पहला वाटर सिक्योर राज्य

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री नायब सैनी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में विश्व बैंक द्वारा लगभग 3 दशकों के उपरांत हरियाणा को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'जल संरक्षित हरियाणा परियोजना के अंतर्गत 5700 करोड़ के तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग (ऋण) को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री सैनी चंडीगढ़ में जल संरक्षित हरियाणा कार्यक्रम को लेकर आयोजित अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि 6 वर्षों दौरान वर्ष 2026 से 2032 की अवधि में चरणबद्ध रूप से वितरित की जाएगी। इस राशि का उपयोग नहरी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर किए जाने वाले कार्यों के लिए किया जाएगा। राज्य में कुल 1570 नहरों में से 892 नहरों का पिछले 20 वर्षों में पुनर्वास किया जा चुका है तथा अगले 5 वर्षों में शेष 678 नहरों का पुनर्वास किया जाना प्रस्तावित है। इसमें विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग 2325 करोड़ की लागत से 115 नहरें, राज्य बजट से 2230 करोड़ की लागत से 284 नहरें तथा नाबार्ड द्वारा 2880 करोड़ की लागत से 279 नहरों का पुनर्वास किया जाना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिकाडा द्वारा कुल 15,562 नहरी खालों में से 4,487 खालों का पिछले 20 वर्षों में पुनर्वास किया जा चुका है तथा शेष 1961 खालों का पुनर्वास आगामी 5 वर्षों में किया जाना प्रस्तावित है। इसमें विश्व बैंक के सहयोग 450 करोड़ की लागत से 400 नहरी खालें, राज्य बजट से 1250 करोड़ की लागत से 1500 खालें तथा नाबार्ड के माध्यम से 402 करोड़ की लागत से 61 खालों का पुनर्वास किया जाना शामिल है। इस अतिरिक्त विश्व बैंक द्वारा 900 करोड़ के सहयोग से लगभग 70,000 एकड़ कृषि भूमि में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का कार्यान्वयन किया जाएगा।

पंचकूला में मां के बॉयफ्रेंड ने बच्चे को अगवा कर मौत के घाट उतारा

पंचकूला. पंचकूला के सेक्टर-12ए स्थित रैली के एक क्रेच से  शनिवार को अगवा हुए मासूम बच्चे का शव देर रात सुखोमाजरी बाईपास पुल के नीचे से एक बोरी में बरामद हुआ है। इस दिल दहला देने वाली वारदात को किसी और ने नहीं, बल्कि बच्चे की मां के ही बायफ्रेंड ने अंजाम दिया है। पुलिस ने आरोपित पिंजौर निवासी अजय को हिरासत में ले लिया है और आज इस पूरी साजिश का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा। डेरा बस्सी की रहने वाली लक्ष्मी नाम की महिला का पिंजौर के एक युवक के साथ अफेयर था। 24 जनवरी को लक्ष्मी ने अपने बच्चे को पहली बार सेक्टर-12ए के एक क्रेच में छोड़ा था। लेकिन 11बजे आरोपित युवक पहुंचा और संचालिका को झांसा दिया कि वह बच्चे का पिता है। संचालिका ने मां से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन स्विच ऑफ होने के कारण उसने बिना किसी पहचान के बच्चा आरोपित को सौंप दिया। प्रेमी से मिलने बच्चे को साथ लेकर जाती थी महिला महिला जब भी आपने प्रेमी से मिलने पिंजौर जाती थी, तो अपने बच्चे को साथ ले जाती थी। आरोपित को बच्चे का साथ होना पसंद नहीं था और वह इसे अपने रिश्ते में बाधा मानता था। इसी कारण उसने लक्ष्मी पर दबाव बनाकर बच्चे को क्रेच में दाखिल करवाया था। करीब 15 दिन पहले आरोपित खुद लक्ष्मी के साथ इस क्रेच की रेकी करने गया था। 24 जनवरी को जैसे ही बच्चे का पहला दिन शुरू हुआ, आरोपित ने मौके का फायदा उठाकर उसे अगवा कर लिया। क्रेच से बच्चे को लेकर आरोपित ओटो से पिंजौर की ओर निकल गया। रास्ते में जब मासूम अपनी मां के लिए रोने लगा, तो आरोपित ने गुस्से में आकर उसका गला दबा दिया। हत्या के बाद उसने शव को एक बोरी में भरा और सुखोमाजरी बाईपास पुल के नीचे फेंक कर फरार हो गया।

फतेहगढ़ साहिब रेल ब्लास्ट में ब्रेक टेस्ट के लिए घटाई स्पीड से टला बड़ा हादसा

अंबाला. गणतंत्र दिवस से करीब 60 घंटे पहले पंजाब के सरहिंद रेलवे स्टेशन के निकट मालगाड़ी को उड़ाने के लिए रखे गए विस्फोटक से नुकसान इसलिए कम हुआ, क्योंकि लोको पायलट ने ब्रेक टेस्ट के लिए रफ्तार घटाई थी। यदि गाड़ी पूरी गति में होती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। इस ट्रैक पर 100 किमी प्रति घंटा की गति से मालगाड़ी दौड़ सकती है। यदि ऐसा होता तो मालगाड़ी पलट सकती थी। यह मालगाड़ी बिहार के धनबाद से कोयला लेकर मंडी गोबिंदगढ़ पहुंची थी। खाली रैक फिर से वापस ले जाया जा रहा था। 58 डिब्बों की मालगाड़ी से करीब 18 डिब्बे धमाका होने बाद भी आगे निकल गए और फिर लोको पायलट ने रोक कर चेक किया। कुछ देर के बाद लोको पायलट धीरे से मालगाड़ी को आगे ले गया और अगले स्टेशन पर जाकर सूचना कंट्रोल में दी। रेल अधिकारियों का मानना है कि यदि गाड़ी की स्पीड अधिक होती तो पटरी टूटने के बाद मालगाड़ी पलटने का खतरा अधिक हो जाता। लोको पायलट की सूचना के बाद करीब 10 मालगाड़ियों को रोक दिया गया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। उत्तर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के डीआइजी अंबाला मंडल के अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। इस घटना से जहां इंजन क्षतिग्रस्त हुआ, वहीं दो से तीन स्लीपर भी टूटे हैं और पटरी भी क्षतिग्रस्त हुई है। लोको पायलट हरिंद्र कुमार को हल्की चोटें आई हैं, जबकि सहायक लोको पायलट आनंद प्रकाश यादव ठीक हैं। 50 की स्पीड में पहुंची थी 25 किमी तक मंडी गोबिंदगढ़ से खाली होने के बाद साइडिंग पर आई और जब फिर से ढुलाई के लिए जा रही थी तो गाड़ी कि स्पीड 40 से 50 किमी प्रतिघंटा की थी। नियम है कि जब भी मालगाड़ी फिर से चलाई जाती है तो कुछ किमी दौड़ाने के बाद गाड़ी की रफ्तार घटाई जाती है। ब्रेक टेस्ट के बाद गाड़ी की रफ्तार 100 किमी कर दी जाती है। साइडिंग से गाड़ी चलने के बाद मालगाड़ी की स्पीड 50 किमी थी, ब्रेक टेस्ट किया तो यह आधी हो गई। तभी धमाके की आवाज आई और लोको पायलट का कैबिन थोड़ा क्षतिग्रस्त हो गया। लोको पायलट जब तक समझता तब तक 18 डिब्बे आगे निकल चुके थे। दो कंपनियां आरपीएफएस की संभालेंगी कमान गणतंत्र दिवस को लेकर आरपीएफएस की दो कंपनियां अंबाला रेल मंडल में भेजी हैं। यह यहां से विभिन्न स्टेशनों के लिए रवाना कर दी हैं। स्टेशनों पर चेकिंग अभियान जारी है।

हरियाणा में फिर झमाझम बरसेंगे मेघ

हिसार. पहाड़ों में हो रही लगातार बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। ठंडी हवाओं के चलते प्रदेश में दिन और रात के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे एक बार फिर कड़ाके की ठंड लौट आई है। बीते दो दिनों में हुई वर्षा और तेज हवाओं ने तापमान को तेजी से नीचे गिराया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण 27 जनवरी से प्रदेश के कई हिस्सों में फिर से बूंदाबांदी या हल्की वर्षा की संभावना है। इसी बीच शुक्रवार रात को हिसार प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सफेद चादर में लिपटी प्रकृति शुक्रवार को प्रदेशभर में हुई बारिश और ओलावृष्टि के बाद शनिवार सुबह जिले में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप रहा। भीषण सर्दी के चलते गांव बड़ोपल के खेतों में पाला जम गया जिससे सफेदे के पौधों पर ओस की बूंदें जम गईं। किस जिले में कौन सा अलर्ट ऑरेंज अलर्ट: अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत यलो अलर्ट: पंचकूला, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, भिवानी, चरखी दादरी, रोहतक, सोनीपत, झज्जर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात, पलवल 29 जनवरी तक परिवर्तनशील रहेगा मौसम हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मदन खीचड़ के अनुसार प्रदेश में मौसम आमतौर पर 29 जनवरी तक परिवर्तनशील रहने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव से 27 और 28 जनवरी को आंशिक बादल छाए रहेंगे तथा कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हल्की वर्षा हो सकती है। इस दौरान हल्की से मध्यम गति की ठंडी हवाएं चलने की संभावना है। 10 से 12 डिग्री तक गिरा तापमान भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार वीरवार रात और शुक्रवार को हुई वर्षा के बाद तापमान में 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले दिन का तापमान 25 डिग्री और रात का तापमान 14 डिग्री तक पहुंच गया था। हिसार के अलावा नारनौल, भिवानी, महेंद्रगढ़, सिरसा और सोनीपत में न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा।

राष्ट्रपति के साथ गणतंत्र परेड में होंगी हरियाणा की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता

झज्जर. कासनी गांव निवासी अक्षिता धनखड़ का नाम आज पूरे देश में गूंज रहा है। वह भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट हैं और गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ रहेंगी। अक्षिता ने बताया कि वे बचपन में गणतंत्र दिवस की परेड देखती थीं और कर्तव्य पथ पर खड़े होने का सपना देखती थीं। पिता ने भी गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लिया था। उनकी कहानियां सुनकर वर्दी पहनने का सपना पक्का हो गया। बचपन की यादें ही कॅरिअर का आधार बनीं। अक्षिता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से पढ़ाई की। एनसीसी (नेशनल कैडेट कोर) में हिस्सा लिया। अक्षिता ने मेहनत से कैडेट सजेंट मेजर का रैंक हासिल किया। एनसीसी यूनिट ने उन्हें एक्स-सीएसएम कहकर याद किया क्योंकि उन्होंने साथी कैडेट्स को उदाहरण से प्रेरित किया। एनसीसी की मिलिट्री जैसी ट्रेनिंग ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से सेना के लिए तैयार किया। अक्षिता ने बताया कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है। जहां उनको देश की राष्ट्रपति के साथ तिरंगा झंडा फहराने का मौका मिला है। राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद 27 तोपों की सलामी भी दी जाएगी। अक्षिता की माता सुनीता ने भी इसे गर्व का क्षण बताया।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक यात्रा करेंगे किसान: डल्लेवाल

पानीपत/उचाना. किसान नेताजगजीत सिंह डल्लेवाल और अभिमन्यु कोहाड़ ने देशव्यापी किसान यात्रा का एलान किया है। यह यात्रा 7 फरवरी को कन्याकुमारी से शुरू होकर कश्मीर तक जाएगी और 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों किसानों की महापंचायत के साथ समाप्त होगी। सात फरवरी से कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाले जाने वाली किसान जागृति यात्रा को लेकर उचाना खुर्द बीकेयू (एकता सिधुपूर) राष्ट्रीय अध्यक्ष दलजीत सिंह डल्लेवाल पहुंचे। यहां पर किसानों के साथ बैठक की। मुख्य रूप से राज्य प्रधान अभिमन्यु कोहाड़ मौजूद रहे। किसानों से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। अध्यक्षता जिला महासचिव अनिल बेनीवाल ने की। दलजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि कन्या कुमारी से जो यात्रा शुरू होगी वो कश्मीर जाकर समाप्त होगी। यात्रा से पहले गांव-गांव जाकर किसानों के साथ बातचीत कर रहे हैं। किसानों के करवाए जाएंगे हस्ताक्षर देश के किसानों को जागरूक करने का प्रयास है कि एमएसपी, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट, किसानों की कर्ज मुक्ति, बिजली संशोधन बिल, भूमि अधिग्रहण सहित अन्य मांगों को लेकर एक प्रस्ताव गांवों के किसानों के पास भेजा जाएगा। प्रस्ताव पर किसानों के हस्ताक्षर करवाए जाएंगे। 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान बड़ी किसान महापंचायत के साथ यात्रा का समापन होगा। जिन गांव से जितने प्रस्ताव आएंगे वह पीएम नरेन्द्र मोदी को सौपेंगे। आज किसानों को उनकी फसलों का भाव नहीं मिल रहा है। हरियाणा की सरकार कह रही है कि हम एमएसपी पर फसल खरीद रहे हैं। किसानों की एमएसपी पर फसल नहीं बिक रही है। किसान कर्ज के अंदर डूबे हुए हैं। गांव-गांव जाकर किसानों से बातचीत कर रहे हैं। यात्रा के दौरान पैदल, ट्रैक्टर मार्च व गाड़ियों में भी चलेंगे। अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि संगठन को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं। आज ज़मीन बचाना बहुत जरूरी है। ज़मीन बचेगी, खेती बचेगी तो हमारा भविष्य बचेगा। सरकार आइएमटी सहित अलग-अलग तरीकों से ज़मीनों पर कब्जा करने का प्रयास कर रही है। सरकार की गलत नीतियों का करेंगे विरोध सरकार की जो नीतियां गलत होंगी, उनका विरोध करेंगे। सरकार आज कह रही है कि फैक्ट्री, उद्योग लगाने के लिए ज़मीन अधिग्रहण कर रही है। सच्चाई ये है कि 2004-05 में सेज कानून के तहत सवा लाख से अधिक ज़मीन एक्वायर की गई थी, जिसमें से 60 से 65 प्रतिशत आज भी ज़मीन खाली है। इस मौके पर विक्की ढांडा, सुनील उझाना, कृष्ण, गेजी, सुरेंद्र व बलवंत मौजूद रहे।

हरियाणा में फिर होगी झमाझम बारिश और मुसीबत बढ़ाएंगे ओले

हिसार/पानीपत. पहाड़ों पर बर्फबारी के बीच सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ ने हरियाणा में शुक्रवार को मौसम का मिजाज बदल दिया। रात से शुरू हुई वर्षा और तेज हवा ने दिन-रात के तापमान के फासले को समेट दिया। सुबह 10 बजे तक अधिकतर जिलों में घने बादल छाने से कई बार अंधेरा छाया। वहीं, न्यूनतम तापमान में 5–6 डिग्री का उछाल आया, जबकि अधिकतम तापमान 8–12 डिग्री तक लुढ़क गया। सिरसा, भिवानी और फरीदाबाद के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा, वहीं अधिकांश जिलों में वर्षा रबी फसलों के लिए राहत बनकर आई। मौसम विभाग ने आगे भी बारिश, ठंडी हवाओं और कोहरे की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। आगे कैसा रहेगा मौसम भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 25 जनवरी तक प्रदेश में बारिश के आसार बने रहेंगे। 27–28 जनवरी को एक और बड़ा पश्चिमी विक्षोभ हरियाणा को प्रभावित कर सकता है। कैथल (गुहला), कुरुक्षेत्र (पिहोवा, शाहबाद) और अंबाला में आंधी-ओलावृष्टि को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया। नमी बढ़ने से कई इलाकों में घना कोहरा छाने की चेतावनी, यलो अलर्ट प्रभावी। जिलों में ऐसे रहे हालात सिरसा: नाथूसरी चौपटा के 13 गांवों में भारी ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों और चने की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। हालांकि, अन्य क्षेत्रों में 8 एमएम वर्षा से फसलों को लाभ भी मिला है। 27 जनवरी तक वर्षा जारी रहने की संभावना है। यमुनानगर: जिले में 20 एमएम वर्षा और तूफान ने भारी तबाही मचाई है। रादौर में लोहे का शेड बिजली लाइन पर गिरा और अमादलपुर में एक प्लाईवुड फैक्ट्री की 110 फीट ऊंची चिमनी गिर गई। शहर के आधे हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप रही, 200 पोल को नुकसान पहुंचा है। अंबाला: जिले में 42.2 एमएम की रिकॉर्ड वर्षा और तूफान के कारण 55 बिजली के पोल टूट गए और 17 ट्रांसफार्मर गिर गए। अधिकतम तापमान में 12 डिग्री की भारी गिरावट दर्ज की गई। बिजली का ढांचा चरमराने से कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी। चरखी दादरी: वीरवार रात से जारी रुक-रुक कर बारिश से किसानों को करीब ढाई करोड़ रुपये से अधिक का फायदा हुआ है क्योंकि उनकी एक सिंचाई बच गई। हालांकि, 7 फीडरों की बिजली आपूर्ति ठप होने से तीन लाख लोगों को कई घंटों तक बिजली संकट झेलना पड़ा। जींद: जिले में औसतन 13.7 एमएम वर्षा हुई है, जिसके कारण गणतंत्र दिवस समारोह की रिहर्सल का स्थान पुलिस लाइन से बदलकर अनाज मंडी करना पड़ा। जलालपुर में हल्की ओलावृष्टि हुई, लेकिन फसलों को नुकसान नहीं है। नरवाना में सर्वाधिक 20 एमएम बारिश दर्ज की गई। फतेहाबाद: जिले में करीब 10 घंटे तक हुई 16 एमएम वर्षा से रबी फसलों को संजीवनी मिली है। टोहाना और जाखल में 25-25 एमएम बारिश के कारण बाजारों और सड़कों पर भारी जलभराव हुआ। वसंत पंचमी पर वर्षा और ठंडी हवाओं से ठिठुरन में काफी बढ़ोतरी हुई है। कैथल: शुक्रवार को हुई 35 एमएम वर्षा के कारण बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और लोग घरों में कैद रहे। किसानों के अनुसार यह वर्षा गेहूं की फसल के लिए बेहद फायदेमंद है। 25 जनवरी तक तेज हवाके साथ बूंदाबांदी की चेतावनी है। करनाल: जिले में 20.4 एमएम वर्षा और 8 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली ठंडी हवाओं ने कंपकंपी बढ़ा दी है। शाम को नमी की मात्रा 98 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे घने कोहरे के आसार हैं। पानीपत: कुल 18.2 एमएम वर्षा होने से प्रदूषण के स्तर में सुधार हुआ और एक्यूआई 204 दर्ज किया गया। दिन भर ठिठुरन रही। वर्षा के कारण शहर के निचले इलाकों में जलजमाव देखा गया। रोहतक: शहर में 5 एमएम वर्षा दर्ज की गई, जिससे तापमान गिर गया और ठंड बढ़ गई। कृषि वैज्ञानिकों ने इसे फसलों के लिए अच्छा बताया है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया।

डोडा हादसे में बलिदान हुए हरियाणा के दो लालों की आज होगी अंतिम विदाई

यमुना नगर. जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर हुए सैन्य वाहन हादसे ने झकझोर दिया। इस हादसे में सेना के 10 जवान बलिदान हो गए। हरियाणा के लिए यह हादसा और भी पीड़ादायक रहा। इनमें हरियाणा के दो शामिल हैं। बलिदानियों में यमुनानगर जिले के शेरपुर गांव निवासी सुधीर नरवाल और झज्जर जिले के गिजाड़ौद गांव निवासी मोहित चौहान शामिल हैं। दोनों वीर सपूतों की शहादत की सूचना मिलते ही उनके गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। सुधीर नरवाल का पार्थिव शरीर अंबाला और मोहित का पािर्थव शरीर दिल्ली पहुंच गया है। दोनों जवानों के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आज उनके गांवों में किया जाएगा। हादसे में बलिदान जवान यमुनानगर के छछरौली खंड के शेरपुर गांव निवासी सुधीर नरवाल (30) हैं। सुधीर वर्ष 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष थी। वह 72 टैंक बटालियन में तैनात थे। करीब दो वर्ष पहले उनकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हुई थी। हादसे में सुधीर नरवाल के बलिदान होने की सूचना सेना के अधिकारियों ने वीरवार शाम उनके स्वजन को फोन पर दी। यह सूचना मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। राजकीय सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार सेना अधिकारियों ने स्वजनों को बताया कि शुक्रवार सुबह सुधीर का पार्थिव शरीर अंबाला एयरपोर्ट पर पहुंचना था, लेकिन सुबह से दोपहर बाद तक लगातार वर्षा होने के कारण इसमें देरी हो गई। परिजनों को उम्मीद है कि मौसम साफ होने के बाद पार्थिव शरीर गांव लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। फोन आने के बाद पत्नी हो गई थी बेसुध परिजनों के अनुसार सुधीर की पत्नी रूबी अपनी जेठानी के साथ खेतों की ओर टहलने गई हुई थीं। उसी दौरान सेना के एक अधिकारी का फोन आया। जैसे ही फोन पर सुधीर के बलिदान होने की जानकारी मिली, रूबी सदमे में बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं। परिवार और आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला। घटना की जानकारी फैलते ही रिश्तेदारों और गांव के लोगों का उनके घर पहुंचना शुरू हो गया। हर आंख नम थी और हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने में जुटा था। दो बहनों के इकलौते भाई थे सुधीर सुधीर नरवाल के पिता हरपाल सिंह किसान थे, जिनका वर्ष 2017 में निधन हो चुका है। पिता के निधन के बाद से ही परिवार पहले से दुख के साये में था। अब जवान बेटे के बलिदान ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सुधीर अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और दो बहनों के भाई थे। परिवार में उनकी मां उर्मिला देवी, पत्नी रूबी और सात वर्षीय मासूम बेटा अयांश है। इस हादसे ने मां से उनका सहारा, पत्नी से जीवनसाथी और मासूम बेटे से पिता का साया छीन लिया। झज्जर के मोहित भी हुए बलिदान डोडा हादसे में मां भारती के चरणों में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले झज्जर जिले के गांव गिजाड़ौद निवासी मोहित चौहान का पार्थिव शरीर शुक्रवार रात 8:55 पर दिल्ली पहुंच गया। लेकिन पैतृक गांव में शनिवार सुबह पहुंचेगा। दिनभर स्वजन और ग्रामीण वीर सपूत का इंतजार करते रहे। शुक्रवार सुबह से ही गिजाड़ौद गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा और हर आंख गांव की दहलीज पर टकटकी लगाए बैठी रही। सेना के अधिकारियों ने पहले सुबह 11 बजे और फिर दोपहर 2 बजे पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचने की सूचना दी थी बाद में रात 8:55 पर पहुंचने की जानकारी दी गई। गांव के सरपंच नरेश कुमार सैन्य मुख्यालय के निरंतर संपर्क में हैं। बलिदानी के छोटे भाई जितेंद्र उर्फ जीतू ने रुंधे गले से बताया कि उसकी मोहित से अंतिम बार बुधवार शाम को ही बात हुई थी। मोहित ने वादा किया था कि वह मार्च में छुट्टी लेकर घर आएगा। करीब दो महीने पहले ही मोहित शादी की सालगिरह मनाने घर आया था। वर्ष 2019 में सेना में भर्ती हुए मोहित की शादी एक वर्ष पूर्व ही हुई थी। गांव में बनेगा स्मारक जीतू ने बताया कि पहले घायल होने की सूचना मिली थी, लेकिन शाम पांच बजे जब शहादत की खबर आई, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता सतपाल, माता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। गिजाड़ौद गांव ने अपने वीर सपूत के सम्मान में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ग्राम पंचायत ने मुख्य सड़क के साथ लगती 500 वर्ग गज पंचायती भूमि बलिदानी मोहित चौहान के स्मारक के लिए आवंटित की है। शुक्रवार को दिनभर जेसीबी मशीनों से इस जमीन को समतल करने का कार्य चला। शनिवार को मोहित का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अंबाला के सैन्य इलाके में खंडहरनुमा घर में छिपा जासूस?

अंबाला. सैन्य क्षेत्र में 16-17 वर्षीय युवक एक साल तक बिना किसी रोक-टोक के खंडहरनुमा भवन में रहता रहा और किसी को भनक नहीं लगी। शुक्रवार को छावनी पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में जिस युवक को खंडहर भवन से रेस्क्यू किया गया, उसके तौर-तरीकों और गतिविधियों ने इस मामले को सामान्य से कहीं अधिक गंभीर बना दिया है। युवक के पास एयरफोर्स कर्मी जैसी वर्दी होना, रात के अंधेरे में ही बाहर निकलना और दीवारों पर कोडवर्ड लिखना, सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाने वाले संकेत माने जा रहे हैं। युवक कमरे की शेल्फ के ऊपर बैठता और यहीं पर सोता था जोकि ग्राउंड लेवल से 10 फुट ऊंची थी। पूछताछ में उसने अपना नाम बस दिनेश बताया। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं बता रहा। महाराणा प्रताप मार्ग स्थित यह खंडहर भवन सैन्य एरिया में आता है। जानकारी के अनुसार युवक दिन के समय पूरी तरह नजरों से ओझल रहता था और रात के समय ही बाहर निकलकर भोजन की व्यवस्था करता था। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से इसी भवन में रह रहा था, किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी। यह स्थिति तब सामने आई, जब वंदेमातरम दल को उसकी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। दीवारों व छत पर लिखे थे कोडवर्ड सूचना मिलते ही शुक्रवार सुबह छावनी पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस ने कार्रवाई कर युवक को सुरक्षित बाहर निकाला। तलाशी के दौरान कमरे की दीवारों और छत पर चाक से लिखे गए कई नंबर, शब्द और प्रतीक मिले, जिन्हें कोडवर्ड के रूप में देखा जा रहा है। आर्मी इंटेलिजेंस ने अपने रिकॉर्ड में लिया है। युवक को लुधियाना स्थित मनुखता दी सेवा सेवा सोसायटी के हवाले किया गया। रात को ही क्यों निकलता था बाहर प्रारंभिक जांच में युवक के मंदबुद्धि होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन उसके व्यवहार और गतिविधियों ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसके पास एयरफोर्स कर्मी की वर्दी आखिर कहां से आई।