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बाढ़ के बीच पानी पर विवाद: हरियाणा का BBMB को निर्देश, आप ने पंजाब को अकेला छोड़ने का आरोप लगाया

चंडीगढ़  बाढ़ जैसे हालात के बीच पंजाब और हरियाणा में पानी को लेकर फिर से विवाद शुरू हो गया है। हरियाणा ने बीबीएमबी को पत्र लिखकर कहा है कि हरियाणा की मांग के अनुरूप बोर्ड की तरफ से कम पानी छोड़ा जाना चाहिए। वहीं आम आदमी पार्टी पंजाब का आरोप है कि अब संकट की स्थिति में पंजाब को अकेला छोड़ा जा रहा है, जबकि पहले अधिक पानी के लिए दबाव बनाया जा रहा था।  पंजाब-हरियाणा में पानी प्रबंधन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हरियाणा सरकार ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) और पंजाब सरकार को एक खत लिखा है। जिससे दोनों राज्यों के बीच फिर से विवाद खड़ा हो सकता है। दरअसल, हरियाणा सरकार ने कहा है कि उसकी नहरों की ओर छोड़े जाने वाले 2,500 क्यूसेक पानी को कम किया जाए। जबकि एक सप्ताह पहले ही हरियाणा सीएम ने पंजाब सरकार को खत लिख बाढ़ की स्थिति में अतिरिक्त मदद की बात कही थी। जबकि उनके इस फैसले से राज्य के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि पानी का कम निकास सीधे-सीधे नदियों और बांधों पर दबाव बढ़ाएगा। खत में कहा गया है कि 29 अगस्त 2025 को हरियाणा कॉन्टैक्ट प्वाइंट (HCP) पर पानी का डिस्चार्ज 8,894 क्यूसेक पाया गया, जबकि हरियाणा ने 7,900 क्यूसेक की मांग की थी। इससे पहले 26 अगस्त 2025 को हरियाणा ने इंडेंट घटाकर 7,900 क्यूसेक किया था, लेकिन पानी का डिस्चार्ज कम नहीं किया गया। अब लगातार भारी बारिश होने के कारण नहर क्षेत्र और कैचमेंट एरिया में पानी की मांग और घट गई है। इसी वजह से 29 अगस्त 2025 को एक और नया मांग पत्र दिया गया है, जिसमें केवल 6,250 क्यूसेक पानी की जरूरत बताई गई है। हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पत्र में कहा कि हरियाणा के लिए पानी का डिस्चार्ज 8,894 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि उन्होंने 7,900 क्यूसेक पानी देने की ही मांग की थी। विभाग ने बताया कि 26 अगस्त को 7,900 क्यूसेक तक पानी की मांग घटा दी गई थी, लेकिन पानी का डिस्चार्ज कम नहीं हुआ। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पानी की मांग काफी घट गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब 6,250 क्यूसेक पानी लेने की ही उन्होंने सहमति दी है।  विभाग ने चेतावनी दी है कि बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए नहर प्रणाली और आसपास की आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से कम पानी छोड़ना चाहिए।  आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि जब पंजाब की धरती प्यासी होती है तो उसका हक छीना जाता है।अब जब चारों तरफ पानी ही पानी है तो पंजाब को अकेला छोड़ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने हरियाणा से गुहार लगाई कि भाखड़ा का पानी ज्यादा ले लो, ताकि पंजाब को बाढ़ से बचाया जा सकें, लेकिन हरियाणा पानी का कोटा कम करने की मांग कर रहा है।  उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब सिर्फ नुकसान झेलने के लिए है। हरियाणा को जवाब देना चाहिए कि क्या मदद की पेशकश सिर्फ सियासी जुमला था। 

यमुना के 18 गेट खुले, दिल्ली में बढ़ा बाढ़ का खतरा; हरियाणा के अंबाला में विज ने किया दौरा

अंबाला पहाड़ों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। अंबाला की टांगरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और यह 8 फीट के खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी है। सिंचाई विभाग के अनुसार, जलस्तर और बढ़ने की संभावना है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और आसपास के डीएवी रिवर साइड सहित कई स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज ने टांगरी नदी के आसपास के क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि नदी के किनारे बसी कॉलोनियों के लोगों को जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। साथ ही, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। टांगरी बांध पर सिंचाई विभाग और पुलिस की टीमें तैनात हैं, जो लगातार जलस्तर पर नजर रख रही हैं। यमुनानगर के साथ उगते उत्तराखंड के पहाड़ों पर भारी बारिश होने से यमुना नदी पर बने हथिनी कुंड बैराज का एकाएक जलस्तर बढ़ गया। ऐसे में शुक्रवार को यमुना नदी का जलस्तर 50 हजार क्यूसेक को पार कर 67,034 क्यूसेक दर्ज किया गया। इसमें यमुना में 58,514, पश्चिमी यमुना में 7010 व पूर्वी यमुना में 1510 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उधर, जलस्तर बढ़ने पर फिर से बैराज के 18 गेट खोल दिए गए और पानी को दिल्ली की तरफ डायवर्ट कर दिया गया। ऐसे में दिल्ली में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उधर, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है जिले के साथ लगते कैचमेंट एरिया में भारी बारिश हो रही है, ऐसे में यमुना नदी का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा बैराज के कर्मचारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने के लिए आदेश दिए गए हैं। साथ ही हर घंटे बैराज पर जलस्तर की उपस्थिति दर्ज होने के बाद रिपोर्ट देने की बात कही गई है।  

अधूरी जांच का हवाला देकर ज्योति मल्होत्रा के लिए डिफॉल्ट बेल की मांग

हिसार  पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में गिरफ्तार ज्योति मल्होत्रा मामले की सुनवाई सिविल जज सुनील कुमार की अदालत में हुई। ज्योति मल्होत्रा को चार्जशीट की प्रति दिए जाने पर बहस हुई। अदालत में सरकारी वकील ने कहा कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है। ऐसे में संवेदनशील जानकारी देने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए आरोपी पक्ष को खुफिया जानकारी नहीं दी जाए। ज्योति के वकील ने इस बिंदु को आधार बनाते हुए डिफॉल्ट बेल ( वैधानिक जमानत) की याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने पुलिस से शनिवार को जवाब मांगा है। अदालत में ज्योति मल्होत्रा के वकील कुमार मुकेश ने कहा कि पुलिस ने अभी तक जांच पूरी नहीं की है। भारतीय न्याय संहिता के अनुसार 14 अगस्त को पुलिस को ज्योति मल्होत्रा के खिलाफ जांच पूरी करनी थी। 14 अगस्त को पुलिस ने अधूरा चार्जशीट पेश करी थी। ज्योति को अब तक चार्जशीट की प्रति नहीं दी गई है। इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आर्डर हैं कि अधूरी पुलिस जांच के मामले में आरोपी पक्ष का बेल का अधिकार है, जिसकी कॉपी कोर्ट में जमा कर दी गई है। अदालत चाहे तो बिना पुलिस का पक्ष सुने भी डिफ़ॉल्ट बेल भी दे सकती थी। इस मामले में पुलिस ने अधूरी चार्जशीट पेश की थी, इसी के चलते अदालत ने पुलिस को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। पूरा चालान देना ही होगा… ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने 193 की धारा 7 का हवाला देते हुए कहा कि यह हम चार्जशीट का पूरा हिस्सा नहीं दे सकते। पुलिस ने 14 अगस्त का चालान पेश किया, इसके 11 दिन बाद 25 अगस्त को एप्लीकेशन दी कि हम पूरी चार्जशीट नहीं दे सकते। 11 दिन बाद इस एप्लीकेशन का क्या अर्थ है। पुलिस को उसी दिन एप्लीकेशन देनी चाहिए थी। ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का हवाला देकर पुलिस दस्तावेज देने से इन्कार नहीं कर सकती। पुलिस दोनों चालान की प्रति हमें दे, ताकि हम अपना जवाब तैयार कर सकें। ज्योति की छवि सुधारने के मीडिया बीफ्रिंग जरूरी… मीडिया ब्रीफिंग रोकने की एप्लीकेशन पर कुमार मुकेश ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में ब्रीफिंग कर ज्योति मल्होत्रा पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए। ज्योति मल्होत्रा को देशद्रोही तक करार दिया जा रहा है। ज्योति के पिता का घर से निकलना दूभर हो गया है। अगर मैं ज्योति के मामले की कवरेज जनता तक नहीं जाएगी तो लोगों में बनी उसकी छवि कैसे ठीक होगी।

कोर्ट से अनुमति लेकर मां बनीं हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री, परिवार में गूंजी किलकारी

हिसार  हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव सरोगेसी से सिंगल मदर (एकल मां) बन गई हैं। उनका बेटा तीन माह का हो गया है। आरती ने बेटे का नाम राव जयवीर सिंह रखा है। माना जा रहा है जयवीर अपने नाना केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगा। स्वास्थ्य मंत्री के परिवार ने आरती के सरोगेसी से सिंगल मदर बनने की सूचना सार्वजनिक नहीं की है। मंत्री के निजी सहायक नवीन यादव ने सरोगेसी से आरती के सिंगल मदर बनने की पुष्टि की है। जयवीर सिंह का लालन-पालन मंत्री आवास पर हो रहा है। केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत की दो बेटियां हैं। आरती राव बड़ी बेटी हैं। उन्होंने साल 2024 के विधानसभा चुनाव में अटेली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। नायब सैनी सरकार में आरती स्वास्थ्य मंत्री हैं। छोटी बेटी का नाम भारती राव है। भारती दो बेटों की मां हैं। वह राजनीति व सुर्खियों से दूर रहती हैं। बड़ी बेटी आरती राव ही पिता की सियासी विरासत को संभाल रही हैं। सरोगेसी से मां बनने के लिए कोर्ट से ली थी अनुमति बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री आरती ने सरोगेसी से सिंगल मदर बनने के लिए पहले कोर्ट से अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद ही पूरी प्रक्रिया अपनाई गई। करीब तीन माह पहले आरती राव के घर बेटे के जन्म की खुशियां आईं। राव तुलाराम की पांचवीं पीढ़ी में अब राव जयवीर सिंह हैं। आरती के दादा राव बीरेंद्र सिंह मार्च 1967 में हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री बने थे। राव बीरेंद्र की सियासी विरासत को उनके बेटे राव इंद्रजीत ने संभाला। इंद्रजीत के भाई भी राजनीति में आए लेकिन ज्यादा सफल नहीं रहे। शुरू से पिता के करीब रही हैं आरती तीन जुलाई 1979 को जन्मीं आरती राव शुरू से पिता राव इंद्रजीत के ज्यादा करीब रही हैं। पिता से प्रेरित होकर ही आरती निशानेबाज बनीं और बाद में राजनीति में आईंं। छह से अधिक बार सार्वजनिक मंच से हरियाणा में भाजपा सरकार दक्षिण हरियाणा में जीत की वजह से बनने की बात कहकर उन्होंने राजनीतिक हलचल मचाई थी। उनके पिता भी हमेशा से अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। आरती 15 बार राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियन रह चुकी हैं।

सरकार ने बढ़ाई सैलरी, 1 जुलाई से हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

चंडीगढ़   हरियाणा सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के कर्मचारियों को एक और बड़ी राहत दी है। सरकार ने उनकी मजदूरी दरों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह संशोधन 1 जून 2025 से लागू होगा। इस संबंध में सरकार ने आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वित्त विभाग ने प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है और इसके तहत मजदूरी दरों में 50 रुपये का इजाफा किया गया है। इस निर्णय का सीधा लाभ प्रदेश के लगभग 1.18 लाख कर्मचारियों को मिलेगा। यह लगातार दूसरा मौका है जब HKRN कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की गई है। जून 2024 में भी 5 प्रतिशत सैलरी वृद्धि लागू की गई थी, जिससे कर्मचारियों की आय में 900 से 1200 रुपये तक का इजाफा हुआ था। वेतन में होगा इतना इजाफा इस वृद्धि से कर्मचारियों की सैलरी में 900 रुपये से लेकर 1200 रुपये की बढ़ोतरी होगी। जिन कर्मचारियों को पांच से दस साल का अनुभव है उनके वेतन में दस फीसदी और जिनका दस साल या उससे ऊपर है उनके वेतन में 20 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। इससे पहले हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मचारियों की जून महीने में 5 प्रतिशत सैलरी बढ़ाई गई थी। बता दे कि हाल ही में हरियाणा सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों की सेवा अवधि 30 सितम्बर, 2025 तक बढ़ाया है। जिलेवार श्रेणी के हिसाब से मिलेगा लाभ यह वेतन वृद्धि जिलावार श्रेणी के हिसाब से लागू होगी। चुंकी हरियाणा सरकार ने जिले को तीन श्रेणियों में बांट रखा है। पहली श्रेणी में गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत, दिल्ली और चंडीगढ़, दूसरी श्रेणी में पानीपत, झज्जर, पलवल, करनाल, अंबाला, हिसार, रोहतक, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर, भिवानी और जींद जिले आते हैं। वहीं, महेंद्रगढ़, फतेहाबाद, सिरसा, नूंह और चरखी दादरी को तीसरी कैटेगरी में रखा गया है। 2023 में हुई थी बड़ी बढ़ोतरी इससे पहले वर्ष 2023 में भी कर्मचारियों के वेतनमान में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई थी। उस समय थर्ड लेवल पर 10 साल अनुभव वाले कर्मचारी का बेस रेट 20,700 रुपये, सेकेंड लेवल का 22,000 रुपये और फर्स्ट लेवल का 18,100 रुपये तय किया गया था।

CM सैनी बोले—कांग्रेस और नेताओं से अच्छी भाषा की उम्मीद कैसे करें

हिसार  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी  जोधपुर पहुंचे. एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है और उसके नेता निराशा व हताशा की स्थिति में हैं. जानकारी के अनुसार, सैनी ने कांग्रेस पर तीखा वार करते हुए कहा कि “कांग्रेस नेताओं का जन्म भ्रष्टाचार की दलदल में हुआ है और राहुल गांधी व तेजस्वी यादव जैसे नेता उसी दलदल में पनपे हैं. इसलिए उनकी भाषा और सोच कभी भी सकारात्मक नहीं हो सकती.” कांग्रेस नेताओं का जन्म भ्रष्टाचार की दलदल में हुआ- CM सैनी  इस मामले में उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना कांग्रेस शासन से करते हुए कहा कि आज मोदी जी के नेतृत्व में पूरी दुनिया भारत को सम्मान की दृष्टि से देख रही है, जबकि कांग्रेस के कार्यकाल में देश को भ्रष्टाचार की नजर से देखा जाता था. इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि “राहुल गांधी वोट चोरी की बात करते हैं, लेकिन वोट चोरी तो कांग्रेस के डीएनए में है. जब सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री बनने के लिए 14 वोट मिले और नेहरू जी को मात्र एक वोट, तब भी कांग्रेस ने वोट चोरी कर नेहरू जी को प्रधानमंत्री बना दिया था.”उन्होंने कहा कि गरीब का बेटा बार-बार प्रधानमंत्री बन रहा है, यही कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं होता. इसी कारण वे मोदी जी की माता जी तक का अपमान करने वाले बयान देते हैं. हमारी पवित्र धरती को कांग्रेस ने कलंकित किया- CM सैनी  इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए. कांग्रेस बार-बार संविधान खतरे में होने की बात करती है, लेकिन देश ने हर बार उनके इस झूठ को नकारा है और आगे भी नकारेगा. उन्होंने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि “जिस पवित्र धरती से महात्मा बुद्ध और चाणक्य जैसे महान संत हुए, जहां गुरु गोविंद सिंह का प्रकाश पर्व हुआ और जहां मां सीता का जन्म हुआ, उस धरती को कांग्रेस ने कलंकित किया है.” जोधपुर में नायब सिंह का यह दौरा भाजपा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और कांग्रेस पर सीधा हमला बोलने के रूप में देखा जा रहा है.

अब नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर, महिलाओं को 2100 रुपये की सुविधा ऑनलाइन

हरियाणा  हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने बीते दिन 25 सितंबर से ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ लागू करने की घोषणा की, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 2,100 रुपये दिए जाएंगें। इस योजना का लाभ 23 साल या उससे अधिक आयु की महिलाओं को मिलेगा। विवाहित और अविवाहित दोनों तरह की महिलाएं होंगी।  बता दें कि पहले चरण में वो परिवार शामिल होंगे, जिनकी सालाना आय 1 लाख रुपये से कम है। पहले चरण में 19 से 20 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिलेगा। ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ लागू करना हरियाणा में बीजेपी के चुनावी वादों में शामिल था। नायब सैनी ने कहा है कि आने वाले छह-सात दिनों में योजना को लेकर एक ऐप भी लॉन्च किया जाएगा। इसकी मदद से पात्र महिलाएं अपने घर पर बैठकर मोबाइल से ही फॉर्म अप्लाई कर पाएंगी।   

भारत की पहली प्रदूषण-रहित ट्रेन का आगाज, हरियाणा से होगी शुरुआत

हरियाणा  भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर सितंबर 2025 में ट्रायल रन के लिए तैयार है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, और यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है।  इसे भारतीय रेलवे की अभूतपूर्व पहल माना जा रहा है। यह पर्यावरण के अनुकूल कदम है। ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली उत्पन्न की जाती है, जिसमें पानी और भाप खर्च होती है। इसका कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण-मुक्त है।    यह ट्रेन 1,200 हॉर्सपावर की क्षमता वाली होगी जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है. अन्य देशों (जैसे जर्मनी) की हाइड्रोजन ट्रेनें आमतौर पर 500-600 हॉर्सपावर की होती हैं। ट्रेन में 8 यात्री कोच और 2 हाइड्रोजन स्टोरेज कोच हैं जो एक बार में 2,638 यात्रियों को ले जा सकती है. 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है। किलो हाइड्रोजन इस ट्रेन को 4.5 लीटर डीजल के बराबर माइलेज देता है. 8-10 कोच खींचने के लिए 2.4 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है, जिसके लिए ट्रेन में दो पावर प्लांट लगाए गए हैं।    ट्रेन का निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, जो 1955 में स्थापित भारत की पहली कोच उत्पादन इकाई है. ट्रेन का डिजाइन लखनऊ के अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा तैयार किया गया है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इस ट्रेन की अनुमानित लागत 82 करोड़ रुपये है. भारतीय रेलवे ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत 35 ऐसी ट्रेनों के लिए 2,800 करोड़ रुपये और बुनियादी ढांचे के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।   

एसआरएस ग्रुप घोटाला: भगोड़े प्रमोटरों पर गुरुग्राम कोर्ट की बड़ी कार्रवाई

गुरुग्राम गुरुग्राम की विशेष अदालत (पीएमएलए) ने एसआरएस ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के प्रमोटरों और निदेशकों (जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर) को नोटिस जारी किया है। विशेष अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए), 2018 के तहत एसआरएस ग्रुप की कंपनियों के प्रमोटरों और निदेशकों को यह नोटिस जारी किया है। ईडी के अनुसार, यह नोटिस धारा 4, एफईओए, 2018 के तहत दायर एक आवेदन के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें इन आरोपियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उनके द्वारा नियंत्रित कंपनियों, सहयोगियों और उनकी 212.73 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने की मांग की गई है। एसआरएस ग्रुप रियल एस्टेट और वित्तीय व्यवसाय में सक्रिय था। इन प्रमोटरों पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति का आपराधिक दुरुपयोग और आपराधिक साजिश जैसे अपराधों का आरोप है, जिसमें उन्होंने होमबायर्स, प्लॉट खरीदारों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को ठगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली ईओडब्ल्यू और सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा दर्ज लगभग 81 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। इन एफआईआर में भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत अनिल जिंदल, जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल, प्रवीण कुमार कपूर और एसआरएस ग्रुप के अन्य निदेशकों तथा प्रमुख कर्मचारियों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। इन लोगों ने निवेश के नाम पर जनता और बैंकों से लगभग 2200 करोड़ रुपए की भारी राशि इकट्ठा की और हाई रिटर्न का वादा करके निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की। ईडी की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों और कंपनियों की पहचान की गई। जांच में पाया गया कि जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे, जिसके बाद 2022 में इस मामले में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। ईडी ने अपराध से प्राप्त संपत्तियों की पहचान की और अब तक इस मामले में 2215.98 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया गया है। ईडी की जांच से पता चला है कि तीनों आरोपी (जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार) भारत छोड़ चुके हैं, जो जॉर्जिया, दुबई और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह रहे हैं। ये आरोपी आपराधिक मुकदमे का सामना न करने के लिए भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कानूनी प्रक्रिया से बच रहे हैं। सभी भगोड़ों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट, लुकआउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। इससे पहले, 6 जून 2025 को विशेष अदालत ने उन्हें भगोड़ा अपराधी घोषित किया था। वर्तमान में जितेंद्र कुमार गर्ग, सुनील जिंदल और प्रवीण कुमार कपूर को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया गुरुग्राम की विशेष अदालत में चल रही है।

हरियाणा में महंगी स्कूली पढ़ाई पर सुरजेवाला का तंज– ‘ये है सैनी का शिक्षा मॉडल’

चंडीगढ़ कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार की एजेंसी 'राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण' (NSS) की रिपोर्ट- 2025 के मुताबिक ही हरियाणा में स्कूली शिक्षा, देशभर के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा महंगी है। इस संबध में सुरजेवाला ने अपने x पर पोस्ट शेयर करते हुए सरकार पर कटाक्ष किया ।  राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के 80वें दौर के व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण: शिक्षा, 2025 के अनुसार, हरियाणा में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान स्कूली शिक्षा पर प्रति छात्र औसत खर्च 25,720 रुपये है, जो चंडीगढ़ के बाद दूसरे स्थान पर है और राष्ट्रीय औसत से दोगुना से भी ज़्यादा है। चंडीगढ़ में स्कूली शिक्षा पर प्रति शैक्षणिक वर्ष 49,711 रुपये खर्च होते हैं। पंजाब (22,692 रुपये) और हिमाचल प्रदेश (18,305 रुपये) के मामलों में, यह राशि काफी कम है। राष्ट्रीय औसत 12,616 रुपये प्रति शैक्षणिक वर्ष है।  हरियाणा में स्कूली शिक्षा पर लड़कों पर होने वाला खर्च लड़कियों की तुलना में अधिक है। लड़कों के लिए वार्षिक खर्च 27,697 रुपये और लड़कियों के लिए 23,465 रुपये है।राज्य के सरकारी स्कूलों में, बच्चों की स्कूली शिक्षा पर होने वाला खर्च काफी कम यानी 4,479 रुपये प्रति शैक्षणिक वर्ष है। हालाँकि, निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में यह खर्च बढ़कर 48,636 रुपये हो जाता है, और निजी-गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए यह 39,015 रुपये है।   हरियाणा में निजी संस्थानों में पढ़ने वाले स्कूली छात्रों की संख्या ज़्यादा है। यहाँ 41.2 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में, 11.9 प्रतिशत निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में और 45.7 प्रतिशत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों (मान्यता प्राप्त) में नामांकित हैं। हरियाणा में प्रति छात्र औसत व्यय की मदवार जाँच करने पर पता चला कि पाठ्यक्रम शुल्क पर 16,405 रुपये (63.8 प्रतिशत) खर्च किए गए। इसकी तुलना में, परिवहन पर 3,633 रुपये (14.2 प्रतिशत) खर्च किए गए; यूनिफ़ॉर्म पर 1,966 रुपये (7.6 प्रतिशत), पाठ्यपुस्तकों और स्टेशनरी पर 2,852 रुपये (11.1 प्रतिशत) और अन्य खर्चों पर 865 रुपये (3.4 प्रतिशत) खर्च किए गए। हरियाणा में निजी कोचिंग का चलन राष्ट्रीय औसत से कम है। हरियाणा में विभिन्न स्तरों पर, चालू शैक्षणिक वर्ष के दौरान केवल 11 प्रतिशत छात्र निजी कोचिंग ले रहे थे या ले चुके थे। पूरे भारत में यह आँकड़ा 27 प्रतिशत था, जबकि चंडीगढ़ में यह 32.9 प्रतिशत और पंजाब में 26.8 प्रतिशत था। हिमाचल प्रदेश में यह दर हरियाणा से कम यानी 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई। इस सर्वेक्षण में कौशल विकास, कला, नृत्य, संगीत कक्षाओं जैसी पाठ्येतर गतिविधियों और खेलों के लिए कोचिंग को शामिल नहीं किया गया। हरियाणा में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान प्रति छात्र निजी कोचिंग पर औसत खर्च 1,366 रुपये है, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह और भी कम यानी 437 रुपये है। चंडीगढ़ में यह 5,650 रुपये और पंजाब में 1,732 रुपये है। अखिल भारतीय औसत 2,409 रुपये है। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर, हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में निजी कोचिंग पर औसत खर्च 7,857 रुपये था, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह आँकड़ा 9,950 रुपये था। चंडीगढ़ में कोचिंग के लिए यहश में एक शैक्षणिक वर्ष के लिए मात्र 1,135 रुपये थी।  20,688 रुपये, पंजाब में 2,307 रुपये और हिमाचल प्रदे