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गुरु-शिष्य परंपरा योजना से पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा, हरियाणा सरकार देगी छात्रवृत्ति

फरीदाबाद. गुरु शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत गुरु, संगतकार और शिष्यों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ पाने के लिए लुप्त होती विधाओं का प्रशिक्षण देने वाले गुरुओं और शिष्यों की जानकारी कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग को भेजी जाए। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा प्रदेश में लुप्त होती विधाओं का प्रशिक्षण देने वालों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। क्या होगी छात्रवृत्ति की राशि? गुरु शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत गुरु को प्रति माह 7500 रुपये, प्रति संगतकार को प्रति माह 3750 रुपये और प्रत्येक शिष्य को प्रति माह 1500 रुपये की राशि छात्रवृत्ति के तौर पर प्रदान की जाएगी। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र नागरिकों तक पहुंचाने के लिए गुरुओं तथा शिष्यों के नामों की सूची कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा को भेजी जाए, ताकि भारत सरकार की इस नीति के प्रति जागरूक होकर अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। इस योजना के बारे में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सेक्टर-सात, एससीओ नंबर-29, दूसरा तल स्थित कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

खनन माफिया पर प्रशासन की सख्ती, यमुना नगर में 100+ वाहन पकड़े गए

यमुना नगर. यमुनानगर में लगातार उजागर हो रहे अवैध खनन के नेटवर्क पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। दैनिक जागरण द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों के बाद करनाल स्पेशल टास्क फोर्स और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने इंद्री और लाडवा क्षेत्र में अवैध खनन सामग्री से भरे 100 से अधिक वाहनों को पकड़कर खनन माफिया पर बड़ा शिकंजा कसा है। जांच में अब तक 25 से अधिक वाहनों के पास ई-रवन्ना, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई चालक हाईवे और ढाबों पर वाहन छोड़कर फरार हो गए। बेलगढ़ क्षेत्र, यमुना नदी और आसपास के इलाकों में अवैध खनन नेटवर्क चल रहे है। खबरों में बार-बार सामने लाया गया कि किस प्रकार यमुनानगर से प्रतिदिन भारी संख्या में खनन सामग्री से भरे वाहन प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जिले में 20 से अधिक माइनिंग नाके होने के बावजूद अवैध खनन सामग्री से भरे वाहन यमुनानगर से निकलकर करनाल तक कैसे पहुंच गए। यदि सीमाओं पर निगरानी और जांच व्यवस्था सक्रिय थी तो इतने बड़े स्तर पर वाहन पकड़े जाने से पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए अधिकांश वाहनों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिले। कई वाहनों के नंबर, रजिस्ट्रेशन और परिवहन रिकॉर्ड की जांच भी की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि अवैध खनन का यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैध खनन कारोबारियों का कहना है कि एक ओर वे करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार से खनन ब्लॉक लेते हैं और नियमित राजस्व जमा करते हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन माफिया सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार अवैध खनन के कारण वैध एजेंसियों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में 30 के करीब माइनिंग ब्लॉक समय पर भुगतान न होने और अन्य कारण से पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य ब्लॉक भी बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो वैध खनन उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है। जिले में केवल दो ही साइट चल रही है। यमुना सेवा समिति के प्रधान किरण पाल राणा का कहना है कि करनाल में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि यमुनानगर से संचालित अवैध खनन का नेटवर्क केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा दूसरे जिलों तक फैला हुआ है। मामले की जांच होनी चाहिए। जिन नाको से वाहन निकले उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

हरियाणा: ग्रामीण विकास पर फोकस, फतेहाबाद को मिलेगा करोड़ों का बजट

 फतेहाबाद  जिले में विकास कार्यों को गति देने के लिए शनिवार को जिला विकास एवं निगरानी समिति (डीडीएमसी) की बैठक आयोजित होगी। इस बैठक की अध्यक्षता सामाजिक न्याय, अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी करेंगे। बैठक में वर्ष 2026-27 की जिला योजना के तहत तैयार वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी जाएगी। जिला योजना के अंतर्गत जिले के लिए कुल 14.86 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसमें 8.91करोड़ रुपये सामान्य वर्ग तथा 5.94 करोड़ रुपये अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के लंबित कार्यों के 1.56 करोड़ रुपये के बिलों के भुगतान के बाद शेष 13.29 करोड़ रुपये की राशि जिले में विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। बैठक को जिले की विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस बैठक में प्रस्तुत होने वाले प्रस्तावित बजट के अनुसार इस बार भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण इलाकों के लिए 10.33 करोड़ रुपये जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए 2.95 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। ब्लाक स्तर पर सबसे अधिक 2.39 करोड़ रुपये फतेहाबाद ब्लाक को मिलने का प्रस्ताव है। इसके अलावा टोहाना ब्लाक के लिए 1.81 करोड़ रुपये, रतिया के लिए 1.52 करोड़ रुपये, भट्टू कलां के लिए 1.46 करोड़ रुपये, भूना के लिए 1.38 करोड़ रुपये, नागपुर के लिए 1.02 करोड़ रुपये तथा जाखल ब्लाक के लिए 72.53 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। शहरी निकायों में खर्च होगी इतनी राशि वहीं, शहरी निकायों के विकास कार्यों के लिए भी अलग से बजट तय किया गया है। नगर परिषद फतेहाबाद को 99.88 लाख रुपये, टोहाना को 52.43 लाख रुपये, भूना को 42.47 लाख रुपये, रतिया को 39.90 लाख रुपये तथा जाखल को 10.99 लाख रुपये दिए जाने का प्रस्ताव है। बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अंतिम मंजूरी दी जाएगी। बता दें कि सड़कों, गलियों, पेयजल, सामुदायिक भवनों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को इस बजट से गति मिलेगी। पिछले कार्यों की भी होगी समीक्षा बैठक में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुए विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी रखी जाएगी। रिकार्ड के अनुसार पिछले वर्ष भी जिले को 14.86 करोड़ रुपये का बजट मिला था। 31 मार्च 2026 तक 13.54 करोड़ रुपये की राशि विकास कार्यों पर खर्च की जा चुकी है। इसमें सामान्य वर्ग के कार्यों पर 7.65 करोड़ रुपये तथा अनुसूचित वर्ग के विकास कार्यों पर 5.88 करोड़ रुपये व्यय किए गए। पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे भौतिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष कुल 142 कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 80 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 119 कार्य अभी विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। बैठक में इन परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश भी मंत्री द्वारा दिए जाएंगे।साथ ही 10 जुलाई 2025 को हुई पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि भी सदन में की जाएगी। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रहेगी मौजूदगी डीडीएमसी की इस बैठक में शामिल होने के लिए प्रशासन की तरफ से जिले के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि को निमंत्रण भेजा गया है। बैठक में राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, सिरसा लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा, फतेहाबाद विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, रतिया विधायक जरनैल सिंह तथा टोहाना विधायक परमवीर सिंह, जिप चेयरपर्सन सुमन खिचड़ को आमंत्रित किया गया है।  

चंडीगढ़–पंचकूला बैंक घोटाले में बड़ा खुलासा: फर्जी कंपनियों से सरकारी धन की हेराफेरी

चंडीगढ़/पंचकूला  हरियाणा के बहुचर्चित 590 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचकूला की विशेष CBI अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल 15 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, शेल कंपनियों के संचालक और निजी व्यक्ति शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में इस मामले में अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। टॉप ब्यूरोक्रेसी तक पहुंची जांच की आंच घोटाले की परतें खोलने के लिए CBI ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए हरियाणा की शीर्ष नौकरशाही तक पूछताछ शुरू कर दी है। इसी क्रम में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से भी पूछताछ की गई है, जो लंबे समय तक पंचायत विभाग में आयुक्त एवं सचिव पद पर कार्यरत रहे। CBI यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी खातों से करोड़ों की निकासी के दौरान किन अधिकारियों को जानकारी थी और किस स्तर पर निगरानी में चूक हुई। फर्जी कंपनियों से करोड़ों की हेराफेरी का खेल CBI की चार्जशीट के अनुसार, यह पूरा घोटाला योजनाबद्ध तरीके से बैंकिंग सिस्टम और फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया गया। जांच में सामने आया है कि: करीब 6 बैंक अधिकारी 3 सरकारी कर्मचारी 2 शेल कंपनियों के संचालक/साझेदार और अन्य निजी व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क में शामिल थे। आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। कथित मास्टरमाइंड और बैंकिंग नेटवर्क की भूमिका CBI ने इस घोटाले का मास्टरमाइंड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ (सेक्टर-32) के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि को बताया है, जिसने बाद में AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ज्वाइन किया था। आरोप है कि उसने फर्जी कंपनियों के नाम से बैंक खाते खुलवाए,सरकारी धन को इन खातों में डायवर्ट किया,फर्जी चेक और भुगतान निर्देशों के जरिए करोड़ों की हेराफेरी की. एक अन्य पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय पर भी रिभव के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को चलाने का आरोप है। पत्नी और परिजनों तक फैला नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया है कि धन के लेन-देन का फायदा निजी कंपनियों तक पहुंचा। स्वाति सिंगला, जो अभय की पत्नी हैं और एक कंपनी की मालिक हैं, उनके खाते में कथित रूप से करीब 300 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। उनके भाई अभिषेक सिंगला को भी मनी लॉन्ड्रिंग और फंड ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल बताया गया है। सरकारी सिस्टम पर सवाल घोटाले में सरकारी तंत्र की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन के वित्त निदेशक अमित दीवान और मार्केटिंग बोर्ड के वित्त नियंत्रक राजेश सांगवान समेत कई अधिकारियों पर रिश्वत लेकर अवैध लेनदेन को नजरअंदाज करने के आरोप हैं। ED की कार्रवाई भी तेज इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। मास्टरमाइंड रिभव ऋषि को 10 दिन की रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां ED ने 4 दिन की और हिरासत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने केवल 1 दिन की अनुमति दी। ED का कहना है कि रिभव ने फर्जी कंपनियों के जरिए सरकारी खातों से धन निकालकर बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग की। जांच अभी जारी, और खुलासों की उम्मीद CBI और ED दोनों एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह घोटाला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं है और आने वाले समय में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

खेत के रास्ते में लगाए खंभे-ट्रांसफार्मर, CM Nayab Saini ने मांगी जांच रिपोर्ट

 चंडीगढ़ जनसंवाद के मंच पर जब एक किसान अपनी शिकायत लेकर पहुंचा तो मामला सिर्फ रास्ता बंद होने तक सीमित नहीं रहा। शिकायत में आरोप था कि खेत तक जाने वाले रास्ते के बीच बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर लगवा दिए गए, जिससे आने-जाने में परेशानी खड़ी हो गई। इतना ही नहीं, विरोध करने पर धमकियां मिलने की बात भी सामने आई। शिकायत सुनते ही मुख्यमंत्री ने मंच से ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए। दरअसल, हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini गुरुवार को कुरुक्षेत्र के लाडवा स्थित शिवाला रामकुंडी में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में आमजन की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान गांव बकाली के एक शिकायतकर्ता ने बताया कि कई वर्ष पहले खरीदी गई करीब 7 एकड़ जमीन के रास्ते में बिजली विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से खंभे और ट्रांसफार्मर लगा दिए गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अब उसे जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस एसडीओ ने खेत के रास्ते के बीच में खंभे और ट्रांसफार्मर लगवाए, उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए। साथ ही पूरे मामले की जांच एसडीएम लाडवा को सौंपने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को भी शिकायतकर्ता को धमकी देने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए। जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आम नागरिकों को दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश का विकास और हर नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुल 338 शिकायतें सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। स्कूल अपग्रेड करने, ग्रामीण सड़कों के निर्माण, ट्रांसफार्मर बदलने और आरटीई के तहत बच्चों के दाखिले जैसे मामलों पर भी संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के आदेश दिए गए। मुख्यमंत्री ने लाडवा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पेयजल, सड़क, आवास और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि लाडवा विधानसभा क्षेत्र में बीते वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं और बाकी परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी है।

नायब सैनी बोले: पंजाब-हरियाणा सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं

 चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने पंजाब और हरियाणा के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों राज्यों के संबंध को सिर्फ पड़ोसी राज्यों का रिश्ता नहीं, बल्कि “नाखून और उंगली” जैसा बताया। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब की राजनीति को लेकर भी लगातार चर्चा तेज है। एक इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पंजाब को करीब से समझने और देखने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि पंजाब ओबीसी मोर्चा का प्रभारी रहते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया और शायद ही कोई ऐसा चुनाव रहा हो, जहां उन्हें जाने का अवसर न मिला हो। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पंजाब और हरियाणा के सामाजिक व सांस्कृतिक जुड़ाव को बेहद मजबूत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की जमीन एक है, छत एक है और दोनों का सफर भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब-हरियाणा का रिश्ता सामान्य नहीं है, यह नाखून और उंगली का रिश्ता है।” उनके इस बयान को दोनों राज्यों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने राजनीतिक स्तर पर पंजाब की मौजूदा सरकार पर निशाना साधने से भी परहेज नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की सोच आम आदमी पार्टी से अलग है। मुख्यमंत्री का आरोप था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आम लोगों को अपमानित करने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जागरूक जनता भ्रष्टाचार में लिप्त आम आदमी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाएगी। साथ ही कहा कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान हरियाणा की उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि प्रदेश ने खेल, कृषि, उद्योग और विकास के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं, पंजाब और हरियाणा के रिश्ते पर दिया गया उनका “नाखून और उंगली” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

पेड़ों की कटाई पर हरियाणा कोर्ट नाराज, गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट पर उठाए बड़े सवाल

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी 'यदि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन ही नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी आपकी मदद नहीं करेगा।' दरअसल गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए 489 और पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। कंपनी ने अदालत को बताया कि इससे पहले करीब 1700 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जा चुकी है और बदले में 7300 पौधे लगाए गए हैं। जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि यह लगभग 28 किलोमीटर लंबी मेट्रो विस्तार परियोजना है, जिसकी लागत 5000 करोड़ रुपये से बढ़कर 7000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक से वित्तीय सहायता पर बातचीत चल रही है और यदि समय पर कार्य नहीं हुआ तो यह सहायता प्रभावित हो सकती है। कंपनी ने दलील दी कि गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। हालांकि अदालत ने पूछा कि जब मेट्रो का ट्रैक एलिवेटेड है और पिलर सीमित जगह लेते हैं तो फिर इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत क्यों है। अदालत ने निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ों की कटाई की जाए। साथ ही संबंधित डीएफओ को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए कि 489 प्रस्तावित पेड़ों में से जितने अधिक संभव हों, उन्हें बचाया जाए ताकि क्षेत्र में हरित आवरण बना रहे। जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि मेट्रो के एलिवेटेड स्टेशन, पिलर और डिपो निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई जरूरी है। कंपनी ने दावा किया कि वह “एक के बदले दस” के अनुपात में पौधारोपण कर रही है और अब तक 7300 पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनकी “100 प्रतिशत सर्वाइवल रेट” है। यह पौधा रोपण केएमपी हाईवे के पास लगभग 21 किलोमीटर दूर किया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अदालत पहले ही कह चुकी है कि प्रतिपूरक पौधरोपण यथासंभव पांच किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि शहर को “कंक्रीट जंगल” बनने से बचाया जाए। हालांकि अदालत ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व और सार्वजनिक हित को देखते हुए सशर्त राहत देते हुए 489 पेड़ों की कटाई पर लगी रोक में आंशिक ढील दे दी। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ काटे जाएं और जिन पेड़ों को बचाया जा सकता है, उन्हें हर हाल में संरक्षित किया जाए। अदालत ने जीएमआरएल को पहले किए गए वनीकरण कार्य की मासिक सर्वाइवल रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई गई या समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो मामले को स्वत सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाएगी।

विश्व मधुमक्खी दिवस पर अनोखा स्टॉल: शहद का सिरका देख हैरान रह गए मुख्यमंत्री

झज्जर  विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर बीते बुधवार को पंचकूला में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उस समय बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब सूबे के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी झज्जर के प्रगतिशील मधुमक्खी पालक विनय फोगाट के स्टाल पर पहुंचे। वहां प्रदर्शित अनूठे उत्पादों को देखकर मुख्यमंत्री भी हैरान रह गए और उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, शहद का सिरका… यह तो मैंने पहले कभी सुना ही नहीं! कन्वेंशन सेंटर, रेड बिशप, सेक्टर-1 में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को विनय फोगाट द्वारा तैयार किया गया ''शहद का सिरका'' (हनी विनेगर) और ''बी प्रोबायोटिक'' इतना पसंद आया कि वे इसे विशेष रूप से अपने साथ लेकर गए। क्या खास है शहद के सिरके और बी प्रोबायोटिक में? प्रदर्शनी से वापिस लौटे विनय फोगाट ने बातचीत के दौरान उत्पादों की खासियत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। शहद का सिरका (हनी विनेगर): यह आम सिरके की तरह तीखा नहीं होता। इसे शुद्ध शहद को लंबे समय तक प्राकृतिक रूप से फरमेंट (किण्वित) करके तैयार किया जाता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने, वजन नियंत्रित करने और शरीर को डिटाक्सिफाई करने में बेहद असरदार माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीआक्सीडेंट्स होते हैं। बी प्रोबायोटिक: यह मधुमक्खियों के प्राकृतिक स्लाइवा (लार) और शहद के कॉम्बिनेशन से तैयार एक ऐसा अनूठा उत्पाद है, जो पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित हो रहा है। 5 राज्यों का सफर और 18 तरह का शहद दरअसल, झज्जर जिले के मलिकपुर गांव के रहने वाले शहद उत्पादक विनय फोगाट आज क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुके हैं। उनके पास मौजूदा समय में करीब 1,100 मधुमक्खी कालोनियां हैं, जिनसे वे सालाना लगभग 38 से 40 टन शहद का रिकार्ड उत्पादन करते हैं। विनय फोगाट ने बताया कि वे केवल एक या दो नहीं, बल्कि 18 अलग-अलग तरह के शहद और उत्पाद तैयार करते हैं। इसके लिए वे मौसम और फूलों के खिलने के चक्र के हिसाब से अपने बी-फार्म को हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश के इलाकों में शिफ्ट करते हैं। उनके पिटारे में सरसों, नीम, शीशम, कीकर, हिमाचल व कश्मीर का पहाड़ी शहद, कश्मीर का एकेशिया, सूरजमुखी, सौंफ और जामुन का शहद प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा वे शहद से गुलकंद, हनी अर्क, बी प्रोपोलिस टिंक्चर और घुटनों के दर्द की विशेष जेल भी तैयार करते हैं। फसलों की सच्ची मित्र हैं मधुमक्खियां स्टाल के दौरे के दौरान विनय फोगाट ने मुख्यमंत्री के सामने किसानों से रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा केमिकल और पेस्टीसाइड्स के अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारी सबसे अच्छी मित्र कीट मधुमक्खियां बहुत तेजी से मर रही हैं। जबकि सच्चाई यह है कि जहां भी मधुमक्खी के बाक्स रखे जाते हैं, उसके 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में क्रास-पालिनेशन (परागण) के जरिए फसलों की पैदावार ढाई से तीन क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बढ़ जाती है। वैज्ञानिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि मधुमक्खियों के पॉलिनेशन से तिलहनी फसलों में तेल के भीतर सल्फर कंटेंट 10 से 15% तक बढ़ जाता है। साथ ही, मधुमक्खियां अपने स्लाइवा (लार) से फूलों के अंदर जो यीस्ट छोड़ती हैं, उससे फसलों में प्राकृतिक मिनरल्स की मात्रा में भारी इजाफा होता है।  

डिजिटल ट्रांसफर सिस्टम लागू, 6884 पुलिसकर्मियों को मिली मनपसंद पोस्टिंग

 करनाल  हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।

पुलिस विभाग में बड़ा बदलाव, हरियाणा में हजारों तबादले अब ऑनलाइन प्रक्रिया से

करनाल. हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।