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बजट घटा तो बढ़ेगी मुश्किलें: कुमारी सैलजा ने उठाए सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

चंडीगढ़ सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार के बजट 2026-27 पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से स्पष्ट है कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2013-14 में कांग्रेस सरकार के समय कुल बजट खर्च का 21.77 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार के 2026-27 के बजट में यह घटकर मात्र 10.80 प्रतिशत रह गया है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रकार की कटौती यह दर्शाती है कि सरकार की प्राथमिकताओं में शिक्षा कहीं नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हरियाणा के लगभग 90 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल और हेडमास्टर के पद खाली पड़े हैं, जिससे स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक वातावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जब विद्यालयों में नेतृत्व ही नहीं होगा तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल सकेगी। कुमारी सैलजा ने प्रदेश की विश्वविद्यालयों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में लगभग 50 प्रतिशत टीचिंग पोस्ट खाली हैं, चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी भिवानी में 69 प्रतिशत, चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय सिरसा में लगभग 60 प्रतिशत तथा सीआरएसयू जींद में भी करीब 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। इससे साफ है कि प्रदेश की उच्च शिक्षा भी गंभीर संकट से गुजर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की नीति पर काम कर रही है ताकि लोगों का भरोसा सरकारी स्कूलों से खत्म हो जाए और निजी शिक्षा संस्थानों को बढ़ावा मिले। यदि सरकार वास्तव में शिक्षा को लेकर गंभीर होती तो खाली पदों को तुरंत भरती, विद्यालयों के ढांचे को मजबूत करती और शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी करती। कुमारी सैलजा ने कहा कि बजट 2026-27 में किसानों के साथ भी अन्याय किया गया है। विशेष रूप से कपास किसानों के बजट में भारी कटौती की गई है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट विकास का रोडमैप नहीं बल्कि जुमलों और भाषणों का पुलिंदा है। शिक्षा, किसान और युवाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। सांसद लेंगी सिरसा में दिशा की बैठक सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा 6 मार्च को सुबह 10 बजे सिरसा के पंचायत भवन में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता करेंगी। इससे पहले वह सुबह 9:30 बजे पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, सिरसा में आमजन से मुलाकात कर लोगों की समस्याएं सुनेंगी। बैठक में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत जिले में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी। इसमें जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा समिति के सदस्य उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा कुमारी सैलजा 6 मार्च को दोपहर 3 बजे जींद के डीआरडीए हॉल में आयोजित दिशा की बैठक की अध्यक्षता करेंगी तथा 7 मार्च को सुबह 11 बजे जिला बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कोर्ट परिसर, बार रूम, फतेहाबाद पहुंचेंगी।

स्केटिंग करते 10 हजार किमी की धार्मिक यात्रा पर निकले पुनीत सिंह

समालखा. पंजाब के कपूरथला जिले के गांव सुल्तानपुर लोधी का 19 वर्षीय युवक पुनीत सिंह स्केटिंग करते हुए पूरे देश को नापने के संकल्प के साथ 10 हजार किलोमीटर की धार्मिक यात्रा पर निकला है। करीब दस दिन पहले शुरू हुई इस यात्रा के दौरान लगभग 300 किलोमीटर का सफर तय कर जब वह समालखा पहुंचा तो जीटी रोड स्थित श्री गुरु गोबिंद सिंह गुरुद्वारा साहिब में निफा संस्था की ओर से जोरदार स्वागत किया गया। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए निफा संस्था के प्रधान संदीप शर्मा ने बताया कि पुनीत सिंह इससे पहले भी स्केटिंग करते हुए पांच तख्त साहिब की धार्मिक यात्रा पूरी कर चुके हैं। इस बार वह पहले से भी बड़ी और चुनौतीपूर्ण यात्रा पर निकले हैं, जो पंजाब से शुरू होकर अरुणाचल प्रदेश तक जाएगी और करीब 10 हजार किलोमीटर लंबी होगी। मीडिया से बातचीत में पुनीत सिंह ने बताया कि उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने का संदेश देना और सिख धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करना है। उन्होंने कहा कि देशभर में युवाओं को सकारात्मक राह दिखाने के लिए यह पहल की गई है। इस मौके पर निफा संस्था के सदस्यों ने पुनीत सिंह को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया और शुभकामनाएं देते हुए उनकी सुरक्षित और सफल यात्रा की कामना की। कार्यक्रम में निफा समालखा के सचिव देवेन्द्र पाल सिंह, राजेंद्र मनचंदा, डॉ. जोगिंदर गाहल्याण, प्रो. अशोक पांचाल, सौरभ मित्तल, सुरेश मित्तल, पंकज मल्होत्रा, भारत भूषण, परमिंदर भगत, गुरुद्वारा प्रबंधक सरदार गोपाल सिंह, निफा महिला विंग कोऑर्डिनेटर मनिंदर कौर, प्रियंका शर्मा, निशा मल्होत्रा, दिलजीत सिंह, सरदार जगतार सिंह बिल्ला व सरदार जिम्मी सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

हरियाणा के पंचायत उप-चुनाव की मतदाता सूची में 9 मार्च तक दर्ज होगी आपत्ति

गुड़गांव. राज्य निर्वाचन आयोग हरियाणा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जिला में पंचायत उप-चुनाव 2026 के तहत मतदाता सूची तैयार की जा रही है। भविष्य में जिला की 11 पंचायतों तथा सोहना पंचायत समिति में एक वार्ड में उप-चुनाव करवाए जाने हैं। मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन 02 मार्च को किया जा चुका है। 09 मार्च तक दावे व आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी अजय कुमार ने बताया कि पंचायती राज संस्थानों की वोटर लिस्ट तैयार करने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम जारी किया गया है। 19 फरवरी से 28 तक वार्ड अनुसार वोटर लिस्ट का प्रारूप तैयार किया गया। इसके उपरांत 2 मार्च को प्रारूप वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रकाशित वोटर लिस्ट से सम्बंधित दावे और आपत्तियां 9 मार्च तक दर्ज की जाएगी, जिनका निपटारा 12 मार्च तक होगा। अपील दायर करने की अंतिम तारीख 16 मार्च है, और अपील का निपटारा 19 मार्च तक होगा। अंतिम वोटर लिस्ट 27 मार्च को प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी, ताकि पंचायत चुनाव निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न हो सकें। निर्धारित समय तक अगर किसी ने अपनी आपत्ति तथा दावे दर्ज नहीं करवाए तो उसके बाद किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं की जाएगी।

हरियाणा के युवाओं को HSSC देगा मुफ्त यात्रा पास की सुविधा

चंडीगढ़. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) अब भर्ती परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों को मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान करेगा। इसके तहत सभी 23 जिलों और 90 विधानसभा हलकों में आदर्श परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे उम्मीदवारों को परीक्षा देने के लिए दूर-दराज के शहरों या सेक्टरों में यात्रा करने की परेशानी कम हो जाएगी। HSSC के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने एक्स हैंडल पर यह जानकारी दी है। 1. हरियाणा देश का पहला जो प्रदेश के 23 जिलों में 90 आदर्श परीक्षा केंद्र बनाएगा। 2. आयोग द्वारा आयोजित सभी परीक्षा में अभ्यर्थियों को एक विशेष पोर्टल के माध्यम से फ्री बस सुविधा प्रदान की जाएगी। https://t.co/hNB1DvzQsI उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से अभ्यर्थी अपनी यात्रा के लिए पंजीकरण कर सकेंगे और उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए फ्री बस सुविधा दी जाएगी। सिर्फ इतना ही नहीं, आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि अभ्यर्थियों को यह सुविधा उनके एडमिट कार्ड पर भी उपलब्ध हो। 

किसानों के लिए खुशखबरी: हरियाणा में रबी फसलों की खरीद शुरू, MSP के अनुसार भुगतान होगा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 की फसलों की खरीद प्रक्रिया घोषित कर दी है। राज्य में मसूर की खरीद 20 मार्च से आरंभ होकर 30 अप्रैल तक होगी, जबकि सरसों की खरीद 28 मार्च से आरंभ होकर एक मई तक संचालित होगी। चने की खरीद एक अप्रैल से आरंभ होगी, जो कि 10 मई तक चलेगी। ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद 15 मई से 20 जून तक और सूरजमुखी की खरीद एक जून से 30 जून तक की जाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने  चंडीगढ़ में सीजन 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत सरसों, चना, मसूर, सूरजमुखी तथा ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को लेकर किए जा रहे खरीद प्रबंधों की समीक्षा की। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्ष 2025-26 में प्रमुख फसलों के रकबे और उत्पादन में वृद्धि हुई है। सरसों का उत्पादन लगभग 13.17 लाख टन होने का अनुमान है। सूरजमुखी का उत्पादन 0.70 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि चना और मसूर के उत्पादन में भी सुधार दर्ज किया गया है। ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन 98 टन तक बढ़ने का अनुमान है। मुख्य सचिव ने उच्च उत्पादन अनुमानों पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि समयबद्ध खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को बिना किसी विलंब के लाभकारी मूल्य मिल सके। साथ ही, किसानों में एमएसपी और खरीद प्रक्रिया के संबंध में व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जाए। बैठक में चालू सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की भी समीक्षा की गई। सरसों के लिए एमएसपी 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 5,875 रुपये, मसूर के लिए 7,000 रुपये, सूरजमुखी के लिए 7,721 रुपये तथा ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए 8,768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। 28 मार्च से होगी सरसों की सरकारी खरीद सरसों की सरकारी खरीद 28 मार्च से शुरू होगी और 1 मई तक अनाज मंडियों में सरसों को खरीदा जाएगा. चने की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होकर 10 मई तक चलेगी जबकि ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद 15 मई से 20 जून तक और सूरजमुखी की खरीद 1 जून से 30 जून तक चलेगी. चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत सरसों, चना, मसूर, सूरजमुखी तथा ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को लेकर किए जा रहे खरीद प्रबंधों की समीक्षा बैठक बुलाई थी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि समयबद्ध तरीके से खरीद सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को बिना किसी देरी के MSP का लाभ मिल सके. साथ ही, किसानों में MSP और खरीद प्रक्रिया के संबंध में व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जाए. यह रहेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बैठक में चालू सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की भी समीक्षा की गई. सरसों के लिए MSP 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 5,875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर के लिए 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल, सूरजमुखी के लिए 7,721 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए 8,768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. पूर्व वर्षों की खरीद की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा ने मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत प्रभावी खरीद सुनिश्चित की है। वर्ष 2024-25 में 8.12 लाख टन से अधिक सरसों की खरीद की गई। वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार की स्वीकृतियों के अनुरूप खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने एजेंसियों को निर्देश दिए कि वे मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत निर्धारित 25 प्रतिशत खरीद सीमा सहित सभी मानकों का कड़ाई से पालन करें। यदि आवश्यक हो तो किसानों के हित में इस सीमा से अधिक खरीद के लिए भी आवश्यक वित्तीय प्रविधान सुनिश्चित करें।

हरियाणा में 20 मार्च से एमएसपी पर होगी रबी फसलों की खरीद

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने रबी विपणन सीजन 2026-27 की फसलों की खरीद प्रक्रिया घोषित कर दी है। राज्य में मसूर की खरीद 20 मार्च से आरंभ होकर 30 अप्रैल तक होगी, जबकि सरसों की खरीद 28 मार्च से आरंभ होकर एक मई तक संचालित होगी। चने की खरीद एक अप्रैल से आरंभ होगी, जो कि 10 मई तक चलेगी। ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद 15 मई से 20 जून तक और सूरजमुखी की खरीद एक जून से 30 जून तक की जाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मंगलवार को चंडीगढ़ में सीजन 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत सरसों, चना, मसूर, सूरजमुखी तथा ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को लेकर किए जा रहे खरीद प्रबंधों की समीक्षा की। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्ष 2025-26 में प्रमुख फसलों के रकबे और उत्पादन में वृद्धि हुई है। सरसों का उत्पादन लगभग 13.17 लाख टन होने का अनुमान है। सूरजमुखी का उत्पादन 0.70 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि चना और मसूर के उत्पादन में भी सुधार दर्ज किया गया है। ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन 98 टन तक बढ़ने का अनुमान है। मुख्य सचिव ने उच्च उत्पादन अनुमानों पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि समयबद्ध खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को बिना किसी विलंब के लाभकारी मूल्य मिल सके। साथ ही, किसानों में एमएसपी और खरीद प्रक्रिया के संबंध में व्यापक जागरूकता सुनिश्चित की जाए। बैठक में चालू सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की भी समीक्षा की गई। सरसों के लिए एमएसपी 6,200 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 5,875 रुपये, मसूर के लिए 7,000 रुपये, सूरजमुखी के लिए 7,721 रुपये तथा ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए 8,768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

संजय भाटिया ने सीएम सैनी की मौजूदी में भरा राज्यसभा के लिए नामांकन

चंडीगढ़. बीजेपी के संजय भाटिया ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी मौजूद रहे। संजय भाटिया की गिनती केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल के करीबी नेताओं में होती है। पानीपत के रहने वाले संजय भाटिया 2019 के लोकसभा चुनाव में करनाल सीट से सांसद चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा को उस चुनाव में 6 लाख 56 हजार 142 वोटों के भारी अंतर से हराया था, जो हरियाणा के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करनाल सीट से संजय भाटिया के स्थान पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को टिकट दिया था। मनोहर लाल तब लोकसभा का चुनाव जीते और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बने थे। तब के बाद से संजय भाटिया को कभी संगठन तो कभी सरकार में एडजेस्ट करने की कोशिश हो रही थी, जो अब जाकर पूरी हुई है।

ग्रामीण विकास को नई रफ्तार: हरियाणा के 111 गांवों में बनेंगी स्मार्ट गलियां

चंडीगढ़ हरियाणा के 111 गांवों में स्मार्ट गलियों का विकास किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 1 करोड़ 19 लाख 39 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में दी। पंवार ने बताया कि जिन गांवों में मतदाताओं की संख्या 10 हजार है, वहां एक गली को स्मार्ट गली के रूप में विकसित किया जाएगा। बादली विधानसभा क्षेत्र के बादली गांव को भी इस योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का दृष्टिकोण है कि जिस प्रकार शहरों में साफ-सुथरी और व्यवस्थित गलियां होती हैं, उसी तर्ज पर गांवों में भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्मार्ट गलियां विकसित की जाएं। शून्यकाल के दौरान विधायक कपूर वाल्मीकि द्वारा मिट्टी उठाने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि यदि ग्राम पंचायत प्रस्ताव भेजती है तो खनन विभाग के अधिकारियों को परमिट जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे। पंचायत भूमि पर मालिकाना हक के लिए विशेष कैंप कालांवाली से कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाल ने पंचायत भूमि पर बने मकानों को वैध करने का मुद्दा उठाया। पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार जहां पंचायत की फिरनी, पौंड या तालाब हैं, वहां बने मकानों को मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री द्वारा पिछले सत्र में पेश किए गए विधेयक के तहत ग्राम पंचायत की कृषि भूमि या फिरनी पर मकान नहीं होने चाहिए। हालांकि, यदि मकान ग्राम पंचायत की भूमि पर है तो 500 गज तक के क्षेत्रफल पर मालिकाना हक दिया जा रहा है।

बढ़ती गर्मी से किसान चिंतित: हरियाणा में समय से पहले बढ़ा तापमान, फसलों को नुकसान की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में मौसम का मिजाज इस बार गड़बड़ाया हुआ है जिसका सीधा असर फसलों पर पड़ता हुआ नजर आ रहा है। 2012 से लेकर अब तक वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 को छोड़कर मानसून प्रभावी नहीं रहा है। हालांकि 2022 में मानसून में औसत 426 मिलीमीटर की तुलना में 464 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई जबकि 2023 में मानसून में 512.7 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। इस बार मौसम में आए एकाएक बदलाव के बाद फरवरी में ही अधिकतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है। 5 मार्च तक अधिकतम तापमान 34 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इकोनॉमिक एंड स्टैटिकल अफेयर्स हरियाणा की वार्षिक रिपोर्ट-2025 के अनुसार 2019 में फरवरी में औसतन अधिकतम तापमान 20.8, 2020 में 22.2, 2021 में 24.7, 2022 में 22.1, 2023 में 25.7 और 2024 में 23.2 रहा जबकि इस बार यह 30 डिग्री तक पहुंच गया है। इस बार सर्दी के मौसम में अभी तक औसत से 57 फीसदी कम बरसात हुई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल 1 जनवरी से 26 फरवरी तक सिरसा में 6.7 मिलीमीटर, फतेहाबाद में 27.6, हिसार में 17.1, जींद में 24.8, कैथल में 26.6, करनाल में 29.4, पानीपत में 37.5, सोनीपत में 13.9, भिवानी में 23.2, चरखी दादरी में 15.5, झज्जर में 18.5, महेंद्रगढ़ में 12, रेवाड़ी में 15.2, गुरुग्राम में 21.7, नूंह में 12.4, पलवल में 16, फरीदाबाद में 3.2, कुरुक्षेत्र में 56.2, अंबाला में 60.4, यमुनानगर में 43.2 एवं पंचकूला में 48.4 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है। वैसे मौसम विभाग का मानना है कि इस बार प्रदेश में 1 जून से 30 सितम्बर तक अच्छी बरसात हो सकती है। मानसून में जुलाई और अगस्त में होती है सबसे अधिक बरसात हरियाणा में 1 जून से 30 सितम्बर तक औसतन 426 मिलीमीटर बरसात दर्ज की जाती है। जुलाई और अगस्त के महीनों में सबसे अधिक बरसात होती है। जून में औसतन 54, जुलाई में 149, अगस्त में 146 और सितम्बर में 76 मिलीमीटर बरसात आमतौर पर होती है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा में सर्द मौसम में 32.4, प्री-मानसून सीजन में 33.6, मानसून सीजन में 426 मिलीमीटर एवं पोस्ट मानसून सीजन में 28.9 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए। हर साल हरियाणा में 554.7 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए, पर 2012 के बाद 2022, 2023 और 2025 को छोड़कर यह आंकड़ा 460 मिलीमीटर को भी पार नहीं कर पा रहा है। 2012 में हरियाणा में महज 307 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत बरसात से 45 फीसदी कम। इसी तरह से 2013 में 452 मिलीमीटर बरसात हुई। 2013 में देश में अंडमान-निकोबार में सबसे अधिक 3757 मिलीमीटर बरसात हुई थी जबकि सबसे कम बरसात का चिंताजनक रिकॉर्ड हरियाणा के नाम रहा था। 2014 में तो पूरे साल 301.3 मिलीमीटर बरसात ही हुई। 2014 में मानसून में 197.3 मिलीमीटर बरसात हुई जबकि होनी चाहिए थी 42 मिलीमीटर। 2015 में पूरे देश में हरियाणा में सबसे कम 437.8 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत से करीब 23 फीसदी कम। 2016 में सर्द ऋतु में महज 1.2 मिलीमीटर जबकि पूरे साल में कुल 392.9 मिलीमीटर ही बरसात हुई। 2017 में मानसून सीजन में 418.8, 2018 में 416.3, 2019 में 418, 2020 में 419.9, 2021 में 423, 2022 में 417.3, 2023 में 512.7, 2024 में 409 मिलीमीटर बरसात हुई थी। 2025 में तो प्रदेश में मानसून में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। इस बार भी मानसून काफी अच्छा बताया जा रहा है। गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब व राजस्थान के बाद हरियाणा देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य है। इस रबी सीजन में प्रदेश में करीब 26 लाख हैक्टेयर में गेहूं की फसल है। इस बार दिसम्बर, जनवरी एवं फरवरी माह में औसत से कम सर्दी पड़ी है। तापमान भी अधिक रहा है और कोहरा भी नहीं पड़ा। ऐसे में गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि औसत से करीब 5 से 6 डिग्री अधिक तापमान के चलते गेहूं के अलावा सरसों की फसल पर भी असर पड़ सकता है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमैंटेशन की ओर से जारी एन्वायरनमैंट स्टैटिक 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में कुल भौगोलिक क्षेत्र 44212 वर्ग किलोमीटर में से महज 1559 वर्ग किलोमीटर ही वनाच्छादित क्षेत्र है। यह औसत से बहुत कम है। ऐसे में यहां मौसम का मिजाज बिगड़ा-बिगड़ा रहता है। यही वजह है कि पिछले 2 दशक में उत्तरी भारत के राज्यों में गर्मी का पीरियड बढ़ता जा रहा है और सर्दी का पीरियड सिकुड़ रहा है। 1988 में हुई थी 1108 मिलीमीटर बरसात भारतीय मौसम विभाग चंडीगढ़ के आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। हरियाणा में मानसून 30 जून को दस्तक देता है। 2008 में मानसून समय से पहले 13 जून को आया जबकि 1987 में मानसून 27 जुलाई को आया था। मानसून के दौरान पिछले साल 1 जून से लेकर 30 सितम्बर तक हरियाणा में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। आमतौर पर मानसून में 426 मिलीमीटर बरसात होती है। आंकड़ों की बात करें तो साल 1988 में सबसे अधिक 1108 मिलीमीटर बरसात हुई थी। इसी तरह से 1995 में 939 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। 2011 में 374 मिलीमीटर, 2018 में 415 मिलीमीटर व 2020 में 376 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। वैसे हरियाणा में 1995 में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। 16 जिलों में 20 लाख 35 हजार एकड़ फसल प्रभावित हुई थी। 2840 गांवों और हरियाणा के अनेक शहरों के 28 लाख 87 हजार आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा था। 

ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम: हरियाणा के इस जिले में बनेगा पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, 200MW पावर जनरेशन

चंडीगढ़ प्रदेश में किसानों को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार हरियाणा एग्री डिस्काम नाम से तीस्सरी ऊर्जा बिजली वितरण कंपनी स्थापित करेगी। साथ ही सरकार हरियाणा हरित हाइड्रोजन नीति भी लागू करेगी। ऊर्जा क्षेत्र के बजट में बढ़ोतरी करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के 6,379.63 करोड़ रुपये की तुलना में वर्ष 2026-27 के लिए बजट 7.66 प्रतिशत बढ़ाकर 6,868 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। हरियाणा एयी डिस्काम राज्य के सभी 5,084 कृषि फीडरों और 7.12 लाख कृषि उपभोक्ताओं को सेवाएं प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य नए ट्यूबवेल कनेक्शन तेजी से जारी करना, खराब ट्रांसफार्मरों को शीघ्र बदलना और किसानों के खेतों तक नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। वर्तमान में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम 14,391 फीडरों से घरेलू, वाणिज्यिक, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। 2004-05 से 2014-15 के बीच इन दोनों निगमों ने 1,89,978 नए ट्यूबवेल कनेक्शन जारी किए थे। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 35,000 नए सौर पंप स्थापित होंगे। 13 जिलों में 200 मेगावाट क्षमता की पराली आधारित बायोमास परियोजनाएं स्थापित होंगी। किसान अपने ट्यूबवेल पर सौर पैनल लगाकर अतिरिक्त बिजली बेच भी सकेंगे। किसानों के मौजूदा बिजली आधारित ट्यूबवेल कनेक्शनों पर खेतों में सौर ऊर्जा लगाने की अनुमति मिलेगी। ऐसे में उपयोग से बढ़ने वाली बिजली निगम खरीदेंगे। प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पानीपत में पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट बनेगा। वर्ष 2030 तक 250 किलो टन प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन और 2 गीगावाट इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 2.2 लाख घरों की छतों पर सौर संयंत्र लगेंगे। गैर बकायेदार उपभोक्ताओं और अंत्योदय परिवारों को इसके लिए ब्याज मुक्त सहायता भी दी जाएगी। शेष 68 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।