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IDFC बैंक में सरकारी फंड गबन मामले में CBI जांच तेज

चंडीगढ़ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खातों से 550 करोड़ रुपये के गबन के आरोपी दो आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। इस मामले में आईएएस अधइकारी राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार आरोपी हैं। सिंह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास 3.22 करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। इससे उन्हें 19 लाख रुपये की सालाना कमाई होती है। वहीं प्रदीप कुमार के पास पत्नी की संपत्ति के साथ कुल 7.03 करोड़ की संपत्ति है। कई जगहों पर संपत्तियां सिंह के 29 जनवरी 2026 को फाइल किए गए एनुअल प्रॉपर्टी रिटर्न के मुताबिक उन्होंने कुल 3.22 करोड़ की संपत्ति की बात बताई थी जो कि पट्टनी अफगान, गोहना और सोनीपत में है। यहां उनका एक 710 व्ग गज का प्लॉट है जिसकी कीमत 58 लाख रुपये, एक 77 लाख की कीमत वाला प्लॉट है। इसकेअलावा एक प्लॉट की कीमत 12 लाख रुपये है। गोहाना में भी 60 लाख की कीमत का प्लॉट है। इसके अलावा 6 रिहाइशी संपत्तियां हैं। सिंह का कहना है कि उनकी पत्नी कई बिजनेस करती हैं। उनके पास पेट्रोल पंप, माइक्रोब्रीवरी, रेस्तरां, किराए पर घर देने, प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने का काम भी है। उन्होंने बताया था कि उनका पैतृक घऱ हिंदू अनडिवाइडेट फैमिली के तहत सबका की है। आईएएस प्रदीप कुमार ने एपीआर में बताया था कि उनकी पत्नी के पास 3181.5 वर्ग गज की जमीन है। इसकी कीमत 1.25 करोड़ के करीब है। उन्होंने बताया कि यह जमीन पत्नी को उनके पिता ने उपहार में दी थी। उन्होंने बताया था कि गुरुग्राम सेक्टर 28 में उनके दो फ्लैट हैं जिन की कीमत 2.4 करोड़ के आसपास है। इसके अलावा गुरुग्राम में एक और फ्लैट है जो कि उनकी पत्नी के साथ उनके नाम पर है। इसकी कीमत 3.34 करोड़ रुपये है। हरियाणा सरकार को बड़ा नुकसान हरियाणा के सतर्कता विभाग ने इस मामले को संबंधित एजेंसी को सौंपते हुए कहा, ''यह मामला धोखाधड़ीपूर्ण बैंकिंग गतिविधियों और फर्जी लेनदेन से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर सरकारी धन को स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, कैप को फिनटेक सर्विसेज, आर.एस. ट्रेडर्स और अन्य संबंधित फर्म/व्यक्तियों सहित फर्जी संस्थाओं (शेल) के खातों में अंतरित करने के लिए व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।' सूत्रों ने बताया कि पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों के अनुसार, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राज्य के कोष को बैंक में 'सावधि जमा' (एसएफडी) के रूप में जमा किया जाना था, लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर इसे अपने निजी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर लिया। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि विभिन्न फर्जी (शेल) कंपनियों और छोटी आभूषण कंपनियों में भारी मात्रा में धनराशि अंतरित की गई है तथा अंततः सोने की खरीद और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश के बहाने उसे निकाल लिया गया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा था कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को मूलधन और ब्याज का 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, जो कि 583 करोड़ रुपये बनता है।

अंधविश्वास के जाल में फंसा कैथल का परिवार, तांत्रिक महिला ने दो साल में ऐंठे एक करोड़ से ज्यादा रुपये और पुलिस ने दर्ज किया केस

 कैथल कहावत है कि भ्रम का कोई इलाज नहीं। हरियाणा के कैथल में एक ऐसा ही मामला समाने आया है जहां एक परिवार जादू-टोनों के चक्र में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठा बुढ़ा खेड़ा गांव में जादू-टोना का प्रकोप बताकर एक परिवार से 1.07 करोड़ रुपये की ठगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला तांत्रिक ने अपने पति, बेटे और एक अन्य सहयोगी के साथ मिलकर परिवार को करीब दो वर्षों तक तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर उलझाए रखा और उनसे बड़ी रकम ऐंठ ली। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उन्हें बलि के नाम पर चामुंडा देवी धाम भी ले जाया गया जहां इंजेक्शन के माध्यम से उनके शरीर से खून निकालकर मंदिर में चढ़ाया गया। इतना ही नहीं आरोपियों ने 32 तोले चांदी और 6 तोले सोने के जेवरात भी हड़प लिए। जब परिवार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और लगातार पैसों की मांग बढ़ती गई, तब पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दी। गांव बुढ़ा खेड़ा निवासी अमनदीप ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय सुखबीर सिंह पिछले दो-तीन वर्षों से सिरदर्द और चक्कर की समस्या से जूझ रहे थे। कई प्रकार के उपचार करवाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। इसके साथ ही परिवार में आपसी कलह भी बनी रहती थी। इसी बीच किसी व्यक्ति ने उन्हें गांव की सुमन नामक महिला के बारे में बताया, जो झाड़-फूंक और तांत्रिक क्रियाएं करने का दावा करती थी। अमनदीप के मुताबिक, सुमन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके घर पर किसी ने जादू-टोना करवा रखा है और इससे मुक्ति पाने के लिए काली माता की बलि देनी होगी तथा बाबा भैरों नाथ का मंदिर बनवाना पड़ेगा। परिवार पहले से ही मानसिक रूप से परेशान था, इसलिए वे उसके झांसे में आ गए। जमीन बेचकर और एफडी तुड़वाकर दिए रुपये पीड़ित ने बताया कि सुमन के कहने पर उन्होंने अपनी जमीन बेच दी और बैंक की एफडी तुड़वाकर करीब 76 लाख रुपये नकद तथा लगभग 7 लाख रुपये ऑनलाइन उसके खाते में ट्रांसफर कर दिए। आरोप है कि सुमन उन्हें चामुंडा देवी धाम भी ले गई, जहां उसने इंजेक्शन के जरिए उनका खून निकालकर मंदिर में चढ़ाया। आरोपी ने यह भी कहा कि मंदिर निर्माण के लिए जमीन खरीदी जा चुकी है और जब मंदिर बनकर तैयार होगा तो उन्हें सोने का छत्र चढ़ाना होगा। जब परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए और पैसे देने में असमर्थता जताई और कहा कि वे पहले ही 80-90 लाख रुपये दे चुके हैं, तब भी आरोपियों ने पैसे की मांग जारी रखी। पीड़ित का कहना है कि उन्हें गुमराह कर सम्मोहन जैसी विधियों के माध्यम से उनसे 32 तोले चांदी और 6 तोले सोने के जेवरात तथा भारी रकम हड़प ली गई। जादू-टोना के नाम पर लोगों को बनाते हैं शिकार आरोप है कि सुमन, उसका पति बलराज, बेटा वंश और उचाना निवासी संजीव मिलकर लोगों को जादू-टोना के नाम पर झांसे में लेते हैं। ये लोग काली माता, भैरों बाबा और सबल सिंह बावरी के नाम का हवाला देकर लोगों से जेवर और पैसे ऐंठते हैं तथा बलि के नाम पर शरीर से खून निकालते हैं। इसके अलावा, ये आरोपित लोगों को हरिद्वार, कुरुक्षेत्र, पटियाला और बागड़ सहित विभिन्न स्थानों पर ले जाकर तांत्रिक क्रियाएं करवाते हैं। पीड़ितों का आरोप है कि यह गिरोह 100 से 150 लोगों से करीब 3-4 करोड़ रुपये तक की ठगी कर चुका है। सदर थाना के जांच अधिकारी मनु ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिमी विक्षोभ से हरियाणा के कई जिलों में बदला मौसम, रात के तापमान में आई 5 डिग्री तक की कमी

चंडीगढ़ पश्चिमी विक्षोभ के कारण वीरवार को यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला, करनाल और कुरुक्षेत्र में बिखराव वाली बारिश दर्ज की गई। हवाओं की दिशा और गति में बदलाव, विशेषकर रात के समय उत्तरी हवाओं के सक्रिय होने से प्रदेश में रात्रि तापमान में गिरावट देखने को मिली। रात का तापमान 13 से 16 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। प्रदेश के सभी जिलों में तापमान सामान्य से 2 से 5 डिग्री सेल्सियस कम रहा। मौसम विशेषज्ञ ने बताया कि उत्तरी-पश्चिमी हवाओं के साथ मौसम साफ होने के कारण सूर्य की तपिश में बढ़ोतरी से दिन के तापमान में हल्की बढ़त दर्ज हुई। चंडीगढ़ में रात का तापमान 12.3, पानीपत 13.0, महेंद्रगढ़ 14.3 और हिसार में 14.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट रही। 15 अप्रैल के बाद मौसम होगा गर्म 11 अप्रैल से कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के साथ तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि शुरू होगी। सिरसा, फतेहाबाद, पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में छिटपुट बारिश की संभावना है। शेष हरियाणा में मौसम आमतौर पर शुष्क और आंशिक बादल वाला रहेगा। 15 अप्रैल के बाद पूरे प्रदेश में दिन के तापमान में और तेजी से बढ़ोतरी की संभावना है जबकि रात्रि तापमान धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौटेगा।  

आयुष्मान योजना से हटेंगे हरियाणा के निजी अस्पताल, करोड़ों के बिल लंबित होने पर डॉक्टरों ने लिया कड़ा फैसला

चंडीगढ़ सात अप्रैल को हुई ऑनलाइन बैठक में राज्यभर के अस्पतालों ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरेंडर लेटर आईएमए हरियाणा अध्यक्ष को सौंपने का निर्णय लिया। हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा संकट गहराता जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने संकेत दिए हैं कि राज्य के अस्पताल अब इस योजना को जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं। आईएमए की ओर से आयुष्मान भारत हेल्थ प्रोटेक्शन अथॉरिटी के सीईओ को भेजे गए पत्र में कई गंभीर खामियों और लंबित मुद्दों को उठाया गया है। अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत 15 दिन में भुगतान का प्रावधान है, लेकिन सितंबर 2025 से ही करोड़ों रुपये के बिल लंबित पड़े हैं। लगातार हो रही इस देरी से निजी अस्पतालों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो गया है। सात अप्रैल को हुई ऑनलाइन बैठक में राज्यभर के अस्पतालों ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरेंडर लेटर आईएमए हरियाणा अध्यक्ष को सौंपने का निर्णय लिया। आईएमएने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो 20 अप्रैल 2026 से आयुष्मान भारत योजना के तहत सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।   कमेटियां ठप, फैसले अटके जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री स्तर पर आईएमए प्रतिनिधियों को एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटियों में शामिल करने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। इससे अस्पतालों से जुड़े कई अहम फैसले लंबित हैं। पांच महीने से नहीं हुई बैठक पिछले पांच महीनों से मासिक बैठकें भी नहीं हुई हैं। इसके चलते नए अस्पतालों का पैनल में जुड़ना और नई स्पेशलिटी की मंजूरी पूरी तरह ठप पड़ी है। लाखों मरीजों पर पड़ेगा असर अगर अस्पतालों ने सेवाएं बंद कर दीं, तो इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा, जो इस योजना के तहत मुफ्त इलाज पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और अस्पतालों के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।  

महज 600 रुपये में मिलेगा 5 किलो वाला गैस सिलिंडर, आईडी कार्ड दिखाकर तुरंत मिलेगी डिलीवरी और 15 हजार परिवारों को बड़ी राहत

करनाल जिले में रसोई गैस संकट के बीच अब 5 किलो वाले छोटू सिलिंडरों की सप्लाई शुरू होने से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। गैस कंपनियों की ओर से हर एजेंसी को लॉट वाइज 35-35 छोटू सिलिंडर का कोटा दिया जा रहा है। इससे धीरे-धीरे सप्लाई बहाल करने की कोशिश की जा रही है। वीरवार को जिले की कई गैस एजेंसियों में छोटू सिलिंडर की सप्लाई पहुंच चुकी है, जबकि कुछ एजेंसियों में अभी सप्लाई आना बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में सभी एजेंसियों तक यह सप्लाई पहुंचा दी जाएगी। इससे जिले के करीब 15 हजार प्रवासी परिवारों को लाभ मिलेगा। बता दें कि अब तक जिले में रहने वाले प्रवासी परिवार ब्लैक से 300 रुपये किलोग्राम के रेट से गैस भरवा रहे थे। एक सिलिंडर को भरवाने में उन्हें 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। इस समस्या से उन्होंने गैस की बजाए दूसरे विकल्प अपनाए लेकिन राहत नहीं मिली। किसी के घर में रोटी नहीं बनी तो किसी के बच्चों का दूध तक गर्म नहीं हो पाया। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने बिना कनेक्शन लिए महज आईडी कार्ड पर सिलिंडर दिलवाने का प्लान किया है। पहली बार में 1541 रुपये देने होंगे 5 किलो वाले सिलिंडर की कीमत जिले में 597.50 रुपये तय की गई है। हालांकि, उपभोक्ताओं को पहली बार सिलिंडर लेने के लिए जमानत राशि भी जमा करवानी होगी। छोटू सिलिंडर लेते समय उपभोक्ता को कुल 1541 रुपये चुकाने होंगे, जिसमें 944 रुपये जमानत राशि और 597.50 रुपये गैस की कीमत शामिल है। खास बात ये है कि सिलिंडर वापस करने पर आपको 944 रुपये की बजाए 800 रुपये मिलंगी। जमानत राशि में से जीएसटी कटने के कारण पूरी रकम वापस नहीं मिलेगी। हालांकि ये गैस कमर्शियल गैस सिलिडर से भी मंहगी पड़ रही है। पांच किलो के सिलिंडर की गैस 120 रुपये किलो पड़ेगीै। जबकि 19 किलो वाला कमर्शियल सिलिंडर करीब 112 रुपये प्रति किलो के हिसाब से पड़ता है। इनके अलावा घरेलू गैस सिलिंडर की गैस करीब 65 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बनती है। हालांकि फिर भी प्रवासियों को इससे काफी राहत मिलेगी। अब ये लोग बाहर से 1500 की बजाए 600 रुपये में गैस का इस्तेमाल कर सकेंगे। प्रवासी मजदूरों को मिलेगी राहत एलपीजी फेडरेशन के सदस्य सुभाष गर्ग ने कहा कि अब तक गैस की कमी के चलते ब्लैक में महंगी दरों पर सिलिंडर खरीदने को मजबूर थे। अब छोटू सिलिंडर की उपलब्धता बढ़ने से इन प्रवासियों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें ब्लैक मार्केट से महंगी गैस खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल सीमित कोटा मिलने के कारण वितरण लॉट में किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक सिलिंडर पहुंच सके। आने वाले दिनों में मांग अनुसार सप्लाई बढ़ाई जाती है तो स्थिति और बेहतर हो सकती है।  

सस्ता और सुलभ होगा सफर, गुरुग्राम में 55 रुपये प्रति किमी की दर पर चलेंगी ई-बसें, जीएमडीए ने जारी किया ठेका

गुरुग्राम गुरुग्राम में यात्रियों की सुविधा के लिए जुलाई से 100 नई ई-बसें शुरू की जाएंगी। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण ने इसके लिए पीएमआई इलेक्ट्रो मोबीलिटी को ठेका दे दिया है। वर्तमान में चल रही 150 सीएनजी बसें पुरानी होने के कारण अक्सर खराब हो जाती हैं जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। नई ई-बसों का संचालन 55.47 रुपये प्रति किलोमीटर की दर पर होगा जो मौजूदा बसों के खर्च से काफी कम है। इन बसों के लिए सेक्टर-10 में डिपो तैयार है। सड़कों पर दौड़ेंगी 100 ई-बसें अधिकारियों ने बताया कि गुरुग्राम में जुलाई से 100 ई-बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। इसको लेकर गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण ने पीएमआई इलेक्ट्रो मोबीलिटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को ठेका स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है। प्रति किलोमीटर 55 रुपये 47 पैसे आएगा खर्च 55 रुपये 47 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से बस संचालन की एवज में इस कंपनी को गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) की तरफ से भुगतान किया जाएगा। मौजूदा समय में गुरुग्राम में 150 सीएनजी बस हैं। करीब आठ साल पुरानी बस होने की वजह से आए दिन इसमें खराबी आती रहती है। रोजाना 15 से 20 बस बीच रास्ते में दम तोड़ रही है। पुरानी बसों पर खर्च ज्यादा यही नहीं इन बसों को करीब 95 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। जीएमडीए ने पीएम ई-सेवा के तहत सब्सिडी पर 100 ई-बस मुहैया कराने का आग्रह दो साल पहले किया था। गत 16 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ई-बस के संचालन को लेकर उच्चस्तरीय खरीद समिति की बैठक में ठेकेदार कंपनी से नेगोसिएशन हुई थी। इसके बाद सिटी बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया था। यात्री फिलहाल परेशान बस कम होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। द्वारका एक्सप्रेसवे डिवेलपमेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी सुनील सरीन ने बताया कि पिछले दो साल से जीएमसीबीएल और जीएमडीए से सिटी बस के संचालन की मांग कर रहे हैं। उनसे आग्रह किया है कि यशो भूमि और द्वारका मेट्रो स्टेशन को सिटी बस सेवा से जोड़ा जाए। ई-बस डिपो तैयार गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वजीत चौधरी ने कहा कि कई-बस के आते ही इनका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। सेक्टर-10 में ई-बस डिपो तैयार किया जा चुका है। सेक्टर-48 में भी ई-बस डिपो जल्द बनकर तैयार हो जाएगा। बसों के आने के बाद परिवहन सेवा बेहतर होगी। लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। बस रूट भी तैयार ई-बस संचालन को लेकर सेक्टर-10 में ई-बस डिपो बनकर तैयार हो चुका है। बिजलीघर भी बन चुका है। डीएचबीवीएन से बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा चुका है। सेक्टर-48 में ई-बस डिपो निर्माणाधीन है। ई-बस के संचालन को लेकर जीएमसीबीएल की तरफ से बस रूट तैयार किए जा चुके हैं।

हरियाणा में महिलाओं को राहत: लाडो लक्ष्मी योजना की आय सीमा बढ़ी, ज्यादा परिवार होंगे लाभार्थी

चंडीगढ़. हरियाणा की आधी आबादी को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपनी 'लाडो लक्ष्मी योजना' का दायरा बढ़ा दिया है। बुधवार को हुई कैबिनेट की अहम बैठक में सरकार ने उन परिवारों की महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ने का फैसला किया है, जिनकी सालाना आय 1.80 लाख रुपये तक है। मुख्यमंत्री ने पिछले महीने विधानसभा बजट सत्र के दौरान इस आय सीमा को बढ़ाने का जो वादा किया था, उसे अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ अमलीजामा पहना दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की लाखों नई लाभार्थी महिलाएं इस सरकारी कवच के दायरे में आ जाएंगी। इस योजना की सबसे अनूठी बात इसकी वितरण प्रणाली है। सरकार पात्र महिलाओं के बैंक खातों में कुल 2,100 रुपये की मासिक किस्त डालती है, लेकिन यह पूरी राशि एक साथ खर्च करने के लिए नहीं होती। इसमें से 1,100 रुपये महिला के बचत खाते में जमा किए जाते हैं, जिसे वह अपनी तात्कालिक जरूरतों के लिए हर महीने निकाल सकती है। वहीं, शेष 1,000 रुपये सावधि बैंक खाते यानी आरडी (RD) में जमा होते हैं। यह आरडी खाता 5 साल के लिए संचालित किया जाता है, जिससे एक निश्चित समय के बाद महिलाओं के हाथ में एक मुश्त मोटी रकम आती है, जो उनके भविष्य या बच्चों की जरूरतों के काम आ सके। सरकार ने केवल गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली महिलाओं को ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों के परिवारों को भी प्रोत्साहित किया है। संशोधित नियमों के मुताबिक, जिन बच्चों ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं, उनकी माताओं को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है, बशर्ते उनकी पारिवारिक आय 1.80 लाख रुपये तक हो। यह कदम समाज में बेटियों और बेटों की पढ़ाई के प्रति एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

खाली हो चुके स्कूलों में लौटी रौनक, एसडीएम के आदेश के बाद जनगणना ड्यूटी छोड़ क्लासरूम पहुंचे शिक्षक

  अंबाला स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई ठप नहीं होगी। जनगणना कार्य में जुटे शिक्षकों को वापस बुलाने का निर्णय लेते हुए विभाग ने अब केवल 50 प्रतिशत स्टाफ की ही ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। कई दिनों से जनगणना कार्य के चलते अधिकांश शिक्षक स्कूलों से नदारद थे। इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा था। बोर्ड परीक्षाओं और वार्षिक सत्र की महत्ता को देखते हुए विभाग पर लगातार दबाव बना हुआ था। अब नए आदेशों के बाद शिक्षकों ने स्कूलों में कार्यभार संभाल लिया है। इससे रुकी हुई कक्षाएं दोबारा शुरू हो गई हैं शिक्षकों की वापसी से पिछड़ चुके पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। आगामी परीक्षाओं को देखते हुए स्कूलों में अब विशेष कक्षाओं का आयोजन किया जा सकेगा। स्कूल खाली होने से जो अभिभावक परेशान थे, वे अब बच्चों को वापस भेजने के लिए उत्साहित हैं। खाली हो गए थे स्कूल जनगणना ड्यूटी के कारण जिले के लगभग 60 से अधिक स्कूल प्रभावित हो गए थे। इनमें से कुछ स्कूल पूरी तरह से शिक्षक के बिना रह गए थे। जिन प्राथमिक स्कूलों में एक ही शिक्षक था, उसकी भी ड्यूटी लगा दी गई थी। इसके अलावा जहां 20 से 25 शिक्षक थे, उस स्कूल का पूरा स्टाफ भी जनगणना के कार्य में लगा दिया गया था। इस मामले पर जिला प्राथमिक शिक्षक संघ व अन्य यूनियनों ने विभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर 50-50 प्रतिशत फॉमूर्ला लागू करने का आग्रह किया था। वर्जन बच्चों की शिक्षा हमारी प्राथमिकता है। जनगणना कार्य भी अनिवार्य है इसलिए 50-50 प्रतिशत का फॉर्मूला निकाला गया है। – कनिका गोयल, एसडीएम, अंबाला  

ईस्ट-टु-वेस्ट कनेक्टिविटी और RRTS कॉरिडोर में तकनीकी टकराव, क्या एक ही पिलर पर चलेगी ट्रेन और गाड़ियां

फरीदाबाद  शहर की कनेक्टिविटी को विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई दो महत्वाकांक्षी परियोजनाएं, ईस्ट-टु-वेस्ट कनेक्टिविटी (बाटा रूट) और नमो भारत (RRTS) अब एक-दूसरे के सामने आ खड़ी हुई हैं। दोनों परियोजनाओं का रूट और अलाइनमेंट लगभग एक समान होने के कारण निर्माण से पहले ही तकनीकी टकराव की स्थिति बन गई है। इस चुनौती को सुलझाने के लिए फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (FMDA) और RRTS के अधिकारी लगातार मंथन कर रहे हैं। हालांकि, इस कारण परियोजनाओं में देरी की आशंका भी जताई जा रही है। ये आ रही दिक्कत ईस्ट-टू-वेस्ट कनेक्टिविटी प्रॉजेक्ट के तहत बाटा चौक से एनआईटी होते हुए सैनिक कॉलोनी से फरीदाबाद गुरुग्राम रोड से कनेक्ट होगा। वहीं, गुरुग्राम से फरीदाबाद आने वाली नमो भारत ट्रेन का रूट भी इसी अलाइनमेंट से गुजर रहा है। आरआरटीएस कॉरिडोर सैनिक कॉलोनी से मस्जिद चौक, हार्डवेयर चौक और बाटा चौक होते हुए ग्रेटर फरीदाबाद की ओर जाएगा। दोनों परियोजनाओं के पिलर और ढांचा लगभग एक ही स्थान पर प्रस्तावित होने के कारण तकनीकी अड़चन सामने आई है। ईस्ट-टू-वेस्ट प्रॉजेक्ट एक नजर में यह परियोजना पश्चिम में एनआईटी फरीदाबाद को पूर्व में ग्रेटर फरीदाबाद से जोड़ेगी। इस प्रोजेक्ट से शहर के अंदर का जाम कम होगा और ग्रेटर फरीदाबाद की गुरुग्राम से बेहतर कनेक्टिविटी बेहतर होगी। प्रारंभ: ग्रेटर फरीदाबाद के बीटीपी श्रेत्र से। रूट: नैशनल हाइे को पार करते हुए बाटा चौक, फिर, हार्डवेयर चौक, प्याली चौक, सब्जी मंडी औ अनाज गौदाम होते हुए मस्जित चौक से सैनिक कॉलोनी तक। समाधान की तलाश: पैरलल अलाइनमेंट? तकनीकि दिक्कत को दूर करने के लिए होगी मंथन कंबाइंड अलाइनमेंट: हो सकता है कि ईस्ट-वेस्ट एलिवेटेड रोड और नमो भारत का रूट एक साथ चलाया जाए। अलाइनमेंट री-डिजाइन: रूट में थोड़ा बदलाव किया जा सकता है ताकि पिलर एक-दूसरे के काम में बाधा न डाले। संयुक्त पिलर तकनीक: क्या कुछ हिस्सों में एक ही पिलर पर ऊपर ट्रेन और नीचे सड़क संभव हैं? अधिकारी इस संभावना पर विचार कर सकते हैं। दोनों परियोजनाएं शहर के लिए बेहत जरूरी है। अधिकारियों का प्रयास है कि न्यूनतम बदलाव के साथ जल्द अंतिम अलाइनमेंट तय कर लिया जाए, ताकि फरीदाबाद को गुरुग्राम और नोएडा से जोड़ने की योजना समय पर साकार हो सके। देरी की आशंका से चिंता बढ़ी यदि अनाइनमेंट में बदलाव होता है तो नई ड्रॉइंग, डिजाइन और तकनीकी सर्वे की जरूरत पड़ेगी। इससे प्रॉजेक्ट की शुरुआत और समय सीमा प्रभावित हो सती है। पहले से ट्रैफिक के जाम से जूझ रहे शहरवासियों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। क्योंकि उन्हें इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के और इंतजार करना पड़ सकता है।

ईंधन संकट की मार अब निर्माण सामग्री पर, गुड़गांव में सीमेंट के दाम बढ़ने से बिगड़ा लोगों का बजट

गुरुग्राम  शहर में इन दिनों सीमेंट के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। घर बनाना अब पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, केवल अप्रैल माह में ही सीमेंट की कीमतों में प्रति बोरी करीब 10 से 20 रुपये तक का इजाफा हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि आगे कीमतों को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बाजार की स्थिति लगातार बदल रही है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे ईंधन की बढ़ती कीमतें एक बड़ा कारण हैं। डीजल और अन्य ईंधनों के महंगे होने से सीमेंट की पैकेजिंग, ढुलाई (ट्रांसपोर्ट) और अन्य खर्चों में वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। बढ़े हुए रेट पर आ रहा सीमेंट दुकानदारों का कहना है कि कंपनियों की ओर से ही बढ़े हुए रेट पर सीमेंट सप्लाई किया जा रहा है, जिससे वे मजबूरी में महंगे दामों पर बिक्री कर रहे हैं। हर खेप पर बढ़े ट्रांसपोर्ट खर्च के कारण खुदरा बाजार में कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। घर बनवाने का बिगड़ा बजट     घर बनवा रहे लोगों ने बताया कि पहले जो बजट तय किया था, अब वह पूरी तरह बिगड़ चुका है।     सीमेंट के साथ-साथ अन्य निर्माण सामग्री के दाम भी बढ़ने से कुल लागत में भारी इजाफा हुआ है।     कई लोगों ने बढ़ती लागत के चलते अपने निर्माण कार्य को धीमा कर दिया है या फिलहाल रोक दिया है। अभी और बढ़ सकती हैं कीमतें विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो आने वाले समय में निर्माण सामग्री के दाम और बढ़ सकते हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए घर बनाना और ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।