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ट्रेन सफर पर सख्त एडवाइजरी: बगैर टिकट यात्रा और चलती ट्रेन में चढ़ना पड़ेगा भारी

फिरोजपुर. फिरोजपुर मंडल द्वारा रेलयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जन-जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इस अभियान के तहत रेल विभाग ने यात्रियों और आम नागरिकों से अपील की है वे चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने से बचें और ट्रेन के पूरी तरह रुकने के बाद ही प्लेटफॉर्म से सुरक्षित तरीके से चढ़े या उतरे। यह जानकारी देते हुए मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि आरक्षित कोच के अलावा दिव्यांग, महिला कोच, गार्ड ब्रेक या पार्सल वैन में अनधिकृत यात्रा करना रेल अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा के दौरान अपने सामान को सुरक्षित रखें, खिड़की और दरवाजों के पास सतर्क रहें तथा कीमती वस्तुओं को खिड़की से दूर रखें। अनजान व्यक्तियों से खाने-पीने की वस्तुएं लेने से भी परहेज करें। चलती ट्रेन के दरवाजे या पायदान पर खड़े होकर यात्रा करना या सेल्फी लेना जानलेवा हो सकता है। साथ ही, यात्रा के दौरान ज्वलनशील वस्तुएं ले जाना भी प्रतिबंधित है। डी.आर.एम. फिरोजपुर ने यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि यदि उन्हें किसी प्रकार की संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो तुरंत टी.टी.ई., आर.पी.एफ. या जी.आर.पी. को सूचित करें अथवा रेलवे हैल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क करें। उन्होंने कहा कि लापरवाही न केवल ट्रेन संचालन को प्रभावित करती है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता दें। 

भर्ती परीक्षा की तैयारी पूरी: 19 अप्रैल को 21 केंद्रों पर होगी परीक्षा, 5,720 परीक्षार्थी शामिल

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा परिवहन विभाग के अन्तर्गत परिवहन आरक्षक के रिक्त पदों के लिए लिखित भर्ती परीक्षा का आयोजन आगामी रविवार 19 अप्रैल 2026 को किया जा रहा है। बस्तर जिले में इस परीक्षा के सफल संचालन हेतु कुल 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 01ः15 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस भर्ती परीक्षा के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें कुल 5,720 परीक्षार्थी शामिल हांेगे। जिसके तहत परीक्षा केंद्र शासकीय काकतीय पीजी कॉलेज धरमपुरा में 360, झाड़ा सिरहा शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में 360, शासकीय दन्तेश्वरी पीजी महिला महाविद्यालय में 360, शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल क्र.-1 में 360, और शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जगदलपुर में 360, सेजेस शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल क्र.-2 में 360, स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल धरमपुरा में 360, स्वामी विवेकानंद एक्सीलेंट स्कूल संजय मार्केट में 360, स्वामी आत्मानंद हिन्दी मीडियम स्कूल रेल्वे कालोनी में 300 और धरमु माहरा शासकीय महिला पॉलिटेक्निक में 240, शासकीय हायर सेकेण्डरी विद्यालय भगत सिंह पथरागुड़ा में 300, पोटानार में 300, बिलोरी में 240, आसना में 300, बोरपदर में 180, हाईस्कूल केवरामुण्डा में 120, घाटलोहंगा में 120, आड़ावाल में 240, कालीबाड़ी हाईस्कूल में 120, पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय में 240 और शासकीय आईटीआई जगदलपुर में 140 परीक्षार्थी शामिल होंगे अभ्यर्थियों के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें परीक्षा प्रारंभ होने से कम से कम 2 घंटा पूर्व केंद्र पहुंचना होगा, क्योंकि मुख्य द्वार परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट पहले, यानी सुबह 10ः30 बजे अनिवार्य रूप से बंद कर दिया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर से गहन जांच की जाएगी। परीक्षार्थियों को अपने साथ इंटरनेट से प्राप्त साफ-सुथरा मूल प्रवेश पत्र और एक मूल पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पैन कार्ड लाना अनिवार्य है, पहचान पत्र न होने पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि प्रवेश पत्र पर फोटो स्पष्ट न हो, तो दो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ रखना आवश्यक है। ड्रेस कोड का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को हल्के रंग के आधी बांह वाले कपड़े, टी-शर्ट और पैरों में चप्पल पहनकर आना होगा, जबकि जूते-मोजे, बेल्ट, घड़ी, चश्मा, स्कार्फ और किसी भी प्रकार के आभूषण जैसे बाली या झूमका पहनना पूरी तरह वर्जित है। परीक्षा हॉल में केवल काले या नीले बॉल पॉइंट पेन की ही अनुमति होगी।

कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल को स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा, पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष

भोपाल  स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से कहा है कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही की प्रकिया के उपरांत सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष रखेगी। सरकार जल्दबाजी में शिक्षकों की विपरीत कोई भी निर्णय नहीं करेगी। शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ एवं शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप से मुलाकात कर समस्याएं बताईं। प्रतिनिधि मंडल ने संयुक्त रूप शिक्षा मंत्री से पात्रता परीक्षा को लेकर प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष रखा तथा सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट मे पक्ष रखने का आग्रह किया। इसके बाद शिक्षा मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के साथ है, हम शिक्षकों के पक्ष में पूरी तरह से खड़े हुए हैं। सरकार जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करेगी राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अनिल भार्गव वायु ने जानकारी दी है कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही की प्रकिया के उपरांत सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष रखेगी। सरकार जल्दबाजी में कोई भी शिक्षकों की विपरीत निर्णय नहीं करेगी। प्रतिनिधि मंडल मे भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर, मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़, मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव एवं प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे। प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि “प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। हमें विश्वास है कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए न्याय दिलाएगी।” शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखेंगे मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ ने भी कहा कि “शिक्षकों का पक्ष पूरी मजबूती से रखा है और हमें पूर्ण विश्वास है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि “सरकार के सकारात्मक रुख से प्रदेश के शिक्षकों में विश्वास मजबूत हुआ है। हम सभी शिक्षक एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं और न्याय मिलने की पूरी आशा है।” '28 साल बाद मांग रहे योग्यता का प्रमाण' रायसेन जिले में बतौर शिक्षक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली नेहा पटेल टेट परीक्षा के खिलाफ लोक शिक्षण संचालनालय पर प्रदर्शन करने पहुंची. वह कहती हैं कि "उन्हें स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हुए 28 साल का वक्त बीत चुका है. इस दौरान उनके पढ़ाए हुए कई बच्चे सरकारी नौकरी में हैं और कुछ बच्चे अच्छे पदों तक पहुंचे हैं लेकिन आज मुझे ही मेरी योग्यता का प्रमाण पात्रता परीक्षा के रूप में मांगा जा रहा है।  महाराष्ट्र राज्य से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय केन्द्र सरकार ने 2009 में शिक्षा का अधिकार कानून पूरे देश में लागू किया था. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य से संबंधित एक मामले में और अन्य याचिकाओं पर निर्णय दिया था कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करना जरूरी होगा. जिन शिक्षकों का रिटायरमेंट 5 साल रह गया है, उन्हें इससे छूट दी गई है. परीक्षा पास न होने पर टीचर्स को रिटायर्ड कर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी परीक्षा को पास करने का आदेश जारी कर दिया गया।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश के सभी शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करने के निर्देश दिए गए हैं. यह परीक्षा संभवता जुलाई और अगस्त माह में होगी. हालांकि इसको लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय महाराष्ट्र के संबंध में दिया और मध्य प्रदेश इसमें पक्षकार ही नहीं था, तब भी इसे प्रदेश में क्यों लागू कर दिया गया।  नई परीक्षा शर्त लागू करना अनुचित शिक्षकों ने बताया कि वह वर्षों से शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे हैं और सभी पात्रता मापदंड को पूरा करने के बाद ही भर्ती हुए हैं। उनके द्वारा विषय के अनुसार बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, लेकिन अचानक से नई परीक्षा की शर्त उनके ऊपर थोप देना कहीं से भी न्याय ओचित्य नहीं है। आदेश के बाद लाखों शिक्षकों के भविष्य पर संकट खड़ा हो रहा है। इधर पात्रता परीक्षा का आदेश जारी होने के बाद शिक्षकों के लिए काम करने वाले संगठन भी एकजुट हो गए हैं। उन्होंने भी आदेश के विरोध में कहा है कि प्रदेश में कई शिक्षक 20-25 साल से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जब उनकी नियुक्ति हुई थी तब सेवा शर्तों में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में इतने वर्ष बाद नई शर्त को लागू कर परीक्षा लेना नियमों के विपरीत है। संयुक्त संगठन का आरोप है की डीपीआई जो आदेश परीक्षा को लेकर जारी किया है। उसमें राज्य सरकार से औपचारिक मंजूरी नहीं ली गई है। दरअसल लोक शिक्षण संचनालय ने 3 मार्च को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए वर्तमान में सेवाएं दे रहे। शिक्षकों के लिए जुलाई अगस्त में टीईटी परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश मिलने के बाद से ही शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। शिक्षकों ने लगाया परेशान करने का आरोप डीपीआई पहुंचे शिक्षकों ने अपने विभाग पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर काम में शिक्षकों को आगे किया जाता है। चुनाव ड्यूटी, बीएलओ, एसआईआर,जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है और वह बच्चों को पढ़ाने के साथ पूरी ईमानदारी से दिए हुए कामों को पूरा करते हैं। कुछ शिक्षकों ने कहा कि वर्तमान समय में जनगणना का काम चल रहा है, उसमें उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इसके ऊपर विभाग ने आदेश जारी कर जुलाई अगस्त में परीक्षा लेने की बात कही है। शिक्षक स्कूल में बच्चों की पढ़ाई भी करवा रहे हैं, जनगणना भी कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें परीक्षा के लिए पढ़ाई का समय कैसे मिलेगा यह सोचने वाली बात है। शिक्षकों ने कहा कि विभाग उन्हें परेशान करने का काम कर रहा है। कई शिक्षक परीक्षा की बात से चिंतित होकर तनाव में आ रहे हैं।

AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने का उद्देश्य: CM साय

AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना हमारा ध्येय है: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ में AI आधारित शिक्षा की नई शुरुआत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से गूगल इंडिया प्रतिनिधियों की मुलाकात रायपुर से शुरू होगा ‘AI सक्षम शिक्षा अभियान’, 2 लाख से अधिक शिक्षकों को मिलेगा AI प्रशिक्षण रायपुर  छत्तीसगढ़ में शिक्षा को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन एवं गूगल इंडिया के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख राकेश रंजन ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए उन्हें शॉल एवं बस्तर कला की प्रतिकृति भेंट की। । गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन ने रायपुर जिला प्रशासन और गूगल के मध्य हुए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रायपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में “AI सक्षम शिक्षा अभियान” की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि “सक्षम शिक्षक अभियान” के तहत राज्य में शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स और AI आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के प्रथम चरण की शुरुआत रायपुर से की जाएगी, जिसके बाद इसे राज्य के सभी जिलों में विस्तार दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 2 लाख से अधिक शिक्षकों को AI प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए गूगल फॉर एजुकेशन अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जिससे शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जा सके। कार्यक्रम के तहत प्रारंभिक चरण में 200 शिक्षकों की सहभागिता से विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें गूगल फॉर एजुकेशन टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, कक्षा शिक्षण में AI के प्रभावी उपयोग और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक-सक्षम और नवाचार आधारित बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ना केवल एक पहल नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल शिक्षण पद्धतियों में गुणवत्ता आएगी, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नए युग के कौशल विकसित होंगे, जो उन्हें आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “AI सक्षम शिक्षा अभियान” जैसे कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों से सशक्त कर कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है – छत्तीसगढ़ को एक ऐसे ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करना, जहाँ हर विद्यार्थी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अवसरों से भरपूर शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर एक सशक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पुराने नंबर प्लेट वाले सावधान, परिवहन मंत्री श्रवण कुमार का सख्त निर्देश, अब बिहार में अनिवार्य हुई हाई सिक्योरिटी प्लेट

पटना बिहार में बड़ी संख्या में वाहन अब भी पुरानी नंबर प्लेट के साथ चल रहे हैं. परिवहन विभाग के अनुसार, करीब 52 लाख गाड़ियों में अब तक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) नहीं लगी है. परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया है कि साल 2019 से पहले रजिस्टर्ड सभी वाहनों में HSRP लगाना अनिवार्य है. इसके लिए वाहन मालिकों को एक महीने का समय दिया गया है. कहां और कैसे लगवाएं HSRP वाहन मालिक अपने नजदीकी आथोराइज्ड डीलर या एजेंसी के पास जाकर HSRP लगवा सकते हैं. इसके अलावा, जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) कार्यालय से संपर्क कर भी पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली जा सकती है. सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपना डेटा अपडेट कराएं और नियमों का पालन करें. नियम तोड़ा तो लगेगा भारी जुर्माना अगर तय समय सीमा के भीतर HSRP नहीं लगवाई गई, तो वाहन मालिकों पर सख्त कार्रवाई होगी.     मोटर वाहन अधिनियम की धारा 192 और 50 के तहत कार्रवाई     5,000 रुपया से 10,000 तक का जुर्माना मैसेज आने पर घबराएं नहीं अगर आपकी गाड़ी में पहले से HSRP लगी है, लेकिन फिर भी प्लेट बदलवाने का मैसेज आ रहा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. ऐसी स्थिति में संबंधित DTO कार्यालय जाकर सॉफ्टवेयर में डेटा अपडेट करवा लें. क्या है HSRP और क्यों है जरूरी? हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट एक खास तरह की एल्युमिनियम प्लेट होती है, जिसमें कई सुरक्षा फीचर्स होते हैं.     10 अंकों का यूनिक लेजर कोड     नीले रंग का अशोक चक्र होलोग्राम     छेड़छाड़ करना बेहद मुश्किल अपराध रोकने में मिलेगी मदद पहले साधारण नंबर प्लेट को आसानी से बदला जा सकता था, जिससे अपराधी नकली नंबर लगाकर वारदात को अंजाम देते थे. इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी वाहनों में HSRP अनिवार्य किया है. नए वाहनों में यह प्लेट पहले से लगी होती है, जबकि पुराने वाहनों में अब इसे अनिवार्य रूप से बदला जा रहा है. सरकार की सख्ती: अब कोई ढिलाई नहीं सरकार का साफ संदेश है- सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं. HSRP लगाने से न सिर्फ चोरी और अपराध पर लगाम लगेगी, बल्कि वाहन की पहचान भी सुरक्षित और ट्रैक करने योग्य हो जाएगी.

कोल्हान की संपदा पर पहला हक स्थानीय लोगों का, टाटा स्टील और खनिज कंपनियों के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी

  चाईबासा झारखंड के चाईबासा में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कोल्हान क्षेत्र की दयनीय स्थिति और संसाधनों के दोहन पर गहरी चिंता जताई गई. बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब कोल्हान की दशा को एक नई दिशा दी जाए. ​ मुख्य अतिथि ने क्या कहा? बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कोल्हान रक्षा संघ के अध्यक्ष डीबार जोंकों ने कहा यह कितनी बड़ी विडंबना है कि टाटा स्टील जैसी कंपनियां जमशेदपुर को दुल्हन की तरह सजाने में लगी हैं, लेकिन जिस सारंडा और कोल्हान की कोख से वह लोहा निकलता है, वहां के लोग आज भी प्यासे हैं. हमारे पास न शुद्ध पीने का पानी है, न रहने को पक्का आवास और न चलने को सड़कें. आज भी यहां का युवा लकड़ी, दातुन और पत्ते बेचकर पेट भरने को मजबूर है. शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं कागजों तक सिमट कर रह गई हैं. बैठक में पेश किया आंकड़ा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कोल्हान क्षेत्र झारखंड के लौह अयस्क उत्पादन का 70-80% हिस्सा प्रदान करता है. मात्र एक महीने में 18.72 लाख टन उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य ₹585.89 करोड़ है. कोल्हान से होने वाले वार्षिक उत्खनन का मूल्य लगभग 7,000 रू से 7,500 रू करोड़ बैठता है. ​कोल्हान रक्षा संघ के सदस्य रविन्द्र मंडल ने इन आंकड़ों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा अगर सालाना 7,500 करोड़ रुपये का खनिज हमारे पैरों के नीचे से निकाला जा रहा है, तो यहां की जनता दर-दर की ठोकरें क्यों खा रही है? रॉयल्टी और DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) का पैसा कहां जा रहा है? कोल्हान की जनता अब मूकदर्शक बनी नहीं रहेगी. हमें विकास में हिस्सेदारी चाहिए, केवल आश्वासन नहीं. ​बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कोल्हान के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा.  खनिज उत्खनन में लगी कंपनियों में 75% स्थानीय युवाओं को अनिवार्य रोजगार मिलना चाहिए.सारंडा के सुदूर गांवों तक पक्की सड़कें और शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था होनी चाहिए. प्रभावित क्षेत्रों में अत्याधुनिक अस्पताल और तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्थापना होनी चाहिए. जिसके लिये कोल्हान रक्षा संघ ग्रामीणों के हित के लिये उग्र आंदोलन करेगा.   इस संकल्प के साथ बैठक का समापन बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि कोल्हान की संपदा का लाभ सबसे पहले यहां के आदिवासियों और मूलवासियों को मिलना चाहिए. जब तक सारंडा के अंतिम व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचता, खनिज संपदा के इन आंकड़ों का जनता के लिए कोई मोल नहीं है. इस मौके पर महासचिव मानसिंह हेंब्रम, जय सिंह हेम्ब्रम, अधिवक्ता पूनम हेंब्रम, शिवनंदन किस्कू ,लक्ष्मण मंडल, सुमित्रा जोंको,रमेश केराई,हरीश लागुरी,बागुन केराई ,राजेन्द्र केराई,महती बोयपाई,विशाला बोयपाई ,डूरा केराई,रोया बोयपाई,मुर्गा केराई समेत काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

AI की ओर कदम: हरियाणा विधानसभा होगी डिजिटल, पंचकूला में होगा टेक्निकल प्रशिक्षण

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा में अब विधायी कार्यों में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए सभी प्रथम और द्वितीय श्रेणी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान के पंचकूला स्थित केंद्र में वीरवार को दो दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण शुरू होगा। यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण के प्रयासों के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्रतिदिन लगभग चार घंटे की अवधि का होगा, जिसमें दो बैच बनाए गए हैं। पहला बैच सुबह 9:15 बजे और दूसरा बैच दोपहर 1:30 बजे से शुरू होगा। सभी प्रतिभागियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रथम बैच के लिए सुबह 9:00 बजे तथा द्वितीय बैच के लिए दोपहर 1:00 बजे निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से उपस्थित हों। इस प्रशिक्षण का निर्णय हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण तथा हिपा महानिदेशक मनोज यादव की मंगलवार को हुई बैठक में लिया गया। सभी संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस प्रशिक्षण अवधि के दौरान बिना किसी अत्यावश्यक कारण के अवकाश न लें, क्योंकि यह प्रशिक्षण अनिवार्य है।  

मौसम का बदला मिजाज: पंजाब में आंधी-बारिश का अलर्ट, तापमान 7 डिग्री तक बढ़ेगा

चंडीगढ़. पंजाब के मौसम को लेकर अहम खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि अब 14 अप्रैल तक मौसम साफ रहने के आसार हैं और बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। मौसम विभाग की ओर से 14 अप्रैल तक राज्य में बारिश या आंधी-तूफान को लेकर किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की गई है। चंडीगढ़ मौसम विभाग के निदेशक सुरिंदर पाल के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम ज्यादातर शुष्क रहेगा। अगले 24 घंटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद अगले 4 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल तापमान सामान्य से करीब 7.2 डिग्री कम चल रहा है। होशियारपुर में अधिकतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 22 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार  मौसम विभाग के अनुसार आज राज्य के 22 जिलों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इनमें पठानकोट, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली शामिल हैं। इसके अलावा अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला समेत कई अन्य जिलों में भी छिटपुट बारिश की संभावना है, लेकिन इसके बाद राज्य में मौसम के फिर से शुष्क रहने के आसार हैं।

बच्चों का चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव है — डॉ. वर्णिका शर्मा

 बच्चों का चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है — डॉ. वर्णिका शर्मा  रायपुर आज दिनांक 08 अप्रैल 2026 को महाराणा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा “मोर मयारू गुरुजी” कार्यक्रम कॉलेज के अनुरोध पर आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम प्रातः 10:30 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 1:00 बजे तक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों को सही दिशा देना तथा उनका उत्तम चरित्र निर्माण करना एक शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को इस कार्य को यज्ञ मानकर करना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र का भविष्य शिक्षकों द्वारा गढ़े गए बच्चों के चरित्र पर ही निर्भर करता है। इस अवसर पर आयोग के  सचिव श्री प्रतीक खरे ने प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विभिन्न गतिविधियों, फिल्मों, पावर पॉइंट प्रस्तुति, रोचक कहानियों एवं संवाद के माध्यम से उन्होंने समझाया कि बच्चे 80 प्रतिशत बातें अवलोकन से तथा 20 प्रतिशत बातें पढ़ने या सुनने से सीखते हैं। अतः शिक्षकों का व्यवहार बच्चों के समक्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कार्यक्रम में कॉलेज की प्राचार्य Dr. Jasmine Joshi, उपप्राचार्य Dr Sweta  Tiwari, वहां के बी.एड. संकाय के विभागाध्यक्ष वहां के शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि सरकार सहित समस्त फैकल्टी सदस्य एवं बी.एड./डी.एड. के लगभग 125 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन उपरांत प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं रोचक बताते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। आयोग द्वारा इस प्रकार के आयोजन हेतु कॉलेज का आभार व्यक्त किया गया। वहीं, महाराणा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज परिवार ने आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की कि उन्होंने अपने व्यस्त समय से समय निकालकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

अवैध अवकाश पर कड़ा एक्शन: नगर निगम ने कसी लगाम, दो अधिकारी निलंबित

भिलाई नगर. भिलाई नगर निगम क्षेत्र में जनगणना के कार्य की शुरुआत 1 मई से शुरू होने वाली है इसके पूर्व जनगणना प्रगणकों का प्रशिक्षण 10 अप्रैल को होने वाला है। नगर निगम के आयुक्त ने इस कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी अधिकारी-कर्मचारियों के अवकाश निरस्त कर दिए गए हैं बिना बताए अब कोई भी अधिकारी कर्मचारी अवकाश में नहीं जा सकते। जनगणना के प्रथम चरण में मकानों की सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य माह 1 मई से 30 मई के मध्य किया जायेगा जिसका प्रशिक्षण 10 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। नगर निगम भिलाई के समस्त अधिकारी, कर्मचारी बिना अनुमति के अवकाश पर नहीं जाएंगे एवं मुख्यालय नही छोड़ेंगे। कॉलोनी के अनुमोदन में खेला टाउन प्लानिंग राजनांदगांव में पदस्थ उप संचालक स्तर के दो अधिकारियों को राज्य शासन ने निलंबित करने का आदेश दिया है। इन अफसरों पर एक कॉलोनी के अनुमोदन के दौरान करोड़ों रूपये की गंभीर अनियमितता किए जाने का आरोप लगा है। एक अधिकारी सूर्यभान सिंह ठाकुर वर्तमान में दुर्ग में पदस्थ हैं, वहीं दूसरी महिला अधिकारी उप संचालक के पद पर राजनांदगांव में सेवारत है। मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के अवर सचिव शत्रुहन यादव ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें उनके द्वारा कहा गया है कि 15 जनवरी 2026 को नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा सत्यम परिवेश कॉलोनी के अनुमोदन अभिन्यास में करोड़ों रूपये का हेरफेर की गई है, जिस संबंध में राजनांदगांव में पदस्थ रहे संयुक्त संचालक सूर्यभान सिंह ठाकुर जो वर्तमान में दुर्ग में पदस्थ है, कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। प्रकरण में दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद जांच हेतु गठित की गई समिति द्वारा जांच प्रतिवेदन में सूर्यभान ठाकुर एवं राजनांदगांव में पदस्थ उप संचालक कमला सिंह को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है, जिसके कारण निलंबित किए जाने का आदेश जारी किया है।