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सफलता की कहानी-किराना दुकान से लगभग 25 हजार रुपये की कर रहीं हैं आय अर्जित

सफलता की कहानी-आजीविका मिशन से रमशीला कश्यप को मिला आत्मनिर्भरता का संबल सफलता की कहानी-किराना दुकान से लगभग 25 हजार रुपये की कर रहीं हैं आय अर्जित रायपुर एक समय माओवाद से प्रभावित रहा कोंडागांव जिले का दूरस्थ ग्राम कुधुर आज विकास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। शासन की योजनाओं की पहुँच ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है, और इसी परिवर्तन की मिसाल हैं ग्राम की निवासी श्रीमती रमशीला कश्यप। किराना दुकान संचालन से प्रति माह लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहीं हैं l           राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर रमशीला कश्यप ने अपने जीवन को नई दिशा दी। वर्ष 2018 में उन्होंने ‘जय मां दंतेश्वरी’ स्व-सहायता समूह की सदस्य बनकर आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत की। उस समय गांव में केवल एक किराना दुकान था, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लगभग 20 किलोमीटर दूर मर्दापाल जाना पड़ता था। ग्रामीणों की इस समस्या को समझते हुए रमशीला कश्यप ने गांव में ही किराना दुकान खोलने का साहसिक निर्णय लिया। स्व-सहायता समूह से प्राप्त 50 हजार रुपये की सहायता से उन्होंने अपनी दुकान की शुरुआत की। समय के साथ उन्होंने दुकान में जरूरत के अनुसार सामग्री बढ़ाई और अपने व्यवसाय को मजबूत किया।      आज रमशीला की यह छोटी-सी पहल पूरे गांव के लिए बड़ी सुविधा बन चुकी है। जहां एक ओर ग्रामीणों को आवश्यक वस्तुएं गांव में ही उपलब्ध हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर रमशीला कश्यप के परिवार की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्तमान में वे प्रति माह लगभग 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। पहले केवल खेती पर निर्भर रहने वाला उनका परिवार अब अतिरिक्त आय के स्रोत से सशक्त हो गया है।          रमशीला कश्यप की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। आज वे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। रमशीला कश्यप ने शासकीय योजनाओं से मिली सहायता के लिए शासन प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

मध्य प्रदेश की नर्सिंग भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, सरकार से पूछा- जेंडर भेदभाव क्यों?

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में महिलाओं को सौ प्रतिशत आरक्षण देने को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सरकार से पूछा है कि जेंडर के आधार पर भेदभाव क्यों किया जा रहा है। दरअसल, प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर 800 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। मामले पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। संतोष कुमार लोधी सहित कई अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने बताया कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा दो अप्रैल, 2026 को जारी विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर व सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग आफिसर के सौ प्रतिशत पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। पुरुष अभ्यर्थी पूरी तरह से वंचित हो गए इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। दलील दी गई कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रविधान वैधानिक नियमों के विपरीत है। 100 प्रतिशत पदों पर आरक्षण को हटाया जाए तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (बीएससी नर्सिंग/जीएमएम) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है। केवल जेंडर के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। मांग की गई है कि विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए जो 100 प्रतिशत पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करता है।  

एग्जाम ड्यूटी पर बड़ा फैसला: पंजाब यूनिवर्सिटी ने स्टाफ का मेहनताना बढ़ाया

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) प्रशासन ने परीक्षाओं के दौरान ड्यूटी निभाने वाले स्टाफ के मान भत्ते में वृद्धी करते हुए नया सर्कुलर जारी कर दिया है। यह फैसला यूनिवर्सिटी और इससे संबंधित 200 कॉलेजों के करीब ढाई लाख विद्यार्थियों की परीक्षाओं के प्रबंधों में जुटे स्टाफ के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। सर्कुलर के अनुसार अंडरग्रेजुएट पेपर सैंटरों के लिए 850 रुपये और Ph. D. थीसिस के  मुल्याकन के लिए 5000 रुपये मेहनताना तय किया गया है। विदेशी ग्जामिनर्स के लिए यह रकम बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा बोर्ड ऑफ फाइनेंस की मीटिंग में सुपरिंटेंडेंट, क्लर्क और इलेक्ट्रीशियन के मेहनताना में 20 परसेंट बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी गई है। यह सुधार रिसर्च स्कॉलर्स की लंबे समय से चली आ रही कोशिशों का नतीजा है। सामाजिक कार्य विभाग के रिसर्च स्कॉलर शीशपाल शिओकंड की लीडरशिप में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को एक मांग पत्र दिया गया था, जिसमें कहा गया कि मौजूदा 300 रुपये की दर एग्जाम ड्यूटी की जिम्मेदारी और समय के हिसाब से बहुत कम है। शीशपाल ने इस फैसले को सभी टीचर्स, रिसर्चर्स और नॉन-टीचिंग स्टाफ की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला एकेडमिक सिस्टम में उनके रोल की अहमियत को मानता है। नए रेट्स में पोस्ट ग्रेजुएट प्रोफेशनल एग्जामिनेशन के लिए 1200 रुपये प्रति सेमेस्टर और एम. फिल थ्योरी एग्जामिनेशन के लिए 1200 रुपये तय किए गए हैं। 

अब स्कूलों में AI की एंट्री: छत्तीसगढ़ में प्राचार्यों को Google विशेषज्ञों का प्रशिक्षण

रायपुर. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में शिक्षा का तरीका भी बदल रहा है. इस दौड़ में छत्तीसगढ़ के बच्चे पीछे न रह जाएं इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग गूगल के साथ मिलकर तैयारी में जुटा है. इस कड़ी में आज आत्मानंद स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक के साथ कार्यशाला होने वाली है, जिसमें गूगल के विशेषज्ञ प्राचार्यों को नई तकनीक से अवगत कराएंगे. स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बैठक और कार्यशाला के संबंध में कहा कि शिक्षा गुणवत्ता को बेहतर से बेहतर करने पर जोर है. AI बेस्ड एजुकेशन आने वाला है, उसकी तैयारी में विभाग लगा हुआ है. आने वाले समय में बारहखड़ी से लेकर AI तक की जानकारी बच्चों को रहेगी. ऐसे में AI तकनीक से प्रशिक्षण देने आज गूगल के विशेषज्ञ आ रहे हैं. शिक्षा मंत्री यादव ने कहा कि 15 अप्रैल से 15 जून तक शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू होगा. 16 जून से जब बच्चा आए तो उसको सब आवश्यक संसाधन मिले, इसके लिए विभाग ने सभी तैयारियों को जारी रखा है. वहीं प्राइवेट स्कूल की बुक्स को लेकर वेंडर की मनमानी पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बहुत सारे संस्थाओं से शिकायत आई है. ज्यादा रेट में बेचने की शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है. जहां-जहां गड़बड़ी होगी, वहां वहां कार्रवाई करेंगे. सारे जिला शिक्षा अधिकारी जांच कर रहे हैं, कई जगह पर छापा पड़ा है. निर्देश दिए गए हैं कि कहीं भी सुनाई में भी आए तो स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करें. 12वीं बोर्ड के कल होने वाले हिंदी के पेपर की सुरक्षा को लेकर गजेंद्र यादव ने कहा कि जितनी सुरक्षा कर हम सकते हैं, हमने किया है. लास्ट टाइम भी किया था, अब भी कर रहे हैं. पिछली बार भी पेपर लीक नहीं हुआ था, सिर्फ शक के आधार पर किया गया था. इस बार हमने बहुत कड़ाई से सिस्टम तय किया है, कहीं कोई दिक्कत नहीं होगी. कांग्रेस की बैठक को लेकर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की तुलना भारतीय जनता पार्टी से नहीं हो सकती. वहां कोई संगठन नहीं रहता, जो उनके नेता बोलते हैं, वही करते हैं. किसी भी तरह की बात नहीं मानते हैं, अपने हिसाब से करते हैं. वहीं शिक्षा के अधिकारी (RTE) को लेकर प्राइवेट स्कूल की मांग पर मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि जो स्कूल वाले ऐसी बात करते हैं. जहां ज्यादा है, वहां क्यों देख रहे हैं. कई राज्य ऐसे हैं, जहां छत्तीसगढ़ से भी कम में हो रहा है. हमारे से आधे पैसे से काम हो रहा है. यह तर्क बिल्कुल सही नहीं है.

धार भोजशाला पर बड़ा खुलासा, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में बताया मंदिर या मस्जिद होने का सच

धार   इंदौर में चल रहे भोजशाला मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में कहा कि उन्हें भोजशाला कमाल मौला परिसर में पूजा करने का खास अधिकार मिलना चाहिए. उनका कहना है कि वहां पहले एक हिंदू मंदिर था और मंदिर का पवित्र महत्व समय के साथ खत्म नहीं होता है. भगवान की पहचान नहीं मिटती, हाई कोर्ट में भोजशाला पर टकराव HFJ के वकील विष्णु शंकर जैन ने अपनी दलील में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद और श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़े मामलों के फैसलों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि भगवान को कानून में एक “कानूनी व्यक्ति” माना जाता है और अगर मंदिर या मूर्ति को नुकसान भी पहुंच जाए, तब भी उसकी पहचान खत्म नहीं होती है. उन्होंने यह भी कहा कि उनका तर्क सिर्फ इस पर नहीं है कि वहां पूजा होती रही है, बल्कि इस पर है कि वहां पहले से मंदिर मौजूद था. इसलिए उन्हें पूजा का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने अपनी बात को एक बार मंदिर, हमेशा मंदिर कहकर समझाया. इस मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी. भोजशाला के प्राचीन इतिहास पर विस्तार इससे पहले भी हिंदू पक्ष ने भोजशाला के प्राचीन इतिहास पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 10वीं और 11वीं शताब्दी में परमार वंश के शासनकाल के दौरान भोजशाला एक प्रमुख विद्या और संस्कृति केंद्र के रूप में स्थापित थी. राजा भोज द्वारा निर्मित यह जगह मूल रूप से सरस्वती मंदिर के रूप में जाना जाता था, जहां छात्रों को शिक्षा दी जाती थी. सुनवाई के दौरानभोजशाला परिसर में लगाए गए बोर्ड का भी जिक्र किया गया, जिसमें स्थल की ऐतिहासिक और पुरातात्विक को दिखाता था. हिंदू पक्ष ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण का समर्थन किया और रिपोर्ट में आए तथ्यों को अपनी दलीलों के पक्ष में बताया. शपथ पत्र में क्या लिखा था? उन्होंने बताया कि इसी शपथ-पत्र में माना गया है कि इसके निर्माण(Dhar Bhojshala) में जिन पत्थरों का उपयोग हुआ, वो यहां मौजूद मंदिर भोजशाला के थे। इसी कारण इसमें संस्कृत के श्लोक भी हैं। इस्लाम में किसी मंदिर को तोड़कर या उसी जगह पर मस्जिद बनाने को गलत माना गया है। हमने जो फोटो और बातें रखी हैं, उनका कहीं भी सोसायटी ने विरोध नहीं किया, न ही इन्हें नकारा है।  आजाद भारत में खिलजी के कानून नहीं चल सकते अभिभाषक जैन ने आगे कहा कि गुलाम वंश, खिलजी वंश, मुगलों का समय, ये ऐसे दौर रहे हैं जब हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों को उनसे छीना गया था। धार्मिक स्थानों पर पूजा-अर्चना पर पाबंदी लगाई गई थी। जबकि वर्ष 1950 में भारत में संविधान लागू होने के बाद सभी को अनुच्छेद-25 और 30 के तहत अधिकार मिले, तो यह अधिकार भी मिला कि सभी अपने धार्मिक रिवाजों का पालन करने और अपने शैक्षणिक संस्थानों के संरक्षण के अधिकार के पात्र हैं। गुलाम वंश या खिलजी वंश के शासकों ने आदेश दिए थे, वो आदेश भारत में संविधान आने के बाद लागू नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने उन्हें टोकते हुए इसका आशय उनसे पूछा तो जैन ने कहा, इन शासकों ने ही धर्मस्थलों को तोड़कर बदला था। समर्थन में राम जन्मभूमि के फैसले का जिक्र सुनवाई (Dhar Bhojshala) के दौरान अभिभाषक जैन ने अपनी दलीलों को पुख्ता करने के लिए पूर्व में सुप्रीम कोर्ट, इलाहबाद हाईकोर्ट सहित अन्य हाईकोर्ट द्वारा अलग-अलग मामलों में दिए आदेशों का हवाला भी दिया। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसले को कई दलीलों के समर्थन में रखा।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में मिलेगा 20% आरक्षण, अग्निवीर नीति 2024 को कैबिनेट की मंजूरी

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में  यहां आयोजित कैबिनेट की बैठक में अग्निवीर नीति, 2024 को स्वीकृति प्रदान की गई। इससे पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास, उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने तथा वर्दीधारी सेवाओं और सुरक्षा से संबंधित पदों में उनके कौशल का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही उन्हें हरियाणा सरकार के अधीन सेवाओं/पदों, जैसे कि फॉरेस्ट गार्ड (पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग), वार्डर (कारागार विभाग) तथा माइनिंग गार्ड (खान एवं भूविज्ञान विभाग) में वर्तमान 10 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल आरक्षण को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पूर्व में हरियाणा के अधिवासी पूर्व अग्निवीरों को कुछ ग्रुप ‘सी’ पदों, जिनमें फॉरेस्ट गार्ड, वार्डर और माइनिंग गार्ड शामिल हैं, में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया हुआ था। इसके पश्चात, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विभिन्न सेवाओं/पदों की भर्ती में, जहां उनके विशेष सैन्य प्रशिक्षण, शारीरिक क्षमता, अनुशासन और फील्ड अनुभव का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है, पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की सलाह दी थी। मंत्रिमंडल के इस निर्णय को सभी चालू तथा भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में लागू करने के लिए संबंधित प्रशासनिक विभागों को आवश्यक संशोधन करने तथा संशोधित निर्देश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

पलामू के मेडिकल कॉलेज में मची अफरातफरी, मेस में एलपीजी खत्म होने से बंद हुई छात्रों की चाय और अंडा

 मेदिनीनगर झारखंड के पलामू के पोखराहा स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में एलपीजी गैस की किल्लत से मेडिकल कालेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों को सुबह नाश्ता में कटौती की गई है. चाय और अंडा बंद कर दिया गया है. एलपीजी गैस की व्यवस्था नही हो पायी तो लकड़ी व कोयले पर खाना बनाना पड़ सकता है. एलपीजी गैस की व्यवस्था नही हो पायी तो लकड़ी व कोयले पर खाना बनाना पड़ सकता है. छात्र हुए नाराज छात्रों ने बताया कि पिछले एक माह से नाश्ता में केला दिया जा रहा है. एलपीजी गैस की सुविधा रहने से अंडा, केला और चाय सुबह में मिलता था. गैस की कमी के कारण मेस संचालक को काफी परेशानी हो रही है. छात्रों ने बताया कि मेंस संचालक ने छात्रों को जानकारी दिया था कि गैस की कमी के कारण खाना तैयार करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अल्टीमेटम दिया है कि सुबह का नाश्ता और खाना उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है. इससे छात्र काफी नाराज हो गए थे. संचालक को मेस चलाना मुश्किल मेस संचालक ने ब्लैक में गैस लेकर नाश्ता और खाना बनाना शुरू किया. जो काफी महंगा पड़ रहा है. ब्लैक में गैस लेने के कारण में संचालक को मेस चलाना मुश्किल हो रहा है. उसने विद्यार्थियों को पैसा बढ़ाने की बात कही, जिससे इस समस्या से निजात मिल सके. लेकिेन छात्र संचालक के बात से सहमत नहीं हुए. इस कारण मेस संचालक को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. मेडिकल कालेज मेस में हर तीन सिलिंडर की खपत मेदिनीराय मेडिकल कालेज के मेस में खाना बनाने के लिए हर दिन 40 केजी गैस की जरूरत है. कालेज में करीब 500 छात्र और छात्राएं पढ़ाई करते हैं. सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना बनाने के लिए हर दिन गैस की जरूरत पड़ती है. इसके लिए महीने में 60 सिलेंडर की आवश्यकता पड़ती है. गैस की किल्लत के कारण मेस संचालक को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. जिसके कारण उन्हें ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने के कारण मेस का खर्च बढ़ जा रहा है. मेस का खर्च बढ़ने के कारण संचालक काफी परेशान हैं. मेस संचालक ने बताया कि गैस की किल्लत होने के कारण लकड़ी या कोयले से खाना बनाना पड़ सकता है. इससे काफी परेशानी होगी. समय पर भोजन नहीं मिल पाएगा. मेडिकल कॉलेज जिला प्रशासन को भेजेगा पत्र मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ जक्का श्रीनिवासन राव ने कहा कि मेस संचालक को आवेदन देने के लिए कहा गया है. आवेदन को जिला प्रशासन को भेजा जाएगा, जिससे कि गैस की उपलब्धता आसानी से हो सके.

एमपी में किसानों के लिए बड़ी राहत: चार संभागों में शुरू हुई गेहूं खरीदी, सरकार देगी बोनस

भोपाल   न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी आज से भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग के जिलों में हुई शुरू । इसके लिए तीन दिन पहले से स्लॉट बुकिंग शुरू हो गई थी, जिन किसानों ने गेहूं तुलाई की तारीख 9 अप्रेल चुनी होगी, उनका ही गेहूं खरीदा जाएगा। शेष संभागों में खरीदी 15 अप्रेल से होगी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को किसानों व जनप्रतिनिधियों से वर्चुअल चर्चा की। बारिश-धूप से बचाव के इंतजाम किए जाएं सीएम ने कहा कि मप्र किसान जब उपज लेकर केंद्रों तक आएं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्रों की होगी। बेमौसम बारिश में किसानों की उपज न भीगे। गर्मी में उन्हें परेशान न होना पड़े, इसका ध्यान रखा जाए। अगले वर्षों में 2700 रुपए देंगे सीएम ने किसानों से कहा कि सरकार हर किसान का गेहूं खरीदेगी। भुगतान समय पर करेंगे। इस साल बोनस मिलाकर 2625 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान होगा। आगामी वर्षों में राशि 2700 प्रति क्विंटल तक लेकर जाएंगे।  बता दें कि राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस के रूप में 40 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है। इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। 19 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया पंजीयन उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3 हजार 627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए अपना पंजीयन कराया था। हेल्प डेस्क बनाए, सीएम ने किसानों को भी दिए निर्देश सीएम मोहन यादव ने बताया कि उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से खरीदी की संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। उपार्जन केंद्रों पर पंप्लेट और होर्डिंग के जरिए भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं। बताते चलें कि वर्ष 2026 से किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उपार्जन केन्द्रों पर आने वाले किसानों को उनके कल्याण तथा हितों से जुड़ी शासन की योजनाओं से भी अवगत कराए जाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर कार्यालयों को घेरने की तैयारी में कांग्रेस मध्य प्रदेश में देरी से गेहूं की खरीद शुरू होने के मामले में एमपी कांग्रेस, किसान कांग्रेस के पदाधिकारी और सभी जिलों के अध्यक्ष कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की तैयारी कर चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी छतरपुर जिले में प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। आज से इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूं की खरीद शुरू हो रही है। 15 अप्रैल से प्रदेश के दूसरे संभागों में गेहूं खरीद शुरू हो जाएगी।

शिक्षा में सख्त नियम: पटना के प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी, गरीब बच्चों के दाखिले से इनकार पर भारी जुर्माना

पटना. शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के प्रविधानों के तहत राज्य सरकार से प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालयों की मनमानी पर नकेल कसेगी। ऐसे विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीट पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के बच्चों का नामांकन नहीं लेने वाले विद्यालय प्रबंधन पर एक लाख रुपये तक आर्थिक जुर्माना लगाने की कार्रवाई होगी। विद्यालय द्वारा नर्सरी या कक्षा एक में नामांकन के लिए लाभुक वर्ग के बच्चे की साक्षात्कार या टेस्ट (स्क्रीनिंग प्रक्रिया) लिया तो आर्थिक दंड भी लगेगा। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी किया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा अभियान) को निर्देश पत्र भेजकर कहा है कि आरटीई कानून का पहली बार उल्लंघन करने पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। इसके बाद विद्यालय द्वारा दूसरी बार उल्लंधन करने पर 50 हजार रुपये आर्थिक दंड लगाया जाएगा। सरकार ने बिना स्वीकृति प्राप्त किए कोई प्रारंभिक विद्यालय संचालित रखने पर दोषी व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। निर्धारित तिथि के बाद भी विद्यालय संचालित रखने पर प्रतिदिन 10-10 हजार रुपये की दर से जुर्माना वसूल किया जाएगा।

रोजगार दिवस पर ‘मोर गांव मोर पानी’ योजना से जल संरक्षण को नई दिशा, युवाओं की भागीदारी पर जोर

रोजगार दिवस पर मोर गांव मोर पानी से जल संरक्षण को नई धार, युवाओं की भागीदारी पर जोर बिलासपुर जिले की समस्त 486 ग्राम पंचायतों में शासन के निर्देशानुसार रोजगार दिवस एवं आवास दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर “मोर गांव मोर पानी” एवं “मोर तरिया” अभियान के तहत जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान “नवा तरिया-आय के जरिया” थीम के अंतर्गत नए तालाब (तरिया) निर्माण हेतु संभावित स्थलों का चिन्हांकन प्लॉट एवं जीआईएस टूल के माध्यम से किए जाने की जानकारी दी गई तथा प्रस्तावित कार्यों के लिए कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत स्वीकृत आवासों को 90 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।      हितग्राहियों को योजना अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि की जानकारी देते हुए उनकी समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया गया। स्व-सहायता समूह की महिलाओं को सामग्री आपूर्ति एवं अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो सकें।कार्यक्रम में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जियो टैगिंग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा शिकायतों के त्वरित निराकरण पर विशेष बल दिया गया। साथ ही क्यूआर कोड के माध्यम से योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार की जानकारी भी दी गई। उक्त आयोजन में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही।