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डीडवाना निवासी और पूर्व प्रदेश मंत्री सरोज प्रजापत के निधन से राजस्थान भाजपा में शोक

जयपुर भाजपा की पूर्व प्रदेश मंत्री एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सरोज प्रजापत का जयपुर के एक निजी अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया। जानकारी के अनुसार वे घुटनों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं और उनका ऑपरेशन भी हुआ था, लेकिन सर्जरी के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हार्ट फेलियर के चलते उनका निधन बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के बाद उनका शुगर लेवल बढ़ गया, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इसके बाद उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां वे पिछले तीन दिनों से वेंटिलेटर पर थीं। इलाज के दौरान उनकी दोनों किडनी फेल हो गईं और अंततः हार्ट फेलियर के चलते उनका निधन हो गया।  2019 में नागौर लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा सरोज प्रजापत मूल रूप से डीडवाना की निवासी थीं, लेकिन लंबे समय से नागौर में अपने परिवार के साथ रह रही थीं। उनके पति राजेंद्र कुमार सरकारी अकाउंटेंट पद से सेवानिवृत्त हैं। वे अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर नागौर लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनके निधन को पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि सरोज प्रजापत एक समर्पित, कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता थीं, जिन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन पार्टी परिवार के लिए गहरी क्षति है। इसके अलावा भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। नागौर और डीडवाना सहित विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर है।

राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने छोड़ी एमएलसी की सदस्यता

बिहार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्य यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं और नियमानुसार एमएलसी पद छोड़ना जरूरी है. सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया सुबह सवा 10 बजे इसकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है. उनके इस इस्तीफे को लेकर सुबह से गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ था. पहले JDU की ओर से कहा गया था कि उनका इस्तीफा हमारे पास है. बाद में JDU नेता इस्तीफा लेकर सभापति के पास पहुंचे. उन्होंने कहा- सभापति आएंगे तो इस्तीफा उन्हें सौंपा जाएगा. सामने आया है कि नीतीश के इस्तीफ़े वाला लेटर लेकर एमएलसी संजय गांधी विधान परिषद पहुंचे थे और विधान परिषद में इस्तीफे का पत्र दिया. जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि, जेडीयू एमएलसी संजय गांधी इस्तीफे का पत्र लेकर परिषद पहुंचे हैं. उन्होंने मीडिया के सामने इस्तीफे वाला लेटर भी दिखाया था. नीतीश कुमार आगे आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देंगे. हालांकि नियम के तहत वह अभी छह महीने सीएम रह सकते हैं. क्यों बना हुआ है सस्पेंस? असल में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है. राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद नियम के मुताबिक उन्हें परिषद की सदस्यता छोड़नी होती है. एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक बिहार विधान परिषद के सदस्य थे. वह हाल ही में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं. ऐसे में नीतीश कुमार को नियमानुसार एमएलसी पद से इस्तीफा देना अनिवार्य था. वह राज्यसभा की सदस्यता को अपने पास रखेंगे. मुख्यमंत्री पद कब छोड़ेंगे यह सवाल बना हुआ है. बता दें कि सीएम नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा देने की बात से रविवार शाम से ही बिहार की राजनीति में चर्चाएं होने लगी थीं. उनसे मिलने जेडीयू के कई नेता मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री विजेंद्र यादव मंत्री, अशोक चौधरी सीएम हाउस पहुंचे थे.

सपा की नोएडा रैली फ्लॉप, मिनी सीएम और वसूली मॉडल को जनता ने किया खारिज: ब्रजेश पाठक

नोएडा में सपा की रैली फ्लॉप, मिनी सीएम और वसूली मॉडल को जनता ने किया खारिज: ब्रजेश पाठक खाली कुर्सियों ने खोली सपा की जमीनी हकीकत अंधविश्वास छोड़ सत्ता की चाह में पहुंचे अखिलेश, नहीं मिला जनसमर्थन मोदी-योगी के नेतृत्व में बदला नोएडा-दादरी का चेहरा सपा राज में अराजकता, अब निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बना दादरी बीमारू छवि से बाहर निकल तेज़ी से आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश लखनऊ  नोएडा में अखिलेश यादव की हालिया रैली फ्लॉप साबित हुई, जहां खाली पड़ी कुर्सियों ने सपा की जमीनी स्थिति को उजागर कर दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि जिस नोएडा को समाजवादी पार्टी ने अपने शासनकाल में कई मिनी सीएम देकर ठेका, पट्टा और वसूली का अड्डा बना दिया था, उसी नोएडा की जनता ने आज सपा को पूरी तरह नकार दिया है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि रैली में अपेक्षित भीड़ का न जुटना यह साफ संकेत है कि सपा अब जमीन से कट चुकी है। जनसभा में खाली कुर्सियां यह बता रही हैं कि जनता अब जातिवादी और अवसरवादी राजनीति से दूर जा चुकी है और विकास को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्षों तक अपशकुन और अंधविश्वास के कारण नोएडा से दूरी बनाए रखने वाले अखिलेश यादव अब सत्ता की लालसा में वहां पहुंचे, लेकिन जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। “यह वही नोएडा है, जहां सपा सरकार के दौरान कानून व्यवस्था बदहाल थी और आम लोग असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर थे,” उन्होंने कहा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा शासन में नोएडा और दादरी क्षेत्र गुंडागर्दी और अराजकता का केंद्र बन गए थे। माताएं, बहनें, व्यापारी और युवा तक वहां जाने से कतराते थे। आज वही क्षेत्र विकास, निवेश और रोजगार का बड़ा केंद्र बन चुका है। यह बदलाव सरकार की नीतियों और मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नोएडा-दादरी क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। जेवर में बना अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रदेश को वैश्विक पहचान दिला रहा है और आने वाले समय में यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में शामिल होगा। ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा तय की है। प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और प्रदेश तेजी से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है। उन्होंने कहा कि सपा आज भी समाज को जाति में बांटने और संकीर्ण राजनीति में उलझी हुई है, जबकि भाजपा विकास, सुशासन और सबका साथ-सबका विकास के सिद्धांत पर काम कर रही है। जनता अब काम और परिणाम देख रही है, यही कारण है कि सपा की राजनीति अब असरहीन होती जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब रुकने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है और आने वाले वर्षों में यह देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनकर उभरेगा।

बड़ा एक्शन: हिसार के सरकारी स्कूलों को CBI नोटिस, प्रोत्साहन राशि की जांच शुरू

हिसार. चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जिले के चार सरकारी स्कूलों को नोटिस भेजा है। जिसमें कुलेरी, लाडवा, शाहपुर व उकलाना गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। उपरोक्त चारों स्कूलों से 2014 से 2016 के बीच विद्यार्थियों की कुल संख्या, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी), विद्यार्थी प्रोत्साहन राशि, खाते का विवरण, मिड-डे मील से संबंधित दस्तावेजों पर रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि 2014 में सीबीआई ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को सुवाधाओं के नाम पर पैसे डकारने का मामला दर्ज किया था। जिसकी पड़ताल चल रही है। प्रदेश के हर जिले के ऐसे सरकारी स्कूलों से पूछताछ की जा रही है। प्रथम चरण में हिसार जिले के 45 सरकारी स्कूलों में 3455 विद्यार्थियों फर्जी दिखाकर सुविधाओं के नाम पर पैसे डकारने के आरोप लगे हैं। कोर्ट के आदेश पर सीबीआई संबंधित स्कूलों से रिपोर्ट मंगवाकर जांच कर रही है। एडमिशन घोटाले में CBI ने कस दिया शिकंजा हरियाणा में एडमिशन में घोटाले में CBI ने शिकंजा और कस दिया है। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में दाखिले के नाम पर हुए फर्जीवाड़ा हुआ था। हरियाणा में फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धन का गबन किया गया। यह फर्जीवाड़ा साल 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में शुरू हुआ था जो सत्ता परिवर्तन के बाद भी वर्ष 2016 तक भाजपा सरकार में जारी रहा। इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर CBI जांच शुरू हुई और 3 FIR रजिस्टर्ड की गई थी। अब एक बार फिर CBI ने इस मामले में 4 नई एफआईआर दर्ज की गई है। सीबीआई ने धारा 120-B, 167, 218, 409, 418, 420, 477-A के तहत केस दर्ज किया गया है। यह मामला हिसार, सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल, झज्जर, रोहतक से जुड़ा हुआ है। त्वरित रिपोर्ट पेश आदेश  सीबीआई ने जिले के चार सरकारी स्कूलों को नोटिस भेजा है। संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे त्वरित रिपोर्ट पेश करें। -वेद सिंह दहिया, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार।

उद्योगों को राहत: पंजाब सरकार ने लीजहोल्ड प्लॉट को फ्रीहोल्ड बनाने की नीति पास की

चंडीगढ़. पंजाब कैबिनेट ने लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों/शेडों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधनों को भी मंजूरी दी है। इन संशोधनों के अनुसार, बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के पास गिरवी रखे गए औद्योगिक प्लॉट फ्रीहोल्ड में बदले जा सकते हैं, बशर्ते संबंधित बैंक द्वारा प्राप्त ‘नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ जमा करवाया गया हो और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किया गया हो। ऐसे मामलों में जहां मौजूदा टाइटल दस्तावेजों में अनार्जित वृद्धि संबंधी कोई धारा नहीं है, 5 प्रतिशत की कन्वर्जन फीस लागू होगी। कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तों पर जताई थी आपत्ति मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पहले हस्तांतरण नीति 2008, 2016 और 2021 में लाई गई थी। औद्योगिक संगठनों ने 2021 में लाई गई नीति की कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तों पर आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में एक कमेटी ने उद्यमियों की मांगों की समीक्षा की और फ्री होल्ड प्लॉटों पर लागू होने वाले परिवर्तनों का प्रस्ताव दिया। संशोधित नीति के अनुसार औद्योगिक प्लॉट की आरक्षित कीमत का 12.5 प्रतिशत हस्तांतरण शुल्क लागू होगा। कैबिनेट ने विशेष रूप से पीएसआईईसी के प्रबंधन वाले लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों और शेड्स को फ्री होल्ड में बदलने की नीति को भी मंजूरी दे दी। ये प्लॉट और शेड मूल रूप से लीजहोल्ड आधार पर आवंटित किए गए थे, जिनमें परिवर्तन संबंधी जटिल धाराएँ शामिल थीं, जिसके कारण संपत्ति के लेन-देन में कठिनाइयां आ रही थी। इस नई नीति का उद्देश्य औद्योगिक प्लॉटों के प्रबंधन को सुचारू करना, कारोबार में सुगमता बढ़ाना, आवंटियों के बीच मुकदमेबाजी और अनिश्चितता को कम करना है। इसके अलावा, इस हस्तांतरण से राज्य के लिए अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है। कैबिनेट ने एमएसएमई डेवलपमेंट एक्ट, 2006 के तहत एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल नियम-2021 में संशोधनों को मंजूरी दे दी। वर्तमान में जिला स्तर पर माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल संबंधित डिप्टी कमिश्नरों के नेतृत्व में काम कर रही हैं। हालांकि, इस एक्ट के तहत अवार्ड्स से संबंधित भुगतानों में देरी हो रही है।

GST 2.0 का असर: छत्तीसगढ़ की कमाई में इजाफा, प्रोडक्शन स्टेट्स पर दबाव तेज

रायपुर. देश में जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद जहां एक ओर करदाताओं को राहत मिली है। आम आदमी को चीजें सस्ती मिली और कुल जीएसटी कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है। बीते महीनों के आंकड़े दर्शाते हैं कि राजस्व संग्रह पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। वहीं, इसका दूसरा पहलू भी है। छत्तीसगढ़ जैसे उत्पादक-प्रधान राज्यों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कम उपभोग, अधिक उत्पादन और पुराने टैक्स क्रेडिट के बोझ के कारण राज्य को इस वित्तीय वर्ष में करीब 1500 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का अनुमान है। इससे राज्य सरकार पर दबाव बढ़ रहा है और जन कल्याणकारी योजनाओं को सतत चलाने में परेशानी आने की आशंका पैदा हो रही है। उल्लेखनीय है कि 1 जुलाई 2017 को लागू हुई जीएसटी व्यवस्था को देश का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाता है। इसके बाद जीएसटी 2.0 में कर दरों में कमी और प्रक्रियाओं को आसान किया गया है, जिससे व्यापार और आम लोगों को राहत मिली है। नए सुधारों के बाद देश के जीएसटी कलेक्शन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिसंबर 2025 में देश का कुल जीएसटी संग्रह 1.75 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल से 6.1 प्रतिशत अधिक है। वहीं जनवरी 2026 में यह बढ़कर 1.93 लाख करोड़ पहुंच गया, जो 6.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। देश के राजस्व में वृद्धि देश में जीएसटी कलेक्शन बढ़ रहा है लेकिन यह बढ़ोतरी सभी राज्यों के लिए समान नहीं है। छत्तीसगढ़ में जीएसटी कलेक्शन पर दबाव बढ़ गया है और इस वर्ष करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। क्यों हो रहा नुकसान जीएसटी एक गंतव्य आधारित कर प्रणाली है, यानी कर का लाभ उसी राज्य को मिलता है जहां वस्तु या सेवा का उपभोग होता है। छत्तीसगढ़ में स्टील, आयरन और कोयले का उत्पादन तो अधिक है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय कम होने के कारण उपभोग अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा राज्य से बड़ी मात्रा में माल दूसरे राज्यों में भेजा जाता है, जिससे कर का बड़ा हिस्सा उन राज्यों को मिल जाता है जहां इसका उपयोग होता है। कोयला सेक्टर बना बड़ी वजह राज्य के राजस्व पर सबसे ज्यादा असर कोयला क्षेत्र से पड़ रहा है। पहले कोयले पर 5 प्रतिशत जीएसटी था, जबकि इनपुट पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता था। इससे कंपनियों के पास भारी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो गया। अब कोयले पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत कर दी गई है, लेकिन कंपनियां पुराने आईटीसी का उपयोग कर रही हैं, जिससे राज्य को नकद राजस्व कम मिल रहा है। अन्य राज्यों में भी असर छत्तीसगढ़ ही नहीं, ओडिशा और झारखंड जैसे अन्य उत्पादन-प्रधान राज्यों में भी इसी तरह की स्थिति है, जहां करीब 1000 करोड़ तक के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ को इसकी वजह से करीब डेढ़ हजार करोड़ की राजस्व हानि का अंदेशा है। यह बड़ी राशि है और इससे छत्तीसगढ़ पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा। क्या होगा असर राजस्व में कमी का सीधा असर राज्य की विकास और जनकल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्थिति में सुधार 2027-28 से संभव है, लेकिन फिलहाल राज्यों को दबाव झेलना पड़ेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समस्या के समाधान के लिए आईजीएसटी सेटलमेंट सिस्टम की समीक्षा, उत्पादन राज्यों के लिए संतुलन व्यवस्था और क्षतिपूर्ति तंत्र पर विचार जरूरी है ताकि सभी राज्यों को जीएसटी का समान लाभ मिल सके।

सीएम योगी के हाथों नियुक्ति पाकर भावुक हुए अभ्यर्थी, कहा- मेहनत को मिला सम्मान’

665 नर्सिंग अधिकारियों को मिला नियुक्ति पत्र,  बोले-पारदर्शी चयन प्रक्रिया से मिला हक सीएम योगी के हाथों नियुक्ति पाकर भावुक हुए अभ्यर्थी, कहा- मेहनत को मिला सम्मान’ जाति-धर्म और क्षेत्रवाद से परे सभी को मिला समान अवसर-सीएम योगी छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता की सराहना की लखनऊ राजधानी लखनऊ के लोक भवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित 665 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर इन अभ्यर्थियों की खुशी देखते ही बन रही थी। मंच से एक-एक कर उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता व निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जाति-धर्म और क्षेत्रवाद से परे सभी को समान अवसर मिल रहा है। परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष बनाया गया : प्रियंका सिंह मोहनलालगंज, लखनऊ की प्रियंका सिंह ने कहा कि पारदर्शी परीक्षा के कारण मुझे प्रथम रैंक हासिल करने का गर्व मिला। उन्होंने बताया कि कैसे सकारात्मक बदलाव कर परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष बनाया गया। प्रियंका ने मुख्यमंत्री से मिलने को अपना सपना पूरा होना बताया। भावुक होकर परिवार व अपने बड़े भाई के सहयोग को याद किया। योग्यता को मिला सम्मान : संध्या सिंह सुल्तानपुर की संध्या सिंह ने कहा कि दो चरणों में हुई परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी रही। इसकी सबसे खास बात यह रही कि जो योग्य थे, वही चयनित हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अधिकारियों का आभार जताते हुए इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताया। योगी सरकार की ईमानदारी के कारण नहीं हो सकती कहीं गड़बड़ी : अनामिका यादव मैनपुरी की अनामिका यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि इतनी सख्ती थी कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं थी। उन्होंने इसे योगी सरकार की ईमानदारी और मेरिट आधारित चयन का उदाहरण बताया। पहले मेरे मन में यूपी को लेकर गलत धारणा थी, लेकिन सीएम योगी के आने से यह राज्य बहुत शानदार ढंग से विकसित हो रहा : शरिमा सिद्दीकी शरिमा सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा कि मैं वास्तव में आपकी बहुत बड़ी प्रशंसक हूं। मैं पहले सेना में थी और वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद मेरी उत्तर प्रदेश में बसने की कोई योजना नहीं थी। पहले मेरे मन में इस राज्य को लेकर एक गलत धारणा थी, लेकिन आपके नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में यह राज्य बहुत ही खूबसूरत और शानदार ढंग से विकसित हुआ है। हम बहुत तरक्की कर रहे हैं। इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।  गर्व और खुशी का पल : आकांक्षा आकांक्षा ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने को जीवन का गर्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि पारदर्शी परीक्षा से योग्य उम्मीदवारों को ही अवसर मिला है। पारदर्शी चयन बना भरोसे की नींव कार्यक्रम में शामिल अभ्यर्थियों ने एक स्वर में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता की सराहना की। इस चयन प्रक्रिया ने यह संदेश दिया कि अब सरकारी भर्तियों में मेहनत और योग्यता ही सफलता का आधार बन रही है। सिस्टम पर भरोसा बढ़ा नियुक्ति पत्र वितरण का यह कार्यक्रम केवल नौकरी देने का अवसर नहीं था, बल्कि युवाओं के विश्वास को मजबूत करने वाला क्षण भी बना। चयनित नर्सिंग अधिकारियों की आवाज में साफ झलक रहा था कि अब मेहनत का हक मिल रहा है और सिस्टम पर भरोसा बढ़ा है।

बिलासपुर में 26 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण, अटल परिसर से CM साय ने किया आगाज

अटल परिसर से विकास का नया अध्याय: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में 26 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और शिलान्यास छत्तीसगढ़ के निर्माता भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण अटल जी की प्रतिमा उनके व्यक्तित्व और विचारों को सहेजने की प्रेरक पहल — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान अरपा रिवर व्यू के समीप नवनिर्मित ‘अटल परिसर’ में भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें नमन किया।मुख्यमंत्री साय ने शहर के समग्र विकास को नई दिशा देते हुए 26 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा, प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि और छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता थे। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, जिसने प्रदेश को विकास की नई दिशा और पहचान प्रदान की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल जी की प्रतिमा उनके ऐतिहासिक व्यक्तित्व, विचारों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सहेजने की एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि यह परिसर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा और समाज में राष्ट्र निर्माण की भावना को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सभी नगरीय निकायों में ‘अटल परिसर’ के निर्माण का निर्णय लिया गया है, ताकि अटल जी के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को प्रदेश के 115 नगरीय निकायों में अटल परिसरों का लोकार्पण किया जा चुका है और यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिलासपुर के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और आज किए गए 26 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य शहर की अधोसंरचना को सुदृढ़ करेंगे तथा नागरिक सुविधाओं को नई गति देंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के माध्यम से शहर को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के बावजूद भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सुदृढ़ विदेश नीति और प्रभावी समन्वय के कारण आपूर्ति व्यवस्था सुचारु है तथा आम नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री साय द्वारा इस अवसर पर लगभग 12.43 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया गया। इनमें अटल परिसर निर्माण, मराठी कन्या शाला भवन में प्रथम तल निर्माण, इमलीपारा में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तथा रक्षित आरक्षी केंद्र का निर्माण प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय ने लगभग 14.50 करोड़ रुपये की लागत के नए विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इनमें अरपा क्षेत्र में सड़क, नाला एवं पिचिंग कार्य, जरहाभाठा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण तथा उसलापुर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा एवं चबूतरा निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं, जो शहर के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि अटल परिसर का निर्माण प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अटल जी के योगदान को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता और उनके आदर्श आज भी देश को दिशा दे रहे हैं।  इस अवसर पर बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, तखतपुर विधायक धरमजीत सिंह, कमिश्नर सुनील जैन, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सीएम योगी करेंगे 3350 करोड़ से अधिक की धनराशि का डीबीटी अंतरण

3350 करोड़ से अधिक की धनराशि का डीबीटी अंतरण करेंगे सीएम योगी करीब 28 लाख  विद्यार्थियों को होगा लाभ पिछड़ा वर्ग के 13.52 लाख से अधिक छात्रों को मिलेगा 1838 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को छात्रवृत्ति एवं पारिवारिक लाभ योजनाओं के अंतर्गत धनराशि का डीबीटी के माध्यम से अंतरण करेंगे। यह कार्यक्रम लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने  बताया कि इस अवसर पर कक्षा 9-10 एवं दशमोत्तर के कुल 27,99,982 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में लगभग 3350 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि मुख्यमंत्री के हाथों जारी की जाएगी।  उन्होंने बताया कि लाभान्वित छात्रों में अनुसूचित जाति के 6,68,707 विद्यार्थियों को 467.94 करोड़ रुपये, सामान्य वर्ग के 4,95,793 विद्यार्थियों को 779.10 करोड़ रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग के 13,52,357 विद्यार्थियों को 1838.59 करोड़ रुपये, अल्पसंख्यक वर्ग के 2,75,889 विद्यार्थियों को 252.76 करोड़ रुपये तथा अनुसूचित जनजाति के 7,236 विद्यार्थियों को 11.61 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की जाएगी।   मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि योगी सरकार “वंचितों को वरीयता – कमजोर को प्राथमिकता” के संकल्प के साथ कार्य करते हुए शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल कर रही है। छात्रवृत्ति योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पूरी प्रणाली का ऑटोमेशन किया जा रहा है तथा आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मोबाइल ऐप भी विकसित किया जा रहा है।

बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट से रात्रि उड़ान सेवा का शुभारंभ, CM साय ने भरी पहली नाइट फ्लाइट

बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट से रात्रि उड़ान सेवा का शुभारंभ: CM  साय ने भरी पहली नाइट फ्लाइट रायपुर  बिलासपुर के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट से आज रात्रि उड़ान सेवा की ऐतिहासिक शुरुआत हो गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नाइट ऑपरेशन्स का लोकार्पण किया और इसी दौरान स्वयं रात में पहली उड़ान से रायपुर के लिए रवाना हुए। विधायक श्री धर्मजीत सिंह भी मुख्यमंत्री जी के साथ रात्रिकालीन उड़ान में रायपुर गए। उल्लेखनीय है कि एयरपोर्ट को 3सी वीएफआर से उन्नत कर 3सी आईएफआर श्रेणी में विकसित करने का कार्य लगभग 31 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण किया गया।  इस उन्नयन के बाद डीजीसीए के द्वारा 6 फरवरी 2026 को एयरपोर्ट को 3सी आईएफआर श्रेणी में रात्रिकालीन संचालन की अनुमति प्रदान की गई, जिससे अब यहां रात में भी उड़ानों का संचालन संभव हो सका है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रात्रि उड़ान सेवा शुरू होने से अब निर्धारित उड़ानों के साथ-साथ आपातकालीन एवं मेडिकल फ्लाइट्स भी रात में संचालित हो सकेंगी, जिससे जीवनरक्षक सेवाएं और अधिक प्रभावी होंगी। बेहतर हवाई संपर्क से व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने नागरिकों से इस नई सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने की अपील करते हुए सभी यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुखद यात्रा की कामना की।  समारोह को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने भी संबोधित किया।   इस अवसर पर विधायक अमर अग्रवाल, धर्मजीत सिंह,  सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, संभाग आयुक्त सुनील जैन, आईजी  राम गोपाल गर्ग, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसपी  रजनीश सिंह, एयरपोर्ट के डायरेक्टर  एन वीरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।