samacharsecretary.com

डेडलाइन से पहले बड़ा सरेंडर: माओवादी नेता सोमन्ना ने छोड़ा हथियार

जगदलपुर/रायपुर. छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश से बड़ी खबर सामने आई है। नक्सल विरोधी अभियान के बीच माओवादी मोर्चे में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, डेडलाइन खत्म होने से ठीक एक दिन पहले कुख्यात माओवादी चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने विजयवाड़ा में आत्मसमर्पण कर दिया है। सोमन्ना माओवादी स्टेट कमेटी सदस्य है। बताया जा रहा है कि सोमन्ना AOB (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर) राज्य समिति का प्रमुख सदस्य था। इसके साथ ही वह केंद्रीय क्षेत्रीय समिति (CRC) की तीसरी कंपनी का कमांडर भी रहा है। शीर्ष माओवादी लीडर गजरला रवि और अरुणा की मौत के बाद इस क्षेत्र में माओवादी संगठन की बागडोरसोमन्ना के पास ही थी। बता दें कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस डेडलाइन से ठीक पहले सोमन्ना जैसे उच्च पदाधिकारी का आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। माओवादी मोर्चे पर बड़ी कामयाबी: AOB क्षेत्र के शीर्ष नेता सोमन्ना ने किया सरेंडर सुरक्षा बलों को माओवादी मोर्चे पर एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. सूत्रों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में माओवादी संगठन के स्टेट कमेटी सदस्य चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने आत्मसमर्पण कर दिया है. सोमन्ना AOB (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर) क्षेत्र की राज्य समिति का प्रमुख सदस्य था और केंद्रीय क्षेत्रीय समिति (CRC) की तीसरी कंपनी का कमांडर भी रह चुका है. उसे संगठन के अहम रणनीतिक चेहरों में गिना जाता था. बताया जा रहा है कि शीर्ष माओवादी नेताओं गजरला रवि और अरुणा की मौत के बाद इस क्षेत्र में संगठन की कमान सोमन्ना के हाथों में थी. ऐसे में उसका सरेंडर माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह सफलता नक्सल उन्मूलन अभियान में एक अहम उपलब्धि के तौर पर देखी जा रही है, खासकर उस समय जब सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सख्त समयसीमा तय कर रखी है. माओवादी संगठन का प्रमुख चेहरा था सोमन्ना सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमन्ना एओबी (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर) राज्य समिति का एक अत्यंत प्रभावशाली सदस्य रहा है। इसके साथ ही उसने केंद्रीय क्षेत्रीय समिति की तीसरी कंपनी के कमांडर के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली थी। शीर्ष माओवादी नेता गजरला रवि और अरुणा की मौत के बाद इस पूरे क्षेत्र में माओवादी संगठन के संचालन की कमान सोमन्ना के हाथों में ही थी। उसके आत्मसमर्पण को संगठन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। डेडलाइन से ठीक पहले मिली कामयाबी उल्लेखनीय है कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस निर्धारित तिथि से महज एक दिन पहले सोमन्ना जैसे उच्च पदस्थ पदाधिकारी का मुख्यधारा में लौटना सुरक्षा बलों के लिए एक रणनीतिक जीत मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि सोमन्ना के समर्पण से माओवादी नेटवर्क की कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे आगामी अभियानों को और अधिक मजबूती मिलेगी। नक्सलवाद पर सरकार के प्रयासों की संसद में सराहना, BJP सांसद नरेश बंसल का बयान संसद में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार के प्रयासों पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद नरेश बंसल ने सरकार की उपलब्धियों की सराहना की. उन्होंने कहा कि सरकार को नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण सफलता मिली है, क्योंकि उसने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल-मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेजी से काम किया है. बंसल ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार की रणनीति और सुरक्षा बलों की सक्रिय कार्रवाई के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिला है.

बांकीपुर विधायक नितिन नवीन का इस्तीफा मंजूर होने के बाद अब विधानसभा सीट पर होगा उपचुनाव

पटना भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को उनका इस्तीफा सौंपा। जिसे मंजूर कर लिया गया है। नितिन नवीन का विधायक पद से इस्तीफा; राज्यसभा में शुरू होगा नया सियासी सफर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को उनका इस्तीफा सौंपा। जिसे मंजूर कर लिया गया है। इससे पहले कल इस्तीफा नहीं देने के बाद राजनीतिक गलियारों में बिहार के अगले सीएम को लेकर नितिन के नाम की चर्चा होने लगी थी। इस्तीफा देने के बदले वे असम चले गए थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब नितिन नवीन राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख किया। बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव कराया जाएगा। एक्स पर नितिन नवीन ने साझा किया संदेश इससे पहले नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर एक्स पर किए पोस्ट में अपने संदेश में कहा कि वह अपने क्षेत्र और पूरे बिहार के विकास के लिए पहले की तरह ही समर्पित रहेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता के साथ अपने मजबूत रिश्ते को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया और कहा कि यही संबंध उन्हें लगातार ऊर्जा और प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत और विकसित बिहार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे। बांकीपुर और बिहार के मेरे सभी परिवारजन एवं कार्यकर्ता साथी, जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और दिनांक 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत नितिन नवीन ने लिखा कि मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया । इसी का प्रतिफल है कि यहाँ की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार 5 बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज़ उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुझे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ विधायकों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। सीएम नीतीश का जताया आभार मैंने अपने क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान जनता और कार्यकर्ताओं के सुझावों से ही निकाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने जब मुझे बिहार सरकार के मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया, तब मुझे कई अहम फैसलों, नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करने में सफलता मिली। इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं। आपको बता दें नितिन नवीन रविवार को असम के मार्गरिटा और जोनाई में आयोजित चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने असम की जनता से लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत से भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज असम राज्य तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने धाकड़ समाज को जयपुर में जमीन दिलाने की दी गारंटी

जयपुर राजधानी के मालवीय नगर स्थित पाथेय भवन में  धाकड़ समाज का अधिवेशन महज एक बैठक नहीं, बल्कि हक और पहचान की खुली घोषणा बनकर सामने आया। मंच पर नेताओं के भाषण थे, लेकिन नीचे बैठा समाज अपने भविष्य की रणनीति लिखता नजर आया। ओबीसी में 5% आरक्षण, जयपुर में छात्रावास और सामाजिक कुरीतियों पर सख्ती इन तीन मुद्दों ने पूरे कार्यक्रम का टोन तय किया। अब भावनाएं नहीं, दबाव चाहिए जैसे ही 5% ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठा, माहौल पूरी तरह बदल गया। मंच से साफ संदेश गया अब केवल मांग करने से काम नहीं चलेगा, ताकत दिखानी होगी। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि कई समाज राजनीतिक दबाव बनाकर अपना हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन धाकड़ समाज अभी भी बिखरा हुआ है। गुर्जर समाज का उदाहरण बार-बार मंच से गूंजा। संदेश साफ था एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार है।” कुछ प्रतिनिधियों ने तो यहां तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी, तो समाज आंदोलन की राह भी पकड़ सकता है। हालांकि, युवा नेतृत्व ने संतुलित लाइन भी खींची। युवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जुन धाकड़ ने कहा कि पहले संवाद और राजनीतिक पैरवी के रास्ते को पूरी ताकत से आजमाना चाहिए जब सत्ता में अपने लोग हैं, तो रणनीति भी समझदारी से बनानी होगी। छात्रावास पर भावनाएं उफान पर अधिवेशन का सबसे भावनात्मक पल तब आया, जब जयपुर में धाकड़ छात्रावास की बात उठी। मंच से सवाल उठा जब दूसरे समाजों की अपनी इमारतें हैं, तो हमारी पहचान कब बनेगी?” यह सवाल सीधे दिल पर लगा और माहौल भावुक हो गया। इसी बीच ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बड़ा दांव खेलते हुए कहा “समाज तैयारी करे, पैसा जुटाए, प्रबंधन तय करे जमीन दिलाने की गारंटी मेरी।” इस एक बयान ने पूरे हॉल में जोश भर दिया। इसे अधिवेशन की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। डिजिटल बनो, तभी आगे बढ़ो अधिवेशन में एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब पारंपरिक पत्रिका ‘धाकड़ बंधु’ को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाने की बात हुई। मंत्री नागर ने साफ कहा जो समाज डिजिटल होगा, वही संगठित और मजबूत बनेगा।” मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने की पैरवी ने यह साफ कर दिया कि समाज अब केवल परंपराओं में नहीं, तकनीक में भी अपनी जगह बनाना चाहता है। दहेज और फिजूलखर्ची पर सीधा हमला अधिवेशन सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। सामाजिक सुधार पर भी मंच से कड़े संदेश दिए गए। दहेज प्रथा को लेकर मंत्री नागर ने साफ कहा बदलाव की शुरुआत अपने घर से करनी होगी।” महिला नेताओं ने शादी-ब्याह में बढ़ते खर्च, दिखावे और डीजे संस्कृति पर सवाल उठाए। एक वक्ता ने तीखे अंदाज में कहा आज रिश्ते नहीं, मांग पत्र तय हो रहे हैं।” हाड़ौती क्षेत्र से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि वे प्री-वेडिंग शूट और मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। ईमानदारी ही सबसे बड़ी ताकत पूर्व संसदीय सचिव नरेंद्र नागर ने समाज की सबसे बड़ी पूंजी “ईमानदारी” को बताया। उन्होंने कहा कि धाकड़ समाज की पहचान मेहनती और भरोसेमंद लोगों के रूप में है, और यही उसकी असली ताकत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज को खुद को कमजोर मानने की मानसिकता छोड़नी होगी “जब सोच बदलेगी, तभी स्थिति बदलेगी।” बेटियों की शिक्षा ने बदली तस्वीर महिला शिक्षा पर भी सकारात्मक तस्वीर सामने आई। बताया गया कि समाज की बेटियां अब उच्च शिक्षा और नौकरियों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यहां तक कहा गया कि अब शिक्षित बेटियों के लिए योग्य वर ढूंढना भी चुनौती बनता जा रहा है जो बदलाव का संकेत है।

गृह मंत्रालय का बड़ा आदेश: बिहार से अवैध घुसपैठियों को हटाने की तैयारी तेज

मुजफ्फरपुर. बांग्लादेश में नई सरकार की गठन के बाद भारत सरकार ने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्या पर निगरानी तेज कर दी है। इन्हें डिपोर्ट कर बांग्लादेश और म्यांमार भेजा जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व में जारी आदेश के आलोक में बिहार से अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या को डिपोर्ट करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में गृह विभाग के अपर सचिव मो. शादाब मुस्ताक ने सभी राज्य के डीएम, एसएसपी और एसपी को पत्र भेजा है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय के जारी पत्र का हवाला देते हुए उन सभी बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की पहचान करने को कहा गया है जो यहां अवैध रूप से रह रहे हैं। पहचान के बाद इन्हें बांग्लादेश और म्यांमार के सीमा सुरक्षा बल को सौंप देना है। माना जा रहा कि पिछले माह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमाई जिलों की डेमोग्राफी में बदलाव को लेकर भी समीक्षा की थी। इसके बाद से इस दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। डिपोर्ट करने के साथ ली जाएगी बायोमीट्रिक पहचान बिहार के सीमाई जिले किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार की डेमोग्राफी में सबसे अधिक बदलाव आया है। ऐसा अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या के कारण हुआ है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी इनकी कुछ संख्या है। पिछले एक दशक में तेजी से बदलाव आया है। बिहार में 25 से 30 लाख ऐसे लोगों के रहने का अनुमान है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पिछले साल जारी आदेश के बाद भी इस दिशा में बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई। गृह मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद सक्रियता बढ़ी है। जारी आदेश के अनुसार, डिपोर्ट किए जाने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की बायोमीट्रिक पहचान भी ली जाएगी। यह रिकार्ड गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इससे डिपोर्ट किए गए लोगों पुनर्वापसी मुश्किल हो जाएगी। जिलों में विशेष टास्क फोर्स का गठित कर यह कार्य करना है। इसकी प्रतिमाह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जानी है।

विपक्ष के विरोध के बीच जालंधर निगम का बजट मंजूर, सदन में गूंजे नारे

जालंधर. जालंधर नगर निगम की हाउस बैठक सोमवार को उस समय हंगामे में बदल गई, जब मेयर वनीत धीर ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 569.40 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। बजट पेश होते ही विपक्षी दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने शून्य काल शुरू करने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का कहना था कि बजट पेश करने से पहले शून्य काल में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए थी, लेकिन उनकी इस मांग को नजरअंदाज कर सीधे बजट प्रस्तुत किया गया। इसी बात को लेकर हाउस में माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों दलों के पार्षदों ने विरोध जताया। हंगामे और नारेबाजी के बीच नगर निगम प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए महज ढाई मिनट के भीतर ही बजट को पारित कर दिया। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। 569.4 करोड़ का बजट प्रस्तुत मेयर वनीत धीर द्वारा प्रस्तुत इस बजट का कुल आकार 569.40 करोड़ रुपये है, जिसमें शहर के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। विकास कार्यों के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है, जिससे सड़कों, सीवरेज, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है। बजट के खर्च का विभाजन भी तय किया गया है। इसमें 312.70 करोड़ रुपये विभिन्न विभागों के संचालन और प्रशासनिक कार्यों के लिए रखे गए हैं, जबकि 55.56 करोड़ रुपये अन्य खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। बजट में विकास कार्यों को दी गई प्राथमिकता मेयर ने कहा कि नगर निगम की आय में सुधार हुआ है, जिसके चलते इस बार बजट में वृद्धि की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और खर्चों को संतुलित रखने का प्रयास किया जाएगा। इस बीच हाउस में शून्य काल की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनकी आवाज को दबाया गया है और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का अवसर नहीं दिया गया। बैठक के दौरान बने इस विवाद के चलते राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और टकराव की संभावना जताई जा रही है।

मौसम का बदलेगा मिजाज: तपती गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ में बारिश की संभावना

रायपुर. छत्तीसगढ़ में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है और अधिकतम तापमान सामान्य स्तर पर दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों तक तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन इसके बाद प्रदेश में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। रविवार को प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रहा। प्रदेश में फिलहाल कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई है। सिनोप्टिक सिस्टम मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार, (1) एक निम्न दबाव क्षेत्र बिहार से पश्चिम बंगाल के गंगा क्षेत्र तक झारखंड के ऊपर 1.5 किमी ऊंचाई तक फैला हुआ है। (2) एक द्रोणिका/पवन असातत्य उत्तरी ओडिशा के ऊपर स्थित चक्रवाती परिसंचरण से दक्षिणी छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक होकर दक्षिणी तमिलनाडु तक समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर तक स्थित है। आज कैसा रहेगा मौसम प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ वज्रपात और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं दो दिनों के बाद भी प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा होने की संभावना है। वहीं कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। रायपुर में मौसम का हाल रायपुर में आज आसमान आंशिक रूप से मेघमय रहने की संभावना है। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। यहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

भोपाल: मामूली विवाद में युवक की हत्या, होटल मालिक पर चाकू से हमला; परिजनों का थाने घेराव और चक्काजाम

भोपाल  भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में मामूली विवाद ने रविवार देर रात खौफनाक रूप ले लिया। ‘बेटा’ कहकर समझाने की कोशिश करने पर आरोपियों ने 35 साल के युवक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी।सोमवार सुबह गुस्साए परिजन और स्थानीय लोगों ने सुभाष कॉलोनी में चक्काजाम कर दिया। पुलिस की समझाइश के बाद करीब आधे घंटे में जाम खुल सका। इस दौरान परिजन का पुलिस से विवाद भी हुआ। परिजन हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ थाना परिसर में धरना दे रहे हैं। होटल बंद कर लौटते वक्त कर्मचारियों का विवाद पुलिस के अनुसार, विजय मेवाड़ा अशोका गार्डन और कोलार इलाके में चाय की दो होटलें चलाता था। रविवार रात करीब 1:30 बजे वह होटल बंद कर कर्मचारियों को प्रगति नगर छोड़ने के बाद लौट रहा था। यहां मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम अपने साथियों फरमान, कालू और इमरान के साथ मौजूद था। आरोपियों ने विजय के कर्मचारियों से अभद्रता की, जिन्होंने सुबह काम का हवाला देकर मना कर दिया। विरोध करने पर आसिफ ने ‘बेटा’ कहकर समझाने वाले विजय पर गुप्ती से कई वार किए। साथियों ने भी मारपीट की और सभी फरार हो गए। अस्पताल में तोड़ा दम, भारी पुलिस बल तैनात लहूलुहान विजय को स्थानीय लोगों ने हमीदिया अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना पर आधी रात को अशोका गार्डन और कोहेफिजा थाने की पुलिस भारी संख्या में पहुंची। पुलिस ने हत्या के मामले में दो-तीन संदेहियों को हिरासत में ले लिया, लेकिन मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम फरार है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर अवधेश गोस्वामी समेत कई थानों के टीआई, एसीपी और एडिशनल डीसीपी मामले की जांच में जुटे हैं। परिजनों में आक्रोश, थाने का घेराव और चक्काजाम सोमवार सुबह गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अशोका गार्डन थाने का घेराव कर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। हिंदू संगठनों ने प्रदर्शनकारियों को समर्थन दिया। इसी क्रम में सुभाष कॉलोनी में चक्काजाम भी किया गया, जो पुलिस की समझाइश पर आधे घंटे बाद हटा। हमीदिया मॉर्चरी के बाहर भी हंगामा हुआ, जहां पुलिस बल तैनात है। होटल बंद कर लौट रहा था, रास्ते में हुआ विवाद पुलिस के मुताबिक, मृतक विजय मेवाड़ा सुभाष कॉलोनी का रहने वाला था। वह अशोका गार्डन और कोलार इलाके में चाय की दो होटल चलाता था। रविवार देर रात करीब 1:30 बजे वह होटल बंद कर कर्मचारियों को छोड़ने प्रगति नगर गया था। यहां मुख्य आरोपी आसिफ उर्फ बम अपने साथियों फरमान, कालू और इमरान के साथ बैठा था। सभी मृतक के कर्मचारियों के पुराने दोस्त बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों से बदसलूकी, विरोध करने पर हमला आरोपियों ने कर्मचारियों को अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सुबह जल्दी काम होने का हवाला देकर मना कर दिया। इस पर आरोपियों ने उनसे अभद्रता शुरू कर दी। विजय ने इसका विरोध किया। उसने आसिफ को ‘बेटा’ कहकर समझाने की कोशिश की। इसी बात पर विवाद बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, गुस्साए आसिफ ने चाकू निकालकर विजय के पेट में घोंप दिया। उसके साथियों ने भी मारपीट की। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। घायल विजय को कर्मचारी और स्थानीय लोग फौरन निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

नीतीश कुमार और नितिन नवीन का इस्तीफा, राज्यसभा में उनके नए सफर की शुरुआत

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज से अपने राजनीतिक जीवन के एक नए चैप्टर की शुरुआत किए। बिहार विधान परिषद की सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी विधानसभा सदस्यता छोड़ दिया। 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, इन दोनों नेताओं का अब उच्च सदन में जाना का फैसला किया। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इसलिए भी खास है क्योंकि वो अब उन गिने-चुने नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद इन चारों सदनों का प्रतिनिधित्व किया है। चारों सदनों के सदस्य बनने का गौरव नीतीश कुमार का विधायी सफर 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से शुरू हुआ था। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य बने। 2006 से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने वाले है।इस्तीफे से ठीक पहले रविवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर सरगर्मी तेज रही। जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेता मौजूद रहे। सीएम आवास में भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई। नीतीश कुमार का राजनीति करियर     नीतीश कुमार ने 1985 में हरनौत (नालंदा) से पहली बार विधायक बनकर करियर की शुरुआत की। 1989 में बाढ़ (पटना) से पहली बार लोकसभा पहुंचे।     नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार लागू किए।     साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने 'सुशासन बाबू' के रूप में अपनी पहचान बनाई।     शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण जैसे क्रांतिकारी फैसलों का श्रेय नीतीश कुमार को दिया जाता है।     2026 में राज्यसभा निर्वाचित होने के साथ ही उन नेताओं में शामिल हो गए, जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों के सदस्य रहे हैं। नितिन का बांकीपुर से राज्यसभा तक का सफर भाजपा नेता नितिन नवीन भी आज विधानसभा की सदस्यता त्याग दिया। साल 2006 से लगातार बांकीपुर सीट (पटना) का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब वे राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बनेगी। माना जा रहा है कि इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। उनका वर्तमान विधान परिषद कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए उन्होंने समय से पहले ये पद छोड़ने का फैसला लिया। नीतीश कुमार का अनोखा रिकॉर्ड इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली है। वह अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों (लोकसभा, राज्य सभा, विधानसभा और विधान परिषद) की सदस्यता ग्रहण की है। नितिन नवीन ने भी छोड़ी विधायकी इधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी बांकीपुर विधानसभा सीट से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को रविवार को ही दे दिया था, जो संजय सरावगी आज विधानसभा में जमा कराएंगे। नितिन नवीन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वह अब राज्य सभा में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही बांकीपुर सीट अब रिक्त हो गई है, जहां जल्द ही उपचुनाव कराए जाएंगे। नितिन नवीन का राजनीतिक करियर     नितिन नवीन ने अपने पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की राजनीतिक विरासत को संभाला और पटना की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।     2006 में पहली बार बांकीपुर सीट से विधायक बने। तब से लेकर 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने तक, वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे।     नितिन नवीन ने भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का अनुभव हासिल हुआ।     बिहार में पथ निर्माण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह-प्रभारी के रूप में भी सक्रिय रहे, जहां जबर्दस्त कामयाबी मिली।     मार्च 2026 में बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद, अब वे विधानसभा की सदस्यता छोड़कर उच्च सदन में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं। रविवार को इस्तीफे का प्रोग्राम नितिन ने टाला नितिन नवीन के रविवार को ही इस्तीफा देने की सूचना थी। इसके लिए बिहार विधानसभा सचिवालय ने मीडिया को सूचना भी जारी कर दी। इसमें कहा गया कि सुबह 8:40 बजे नितिन नवीन विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिस में इस्तीफा सौपेंगे। मीडिया में खबरें भी आ गई। नितिन नवीन के इस्तीफे के लिए विधानसभा ऑफिस को रविवार को खोला गया।  नीतीश अब भी 6 महीने रह सकते हैं सीएम संविधान के मुताबिक राज्यसभा सदस्य बनने के 14 दिन में राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से उन्हें विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ रहा, क्योंकि अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो फिर उनकी एक सदस्यता खुद ही समाप्त हो जाती. एमएलसी पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पर बने रह सकते हैं. एक सांसद मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन 6 महीने के भीतर राज्य की सदस्यता लेना जरूरी होता है।  बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा, संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति बिना निर्वाचन के भी 6 महीने तक बिहार का मुख्यमंत्री रह सकता है.नीतीश कुमार को केवल विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना जरूरी है, मुख्यमंत्री पद से नहीं. वे चाहें तो अगले छह महीने तक सीएम पद पर बने रह सकते हैं. बावजूद इसके नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति करने का फैसला कर लिया है।  बीजेपी को लेना होगा तुरंत फैसला नीतीश के विधान परिषद से इस्तीफा देने के साथ ही उनके सियासी उत्तराधिकारी के चुनने … Read more

6 अप्रैल से जम्मू-छपरा के बीच शुरू होगी विशेष ट्रेन, गर्मियों में पठानकोट-जालंधर के यात्रियों को मिलेगा लाभ

 पठानकोट यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने जम्मू तवी से छपरा के बीच एक स्पेशल रिजर्व ट्रेन सेवा शुरू करने का फैसला किया है. यह ट्रेन अप्रैल से जुलाई तक चलेगी और खासतौर पर उन यात्रियों को राहत देगी, जो इस रूट पर सफर करने में दिक्कतों का सामना कर रहे थे।  रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन नंबर 05194 जम्मू तवी से हर बुधवार रात 01:20 बजे 8 अप्रैल से 15 जुलाई तक चलेगी और गुरुवार सुबह 09:15 बजे छपरा पहुंचेगी. इस दौरान कुल 15 ट्रिप पूरे किए जाएंगे. वहीं वापसी में ट्रेन नंबर 05193 छपरा से हर सोमवार दोपहर 14:12 बजे 6 अप्रैल से 13 जुलाई तक रवाना होगी और मंगलवार रात 11:00 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी. यह भी कुल 15 फेरे लगाएगी।  इस ट्रेन का ठहराव कठुआ, पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लुधियाना, अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, कप्तानगंज, पाडरौना, थावे, दिघवा डुबौली और छपरा कचहरी समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर होगा। 6 अप्रैल से होगी शुरूआत रेलवे के अनुसार, यह विशेष ट्रेन दोनों तरफ में कुल 15-15 फेरे लगाएगी। ट्रेन संख्या 05194, 8 अप्रैल से 15 जुलाई तक प्रत्येक बुधवार रात 1:20 बजे जम्मू तवी से रवाना होकर गुरुवार सुबह 9:15 बजे छपरा पहुंचेगी। वहीं, ट्रेन संख्या 05193, 6 अप्रैल से 13 जुलाई तक प्रत्येक सोमवार दोपहर 2:12 बजे छपरा से चलकर मंगलवार रात 11 बजे जम्मू तवी पहुंचेगी। ट्रेन में एसी, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे, जिससे हर वर्ग के यात्रियों को सुविधा मिल सकेगी। बुकिंग शुरू, आईआरसीटीसी या रेलवे काउंटर से करें बुक वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल ने बताया कि अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। यह सेवा जम्मू, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के यात्रियों को सीधी और आरामदायक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यात्री असुविधा से बचने के लिए अपनी टिकट आईआरसीटीसी या रेलवे काउंटर से पहले ही बुक कर लें। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी टिकट पहले से ही आईआरसीटीसी या रेलवे काउंटर से बुक कर लें, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

डीडवाना निवासी और पूर्व प्रदेश मंत्री सरोज प्रजापत के निधन से राजस्थान भाजपा में शोक

जयपुर भाजपा की पूर्व प्रदेश मंत्री एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सरोज प्रजापत का जयपुर के एक निजी अस्पताल में आकस्मिक निधन हो गया। जानकारी के अनुसार वे घुटनों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं और उनका ऑपरेशन भी हुआ था, लेकिन सर्जरी के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। हार्ट फेलियर के चलते उनका निधन बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के बाद उनका शुगर लेवल बढ़ गया, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इसके बाद उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां वे पिछले तीन दिनों से वेंटिलेटर पर थीं। इलाज के दौरान उनकी दोनों किडनी फेल हो गईं और अंततः हार्ट फेलियर के चलते उनका निधन हो गया।  2019 में नागौर लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा सरोज प्रजापत मूल रूप से डीडवाना की निवासी थीं, लेकिन लंबे समय से नागौर में अपने परिवार के साथ रह रही थीं। उनके पति राजेंद्र कुमार सरकारी अकाउंटेंट पद से सेवानिवृत्त हैं। वे अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर नागौर लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनके निधन को पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि सरोज प्रजापत एक समर्पित, कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ता थीं, जिन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन पार्टी परिवार के लिए गहरी क्षति है। इसके अलावा भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। नागौर और डीडवाना सहित विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर है।