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बस्तर के नन्हे ललित की आंखों में लौटी रोशनी जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन

रायपुर जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन बस्तर के नौ वर्षीय बालक ललित मौर्य के जीवन में अब खुशियों का एक नया सवेरा हुआ है। जिले के विकासखंड बस्तर के अंतर्गत ग्राम पंचायत नदीसागर के आश्रित ग्राम पराली का निवासी ललित जन्म से ही मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा था। इस जन्मजात विकार के कारण वह दुनिया की खूबसूरती देखने में पूरी तरह असमर्थ था और उसका बचपन अंधेरे के साये में बीत रहा था। हालांकि ललित के मोतियाबिंद की पहचान पूर्व में ही हो गई थी, लेकिन सर्जरी को लेकर मन में बैठे डर और संशय के कारण उसके परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं हो रहे थे।       ललित के उजाले की ओर बढ़ने का सफर 20 मार्च को बस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित दिव्यांग सशक्तिकरण शिविर से शुरू हुआ, जहाँ वह दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने पहुँचा था। कलेक्टर  आकाश छिकारा की पहल पर आयोजित इस विशेष शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान नेत्र विशेषज्ञों ने ललित की स्थिति को समझा। इस दौरान पलारी के नेत्र सहायक अधिकारी  अनिल नेताम ने विशेष सक्रियता दिखाते हुए परिजनों को ऑपरेशन के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उनके अथक प्रयासों और निरंतर दी गई समझाइश का ही परिणाम था कि परिजन अंततः सर्जरी के लिए राजी हुए, जिसके बाद ललित को तत्काल बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।        कलेक्टर बस्तर  आकाश छिकारा के विशेष दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाते हुए इस केस को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सेवा योजना और जिला प्रशासन के कुशल समन्वय से 24 मार्च को जिला महारानी अस्पताल जगदलपुर में डॉ सरिता थॉमस द्वारा ललित का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न हुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक, सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद और जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुमारी रीना लक्ष्मी के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम दिया।       इस पुनीत कार्य में नेत्र सहायक अधिकारी कुमारी दिव्या पाण्डे,  सुंकर अमृत राव,  देवकरण व्यास सहित वार्ड इंचार्ज मती अन्नपूर्णा साहू और स्टाफ नर्स मती स्मृता कच्छ व नमिता मौर्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही ऑपरेशन थिएटर में सहायक  डोलेश्वर जोशी की सक्रियता ने इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया। ऑपरेशन के बाद जब ललित की आंखों से पट्टी हटाई गई, तो उसके चेहरे पर आई चमक ने पूरी मेडिकल टीम की मेहनत को सफल कर दिया। अब ललित न केवल अपनी आंखों से दुनिया को देख पा रहा है, बल्कि अपने परिजनों और आसपास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से पहचानने भी लगा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस संवेदनशीलता ने एक मासूम के जीवन से अंधेरा मिटाकर एक परिवार के घर में उम्मीद का दीया जला दिया है।  

रामनवमी पर बदल जाता है हजारीबाग का रंग, चौक-चौराहों के नाम भी हो जाते हैं खास

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग में मनाई जाने वाली रामनवमी पूरे देश में अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां इस पर्व के दौरान पूरे शहर का रूप ही बदल जाता है, जिससे यह अयोध्या की झलक देता है। जिले में रामनवमी का त्योहार बहुत खास तरीके से मनाया जाता है। इस दौरान शहर के अलग-अलग मोहल्लों, चौक-चौराहों और सड़कों के नाम बदल दिए जाते हैं। इन जगहों को नए धार्मिक नाम दिए जाते हैं, जो अयोध्या के स्थानों से प्रेरित होते हैं। रामनवमी के समय शहर के कई प्रमुख चौक नए नामों से जाने जाते हैं। जैसे जादो बाबू चौक को परशुरामगढ़, कुआं चौक को भारतगढ़, झंडा चौक को दशरथगढ़, पंच मंदिर चौक को कृष्णगढ़, गोल चौक को अभिमन्युगढ़, ग्वालटोली चौक को नारायणगढ़ और सुभाष मार्ग को अंगदगढ़ कहा जाता है। इन नए नामों के बोर्ड भी लगाए जाते हैं। खास बात यह है कि रामनवमी जुलूस के दौरान लोग इन जगहों को उनके पुराने नाम से नहीं, बल्कि इन्हीं नए धार्मिक नामों से पुकारते हैं। इससे पूरा शहर एक धार्मिक माहौल में बदल जाता है। यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि करीब 100 साल से चली आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हजारीबाग के राम भक्त इस शहर को अयोध्या के रूप में देखते हैं। इसी वजह से यहां के चौक-चौराहों का नाम अयोध्या की तर्ज पर रखा जाता है। रामनवमी के मौके पर लाखों श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं और भव्य जुलूस निकालते हैं। इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी रामनवमी महासमिति और अन्य समितियों की होती है, जो हर साल इसे और भव्य बनाने का काम करती हैं। आज भी यह परंपरा उतनी ही जोश और आस्था के साथ निभाई जा रही है। नई पीढ़ी भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। यही वजह है कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में एक अलग पहचान रखती है।  

स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के तकनीकी सहयोग से बच्चों में गैर-संचारी रोगों पर राज्य स्तरीय परामर्श आयोजित

रायपुर बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), विशेषकर बाल मधुमेह, सिकल सेल रोग एवं जन्मजात हृदय रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान तथा प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रायपुर में  संजीव कुमार झा (संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाना, बहु-विभागीय समन्वय को बढ़ावा देना तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार एवं सुदृढ़ रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में एनसीडी की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों एवं भावी प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान, दवाओं की सतत उपलब्धता, उपचार अनुपालन तथा मजबूत रेफरल तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। सिकल सेल रोग प्रबंधन हेतु जशपुर मॉडल को एक प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। पैनल चर्चाओं में बाल मधुमेह एवं सिकल सेल रोग के समग्र प्रबंधन, निजी क्षेत्र की भागीदारी, सामुदायिक सहयोग तथा सामाजिक कलंक को कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। समूह कार्य के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्क्रीनिंग बढ़ाने, उपचार अनुपालन सुधारने तथा सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में AIIMS रायपुर एवं पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) एवं भारतीय शिशु रोग अकादमी (IAP) के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में, एकम फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। तकनीकी सत्रों में डॉ. खेमराज सोनवानी (उप संचालक, सिकल सेल), डॉ. वी.आर. भगत (उप संचालक, शिशु स्वास्थ्य)एवं  सुबोध धर शर्मा (राज्य सलाहकार, NP-NCD)  सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सलाहकार उपस्थित रहे। परामर्श में ट्राइबल वेलफेयर विभाग, स्कूल शिक्षा, समाज कल्याण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों की सहभागिता से बहु-विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ किया गया। सहयोगी संस्थाओं की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन, संगवारी, क्लिंटन फाउंडेशन, NASCO, प्रतिनिधि जुवेनाइल डायबिटीज तथा पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय योगदान दिया। इस राज्य स्तरीय परामर्श में कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया। साथ ही राज्य के उच्च प्राथमिकता वाले 8 जिलों—रायपुर, कांकेर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़ एवं राजनांदगांव से जिला स्तर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें जिला एनसीडी नोडल अधिकारी, सिकल सेल नोडल अधिकारी तथा एनसीडी सलाहकार/सहायक नोडल अधिकारी शामिल थे। इन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने जिलों के अनुभव साझा करते हुए जमीनी स्तर की चुनौतियों एवं संभावित समाधान प्रस्तुत किए। अंत में प्रतिभागियों ने राज्य में बच्चों हेतु एनसीडी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से कार्ययोजना को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की सहमति व्यक्त की गई। कार्यक्रम को सहयोग करने तथा सफल बनाने के लिए राज्य द्वारा यूनिसेफ की सराहना की गई और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम को करने के लिए विशेष सहयोग के लिए कहा गया।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अग्रिम जमानत, यौन शोषण मामले में कोर्ट का फैसला

प्रयागराज यौन शोषण के मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदनंद ब्रह्मचारी को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत उनके खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर दिया है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और याची दोनों को इस संबंध में मीडिया के सामने कोई बयान नहीं देने का निर्देश भी दिया है। आपको बता दें कि आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के आदेश के क्रम में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉस्को एक्ट व बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज़ किया गया। इस पर गिरफ्तारी से बचने के लिए अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में अविमुक्तेश्वरानंद व उनके शिष्य मुकुंदानंद समेत तीन अज्ञात के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना के क्रम में पुलिस ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वालों का मेडिकल परीक्षण करवाया। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराने की बात स्वीकार की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उम्र के साथ उनके द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप से संबंधित जांच भी की गई है। पुलिस के मुताबिक इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि इस परीक्षण के बाद अभी फोरेंसिक जांच होना बाकी है, निष्कर्ष उसी से निकाला जा सकता है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार को ही दोनों का मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद बयान भी हुआ है, जिसके बाद दोनों प्रयागराज से वापस चले गए। बयान में क्या निकला, इस बारे में अधिकृत तौर पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट व पोस्टमार्टम प्रभारी डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि फॉरेंसिक चिकित्सा में 25 साल से कम उम्र की वास्तविक जानकारी के लिए दांत का एक्स-रे किया जाता है। साथ ही भौतिक रूप से दांतों की गिनती की जाती है। वहीं, 25 साल से अधिक उम्र के लोगों में गुस्ताफसन विधि का प्रयोग किया जाता है।  

अभियान अंतर्गत गतिविधियों की विभागवार प्रगति की समीक्षा

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव  दीपाली रस्तोगी ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के लक्ष्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को जल गंगा संवर्धन अभियान के लिये शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करते हुए उद्देश्यों को प्रभावी रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव  रस्तोगी विकास भवन, भोपाल में आयोजित समीक्षा बैठक में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विभागवार प्रगति की समीक्षा कर रही थीं। बैठक में आयुक्त म.प्र. राज्य रोजगार गारंटी परिषद  अवि प्रसाद ने सहभागी विभागों के उपस्थित अधिकारियों को बताया कि अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग के लिए एक सिंगल डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है। इससे विभागों की प्रगति की नियमित समीक्षा के साथ विभागवार रैंकिंग भी की जाएगी।सहभागी विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत संचालित गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की गई। एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विभागों ने अपने कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। बैठक में जल संरक्षण, जल संवर्धन एवं जल प्रबंधन से संबंधित गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने और  जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि अभियान के तहत निर्धारित कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है। “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” का प्रदेशभर में क्रियान्वयन 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े कार्यों को जनसहभागिता के साथ प्रभावी रूप से लागू करना है। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, वन, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, राजस्व, संस्कृति, जन अभियान परिषद एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोर

रायपुर शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा आज बिलासपुर के पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में आयोजित एकदिवसीय औद्योगिक सुरक्षा जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बिलासपुर के संभागायुक्त  सुनील जैन, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह, आईएचएस के संचालक  मनीष वास्तव ने संबोधित किया। कार्यशाला में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के डिप्टी डायरेक्टर विजय कुमार सोरी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्र की स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना था।       कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संभागायुक्त  सुनील जैन ने स्पष्ट कहा कि औद्योगिक सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योगों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। दुर्घटनाएं भले ही क्षणिक होती हैं, लेकिन उनके दुष्परिणाम लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। इसलिए औद्योगिक इकाइयों में जोखिम की पहचान कर समय रहते उचित प्रबंधन, आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, नियमित प्रशिक्षण एवं मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।         कलेक्टर  संजय अग्रवाल ने कहा कि उद्योग देश के विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम हैं, लेकिन किसी भी दुर्घटना से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि संस्थान की साख भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन और श्रमिकों के सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित कार्य वातावरण निर्मित किया जा सकता है। श्रमिकों को नियमित प्रशिक्षण देने, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने तथा उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करने पर उन्होंने विशेष बल दिया।           कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  रजनेश सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करना गंभीर घटनाओं को जन्म देता है, जिसमें मानव लापरवाही प्रमुख कारण होती है। उन्होंने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने तथा किसी भी घटना की स्थिति में उसे छुपाने के बजाय तत्काल प्रशासन को सूचित करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों द्वारा सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर प्रस्तुतियां दी गईं तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से श्रमिकों एवं प्रबंधन को जागरूक किया गया। पावर पॉइंट प्रस्तुति एवं संवादात्मक सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला में सुरक्षा की शपथ भी ली गई। इस आयोजन के माध्यम से औद्योगिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

दिव्यांग बच्चों ने केक काटने के साथ हैप्पी बर्थ डे टू यू गाकर किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्म दिवस पर दिव्यांग बच्चों के साथ सुखद संवाद करते हुए रवीन्द्र भवन परिसर एमपीटी कैफे कल्चर हाउस का शुभारंभ किया। इस अवसर पर बच्चों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जन्म दिवस का केक काटा, हैप्पी बर्थडे टू यू का गीत गाकर बधाई दी और उन्हें एक पेंटिंग भेंट की। इस अवसर पर बालिका सिहायना तिवारी ने जन्म दिवस पर कविता सुनाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। कु. सिहायना ने प्रभु राम के संघर्ष पर भी कविता पाठ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बच्चों को प्रोत्साहन स्वरूप 5 लाख रूपए और कविता पाठ करने वाली बालिका कु. सिहायना तिवारी को पृथक से 21 हजार रूपए प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। यह बच्चे बाल निकेतन और आरूषि संस्थान से जुड़े हैं। इस अवसर पर पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों से संवाद में बताया कि रवीन्द्र भवन प्रदेश की सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र रहा है। वर्षों से इस स्थान से कलाकारों, साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों का जुड़ाव रहा है। यहां सांस्कृतिक और ग्राम्य जीवन की थीम पर विकसित कैफे कल्चर हाउस प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह स्थान कला, संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच बनेगा। यह मध्यप्रदेश पर्यटन का एक अनूठा प्रोजेक्ट है। इसमें प्रकृति, संस्कृति और विभिन्न प्रकार के विशेष भोजन का संयोजन है। इस प्रकार की पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय व्यंजनों और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रवीन्द्र भवन परिसर स्थित एमपीटी कल्चर कैफे हाउस में लगभग 85 लोगों की बैठने की क्षमता है। यह कैफे आगंतुकों को शांत और सुकून भरा वातावरण प्रदान करता है। यहां का मेन्यू प्रदेश की समृद्ध क्षेत्रीय व्यंजनों की झलक प्रस्तुत करता है, जिसमें भुट्टे का कीस, अन्न को प्रोत्साहन देते हुए रागी बालूशा और कोदो अरंचिनी जैसे पारंपरिक एवं नवाचारी व्यंजन शामिल हैं। इसे एक लैंडस्केप-आधारित कैफ़े के रूप में डिज़ाइन किया गया है। हरी-भरी हरियाली और प्राकृतिक बनावटों को आधुनिक वास्तुशिल्प ढाँचे में समाहित करते हुए, यह कैफ़े रवीन्द्र भवन में आने-जाने वालों के लिए अनोखा अनुभव प्रदान करेगा। कैफे में हाथ से तराशी गई लकड़ी की बैठकों से लेकर विशेष रूप से तैयार टेराकोटा, पत्थर, लकड़ी, बांस और जूट के कलात्मक कार्य प्रदेश के सृजनकर्ताओं की सृजनशीलता को दर्शाते हैं। कैफे का इंटीरियर प्रदेश की हस्तशिल्प और कलाकृतियों से सुसज्जित है, जो भोजन के अनुभव को और भी यादगार बनाएगा। यहाँ का वातावरण 'क्रिएटिव हब' के रूप में विकसित किया गया है। उद्घाटन अवसर पर पर्यटन सचिव एवं मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी, अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।  

रेगिस्तान में नजर आया कैराकल, जैसलमेर बना वन्यजीव संरक्षण का नया केंद्र

जैसलमेर राजस्थान के पश्चिमी छोर पर स्थित भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे शुष्क मरुस्थलीय इलाकों में एक बेहद अहम वन्यजीव खोज सामने आई है। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ वन्य जीव कैराकल की मौजूदगी ने वन विभाग और वैज्ञानिकों में नई उम्मीद जगा दी है। जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्र में इस प्रजाति की लगातार गतिविधियों के प्रमाण मिलने से यह इलाका अब संरक्षण के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर का यह पूरा क्षेत्र शुष्क मरुस्थलीय घासभूमि (डेजर्ट ग्रासलैंड) का हिस्सा है, जो कैराकल के प्राकृतिक आवास के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। यहां खुले मैदान, कम वनस्पति और छोटे शिकार जीवों की उपलब्धता इस प्रजाति के लिए आदर्श परिस्थितियां बनाती हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से यह प्रजाति मानव गतिविधियों और आवास खत्म होने के कारण नजर नहीं आ रही थी, लेकिन अब इसके फिर से दिखने से संकेत मिलते हैं कि यह क्षेत्र उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बन सकता है। निगरानी के लिए हाईटेक इंतजाम इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग और Wildlife Institute of India ने मिलकर संरक्षण प्रयासों को तेज कर दिया है। क्षेत्र में कुल 9 मोशन सेंसिंग कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जो दिन-रात गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। इन कैमरों से मिले फुटेज ने कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं, जिनमें कैराकल की आवाजाही, उसके शिकार के तरीके और रहने के पैटर्न को समझने में मदद मिल रही है। रेडियो कॉलर से हो रही ट्रैकिंग वन विभाग ने दो महीने पहले एक नर कैराकल को पकड़कर उसे रेडियो कॉलर लगाया और फिर सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया। इसके बाद उसकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है। रेडियो कॉलर से प्राप्त डेटा के अनुसार, यह कैराकल भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे विस्तृत क्षेत्र में विचरण कर रहा है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस प्रजाति का आवास सीमाओं से परे फैला हुआ है, जो संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत को भी दर्शाता है। तीन कैराकल की पुष्टि, बढ़ी उम्मीद अब तक मिले कैमरा ट्रैप फुटेज में रेडियो कॉलर लगे कैराकल के अलावा एक अन्य नर और एक मादा कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस तरह क्षेत्र में कुल तीन कैराकल के होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा एक गुफा में दो नर कैराकल के एक साथ रहने के संकेत भी मिले हैं, जो इस प्रजाति के व्यवहार को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर कैराकल एकाकी जीवन जीते हैं, ऐसे में यह व्यवहार शोध का विषय बन गया है। फूड चेन की भी हो रही पहचान निगरानी के दौरान वैज्ञानिकों ने कैराकल की फूड चेन को भी आंशिक रूप से पहचान लिया है। यह जीव मुख्यतः छोटे स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों का शिकार करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में शिकार की पर्याप्त उपलब्धता इस प्रजाति के टिके रहने का एक बड़ा कारण हो सकती है। संरक्षण के लिए बढ़ी सक्रियता वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही हैं और कैराकल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को भी इस दुर्लभ जीव के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार का खतरा न उत्पन्न हो।

2 लाख से अधिक बालिकाओं के टीकाकरण की उपलब्धि पर स्वास्थ्य टीम, जागरूक अभिभावकों की भूमिका की सराहना की

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एचपीवी टीकाकरण अभियान में 2 लाख से अधिक बालिकाओं के टीकाकरण की उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं सहित समन्वय विभागों के अधिकारियों कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता समर्पण, मेहनत और जनजागरूकता का परिणाम है। उन्होंने विशेष रूप से "जागरूक अभिभावकों" की भूमिका को भी सराहा, जिनकी समझदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण यह अभियान गति पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नागरिकों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सुरक्षित मातृत्व, कुपोषण मुक्त बचपन और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए कई योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, टीकाकरण कवरेज का विस्तार और पोषण सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से प्रदेश एक स्वस्थ और सशक्त भविष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार बेटियों के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। एचपीवी टीकाकरण अभियान इसी दिशा में एक मजबूत पहल है, जो आने वाले समय में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को कम करेगा। उन्होंने सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहें, जिससे कोई भी पात्र बालिका इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि जिस प्रकार प्रदेश ने अल्प समय में देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है, उसी प्रकार आने वाले दिनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि "स्वस्थ मध्यप्रदेश, सशक्त मध्यप्रदेश" के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुदृढ़ीकरण पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है। साथ ही, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक सेवाओं का उन्नयन किया जा रहा है, जिससे हर नागरिक को समय पर और बेहतर उपचार सुनिश्चित हो सके। अभिभावकों की जागरूकता और मैदानी अमले के समर्पण से प्राप्त हुई सफलता उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम, संबंधित विभागों की सराहना की है और सामाजिक संगठनों और जागरूक अभिभावकों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को अजमेर, राजस्थान से इस विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ किया गया था। मध्यप्रदेश ने इस अभियान के तहत एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कर देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया और अब 2 लाख का आंकड़ा पार कर अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और मजबूत किया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विशेष रूप से मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, राजगढ़ और खरगोन जिलों के योगदान की सराहना की, जहाँ अभियान को उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य स्तर पर इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया। स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत विभाग और विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों ने मिलकर इसे जन-आंदोलन का रूप दिया। प्रदेश के अभिभावकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी 14 से 15 वर्ष आयु की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं, जिससे उन्हें सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि स्वास्थ्य विभाग शेष पात्र बालिकाओं का टीकाकरण भी शीघ्र पूर्ण करेगा। प्रदेश में अब तक अभियान में 2,00,538 का बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है। डिंडोरी (74.70%), राजगढ़ (69.61%), बालाघाट (68.95%), मंडला (66.44%), खरगोन (55.06%) और खंडवा (53.15%) 50% से अधिक कवरेज के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।  

खुरई में एक जिला एक उत्पाद निर्यात कार्यशाला स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल

भोपाल  मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम द्वारा सागर जिले के खुरई में एक जिला एक उत्पाद निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों एवं उत्पादकों को निर्यात की प्रक्रियाओं, संभावनाओं और शासकीय सहयोग तंत्र की समग्र जानकारी प्रदान करना रहा। विभिन्न निर्यात संवर्धन संस्थाओं और वित्तीय संस्थानों की सहभागिता से कार्यक्रम को व्यवहारिक एवं मार्गदर्शी स्वरूप मिला। कार्यक्रम में कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय डाक विभाग, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रतिनिधियों ने निर्यात से संबंधित आवश्यक पंजीयन, गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, परिवहन व्यवस्था, वित्तीय सहयोग एवं शासकीय योजनाओं की जानकारी दी। उद्यमियों को यह बताया गया कि स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को किस प्रकार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। कार्यशाला में विशेष रूप से क्षेत्र के उत्पादों के लिए निर्यात की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। निर्यात जैसे निर्यात उन्मुख मॉडल के माध्यम से उत्पादों की पहचान, प्रमाणन और विपणन सहयोग की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया, जिससे उत्पादकों को बेहतर बाजार और प्रतिस्पर्धी मूल्य प्राप्त हो सकें। अधिकारियों ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद पहल का उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्टता को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ना है। निर्यात को प्रोत्साहित कर स्थानीय उद्योगों को नई दिशा देने, आय वृद्धि सुनिश्चित करने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कार्यक्रम में उपस्थित उद्यमियों ने विभिन्न विभागों के साथ प्रत्यक्ष संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। यह आयोजन स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।