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MP कैबिनेट विस्तार जल्द! 5 नामों पर मंथन, सिंधिया गुट के इस दिग्गज की एंट्री लगभग तय

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अपने मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। दरअसल, हाल ही में सीएम मोहन यादव ने बड़े संकेत दिए हैं जिसके बाद से मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई है। 20 जुलाई से विधानसभा के  मानसून सत्र से पहले ही नई मोहन टीम के गठन की पूरी संभावना है। सूत्रों की मानें तो 4-6 मंत्री सीएम की रडार पर हैं जिन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। वहीं खबर है कि 4-5 विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। जिनमें दो महिला विधायकों का जिक्र है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में शामिल होने वाले मंत्रियों की संख्या के गणित की बात करें तो मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरा जा सकता है। इसके साथ ही नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है। सीएम मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षी और उनके रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि इसके लिए उन्होंने खुद विभागों की समीक्षा कर मंत्रियों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट ली है। अटकलें है कि मंत्री विजय शाह, वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, पंचायत विभाग की राज्यमंत्री राधा सिंह, संपतिया उइके और कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना की शिकायतों के बाद उनपर गाज गिरना लगभग तय है। तीन सीनियर मंत्रियों के बदले जा सकते हैं विभाग अटकलें है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सरकार के दिग्गज मंत्रियों के विभागों में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है। दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट विस्तार के बाद नई भूमिका में देखें जा सकते हैं। इन विधायकों को मिल सकती है एंट्री कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए सांसद से विधायक बनी रीति पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। इनके अलावा सागर से प्रदीप लारिया, पन्ना से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। सिंधिया खेमे से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मध्य प्रदेश में ट्रांसफर के लिए नई मुश्किल, विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के अभाव में अटके शिक्षकों के आवेदन

भोपाल मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शिक्षकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है. पोर्टल की तकनीकी खामियों और नई अनिवार्य शर्तों के कारण हजारों शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों के सामने आ रही है. दरअसल इस बार पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वालों के लिए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र को अनिवार्य कर दिया गया है।  पुराने कर्मचारियों के लिए नई शर्त परेशानी शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के अनुसार "स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी हैं, जिनका विवाह 15 से 20 वर्ष पूर्व हुआ था. उस समय विवाह पंजीयन की व्यवस्था व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी और न ही विभागीय सेवाओं में इसकी कभी अनिवार्यता रही है. ऐसे में अचानक विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की अनिवार्यता लागू होने से हजारों पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।  पुराने विवाहित कर्मचारियों के सामने संकट संगठन के अनुसार ऐसे लोक सेवक, जिनमें पति-पत्नी दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं या उनमें से एक अन्य विभाग में पदस्थ है, वे पति-पत्नी आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन पोर्टल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के बिना आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा। शिक्षकों का कहना है कि उनके पास विवाह से जुड़े अन्य वैध दस्तावेज, सेवा अभिलेख, परिवार समग्र आईडी, नामांकन रिकॉर्ड और शासकीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें आवेदन से वंचित किया जा रहा है। तकनीकी खामियों से बढ़ी मुश्किल विवाह पंजीयन के अलावा दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र, पारस्परिक स्थानांतरण, जिला विकल्पों की अनुपलब्धता और विभिन्न पदों के विकल्प नहीं खुलने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इससे बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक संगठन ने मांगा वैकल्पिक प्रावधान शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। जिन कर्मचारियों के पास विवाह पंजीयन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, समग्र आईडी, पति-पत्नी की शासकीय सेवा संबंधी जानकारी अथवा अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार करने का विकल्प दिया जाए। संगठन ने कहा कि यदि विभाग ने जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई तो हजारों शिक्षक केवल दस्तावेजी बाधा के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। अंतिम तिथि बढ़ाने की भी मांग शिक्षक संगठन ने शासन से पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने, विवाह पंजीयन संबंधी शर्त में संशोधन करने तथा आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर देना विभाग की जिम्मेदारी है और किसी भी शिक्षक को तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।   वैकल्पिक दस्तावेजों को मिले मान्यता संगठन का कहना है कि पति-पत्नी संबंध प्रमाणित करने के लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, नामांकित सदस्य रिकार्ड, आधार कार्ड, समग्र आईडी अथवा अन्य विभागीय दस्तावेज पहले से उपलब्ध हैं. इन दस्तावेजों को मान्य नहीं किए जाने से शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  तिम तिथि नजदीक, बढ़ी चिंता बता दें की स्थानांतरण के आवेदन की अंतिम तिथि 24 जून निर्धारित है. ऐसे में जिन शिक्षकों के पास विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए निर्धारित समय में पंजीयन करवाकर आवेदन करना लगभग असंभव है. इससे पात्र शिक्षक अपने स्थानांतरण के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।  संगठन ने शासन से की मांग शासकीय शिक्षक संगठन ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता में तत्काल संशोधन किया जाए. अन्य वैध दस्तावेजों को स्वीकार करने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए. साथ ही पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, जिससे कोई भी पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित न रहे। 

अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को अल-नीनो से बचाने किए जा रहे हैं उपाय: मंत्री नेताम

रायपुर अल-नीनो के प्रभाव से इस बार मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन पर जोर, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है। इस आशय की जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  राम विचार नेताम ने केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी। बैठक वीडियोकांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।       बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि  राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवके त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।       वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मंत्री  नेताम ने बताया कि       प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा महज 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो पाई है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने किसानों को संभावित घाटे से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू कर दिए हैं।     कृषि उत्पादन आयुक्त  परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग ने कम अवधि वाली धान के किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उच्चहन भूमि में अनाज के साथ दलहन-तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है। धान की जगह दलहन-तिलहन फसलों की ओर किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।      उन्होंने बताया कि बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए करते हुए राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे प्रभावित 15 जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल किसानों तक पहुंच चुका है।        परदेशी ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ नैनो उर्वरक और लाभकारी फसलों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।      सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर फसल नुकसान की भरपाई के लिए बीमा प्लान को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए हैं। ताकि किसानों को  आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अल-नीनो के प्राभाव  कम होने वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस किया जा रहा है। साथ ही  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है।

मोहन नागर और स्व. भगवानदास रैकवार के योगदान ने मध्यप्रदेश को किया गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश की दो विभूतियों  मोहन नागर (समाज सेवा) तथा  भगवान दास रैकवार (खेल और बुंदेली मार्शल आर्ट, मरणोपरांत) को ‘पद्म’ सम्मान प्रदान किए जाने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज सेवा और खेल जगत में दोनों विभूतियों के उल्लेखनीय योगदान ने न केवल मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है बल्कि समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश से इस वर्ष (2026) कुल 4 हस्तियों का पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चयन किया गया। इनमें  मोहन नागर,  कैलाश चंद्र पंत,  भगवान दास रैकवार और डॉ. नारायण व्यास शामिल हैं। भारत सरकार द्वारा 25 जनवरी 2026 को पुरस्कारों की घोषणा हुई। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करने का समारोह नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में दो चरणों में आयोजित किया गया। पहला चरण 25 मई 2026 को संपन्न हुआ। इस वर्ष कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश की दो विभूतियां  पंत जी (साहित्य और शिक्षा क्षेत्र) और डॉ व्यास जी (पुरातत्व क्षेत्र) प्रथम चरण में गत माह सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं। मंगलवार को हुए समारोह के द्वितीय चरण में 23 जून 2026 को 65 हस्तियों को सम्मानित किया गया। इसमें मध्यप्रदेश की दो विभूतियां शामिल हैं। मंगलवार 23 जून को  मोहन नागर ने सम्मान प्राप्त किया। इसके साथ ही गत 18 अप्रैल को दिवंगत हुए  भगवान दास रैकवार को मरणोपरांत सम्मान दिया गया, जो उनके पुत्र  राजकुमार रैकवार ने ग्रहण किया।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन संकल्प के अनुरूप जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय भूमि की सुरक्षा और भू-माफियाओं के विरुद्ध अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दुर्ग जिले में जिला प्रशासन लगातार कड़ी कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के निर्देशन में प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए जिले में कोई स्थान नहीं है और ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।           इसी क्रम में धमधा तहसील के ग्राम बसनी में लंबे समय से शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर शासन की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा शासकीय भूमि पर झटका तार लगाकर तथा खरीफ एवं रबी फसलों की खेती कर अवैध कब्जा किया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर  अभिजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए।      तहसीलदार धमधा द्वारा हल्का पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त कर राजस्व प्रकरण में विस्तृत जांच और सुनवाई की गई। तथ्यों की पुष्टि होने पर संबंधित कब्जाधारियों के विरुद्ध विधिवत बेदखली आदेश पारित किया गया। आदेश के पालन में 22 जून 2026 को राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत बसनी के संयुक्त प्रयास से व्यापक कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया।           तहसीलदार मती मीना साहू ने बताया कि कार्रवाई के दौरान सेवाराम लोधी द्वारा शासकीय खसरा नंबर 1077 की 20 डिसमिल तथा खसरा नंबर 1188 की 0.34 हेक्टेयर भूमि पर किए गए कब्जे को हटाया गया। इसी प्रकार राजकुमार लोधी के कब्जे से 7 डिसमिल तथा राजकपूर लोधी के कब्जे से 13 डिसमिल शासकीय भूमि मुक्त कराई गई। वहीं शिवकुमार मौर्य द्वारा खसरा नंबर 1077 की 8 डिसमिल भूमि तथा खसरा नंबर 1076 की 0.19 हेक्टेयर भूमि पर किए गए अवैध कब्जे और लगाए गए झटका तार को भी हटाकर भूमि को शासन के पक्ष में सुरक्षित किया गया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण और विधिसम्मत ढंग से संपन्न हुई, जिसमें राजस्व निरीक्षक धमधा, राजस्व निरीक्षक पेण्ड्रावन, हल्का पटवारी एवं ग्राम पंचायत सचिव उपस्थित रहे।           जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भू-माफियाओं, अवैध कब्जाधारियों और शासकीय भूमि का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन की इस निर्णायक पहल से ग्रामीणों में संतोष और विश्वास का माहौल है तथा शासकीय भूमि को संरक्षित करने के इस कदम की व्यापक सराहना की जा रही है।

वर्ष 2025 में अब तक के सर्वाधिक 49 हजार एडमिशन हुए

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रोजगार के क्षेत्र में सतत रूप से नवाचारों की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश में धार्मिक, प्राकृतिक, पुराधरोहर से संबंधित पर्यटन क्षेत्र समृद्ध है। पर्यटकों को आवश्यक मार्गदर्शन के लिए गाइड की व्यवस्था को सशक्त बनाने और विभिन्न व्यंजनों का आनंद दिलवाने के लिए कार्य की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को बड़ी संख्या में इन कार्यों से रोजगार मिलेगा। कौशल विकास और रोजगार विभाग का पर्यटन विभाग से तालमेल स्थापित कर यह कार्य संभव है। इसी तरह के रोजगारपरक कार्य दिलवाने के लिए विभिन्न विभाग नवाचार कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कौशल विकास और रोजगार विभाग की गतिविधियों की बैठक में समीक्षा की। बैठक में कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल,मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष सिंह और विभागीय अधिकारी उपिस्थत थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फैक्ट्री परिसर में भी प्रशिक्षण संस्था संचालित की जा सकती है। उद्योगों की जरूरत को देखते हुए आवश्यक ट्रेड में प्रशिक्षण के प्रबंध किए जाएं। कौशल विकास और रोजगार दिलवाने के विभिन्न विभागों के कार्यों का समग्र प्रतिवेदन भी तैयार किया जाए। विभिन्न विभाग संचालित योजनाओं से दी जा रही सेवाओं और सृजित नए रोजगारों का विवरण भी संकलित करें ताकि इस क्षेत्र की उपलब्धि एक नजर में दर्शाई जा सके। शासकीय और निजी क्षेत्र द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे रोजगार, राज्य की ही उपलब्धि है। विभाग के प्रमुख नवाचार बैठक में विभाग स्तर पर किए गए विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी गई। परम फाउंडेशन के अंतर्गत 10 आईटीआई का संचालन एक विशेष नवाचार है। प्रतिमाह युवा संगम के आयोजन, महिला ड्राइविंग प्रशिक्षण, प्रतिभा सम्मान, वर्ष 2025 से आईटीआई में 30 प्रतिशत के स्थान पर 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने, विद्यार्थियों को विदेशी भाषा प्रशिक्षण और इसके माध्यम से रोजगार की संभावना बढ़ाने का कार्य किया गया है। इसके अलावा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत तकनीकी और अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण का लाभ युवाओं को दिलवाया गया है। कौशल विकास क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां बैठक में विभागीय उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। इनमें वर्ष 2025 में 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों को संस्थाओं में प्रवेश, गत 2 वर्ष में प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 18 हजार 403 प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार, वर्ष 2025 में आईटीआई चलो अभियान में अब तक के सर्वाधिक 49 हजार 402 प्रवेश, यूएन वूमेन के सहयोग से 12 जनजातीय बहुल जिलों की 2127 महिलाओं को प्रशिक्षण, प्रदेश के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड, युवा संगम से सवा तीन लाख आवेदकों को लाभ, संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में वर्ष 2024 से रोबोटिक्स, मेक्ट्रोनिक्स ऑटोमोबाइल जैसे 9 आधुनिक लाँगटर्म कोर्स का संचालन, 10 संभागीय आईटीआई के लिए हब इंस्टीट्यूट के रूप में व्यवस्थाएं कर ऑन-द-ऑब ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सहायता दिलवाई जा रही है। वर्ष 2025 में आई टी आई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई। वर्ष 2026 में 2356 सीटों की वृद्धि हुई। इस तरह दो वर्ष में 5840 सीट्स बढ़ी हैं। आईटीआई के विभिन्न ट्रेड में इस वर्ष 10 प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। इसके अतिरिक्त कौशल विकास और रोजगार विभाग युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भागीदारी का अवसर दिलवा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2024 में फ्रांस में हुई अंतर्राष्ट्रीय वर्ल्ड स्किल स्पर्धा में मध्यप्रदेश के संस्कार शर्मा ने सायबर सिक्योरिटी स्किल में मेडालियम ऑफ एक्सीलेंस हासिल किया। क्षेत्रीय स्पर्धा में 44 पदक और राष्ट्रीय स्पर्धा में 8 पदक प्राप्त करने की उपलब्धि भी मध्यप्रदेश को मिली है। ग्लोबल पार्क, भोपाल में वर्ष 2026-27 में 3 हजार सर्टिफिकेशन का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश              प्रदेश में कौशल विकास की गतिविधियां निरंतर संचालित हों।              औद्योगिक संस्थानों की आवश्यकता के अनुरूप कोर्स डिजाइन कर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए।              खान-पान तैयार करने (पाक कला प्रशिक्षण) और गाइड के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए।              कोसा वस्त्रों के निर्माण के लिए प्रदेश में अधोसंरचना उपलब्ध है। युवाओं को उद्यानिकी विभाग के सहयोग से शहतूत उत्पादन जैसे कार्यों से जोड़ा जाए। रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाए।  गुना जिले में जैकेट बनाने का कार्य एक आदर्श मॉडल है। आर्थिक लाभ दिलवाने वाली अनेक गतिविधियां घर से ही संचालित की जा सकती हैं। लघु और कुटीर उद्योगों से युवाओं को जोड़ने के ठोस प्रयास किए जाएं।  

डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर जोर, देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

रायपुर राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से बढ़ते दायरे और शासकीय सेवाओं के बढ़ते डिजिटलीकरण के बीच नागरिकों के डेटा एवं महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रायपुर में "Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data" विषय पर राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा चिप्स (CHiPS) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों, बोर्डों एवं निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और राष्ट्रीय स्तर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। साइबर सुरक्षा अब सुशासन और जनविश्वास का विषय : सचिव  अंकित आनन्द कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव  अंकित आनन्द  ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब शासकीय डिजिटल प्रणालियां सुरक्षित, विश्वसनीय और साइबर खतरों का सामना करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सुशासन, सेवा निरंतरता और जनविश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विषय बन चुका है। राज्य शासन का लक्ष्य केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और लचीला बनाना भी है। राज्य के लिए तैयार हो रहा व्यापक साइबर सुरक्षा रोडमैप चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य शासन साइबर सुरक्षा को डिजिटल शासन की आधारशिला मानते हुए राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और भविष्य उन्मुख रोडमैप तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छह प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन, राज्य डेटा सेंटर एवं नेटवर्क सुरक्षा, सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC), जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, डेटा गवर्नेंस तथा साइबर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं। विशेषज्ञों ने बताए राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा मानक तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी साझा की। पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) डॉ. ध्रुव गुप्ता ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act-2023) की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून वर्ष 2027 से पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा। गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव एवं NATGRID के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम साइबर सुरक्षा प्रथाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल  सुरेश चंद्रा ने सरकारी डेटा सुरक्षा के लिए मानकीकरण, प्रमाणन और Trusted IT Systems के महत्व को रेखांकित किया। समूह चर्चाओं से मिले महत्वपूर्ण सुझाव कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श कराया गया। चर्चा के दौरान साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, सुरक्षा निगरानी तंत्र को मजबूत करने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्रभावी घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) और मानव संसाधन क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी कार्यशाला की अनुशंसाएं कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। चयनित अनुशंसाओं को राष्ट्रीय स्तर पर विचारार्थ संबंधित संस्थाओं एवं भारत सरकार को भी भेजा जाएगा। कार्यक्रम में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. व्ही. रमन्ना राव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी  टी.एन. सिंह, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी  शशांक पाण्डेय,  यू.एस. अग्रवाल,  आशीष जायसवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अनुपम आशीष टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने सुरक्षित डिजिटल शासन, मजबूत साइबर अवसंरचना तथा नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यशाला राज्य में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने और डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में उत्कृष्ट केस स्टडी के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त करने पर डीजीपी ने दी बधाई

भोपाल  राष्ट्रीय अपराध रकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करने वाले जिला विदिशा के निरीक्षक (फिंगरप्रिंट)  योगेन्द्र साहू ने आज पुलिस मुख्यालय भोपाल में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने निरीक्षक  योगेन्द्र साहू को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग वर्तमान पुलिसिंग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीकी दक्षता, अनुसंधान क्षमता एवं पेशेवर उत्कृष्टता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस उपलब्धि से प्रदेश के अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी भी वैज्ञानिक अनुसंधान तथा तकनीक आधारित अपराध विवेचना के लिए प्रेरित होंगे। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में 19 एवं 20 जून 2026 को आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में देशभर के फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों, फोरेंसिक वैज्ञानिकों एवं पुलिस अधिकारियों ने सहभागिता की थी। सम्मेलन का उद्घाटन माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह द्वारा किया गया था। सम्मेलन में मध्यप्रदेश पुलिस के निरीक्षक (फिंगरप्रिंट)  योगेन्द्र साहू को “Smart Use of Fingerprint Science in Investigation” विषय पर प्रस्तुत उत्कृष्ट केस स्टडी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। उनकी प्रस्तुति जिला विदिशा के थाना शमशाबाद में दर्ज एक जघन्य ब्लाइंड मर्डर प्रकरण पर आधारित थी, जिसमें घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट साक्ष्यों एवं नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के प्रभावी उपयोग के माध्यम से आरोपी की पहचान कर प्रकरण का सफल निराकरण किया गया था। केस स्टडी में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, तकनीकी विश्लेषण, आधुनिक फिंगरप्रिंट विज्ञान तथा NAFIS प्रणाली के प्रभावी उपयोग को विस्तार से प्रदर्शित किया गया, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विशेष सराहना की गई। प्रतियोगी मूल्यांकन में देशभर से प्राप्त प्रविष्टियों के मध्य इस प्रस्तुति को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित पुलिसिंग को सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (SCRB)  जयदीप प्रसाद, संचालक फिंगरप्रिंट ब्यूरो मध्यप्रदेश  मनोज राजपूत उपस्थित थे।  

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई 1 पोकलेन और 6 हाईवा जब्त

​रायपुर      राज्य में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सख्त और 'जीरो टॉलरेंस' के निर्देशों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सीएम के कड़े रुख के बाद प्रदेश भर में खनिज माफियाओं के हौसले पस्त हैं। इसी कड़ी में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कलेक्टर  के मार्गदर्शन में खनिज विभाग ने बीते दो दिनों में एक बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस विशेष अभियान के तहत अवैध गतिविधियों में संलिप्त 1 पोकलेन मशीन और 6 हाईवा वाहनों को जब्त किया गया है। ​सोमवार और मंगलवार को लगातार कार्रवाई        खनिज अमले द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में ​सोमवार को सारंगढ़ तहसील क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान गौण खनिज साधारण रेत का अवैध परिवहन करते हुए 02 हाईवा (वाहन क्रमांक CG-07-CR-7715 एवं CG-13-AQ-0321) को रंगे हाथों पकड़ा गया। इन दोनों वाहनों को जब्त कर सारंगढ़ थाने की सुरक्षा में सौंप दिया गया है। इसी तरह ​मंगलवार की कार्रवाई के तहत तहसील सारंगढ़ के ही अंतर्गत दोबारा किए गए निरीक्षण में गौण खनिज चूना पत्थर का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर 02 और हाईवा (वाहन क्रमांक CG-13-BB-2721 एवं CG-13-BB-2321) पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भी सारंगढ़ थाने की सुपुर्दगी में रखा गया। ​कोसीर क्षेत्र में औचक दबिश: पोकलेन मशीन भी जब्त      ​ खनिज विभाग की टीम ने उप तहसील कोसीर क्षेत्र के ग्राम पंचायत पासीद में औचक निरीक्षण (सरप्राइज रेड) किया। इस कार्रवाई ने रेत माफियाओं में हड़कंप मचा दिया। मौके पर साधारण रेत के अवैध उत्खनन में सीधे तौर पर संलिप्त 01  पोकलेन मशीन को जब्त कर स्थानीय ग्राम सरपंच की सुपुर्दगी में दिया गया। इसके साथ ही रेत के अवैध परिवहन में लगे 02 अन्य हाईवा (वाहन क्रमांक CG-06-HD-6457 एवं CG-11-BK-6697) को जब्त कर कोसीर थाने की सुरक्षा में खड़ा कराया गया है। ​कड़े कानूनों के तहत दर्ज हुआ मामला     ​ खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी बड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 एवं खान एवं खनिज विकास अधिनियम 1957 की धारा 21 के कड़े प्रावधानों के तहत की गई है।        ​ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य की संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी रसूखदार या माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। खनिज विभाग ने साफ कर दिया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

तकनीकी साक्ष्यों और सतर्क पुलिसिंग से आरोपी गिरफ्तार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील, तकनीक आधारित एवं त्वरित कार्रवाई का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। जीआरपी थाना जबलपुर ने अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान चोरी गए 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण एवं अन्य सामान को घटना के मात्र दो घंटे के भीतर बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस अधीक्षक रेल जबलपुर  सुंदर सिंह कनेश ने बताया कि 22 जून को नर्मदापुरम जिले के इटारसी निवासी  नीलेश मालपानी ने जीआरपी थाना जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि ट्रेन क्रमांक 12853 अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान उनकी पत्नी के पर्स से सोने के आभूषण, एप्पल एयरपॉड, नगदी एवं अन्य दस्तावेज सहित लगभग 10 लाख 47 हजार रूप्ए की सामग्री चोरी हो गई हैं। रिपोर्ट पर थाना जीआरपी जबलपुर में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल  राजा बाबू सिंह के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम द्वारा रेलवे स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा मोबाइल लोकेशन का गहन विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान चोरी गए एप्पल एयरपॉड की लोकेशन ट्रेस होने पर प्राप्त तकनीकी जानकारी एवं मुखबिर सूचना के आधार पर शिवनगर, गोहलपुर क्षेत्र में दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से चोरी गया सोने का हार, अंगूठियां, कान के टॉप्स, ब्रेसलेट, एप्पल एयरपॉड, नगदी, आधार कार्ड सहित अन्य सामग्री लगभग 10 लाख 47 हजार रूपए की जब्‍त की। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति तथा आधुनिक तकनीक और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने हेतु प्रतिबद्ध है।