samacharsecretary.com

रांची रिनपास में शुरू होगी बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य यूनिट, DPN और MD साइकेट्रिक कोर्स पर जोर

रांची  रांची के कांके स्थित रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्री एंड अलायड साइंसेज (रिनपास) में मानसिक रूप से बीमार बच्चों एवं किशोरों के इलाज के लिए 20 बेड की यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसमें मानसिक रूप से बीमार करनेवाली आदतों जैसे मोबाइल के अधिक प्रयोग आदि को छुड़ाने के लिए बच्चों की काउंसिलिंग की भी व्यवस्था होगी स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने गुरुवार को इस यूनिट को शुरू करने को लेकर संस्थान के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने रिनपास में वर्तमान 100 बेडेड साइकेट्रिक रेजिडेंशियल शेल्टर होम की स्थिति और उपलब्ध क्षमता की जानकारी ली। उन्होंने संस्थान में उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा व्यवस्था का आकलन करते हुए आवश्यक सुधार एवं विस्तार की दिशा में कार्य करने के निर्देश पदाधिकारियों को दिए। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को देखते हुए रिनपास में डीपीएन (डिप्लोमा इन साइकेट्रिक नर्सिंग) कोर्स को दोबारा शुरू करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा। उन्होंने साथ ही एमडी साइकेट्रिक का कोर्स दोबारा शुरू करने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कहा कि इससे मरीजों को बेहतर उपचार और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। बैठक में संस्थान में स्वीकृत एवं कार्यरत पदों की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी पदों का एक बार पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यकता के अनुसार पदों का पुनर्गठन किया जाए। जिस क्षेत्र में जिस प्रकार के पदों की आवश्यकता है, उसका आकलन कर प्रस्ताव तैयार किया जाए। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि रिनपास की पुरानी प्रतिष्ठा और बेहतर कार्यप्रणाली को फिर से स्थापित करने की दिशा में भी काम करने की आवश्यकता है। बैठक में विभाग के अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिनपास की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई, सहायक निदेशक मिथिलेश चौधरी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। बाल एवं जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी की हो पढ़ाई अपर मुख्य सचिव ने बैठक में बाल एवं जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई शुरू करने पर भी जोर दिया। कहा कि संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा और उपचार की सुविधाओं का विस्तार होने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।  

कोसी का बढ़ा जलस्तर, 48 घंटे में 6 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज की आशंका; तटबंधों पर निगरानी

भागलपुर उत्तर बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी एक बार फिर अपने भयावह और विनाशकारी रौद्र रूप में आने को आतुर दिख रही है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय दबाव (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते कोसी नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित और अनियंत्रित वृद्धि की आशंका गहरा गई है। जल संसाधन विभाग ने कोसी बेसिन के लिए 'हाई अलर्ट' जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर वीरपुर कोसी बराज से 6 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का भारी-भरकम डिस्चार्ज हो सकता है। छह लाख क्यूसेक के संभावित जलप्रलय को देखते हुए सुपौल, सहरसा, खगड़िया और नवगछिया (भागलपुर) सहित समूचे कोसी क्षेत्र में प्रशासनिक तंत्र को युद्धस्तर पर अलर्ट मोड में तैनात कर दिया गया है। दबाव घटाने के लिए बराज के 25 फाटक खुले कोसी बराज पर जलस्राव की स्थिति बेहद तेजी से बदल रही है। गुरुवार दोपहर से ही नदी के मिजाज में तल्खी देखी जा रही थी। गुरुवार शाम जहां डिस्चार्ज 1.77 लाख क्यूसेक था, वहीं शुक्रवार सुबह 9 बजे तक यह उछलकर 1.90 लाख क्यूसेक को पार कर गया। बीचोंबीच से बहाया जा रहा पानी बराज के ढांचे पर बढ़ते पानी के भारी दबाव को नियंत्रित करने और डाउनस्ट्रीम में पानी को सुरक्षित पास आउट कराने के लिए कोसी बराज के कुल 56 में से 25 फाटकों को उठा दिया गया है। बाढ़ नियंत्रण वीरपुर (सुपौल) के मुख्य अभियंता ई. संजीव शैलेश ने बताया कि बराज की संरचना को किसी भी क्षति से बचाने के लिए बढ़ते पानी को बराज के बीचोंबीच वाले फाटकों से व्यवस्थित रूप से डाउनस्ट्रीम में बहाया जा रहा है। पूर्वी तटबंध के क्रिटिकल स्पॉट्स पर 24 घंटे कैंप यदि बराज से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, तो तटबंधों पर पानी का ऐसा दबाव बनेगा जो पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया है। इसे देखते हुए पूर्वी कोसी तटबंध की अभेद्य सुरक्षा के लिए इंजीनियरों की पूरी फौज तैनात कर दी गई है। चन्द्रायण डिविजन (सहरसा) के कार्यपालक अभियंता आलोक कुमार ने बताया कि तटबंध के चिह्नित अतिसंवेदनशील बिंदुओं, विशेषकर 96.60 किमी, 101.23 किमी और 103.30 किमी पर अभियंताओं की टीम को दिन-रात (24 घंटे) कैंप करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। बालू की बोरियों का स्टॉक कटाव की आशंका से निपटने के लिए लाखों बालू भरे बोरों (सैंड बैग्स) और बोल्डर क्रेट्स का भंडारण पहले ही पूरा कर लिया गया है। वहीं, सुपौल के मरौना में बीडीओ रचना भारतीय और सहायक अभियंता अरुण कुमार ने सर्वाधिक संवेदनशील 17.20 किमी स्पर सहित संपूर्ण तटबंध का सघन मुआयना किया। तटबंध के भीतर मुनादी, घर और मवेशी छोड़ ऊंचे स्थानों पर भाग रहे ग्रामीण जलप्रलय की इस भयावह आहट ने तटबंध के अंदर बसे सैकड़ों गांवों में भारी दहशत पैदा कर दी है। सहरसा, सुपौल, खगड़िया और नवगछिया के दियारा इलाकों में प्रशासनिक टीमों द्वारा लगातार लाउडस्पीकर से मुनादी (माइकिंग) कराई जा रही है। अधिकारियों ने निचले इलाकों में रह रहे सभी ग्रामीणों से बिना समय गंवाए अपने मवेशियों, अनाज और जरूरी सामानों के साथ सुरक्षित तटबंधों व ऊंचे सरकारी भवनों में शरण लेने की मार्मिक अपील की है। कोसी बराज व डिस्चार्ज: मुख्य आंकड़े     वर्तमान डिस्चार्ज स्थिति: 1.90 लाख क्यूसेक (शुक्रवार सुबह 9 बजे तक)।     अनुमानित डिस्चार्ज (48 घंटे): 6,00,000 (छह लाख) क्यूसेक से अधिक।     खुले फाटकों की संख्या: 56 में से 20 फाटक खोले गए।     अत्यधिक संवेदनशील बिंदु: तटबंध के 17.20 किमी (मरौना), 96.60 किमी, 101.23 किमी व 103.30 किमी (चन्द्रायण डिविजन)।     प्रभावित/अलर्ट जिले: सुपौल, सहरसा, खगड़िया और भागलपुर (नवगछिया पुलिस जिला)।     आपदा प्रबंध: बालू भरे बोरे, जियो बैग्स, पर्याप्त नावें, प्लास्टिक शीट्स और अभियंताओं का 24 घंटे का पहरा। सहरसा के महिषी अंचल के सीओ संजय कुमार और नवहट्टा की सीओ मौनी बहन ने राजस्व व हल्का कर्मचारियों को फील्ड में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकारी व निजी नावों को अधिग्रहित किया जा रहा है और प्लास्टिक शीट बांटी जा रही हैं। उधर, सीमा पार नेपाल एपीएफ पुलिस भी बराज के आसपास लगातार माइकिंग कर आम नागरिकों को नदी के करीब जाने से रोक रही है। 200 परिवार पहले से बेघर, अब चक्रवात की मार ने उड़ाई नींद उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से जलस्राव सवा से डेढ़ लाख क्यूसेक के बीच था, जिससे ग्रामीणों को लगा था कि इस साल का संकट टल चुका है। लेकिन इससे पहले हुए कटाव में ही सुपौल के सत्तौर पंचायत अंतर्गत नारायणपुर और बिरजाईन में करीब दो सौ परिवार अपने घर-द्वार गंवाकर बेघर हो चुके हैं। अब चक्रवाती दबाव के कारण छह लाख क्यूसेक पानी के इस नए महाअलर्ट ने कोसीवासियों की रातों की नींद छीन ली है। तटबंधों के भीतर जीवन गुजार रहे लोग प्रकृति के इस संभावित तांडव के सामने एक बार फिर लाचार नजर आ रहे हैं। खगड़‍िया में प्रशासन अलर्ट खगड़िया जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। कोसींचल के ऊपरी इलाकों में मची अफरा-तफरी का असर खगड़िया में भी दिख रहा है, जहां अधिकारी कोसी और बागमती के तटबंधों की सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। 36 घंटे में पहुंचता है कोसी बराज का पानी, 24 घंटे हो रही निगरानी बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, खगड़िया के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि कोसी बराज से छोड़े जाने वाले पानी को खगड़िया तक पहुंचने में लगभग 36 घंटे का समय लगता है। इसे देखते हुए जिले में बाढ़ नियंत्रण विभाग अलर्ट मोड में है। कोसी और बागमती नदियों पर बने सभी प्रमुख बांधों और तटबंधों की 24 घंटे सघन निगरानी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सात अस्थाई सुरक्षा कैंपों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। मौके पर 120 अनुभवी बांध श्रमिक तैनात हैं, जिनके साथ विभागीय कनीय और सहायक अभियंता भी चौकसी बरत रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके। 6 लाख डिस्चार्ज पर 1.5 मीटर तक बढ़ सकता है जलस्तर कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार के अनुसार, … Read more

अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री पर महिला किसान चंद्रकांता को 9,510 रुपये की राहत

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री पर महिला किसान चंद्रकांता को 9,510 रुपये की राहत महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क 4 से घटकर 2 प्रतिशत, स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत छूट का भी मिला लाभ कम हुआ रजिस्ट्री का खर्च, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में कांकेर की महिला किसान ने साझा किया अनुभव रायपुर अपने नाम जमीन होना किसी भी महिला के लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कांकेर जिले के सरोना निवासी महिला किसान श्रीमती चंद्रकांता नेताम के लिए जमीन की रजिस्ट्री अब पहले की तुलना में कम खर्चीली हुई है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किए जाने और स्टाम्प शुल्क में पहले से लागू 1 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलने से उन्हें रजिस्ट्री में कुल 9,510 रुपये की आर्थिक राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस बदलाव से मिला अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन व्यवस्था को नागरिकों के लिए सरल और सुविधाजनक बनाने के साथ महिलाओं को आर्थिक राहत देने की दिशा में पहल की गई है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में दी जा रही रियायत का लाभ श्रीमती चंद्रकांता नेताम जैसी महिला किसानों तक सीधे पहुंच रहा है। 4 से 2 प्रतिशत हुआ पंजीयन शुल्क, बचत बनी बड़ी राहत श्रीमती नेताम ने बताया कि अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिलाओं के लिए लागू शुल्क रियायत का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत के स्थान पर 2 प्रतिशत लगने से रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ। इसके साथ ही महिला क्रेता को स्टाम्प शुल्क में पहले से मिल रही 1 प्रतिशत की छूट का लाभ भी मिला। दोनों रियायतों के कारण उन्हें कुल 9,510 रुपये की बचत हुई। एक किसान परिवार के लिए रजिस्ट्री में बची यह राशि मायने रखती है। श्रीमती नेताम ने इस आर्थिक राहत को महिलाओं के हित में उपयोगी पहल बताते हुए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं के नाम संपत्ति को मिल रहा प्रोत्साहन महिलाओं के नाम संपत्ति के पंजीयन पर शुल्क में रियायत केवल रजिस्ट्री का खर्च कम करने तक सीमित नहीं है। इससे परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और पंजीयन कराने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी मिल रहा है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उनकी आर्थिक सुरक्षा और परिवार में वित्तीय भागीदारी को भी मजबूती मिलती है। डिजिटल सुविधाओं ने भी आसान की रजिस्ट्री आर्थिक राहत के साथ पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुविधाओं के माध्यम से रजिस्ट्री की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है। ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं से पंजीयन प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हुई है। संपत्ति की लोकेशन आधारित फोटो जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक हैं। ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करने और अनावश्यक दौड़भाग से राहत मिलती है। चंद्रकांता की कहानी में आर्थिक राहत और महिला सशक्तिकरण का संदेश श्रीमती चंद्रकांता नेताम को मिली 9,510 रुपये की बचत बताती है कि शुल्क में किया गया बदलाव किस तरह सीधे हितग्राही को आर्थिक राहत पहुंचा सकता है। जमीन अपने नाम होने से संपत्ति में महिला की भागीदारी मजबूत होती है और शुल्क में रियायत इस प्रक्रिया को कम खर्चीला बनाती है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सेवाओं में आए बदलाव, उनके अनुभव और सुझावों को सामने ला रहा है। चंद्रकांता की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर है—जहां तकनीक से प्रक्रिया आसान हो रही है और शुल्क में राहत से महिलाओं के लिए अपने नाम संपत्ति का पंजीयन अधिक किफायती बन रहा है।

रांची में पानी संकट होगा कम, 3 योजनाओं पर खर्च होंगे 1.51 करोड़ रुपये

 रांची राजधानी में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर करने और पुरानी पाइपलाइन में लीकेज की समस्या के कारण होने वाले जलापूर्ति संकट को कम करने की दिशा में विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। पेयजल एवं स्वच्छता स्वर्णरेखा शीर्षकार्य प्रमंडल, रांची की ओर से तीन महत्वपूर्ण कार्यों का प्राक्कलन तैयार किया गया है। इन तीनों कार्यों की अनुमानित लागत करीब 1.51 करोड़ रुपये है। विभाग की ओर से प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति के संबंध में पत्र जारी कर आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं, पहले चरण के तहत बीआइटी मोड़ से जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), रांची तक डीआई (डक्टाइल आयरन) डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन बिछाई जाएगी। यह काम वित्तीय वर्ष 2026-27 में किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने 68 लाख 76 हजार 584 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया है। नई पाइपलाइन बिछने से संबंधित क्षेत्र में पेयजल वितरण नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।साथ ही भविष्य में पाइपलाइन से जुड़ी समस्या को कम करने के उद्देश्य से यह काम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रुक्का चेकपोस्ट से विकास रोटरी रिंग रोड तक वैकल्पिक व्यवस्था दूसरे कार्य में पुराने डब्ल्यूटीपी को बार-बार पूरी तरह बंद करने की समस्या को दूर करने के लिए क्लियर वाटर राइजिंग मेन लाइन में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य लीकेज की मरम्मत और राइजिंग लाइन के रखरखाव के दौरान जलापूर्ति पूरी तरह बंद होने से बचाना है। इसके तहत रुक्का सेक्शन कार्यालय में 36 इंच व्यास का एक स्लूइस वाल्व, रुक्का ओल्ड डब्ल्यूटीपी में 30 इंच का एक वाल्व, भास जोर में 8 इंच के चार वाल्व तथा रुक्का में चरणबद्ध तरीके से वाल्व लगाने और पुराने क्षतिग्रस्त चैंबर के जीर्णोद्धार का काम किया जाएगा। यह कार्य रुक्का चेकपोस्ट से विकास रोटरी रिंग रोड के बीच किया जाएगा। इसके लिए 34 लाख 62 हजार 655 रुपये की राशि तय की गई है। नर्सिंग होम से जुमार ब्रिज तक भी होगा काम तीसरे चरण के तहत भी क्लियर वाटर राइजिंग मेन लाइन में वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। जुमार बस स्टैंड के पास दोनों तरफ 36 इंच व्यास के स्लूइस वाल्व लगाने और पुराने क्षतिग्रस्त चैंबर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव है। यह काम विकास नर्सिंग होम, नेवरी रिंग रोड से बीएसएनएल कार्यालय, जुमार ब्रिज तक किया जाएगा। इसके लिए 48 लाख 37 हजार 830 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया है। तीनों योजनाओं की कुल अनुमानित लागत 1 करोड़ 51 लाख 77 हजार 69 रुपये है। पाइपलाइन मरम्मत के दौरान वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था उपलब्ध कराने और शहर की पेयजल आपूर्ति को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। शहर में शहरी जलापूर्ति पर शहर की लगभग 8 लाख से अधिक की आबादी निर्भर है। लोगों को पानी पहुंचाना विभाग का कर्तव्य है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है। – सुमित कुमार, कार्यपालक अभियंता, स्वर्णरेखा शीर्ष प्रमंडल बूटी रांची।

नशे के खिलाफ राजस्थान का बड़ा रोडमैप तैयार, तस्करी नेटवर्क तोड़ने पर जोर

जयपुर  मुख्य सचिव  वी. निवास की अध्यक्षता में शुक्रवार को शासन सचिवालय में प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए तैयार किए गए ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ के संबंध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में विजन के तहत निर्धारित लक्ष्यों, राज्य के रोडमैप तथा विभिन्न विभागों एवं केंद्रीय एजेंसियों के मध्य समन्वय की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्रीय विजन के अनुरूप प्रदेश में प्रशासनिक एवं विभागीय समन्वय के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने इस विजन के चार प्रमुख स्तंभों—प्रवर्तन (Enforcement), पूर्ववर्ती रसायन एवं सिंथेटिक ड्रग्स पर रोक, मांग एवं हानि न्यूनीकरण तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत निर्धारित लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए  मुख्य सचिव ने विजन के तहत प्रवर्तन के क्षेत्र में आसूचना आधारित कार्रवाई को सुदृढ़ करने, तस्करी नेटवर्क का पूर्ण विघटन करने तथा अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय मार्गों को सुरक्षित बनाने के संबंध चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। इसी प्रकार पूर्ववर्ती रसायनों (Precursor Chemicals) का कड़ा विनियमन सुनिश्चित करते हुए सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने के संबंध में भी निर्देश दिए। उन्होंने मांग एवं हानि न्यूनीकरण के अंतर्गत नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता, उपचार, परामर्श एवं पुनर्वास सेवाओं के विस्तार तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत एनसीबी की जनशक्ति, अत्याधुनिक अवसंरचना और विभिन्न एजेंसियों के मध्य बेहतर तालमेल को मजबूत करने पर भी चर्चा की। मुख्य सचिव ने प्रदेश के संवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस करते हुए नशा मुक्ति शिविर आयोजन की जानकारी ली, साथ ही हॉटस्पॉट जिलों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत के निर्देश दिए। सीमावर्ती एवं अफीम खेती वाले जिलों में मादक पदार्थ सेवन के विरुद्ध बहु-माध्यम जन-जागरूकता अभियान चलाकर समुचित प्रचार प्रसार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। मुख्य सचिव ने राज्य रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के मध्य निरंतर समन्वय बनाए रखने तथा निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों एवं प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ही युवाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं नशा मुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  राजीव कुमार शर्मा, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एटीएस, एजीटीएफ  दिनेश एम.एन., गृह विभाग से संयुक्त सचिव मती अंजलि राजोरिया, उप सचिव मती सोविला माथुर  सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर किया नमन लालघाटी स्थित श्रद्धेय दीनदयाल जी की प्रतिमा पर की पुष्पांजलि अर्पित भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय जन संघ के संस्थापक श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर लालघाटी स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री गडकरी के साथ "एक पेड़ मां के नाम'' के अंतर्गत आम का पौधा रोपा। इस अवसर पर प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सांरग, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अपने संदेश में कहा कि हमारे प्रेरणा स्रोत श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। दीनदयाल जी के राष्ट्र सेवा और जनकल्याण के विचारों से प्रेरणा लेते हुए हम समावेशी विकास के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।  

सिद्ध बाबा सोढल मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचे, राज्यपाल ने टेका माथा

जालंधर. पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया सिद्ध बाबा सोढल मंदिर में नतमस्तक होने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा सोढल छावनी निहंग सिंघा में भी माथा टेका और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि श्री सिद्ध बाबा सोढल के साथ देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भावनात्मक जुड़ाव है। यही वजह है कि हर साल लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचकर नतमस्तक होते हैं। इस अवसर पर उनके साथ सोढल सुधार सभा के अध्यक्ष पंकज चड्ढा, पूर्व विधायक केडी भंडारी, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पायलट और शिरोमणि अकाली दल के महासचिव मनिंदर पाल सिंह गुंबर समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अनंत चौदस के अवसर पर शुरू हुए इस प्रसिद्ध मेले को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के दो किलोमीटर के दायरे में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पूरे क्षेत्र में चार सौ से अधिक स्थानों पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों के लंगर लगाए गए हैं। सड़क किनारे सजी दुकानों पर देर रात तक खरीदारी का दौर जारी है। मेला प्रबंधकों के अनुसार, मुख्य दिन लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के नतमस्तक होने का अनुमान है, जबकि दो दिन पहले से ही बड़ी संख्या में भक्त पहुंचना शुरू हो गए थे। अनंत चौदस के दिन श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक रस्में पूरी करेंगे, जिसमें खेतड़ी अर्पित करना और मंदिर में चौदह रोट का प्रसाद चढ़ाना शामिल है। मेले में सुरक्षा व सुविधाएं – मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रांगण में सोढल मंदिर ट्रस्ट की ओर से एक विशेष काउंटर बनाया गया है, जहां से तमाम गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा, मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पुलिस कंट्रोल रूम, स्वास्थ्य विभाग का फ्री मेडिकल कैंप और नगर निगम का कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। सुरक्षा और सावधानी के मुख्य निर्देश: – बच्चों का हाथ मजबूती से पकड़कर रखें और उनकी जेब में घर का पता व फोन नंबर की पर्ची जरूर रखें। कीमती सामान और महंगे गहने पहनकर मेले में जाने से बचें तथा जेबकतरों से सावधान रहें। झूलों का आनंद लेने से पहले उनकी सुरक्षा और बिजली की तारों की व्यवस्था की जांच कर लें। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करें और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस या मेडिकल कैंप से संपर्क करें।

10 ठिकानों पर छापेमारी, मानव तस्करी केस में 1.48 करोड़ कैश बरामद

महासमुंद. छत्तीसगढ़ की महासमुंद पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़ और पड़ोसी ओडिशा समेत अन्य राज्यों में सक्रिय था। पुलिस टीम ने नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर करीब 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नगद बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की जांच से हुई। 21 सितंबर को अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर जांच शुरू की गई, जिसमें नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े संगठित नेटवर्क के सुराग मिले। लुभावने वादे कर मजदूरों को ले जाने का आरोप पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस रकम देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों और अन्य स्थानों पर मजदूरी के लिए भेजा जाता था। पुलिस ने दावा किया है कि कुछ मामलों में डर, दबाव और धमकी का इस्तेमाल भी किया गया। जांच में मिले दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह से जुड़े लोगों से बड़ी संख्या में मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक प्रत्येक आरोपी के नेटवर्क में हजारों मजदूरों के रिकॉर्ड मिले हैं और इनमें बंधुआ मजदूरी के भी दस्तावेजी साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल, बैंक दस्तावेज और रजिस्टर जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन समेत कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। पुलिस इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। पांच मुख्य आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने इस मामले में मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मुकेश चंद्राकर को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि मजदूरों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस ने आरोप लगाया है कि मजदूरों से कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था और उनकी आवाजाही पर भी नियंत्रण रखा जाता था। नाबालिगों और महिलाओं की तस्करी की भी जांच पुलिस का कहना है कि गिरोह पर मानव तस्करी, नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी और महिलाओं एवं नाबालिग बालिकाओं के शोषण से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। बरामद मोबाइल और बैंक खातों की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है। BNS की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज – इस मामले में थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जब्त सामग्री – 1,48,54,750 नकद मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी कई मोबाइल फोन बैंक पासबुक और चेकबुक एटीएम कार्ड मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज नोट गिनने की मशीन पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और अलग-अलग राज्यों में कितने मजदूरों को इसके जरिए भेजा गया।

शहपुरा रेलवे ब्रिज बनने तक टोल फ्री, वाहनों से नहीं होगी वसूली

जबलपुर जबलपुर-भोपाल रोड पर शहपुरा रेलवे ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद डायवर्ट किए गए यातायात को देखते हुए शहपुरा टोल नाका अब एक-दो दिन में बंद किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जब तक शहपुरा का पुल दोबारा बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक टोल कलेक्शन बंद रहेगा। इससे डायवर्ट रूट से गुजरने वाले वाहन चालकों को टोल शुल्क नहीं देना होगा। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि शहपुरा रेलवे ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है। ऐसे में टोल वसूली को लेकर लोगों में नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि अब टोल बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और एक-दो दिन में वसूली बंद हो जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री ने इसको लेकर फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।   पहले दिए थे निर्देश, फिर भी जारी थी वसूली इससे पहले भी लोक निर्माण मंत्री ने शहपुरा टोल को अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद टोल नाके पर वाहनों से शुल्क वसूली जारी रहने का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था और पुलिस से भी शिकायत की थी। उस समय टोल नाके के मैनेजर ने कहा था कि उन्हें टोल बंद करने का लिखित आदेश नहीं मिला है। लिखित निर्देश मिलने के बाद वसूली बंद करने की बात कही गई थी। अब मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पुल बनने तक टोल बंद रहेगा।  लोकपथ एप पर बसों की टाइमिंग भी मिलेगी राकेश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों की समय सारणी भी आने वाले समय में लोकपथ एप पर उपलब्ध कराई जाएगी। यात्री एप पर देख सकेंगे कि कौन सी बस किस समय और किस स्थान से चलेगी और उसे कहां से लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभी लोकपथ एप पर सड़क और मार्ग की जानकारी के साथ पर्यटन स्थल, टोल नाके, अस्पताल और पुलिस थानों की जानकारी उपलब्ध है। बसों की टाइमिंग जुड़ने के बाद यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी। 

धान खरीदी की तैयारियां तेज, खाद्य मंत्री बघेल ने दिए समय पर व्यवस्था पूरी करने के निर्देश

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी व्यवस्था समय पर हो पूरा: खाद्य मंत्री बघेल मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की तैयारियों की हुई विस्तृत समीक्षा किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र, सभी केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर  3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था कर रहा विपणन संघ अब तक 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त, शेष बारदानों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने में तेजी लाने के निर्देश रायपुर,  आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में गुरूवार 24 सितंबर को आयोजित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग से जुड़ी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में किसानों की सुविधा, धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, जूट बारदानों की उपलब्धता तथा कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की प्रगति पर की गई। बैठक में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। 360 नए धान खरीदी केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा बैठक में बताया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र खोले गए हैं। इन नए केंद्रों में धान खरीदी से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने नवीन खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी जरूरी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप समिति ने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया किसान-केंद्रित हो तथा खरीदी केंद्रों पर किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था धान उपार्जन के लिए बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए मंत्रिमंडलीय उप समिति ने आवश्यक नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि विपणन संघ द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता के माध्यम से 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था की जा रही है। अब तक विपणन संघ को 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त हो चुके हैं। उप समिति ने शेष आवश्यक बारदानों की उपलब्धता भी समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि धान खरीदी के दौरान बारदानों की कमी के कारण उपार्जन व्यवस्था प्रभावित न हो। कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की गति बढ़ाने के निर्देश बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कस्टम मिलिंग की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कस्टम मिलिंग के अंतर्गत कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 37.50 लाख टन चावल जमा किया जा चुका है, जबकि मिलरों द्वारा 51.50 लाख टन चावल जमा किया जाना शेष है। कस्टम मिलिंग का चावल जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक की समय-सीमा निर्धारित है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने शेष चावल की मात्रा को देखते हुए कस्टम मिलिंग एवं चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों से इसकी नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चावल जमा कराना सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक विलास भोसकर, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।