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शहपुरा रेलवे ब्रिज बनने तक टोल फ्री, वाहनों से नहीं होगी वसूली

जबलपुर जबलपुर-भोपाल रोड पर शहपुरा रेलवे ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद डायवर्ट किए गए यातायात को देखते हुए शहपुरा टोल नाका अब एक-दो दिन में बंद किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जब तक शहपुरा का पुल दोबारा बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक टोल कलेक्शन बंद रहेगा। इससे डायवर्ट रूट से गुजरने वाले वाहन चालकों को टोल शुल्क नहीं देना होगा। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि शहपुरा रेलवे ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है। ऐसे में टोल वसूली को लेकर लोगों में नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि अब टोल बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और एक-दो दिन में वसूली बंद हो जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री ने इसको लेकर फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।   पहले दिए थे निर्देश, फिर भी जारी थी वसूली इससे पहले भी लोक निर्माण मंत्री ने शहपुरा टोल को अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद टोल नाके पर वाहनों से शुल्क वसूली जारी रहने का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था और पुलिस से भी शिकायत की थी। उस समय टोल नाके के मैनेजर ने कहा था कि उन्हें टोल बंद करने का लिखित आदेश नहीं मिला है। लिखित निर्देश मिलने के बाद वसूली बंद करने की बात कही गई थी। अब मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पुल बनने तक टोल बंद रहेगा।  लोकपथ एप पर बसों की टाइमिंग भी मिलेगी राकेश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों की समय सारणी भी आने वाले समय में लोकपथ एप पर उपलब्ध कराई जाएगी। यात्री एप पर देख सकेंगे कि कौन सी बस किस समय और किस स्थान से चलेगी और उसे कहां से लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभी लोकपथ एप पर सड़क और मार्ग की जानकारी के साथ पर्यटन स्थल, टोल नाके, अस्पताल और पुलिस थानों की जानकारी उपलब्ध है। बसों की टाइमिंग जुड़ने के बाद यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी। 

धान खरीदी की तैयारियां तेज, खाद्य मंत्री बघेल ने दिए समय पर व्यवस्था पूरी करने के निर्देश

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी व्यवस्था समय पर हो पूरा: खाद्य मंत्री बघेल मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की तैयारियों की हुई विस्तृत समीक्षा किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र, सभी केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर  3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था कर रहा विपणन संघ अब तक 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त, शेष बारदानों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने में तेजी लाने के निर्देश रायपुर,  आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में गुरूवार 24 सितंबर को आयोजित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग से जुड़ी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में किसानों की सुविधा, धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, जूट बारदानों की उपलब्धता तथा कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की प्रगति पर की गई। बैठक में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। 360 नए धान खरीदी केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा बैठक में बताया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र खोले गए हैं। इन नए केंद्रों में धान खरीदी से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने नवीन खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी जरूरी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप समिति ने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया किसान-केंद्रित हो तथा खरीदी केंद्रों पर किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था धान उपार्जन के लिए बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए मंत्रिमंडलीय उप समिति ने आवश्यक नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि विपणन संघ द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता के माध्यम से 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था की जा रही है। अब तक विपणन संघ को 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त हो चुके हैं। उप समिति ने शेष आवश्यक बारदानों की उपलब्धता भी समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि धान खरीदी के दौरान बारदानों की कमी के कारण उपार्जन व्यवस्था प्रभावित न हो। कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की गति बढ़ाने के निर्देश बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कस्टम मिलिंग की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कस्टम मिलिंग के अंतर्गत कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 37.50 लाख टन चावल जमा किया जा चुका है, जबकि मिलरों द्वारा 51.50 लाख टन चावल जमा किया जाना शेष है। कस्टम मिलिंग का चावल जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक की समय-सीमा निर्धारित है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने शेष चावल की मात्रा को देखते हुए कस्टम मिलिंग एवं चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों से इसकी नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चावल जमा कराना सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक विलास भोसकर, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी

छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच से बदली त्रिलोक मिश्रा के घर की तस्वीर  पीएम सूर्यघर योजना का दिख रहा जमीनी असर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग रायपुर,  कभी हर महीने आने वाला 3 से 3.5 हजार रुपये का बिजली बिल घरेलू बजट पर बोझ बनता था। बिजली की खपत बढ़ने पर बिल बढ़ने की चिंता रहती थी। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा के घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है। 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में केवल बिजली की बचत नहीं हुई, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ त्रिलोक मिश्रा को भी मिला है। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली, जो सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। मिश्रा इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बताते हैं। छत बनी बिजली का स्रोत, घटा घरेलू खर्च सोलर प्लांट लगने से पहले त्रिलोक मिश्रा के घर का मासिक बिजली बिल लगभग 3 हजार से 3 हजार 500 रुपये तक आता था। हर महीने बिजली बिल के लिए अलग से राशि की व्यवस्था करनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके घरेलू बिजली खर्च की तस्वीर बदल गई। मिश्रा बताते हैं कि अब उनके घर की जरूरत की बिजली का एक बड़ा हिस्सा उनकी अपनी छत से ही तैयार हो रहा है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद उन्हें माइनस बिल भी प्राप्त हुए। अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दिए जाने पर उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। इससे उन्हें बिजली खर्च में राहत के साथ-साथ अपनी छत पर उत्पादित ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला। मिश्रा कहते हैं कि अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। हमारी जरूरत की बिजली हमारी अपनी छत से बन रही है। यह अनुभव उनके लिए केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। उनके घर की छत अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन गई है। इससे उन्हें यह भरोसा भी मिला है कि घर-परिवार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सौर ऊर्जा एक उपयोगी और स्थायी विकल्प बन सकती है। 78 हजार रुपये की सब्सिडी ने आसान किया सौर ऊर्जा का सफर त्रिलोक मिश्रा के लिए सोलर प्लांट लगाने का निर्णय इसलिए भी आसान हुआ क्योंकि योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बना रहा। मिश्रा बताते हैं कि सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया उनके लिए सहज रही। उनके अनुसार, योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सौर ऊर्जा को अपनाने के निर्णय को और आसान बनाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का विजन पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अब आम परिवार भी अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन के माध्यम के रूप में देख रहे हैं। त्रिलोक मिश्रा का अनुभव इसी बदलाव की एक स्थानीय तस्वीर है। जहां पहले उनकी छत केवल घर का हिस्सा थी, वहीं अब वही छत बिजली पैदा कर रही है। इससे एक ओर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार के बिजली खर्च में भी राहत महसूस हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से जिले के परिवारों को अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। त्रिलोक मिश्रा की कहानी बताती है कि जब किसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है। सौर ऊर्जा के माध्यम से उन्हें बिजली खर्च में राहत मिली है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है। पर्यावरण के साथ घरेलू बजट के लिए भी राहत सौर ऊर्जा का लाभ केवल बिजली बिल में कमी तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का माध्यम भी है। मिश्रा के घर में सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संतोष भी मिल रहा है। वे मानते हैं कि यदि अधिक से अधिक परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाएं, तो इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। त्रिलोक मिश्रा की छत बनी दूसरों के लिए प्रेरणा त्रिलोक मिश्रा की कहानी अब आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनका अनुभव बताता है कि सौर ऊर्जा केवल बड़े संस्थानों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। सामान्य परिवार भी अपनी जरूरत के अनुसार सोलर प्लांट लगाकर बिजली की जरूरत पूरी करने और घरेलू खर्च को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। एक समय बिजली के बढ़ते बिल की चिंता करने वाले त्रिलोक मिश्रा आज अपनी छत पर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी योजनाओं के जमीनी प्रभाव की एक सकारात्मक मिसाल प्रस्तुत करती है। उनके घर की छत से निकल रही सौर ऊर्जा केवल बिजली नहीं बना रही, बल्कि आत्मनिर्भरता, बचत और स्वच्छ भविष्य की नई उम्मीद भी रोशन कर … Read more

बिहार के सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, स्मार्ट क्लास से रोबोटिक्स लैब तक सुविधा

 पटना बिहार के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे। सम्राट सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया है कि हर जिले में बच्चों को अब अत्याधुनिक और उन्नत शैक्षणिक परिवेश उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी 38 जिले में कम से कम एक स्कूल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों में छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षा विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसमें पुराने और प्रतिष्ठित विद्यालयों को आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं और खेल-कूद की बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा। विभाग की और से तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार राज्य के चुनिंदा उच्च और उच्च माध्यमिक स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन विद्यालयों में कॅरियर ओरिएंटेड सारे विकल्प मौजूद होंगे। यहां छात्रों को कॅरियर की सभी संभावनाओं के लिए तैयार किया जाएगा। विज्ञान व तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस होगा, जिसके तहत रोबोटिक्स, कोडिंग, एआई की जानकारी दी जाएगी। बच्चों के खेल कॅरियर पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कला और संस्कृति को भी समान रूप से महत्व दिया जाएगा। इसी तरह बच्चों का व्यावसायिक कौशल विकसित करने की ‌विशेष योजना है। उन्हें डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग मिलेगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ये होगा खास ● बुनियादी ढांचा: स्कूल भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान को बेहतर बनाया जाएगा ● डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: आईसीटी लैब, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी ● शिक्षण सामग्री: डिजिटल शिक्षण सामग्री के जरिए पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाया जाएगा ● क्विज और प्रतियोगिताएं: इन स्कूलों में छात्रों के बीच क्विज, स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं नियमित आयोजित कराई जाएंगी पुराने स्कूल को एक्सीलेंस चुनने पर अनेक चुनौतियां यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है। हालांकि पुराने स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने में चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या बुनियादी ढांचे की कमी है। कई पुराने विद्यालयों में पर्याप्त जगह नहीं है। इससे नई लैब या स्मार्ट क्लासरूम बनाना मुश्किल होगा। बिहार के स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है। सिर्फ 24 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर और 85 फीसदी विद्यालयों में इंटरनेट है। इसी प्रकार तकनीकी और मानव संसाधन को लेकर भी बड़ी परेशानी है। प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। खासकर आईसीटी और रोबोटिक्स जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों को भारी कमी है। उधर, पुराने शिक्षकों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जो बेहद कठिन कार्य है। इसके अलावा पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था भी एक समस्या है। सेंटर ऑफ एक्सलेंस के लिए सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियां तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाना भी बड़ी चुनौती होगी। छात्रावास की व्यवस्था भी एक प्रमुख समस्या हो सकती है। डिजिटल, तकनीकी सुविधाएं ● स्मार्ट क्लासरूम: इंटरएक्टिव पैनल और स्मार्ट बोर्ड से लैस कक्षाएं ● आईसीटी लैब: इस स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना का अलग से प्रावधान किया गया है ● कंप्यूटर लैब: आधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से सुसज्जित कंप्यूटर प्रयोगशाला ● इनोवेशन लैब: अटल टिंकरिंग लैब या इनोवेशन लैब की स्थापना की योजना ● रोबोटिक्स लैब: इन स्कूलों को रोबोटिक्स लैब और एस्ट्रोनॉमी किट से लैस करने की योजना है ● हाई-स्पीड इंटरनेट: वाई-फाई कनेक्टिविटी और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होगी शैक्षणिक सुविधाएं उन्नत प्रयोगशालाएं: भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान की सुसज्जित लैब पुस्तकालय: विस्तृत संग्रह वाली लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और शांत अध्ययन कक्ष ऑडियो-विजुअल सुविधाएं: प्रोजेक्टर, स्कैनर और मल्टीमीडिया सिस्टम। अन्य सुविधाएं लड़कियों के लिए विशेष सुविधाएं: उचित शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था। पोषण कार्यक्रम: कुछ स्कूलों में प्रयोग के तौर पर शेफ-क्यूरेटेड न्यूट्रिशन प्रोग्राम होंगे। हाइजेनिक कैंपस: स्वच्छ और आधुनिक परिसर खेल मैदान: फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेनिस की सुविधा। इंडोर स्पोर्ट्स हॉल: टेबल टेनिस और अन्य इनडोर गेम्स। स्विमिंग पूल: कुछ प्रमुख केंद्रों में तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल। योग और फिटनेस सेंटर: जिम और योग रूम

कारोबारियों को थाने में लूटने वाला थानेदार फरार, भाइयों ने किया सरेंडर

जौनपुर यूपी के जौनपुर में दो कारोबारियों को अगवा कर लूटने वाले सुरेरी थाने पर तैनात रहे थानेदार दिव्य प्रकाश सिंह पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया है। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले दो सिपाहियों समेत तीन लोगों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वारदात में सहयोग करने वाले थानेदार के दो सगे भाइयों विकास सिंह और संकीत सिंह ने अदालत में सरेंडर कर दिया है। थानेदार और सिपाहियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब थानेदार व्हाट्स स्टेटस के जरिए धमकी दे रहा है। उसने यहां तक लिखा कि जल्द वापसी करूंगा। सभी की पोल खुलेगी। अपने पर्सनल फोन का स्टेटस लगातार बदल रहा है और ऐसी बातें लिख रहा है जिसे अधिकारियों को धमकी माना जा रहा है। क्या है पूरा मामला जौनपुर के जलालपुर थाना इलाके में 15 सितंबर को कारोबारी विजय राजभर को अगवाकर लूटपाट की गई थी। दो लोग उसे पुलिस की धमकी देकर अपने साथ ले गए। एक गाड़ी में पहले से मौजूद चार लोगों ने उसे अगवा कर लिया। उसे सुरेरी थाना ले जाकर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी देकर रुपए मांगे गए। उसका मोबाइल छीनकर यूपीआई के जरिए कई खातों से दो लाख से ज्यादा ट्रांसफर कर लिए गए। उसने 17 सितंबर को इसकी शिकायत अधिकारियों से की। मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई। जांच शुरू होते ही एक अन्य कारोबारी सुशील कुमार पांडेय भी सामने आया। उसके साथ भी इसी तरह की घटना हुई थी। उसे भी इसी तरह से सुरेरी थाने में ले जाकर लूटा गया था। एक ही तरह की दो घटनाओं और थाने लाकर लूट की खबर से खलबली मच गई। मामला डीआईजी तक पहुंच गया। 22 सितंबर को एसआईटी गठित हुई थी वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईडी वैभव कृष्ण ने 22 सितंबर को पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह की टीम मामले के खुलासे में लगी। सुरेरी थाने में पुलिस वालों की परेड हुई तो लूट को अंजाम देने वाले सिपाहियों की पहचान हो गई। पता चला कि थानेदार ही लूट सिपाहियों और अपने सगे भाइयों के जरिए वारदातों को अंजाम दिला रहा हैं। कारोबारी को बुलाकर ले जाने वाले कोई और नहीं थानेदार के भाई संकीत सिंह और विकास सिंह थे। एसआईटी ने रिपोर्ट दर्ज कर धरपकड़ शुरू की तो थानेदार फरार हो गया। थाने में असलहे के साथ फोटो भी खिंचवाया कारोबारियों ने अधिकारियों को बताया कि चार पहिया वाहन से अपहरण करने और सुरेरी थाने में ले जाकर धमकाने के साथ ही असलहा के साथ फोटो और वीडियो बनाया गया। सादे कागज पर हस्ताक्षर कराया गया था। सुशील पांडेय ने बताया कि पहले पांच लाख की मांग की गई। फिर एक लाख पांच हजार रुपये नगद और साठ हजार दो सौ 99 रुपये ऑनलाइन वंशनारायण गिरी के खाते में ट्रांसफर करा लिए। थानेदार का व्हाट्स स्टेटस लगातार हो रहा अपडेट पुलिस फरार थानेदार को खोज रही है और उसके फोन में व्हाट्स स्टेटस लगातार अपडेट हो रहा है। इसमें एक तरह से धमकी दी जा रही है। उसने एक स्टेटस में लिखा है कि आज आपने इज्ज़त ली हो मैं जल्द ही वापसी करूंगा, अपने तरीक़े से सभी की पोल खुलेंगी, आप को जो कराना था करा दिए। सम्मान के साथ जिया हूं, सम्मान के साथ जिएंगे। जिसने भी ऐसा किया है, वो बस अपना सोचे, सभी कहानी और खुलासे के साथ जल्द ही सामने आएंगे। एक अन्य स्टेटस में मरने की धमकी भी दी। लिखा कि इसकी कीमत मेरी जान है जो मुझे अब दिल से अनुभव हो गया है, जल्द वीडियो बनाने के साथ मर जाऊंगा, लेकिन आज मुझे जो बताया जा रहा है वो आप भी हैं। यह भी लिखा कि जिस स्थान पर मैं जाऊंगा, वहां पर आप भी रहेंगे। CBI जांच के साथ सभी EVIDENCES मेरे पास हैं। इन स्टेटस से माना जा रहा है कि वह अपने ही अधिकारियों को धमका रहा है।

सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश

सेवा संकल्प अभियान 2026 सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से मिली 56 हजार रुपये की सहायता, दूध बेचकर अब तक कमाए 40 हजार रुपये से अधिक प्रतिदिन हो रहा 6 से 8 लीटर दूध उत्पादन, गोबर से जैविक खाद मिलने से खेती की लागत भी हुई कम रायपुर, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत आजीविका गतिविधियों से जुड़ी सहायता ग्रामीण किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है। जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम सन्ना निवासी श्री ओम प्रकाश यादव ने योजना से मिली सहायता से उन्नत नस्ल की गाय खरीदकर अपने पारंपरिक पशुपालन को आय के साधन में बदल दिया है। दूध के विक्रय से उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय हो चुकी है। ओम प्रकाश यादव पहले से गाय पालन करते थे, लेकिन उन्नत नस्ल की गाय नहीं होने के कारण दूध का उत्पादन सीमित था। दूध का अधिकांश उपयोग परिवार की जरूरतों के लिए ही हो जाता था। ऐसे में पशुपालन से नियमित अतिरिक्त आय नहीं हो पाती थी। 56 हजार रुपये की सहायता से खरीदी उन्नत नस्ल की गाय कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत उत्पादन प्रणाली मद में ओम प्रकाश यादव को गाय पालन के लिए 56 हजार रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई। इस राशि से उन्होंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी और पशुपालन को व्यवस्थित आजीविका गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया। उन्नत नस्ल की गाय आने के बाद अब उन्हें प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है। परिवार की आवश्यकता पूरी होने के बाद अतिरिक्त दूध का विक्रय किया जा रहा है। इससे उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो चुकी है। दूध से आमदनी, जैविक खाद से खेती में बचत पशुपालन से ओम प्रकाश को दोहरा लाभ मिल रहा है। दूध की बिक्री से नियमित अतिरिक्त आय हो रही है, वहीं गाय के गोबर से मिलने वाली जैविक खाद का उपयोग खेती में किया जा रहा है। इससे खेती में बाहरी खाद पर होने वाले खर्च में भी कमी आई है। अतिरिक्त आमदनी और खेती की लागत में बचत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। “अब हर महीने हो रही अतिरिक्त कमाई” ओम प्रकाश यादव बताते हैं, “पहले देशी गाय से मिलने वाला दूध केवल घर के उपयोग में ही आ जाता था। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से 56 हजार रुपये की सहायता मिलने पर मैंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी। अब प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है और हर महीने अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।” पारंपरिक पशुपालन बना स्थायी आय का माध्यम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के माध्यम से कृषि के साथ पशुपालन जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हो रहे हैं। ओम प्रकाश यादव की सफलता बताती है कि योजनाबद्ध सहायता और सही संसाधनों के उपयोग से पारंपरिक पशुपालन को नियमित आय के साधन में बदला जा सकता है।

बालोद सड़क दुर्घटना पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक

बालोद सड़क दुर्घटना पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जताया गहरा शोक शोकाकुल परिवारों के प्रति व्यक्त की संवेदना, घायलों के समुचित उपचार के दिए निर्देश रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बालोद जिले के मरकाटोला घाट में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में कई लोगों के असामयिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस हृदयविदारक घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले शोकाकुल परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने घायलों के समुचित उपचार के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दुःख की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

गणेश विसर्जन झांकी के दौरान भारी वाहनों पर प्रतिबंध

राजनांदगांव. गणेश विसर्जन झांकी के दौरान शहर में शुक्रवार को भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इस संबंध में यातायात पुलिस ने ट्रेफिक एडवाइजरी जारी की है। ज्ञात हो कि 25 सितंबर को शहर में गणेश विसर्जन झांकी एवं 25 एवं 26 को गणेश प्रतिमाओं का मोहारा कुण्ड में विसर्जन किया जाना है। इस दौरान शहर में श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों की बड़ी संख्या में आवाजाही को देखते हुए यातायात पुलिस राजनांदगांव द्वारा 25 सितंबर के दोपहर 2 बजे से 26 सितंबर के सुबह 10 बजे तक विशेष यातायात व्यवस्था की गई है। इस दौरान फरहद चौक, ट्रांसपोर्ट नगर, मोहारा बायपास, गठुला एवं सीआईटी बायपास से राजनांदगांव शहर की ओर आने वाले सभी हल्के एवं भारी चारपहिया वाहनों का आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। गणेश पंडालों में चोरी : चोरों ने भगवान के पंडाल को भी नहीं छोड़ा गणेश उत्सव के बीच खैरागढ़ थाना क्षेत्र में चोरों ने अब भगवान के पंडालों को भी | निशाना बनाना शुरू कर दिया है। थाना क्षेत्र के सरागोंदी, आमदनी और भोरामपुर गांव में अलग-अलग गणेश पंडालों से कलश, थाली समेत अन्य पूजन सामग्री चोरी होने का मामला सामने आया है। एक साथ तीन गांवों में हुई चोरी की घटनाओं से गणेश उत्सव समितियों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद गणेश उत्सव समितियों के पदाधिकारी और ग्रामीण खैरागढ़ थाना पहुंचे। उन्होंने पुलिस को लिखित आवेदन सौंपकर अज्ञात चोरों का पता लगाने और मामले की जांच की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक गणेश उत्सव के दौरान पंडालों में देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद पंडालों से पूजन सामग्री चोरी होने से श्रद्धालु सकते में है।

झारखंड BJP को मिले नए प्रभारी, गजेंद्र पटेल और पवन साय संभालेंगे जिम्मेदारी

रांची झारखंड में लगातार दो बार से सरकार बनाने से चूक जा रही भारतीय जनता पार्टी ने जीत के लिए अब संगठन में बदलाव किए हैं। केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से दिल्ली से रांची तक झारखंड भाजपा को नए प्रभारी मिले हैं। खास बात यह है कि प्रभारी बनाए गए नेता मध्यप्रदेश या छत्तीसगढ़ से आते हैं। भाजपा के नए प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय अभी तक छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।पार्टी के प्रदेश प्रभारी गजेंद्र पटेल मध्यप्रदेश के खरगोन से सांसद हैं। जबकि सह प्रभारी बनाए गए सौरव सिंह छत्तीसगढ़ में खनिज विकास निगम के अध्यक्ष हैं। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह भी मध्यप्रदेश के ही रहने वाले हैं। सौदान सिंह इससे पहले भी झारखंड और छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभार में रहे हैं और दोनों ही जगह भाजपा की सरकार बनाने में उनकी रणनीतिक भूमिका रही है। 2014 में झारखंड विधानसभा में भाजपा की जीत के समय सौदान सिंह ही प्रभारी थे। पिछले दिनों हुए राज्यसभा चुनाव के समय भी छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड में प्रभारी बनाया था। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से मिलती है झारखंड की सामाजिक संरचना मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह ही झारखंड में आदिवासी जनसंख्या बड़ी संख्या में है। प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह खरगोन सुरक्षित लोकसभा से आदिवासी सांसद हैं। संगठन महामंत्री पवन साय भी आदिवासी समुदाय से आते हैं। ऐसे में राज्य के आदिवासी समाज को भाजपा संगठन में अपनी शीर्ष सामाजिक भागीदारी देखने को मिलेगी। पवन साय झारखंड से सटे जशपुर जिले के रहने वाले हैं जहां से सिमडेगा, गुमला जैसे पड़ोसी जिलों में बड़ी संख्या में रिश्तेदारी होती है।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ननिहाल सिमडेगा जिले में ही है। ऐसे में संगठन के शीर्ष दो पदों पर आदिवासी नेता को लाकर भाजपा ने एक संदेश दिया है। गिरिडीह उपचुनाव में होगी रणनीति की परीक्षा पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन के बाद राज्य के गिरिडीह विधानसभा में उपचुनाव होना है। भाजपा के संगठन में हुए नए नेताओं की इंट्री के साथ बदली हुई रणनीति के साथ पार्टी उपचुनाव में जाएगी। यहां प्रत्याशी चयन से लेकर प्रचार अभियान तक में पार्टी के पास अब अनुभवी नेताओं की टीम होगी।  

विकसित ग्राम पंचायत योजना को लेकर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित

विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आयोजित  आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों को दिया गया प्रशिक्षण 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में शुरू होगी योजना निर्माण की प्रक्रिया, ग्रामीणों की भागीदारी से तय होंगी विकास की प्राथमिकताएं रायपुर,  विकसित भारत -जीरामजी योजना के अंतर्गत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए आज ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा में राज्य स्तरीय जिला मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। विकसित भारत-जीरामजी के आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित प्रशिक्षण में प्रदेश के सभी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारियों एवं प्रोग्रामरों ने भाग लिया।     आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा ने सभी प्रशिक्षार्थियों से कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना प्रक्रिया में ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा में  प्रत्येक गांव की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर खुलकर संवाद किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बस्ती एवं वार्ड स्तर तक पहुंचकर अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।     प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की सहभागिता से विकास योजना तैयार करने, डिजिटल मैपिंग, परिसंपत्तियों के सत्यापन और योजनाओं के समेकन की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य जिला मास्टर ट्रेनर्स को योजना निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराना है, ताकि ग्राम पंचायत स्तर पर निर्धारित समय-सीमा में योजनाएं तैयार की जा सकें।        प्रशिक्षण में बताया गया कि 2 अक्टूबर से प्रदेश की ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं के माध्यम से विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को गांव के आधारभूत आंकड़ों, उपलब्ध संसाधनों, मानचित्रों और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण स्वयं अपने गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को तय करने में भागीदारी निभाएंगे। ग्राम सभाओं में प्राप्त सुझावों के आधार पर ग्राम पंचायतों की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी। अक्टूबर-नवंबर में सीधा संवाद और दिसंबर में होगा योजना का अनुमोदन       प्रशिक्षण में जानकारी दी गई कि अक्टूबर और नवंबर माह में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित कर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन किया जाएगा। इन बैठकों में ग्रामीणों से गांव की समस्याओं, आवश्यक सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों के संबंध में सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।       इस दौरान गांवों में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी किया जाएगा। ऐसी परिसंपत्तियां, जो भौतिक रूप से उपलब्ध हैं लेकिन डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं, उन्हें युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर प्रस्तावित विकास कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर चिह्नित किया जाएगा।       दिसंबर माह में तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना का प्रारूप ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। ग्रामीणों के सुझावों और आवश्यक विचार-विमर्श के आधार पर योजना में संशोधन कर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा से औपचारिक अनुमोदन प्राप्त कर योजना को विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा। ग्राम पंचायतों से प्राप्त योजनाओं का विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन 15 जनवरी तक पूरा किया जाएगा। जल सुरक्षा, आजीविका और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष ध्यान       विकसित ग्राम पंचायत योजना में जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से संबंधित अधोसंरचना और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना निर्माण के दौरान गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों का आकलन किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में संयुक्त आयुक्त , वीबी – जी राम जी रामाधन श्रीवास, दीपक शर्मा, अधीक्षण अभियंता विनय गुप्ता, सहायक आयुक्त यशवत चंद्राकर,  राज्य एमआईएस नोडल अधिकारी मजहर शामी, वीबी जी राम जी संकाय सदस्य आनंद रघुवंशी ने शामिल होकर विकसित ग्राम पंचायत योजना निर्माण की प्रक्रिया एवं तकनीकी बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया ।