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लाउड स्पीकर पर आरती पर दो पक्षों में जमकर पथराव

जबलपुर. जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील (MP News) में गुरुवार रात करीब नौ बजे आपसी विवाद के बाद दो पक्ष भिड़ गए। एक धार्मिक स्थल के बाहर लगी रैलिंग टूटने से लोग आक्रोशित हो गए। इससे दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव कर दिया। इसमें कुछ लोगों के आंशिक घायल होने की सूचना है। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उपद्रवियों को खदेड़ा और अश्रु गैस के गोले भी छोड़े। तनाव को देखते हुए मौके पर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय पहुंचे। अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। पुलिस ने हालात नियंत्रण का दावा करते हुए जांच के बाद मामला दर्ज करने की बात कही है।

यूपी की सियासत गरम: मोहन भागवत से मिले दोनों डिप्टी CM, 2027 चुनाव की रणनीति पर चर्चा?

लखनऊ . उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की हैट्रिक के लिए खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मैदान में उतर चुके हैं. गोरखपुर प्रवास के बाद वे लखनऊ पहुंचे।  जहां पहले वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 40 मिनट तक मुलाक़ात की. गुरुवार को मेरठ रवानगी से पहले उनकी मुलाक़ात दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पटाहक से हुई. इन मुलाकातों को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस प्रमुख ने हिंदुत्व के अजेंडे को धार देने और जाति की राजनीति को ख़त्म करने को लेकर चर्चा की है. इसकी वजह यह है कि हाल के दिनों में जिस तरह से यूजीसीबिल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा उठा उससे, हिन्दू वोट बंटने का खतरा है. इसका सीधा नुकसान बीजेपी को इसलिए भी है, क्योंकि बीजेपी 80 बनाम 20 की राजनीति करती है. यानी सपा का पीडीए और बीजेपी का दलित वोट भी सिका हिस्सा है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मोहन भागवत से करीब 30-40 मिनट तक बातचीत की. यह मुलाकात आरएसएस के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में बताई जा रही है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के चुनावी रोडमैप, हिंदुत्व एजेंडा, संगठन-सरकार समन्वय और सामाजिक समीकरणों पर रणनीति बनाने के रूप में देखा जा रहा है. मुलाकात के दौरान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठन की भूमिका और आगामी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है. किस मुद्दे पर हुई होगी चर्चा? मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के बाद, गुरुवार सुबह मोहन भागवत ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की. सरस्वती कुंज में हुई इन बैठकों में हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों, जातिगत राजनीति, सामाजिक समरसता और चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मोहन भागवत ने जाति को भूलने और खुद को हिंदू बताने का आह्वान किया है उससे साफ़ है कि 2027 के लिए सियासी बिसात तैयार की जा रही है. इन मुलाकातों से स्पष्ट है कि आरएसएस 2027 के चुनाव को लेकर प्रदेश स्तर पर मजबूत समन्वय और तैयारी में जुटा हुआ है. आरएसएस और बीजेपी के बीच समन्वय मजबूत होगा यह मुलाकातें ऐसे समय हो रही हैं जब उत्तर प्रदेश में सामाजिक-राजनीतिक माहौल गर्म है और विभिन्न दल अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं. आरएसएस की ओर से हिंदू समाज में एकता, सतर्कता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सरकार-संगठन के बीच बेहतर तालमेल को चुनावी सफलता की कुंजी माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें न केवल भाजपा की चुनावी तैयारियों को मजबूती देंगी, बल्कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएंगी.

अब मोटापे का मुफ्त इलाज, महाराजा यशवंतराव अस्पताल में नि:शुल्क सर्जरी

इंदौर  मध्य प्रदेश में अब मोटापे से परेशान लोगों को सरकारी स्तर पर मोटापे से मुक्ति मिल सकेगी. दरअसल, पहली बार इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में नि:शुल्क बेरिएट्रिक सर्जरी (वजन घटाने की सर्जरी) की शुरुआत की गई है. यहां पर 120 किलो वजन की एक महिला का पहला सफल ऑपरेशन किया गया है. यही नहीं अब यहां बेरिएट्रिक क्लिनिक शुरू होने जा रही है. प्राइवेट अस्पताल में बेरिएट्रिक सर्जरी का खर्च कम से कम 4-5 लाख दरअसल, प्रदेश भर में ऐसे हजारों लोग हैं जो मोटापे से परेशान हैं. इनमें कई ऐसे मरीज हैं जो 100 किलो के वजन को पार कर गए हैं. ऐसे लोगों को तमाम बीमारियों के अलावा हार्ट अटैक, डायबिटीज, हाईपरटेंशन और अन्य खतरे सर्वाधिक रहते हैं. लेकिन इससे बचने के लिए जो बेरिएट्रिक सर्जरी जरूरी है, निजी अस्पतालों में उसका शुल्क न्यूनतम 4 से 5 लाख है. इस स्थिति में मध्यम और गरीब वर्ग के ज्यादातर लोग यह सर्जरी नहीं करवा पाते. इंदौर की एक 120 किलो वजन की महिला का सफल ऑपरेशन यही परेशानी इंदौर के खजराना क्षेत्र की निवासी 30 वर्षीय गुलअफशा नामक महिला की थी जिसने अपना वजन 120 किलो होने के कारण इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के समक्ष इलाज की गुहार लगाई थी. इसके बाद डॉ. घनघोरिया की सर्जरी टीम ने बरिएट्रिक सर्जरी प्लान की. डाइट प्लान तय किया और ऑपरेशन की तारीख 12 फरवरी तय की.इसके बाद महिला की सर्जरी एम वाय एच अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक पद्धति द्वारा की गई. इसे मिनी गैस्ट्रिक बायपास (MGB) बेरिएट्रिक के रूप में किया गया. जो दूरबीन द्वारा फ्री में किया गया. डॉ. घनघोरिया ने बताया "इस तरह के आपरेशन में स्पेशल बेरिएट्रिक लेप्रोस्कोपिक सेट लगता है तथा महंगे स्टेपलर लगते हैं, जिनका खर्च शासन द्वारा वहन किया गया. ऑपरेशन के बाद 5 दिन चले उपचार के बाद 17 फरवरी को महिला को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. महिला को अब जल्द ही मोटापे से मुक्ति मिलने की उम्मीद बंधी है जिसे लेकर वह खासी खुश है. प्राइवेट और कॉर्पोरेट अस्पताल में उसे सर्जरी का 4 से 5 लख रुपए का खर्च बताया गया था. इसके अलावा उसे हर महीना ₹10,000 की दवाइयां बताई गई थी. लेकिन सरकारी अस्पताल में यही सर्जरी फ्री में होने के कारण उसे बड़ी सौगात मिल सकी है." इंदौर में खुलेगी पहली बेरिएट्रिक क्लिनिक दरअसल, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मरीज का फ्लो सर्वाधिक रहने के कारण इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब बरिएट्रिक सर्जरी के लिए अलग से विशेष क्लिनिक शुरू करने का फैसला किया है. डॉ, घनघोरिया ने बताया जल्द ही मेडिकल कॉलेज के अधीन इंदौर में पहले सरकारी बेरियाट्रिक क्लिनिक का शुभारंभ होगा.

लोकायुक्त रिपोर्ट: 4 साल में हजारों मामले, कई भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में

भोपाल  लोकायुक्त में बीते चार वर्षों में मध्यप्रदेश के 1379 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध जांचें चल रही हैं। जांच के दायरे में आए मामलों में 20.97 करोड़ रुपए की वसूली किए जाने के बावजूद 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए जा चुके हैं। यह जानकारी कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त संगठन में वर्ष 2022-23 से अब तक 1884 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि विशेष पुलिस स्थापना में 1063 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं। इन मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा तथा तकनीकी शाखा द्वारा इसी अवधि में 1592 जांच पूरी कर प्रकरणों का निराकरण किया है। वर्तमान में शिकायत एवं जांच शाखा में 1291 तथा तकनीकी शाखा में 88, कुल 1379 प्रकरण जांच के दायरे में हैं। 134 केस अभियोजन स्वीकृति में लंबित लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा पंजीबद्ध 1063 आपराधिक प्रकरणों में से 393 प्रकरणों की विवेचना पूरी की जा चुकी है। इनमें 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए हैं। इसके अतिरिक्त 12 प्रकरणों में न्यायालय में खात्मा पेश किया है, जिनमें आरोपी की मृत्यु अथवा प्रकरण के उन्मोचित होने का आधार रहा। शेष 670 प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन हैं। 153 मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई जवाब में यह भी बताया गया कि कुल जांच किए गए मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा के 146 तथा तकनीकी शाखा के 7, कुल 153 प्रकरणों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही शिकायत एवं जांच के आधार पर 20 करोड़ 97 लाख 17 हजार 905 रुपए की वसूली की गई है। लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा न्यायालय में पेश किए गए 208 चालानों में से 7 प्रकरणों में आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध हुआ है। इन मामलों में संबंधित आरोपियों के खिलाफ सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक C-6-2/98/3/1 दिनांक 26 मई 1998 के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस विधायक ने पूछा था यह सवाल कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने विधानसभा के माध्यम से राज्य सरकार से पूछा था कि वर्ष 2022-23 से वर्तमान तक लोकायुक्त संगठन में कुल कितने प्रकरण प्राप्त हुए, कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया और कितने वर्तमान में लंबित हैं। साथ ही कितने प्रकरणों में दोष सिद्ध हुआ, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए शासन द्वारा क्या कार्ययोजना और समय-सीमा निर्धारित की गई है।

दो साल में 128 प्रोजेक्ट पूरे करने का टारगेट, सिंहस्थ तैयारी में खर्च होंगे 3,000 करोड़

उज्जैन  प्रदेश सरकार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से बजट में बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ क्षेत्र के समग्र विकास और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कुल 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं। ये राशि पिछले बजट की तुलना में 1055 करोड़ रुपए ज्यादा है। अब तक सरकार सिंहस्थ के लिए 5570 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान कर चुकी है।वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने बजट भाषण में जिक्र किया कि सिंहस्थ के लिए पहले से ही 13 हजार 851 करोड़ के काम स्वीकृत किए जा चुके हैं। अलग-अलग विभागों के काम चल भी रहे हैं। वित्त मंत्री के दावों के उलट सरकार के ही आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि घाटों की मरम्मत, पुल, सड़कों के अपग्रेडेशन का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है।आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब कमेटी अब तक 10 विभिन्न विभागों के 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹13,752 करोड़ है। इनमें सबसे ज्यादा 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं। जिनमें 33 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हुआ है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना, श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित करना और शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। स्वीकृत कार्यों में 1,164 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर-उज्जैन मार्ग का सिक्स लेन चौड़ीकरण, 1,370 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तथा 701 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन बायपास मार्ग का विकास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही में सुविधा होगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन कार्यों हेतु 3 हजार 60 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिससे निर्माण कार्यों को गति मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ महापर्व के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क नेटवर्क, सुगम परिवहन, सुव्यवस्थित प्रवेश मार्ग और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का मानना है कि इन आधारभूत परियोजनाओं से न केवल सिंहस्थ की व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों के दीर्घकालीन शहरी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।  समय कम, काम ज्यादा- 26 प्रोजेक्ट अभी कागजों में सिंहस्थ 2028 के शुरू होने में अब महज दो साल का वक्त बचा है, लेकिन स्वीकृत 128 प्रोजेक्ट्स में से केवल 102 पर ही काम शुरू हो पाया है। इसका मतलब है कि 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी भी फाइलों में ही अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़कें चौड़ी करने, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट हैं। साथ ही पेयजल और सीवरेज लाइनों जैसी मूलभूत सुविधाओं का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। योजनाएं जितनी बड़ी और महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पूरा करने के लिए समय उतना ही कम बचा है, जो प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि प्रदेश में पूंजीगत व्यय की सर्वाधिक 2300 करोड़ रुपए की राशि सिंहस्थ मद में ही बची हुई है, जिसे जल्द से जल्द खर्च करने की आवश्यकता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। नगरीय विकास विभाग, जिस पर सिंहस्थ की तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है, को 2760 करोड़ रुपए की लागत वाले 42 प्रोजेक्ट पूरे करने हैं। लेकिन विभाग अब तक केवल 33 प्रोजेक्ट ही धरातल पर उतार पाया है। शिप्रा का शुद्धिकरण: सरकार की सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ की आत्मा शिप्रा नदी के पवित्र जल में स्नान से जुड़ी है, और सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और निर्मल जल उपलब्ध कराना है। जल संसाधन विभाग इस दिशा में पांच बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, लेकिन उनकी प्रगति की रफ्तार चिंताजनक है।     कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट: इंदौर से आने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए यह ₹914 करोड़ की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है। सितंबर 2027 की डेडलाइन वाले इस प्रोजेक्ट का काम अब तक केवल 52% ही पूरा हो पाया है।     बैराज निर्माण: शिप्रा और कान्ह नदी पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए बैराज बनाए जा रहे हैं। इंदौर में काम 75% पूरा हो चुका है, लेकिन उज्जैन में यह केवल 20% और देवास में महज 5% ही हुआ है।     शिप्रा को प्रवाहमान बनाना: सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के तहत ₹614.53 करोड़ की लागत से शिप्रा को प्रवाहमान बनाने का काम चल रहा है, जो अभी 62% ही पूरा हुआ है।     घाट निर्माण: शिप्रा के दोनों ओर 30 किलोमीटर के क्षेत्र में ₹776 करोड़ की लागत से घाटों का निर्माण होना है, लेकिन यह काम अभी केवल 20% ही आगे बढ़ा है।     शिप्रा पर अतिरिक्त बैराज: उज्जैन और देवास जिले में शिप्रा पर बनने वाले अन्य बैराजों का काम भी केवल 15% ही हुआ है, जबकि इनकी डेडलाइन नवंबर 2027 है।     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में इन प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर काम में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। केंद्र से मदद की उम्मीद इस महा-आयोजन के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए राज्य सरकार पिछले तीन साल से केंद्र से मदद की गुहार लगा रही है। हालांकि केंद्रीय बजट में सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई, लेकिन राज्य सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से किस्तों में 6,000 से 7,000 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त होगी।

सीकर का लक्खी मेला: 21 फरवरी से खाटू श्याम दरबार रहेगा लगातार खुला, 18 किमी जिगजैग रास्ता तय करना होगा

सीकर/खाटू धाम राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में इस बार फाल्गुन मेला (Fagun Mela Khatu Shyam 2026) की तैयारियाँ जोरों पर हैं। यह मेला, जिसे फाल्गुन लक्खी मेला भी कहा जाता है, 21 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी 2026 तक चलेगा और देशभर से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। खाटू श्याम मेला कब से है? इस वर्ष खाटू श्याम जी का मेला ( Khatu Shyam Ji ka Mela Kab Hai ) 21 फरवरी 2026 (शनिवार) से 28 फरवरी 2026 (शनिवार) तक आयोजित किया जाएगा। मेला फाल्गुन महीने के दौरान मनाया जाता है, जो भक्ति, संगीत, पूजा एवं उत्सव का प्रतीक है। श्रद्धालु निशान यात्रा, भजन-कीर्तन तथा विशेष पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। खाटू श्याम मंदिर ( Khatu Shyam Mandir ) राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है और यह धार्मिक स्थल “हारे का सहारा” के रूप में भक्तों की आस्था का केंद्र माना जाता है। सुरक्षा व्यवस्था एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने सुरक्षा खाका खींचते हुए बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक और सख्त रखा गया है. मेले की सुरक्षा के लिए करीब 6500 पुलिसकर्मियों का भारी जाब्ता तैनात किया जाएगा. पूरे मेला क्षेत्र को 22 सेक्टरों में बांटा गया है, ताकि हर कोने पर सीधी नजर रखी जा सके. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 400 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पल-पल की मॉनिटरिंग की जाएगी. दर्शन व्यवस्था अधिकारियों ने मंदिर परिसर के साथ-साथ 75 फीट चौड़े दर्शन मार्ग का जायजा लिया, जहां 14 कतारों में लगकर भक्त बाबा के दरबार तक पहुंचेंगे. बता दें कि मुख्य फोकस इस बात पर है कि दर्शन के बाद श्रद्धालुओं की निकासी बिना किसी रुकावट के हो. मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों (मंत्री मानवेंद्र सिंह और कोषाध्यक्ष रवि सिंह) ने बताया कि पेयजल, छाया और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन और मंदिर कमेटी का साझा संकल्प निरीक्षण के दौरान एएसपी दीपक गर्ग और थानाधिकारी पवन कुमार चौबे सहित पुलिस की पूरी टीम मौजूद रही. प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका एकमात्र लक्ष्य देशभर से आने वाले लाखों 'श्याम प्रेमियों' को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम दर्शन कराना है. मेला अवधि के दौरान यातायात व्यवस्था को भी डायवर्ट किया जाएगा ताकि कस्बे में दबाव कम रहे. बाबा श्याम की नगरी अब पूरी तरह सज-धज कर अपने भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है. राजस्व मंडल अजमेर के अध्यक्ष हेमंत गेरा ने सीकर कलेक्ट्रेट का वार्षिक निरीक्षण किया. जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने उनका स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर दिया. गेरा ने परिसर के सभी कार्यालयों का दौरा किया. हर शाखा में जाकर उन्होंने कर्मचारियों से बात की. एलआर शाखा में फाइल निस्तारण, राजस्व कोर्ट के मामलों, लंबित पत्रावलियों, तामील और रिपोर्ट्स की स्थिति जांची. उन्होंने ई-फाइलों का जल्द निपटारा करने, फालतू फाइलें लटकाए नहीं रखने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री बजट की घोषणाओं और राजस्थान संपर्क पोर्टल के शिकायतों का समय पर समाधान करने को कहा. अतिरिक्त कलेक्टर रतन कुमार, अतिरिक्त कलेक्टर भावना शर्मा, एसडीएम निखिल कुमार सहित राजस्व अधिकारी उपस्थित थे. खाटू श्याम मेले में इस बार नई व्यवस्थाएं और सुविधाएं     इस बार प्रशासन ने मेले में भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं:     भीड़ नियंत्रण के लिए विशाल भक्ति मार्ग और अलग-अलग प्रवेश–निकास रूट बनाए गए हैं।     भीड़, सुरक्षा और आपातकालीन सहायता के लिए विशेष सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।     मेले में VIP दर्शन की व्यवस्था हटाई गई है ताकि सभी श्रद्धालु समान रूप से दर्शन कर सकें। खाटू श्याम मेले में पहुंचने के लिए दिल्ली–जयपुर से ट्रेन और बस रूट खाटू श्याम वार्षिक मेले के लिए रेलवे और राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मेला के दौरान यात्रा को सहज बनाने के लिए रेलवे विभाग विशेष इंतजाम किए हैं। फाल्गुन मेले का प्लान बनाने वालों के लिए खुशखबरी, शुरू हो रही हैं स्पेशल ट्रेनें खाटू श्यामजी के लिए यह है ट्रेन रूट भारतीय रेलवे ने मेले के लिए दो मुख्य विशेष ट्रेनें चलाई हैं। एक कुरुक्षेत्र से फुलेरा और दूसरी फुलेरा से दिल्ली सराय रोहिल्ला मार्ग पर, ताकि दिल्ली और आस-पास के इलाकों से श्रद्धालु आराम से पहुंचना सुनिश्चित कर सकें। इसके अलावा मेले के दौरान रोजाना कई ट्रेनें रिंगस स्टेशन तक चलेंगी, जिससे भक्तों को हर 20 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। रींगस से मंदिर तक का सफर मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए रींगस रोड स्थित श्याम वाटिका के पीछे लगभग 40 बीघा भूमि पर तीन अतिरिक्त बैकअप ब्लॉक भी तैयार किए गए हैं. इनका उपयोग तब किया जाएगा जब लखदातार मैदान और चारण मेला मैदान में श्रद्धालुओं की संख्या क्षमता से अधिक हो जाएगी. मेले के दौरान पदयात्रियों को रींगस से खाटूधाम तक करीब 38 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होगी. सुरक्षा के लिहाज से इस पूरे मार्ग को ‘नो व्हीकल्स जोन’ घोषित किया जाएगा, ताकि भक्तों को मार्ग में किसी वाहन के कारण परेशानी न हो. 18 किलोमीटर का जिगजैग मार्ग खाटू पहुँचने के बाद भी दर्शन की राह आसान नहीं होगी. प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 6 ब्लॉकों के भीतर कुल 18 किलोमीटर लंबा जिगजैग मार्ग बनाया है. इस सर्पाकार मार्ग से गुजरते हुए ही भक्त मंदिर तक पहुँच पाएंगे. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने लखदातार मैदान में रंग-रोगन, रोशनी और पेयजल जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं का कार्य पूरा कर लिया है. मेले की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी ताकि उत्सव शांतिपूर्वक संपन्न हो सके. खाटू के लिए यह है बस रूट दिल्ली और जयपुर से हीरापुरा बस स्टैंड तथा अन्य रोडवेज डिपो से खाटू धाम के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। जयपुर से रींगत होते हुए स्थानीय बसें या साझा टैक्सी से खाटू तक की यात्रा आसान रहती है। इस बार जयपुर से सभी बसें अजमेर रोड स्थित नए बस स्टैंड से संचालित हो रही हैं। मेले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व फाल्गुन मेला खाटू श्याम जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख उत्सव है। पुराणों के अनुसार श्याम जी हारे हुए व्यक्ति के सहारा देने वाले … Read more

वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है सरकार: कृषि मंत्री कंषाना

वर्षा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है राज्य सरकार : कृषि मंत्री  कंषाना भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और हर परिस्थिति में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई वर्षा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के नुकसान की राहत राशि देने के लिए गंभीरता से कार्य किया जाएगा। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि जिन-जिन जिलों में वर्षा और ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं, वहां तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्वे कार्य पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को राहत राशि का भुगतान समय पर किया जा सके। मंत्री  कंषाना ने आश्वासन दिया कि किसी भी किसान को नुकसान की स्थिति में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। कृषि मंत्री  कंषाना ने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें तथा स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें। सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को शीघ्र राहत प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी किसान कल्याण के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।  

रोबोडॉग विवाद पर चिराग पासवान का सख्त रुख, समिट खत्म होते ही जांच और एक्शन

पटना केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एआई समिट में प्रदर्शित चीनी रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'बड़ी लापरवाही' बताया। उन्होंने कहा कि समिट समाप्त होने के बाद सरकार इस मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी। गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह विवाद इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सामने आया, जहां एक रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित बताया गया था। बाद में स्पष्ट हुआ कि यह प्रोडक्ट चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा विकसित यूनिट्री जीओ2 मॉडल है। पत्रकारों से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय द्वारा किसी प्रोडक्ट को प्रदर्शित कर उसका स्वामित्व गलत तरीके से लेना पूरी तरह अनुचित है। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि समिट एक वैश्विक मंच है और पूरी दुनिया की नजर इस पर रहती है। ऐसे घटनाक्रम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने उस प्रतिनिधि के बयान का भी जिक्र किया, जिसने रोबोटिक डॉग के बारे में जानकारी दी थी। चिराग ने कहा कि वह शब्दों के चयन से स्थिति को उचित ठहराने की कोशिश करती दिखीं और बाद में इसे गलतफहमी बताया गया। जब देश में इतने बड़े स्तर का एआई सम्मेलन हो रहा हो, तब इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय बन जाती हैं। केंद्र सरकार ने भी अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि ऐसे मंचों पर केवल वास्तविक और प्रमाणिक कार्यों को ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। विवाद उस समय शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय के पवेलियन में मौजूद कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि प्रदर्शित रोबोटिक डॉग विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है और उसका नाम 'ओरियन' बताया। बाद में उन्होंने इसे संचार की गलती बताया। विश्वविद्यालय ने भी आधिकारिक बयान जारी कर भ्रम के लिए माफी मांगी और कहा कि संबंधित प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी नहीं थी और उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: MYH अस्पताल की HIV यूनिट तक पहुंचीं बिल्लियां

इंदौर महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में एक बार फिर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। इस बार एचआइवी संक्रमित मरीजों की यूनिट और दवा कक्ष तक बिल्लियों की पहुंच देखी गई। इतना ही नहीं, अस्पताल के ओपीडी परिसर में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म भी दिया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब करीब छह महीने पहले इसी अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों द्वारा दो नवजातों को कुतरने से उनकी मौत हो गई थी। ओपीडी में बिल्ली ने दिए तीन बच्चे अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में एक बिल्ली ने तीन बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद ओपीडी और आसपास के हिस्सों में बिल्लियों की आवाजाही लगातार देखी गई। अस्पताल प्रबंधन ने तीन में से दो बच्चों को रेस्क्यू कर लिया है, जबकि तीसरे को पकड़ने की कार्रवाई जारी है। एचआईवी दवा कक्ष तक पहुंचीं बिल्लियां जानकारी के अनुसार एचआईवी संक्रमित मरीजों को हर महीने मुफ्त दवाएं देने वाले दवा कक्ष में भी बिल्लियों के घूमने और गंदगी फैलाने की शिकायत मिली है। इसी कक्ष में नवजात शिशुओं को दी जाने वाली सेप्ट्रोन दवाएं भी रखी जाती हैं। इससे संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एआरटी केंद्र के कर्मचारी करते मिले देखभाल अस्पताल के एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) एकीकृत परामर्श केंद्र के कुछ कर्मचारी बिल्लियों की देखभाल करते नजर आए। इससे दवा कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक करीब छह महीने पहले अस्पताल के नवजात वार्ड में चूहों ने दो बच्चों को कुतर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी अस्पताल परिसर में जानवरों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने अस्पताल की स्वच्छता और प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रबंधन की कार्रवाई और जुर्माना मामले संज्ञान में आते ही हाउसकीपिंग कंपनी को परिसर खाली कराने और बिल्लियों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। एमजीएम डीन डा. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि इस मामले में जीरो टालरेंस की नीति अपना रहे हैं। ओपीडी दोपहर दो बजे के बाद बंद हो जाती है, इसलिए संक्रमण का खतरा नहीं है। साथ ही पेस्ट और एनिमल कंट्रोल एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जाएगी। कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

भीषण सड़क हादसा: बसों की भिड़ंत में टेंपो के उड़े टुकड़े, 2 लोगों ने तोड़ा दम

पटना बिहार के दरभंगा में गुरुवार को तेज रफ्तार और लापरवाही ने दो जिंदगियां खत्म कर दी। ओवरटेक के दौरान दो तेज रफ्तार बसों की टक्कर से टेंपो के परखच्चे उड़ गए और उस पर सवार दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। मंजर देख लोग सिहर उठे। बसों के बीच ओवरटेक की वजह से हुआ हादसा मिली जानकारी के अनुसार, घटना सोनकी थाना क्षेत्र के ग्रीन सिटी के समीप की है। मृतकों की पहचान बहेड़ा थाना क्षेत्र के रढ़ियाम गांव निवासी गंगा साफी (37 वर्ष) और जमालपुर के खैसा गांव निवासी टेंपो चालक जदी अहमद (30 वर्ष) के रूप में हुई है। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि  कुशेश्वरस्थान से दरभंगा की ओर आ रही दो बसें दरभंगा–बेनीपुर स्टेट हाईवे-56 पर खतरनाक तरीके से एक-दूसरे को ओवरटेक कर रही थीं। इसी दौरान संतुलन बिगड़ा और तेज रफ्तार बस ने आगे चल रहे टेंपो को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि टेंपो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार दोनों व्यक्तियों ने मौके पर दम तोड़ दिया। पुलिस ने दोनों बसों और क्षतिग्रस्त टेंपो को कब्जे में लिया हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही सोनकी थानाध्यक्ष शशिकांत झा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों बसों और क्षतिग्रस्त टेंपो को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए दरभंगा मेडिकल  पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और दोषी बस चालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।