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प्रवर श्रेणी के दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए शासकीय सीधी भर्ती में आरक्षण सुनिश्चित

रायपुर, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के तहत राज्य शासन के समस्त विभागों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों की प्रत्येक सरकारी स्थापना में सीधी भर्ती से भरे जाने वाले प्रवर श्रेणी के दिव्यांगजनों के लिए पदों का चिन्हांकन कर पद आरक्षित किए जा रहे हैं। आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य शासन के सभी विभागों के सचिव शामिल हुए।   बैठक में राज्य शासन के सभी विभागों के अंतर्गत सीधी भर्ती के प्रकम में भरे जाने वाले प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की लोक सेवाओं एवं पदों में दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांजन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आरक्षण निर्धारित किया जाएगा। बैठक में विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले कार्यालयों में अंतिम रूप में पदों के चिन्हांकन हेतु विभागीय सचिवों से विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सभी विभागों के भारसाधक सचिव, विभागाध्यक्ष सहित विभिन्न विभागों द्वारा दिव्यांगजनों के लिए पदों के चिन्हाकन हेतु नियुक्त नोडल अधिकारी शामिल हुए।

डिजिटल भुगतान पर खतरा! UPI फ्रॉड को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली ऑनलाइन पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच दिल्ली में UPI फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने UPI फ्रॉड रोकने तथा पीड़ितों को तुरंत राहत देने के लिए ठोस गाइडलाइंस बनाने की मांग पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी की घटनाएं भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच रही हैं। अदालत ने वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने को कहा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि UPI फ्रॉड रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए कौन-सी व्यवस्था मौजूद है। दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी पर चिंता जताई याचिकाकर्ता पंकज निगम ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि फरवरी 2024 में ऑनलाइन किराये का फ्लैट ढूंढते समय उनसे 1.24 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। उन्होंने कहा कि मकान किराये पर दिलाने के नाम पर आरोपियों ने डिजिटल पेमेंट के जरिए पैसे ट्रांसफर करवा लिए, जिसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हुआ। याचिकाकर्ता के अनुसार, घटना की शिकायत संबंधित एजेंसियों से करने के बावजूद न तो उनकी रकम वापस मिली और न ही आरोपियों के बारे में कोई ठोस जानकारी दी गई। उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसे मामलों में आम लोग खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करते हैं, क्योंकि न तो त्वरित कार्रवाई होती है और न ही पीड़ितों को समय पर राहत मिलती है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि UPI और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की ठगी से बचाया जा सके और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। क्या कहा याचिका में ? याचिका में कहा गया है कि फर्जी या अधूरी जानकारी वाले बैंक खातों के जरिए होने वाली ठगी रोकने के लिए केवल फुल KYC (पूर्ण सत्यापन) वाले बैंक अकाउंट को ही UPI से जोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके अलावा एक यूनिफाइड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म बनाने की भी मांग की गई है, जो साइबर क्राइम हेल्पलाइन को UPI ऐप, बैंकों, पेमेंट कंपनियों और टेलीकॉम सेवाओं से जोड़ सके। इससे ठगी के शिकार लोगों को अलग-अलग जगह भटकने के बजाय एक ही मंच पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिल सकेगी। याचिका में कहा गया है कि ऐसा सिस्टम होने पर फ्रॉड की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुंचेगी और संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोका जा सकेगा। अदालत ने इस मामले में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से जवाब मांगा है, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली को और सुरक्षित बनाया जा सके। याचिका दाखिल कर SOP बनाने की मांग UPI फ्रॉड के बढ़ते मामलों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में और भी कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि 10 लाख रुपये तक के UPI फ्रॉड मामलों को ई-जीरो FIR सिस्टम में शामिल किया जाए, ताकि पीड़ित को तुरंत कानूनी कार्रवाई का लाभ मिल सके। याचिकाकर्ता का कहना है कि गंभीर मामलों में अपने-आप FIR दर्ज होने की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे पुलिस कार्रवाई में देरी न हो और आरोपियों तक जल्दी पहुंचा जा सके। इससे साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती “गोल्डन टाइम” का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा, जब रकम को ट्रैक या फ्रीज करना संभव होता है। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में अलग नियमों के कारण जांच में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए पूरे देश में एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एक समान व्यवस्था होने से एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर होगा और पीड़ितों को समय पर राहत मिल सकेगी। मामले में अदालत पहले ही वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से विस्तृत जवाब मांग चुकी है, ताकि डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस दिशा-निर्देश तय किए जा सकें।

CM सैनी का विपक्ष को जवाब- ’24 फसलों पर MSP नेशनल रिकॉर्ड’

पंचकूला. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुवार को मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) पर खरीद को लेकर विपक्ष को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि राज्य में 24 फसलों की खरीद एक 'नेशनल रिकॉर्ड' है और यह एक सच्चाई है, नारा नहीं। दरअसल, कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भारतीय जनता पार्टी सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया है कि 24 फसलों के लिए MSP दिया जा रहा है और आरोप लगाया है कि हरियाणा में इतनी फसलें नहीं उगाई जाती हैं। इस पर सैनी ने नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे पर डेटा-बेस्ड चर्चा की जाए तो सच्चाई साफ हो जाएगी। सैनी ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि किसान प्रदर्शनों में फंसे रहें, जबकि सरकार उनकी खुशहाली और राज्य की तरक्की पक्का करने के लिए काम कर रही है। विपक्ष पर जमकर बरसे सैनी हरियाणा विधानसभा में बजट सेशन से एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने कहा ने MSP पर 24 फसलों की खरीद एक नेशनल रिकॉर्ड है… यह कोई नारा नहीं बल्कि एक सच्चाई है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए सैनी ने कहा कि जब कोई पॉलिटिकल पार्टी जनता के बीच अपनी पहचान खोने लगती है, तो वह असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए आरोपों का सहारा लेती है। मुख्यमंत्री ने पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार पर BJP के खिलाफ हाल ही में लगाए गए "ऑपरेशन लोटस" के आरोपों को लेकर भी निशाना साधा, और उन्हें बेबुनियाद और "पॉलिटिकल फ्रस्ट्रेशन" की निशानी बताया। प्रस्तावित भारत-US ट्रेड डील पर सैनी ने कहा कि इससे हरियाणा जैसे खेती वाले राज्यों के किसानों को बासमती चावल, डेयरी प्रोडक्ट्स, फलों, सब्जियों और प्रोसेस्ड फूड के लिए अमेरिकी मार्केट तक पहुंच खुलने से फायदा होगा। इसी तरह, यूरोपियन यूनियन के साथ व्यापार से टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और हेवी इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर में एक्सपोर्ट के मौके बनेंगे, जिससे राज्य की इकॉनमी मजबूत होगी।

बिजली निगम को एक्साइज ड्यूटी राशि को लेकर 25 साल बाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लगभग 25 वर्ष पुराने विवाद  पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हरियाणा की बिजली प्रसारण कंपनी को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने केंद्र 58 सरकार को निर्देश दिया है कि विलंब ही से लौटाई गई उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) की राशि पर निर्धारित दर से ब्याज का भुगतान किया जाए। यह मामला हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल) से जुड़ा है, जिसने 1980 के दशक के अंतिम वर्षों में स्टील स्ट्रक्चर टावरों के निर्माण (फैब्रिकेशन) पर जारी कारण बताओ नोटिस के बाद पूर्व विरोध दर्ज कराते हुए लगभग 30 लाख रुपये की एक्साइज ड्यूटी जमा यह कराई थी। कंपनी का कहना था कि यह राशि दबाव में और आपत्ति के साथ जमा कराई गई थी। हाई कोर्ट ने निगम की याचिका स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि कंपनी को केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम 1944 की धारा 11 बीबी के तहत ब्याज पाने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि जब अपीलीय प्राधिकारी ने 1987 और 1990 में कंपनी के पक्ष में निर्णय दे दिया था, तब विभाग को समय पर रिफंड जारी करना चाहिए था। रिकार्ड के अनुसार, बिजली निगम ने मामले को आगे अपीलीय न्यायाधिकरण तक ले जाकर संदर्भआवेदन दायर किए, जो अंततः खारिज हो गए। इसके बावजूद 1989 और 1990 के दौरान कंपनी द्वारा कई पत्र लिखे जाने के बाद भी रिफंड राशि 29 दिसंबर 2000 को स्वीकृत की गई। ब्याज का प्रश्न अनिर्णीत ही रहा, जिसके कारण मुकदमा वर्षों तक चलता रहा। अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि चूंकि राशि विरोध स्वरूप जमा की गई थी और अपीलीय आदेश कंपनी के पक्ष में थे, इसलिए विभाग की ओर से की गई देरी का खामियाजा याचिकाकर्ता पर नहीं डाला जा सकता।

करोड़ों की हेरोइन सहित नशा तस्कर गिरफ्तार

फिरोजपुर. सीआईए स्टाफ फिरोजपुर की पुलिस ने पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम तहत कार्रवाई करते हुए एसएसपी फिरोजपुर भूपिन्द्र सिंह के दिशा निर्देशानुसार नशा तस्करों के खिलाफ चलाई मुहिम तहत गश्त व चैकिंग के दौरान मिली सूचना के अधार पर करोड़ों रुपए की डिलीवरी देने के लिए आए नशा तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से भारी मात्रा में हेरोइन बरामद करने में सफलता हासिल की है। उक्त मामलें में पुलिस ने गिरफ्तार किए नशा तस्कर के खिलाफ थाना आरफके में एनडीपीएस एक्ट तहत मामला दर्ज किया है। जानकारी देते हुए एसएसपी फिरोजपुर भूपिन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस ने नशा बेचने वाले लोगों को गिरफ्तार करने के लिए उच्चाधिकारियों व पंजाब सरकार के निर्देशानुसार मुहिम चलाई हुई है। उन्होंने बताया कि उक्त मुहिम तहत थाना सीआईए स्टाफ फिरोजपुर के इंस्पैक्टर मोहित धवन को बीते दिन गश्त व चैकिंग के दौरान फिरोजपुर से मल्लांवाला रोड परगांव अटारी के नजदीक सूचना मिली थी कि सोनू सिंह पुत्र महिन्द्र सिंह वासी गांव किलचे हालवासी गांव भंबा सिंह वाला उर्फ मतड़ हेरोइन बेचने का आदि है और आज भी वह हेरोइन लेकर आगे डिलीवरी देने के लिए कच्चा बांध गांव अक्कू वाला में खड़ा किसी का इंतजार कर रहा है। जिस पर पुलिस ने छापेमारी करके सोनू को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 6 किलो 38 ग्राम हेरोइन बरामद की है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने गिरफ्तार नशा तस्कर सोनू से पूछताछ कर रही है कि वह हेरोइन की डिलीवरी किसे देने के लिए आया था और अभी इस मामलें में ओर भी अहम सुराग हाथ लगने की संभावना है, जिसका खुलासा आने वाले समय में किया जाएगा। 

पंजाब सरकार से कैदियों की माफी पर विधानसभा कमेटी से रखी मांग

लुधियाना. पंजाब विधानसभा की शेड्यूल्ड कास्ट,शेड्यूल्ड ट्राइब्स व बैकवर्ड क्लास के वेलफेयर के लिए बनी कमेटी ने ताजपुर रोड की सैट्रल जेल, ब्रौस्टल जेल व महिला जेल, का निरीक्षण किया। और कैदियों/हवालातियों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। कैदियों ने कमेटी को बताया कि उन्हें लंबे समय से माफी नहीं मिली है। इसलिए माफी दी जानी चाहिए। जेलों की बैरको, किचन,खाने की सर्विस, टॉयलेट,साफ-सफाई व दूसरी सुविधाओं का अच्छी तरह से निरीक्षण किया। उन्होंने जेलों के अंदर किचन के खाने का स्वाद भी चखा। शऔर कैदियों से बातचीत की। उन्होंने साफ़-सफ़ाई बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।खासकर किचन में,जहाँ उन्होंने खुद कैदियों/हवालातियों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी और सफ़ाई की जाँच की।उन्होंने जेल हॉस्पिटल का दौरा किया। ओएटी क्लिनिक,एच आई वी, टीबी के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी आर्ट व काउंसलिंग प्रोग्राम जैसी मेडिकल सर्विस के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित की। उन्होंने कैदियों के लिए काफ़ी वॉशरूम और उनकी रेगुलर सफ़ाई और मेंटेनेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।जेल के आस-पास के इंडस्ट्रियल एरिया को ध्यान में रखते हुए, चेयरपर्सन ने उस इंडस्ट्री में इस्तेमाल हो रहे कैमिकल की पहचान करने और डिज़ास्टर की तैयारी के हिस्से के तौर पर उनके एंटीडोट्स आदि जैसे इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान का पता लगाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।उन्होंने बेकरी, बढ़ईगीरी,वेल्डिंग, पावरलूम, बुनाई लकड़ी का काम और टेलरिंग वर्कशॉप जैसे वोकेशनल सेक्शन का भी दौरा किया। उन्होंने सीसीटीवी कंट्रोल रूम और दूसरी मनोरंजन की जगहों का भी इंस्पेक्शन किया। जेल अधिकारियों ने उन्हें कैदियों के स्किल डेवलपमेंट के लिए उपलब्ध अलग-अलग इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (आईटीआई) कोर्स के बारे में बताया।जेल अधिकारियों के साथ कमेटी सदस्यों ने एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसीजर का रिव्यू किया।और प्रोसेस को आसान बनाने के लिए निर्देश दिए।ताकि यह पक्का हो सके। कि कैदी/हवालाती तय प्रोटोकॉल के मुताबिक अपने परिवार वालों से मिल सकें।कमेटी के दूसरे सदस्यों ने महिला जेल की कैदियों से बातचीत की। और उनसे जेल हॉस्पिटल में दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं,परोसे जा रहे खाने और उनकी कोर्ट में चल रहे केस के बारे में जानकारी ली।उन्होंने जेल के कैदियों को बताया कि जो कैदी अपने केस के लिए खुद वकील नहीं रख सकते, वह जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी,से निशुलक कानूनी सहायता ले सकते हैं। उन्होंने जेल के कैदियों से कहा कि निशुलक लीगल एड लेने के लिए वह जेल में खुले लीगल एड क्लिनिक में जाकर लीगल एड फॉर्म भर सकते हैं। विधानसभा कमेटी ने आगे बताया कि महिला जेल की कैदियों/हवालातियां के अधिकारों का ध्यान रखा जाए।चेयरपर्सन व कमेटी मेंबर्स ने महिला जेल में महिला कैदियों के साथ रह रहे छोटे बच्चों से भी मुलाकात की। उन्हें पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया।चेयरपर्सन व कमेटी मेंबर्स ने जाने से पहले जेल के विजिटर्स रजिस्टर में अपने सुझाव भी लिखे।इस अवसर पर असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) और सब डिविजनल मजिस्ट्रेट श्रीमती पायल गोयल, एडीजीपी (जेल) श्री अरुण पाल सिंह, डीआईजी पटियाला सर्कल (जेल)एसएस मंड,सेंट्रल जेल के सुपरिटेंडेंट कुलवंत सिंह सिद्धू,डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट हरबंस सिंह, ब्रौस्टल जेल के सुपरिटेंडेंट गुरप्रीत सिंह, महिला जेल के सुपरिटेंडेंट दलबीर सिंह काहलो,डिप्टी जेल सुपरिटेंडेंट रवनीत कौर के अतिरिक्त जिले के सिविल व पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन के दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे।

ट्राईसिटी में 1463 करोड़ रुपये के रिंग रोड को केंद्र की मंजूरी

चंडीगढ़. ट्राईसिटी को ट्रैफिक की समस्या से राहत मिलने जा रही है। केंद्र की ओर से ट्राईसिटी रिंग रोड परियोजना को मंजूरी दे दी गई। योजना के तहत 1,463.95 करोड़ की लागत से 6-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर बनाया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस की जानकारी दी। भारतीय जनता पार्टी के महासचिव तरुण चुग ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्री गडकरी का आभार व्यक्त किया है। चुग ने कहा कि यह निर्णय पंजाब के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम है। चुग ने कहा कि इस परियोजना से मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख जंक्शनों पर वर्षों से बनी ट्रैफिक समस्या में ठोस राहत मिलेगी। एनएच-44, एनएच-205A और एनएच-152 पर दबाव कम होगा और हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र की ओर जाने वाली आवाजाही तेज और सुगम बनेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की व्यापक सोच का हिस्सा है। चुग ने बताया की इस कारिडोर से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और लाजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा लाभ होगा। किसानों, व्यापारियों, उद्यमियों और युवाओं को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी, जिससे समय और ईंधन की बचत के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

मॉडर्न जेल के ऊपर तंबाकू और सिगरेट लेकर उड़ते ड्रोन को पत्थर मारकर गिराया

कपूरथला. पंजाब के कपूरथला में देर रात मॉडर्न जेल परिसर के ऊपर एक ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया। हालांकि, जेल अधिकारियों ने ड्रोन को गिरा दिया। अगली सुबह सर्च करने पर एक सिक्योरिटी टावर के पास भूरे रंग का ड्रोन मिला, और उससे तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और एक लाइटर बरामद हुआ। पंजाब की जेल में ड्रोन से सामान पहुंचाने का यह पहला मामला है, जिससे जेल प्रशासन की चिंताए बढ़ गई है। बेशक जेल प्रशासन की मुस्तैदी ने ड्रोन से सामान अंदर पहुंचाने के मंसूबे को नाकाम कर दिया है, लेकिन यह जेल प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है। एसपी जेल के अनुसार, ड्रोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और अज्ञात के खिलाफ प्रीजन एक्ट, बीएनएस और एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। सुभानपुर रोड पर थेह कांजला स्थित मॉडर्न जेल कपूरथला के सहायक सुपरिटेंडेंट धीरज कुमार ने थाना कोतवाली की पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 17/18 की दरमियानी रात को वह ड्यूटी पर तैनात थे। रात करीब 11:30 बजे गश्त के दौरान जेल की सीमा के ऊपर एक ड्रोन मंडराता देखा। उन्होंने तुरंत तत्परता दिखाते हुए ड्रोन को गिरा दिया। फिर जेल गार्ड के साथ मिलकर पूरे जेल परिसर की तलाशी शुरू कर दी, लेकिन अंधेरा होने के कारण ड्रोन नहीं मिला। अगली सुबह होने पर उन्होंने जेल गार्ड के साथ फिर से पूरे जेल परिसर की तलाशी ली शुरू कर दी। सुबह करीब आठ बजे सुरक्षा टावर नं.9 के पीछे बैरक नं.3 के पास मिनी 255 कंपनी का एक भूरे रंग का ड्रोन पड़ा मिला। उसके साथ टेप से कुछ सामान लिपटा हुआ था, जिसे खोलने पर उसमें से तंबाकू, सिगरेट, रोलिंग पेपर और पांच लाइटर बरामद हुए। एसपी जेल श्यामल ज्योति ने बताया कि ड्रोन के आपरेटिंग कंट्रोल का पता लगाने के लिए उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि ड्रोन कहां से आया है। इसके अलावा उन्होंने जेल के अंदर चौकसी बढ़ा दी है। इस तरह की गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

शादी का झांसा देकर नवयुवती का शारीरिक शोषण का आरोपी कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार

 अनूपपुर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर मोती उर रहमान जी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम जी एवं एस.डी.ओ.पी. नवीन तिवारी जी के मार्गदर्शन में कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा 19 वर्षीय नवयुवती को शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने के अपराध में आरोपी शिवम महरा निवासी ग्राम हथगला थाना बुढार जिला शहडोल को गिरफ्तार किया गया है। थाना कोतवाली अनूपपुर क्षेत्रान्तर्गत निवासी 19 वर्षीय नवयुवती द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि शिवम महरा निवासी ग्राम हथगला जिला शहडोल ने मित्रता की और शादी करने का विश्वास दिलाकर पिछले एक साल से शारीरिक शोषण किया जा रहा है। जो उक्त रिपोर्ट पर तत्काल अपराध क्रमांक 105/26 धारा 69 बी.एन.एस. पंजीबद्ध किया जाकर टी. आई. कोतवाली निरीक्षक अरविन्द जैन के नेतृत्व में उपनिरीक्षक सरिता लकड़ा, प्रधान आरक्षक शेख रसीद , आरक्षक अब्दुल कलीम की टीम के द्वारा आरोपी शिवम महरा पिता विजय महरा उम्र 21 साल निवासी ग्राम हथगला थाना बुढार जिला शहडोल को गिरफ्तार किया गया है।

पंजाब में जल संकट के बीच चार दोस्तों ने लगाए 1500 वर्षा जल संचयन प्लांट

जालंधर. ‘बिन पानी सब सून’, ‘पवन गुरु पानी पिता, माता धरत महत्त’ सरीखे श्लोक। जिनका जिक्र धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। यहीं प्रेरणा अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने अनुयायियों को देते है। जिसके तहत श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने प्रवचनों में बताया है कि ‘प्रकृति का सम्मान करना और उसकी रक्षा करना ही सच्ची भक्ति है’। उनकी इस सोच को शहर के चार कारोबारियों ने ना केवल जीवन में अपनाया है, बल्कि इसे मिशन बनाकर इस दिशा में कार्य कर रहे है। इसके लिए उन्होंने द वरुण मित्रा कंपनी की शुरूआत की। जिसके बैनर तले वैज्ञानिक तरीके से वर्षा जल संचयन प्रणालियों को डिजाइन तथा इंस्टाल किया जा रहा है। कंपनी के हर प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है। यह सफर 2012 में शुरू हुआ था। जिसके तहत 14 वर्षों में अभी तक देश भर में 1500 से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जा चुके है। यह मिशन केवल वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि श्री श्री रविशंकर जी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर दी जा रही प्रेरणा के तहत समाज को भी इन चार दोस्तों द्वारा जागरूक किया जा रहा है। 2012 में हुई थी कंपनी की शुरुआत द वरुण मित्रा लेबर एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत 2012 में हुई थी, बाद में इसे द वरुण मित्रा कंपनी के रूप में विकसित किया गया। संस्था द्वारा लगवाए जा रहे प्लांट्स की 1500 से लेकर तीन लाख लीटर तक है, जो वर्षा के पानी को स्टोर करने और भू-जल स्तर को रिचार्ज करने में मदद करते हैं। इन प्लांट्स के जरिए अब तक करोडो़ं लीटर पानी रिचार्ज किया जा चुका है। कंपनी के संचालक रमन कुमार बठला, गुरमीत सिंह गोल्डी, राजेश शर्मा व परमवीर सिंह के मुताबिक वर्षा के पानी को जमीन के नीचे आरसीसी टैंक्स में स्टोर किया जाता है, जो 3 से 4 दिनों में स्थापित हो जाते हैं। सामाजिक जिम्मेदारी का कर रहे निर्वाह रमन कुमार बठला ने कहा कि उनका मकसद आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध करवाना है। जिस रफ्तार के साथ जल स्तर गिर रहा है, समाज में चेतना ना आई तो परिणाम गंभीर होने तय है। उनके सहित चारों दोस्तों का अपना-अपना कारोबार है। ऐसे में वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगवाना व्यावसायिक पहल नहीं सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह किया जा रहा है। पर्यावरणीय जागरूकता फैलाने के बीच बिना किसी लाभ के इस प्रोजैक्ट को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू प्रोजैक्ट में 50 हजार से लेकर एक लाख लीटर पानी की क्षमता वाले प्लांट लगाए जा रहे है। इसी तरह कमर्शियल प्रोजैक्ट में एक से तीन लाख लीटर पानी क्षमता वाले प्लांट लगाए जा रहे है। देश के कई नामी संस्थानों में लगा चुके है प्लांट द वरुणा मित्रा द्वारा देश के कई नामी संस्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जा चुके है। जिसमें विश्व विख्यात पवित्र धार्मिक स्थल श्री दरबार साहिब अमृतसर, पंजाब के एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ श्री, आदमपुर एयरपोर्ट, टाटा कैंसर अस्पताल मोहाली, सोनालिका कंपनी, बस स्टैंड पटियाला, जिला प्रशासकीय परिसर जालंधर, गोरखनाथ मंदिर बठिंडा सहित कई नामी जगहों पर प्लांट लगाकर ना केवल जल संरक्षण की पहल की गई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। विशेष नीति बनाए जाने की जरूरत इस बारे में रमन कुमार बठला बताते है कि जल संरक्षण परियोजनाओं के लिए विशेष नीति बनाए जाने की जरूरत है। जिसमें सब्सिडी, टैक्स में छूट के साथ प्लांट लगवाने का प्रोत्साहन जरूरी है। जबकि, इस समय इस सामाजिक प्रोजैक्ट पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। जिसमें राहत की जरूरत है। इसके अलावा नए निर्माणों, खासकर शहरी क्षेत्रों में, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करने, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल के तहत सहयोग देना चाहिए। इसी तरह डमी प्लांट लगाकर औपचारिकता पूरी करने वाले संस्थानों की तलाश करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को एक मानिटरिंग एजेंसी बनानी चाहिए, जो प्लांट लगाने को सार्टिफाइट तो करे ही साथ ही इमारतों में लगाए जा रहे प्लांटस को सुनिश्चित किए जाने का काम भी करे। इसके अलावा सोलर की तर्ज पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने पर सब्सिडी तथा एनजीओ या कम्यूनिटी स्तर पर प्लांट लगवाने के लिए पहल किए जाने की अहम जरूरत है।