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हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: मृतक शिक्षाकर्मी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता

बिलासपुर. हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि यदि दिवंगत पंचायत शिक्षक का आश्रित शिक्षक पद की अनिवार्य योग्यता नहीं रखता, तो केवल इस आधार पर उसकी अर्जी खारिज करना अनुचित है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने दुर्ग जिला पंचायत के पुराने आदेश को रद्द करते हुए प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे याचिकाकर्ता की शैक्षणिक योग्यता के अनुसार किसी भी स्वीकृत और रिक्त चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करें। याचिकाकर्ता राकेश कुमार वर्मा (30 वर्ष) के पिता चमन लाल वर्मा दुर्ग जिले में 'सहायक शिक्षक पंचायत के पद पर कार्यरत थे। 15 अक्टूबर 2015 को उनके आकस्मिक निधन के बाद राकेश ने 23 सितंबर 2016 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, जिसे 30 जुलाई 2018 को खारिज कर दिया गया। प्रशासन का तर्क था कि याचिकाकर्ता के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि विभाग की अनुकंपा नीतियां लगातार बदलती रहीं। 2014 में दिवंगत शिक्षक के आश्रित को सीधे सहायक शिक्षक बनाया जा सकता था, जबकि 2016 में नियम बदलकर ''''ग्राम पंचायत सचिव'''' के रिक्त पद पर नियुक्ति का प्रावधान किया गया। हाई कोर्ट ने जिला पंचायत के आदेश को कानूनन गलत पाया और कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को संकट से उबारना है। अदालत ने चार महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

स्वैच्छिक ट्रांसफर में शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें, ई-अटेंडेंस के चलते रिक्त पद भी दिखे ‘रिजर्व’

भोपाल. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू किए जाने से पहले ही शिक्षकों के सामने नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। प्रदेश के कई शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को स्थानांतरण पोर्टल पर रिजर्व दर्शाए जाने से हजारों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वहीं पोर्टल पर आवेदन की तैयारी कर रहे अनेक शिक्षकों को 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता भी बड़ी बाधा बन रही है। शिक्षकों का कहना है कि दो दिन पहले तक पोर्टल पर जो पद रिक्त दिखाई दे रहे थे, वे अब उपलब्ध सूची से गायब हो गए हैं। इससे उन्हें वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी नहीं मिल पा रही है और वे अपनी पसंद के स्थानों के लिए आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। कई शिक्षकों को पोर्टल पर यह संदेश भी मिल रहा है कि उनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम होने के कारण वे आवेदन के पात्र नहीं हैं। पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल शिक्षक संगठनों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि जब तक स्थानांतरण आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो जाती और सभी पात्र शिक्षकों को विकल्प चयन का अवसर नहीं मिल जाता, तब तक रिक्त पदों को रिजर्व या भरा हुआ दर्शाना उचित नहीं है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को रिजर्व दिखाए जाने से ऐसे शिक्षक प्रभावित होंगे जो वर्षों से पारिवारिक, स्वास्थ्य या अन्य आवश्यक कारणों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे उन्हें अपनी पसंद के स्थानों का चयन करने का अवसर नहीं मिल पाएगा। नियमों में संशोधन की मांग शिक्षक संगठनों ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण पोर्टल पर सभी वास्तविक रिक्त पदों को प्रदर्शित किया जाए तथा आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी पद को अनावश्यक रूप से रिजर्व न रखा जाए। साथ ही, स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति में संशोधन करते हुए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त समाप्त करने और जनगणना ड्यूटी में संलग्न शिक्षकों को भी स्थानांतरण के लिए पात्र घोषित करने की मांग की गई है। ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो, साथ ही जनगणना वाले शिक्षकों को भी मौका दिया जाए। यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बाध्य होंगे। – उपेन्द्र कौशल,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष,शासकीय शिक्षक संगठन। जनगणना कार्य के बाद कार्यमुक्त जनगणना कार्य करने वाले शिक्षकों को स्थानांतरण से वंचित करना उनके साथ अन्याय है। यदि शासन को जनगणना कार्य प्रभावित होने की आशंका हो, तो स्थानांतरण आदेश में यह शर्त जोड़ी जा सकती है कि संबंधित शिक्षक को जनगणना कार्य पूर्ण होने के बाद ही कार्यमुक्त किया जाए। नीति में संशोधन किया जाए। – जगदीश यादव, प्रांताध्यक्ष,राज्य शिक्षक संघ।

बुंदेलखंड को मिला बड़ा तोहफा, योगी बोले—माफिया राज खत्म कर बदला क्षेत्र का चेहरा

महोबा उत्तर प्रदेश के महोबा दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 697 करोड़ रुपये से ज्यादा की 88 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इस दौरान उन्होंने बुंदेलखंड के विकास, जल संरक्षण, कनेक्टिविटी और रक्षा क्षेत्र में हो रही प्रगति का जिक्र किया. इसके साथ ही, विपक्ष पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा कि नकारात्मक सोच रखने वाले लोग विकास और सकारात्मक बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाते. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उनकी सरकार ने माफिया राज खत्म करके बुंदेलखंड को एक्सप्रेसवे, सिंचाई परियोजनाओं और इन्वेस्टमेंट से जोड़ने का काम किया है. 'माफिया को मिट्टी मे मिलाकर…' योगी आदित्यनाथ ने कहा, "गोरखगिरी एडवेंचर टूरीज्म बने, महोबा को पहचान दें, यहां निकलने वाले पत्थर को पहचान दें. यह सिर्फ नींव नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन करता है." उन्होंने आगे कहा कि जब पान की बात आती है, तो मुझे महोबा का देसवारी पान याद आता है, आल्हा ऊदल जैसे वीर पैदा हुआ गुरु गोरखनाथ ने लंबे वक्त तक पूजा की थी. इसलिए मैं यहां की परम्परा को नमन करता हूं. यहां के देशवारी पान को हमारी सरकार ने जियो टैग देकर वैश्विक मान्यता दिलाई है. सीएम योगी ने कहा, "बुन्देलखण्ड को बदनाम किया गया था. यहां पर भू और खनिज माफिया हावी थे. माफिया को मिट्टी मे मिलाकर बुंदेलखंड को एक्सप्रेस-वे से जोड़ने का काम हमारी सरकार ने किया है. मुझे महोबा ओर चरखारी में आकर खुशी होती है कि यहां जल संरक्षण का कार्य हो रहा है. माफिया को मिट्टी में मिलाने का संकल्प लिया था, आज एक्सप्रेसवे बन रहा है." उन्होंने आगे कहा कि जल संरक्षण के लिए चंदेल कालीन राजाओं की तर्ज पर आगे बढ़ाएंगे. यहां की बनी ब्रह्मोस मिसाइल जब ऑपरेशन सिंदूर में मिसाइल दागी तो पाकिस्तान घबड़ाने लगा. कबरई के जिन किसानों ने अपनी भूमि डैम के लिए दी थी, उन्हें कई साल तक मुआवजा नहीं मिला लेकिन हमने उन किसानों को मुआवजा दिया. युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों की उलटी गिनती शुरू होना तय है. 'पानी की समस्या होगी खत्म. सीएम योगी ने कहा, "प्रदेश में उत्सव के पहले उपद्रव होता था. विकास की योजनाएं ठप्प पड़ी थीं. महोबा, बांदा, झांसी हमीरपुर की कनेक्टविटी नहीं थी. भारत का सबसे लंबा शहर बुन्देलखण्ड में केन बेतवा नहर की परियोजना पूरी होने को है. केन बेतवा लिंक परियोजना पूर्ण होने से पानी की समस्या का समाधान होगा." महोबा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, "जो लोग कब्जा करने की प्रवृत्ति रखते हैं और समाज में नकारात्मकता फैलाते हैं, उनकी सोच और मानसिकता दूषित होती है. ऐसे लोगों की आत्मा और बुद्धि मलिन हो चुकी है, इसलिए वे विकास और सकारात्मक परिवर्तन को स्वीकार नहीं कर पाते. इसी नकारात्मक और स्वार्थी सोच के कारण विपक्षी दलों ने पहले प्रदेश को विकास से दूर रखा और उत्तर प्रदेश को पीछे धकेला." मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी सरकार सकारात्मक सोच, सुशासन और विकास के एजेंडे पर काम कर रही है, जबकि विपक्ष सिर्फ भ्रम और नकारात्मकता फैलाने में लगा है.    

नए नियम लागू: रेलवे में बिना लाइसेंस फेरी और गलत यात्रा पर सख्त कार्रवाई

 रांची  रेलवे में बिना टिकट और नियम तोड़कर यात्रा करने वालों पर अब पहले से अधिक सख्ती होगी। रेल मंत्रालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना के बाद ‘जन विश्वास अधिनियम’ के तहत रेलवे से जुड़े कई दंड प्रविधानों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियम 19 जून से पूरे देश में लागू हो गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव बिना टिकट यात्रा करने वालों के लिए किया गया है। अब बिना वैध टिकट या पास के सफर करने पर यात्रियों को कम से कम 500 रुपये जुर्माना देना होगा। पहले यह न्यूनतम राशि 250 रुपये थी। रेलवे ने गलत टिकट, कम दूरी का टिकट लेकर लंबी दूरी तय करने तथा गलत श्रेणी में यात्रा करने पर भी न्यूनतम दंड 500 रुपये कर दिया है। रेलवे के अनुसार, किसी दूसरे व्यक्ति के टिकट पर यात्रा करने पर अब टिकट जब्त कर लिया जाएगा और किराये के साथ न्यूनतम 500 रुपये दंड वसूला जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य रेलवे को होने वाली राजस्व हानि रोकना और यात्रियों में नियम पालन की आदत विकसित करना है। नए प्रविधानों में रेलवे परिसरों में अनुशासनहीनता और अवैध गतिविधियों पर भी शिकंजा कसा गया है। बिना लाइसेंस फेरी या सामान बेचने पर अब सीधे 2000 रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। दोबारा पकड़े जाने पर यह राशि 5000 रुपये तक पहुंच सकती है। रेलवे परिसर में भीख मांगने वालों को अब सीधे परिसर से हटाने का प्रविधान किया गया है। महिला आरक्षित कोच में प्रवेश करने वाले पुरुष यात्रियों पर 2500 रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, आरक्षित सीट खाली नहीं करने पर 2000 रुपये तक दंड देना पड़ सकता है। रेलवे परिसर में धूम्रपान करने वालों पर अब 2000 रुपये जुर्माना लगाने के साथ टिकट भी रद किया जा सकता है। रेलवे संपत्ति या यात्री सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने पर 1000 रुपये से 5000 रुपये तक दंड तय किया गया है। प्रतिबंधित यात्री क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश करने पर मौके पर ही 500 रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। नशे की हालत में यात्रियों को परेशान करने वालों पर 1000 रुपये तक जुर्माना या सामुदायिक सेवा की सजा का प्रविधान रखा गया है। खतरनाक और ज्वलनशील सामान लेकर यात्रा करने वालों पर रेलवे ने सबसे कड़ा प्रविधान लागू किया है। ऐसे मामलों में न्यूनतम 10000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा और यात्री को ट्रेन से उतारने की कार्रवाई भी की जाएगी। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गजट अधिसूचना जारी होते ही सभी नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो चुके हैं। आने वाले दिनों में टिकट जांच अभियान और अधिक तेज किए जाएंगे। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे वैध टिकट और सही श्रेणी में ही यात्रा करें, अन्यथा जांच के दौरान कड़ी कार्रवाई और बढ़ा हुआ जुर्माना देना पड़ सकता है।

80 यात्रियों से भरी बस में अचानक भड़की आग, लुधियाना में अफरा-तफरी का माहौल

लुधियाना. खन्ना के नजदीक लुधियाना–अमृतसर नेशनल हाईवे पर रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब यात्रियों से भरी एक एसी स्लीपर बस में अचानक आग भड़क उठी। बस में करीब 80 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। गनीमत रही कि चालक और कंडक्टर की सूझबूझ से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और एक बड़ा जानलेवा हादसा टल गया। जानकारी के मुताबिक, यह बस लुधियाना के समराला चौक से उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की ओर जा रही थी। जैसे ही बस बिजा गांव के पास पहुंची, पीछे के केबिन के नीचे बने लगेज कंपार्टमेंट से धुआं निकलने लगा। कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते पूरी बस इसकी चपेट में आ गई। धुआं और गर्मी ऊपर के केबिन तक पहुंचते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई यात्री घबराहट में अपनी सीटें छोड़कर इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने तो चलती बस से उतरने की कोशिश भी की, जिसमें उन्हें मामूली चोटें आईं। हालात बिगड़ते देख ड्राइवर ने तुरंत बस को सड़क किनारे रोका और कंडक्टर ने तेजी से सभी यात्रियों को नीचे उतारना शुरू किया। हालांकि, आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को अपना सामान निकालने का मौका तक नहीं मिला। आग की चपेट में आकर सभी यात्रियों का सामान जलकर राख हो गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकल विभाग की दो गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी। घटना स्थल का निरीक्षण करने पहुंचीं स्वाति तिवाना ने बताया कि सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। प्रशासन की ओर से प्रभावित यात्रियों को प्राथमिक उपचार, आवश्यक सहायता और आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक बस की व्यवस्था की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों की गहन पड़ताल की जा रही है।

खराब सड़क ने ली दो जिंदगियां, जबलपुर में तड़पती रही गर्भवती; मां और अजन्मे शिशु की मौत

जबलपुर. स्मार्ट सिटी और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जबलपुर से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने व्यवस्था की संवेदनशीलता और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर सीमा से लगे एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड की ब्रजपुरी कॉलोनी में सड़क की बदहाली एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की जिंदगी पर भारी पड़ गई। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण 22 वर्षीय ममता कुशवाहा और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता की कहानी है, जो विकास के दावे तो करती है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाती। प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन रास्ता बना सबसे बड़ी बाधा शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात महीने की गर्भवती ममता कुशवाहा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस समय उनके पति अमन कुशवाहा मजदूरी के लिए घर से बाहर गए हुए थे। घर पर मौजूद जेठानी ने तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन कॉलोनी तक पहुंचने वाली सड़क कीचड़, गड्ढों और खराब हालात के कारण वाहन चालकों ने अंदर आने से मना कर दिया। दर्द से कराह रही ममता के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। मजबूरी में उन्हें जेठानी के सहारे पैदल ही मुख्य सड़क तक जाना पड़ा। करीब दो किलोमीटर का यह सफर उनके लिए किसी यातना से कम नहीं था। हर कदम के साथ दर्द बढ़ता जा रहा था और समय हाथ से निकलता जा रहा था। अस्पतालों के बीच दौड़ती रही जिंदगी मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद किसी तरह ऑटो मिला और ममता को लेडी एल्गिन अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए तुरंत नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचने की इस जद्दोजहद में कीमती समय निकल चुका था। मेडिकल कॉलेज पहुंचते-पहुंचते गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। कुछ ही देर बाद ममता ने भी अंतिम सांस ले ली। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अब सवालों के घेरे में व्यवस्था ब्रजपुरी कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र की खराब सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ममता और उसके अजन्मे बच्चे की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विकास के दावे तब किस काम के हैं, जब एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़े और उसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़े।

सुकमा की 53 महिलाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण, बढ़ेगी आय और मजबूत होगा पर्यावरण संरक्षण

सुकमा/रायपुर. बांस के उपयोग को बढ़ावा देने और इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आय के नए साधन अर्जित करने के लिए एक नवाचार के तहत महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड निर्माण का विशेष प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाया जा रहा है l सुकमा जिले के तोंगपाल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 14 स्व-सहायता समूहों की 53 महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड निर्माण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है। बांस आधारित उत्पाद निर्माण की दी गई जानकारी प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड बनाने की तकनीक, डिजाइन और गुणवत्ता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में टिकाऊ और उपयोगी ट्री गार्ड तैयार किए जा सकते हैं। पौधों की सुरक्षा में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका प्रशिक्षण के बाद स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले बांस के ट्री गार्डों का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों, सार्वजनिक स्थलों एवं विभिन्न पौधारोपण स्थलों पर किया जाएगा। इससे पौधों को पशुओं और अन्य संभावित नुकसान से सुरक्षा मिलेगी तथा हरित आवरण बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। अतिरिक्त रोजगार और आय का अवसर बांस से निर्मित ट्री गार्डों की बढ़ती मांग महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत बनेगी। इससे स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं अतिरिक्त आय अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में भी सहायक होगी। ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगा बढ़ावा यह पहल केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की योजनाओं के अनुरूप है। बांस आधारित आजीविका गतिविधियों से जुड़कर महिलाएं ‘लखपति दीदी’ अभियान के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी भी बढ़ेगी। महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण तोंगपाल में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ हरित एवं समृद्ध समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

मकान बनाने के लिए नए मानक लागू, नक्शा पास कराने में अब सख्ती बढ़ेगी

पटना अगर आप बिहार में किसी जगह पर अपना नया मकान बनाना चाहते हैं या फिर आप कोई बिल्डर हैं और नया अपार्टमेंट बनाना चाहते हैं तो आपको यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए। राज्य में ने मकानों, रसोईघर या शौचालय की ऊंचाई कितनी हो, इसे लेकर नए मानक बनाए गए हैं। इन मानकों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई भी होगी। दरअसल बिहार में अपार्टमेंट और मकान के कमरे, रसोई, शौचालय आदि के क्षेत्रफल और ऊंचाई के मानक तय कर दिए गए हैं। कमरे की ऊंचाई कम से कम 2.75 वर्गमीटर या 9 फीट और क्षेत्रफल 9 वर्गमीटर या 97 वर्गफीट होगा। इसका उल्लंघन करने वालों पर गाज गिरेगी। नक्शा स्वीकृत नहीं होगा। नगर विकास विभाग ने भवन निर्माण उपविधि के ड्राफ्ट में इसे शामिल किया है। सम्राट चौधरी कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे पूरे बिहार में लागू किया जाएगा। ड्राफ्ट में मकान के सभी घटक(कंपोनेंट) की ऊंचाई, चौड़ाई और क्षेत्रफल के मानक निर्धारित किए गए हैं। न्यूनतम मानकों का पालन करना सभी बिल्डर या मकान निर्माण करने वालों के लिए जरूरी होगा। इसके अनुसार रहने योग्य कमरे का क्षेत्रफल कम से कम 9 वर्गमीटर या 97 वर्गफीट, चौड़ाई 2.4 मीटर या 8 फीट और ऊंचाई 2.75 मीटर या 9 फीट होगी। इसी तरह रसोई का क्षेत्रफल 4.5 वर्गमीटर, चौड़ाई 1.8 मीटर या 6 फीट और ऊंचाई 2.75 मीटर या 9 फीट होगी। केवल स्नानागार यानी बाथरूम का क्षेत्रफल कम से कम 1.8 वर्गमीटर, चौड़ाई 1.2 मीटर और ऊंचाई 2.2 मीटर होगी। केवल शौचालय का क्षेत्रफल कम से कम 1.2 वर्गमीटर, चौड़ाई 0.9 मीटर होना चाहिए। इसी तरह प्लिंथ और छत की मुंडेर की ऊंचाई भी निर्धारित की गई है। वर्तमान में निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया जाता है। बिल्डर स्वीकृत ऊंचाई में ज्यादा से ज्यादा फ्लोर बनाने के फेर में कमरे की ऊंचाई कम कर देते हैं। कई जगह आठ फुट तक ऊंचाई होती है। इससे आम लोगों को परेशानी होती है। जाहिर है नई भवन निर्माण उपविधि के लागू होने से ऐसी गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी। घटक – क्षेत्रफल (वर्गफीट) – चौड़ाई (फीट) – ऊंचाई (फीट) कमरा- 97 – 8 – 9 रसोई – 48.5 – 6 – 9 रसोई और डायनिंग – 81 – 7 – 9 केवल स्नानागार – 20 – 4 – 7.25 केवल शौचालय – 13 -3 – 7.25 शौचालय और स्नानागार – 30 – 4- 7.25 छत की मुंडेर – तय नहीं – तय नहीं – 3.95 से 4.92 फीट

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में गड़बड़ी के आरोप, SIT जांच में कई खामियां उजागर

अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी के लिए बनाई गई एसआईटी ने छह दिनों तक लगातार जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। 15 जून को अयोध्या आई एसआईटी शनिवार की शाम लखनऊ लौट गई। सोमवार की सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। बताया जा रहा है कि छह दिनों की जांच और करीब डेढ़ सौ लोगों से पूछताछ के बाद एसआईटी को यहां कदम कदम पर गड़बड़ियां और खामियां मिली हैं। हालत यह रही कि व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने एसआईटी के सामने ही एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ा है। एसआईटी को सीसीटीवी फुटेज तक डिलीट मिले हैं। सोना-चांदी के ब्योरे में तो बड़ी गड़बड़ी मिली है। बताया जा रहा है कि इसका ब्योरा ही नहीं रखा जाता था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट से पहले ही निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी कई संगीन आरोप यहां की व्यवस्था पर लगा दिए हैं। उन्होंने तो चढ़ावे में हुई चोरी को डाका तक करार दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सीएम योगी को रिपोर्ट मिलते ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है।ट्रस्ट में बड़े स्तर पर बदलाव या पूरी व्यवस्था ही बदलने की संभावना जताई जा रही है। अखिलेश यादव के आरोपों के बाद गरमाया मामला समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले राम मंदिर के चढ़ावा में चोरी का आरोप लगाकर सनसनी फैलाई थी। सात जून को अखिलेश ने एक्स पर लिखा कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है। उन्होंने कोर्ट से मामले के स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को नकार तो दिया लेकिन कुछ भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इस पर अखिलेश के हमले और तेज हो गए। अखिलेश के बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस ने भी इसे लेकर हमले तेज कर दिए। पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के आरोपों से बना दबाव अखिलेश यादव के आरोपों के बीच राम मंदिर में चढ़ावा की गिनती करने वाले पूर्व लेखा प्रभारी और विश्व हिंदू परिषद के नेता महिपाल सिंह ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए सीधे चंपत राय और गोपाल राव को निशाने पर ले लिया। महिपाल सिंह ने 2021 से ही चढ़ावा में चोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने खुद पांच लाख की चोरी पकड़ी थी। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से नोटों की गड्डियों की गलत गिनती करके चोरी हो रही थी। महिपाल सिंह ने दावा किया कि उन्होंने इस चोरी के बारे में गोपाल राव और चंपत राय को बताया। इसके बाद महिपाल को ही वहां से हटा दिया गया। सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट करा दिए गए। अचानक अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्रा अखिलेश यादव और महिपाल सिंह के आरोपों ने श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के साथ ही भाजपा पर भी दबाव बढ़ा दिया। चढ़ावा में गड़बड़ी को लेकर कई खबरें मीडिया में आने लगीं। महिपाल के वीडियो वायरल होने लगे तो चौतरफा दबाव बढ़ा। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अचानक अयोध्या पहुंचे। उन्होंने मामले को देखा, समझा। कहा गया कि दिल्ली से विशेष निर्देश पर नृपेंद्र मिश्रा यहां आए थे। उन्होंने इशारों में गड़बड़ी की बात भी मानी। बाद में खुलकर बोला तो खबली मच गई। विनय कटियार और संतों के हमले से बैकफुट पर आया ट्रस्ट इसी बीच राम मंदिर आंदोलन के हीरो रहे यहीं के पूर्व सांसद विनय कटियार और कई संतों ने भी ट्रस्ट पर हमला बोल दिया। जांच की मांग कर दी। इससे बैकफुट पर आए ट्रस्ट ने सेना के पूर्व अधिकारी को मामले की जांच सौंप दी। विनय कटियार का सीधा हमला चंपत राय पर भी था। ऐसे में ट्रस्ट की भूमिका पर ही प्रश्नचिह्न लगने लगा। कई और संत भी मैदान में खुलकर सामने आ गए। संतों ने भी ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने वाले संतोष दुबे ने तो ऐसे आरोप लगाए जिसका जवाब किसी के पास नहीं था। एसआईटी जांच का ऐलान अयोध्या के संतों और राम भक्तों के साथ ही पूर्व सांसद विनय कटियार के भी इस मामले पर आक्रामक होते ही मामला और गंभीर हो गया। ट्रस्ट के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यी एसआईटी का गठन कर दिया। लखनऊ के मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत की अगुवाई में आईजी लखनऊ रेंज किरन एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन को एसआईटी का सदस्य बनाते हुए मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई। एसआईटी को सात दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। 15 जून को एसआईटी की टीम अयोध्या पहुंची और जांच शुरू कर दी। सबसे पहले चंपत राय से जानकारी श्रीराम मंदिर पहुंचते ही एसआईटी की टीम ने सबसे पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से पूरे मामले की जानकारी ली। गणना कक्ष में ही पूरी व्यवस्थाओं को परखा। वहां मौजूद कर्मचारियों की कार्य प्रणाली को देखा। कई अभिलेखों की जांच कर अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद एक-एक कर कर्मचारियों से पूछताछ के लिए लिस्ट बनी और अगले दिन से सभी तलब हुए। चंपत राय के सबसे करीबी टिल्लू यादव से लगातार दो दिनों तक पूछताछ हुई और उससे संपत्ति का ब्यूरो भी मांगा गया। कर्मचारियों से पूछताछ के बाद जांच का दायरा बढ़ा जैसे-जैसे एसआईटी ने जांच को आगे बढ़ाया गड़बड़ियां उतनी ही ज्यादा मिलने लगीं। ऐसे में जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया। जांच की जद में सामानों की आपूर्ति और ट्रस्ट की धनराशि से अलग-अलग स्थानों पर कराए गए निर्माण के अलावा जमीनों की खरीद-फरोख्त को भी शामिल कर लिया गया। आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों को भी तलब कर उनसे अभिलेख मांगे गए। छठे और अंतिम दिन शनिवार को राम मंदिर के तीनों महत्वपूर्ण पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई। तीनों ने एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ा। नृपेंद्र मिश्रा के आरोपों ने घेरा, मची खलबली एसआईटी जांच के बीच ही निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी को डाका करार दे दिया। … Read more

सीमा पर योग का संदेश, अटारी-वाघा बॉर्डर पर BSF संग हजारों लोगों ने किया अभ्यास

अमृतसर. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) पंजाब फ्रंटियर द्वारा अटारी संयुक्त चेक पोस्ट (जेसीपी) में एक हजार से अधिक लोगों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। इस दौरान बीएसएफ के अधिकारी, जवान, उनके परिवारजन, विद्यार्थी, स्थानीय गणमान्य नागरिक और सीमावर्ती गांवों के लोग शामिल हुए। बीएसएफ पंजाब ने अपने हीरक जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था हेतु योग’ के तहत सभी मुख्यालयों, यूनिटों और सीमा चौकियों पर योग सत्र आयोजित किए। मुख्य कार्यक्रम जेसीपी अटारी में हुआ, जबकि गुरदासपुर स्थित करतारपुर साहिब कारिडोर, फिरोजपुर के जेसीपी हुसैनीवाला और फाजिल्का सीमा पर स्थित जेसीपी सादकी में भी विशेष आयोजन किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीएसएफ पंजाब के महानिरीक्षक अतुल फुलझेले ने कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है। नियमित योगाभ्यास मन और शरीर को संतुलित रखने के साथ जीवन के प्रत्येक चरण में सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में सहायक है। योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया। इस दौरान श्वास संबंधी क्रियाओं और शरीर की सही मुद्रा पर विशेष जोर दिया गया।