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जनदर्शन में मिली त्वरित राहत: लगनी बाई को मिला राशन कार्ड

रायपुर. शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जन समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में  कोंडागांव जिले  के केशकाल विकासखंड के ग्राम गौरगांव निवासी मती लगनी बाई को त्वरित राहत मिली। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक के उपरांत कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने जनदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान लगनी बाई ने राशन कार्ड बनवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने उनके आवेदन पर खाद्य विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। खाद्य विभाग द्वारा उसी दिन आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर लगनी बाई को राशन कार्ड बनाकर प्रदान किया गया। राशन कार्ड प्राप्त होने से लगनी बाई और उनका परिवार अब नियमित रूप से शासकीय योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाले राशन सामग्री के साथ साथ अन्य योजनाओं का भी लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने इस त्वरित सहायता के लिए शासन प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अविनाश भोई, खाद्य अधिकारी  नवीनचंद वास्तव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

आदिवासी युवक की मौत पर सियासी घमासान: एसडीएम पर आरोप, एक करोड़ मुआवजा व नौकरी की मांग

बलरामपुर बलरामपुर जिले के कुसमी में एसडीएम द्वारा की गई मारपीट से आदिवासी किसान की मौत के मामले को लेकर दूसरे दिन भी माहौल गरमाया रहा। कुसमी बस स्टैंड में ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना देते हुए मृतक परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। इस दौरान शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। इस धरना प्रदर्शन में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। यह है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी ब्लॉक स्थित हंसपुर गांव में बॉक्साइट के अवैध खनन की जांच के लिए कुसमी एसडीएम करुण डहरिया पहुंचे थे। आरोप है कि वे निजी वाहन से कुछ निजी लोगों को साथ लेकर आए थे। सरना के पास उन्होंने तीन ग्रामीणों को रोककर अवैध खनन का आरोप लगाया और रॉड, डंडे तथा लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई की। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों को बेहोश होने तक पीटा गया। मारपीट में घायल ग्रामीणों को कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 62 वर्षीय रामनरेश राम की मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल 60 वर्षीय अजीत उरांव और 20 वर्षीय आकाश अगरिया का इलाज जारी है। यह घटना रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बिना किसी पूछताछ या जांच के एसडीएम और उनके साथ गए प्राइवेट लोगों ने ग्रामीणों पर आरोप लगा लाठी डंडों से हमला कर दिया। वहीं सूत्र यह भी बताते हैं कि मारपीट में ग्रामीणों के घायल होने के बाद एसडीएम ने सामरी के नायब तहसीलदार पारस शर्मा को भी फोन कर बुलवाया ताकि यह दिखाया जा सके की पूरा राजस्व अमला अवैध खनन की जांच के लिए गया हुआ था। खेत में पानी की सिंचाई करने के लिए गए थे ग्रामीण मामले में घायल ग्रामीण आकाश अगरिया एवं अजीत उरांव ने बताया कि वे गेहूं के खेत में पानी की सिंचाई करने गए हुए थे। लौटने के दौरान बिना किसी पूछताछ या जांच अवैध खनन का आरोप लगा उनकी पिटाई की गई। मामला सामने आने के बाद एसडीएम और उनके तीनों साथियों को पुलिस ने हिरास्त में ले लिया था और पूछताछ कर रही थी। पहले भी विवादों में रहे हैं एसडीएम एसडीएम करुण डहरिया पूर्व में भी विवादों में रह चुके हैं। जांजगीर जिले के चांपा में पदस्थापना के दौरान उन्होंने एक छात्र को तमाचा मार दिया था जिसके बाद छात्रों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रशिक्षण के दौरान गरियाबंद जनपद सीईओ रहने के दौरान नवंबर 2022 में उन्हें नलकूप खनन का बिल पास करने बीस हजार रुपये रिश्वत लेते एसीबी ने भी गिरफ्तार किया था। मामले में अब तक क्या-क्या हुई कार्रवाई मामले में घायल दो ग्रामीणों के बयान के आधार पर कुसमी एसडीएम करुण डहरिया सहित उनके साथ गए विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजिल कुमार यादव और सुदीप यादव के खिलाफ राजपुर थाने में धारा 103, 115(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एसडीएम समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिसके बाद सभी से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।

मजदूर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना सरकार का लक्ष्य : पटेल

भोपाल  मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री  प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त  संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है। मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं। खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई। अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।  

परंपरागत बीज संरक्षण के लिये बीज सखी का हुआ राज्य स्तरीय प्रशिक्षण

भोपाल . आजीविका मिशन की पहल मध्‍यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अभिनव पहल करते हुए 27 जिलों की बीज सखियों को परंपरागत बीज संरक्षण एवं बीज बैंक स्थापना के सम्बन्ध में दो दिवसीय राज्‍य स्‍तरीय प्रशिक्षण का आयोजन क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में 9 एवं 10 फरवरी को आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में पद्म,  बाबूलाल दहिया जिला सतना द्वारा बीज संरक्षण के अनुभव साझा किए गए एवं बीज बैंक स्थापना पर व्याख्यान भी दिया गया। कर्नाटक राज्य की बी.बी. जान जो विगत 9 वर्षों से परंपरागत बीज संरक्षण का कार्य कर रही है, उनके द्वारा भी प्रतिभागियों को बीज संरक्षण के लिये प्रशिक्षण दिया। विगत 16 वर्षों से देशी बीजों का संरक्षण कर रहीं जिला डिंडोरी की सु फुलझरिया बाई द्वारा भी प्रशिक्षण में अपने अनुभव साझा किए एवं बीज संरक्षण के तरीके भी बताए। इसके अलावा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधियों ने भी जानकारी दी। मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी आजीविका मिशन मती हर्षिका सिंह की पहल पर प्रदेश में महिला समूहों की सदस्‍यों को प्राकृतिक खेती को बढावा देने के उद्देश्‍य से परंपरागत बीज संरक्षण के लिये जिलों में बीज बैंक की स्‍थापना के लिये काम शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रारंभिक चरण में हितग्राहियों का चयन, प्रशिक्षण आदि किया जाना है। इसी क्रम में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में प्रशिक्षणों का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण में देशी बीजों को महत्‍व देते हुये उनके फायदे के संबंध में प्रतिभागियों को बताया गया। देशी बीज स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार ढले होने के कारण कम पानी, खाद व कीटनाशकों में भी बेहतर पैदावार देते हैं। इनकी अन्‍य विशेषतायें भी हैं जैसे यह अन्‍य की तुलना में अत्यधिक पौष्टिक होते हैं, सूखा-रोग प्रतिरोधी होते हैं जो किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को किफायती व टिकाऊ बनाते हैं। उद्यानिकी विभाग से  दीनानाथ धोटे द्वारा देशी सब्जी बीज संरक्षण पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। कृषि विभाग से  जितेंद्र सिंह परिहार द्वारा भी प्राकृतिक खेती एवं परंपरागत बीज संरक्षण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। आजीविका मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक कृषि,  मनीष सिंह एवं युवा सलाहकार सु पायल कुमारी द्वारा बीज बैंक की कार्ययोजना एवं आगामी 6 माह की कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में जानकारी दी गई। आगामी समय में जिला स्तर पर बीज सखी के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे और बीज बैंक की स्थापना की जावेगी। परंपरागत बीज की विशेषताएँ आत्मनिर्भरता: किसान हर साल बीज खरीदकर खर्च करने के बजाय अपनी पिछली फसल से ही बीज सुरक्षित कर सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत बहुत कम हो जाती है। जलवायु-प्रतिरोधी – ये स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, इसलिए सूखे, अत्यधिक बारिश या कीटों का सामना करने की इनमें बेहतर क्षमता होती है। उच्च पौष्टिकता – देसी फसलों में संकर बीजों की तुलना में प्राकृतिक रूप से अधिक विटामिन, खनिज और पोषक तत्व होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं। पर्यावरण संरक्षण – इन बीजों में कम रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जल स्रोत भी सुरक्षित रहते हैं। जैव विविधता का संरक्षण: विभिन्न प्रकार की देसी किस्में पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखती हैं।  

बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा केस में बड़ा फैसला, 17 आरोपी दोषमुक्त, क्या बोले वकील

बेमेतरा छत्तीसगढ़ में आज की सबसे बड़ी खबर बेमेतरा से निकलकर सामने आई. बेमेतरा जिले के बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में जिला न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है. जिला न्यायालय ने जिन आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है, उनमें चेचानमेटा बिरनपुर थाना निवासी डकेश्वर सिन्हा उर्फ हरिओम पिता गौतम सिन्हा (28 साल), ग्राम खैरी, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी मनीष वर्मा पिता नंदकुमार वर्मा (23 साल), कोरवाय थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी समारू नेताम पिता जेठूराम नेताम (43 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी पूरन पटेल पिता खेमकुमार पटेल (19 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी राजकुमार निषाद पिता संजय निषाद (19 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी भोला निषाद पिता श्रवण निषाद (23 साल), पेंण्डरवानी, थाना गण्डई जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई निवासी दूधनाथ साहू पिता कमल साहू (27 साल), पेण्डरवानी, थाना गण्डई जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई निवासी अरुण रजक पिता मनहरण रजक (18 साल), कोरवाय, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी चंदन साहू पिता देवकुमार साहू (20 साल), कोरवाय, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी होमेन्द्र नेताम पिता नीलकंठ नेताम (25 साल), कोगियाखुर्द, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा निवासी टाकेन्द्र साहू पिता परसराम साहू (22 साल), कोगियाखुर्द, थाना परपोडी, जिला बेमेतरा निवासी राम निषाद पिता हिरेश निषाद (19 साल) मासुलगोदी, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा निवासी संजय कुमार साहू पिता नेमराम साहू (25 साल), निवासी कोरवाय, थाना साजा, जिला बेमेतरा निवासी चिंताराम साहू पिता स्व. बिरझुराम साहू (68 साल), निवासी कोगियाखुर्द, थाना परपोडी, जिला बेमेतरा निवासी लोकेश साहू पिता चतुरराम साहू (23 साल) निवासी कोगियाखुर्द, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा वरूण साहू पिता रामकुमार साहू (18 साल 3 माह) और मासुलगोदी, थाना परपोडी जिला बेमेतरा निवासी राजेश साहू पिता बल्लु साहू (23 साल) शामिल हैं. बिरनपुर मामले में साजा थाना में कुल 173 लोगों के विरूद्ध दर्ज धारा 302, 147, 148, 149, 153 (3) भादवि तथा 201, 109, 34 भादवि के अपराध में अपर सत्र न्यायाधीश साक्षी दिक्षित की न्यायालय में विचारण किया गया है. 64 अभियोजन साक्षियों का कथन के बाद आज संदेह का लाभ देकर न्यायालय से सभी 17 लोगों को छोड़ दिया गया है. क्या था बिरनपुर हिंसा मामला? बिरनपुर हिंसा मामला शुरू हुआ था दो बच्चों की मामूली लड़ाई से, जो देखते-देखते हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसक झड़प में बदल गया. 8 अप्रैल 2023 को साजा विधायक ईश्वर साहू के 22 वर्षीय पुत्र भुनेश्वर साहू की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद तनाव इतना बढ़ा कि 10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया. गांव में आगजनी हुई और मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) व उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की भी हत्या हो गई. प्रशासन ने धारा 144 लागू किया, जो करीब दो सप्ताह तक जारी रहा. पुलिस ने शुरुआत में 12 लोगों को आरोपी बनाया था, लेकिन CBI ने अपनी जांच में 6 नए आरोपियों का उल्लेख किया है.

राजस्थान विधानसभा में गरमाये मुद्दे के बीच हाथापाई की नौबत!

जयपुर. राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को उस वक्त भारी बवाल मच गया जब विपक्ष ने जयपुर की हिंगोनिया गौशाला के पास गाय के बछड़े का कटा सिर मिलने का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इस जघन्य अपराध के आरोपी को सत्ता पक्ष के एक विधायक का संरक्षण प्राप्त है। इस बयान ने सदन में ऐसी आग सुलगाई कि भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज आमने-सामने आ गए। बालमुकुंदाचार्य का सवाल: क्या गाय बनेगी 'राज्य पशु'? हंगामा तब शुरू हुआ जब हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने सरकार से सवाल किया कि क्या राजस्थान में गाय को 'राज्य पशु' (State Animal) का दर्जा देने का कोई विचार है? इस पर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। मंत्री के इस जवाब ने हिंदूवादी राजनीति करने वाले धड़े को असहज कर दिया, लेकिन असली विस्फोट अभी बाकी था। टीकाराम जूली का 'पोस्टर' वार और गंभीर आरोप सदन में माहौल तब गरमाया जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने खड़े होकर राजधानी की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। जूली ने कहा, 'जयपुर में हिंगोनिया गौशाला के पास से बछड़े का कटा सिर लाकर लटकाया गया। यह सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश है।' जूली ने दावा किया कि इस मामले में जो आरोपी है, उसे भाजपा का एक विधायक बचा रहा है। जूली ने इशारों-इशारों में सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा की ओर संकेत किया। गोपाल शर्मा का पलटवार: 'इस्तीफा दे दूँगा' अपना नाम घसीटे जाने पर सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा बुरी तरह बिफर गए। उन्होंने सदन में खड़े होकर दहाड़ते हुए कहा, "आप मेरा नाम ले रहे हैं? अगर इस मामले में कोई भी मेरा आदमी शामिल पाया गया, तो मैं इसी वक्त विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दूँगा।" शर्मा के इस तेवर ने सत्ता पक्ष के खेमे में जोश भर दिया, वहीं विपक्ष ने शोर-शराबा और तेज कर दिया। सदन में हाथापाई की नौबत !  राजस्थान के विधानसभा में उस वक्त हाथापाई की नौबत बनती दिखाई दी, जब भाजपा विधायक गोपाल शर्मा सदन की कार्यवाही के बीच ना पक्ष की वेल की तरफ़ आक्रोश के साथ बढ़ने लगे। तभी कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक चांदना भी गोपाल शर्मा की तरफ़ आक्रोशित होकर बढ़ गए .इससे माहौल और ज़्यादा गरमा गया। स्पीकर की फटकार, "पहले से तय थी प्लानिंग" हंगामे के बीच कांग्रेस विधायकों ने बछड़े के कटे सिर वाले पोस्टर लहराना शुरू कर दिया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सख्त नजर आए। उन्होंने पोस्टर लहराने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, "जिस तरह से पोस्टर लहराए जा रहे हैं, उससे साफ लगता है कि आप लोग सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए पहले से प्लानिंग करके आए थे।" स्पीकर ने मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को निर्देश देकर गोपाल शर्मा को शांत कराया और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। डोटासरा और गोपाल शर्मा के बीच तीखी बहस सदन में उस वक्त मर्यादा की सीमाएं लांघती दिखीं जब पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और गोपाल शर्मा के बीच सीधी बहस शुरू हो गई। दोनों ओर से तीखी टिप्पणियां की गईं। विपक्ष का आरोप था कि सरकार गौवंश की रक्षा के नाम पर केवल राजनीति करती है, जबकि हकीकत में राजधानी में ही गौवंश सुरक्षित नहीं है।

अमृत भारत स्टेशन योजना से बिहार में बदल रहा रेलवे का चेहरा

कटिहार. भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई अमृत भारत स्टेशन योजना देशभर में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का नया अध्याय लिख रही है। इस संबंध में सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि एनएफ रेल अंतर्गत बिहार, असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में जहां बड़े पैमाने पर स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है, वहीं बिहार के सीमावर्ती स्टेशन भी इस परिवर्तन यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत चयनित स्टेशनों के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार कर चरणबद्ध तरीके से यात्री सुविधाओं और आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है। स्टेशन पहुंच मार्ग, सर्कुलेटिंग एरिया, आधुनिक प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, फ्री वाई-फाई, अत्याधुनिक यात्री सूचना प्रणाली और आकर्षक स्टेशन भवन इसके प्रमुख घटक हैं। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट कियोस्क के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्वोत्तर में 60 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य जारी है, जिनमें असम के 50 स्टेशन शामिल हैं। हैवर गांव रेलवे स्टेशन असम का पहला अमृत भारत स्टेशन बनकर आधुनिक सुविधाओं और असमिया विरासत के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत कर चुका है। इसी कड़ी में बिहार के कटिहार और किशनगंज सहित अन्य रेलवे स्टेशन को भी अमृत भारत योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ये दोनों स्टेशन पूर्वोत्तर और बिहार को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके पुनर्विकास से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नया आयाम मिलेगा। अमृत भारत स्टेशन योजना न केवल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बना रही है, बल्कि स्टेशनों को सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रही है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह पहल असम, पूर्वोत्तर और बिहार में विकास की नई रफ्तार का प्रतीक बनती जा रही है। जो अत्याधुनिक तकनीकों और सुख सुविधाओं से सज्जित होगा। जिससे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसा सुखद अनुभव मिलेगी।

दृष्टि दिव्यांगता पर संकल्प की जीत: आत्मनिर्भरता की मिसाल बने अभिनंदन, अब गढ़ रहे नई प्रतिभाओं का भविष्य

रायपुर. दृष्टि दिव्यांगता पर संकल्प की जीत: आत्मनिर्भरता की मिसाल बने  अभिनंदन, अब गढ़ रहे नई प्रतिभाओं का भविष्य दृढ़ इच्छाशक्ति, अटूट आत्मविश्वास और संगीत के प्रति समर्पण ने यह सिद्ध कर दिया है कि शारीरिक सीमाएं सफलता की राह में अवरोध नहीं बनतीं। दृष्टि दिव्यांगता को चुनौती देते हुए  अभिनंदन नशीने ने आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की ऐसी प्रेरक कहानी रची है, जो पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित रायपुर मठपुरैना  स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय  में वर्ष 2006 में कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले  अभिनंदन ने वर्ष 2019 में बारहवीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विद्यालयीन शिक्षा के दौरान वे विद्यालय के ऑर्केस्ट्रा ग्रुप “रोशनी” के सक्रिय सदस्य रहे और अपनी मधुर आवाज से अनेक मंचों पर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।संगीत के प्रति गहरी लगन ने उन्हें उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर किया। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से संगीत विषय में स्नातक शिक्षा पूर्ण कर अपनी प्रतिभा को शैक्षणिक आधार प्रदान किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और आज उसी विद्यालय में संगीत शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं, जहां से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। वर्तमान में  अभिनंदन दृष्टि दिव्यांग बच्चों को संगीत की विधिवत शिक्षा देकर उनकी छिपी प्रतिभा को मंच प्रदान कर रहे हैं। वे केवल शिक्षक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी हैं। उनके मार्गदर्शन में कई बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।  अभिनंदन द्वारा संचालित “अभिनंदन म्यूजिकल परिवार” ऑर्केस्ट्रा समूह दिव्यांग कलाकारों के लिए एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। यह समूह विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रस्तुतियों से समाज में सकारात्मक संदेश दे रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मोहला-मानपुर जिले में समाज कल्याण विभाग के कार्यक्रमों हेतु जागरूकता गीतों की रचना कर सामाजिक सरोकारों से भी अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।  अभिनंदन की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि यदि संकल्प अडिग हो तो चुनौतियां भी सफलता की सीढ़ियां बन जाती हैं। उनका संघर्ष और उपलब्धियां प्रदेश के दिव्यांगजनों के लिए आशा, प्रेरणा और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं।राज्य सरकार की समावेशी नीतियों और सशक्तिकरण के प्रयासों के परिणामस्वरूप आज ऐसे अनेक प्रतिभाशाली दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा में अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं।  अभिनंदन की उपलब्धियां इसी सकारात्मक परिवर्तन की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।

सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: सुकमा में 22 नक्सलियों ने डाले हथियार, ‘लाल आतंक’ कमजोर

सुकमा नक्सल मुक्त भारत अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुकमा जिले में 22 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इसमें एक महिला नक्सली भी शामिल है। इस घटना को नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार की नीतियों का असर आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस बड़ी सफलता में जिला रिजर्व गार्ड, जिला पुलिस बल, क्षेत्रीय फील्ड टीम, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और कोबरा बटालियन की सराहनीय भूमिका रही। सुरक्षाबलों द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे सघन तलाशी व घेराबंदी अभियानों के कारण नक्सली संगठनों पर लगातार दबाव बना हुआ था। पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर नक्सलियों ने छोड़े हथियार प्रशासन के अनुसार, सरकार की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति, बेहतर जीवन की संभावनाओं और विकास कार्यों के विस्तार से प्रभावित होकर नक्सलियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को नियमानुसार पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे नक्सल मुक्त भारत अभियान की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है। उनका कहना है कि आने वाले समय में नक्सलवाद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शांति, विकास और विश्वास का माहौल और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। यह कदम क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

हितग्राहियों को मिली बड़ी सौगात, 1 करोड़ 37 लाख से ज्यादा का लाभ

रायपुर विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 1 करोड़ 37 लाख 2 हजार 294 रुपये की राशि की गई वितरित श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष  योगेश दत्त मिश्रा की अध्यक्षता में ऑडिटोरियम जांजगीर में आज श्रमिक जन संवाद/श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रमिकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियो को विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 1 करोड़ 37 लाख 2 हजार 294 रुपये की राशि वितरित की गई।         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  योगेश दत्त मिश्रा ने कहा कि श्रमिकों को शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद कार्यक्रमों से श्रमिकों में जागरूकता बढ़ेगी और अधिक से अधिक पात्र हितग्राही योजनाओं से लाभान्वित हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन श्रमिकों को योजनाओं से सीधे जोडने और संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में पूर्व विधायक  चुन्नीलाल साहू,  नंदकुमार चौधरी,  विकास शर्मा,  पंकज अग्रवाल,  अनिल शर्मा,  हितेश यादव,  पुष्पेंद्र प्रताप सिंह, मती इंद्रावती जांगड़े,  संजय शर्मा सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और श्रमिक उपस्थित थे।