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पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ व्यापक विस्तार, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सीएचसी व पीएचसी की संख्या में हुई वृद्धि

प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को किया मजबूत तो बीमारू से बना उत्तम प्रदेश  पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ व्यापक विस्तार, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सीएचसी व पीएचसी की संख्या में हुई वृद्धि पीएचसी पर 24 घंटे प्रसव, पैथोलॉजी और एक्स-रे की मिल रही सुविधा, आधुनिक मशीनों, दवाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से बढ़ी संस्थागत प्रसव दर डिजिटल सर्विलांस से संचारी रोगों में आई कमी, डेंगू, मलेरिया, एईएस और जेई की रोकथाम के लिए लैब नेटवर्क को किया मजबूत लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में व्यापक सुधार किए हैं। प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। साथ ही इन केंद्रों को आधुनिक उपकरणों, पर्याप्त दवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों से सुसज्जित किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों पर 24 घंटे मिल रही प्रसव, पैथोलॉजी, एक्स-रे की सुविधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में कमान संभालने के बाद प्रदेश में सैकड़ों नए स्वास्थ्य उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने के साथ उच्चीकृत भी किए हैं। जहां पहले कई पीएचसी में नाममात्र की सुविधाएं थीं, वहीं अब उनमें 24 घंटे प्रसव सुविधा, पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता देते हुए संस्थागत प्रसव दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। योगी सरकार की प्राथमिकता “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र के साथ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत किया गया। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया जिससे लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरा जा सका। साथ ही संविदा और नियमित नियुक्तियों के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई। संचारी रोगों की रोकथाम के लिए मजबूत किया डिजिटल सर्विलांस सिस्टम प्रदेश में संचारी रोगों की रोकथाम के लिए डिजिटल सर्विलांस सिस्टम को मजबूत किया गया है। डेंगू, मलेरिया, एईएस और जेई जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्राथमिक स्तर पर ही जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जांच प्रयोगशालाओं की संख्या में कई गुना वृद्धि की गई है, जिससे रोगों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार संभव हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले वर्षों में कई जिलों में मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से लाखों पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है। इन योजनाओं का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वास्थ्य कार्ड वितरण और लाभार्थियों की पहचान की प्रक्रिया को भी डिजिटल माध्यम से पारदर्शी बनाया गया है। टीकाकरण में देश में अग्रणी स्थान किया प्राप्त प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा पर भी जोर दिया है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण से विशेषज्ञ सेवाओं का दायरा बढ़ा है। इससे प्राथमिक स्तर पर मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें उच्च संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में एंबुलेंस सेवाओं 102 और 108 को सशक्त किया गया है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को शीघ्र उपचार मिल सके। कोविड-19 महामारी के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। गांव-गांव में स्वास्थ्य टीमों ने स्क्रीनिंग, जांच और टीकाकरण अभियान चलाया। प्रदेश ने टीकाकरण के मामले में देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया। इस दौरान ऑक्सीजन प्लांट, आईसीयू बेड और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया गया, जिनका लाभ आज भी सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में मिल रहा है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, टीकाकरण कवरेज में सुधार और संचारी रोगों पर नियंत्रण जैसे संकेतक इस परिवर्तन की पुष्टि करते हैं। सरकार द्वारा स्वास्थ्य बजट में लगातार वृद्धि कर प्राथमिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से आमजन को राहत मिली स्वास्थ्य केंद्रों में टेलीमेडिसिन सेवाओं की शुरुआत से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध हो रहा है। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से हजारों मरीज घर बैठे चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत हुई है, बल्कि ग्रामीण आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा भी सुलभ हुई है। योगी सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने का जो संकल्प लिया गया था, वह अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ, दवा आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था और डिजिटल निगरानी प्रणाली ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से आमजन को राहत मिली है और प्रदेश एक सशक्त, स्वस्थ और विकसित राज्य की दिशा में अग्रसर हो रहा है। विशेषज्ञ की राय पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में जो परिवर्तन हुए हैं, वे जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। सीएचसी और पीएचसी को 24 घंटे प्रसव, पैथोलॉजी और एक्स-रे जैसी सुविधाओं से सुसज्जित करना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। डिजिटल सर्विलांस और लैब नेटवर्क के विस्तार से संचारी रोगों की समय पर पहचान और नियंत्रण संभव हुआ है। टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी जैसी पहल ने दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में गिरावट और टीकाकरण कवरेज में सुधार इस बात का संकेत है कि प्राथमिक स्वास्थ्य को दी गई प्राथमिकता सकारात्मक परिणाम दे रही है। डॉ. लिली सिंह, पूर्व डीजी, स्वास्थ्य विभाग

उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार

प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार एमएसएमई चैम्पियनशिप और तकनीकी उन्नयन से बढ़ी प्रतिस्पर्धा नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति लखनऊ  उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय पहल की गति तेज कर दी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश के 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है। योगी सरकार के इन क़दमों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और रोजगार सृजन को नई गति प्राप्त हुई है।  डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत सरलता और वित्तीय सहयोग के संयोजन ने प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने की आधारभूमि को तैयार करने का काम किया है। एमएसएमई  सेक्टर की योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में 3,822 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है।  ओडीओपी को मिला डिजिटल आयाम वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत मार्केटिंग डेवलपमेंट, टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के कारीगरों को तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने से स्थानीय वस्तुओं की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ी है। तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धा में बढ़त एमएसएमई चैम्पियनशिप इनीशिएटिव (चैंपियंस पोर्टल) के अंतर्गत चयनित इकाइयों को आधुनिक मशीनरी को अपनाने, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत को घटाकर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और विकसित करना है। लाखों इकाइयों को डिजिटल उन्नयन और विपणन सहयोग का लाभ मिल रहा है। उद्यम सारथी और आरएएमपी का सहारा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 24  जनवरी, 2021 को लॉन्च की गई उद्यम सारथी ऐप के जरिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, योजनाओं की जानकारी और संचालन मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। इससे उद्यमियों की सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों तक त्वरित पहुंच प्राप्त हो जाती है। प्रदेश में आरएएमपी (राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस) योजना विश्व बैंक समर्थित एक केंद्रीय पहल है, इसके अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे इकाइयों के विस्तार और आधुनिकीकरण को बल मिला है। नीतिगत सरलता और त्वरित संचालन वर्ष 2022 से लागू एमएसएमई नीति के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्लग एंड प्ले मॉडल से 72 घंटे में संचालन शुरू करने की सुविधा दी गई है। क्रेडिट प्रवाह में वृद्धि और पांच लाख रुपये तक बीमा कवरेज जैसी व्यवस्थाओं ने उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन में सहूलियत प्रदान करने का काम किया है। इन उपायों से निवेश वातावरण मजबूत हुआ है। बढ़ रहा है रोजगार और आर्थिक प्रभाव प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से इसमें नए अवसर जुड़े हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ने के कारण ग्रामीण और अर्धशहरी इकाइयों को व्यापक बाजार हासिल हुआ है।

नवगछिया-चौधरीडीह फोरलेन सड़क में बनेगा अंडरपास

भागलपुर. नवगछिया से चौधरीडीह तक बनने वाले फोरलेन सड़क में बंशीटीकर के पास व्हिकल अंडरपास (वीयूपी) का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जीरोमाइल फ्लाईओवर के बगल में समानांतर फ्लाईओवर बनाने की योजना पर पुनर्विचार किया जा रहा है। हाल ही में, जीरोमाइल के पास समानांतर फ्लाईओवर न बनाने और सड़क के चौड़ीकरण के माध्यम से फोरलेन बनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब सर्विस रोड की चौड़ाई बढ़ाने के बजाय, सबौर दिशा में एक और समानांतर टूलेन फ्लाईओवर बनाने पर विचार किया जा रहा है। नवगछिया-चौधरीडीह प्रस्तावित फोरलेन सड़क में बंशीटीकर के पास व्हिकल अंडरपास बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए डीपीआर में बदलाव कर वीयूपी को शामिल किया जाएगा। इस संदर्भ में कंसल्टेंसी को मोर्थ के रिजनल ऑफिस (आरओ) में बुलाया गया है। जीरोमाइल फ्लाईओवर के बगल में समानांतर फ्लाईओवर बनाने पर विचार किया जा रहा है, जबकि पहले डीपीआर में सड़क चौड़ीकरण का निर्णय लिया गया था। अब इसमें बदलाव करने पर चर्चा चल रही है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी मोड़ से चौधरीडीह के बीच तीसरी बार डीपीआर में संशोधन किया जाएगा, जिससे फोरलेन सड़क निर्माण में देरी हो सकती है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अप्रैल 2028 तक फोरलेन पुल का निर्माण पूरा होना है। इस बीच, 22 मीटर सड़क चौड़ी की जाएगी। महादेवपुर घाट से फोरलेन पुल तक 900 मीटर का बांध 9 करोड़ की राशि से बनाया जाएगा। इस बांध के निर्माण से सड़क को नुकसान नहीं पहुंचेगा और बाढ़ के दौरान गांवों को भी सुरक्षा मिलेगी। नवगछिया से शुरू होने वाले एनएच में जाह्नवी चौक से 53 मीटर अप्रोच रोड का निर्माण होगा। यह 18 मीटर ऊंची अप्रोच रोड फोरलेन सेतु से जुड़ेगी। भागलपुर की दिशा में भी अप्रोच रोड को ऊंचा किया जाएगा। विक्रमशिला सेतु की अप्रोच और नए सेतु की अप्रोच रोड भी फोरलेन की होगी। इस प्रकार, जीरोमाइल से जाह्नवी चौक तक सिक्स लेन की सड़क का निर्माण किया जाएगा। नवगछिया से भागलपुर तक एनएच 131बी को फोरलेन किया जाना है। यह कार्य दो चरणों में पूरा होगा, जिससे यातायात के लिए बेहतर सड़क उपलब्ध होगी। एनएच के अभियंता ने बताया कि नवगछिया जीरोमाइल से जाह्नवी चौक तक 9 किलोमीटर की अनुमानित लागत 295 करोड़ रुपये और बरारी बाइपास मोड़ से चौधरीडीह तक 4.5 किलोमीटर की अनुमानित लागत 111 करोड़ रुपये है। गोपालपुर के पास एक और रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण भी किया जाएगा, जिसकी लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 10 मीटर होगी। बाइपास में सेंट टेरेसा स्कूल और हवाई अड्डा के पास व्हीकल अंडरपास के अलावा दो छोटे ब्रिज का भी निर्माण होगा। जाह्नवी चौक और तेतरी के पास भी व्हीकल अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। भागलपुर-नवगछिया के बीच फोरलेन बनने से न केवल आवागमन में आसानी होगी, बल्कि कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। इस फोरलेन का जुड़ाव नवगछिया साइड में एनएच-33 और भागलपुर की ओर मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीन फील्ड सहित हंसडीहा फोरलेन से होगा। इसका उपयोग समानांतर फोरलेन पुल के लिए भी किया जा सकेगा।

साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया से 1616 आपत्तिजनक लिंक हटाए

चंडीगढ़. हरियाणा पुलिस द्वारा सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अवैध, आपत्तिजनक एवं भ्रामक गतिविधियों के विरुद्ध प्रारंभ किया गया विशेष अभियान एक माह सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) के सहयोग से संचालित यह अभियान डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत प्रभावी एवं परिणामकारी सिद्ध हुआ है। सोशल मीडिया पर भ्रामक, उकसाने वाली तथा समाज में भ्रम या तनाव उत्पन्न करने वाली सामग्री की बढ़ती प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए यह सुनियोजित और सकारात्मक पहल शुरू की गई थी। पिछले लगभग एक माह के दौरान साइबर टीम द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग एवं त्वरित समन्वय के माध्यम से कुल 2052 लिंक एवं प्रोफाइल रिपोर्ट किए गए, जिनमें से 1616 आपत्तिजनक सामग्री को संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा हटाया या ब्लॉक किया जा चुका है। शेष 436  लिंक विभिन्न समीक्षा चरणों में हैं और उन पर भी शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। अभियान के अंतर्गत साइबर टीम प्रतिदिन सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, लिंक एवं प्रोफाइल की पहचान कर रही है जिनमें भ्रामक जानकारी, उकसाने वाली भाषा या सार्वजनिक शांति भंग करने वाला कंटेंट पाया जाता है। ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तत्काल नोटिस जारी कर सामग्री हटाने की मांग की जाती है। पूरी प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और बिना किसी ढिलाई के संचालित की जा रही है। डीजीपी अजय सिंघल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर गलत, भ्रामक या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज समाज के हर वर्ग को प्रभावित करता है और किसी भी प्रकार की उकसाने वाली सामग्री सामाजिक सौहार्द एवं शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, निवेश से पूर्व किसी भी ऐप या प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें, बिना पुष्टि के कोई भी संवेदनशील सामग्री साझा न करें तथा संदिग्ध पोस्ट या ऐप की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर दें।

पंजाब में फरवरी में मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी का एहसास

लुधियाना. पंजाब में फरवरी के महीने में ही मार्च-अप्रैल वाली गर्मी का एहसास हो रहा है। कई जिलों में दिन का तापमान लगातार सामान्य से चार से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है। सोमवार को भी अधिकांश जिलों में दिन का तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया, जबकि रात का तापमान सामान्य के आसपास रहा। कुछ जिलों में सामान्य से कम तापमान दर्ज किया गया। मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, फरीदकोट में दिन का तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस अधिक था। वहीं पटियाला, चंडीगढ़, रूपनगर और बठिंडा में तापमान 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जो कि सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। इसी तरह लुधियाना, फिरोजपुर, मोहाली और होशियारपुर में तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा, जो कि सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। पिछले एक सप्ताह से दिन में लगातार तापमान अधिक रहने से गेहूं की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि, अभी गेहूं में बल्लियां पड़नी शुरू हुई है, अगेती गेहूं में बल्लियां पड़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार दिन का तापमान रहने से गेहूं की फसल के जल्दी पकने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे दानों के सिंकुड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में पैदावार में कमी आने की संभावना रहती है। वर्ष 2023 में भी फरवरी मार्च में अधिक तामपान दर्ज किया गया था। लेकिन राहत की बात यह है कि पंजाब में बुधवार व वीरवार को मौसम बदलने जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते कई जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस दौरान कई जिलों में बादल छाएं रह सकते हैं, कुछ जिलों में बूंदाबांदी, कुछ जिलों में हल्की से सामान्य वर्षा हो सकती है। अगर वर्षा होती है, तो ठंड बढ़ने से गेहूं को लाभ होगा। कुछ दिनों के लिए खेतों में नमी बढ़ जाएगी। 19 फरवरी से मौसम साफ हो जाएगा।

CM डॉ. यादव बोले: मध्यप्रदेश बना समावेशी विकास और तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य

समावेशी विकास के साथ तीव्र गतिशील अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 11.14 प्रतिशत वृद्धि मध्यप्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ अत्यंत गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के साथ मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। मध्यप्रदेश विधान सभा में मंगलवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध रूप से संतुलित और परिणामोन्मुखी है। प्रमुख बिंदु 1. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) प्रचलित मूल्यों पर ₹16,69,750 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹15,02,428 करोड़ की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹7,81,911 करोड़ अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹7,23,724 करोड़ की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। 3. वित्तीय वर्ष 2011-12 से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹1,69,050 हो गई तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर ₹38,497 से बढ़कर ₹76,971 हो गई, जो वास्तविक आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। 4. वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) की क्षेत्रीय संरचना प्रचलित मूल्यों पर इस प्रकार रही—प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत। 5. स्थिर (2011-12) मूल्यों पर इनकी हिस्सेदारी क्रमशः प्राथमिक क्षेत्र 33.54 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र 26.18 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र 40.28 प्रतिशत रही। 6. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 43.09 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 33.54 प्रतिशत रही। प्रचलित मूल्यों पर इस क्षेत्र का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹6,33,532 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹6,79,817 करोड़ हो गया, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 7. वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत फसलों का सर्वाधिक योगदान 30.17 प्रतिशत रहा, इसके बाद पशुधन 7.22 प्रतिशत, वानिकी 2.13 प्रतिशत, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि 0.61 प्रतिशत तथा खनन एवं उत्खनन 2.96 प्रतिशत रहा। 8. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 19.79 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 26.18 प्रतिशत रही। द्वितीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹2,84,125 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹3,12,350 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 9.93 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 6.87 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 9. वित्तीय वर्ष 2025-26 में द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान 9.22 प्रतिशत रहा, इसके बाद विनिर्माण का 7.22 प्रतिशत तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं का 3.35 प्रतिशत योगदान रहा। 10. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र की GSVA में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 37.12 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 40.28 प्रतिशत रही। तृतीयक क्षेत्र का कुल GSVA वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के ₹5,05,679 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में ₹5,85,588 करोड़ हो गया, जो प्रचलित मूल्यों पर 15.80 प्रतिशत तथा स्थिर मूल्यों पर 12.07 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। 11. वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट का सर्वाधिक योगदान 10.35 प्रतिशत रहा। इसके पश्चात अन्य सेवाएँ 7.80 प्रतिशत, अचल संपत्ति, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएँ 4.98 प्रतिशत, लोक प्रशासन 4.96 प्रतिशत, वित्तीय सेवाएँ 3.73 प्रतिशत, परिवहन एवं भंडारण 2.80 प्रतिशत, संचार एवं प्रसारण संबंधी सेवाएँ 1.68 प्रतिशत तथा रेलवे का 0.82 प्रतिशत योगदान रहा। अन्य क्षेत्रों में प्रमुख उपलब्धियाँ लोक वित्त, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹2,618 करोड़ के राजस्व आधिक्य का अनुमान है। राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व प्राप्तियाँ GSDP के 17.16 प्रतिशत के बराबर आंकी गई हैं। कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि अपेक्षित है तथा ऋण–GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि एवं ग्रामीण विकास वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 7.66 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्यानिकी क्षेत्र 28.39 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 425.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा। कुल 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवास पूर्ण किए गए। औद्योगिक विकास, एमएसएमई एवं अधोसंरचना द्वितीयक क्षेत्र में 9.93 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र में 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिनमें ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश से लगभग 1.7 लाख रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता ₹22,162 करोड़ रही। राज्य में 1,723 स्टार्टअप तथा 103 इनक्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। सीएसआर व्यय ₹2,600.47 करोड़ रहा तथा पर्यटन आगमन 13.18 करोड़ रहा। नगरीय विकास अमृत 2.0 के अंतर्गत ₹24,065 करोड़ का आवंटन किया गया, जिसमें 1,134 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण किए गए। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को आठ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2021-22 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय ₹34,112 करोड़ रहा, जो GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। मातृ मृत्यु अनुपात 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म हो गया। शिक्षा एवं कौशल विकास वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.00 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है, जबकि कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को SWAYAM पोर्टल पर मॉडल राज्य घोषित किया गया। तकनीकी संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है। मुख्यमंत्री मेधावी योजना के अंतर्गत 45,668 विद्यार्थियों को ₹500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। क्षेत्रवार जीएसवीए … Read more

जनदर्शन में कलेक्टर ने सुनी लोगों की समस्याएं

जनदर्शन में कलेक्टर ने सुनी लोगों की समस्याएं बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने साप्ताहिक जनदर्शन में आज दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीणों की फरियाद सुनी। उन्होंने एक-एक कर प्रत्येक व्यक्ति से मुलाकात कर उनका आवेदन लिया और आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। लोगों ने जनदर्शन में व्यक्तिगत एवं सामुदायिक हित से जुड़े विषयों को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करते हुए आवेदन दिया। नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे और सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल ने लोगों की समस्याओं को सुना। लोगों ने कलेक्टर से मिलकर व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन दिए।         जनदर्शन में आज बोदरी तहसील के ग्राम बोडसरा के छात्र दीपेश कुमार ने राजस्व रिकॉर्ड में हुई त्रुटि को लेकर कलेक्टर से सुधार की मांग की है। आवेदक का कहना है कि पुराने मिसल रिकॉर्ड में नाम की गलती के कारण उसका जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है, जिससे उसकी आगे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। त्रुटि के कारण राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उसे शैक्षणिक और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में परेशानी हो रही है। कलेक्टर ने मामले को एसडीओ बिल्हा को सौंपा। कोटा ब्लॉक के ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने शासकीय तालाब के आने जाने के निस्तारी रास्ते पर सुखराम यादव द्वारा किये गये अवैध निर्माण कार्य को हटाने के लिए ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम तेंदुवा के सुखराम यादव द्वारा निस्तारी रास्ते पर अवैध कब्जा कर मकान निर्माण कर लिया गया है। जिससे ग्रामीणों को तालाब आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने एसडीएम को उक्त प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए है। नहरपारा लिटिया के कैलाश प्रसाद साहू ने कलेक्टर से मुलाकात कर किसान सम्मान निधि की राशि प्रदान करने गुहार लगाई। मामले को उप संचालक कृषि देखेंगे।         शहर के वार्ड क्रमांक 36 बसंत भाई पटेल नगर के वासियों ने वार्ड में सीसी रोड, नाली, बिजली पोल एवं पानी पाईप लाईन लगाने की मांग की है। वार्ड वासियों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि कच्चे सड़क की वजह से पानी भराव एवं गदंगी की स्थिति निर्मित हो जाती है। जिससे स्कूली बच्चों सहित आमजनों को भी काफी परेशानियां होती है। कलेक्टर ने आयुक्त नगर निगम को इस पर आवश्यक कार्यवाही करने कहा। सकरी तहसील के ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत कोपरा में तालाब निर्माण के लिए प्रस्तावित जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्र में तालाब निर्माण के लिए खसरा नंबर 81 और 82 की जमीन ग्राम सभा से स्वीकृत है। कुछ लोगों ने इस प्रस्तावित जमीन पर खेत बनाना शुरू कर दिया है और ट्रैक्टर से लगातार जुताई का काम जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले सरपंच द्वारा इस कार्य को रुकवाया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से उसी जमीन पर खेती शुरू कर दी गई। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित लोगों द्वारा किए जा रहे कब्जे और खेती के कार्य को तुरंत रोका जाए तथा प्रस्तावित तालाब की जमीन को सुरक्षित रखा जाए। कलेक्टर ने एसडीओ तखतपुर को प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।         जनदर्शन में राजस्व अभिलेखों में नाम सुधार, पुराने मिसल अभिलेख में त्रुटि संशोधन तथा जाति प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े आवेदन भी प्राप्त हुए। कुछ आवेदकों ने आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने, किसान सम्मान निधि नहीं मिलने तथा बैंक एवं वित्तीय संस्था से संबंधित बकाया भुगतान की समस्याएं भी रखीं। इसके अलावा दुकान का जप्त सामान या राशि वापस दिलाने एवं आवास ऋण से जुड़ी शिकायतें भी प्राप्त हुई। कलेक्टर ने सभी आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच कर नियमानुसार शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। जनदर्शन में प्राप्त सभी आवेदनों को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया। रचना/110/324 –00–

JJM घोटाला: राजस्थान में ACB ने मारा ताबड़तोड़ छापा, 15 संदिग्धों की पहचान

जयपुर  राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार सुबह बड़ा एक्शन लिया। एसीबी की टीमों ने राजस्थान सहित कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर 15 आरोपियों के ठिकानों पर सर्च अभियान शुरू किया। कार्रवाई की जद में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी शामिल हैं। एसीबी सूत्रों के अनुसार, जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 स्थानों पर तड़के दबिश दी गई। छापेमारी के दौरान आधा दर्जन से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। टीमों ने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। बाड़मेर रेलवे स्टेशन से एक्सईएन हिरासत में कार्रवाई के तहत पीएचईडी जोधपुर में तैनात एक्सईएन विशाल सक्सेना को मंगलवार सुबह करीब 5 बजे बाड़मेर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया गया। जानकारी के मुताबिक, सक्सेना विरात्रा माता मंदिर में दर्शन के लिए ट्रेन से बाड़मेर पहुंचे थे। एसीबी की टीम पहले से स्टेशन पर मौजूद थी। जैसे ही वे ट्रेन से उतरे, टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर जयपुर रवाना कर दिया। सूत्रों का कहना है कि विशाल सक्सेना की भूमिका टेंडर प्रक्रिया और फर्जी सर्टिफिकेट मामले में संदिग्ध पाई गई है। उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। SIT चार अहम मामलों की जांच में जुटी जल जीवन मिशन से जुड़े इस कथित घोटाले में एसीबी द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) चार प्रमुख मामलों की जांच कर रहा है। करीब 20 हजार करोड़ रुपए के स्पेशल प्रोजेक्ट से जुड़े टेंडर्स में अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। आरोप है कि टेंडर शर्तों में बदलाव कर बड़ी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। जांच में सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में साइट इंस्पेक्शन की विशेष शर्त जोड़ी गई थी, जिससे यह पहले से पता चल सके कि कौन-कौन सी फर्म भाग ले रही हैं। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। हालांकि बाद में वित्त विभाग ने इन टेंडर्स को निरस्त कर दिया था। अब एसीबी उन इंजीनियर्स की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिन्होंने यह शर्तें जोड़ी थीं। 55 करोड़ का फर्जी भुगतान जांच में यह भी सामने आया है कि श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को बिना कार्य किए 55 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। इस मामले में कुल 139 इंजीनियर जांच के दायरे में हैं। इनमें 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन शामिल बताए जा रहे हैं। एसीबी इस बात की भी जांच कर रही है कि भुगतान किस स्तर पर और किन अधिकारियों की अनुमति से किया गया। प्रारंभिक जांच में कई स्तरों पर लापरवाही और मिलीभगत की आशंका जताई गई है। इरकॉन के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट मामले का एक बड़ा पहलू इरकॉन कंपनी के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर करीब 900 करोड़ रुपए के टेंडर जारी करने से जुड़ा है। ये टेंडर कथित तौर पर श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को दिए गए। जांच में यह भी आरोप है कि जब मामला उजागर हुआ तो एक्सईएन स्तर पर जांच के नाम पर केरल जाकर एक रिपोर्ट पेश की गई, जिसे अब झूठा बताया जा रहा है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि इरकॉन के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने में किन-किन इंजीनियरों और अधिकारियों की भूमिका रही। कई राज्यों में समन्वित कार्रवाई एसीबी की इस कार्रवाई को समन्वित ऑपरेशन माना जा रहा है, जिसमें राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी टीमों ने एक साथ दबिश दी। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही गुप्त जांच के बाद की गई है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। जांच एजेंसी पूरे प्रकरण में वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है, ताकि घोटाले की पूरी साजिश और नेटवर्क का खुलासा हो सके। जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीबी की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासों का आधार बन सकती है।

रामविलास पासवान को ‘बेचारा’ कहने पर बिहार विधानसभा में बवाल

पटना. बिहार विधानसभा परिसर में मंगलवार को रामविलास पासवान के सम्मान के मुद्दे पर सियासी तापमान एक बार फिर बढ़ गया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेताओं और विधायकों ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और धरना पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान लोजपा (आर) के विधायकों ने रामविलास पासवान को “दूसरा अंबेडकर” बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर दलितों, वंचितों और गरीबों की आवाज बुलंद की। धरना दे रहे नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल की राजनीतिक संस्कृति हमेशा से दलित विरोधी रही है और पार्टी समय-समय पर दलित नेताओं का अपमान करती रही है। लोजपा (आर) विधायकों ने कहा कि रामविलास पासवान का अपमान दरअसल दलित समाज का अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने नारेबाजी करते हुए राजद से सार्वजनिक माफी की मांग की। उनका कहना था कि पासवान ने केंद्र और राज्य की राजनीति में रहकर सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती दी और हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। ऐसे नेता पर टिप्पणी करना दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है। विधानसभा परिसर में कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। लोजपा (आर) नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि राजद की ओर से स्पष्ट सफाई या माफी नहीं आती है तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। क्या है मामला? दरअसल, पिछले दिनों विधानसभा में राजद के विधायक कुमार सर्वजीत ने लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की प्रतिमा विधानसभा परिसर में लगाने की मांग की थी तब उन्होंने अपने संबोधन में रामविलास पासवान को बेचारा कह दिया।

हार्ट सर्जरी के 24 दिन बाद नौकरी पर लौटे मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी हार्ट सर्जरी के 24 दिन बाद नियमित रूप से कामकाज संभालेंगे। वह सिविल सचिवालय की पांचवीं मंजिल स्थित अपने कार्यालय से सभी प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा करेंगे। पिछले करीब 15–20 दिनों से वह वर्क फ्रॉम होम पर थे। 8 जनवरी की देर रात सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जांच में मेजर हार्ट अटैक की पुष्टि हुई। अगले दिन सर्जन डॉ. टीपीएस महंत की देखरेख में उनकी सर्जरी की गई। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उन्होंने धीरे-धीरे कामकाज दोबारा शुरू किया। उन्होंने अपने ओएसडी के माध्यम से संदेश जारी कर फाइलों के निपटारे की व्यवस्था तय की। मुख्य सचिव स्तर की फाइलें संबंधित अधिकारी अपने स्तर पर निपटाएंगे, जबकि मुख्यमंत्री को भेजी जाने वाली फाइलें सीधे प्रेषित की जाएंगी। 19 जनवरी को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ बैठक भी की। डिस्चार्ज के दिन आईएएस अधिकारियों के व्हाट्सऐप ग्रुप में संदेश साझा कर उन्होंने जानकारी दी कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार वे 15 दिन घर से काम करेंगे। वर्क फ्रॉम होम के बाद अब वह नियमित रूप से सचिवालय पहुंचेंगे। शुक्रवार को भी वे कुछ समय के लिए कार्यालय आए थे और जरूरी फाइलों का निपटारा किया था। दूसरा कार्यकाल और एक्सटेंशन 1990 बैच के आईएएस अनुराग रस्तोगी ने जून 2025 में 60 वर्ष पूरे किए। वह हरियाणा के पहले ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें दो बार मुख्य सचिव बनने का अवसर मिला। केंद्र सरकार ने राज्य की सिफारिश पर उन्हें एक वर्ष का सेवा विस्तार भी दिया है। मुख्य सचिव बनने से पहले वह वित्त आयुक्त, राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) के पद पर कार्यरत थे।