samacharsecretary.com

दूध नदी पर पुल और पहुंच मार्ग के लिए 16.15 करोड़ स्वीकृत

दूध नदी पर पुल और पहुंच मार्ग के लिए 16.15 करोड़ स्वीकृत कोदाभाठ-माटवाड़ा मोदी मार्ग में बनेगा उच्च स्तरीय पुल उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का पत्र जारी रायपुर  राज्य शासन ने कांकेर जिले में दूध नदी पर पुल और पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 16 करोड़ 14 लाख 71 हजार रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से कोदाभाठ-माटवाड़ा मोदी मार्ग पर दूध नदी पर उच्च स्तरीय पुल और पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति का पत्र प्रमुख अभियंता को जारी कर दिया है।  लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। राज्य शासन ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

एक RTI, बार-बार शिकायत पर हरियाणा सूचना आयोग सख्त, अब देना होगा शपथपत्र

 चंडीगढ सूचना का अधिकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन एक ही आरटीआइ आवेदन और विषय को लेकर बार-बार शिकायत या अपील दायर करने को वैधानिक अधिकार की आड़ में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की। आयोग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि सूचना मांगने का अधिकार किसी व्यक्ति को एक ही कारण और विषय पर बार-बार कार्यवाही शुरू करने का असीमित अधिकार नहीं देता। आयोग ने कहा कि आरटीआइ कानून को इस तरह लागू किया जाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े तथा सरकारी विभागों और आयोग के सीमित संसाधनों का अनावश्यक दोहन न हो। मामला पलवल निवासी श्रवण कुमार की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी एवं राज्य लोक सूचना अधिकारी पलवल के खिलाफ दायर शिकायत से जुड़ा है। संबंधित आरटीआइ आवेदन 24 अगस्त 2025 को दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से आयोग को बताया गया कि इसी आरटीआइ आवेदन के आधार पर पहले भी दो अलग मामलों में शिकायतें दायर की जा चुकी हैं। इतना ही नहीं, वर्तमान शिकायत में शामिल आरटीआइ आवेदन पहले दाखिल किए गए आवेदन के बिल्कुल समान था। आयोग को यह भी बताया गया कि श्रवण कुमार से संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ करीब 36 मामले आयोग के समक्ष लंबित हैं। इसके अलावा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक के कार्यालयों में करीब 130 से 150 आरटीआइ आवेदन भी दाखिल किए गए हैं। राज्य सूचना आयुक्त डा. अजय सूरा ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि आयोग के समक्ष पहले से दाखिल प्रत्येक आरटीआइ मामले तथा भविष्य में दायर की जाने वाली शिकायत या अपील के साथ श्रवण कुमार को शपथपत्र देना होगा। इसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि संबंधित आरटीआइ आवेदन और विषय को लेकर उन्होंने पहले कोई अन्य शिकायत या अपील दाखिल नहीं की है। आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक के समक्ष लंबित आरटीआई आवेदनों के लिए भी इसी तरह का शपथपत्र देने का निर्देश दिया है। भविष्य में इन अधिकारियों के समक्ष दाखिल होने वाले प्रत्येक आरटीआइ आवेदन के साथ भी ऐसा शपथपत्र लगाना अनिवार्य होगा। संसाधनों के दोहराव पर आयोग की चिंता आयोग ने कहा कि एक ही आरटीआइ आवेदन से बार-बार शिकायतें दायर होने पर कार्यवाही दोहराई जाती है। इससे आयोग और संबंधित लोक प्राधिकरण के समय और संसाधनों की अनावश्यक खपत होती है। सुनवाई के दौरान जब शिकायतकर्ता से बार-बार शिकायत दाखिल करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि यदि एक शिकायत का फैसला हो चुका है तो अन्य शिकायतों का भी उसी आधार पर निपटारा किया जा सकता है। आयोग ने पूर्व न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आरटीआइ के कानूनी अधिकार का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। लोक प्राधिकरणों पर इतनी अधिक शिकायतों और आवेदनों का बोझ भी नहीं डाला जा सकता कि सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में उनका अधिकांश समय और संसाधन ही खर्च होने लगे।

जमुई में छात्रा से दरिंदगी वाली जगह पर पहले भी छेड़छाड़ के आरोप, राहगीर ने बचाई पीड़िता

पटना बिहार के जमुई जिले में जिस जगह पर लड़की से हैवानियत हुई थी वो जगह महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि जमुई-लखीसराय मार्ग से सटे मदन रोड पर आए दिन महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटना होती थी। एक सप्ताह पहले भी एक महिला का कुछ मनचलों ने रास्ता रोका था और अश्लील फब्तियां कसी थी। गनीमत थी कि उस होकर गुजर रहे कुछ राहगीरों के कारण महिला की आबरू बच गई थी। इस इलाके की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व उनकी बहू उसी रास्ते से होकर जा रही थी। तभी कई युवकों ने उनकी बहू का रास्ता रोक लिया और अश्लील टिप्पणियां की। वे उसे आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे। इस दौरान कुछ लोग उस होकर गुजर रहे थे, जिस कारण उनकी बहू की इज्जत बच गई। बुजुर्ग महिला ने यह भी कहा कि इस रास्ते से होकर स्कूल जाने वाली लड़कियों के साथ हर दिन छेड़छाड़ होती है। बदमाश उनकी साइकिल के आगे बाइक खड़ी कर गंदी-गंदी बातें करते हैं। इस कारण से कई लड़कियों ने उस रास्ते से होकर स्कूल जाना तक छोड़ दिया है। इतना सब होने के बावजूद पुलिस को इन सब बातों की भनक नहीं लगी। और फिर बड़ी घटना घटने के बाद जमुई ही नहीं पूरा बिहार शर्मसार हो गया। मदन रोड होकर बालू और देसी शराब की तस्करी की चर्चा स्थानीय लोगों में इस बात की चर्चा है कि मदन रोड मनचले युवकों का अड्डा बन गया था। हर दिन छेड़खानी की घटनाएं आम होती थी। स्थानीय लोग बताते हैं कि लखीसराय के चानन से वह इलाका सटा हुआ है। लोगों में इस बात की चर्चा है कि जंगली इलाके में देसी शराब बनाई जाती है और कुंदर बराज होकर इसी रोड से जमुई के कई गांव में सप्लाई होती है। इतना ही नहीं बगैर घाट नीलामी के सुबह से लेकर शाम तक बालू का अवैध उत्खनन और परिवहन भी उसी रास्ते से होता है। जब पुलिस कप्तान विश्वजीत दयाल ने स्वयं रेकी की तो पता चला कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चल रहा है। एक सप्ताह पहले सिविल ड्रेस में बाइक पर सवार होकर एसपी उस इलाके में पहुंचे थे और अवैध बालू लदे नौ ट्रैक्टर को जब्त करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार भी किया था। घटनास्थल पर खड़ी कार में बैठे युवक ने बचाई थी छात्रा की आबरू मदन रोड पर बदमाशों ने जिस समय छात्रा के साथ दरिंदगी हो रही थी, उस समय मौके पर मौजूद एक कार सवार ने छात्रा को वहां से निकलने में काफी मदद की। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह जमुई का रहने वाला है। घटना के दौरान वह उस होकर कहीं जा रहा था। बीच सड़क पर छात्रा के साथ हैवानियत होता देख उसने अपनी कार वहां रोक दी और आरोपियों के साथ उलझ गया। इस दौरान उसके साथ भी मारपीट की गई। हालांकि उसने तबतक आरोपियों का विरोध किया जबतक छात्र और छात्रा वहां से निकल नहीं गए। उक्त युवक सामने नहीं आना चाहता लेकिन छात्रा की आबरू बचाने में उसने अहम भूमिका निभाई।

खालसा मार्च में खलल की आशंका, प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की अपील

अमृतसर एसजीपीसी की ओर से निकाले जा रहे मीरी-पीरी खालसा मार्च के अंतिम चरण के दौरान संभावित खलल को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय ने प्रशासन को सतर्क किया है। सचिवालय के इंचार्ज बगीचा सिंह ने कहा कि विश्वसनीय जानकारी मिली है कि कुछ शरारती तत्व अंतिम दो दिनों में मार्च में व्यवधान पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का तीसरा चरण 25 सितंबर को श्री अकाल तख्त साहिब में संपन्न होगा। पहले, दूसरे और तीसरे चरण के दौरान पंजाब के सैकड़ों गांवों, शहरों और कस्बों में सिखी के प्रचार-प्रसार का अभियान चलाया गया। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह समेत प्रमुख धार्मिक हस्तियों और प्रचारक जत्थों ने संगत को संबोधित किया। सचिवालय के मुताबिक, मार्च के दौरान बड़ी संख्या में सिख युवाओं ने सिख स्वरूप बनाए रखने और नशे से दूर रहने का संकल्प लिया है। बगीचा सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी शह पर मार्च में खलल डालकर संगत में इसके प्रति नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने भी चेतावनी दी है कि यदि अंतिम दो दिनों में किसी व्यक्ति की ओर से मार्च में व्यवधान पैदा किया जाता है और संगत उसका विरोध करती है तो ऐसी स्थिति के लिए पंजाब सरकार और संबंधित प्रशासन जिम्मेदार होगा।  श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय ने अमृतसर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मार्च के निर्धारित पड़ावों और रूट पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए। साथ ही संभावित शरारती तत्वों की पहचान कर किसी भी अप्रिय घटना को पहले ही रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

अतिक्रमण जांच के दौरान हंगामा, ग्रामीणों और टीम में झूमाझटकी

गरियाबंद. करका के जंगल में अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई की जांच करने पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। विभाग के अनुसार करीब 50 से 60 ग्रामीणों ने टीम को सरकारी कार्रवाई से रोकने की कोशिश की, जिसके चलते मौके पर विवाद, धक्का-मुक्की और झूमाझटकी की स्थिति बन गई। हालांकि गनीमत रही कि घटनाक्रम में किसी वन अधिकारी या कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है और मामला किसी बड़ी घटना में तब्दील नहीं हुआ। जंगल का निरीक्षण करने पहुंची टीम, मौके पर गरमाया माहौल वन विभाग की टीम करका क्षेत्र में कथित अतिक्रमित वनभूमि का निरीक्षण और कार्रवाई के लिए पहुंची थी। विभाग के अनुसार टीम जब कथित अतिक्रमित क्षेत्र की ओर आगे बढ़ी तो बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और शासकीय कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने की कोशिश की गई। विभाग का आरोप है कि इस दौरान ग्रामीण मुकेश मरकाम को मौके से ले जाया गया। मुकेश की ओर से पूरी घटना की वीडियोग्राफी किए जाने की बात भी विभाग ने कही है। मामले में वीडियो साक्ष्य के साथ थाना खल्लारी में FIR के लिए आवेदन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। जंगल की जमीन पर कब्जे का आरोप करका की मौजूदा कार्रवाई को समझने के लिए इसका पुराना इतिहास भी महत्वपूर्ण है। करका कभी एक वन ग्राम था और सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में तत्कालीन सीतानदी अभयारण्य के अंतर्गत आता था। सोंढूर बांध के निर्माण के बाद वर्ष 1980 के दशक में करका गांव का विस्थापन किया गया था। उपलब्ध विभागीय अभिलेखों के अनुसार करका के 55 व्यक्तियों को जल संसाधन विभाग द्वारा मुआवजा दिया गया था। इसके बावजूद वन विभाग के अनुसार बाद में इसी क्षेत्र की ऊंचाई पर स्थित वनभूमि पर फिर अतिक्रमण और वन कटाई की गतिविधियां सामने आईं। यानी गांव को हटाने और मुआवजा देने के दशकों बाद भी जंगल की जमीन को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ। 30 हजार पेड़ों की कटाई का प्रारंभिक अनुमान 22 सितंबर 2026 को किए गए मैदानी निरीक्षण में वन विभाग को 1,100 से ज्यादा पेड़ों पर गर्डलिंग और बड़ी संख्या में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ मिले। विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार वर्ष 2016 से 2017 के बीच करीब 30 हजार पेड़-पौधे काटे जाने के संकेत मिले हैं। GPS आधारित आकलन में लगभग 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण के संकेत मिले हैं। हालांकि विभाग के अनुसार अंतिम क्षेत्रफल का निर्धारण DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद किया जाएगा। 22 हेक्टेयर से शुरू हुआ मामला, अब 35 हेक्टेयर तक जांच वर्ष 2016 में भी करका से जुड़े 22 व्यक्तियों के खिलाफ करीब 22 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर POR दर्ज किया गया था। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में नगरी न्यायालय ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था। अब वन विभाग सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फुटेज, GPS/DGPS मैपिंग और मैदानी साक्ष्यों के आधार पर क्षेत्र की स्थिति का दोबारा आकलन कर रहा है। जंगल बचाने की कार्रवाई या फिर पुराना विवाद? करका का मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र वन्यजीवों और हाथियों के आवागमन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया गया है। विभाग के अनुसार जंगल का लगातार क्षरण होने से वन्यजीवों के आवागमन मार्ग प्रभावित हो सकते हैं और भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बढ़ सकती है। USTR का दावा है कि पिछले चार वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि मुक्त कराई गई है। अब करका में कार्रवाई के दौरान हुआ विवाद इस पुराने अतिक्रमण मामले को फिर चर्चा में ले आया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि जंगल में कितने पेड़ कटे और कितनी जमीन पर कब्जा हुआ सवाल यह भी है कि जिस करका को दशकों पहले बांध के लिए मुआवजा देकर विस्थापित किया गया था, उसकी वनभूमि पर दोबारा कब्जे की कहानी आखिर इतनी लंबी कैसे हो गई?

जहरीली शराब कांड में बड़ी कार्रवाई, 30 हजार का इनामी आरोपी एनकाउंटर के बाद पकड़ा

 सागर  जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपितों में से एक मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर को  तड़के एक संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। मुठभेड़ में पुलिस की गोली मनीष के पैर में लगी। पुलिस के मुताबिक यह मुठभेड़ मालथौन थाना क्षेत्र के नोनिया-सेसई रोड घाटी पर हुई। इसमें उसका साथी आशीष साहू भी घायल हुआ है। मनीष की गिरफ्तारी पर पुलिस ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस की घेराबंदी पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि मनीष लोधी और आशीष साहू बाइक से मड़ावरा-नोनिया क्षेत्र की ओर आ रहे हैं। सूचना पर थाना बंडा और विनायका पुलिस की टीमों ने घेराबंदी की। बुधवार सुबह करीब तीन बजे दोनों आरोपित बाइक से आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने को कहा तो आरोपितों की ओर से पुलिस टीम पर फायर किया गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें से एक गोली आरोपित मनीष लोधी के पैर में लगी। उसका साथी आशीष साहू भागते समय गिरने से चोटिल हो गया। कट्टा-कारतूस-चाकू जब्त पुलिस टीम ने मनीष के पास से 12 बोर का देसी कट्टा और आशीष के पास से 15 बोर का कट्टा, एक जिंदा कारतूस, आठ खाली कारतूस, चाकू, बेसबाल का डंडा बरामद किया है। उनकी बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। पुलिस ने दोनों को घायल हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है। जहरीली शराब से हुईं 40 से ज्यादा मौतें बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से अब तक 41 लोगों की मौत की बात सामने आ चुकी है। प्रशासन ने 20 मौतों की बात स्वीकार की है। पुलिस ने इस मामले में कुल 52 आरोपितों को चिह्नित किया है। इनमें से अब तक 39 की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें शराब बनाने वाले और गांव में अवैध शराब बेचने वाले दो आरोपितों की मौत भी जहरीली शराब पीने के कारण हो चुकी है। जहरीली शराब कांड के सूत्रधारों में से एक पुलिस ने बताया कि मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर शराब ठेकेदार था। जहरीली शराब बनाने और बेचने के धंधे के मुख्य सूत्रधारों में उसकी भूमिका थी। मनीष ने ही अपने नेटवर्क के जरिए नकली शराब को सरकारी ठेकों और गांव-गांव की दुकानों तक पहुंचाया था। आशीष साहू इसमें उसका सहयोगी था। मनीष पर पहले से 11 मामले पुलिस के अनुसार मनीष लोधी के खिलाफ कुल 11 अपराध दर्ज हैं। वर्ष 2010 में उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम का पहला मामला दर्ज हुआ था। वर्ष 2012 में भी वह शराब तस्करी के मामले में पकड़ा गया था। उसके खिलाफ छह आबकारी प्रकरण दर्ज हैं। वहीं आशीष साहू के खिलाफ तीन आबकारी अपराध दर्ज होना सामने आया है।  

मध्य प्रदेश में 600 परिवारों को नौकरी, 859 में से नियुक्ति पत्र जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों पर स्कूल शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है. लंबे समय से लंबित 859 अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में त्वरित निस्तारण करते हुए शिक्षा विभाग ने दो दिनों में 600 अनुकंपा नियुक्ति देने के आदेश जारी किए हैं. स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा "बाकी बचे 30 आदेश भी अगले दो दिन के भीतर जारी कर दिए जाएंगे. नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद अभ्यर्थियों को जल्द जॉइनिंग लेने के निर्देश दिए गए हैं।  859 में से 600 अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से अटके पड़े अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में आदेश जारी करने में तेजी दिखाई गई है. स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, "संवेदनशीलता से समाधान, परिवारों को आर्थिक संबल. मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के त्वरित निराकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशील पहल एवं अपेक्षा के अनुरूप लगभग 859 लंबित प्रकरणों में से 600 अनुकंपा नियुक्ति आदेश विगत दो दिवस में जारी किए जा चुके हैं।  अगले दो दिन में जारी हो जाएंगे 30 और आदेश स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर आगे लिखा, "लगभग 30 और आगामी दो दोनों में जारी किए जाएंगे. शेष प्रकरणों में भी पूरी संवेदनशीलता के साथ आवश्यक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. हमारा प्रयास है कि दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को समय पर आर्थिक संबल और सम्मानजनक जीवन का आधार मिल सके।  स्कूल शिक्षा विभाग में लंबे समय से 859 अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण लंबित थे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों की बैठक बुलाई. इससे पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग सक्रिय हुए और बीत दो दिन में 600 अनुकंपा नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए. इसके लिए मंगलवार शाम से देर रात तक दस्तावेजों की जांच और नियुक्ति आदेश जारी करने का काम जारी था। 

नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत

नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बस्तर की नारंगी बहुउद्देशीय बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 99 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। सर्वेक्षण कार्य कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

भोपाल में दुकानों पर बड़ा एक्शन, गलियों में कारोबार पर लगेगी रोक; पार्किंग भी जरूरी

भोपाल  भोपाल में रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों और सीलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को करीब 3 घंटे सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीलिंग में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कहा- रहवासी इलाकों में कारोबार नहीं होना चाहिए और स्पष्ट रूप से रहवासी उपयोग वाली जगहों पर सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहेगी। कोर्ट ने कहा- जिन जगहों का लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या जहां मिक्स्ड लैंड यूज है, वहां कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। भोपाल में कई जगह निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। इसी सुनवाई में 21 साल से अटके भोपाल के नए मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट को जारी करने की मंजूरी भी मिल गई। सरकार फाइनल प्रकाशन से पहले कोर्ट को इसकी जानकारी देगी। नए मास्टर प्लान के लागू होने तक सीलिंग की कार्रवाई नहीं रुकेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। 10 शिकायतें पहुंचीं, शाम को खुल रहे थे सील दुकानें सुनवाई से पहले भोपाल के रहवासियों की करीब 10 शिकायतें एमिकस क्यूरी एके सिन्हा के जरिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं। शिकायतों में कहा गया कि नगर निगम ने अगस्त में जिन प्रतिष्ठानों को सील किया था, उनमें से कई सुबह बंद रहते हैं, लेकिन शाम होते ही दोबारा खुल जाते हैं। इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी आया कि कागजों पर कार्रवाई के बावजूद जमीन पर उसका असर कई जगह दिखाई नहीं दे रहा है। अब नई कमेटी नहीं बनेगी सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए केएन नटराजन ने कोर्ट को बताया कि सरकार से इस संबंध में बात हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। सीलिंग की कार्रवाई में रुकावट नहीं डाली जाएगी। दरअसल, पहले राज्य सरकार ने सीलिंग से जुड़े मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। बाद में कमेटी बनाने को लेकर अवमानना का मुद्दा भी उठा। एमिकस क्यूरी एके सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि सरकार की ओर से कमेटी बनाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना के दायरे में आता है। सरकार के आश्वासन के बाद कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। हालांकि, अवमानना की कार्रवाई होगी या नहीं, यह लिखित आदेश से स्पष्ट होगा। 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया सरकार ने कोर्ट को बताया कि भोपाल के लिए 1995 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं आया। 2005 में लागू किया गया मास्टर प्लान भी अपनी अवधि पूरी कर चुका है। इसके बावजूद शहर का विकास पुराने मास्टर प्लान के आधार पर किया जा रहा है। सरकार ने बताया कि नए मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट तैयार है। इसी ड्रॉफ्ट को जारी करने की अनुमति सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी। 8,084 प्रतिष्ठानों को मिले थे नोटिस सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई शुरू की थी। निगम ने शहरभर में नोटिस बांटे थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने की प्रक्रिया चली। नगर निगम की सूची में कुल 62,500 दुकानें दर्ज थे। इनमें से 8,084 दुकानों को नोटिस दिए गए। इसके बाद करीब 190 दुकानों को तीन दिन के लिए बंद या सील किया गया था। व्यापारियों के विरोध के बाद 22 दिन से रुकी थी कार्रवाई नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था। विरोध के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी थी। मंगलवार की सुनवाई से पहले करीब 22 दिन से सीलिंग की कार्रवाई नहीं हुई थी। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि निगम ने गलत कार्रवाई दिखाने वाले दस्तावेज कोर्ट में पेश किए और जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, वे बाद में दोबारा खुल गए। अगस्त में 10 सदस्यीय कमेटी पर लगी थी रोक इस मामले में अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच कमेटी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ओर से दुकान संचालकों को दिए गए सभी राहत और स्टे आदेश भी रद्द कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई पहले 15 सितंबर को होनी थी, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद मंगलवार को कोर्ट में करीब तीन घंटे तक मामले पर सुनवाई हुई। नियम तोड़ने पर एक्शन नगर निगम की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ढोल ग्यारस को देखते हुए जोन क्षेत्र में निरीक्षण किया। इस दौरान दो स्थानों पर मांस की दुकानें संचालित मिलीं। नगर निगम द्वारा त्योहार के अवसर पर निर्धारित प्रतिबंधों के बावजूद दुकानें खुली मिलने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई की। प्रतिबंधित अवधि में दुकान खोलने पर होगी कार्रवाई नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के दौरान निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों का पालन कराना निगम की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान यदि प्रतिबंधित अवधि में मांस की दुकानें खुली मिलती हैं तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी। जोन क्रमांक 11 के स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मांस विक्रेताओं के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भी क्षेत्र में निरीक्षण जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।  अब तक ऐसे रहे मास्टर प्लान के ड्राफ्ट     अगस्त 2009 में ड्राफ्ट-2021 जारी हुआ। 2008 से तैयारी शुरू हुई। 813.92 वर्ग किमी क्षेत्रफल व 196 गांवों को शामिल किया था। बड़ा तालाब कैचमेंट- एफटीएल और ग्रीन बेल्ट के नियमों व सर्वे में गलतियों से विरोध हुआ। यह अधिसूचित नहीं हो सका। इसे ही नए सिरे से बनाने के लिए 2011 में कमेटी बनाई। … Read more

कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत

कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर  छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा कबीरधाम जिले विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 15 करोड़ 86 लाख 8 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।    जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में कबीरधाम जिले के नरसिंहपुर जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का मरम्मत कार्य के लिए एक करोड़ 71 लाख 47 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 45 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया के कामठी जलाशय के नहरों का लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 98 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 112 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया की मोहपार जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का जीर्णेाद्धार तथा लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 99 लाख 15 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना के कार्य पूर्ण होने से 95 हेक्टेयर क्षेत्र मंे सिंचाई सुविधा मिलेगी।     इसी तरह से विकासखण्ड सहसपुर लोहारा की दमऊनाला व्यपवर्तन के नहर का लाईनिंग कार्य के लिए 3 करोड़ 76 लाख रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 75 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। छिरहा डायवर्सन के गेट उन्नयन एवं नहर लाईनिंग कार्य एवं पक्के संरचनाओं का निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 31 लाख 72 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 48 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।