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शादी में मामा का तोहफा: 81 लाख नकद, 25 तोला सोना और 1 करोड़ 61 लाख का मायरा

नागौर राजस्थान के नागौर जिले के जायल में एक बार फिर मायरा की चर्चा छा गई है, लेकिन इस बार जाट समाज के बाद ब्राह्मण भाइयों ने इतिहास रच दिया. यहां दो ब्राह्मण भाइयों ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री देवी के बेटे नीलेश की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का भव्य मायरा भरा. यह ब्राह्मण समाज में अब तक का सबसे बड़ा मायरा माना जा रहा है, जिसने जायल की परंपरा को नई ऊंचाई दी है. यह रस्म जायल के माहेश्वरी भवन में पारंपरिक विधि-विधान से पूरी हुई. पिता श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में भाइयों ने बहन गायत्री को चुनरी ओढ़ाकर मायरा भरा. यह न सिर्फ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है, बल्कि ब्राह्मण समाज की एकता, संस्कार और परंपरा को भी दर्शाता है. ब्रॉम्हण भाइयों के मायरे की खास बातें – 81 लाख रुपये नकद – 25 तोला सोना – चांदी के जेवरात – अन्य कपड़े, उपहार और सामान जायल का मायरा है एक ऐतिहासिक परंपरा  राजस्थान के नागौर जिले में जायल-खिंयाला का मायरा सदियों पुरानी संस्कृति का हिस्सा है. यहां मामा (भाई) अपनी बहन के बच्चों की शादी में दिल खोलकर उपहार देते हैं, जिसे महिलाएं विशेष गीतों (जायल खिंयाला रो मायरो) में गाती हैं. पहले मुख्य रूप से जाट समुदाय में बड़े मायरे चर्चित थे, लेकिन अब अन्य समाज भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. आपको बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में नागौर में कई बड़े मायरे भरे गए हैं. जिसके तहत कुछ परिवारों ने करोड़ों की जमीन, नकद, सोना-चांदी दिए. जबकि हाल ही में 21 करोड़ से ज्यादा के मायरे भी सुर्खियां बने. लेकिन इस बार ब्राह्मण समाज का यह योगदान खास है. क्योंकि यह समाज में एक नई मिसाल कायम कर रहा है. आज भी जीवंत हैं राजस्थान की परंपरा जायल क्षेत्र में इस ऐतिहासिक मायरे की हर ओर चर्चा है. भाई-बहन का प्यार, परंपरा का सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का जीता-जागता उदाहरण भी है. साथ ही यह मायरा बताती है कि राजस्थान की रस्में आज भी जीवंत हैं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कारों से मजबूत होते हैं.   

आयुर्वेद के संवर्धन में सरकार का कदम, भजनलाल शर्मा ने किया स्पष्ट बयान

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी में आयुर्वेद की जड़ें गहरी हैं, यहां औषधि उत्पादन की अद्भुत क्षमता है। प्रदेश की पहाड़ी, वन, औषधीय पौधे इसके साक्षी हैं कि यहां की भूमि सदियों से आयुर्वेद का केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आयुर्वेद के संवर्धन तथा जनमानस में उसके व्यापक उपयोग के लिए प्राथमिकता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने  राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने उद्बोधन के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान एक महाविद्यालय के रूप में आरंभ होकर आज देश के प्रमुख डीम्ड टू बी आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हो गया है। राजस्थान की धरती पर स्थापित इस संस्थान ने पचास वर्षों में जिस ऊंचाई, प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय नेतृत्व को प्राप्त किया है, वह प्रेरणास्पद है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोगी सेवा – इन चारों स्तंभों पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने पिछले पांच दशकों में नेतृत्व स्थापित किया है। देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की प्रमुख भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की प्रमुख भूमिका रही है। आयुर्वेद के माध्यम से हम यह पहले से ही जान लेते हैं कि कौन से महीने में कौन सी बीमारी होगी और उसका उपचार कैसे किया जाए। उन्होंने कहा कि वेदों के साथ हमारे ऋषियों ने आयुर्वेद के माध्यम से मानव जीवन को समझा है। चरक, सुश्रुत, वाग्भट्ट जी जैसे महान वैद्यों ने इस विद्या को व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने कहा कि चरक संहिता में कहा गया है कि स्वस्थ शरीर धर्म का प्रथम साधन है। सुश्रुत को आज पूरा विश्व शल्य चिकित्सा का जनक मानता है। प्रधानमंत्री का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक अलग आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई। जिससे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराया। इससे न केवल योग, बल्कि पूरी भारतीय चिकित्सा परंपरा को विश्व मंच पर पहचान मिली। आयुर्वेद अनुसंधान में निवेश बढ़ाया गया, आयुर्वेद संस्थानों का विस्तार किया गया। आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाना हमारी प्राथमिकता शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में आयुर्वेद के लिए नए आयुर्वेद चिकित्सालय, महाविद्यालय एवं डिस्पेंसरी की स्थापना से सुलभ चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की गई। स्नातक-स्नातकोत्तर सीटों में वृद्धि, आधुनिक लैब, ड्रग-स्टैंडर्डाइजेशन यूनिट और शिक्षण-फार्मेसी को सुदृढ़ किया गया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद अस्पतालों का विस्तार, पंचकर्म इकाइयों का सुदृढ़ीकरण, दवाखानों का आधुनिकीकरण, शिक्षा एवं अनुसंधान के नए अवसर सहित विभिन्न निर्णयों से आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने एनआईए के लिए जयपुर में जमीन आवंटित करने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। एनआईए की भूमिका से पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद का दीपक प्रज्वलित केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय प्रताप राव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्ष की यह यात्रा केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि उन असंख्य चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, और कर्मयोगियों की अटूट निष्ठा, समर्पण और तपस्या का प्रतीक है, जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद के दीपक को प्रज्वलित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोगों की असंतुलित जीवनशैली के कारण मधुमेह, विटामिन बी 12 एवं डी की कमी जैसी अनेक बीमारियां पनप रही हैं। इन बीमारियों के निदान के लिए योग एवं आयुर्वेद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शक्तिशाली नेतृत्व में हमारी सरकार का विजन स्पष्ट है परंपरा की जड़ों में विज्ञान का संरक्षण और कल्याण की शाखाओं का विस्तार। भारत सरकार का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त और संतुलित व्यवस्था का निर्माण करना है। उन्होंने इस वर्ष के बजट में आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थान सहित सभी घोषणाओं के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान में आयुष के क्षेत्र में हो रहे उल्लेेखनीय कार्य की भी सराहना की। उप मुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना लाकर आयुर्वेद और योग के माध्यम से आरोग्य ग्राम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व को आयुर्वेद और योग भारत की देन है। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेशनल आयुष मिशन में वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना के तहत राजस्थान को देश में सर्वाधिक 348 करोड़ रुपए आवंटित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एनआईए परिसर में नवनिर्मित ओपीडी सुश्रुत भवन का लोकार्पण किया। इससे पहले उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर विधायक बालमुकुन्द आचार्य, केन्द्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, एनसीआईएसएम अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोटेकर, प्रमुख शासन सचिव आयुष सुबीर कुमार, एनआईए कुलपति प्रो. संजीव शर्मा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े प्रत्येक प्रस्ताव में पर्यावरणीय जोखिम और जैव-विविधता का वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य: मुख्यमंत्री

वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में सभी विकास कार्य वैज्ञानिक मानकों और पर्यावरणीय संतुलन के साथ हों: मुख्यमंत्री वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े प्रत्येक प्रस्ताव में पर्यावरणीय जोखिम और जैव-विविधता का वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य: मुख्यमंत्री राज्य वन्यजीव परिषद की बैठक में विभिन्न जनपदों की अनेक विकास परियोजनाओं को मिली मंजूरी विकास की आड़ में अनावश्यक वृक्ष कटान नहीं, विकल्पों में इको-फ्रेंडली तकनीक अपनाई जाए: मुख्यमंत्री वेटलैंड्स प्राकृतिक धरोहर, सिल्ट हटाने का कार्य तत्काल कराया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित सभी विकास एवं निर्माण कार्य वैज्ञानिक मानकों, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव और विधिक प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुपालन के साथ ही किए जाएंगे। उन्होंने कहा है कि विकास की प्रत्येक प्रक्रिया में वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवागमन तथा आवासीय निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सोमवार को राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े सभी विकास प्रस्ताव संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ तैयार किए जाएं। प्रस्ताव भेजते समय संबंधित विभाग पर्यावरणीय जोखिम, जैव-विविधता पर संभावित प्रभाव, वन्यजीव मूवमेंट, वैकल्पिक मार्गों और आधुनिक तकनीकी समाधानों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित एवं टिकाऊ दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में विभिन्न वन्य जीव क्षेत्रों में विकास की विभिन्न परियोजनाओं पर निर्णय भी हुआ। परिषद के समक्ष कुल 12 नए प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें सड़क चौड़ीकरण, पेट्रोल पंप एवं फ्यूल स्टेशन स्थापना, ट्यूबवेल प्रेशर प्रणाली, भूमिगत पाइपलाइन, मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा संपर्क मार्ग निर्माण जैसी विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। ये प्रस्ताव इटावा, गोंडा, पीलीभीत, बरेली, बांदा सहित विभिन्न जनपदों के वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों तथा इको-सेंसिटिव जोन से संबद्ध हैं। बैठक में परियोजनाओं पर सहमति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने वृक्ष कटाई से संबंधित प्रस्तावों पर विशेषज्ञों की राय लेते हुए निर्देश दिए कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक वृक्ष कटान की अनुमति न दी जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वृक्षों की कटाई केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही की जाए और विकास की आड़ में पर्यावरण को क्षति न पहुँचे। जहां विकल्प उपलब्ध हों, वहां ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी, एलिवेटेड स्ट्रक्चर तथा इको-फ्रेंडली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं की गति और वन्यजीव संरक्षण, दोनों राज्य सरकार की प्राथमिकताएं हैं और उत्तर प्रदेश सरकार संतुलित, वैज्ञानिक तथा दूरदर्शी नीति के साथ इन दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वेटलैंड्स में सिल्ट जमा होने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है, जिसका तत्काल निराकरण कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यह कार्य ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अभियान के अंतर्गत कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटलैंड्स प्राकृतिक धरोहर हैं और प्रत्येक दशा में उनका संरक्षण किया जाना चाहिए।

प्रदेश में भूख नहीं, अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख परिवारों को मिला सरकारी सहारा

आर्थिक समीक्षा प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा, अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख परिवार लाभान्वित 78,510 उचित दर दुकानें संचालित, 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित 'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित लखनऊ  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा विधानमंडल में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार, गरीब एवं पात्र परिवारों को निःशुल्क और रियायती दरों पर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये प्रतिबद्ध है। इस हेतु पात्र परिवारों का चयन कर राशन कार्ड जारी किये गये हैं, जिनको डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। प्रदेश में दिसंबर, 2025 तक कुल 78,510 उचित दर दुकानें संचालित है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र की 67,114 तथा नगरीय क्षेत्र की 11,396 दुकाने हैं। इसमें 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित हैं। राज्य में दिसंबर, 2025 तक जारी कुल 362.35 लाख राशनकार्ड्स में अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख (11.27%) परिवार एवं पात्र गृहस्थी श्रेणी के 321.50 लाख (88 73%) परिवार हैं, जो उक्त अधिनियम के अन्तर्गत आच्छादित हैं। वन नेशन वन राशनकार्ड बना संबल वर्ष 2020-21 से प्रारम्भ वन नेशन बन राशनकार्ड' योजनान्तर्गत अन्तर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी (उत्तर प्रदेश के लाभार्थियों द्वारा अन्य राज्यों में प्राप्त किया) की सुविधा से वर्ष 2024-25 में 38.12 लाख राशनकार्ड धारक लाभान्वित हुए, जो योजना प्रारंभ के अग्रिम वर्ष 2021-22 में लाभान्वित 8.88 लाख के सापेक्ष (03 वर्षों में) कई गुना वृद्धि है। वर्ष 2025-26 के अंतर्गत दिसंबर, 2025 तक 28.03 लाख लाभान्वित हुए हैं। 'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' के तहत 7481 अन्नपूर्णा भवन 'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 31 जनवरी, 2026 तक कुल 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित कराये गये हैं, जिनमें राशन वितरण के साथ सी एस सी सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं। सी. पी. आई आधारित मुद्रास्फीति की दर कोविड के बाद लगातार गिरावट के साथ वर्ष 2025-26 में माह अक्टूबर, 2025 तक (-)1.71 हो गयी, जिसके फलस्वरूप महगाई नियंत्रित हुयी, क्रय शक्ति बढ़ी तथा मांग आधारित अर्थव्यवस्था में सुधार परिलक्षित हुआ। अद्यतन प्रकाशित बहुआयामी गरीबी (हेडकाउंट रेशियो आकलन) वर्ष 2013-14 में 42.59% थी. जो वर्ष 2022-23 में तेजी से घटते हुए 17.40% रह गयी, इस अवधि में प्रदेश के सर्वाधिक 5.94 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये।

कानपुर में नवजात की मृत्यु पर गुस्से का मंजर, राजा नर्सिंग होम के खिलाफ FIR दर्ज

 कानपुर बिठूर के ब्रह्मनगर स्थित राजा नर्सिंग होम में एनआईसीयू के भीतर वार्मर मशीन में आग लगने से नवजात बच्ची की जलकर मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर कराई गई जांच में सामने आया कि अस्पताल में बिना अनुमति के एनआईसीयू यूनिट संचालित की जा रही थी. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, नर्सिंग होम का पंजीकरण तो था, लेकिन एनआईसीयू संचालन की अनुमति कभी नहीं ली गई. इसके बावजूद परिसर में अवैध रूप से एनआईसीयू चलाया जा रहा था.  निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि समाप्त पाई गई, जो गंभीर सुरक्षा लापरवाही को दर्शाता है. इसके चलते मौके पर ही अवैध एनआईसीयू यूनिट को सील कर दिया गया. गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए राजा नर्सिंग होम (पंजीकरण संख्या RMEE2122829) का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर अस्पताल को पूरी तरह बंद करने के आदेश दिए गए हैं. प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस भी जारी किया गया है. आदेशों की अवहेलना करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. वहीं, पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर बिठूर थाने में अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है. उन्होंने सख्त एक्शन की मांग की है.  गौरतलब है कि यह घटना निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था को उजागर करती है. पहली संतान खोने वाले परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. स्थानीय प्रशासन अब अस्पताल की अन्य कमियों की भी फाइल खंगाल रहा है. पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. फिलहाल अस्पताल परिसर में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और स्वास्थ्य विभाग की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है.

इंदौर में नर्मदा लाइन का अड़चन: सड़क के बीच बिछी लाइन से एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने में होगी परेशानी

इंदौर  इंदौर में छह किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन उसे बनाना इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि जब बीआरटीएस कॉरिडोर पंद्रह साल पहले बनाया गया था, तब नर्मदा लाइन सड़क के बीच वाले हिस्से में डाली गई थी। इसके अलावा हर चौराहे पर सीवरेज के बड़े पाइप भी क्रॉस हुए हैं। यदि एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनता है तो जगह-जगह लाइनों को शिफ्ट करना होगा। इसमें काफी समय लगेगा।  बीआरटीएस निर्माण की समयसीमा दो साल तय की गई थी, लेकिन उसके बनने में पांच साल से अधिक का समय लगा, क्योंकि एबी रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी रहता है। ट्रैफिक को दूसरे रूटों पर भी ज्यादा डायवर्ट नहीं किया जा सकता है। यह परेशानी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने में भी आएगी। व्हाइट चर्च चौराहे पर पथरीली जमीन एलिवेटेड कॉरिडोर के कॉलम बनाने के लिए जमीन में गहरी खुदाई करना होगी। इसमें सबसे ज्यादा समय गीता भवन से जीपीओ के बीच लगेगा। यहां पथरीला हिस्सा है। सीवरेज लाइन बिछाने के लिए इस हिस्से में चट्टानें तोड़ने के लिए विस्फोट का इस्तेमाल किया गया था। यहां लाइन शिफ्ट करना पड़ी तो उसके लिए भी अलग से खुदाई करना होगी। लंबी दूरी का ट्रैफिक और होगा कम एलआईजी से भंवरकुआं या राजीव गांधी चौराहे तक शहरवासियों को जाना हो तो वे अब रिंग रोड का उपयोग करने लगे हैं, क्योंकि खजराना चौराहा, बंगाली चौराहा, वर्ल्ड कप चौराहा, पालदा चौराहा पर ब्रिज बनने से अब रिंग रोड पर समय कम लगता है। इस मार्ग पर मुसाखेड़ी और आईटी चौराहे पर भी ब्रिज बन रहे हैं। इसके बाद ट्रैफिक और आसान हो जाएगा। एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर याचिका लगाने वाले अतुल शेठ का कहना है कि रिंग रोड के कारण वैसे ही एबी रोड के ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। इस कारण एलिवेटेड कॉरिडोर ज्यादा उपयोगी साबित नहीं होगा। पहले जब इसे लेकर सर्वे हुआ था, तब ट्रैफिक चार प्रतिशत आया था।

इंदौर नगर निगम की पहल: 72 घंटे में मृत्यु प्रमाण पत्र अब होगा ईमेल पर उपलब्ध

इंदौर  इंदौर नगर निगम ने नागरिकों को बड़ी राहत देने वाली नई व्यवस्था लागू की है। अब घर पर होने वाली मृत्यु के मामलों में मृत व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र 72 घंटे के भीतर परिजनों के ईमेल पर भेजा जाएगा। इसके लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने या किसी तरह का आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।  पहले घर भेजा जाता था प्रमाण पत्र महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि पहले नगर निगम की ओर से मृत्यु होने पर 72 घंटे के भीतर शोक संदेश के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र मृतक के घर भिजवाया जाता था। बाद में जन्म–मृत्यु के राष्ट्रीय पोर्टल से नगर निगम पोर्टल के जुड़ने के कारण यह व्यवस्था बंद हो गई थी। संशोधित रूप में फिर लागू हुई व्यवस्था महापौर ने बताया कि अब राष्ट्रीय पोर्टल से जुड़े रहते हुए इस व्यवस्था को संशोधित स्वरूप में फिर से लागू किया गया है। मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार के समय यदि यह जानकारी दी जाती है कि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु घर पर हुई है, तो परिजनों द्वारा दिए गए ईमेल एड्रेस पर 72 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र भेज दिया जाएगा। नगर निगम आने की जरूरत नहीं इस नई व्यवस्था के तहत मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए परिजनों को नगर निगम कार्यालय आने, आवेदन करने या किसी तरह का शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। नगर निगम ने ईमेल के माध्यम से प्रमाण पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अस्पताल में मृत्यु पर लागू नहीं होगी सुविधा प्रश्न के उत्तर में महापौर ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में होने वाली मृत्यु के मामलों में यह सुविधा फिलहाल लागू नहीं हो पाएगी। इसका कारण यह है कि अस्पतालों से मृत्यु की जानकारी नगर निगम को विलंब से प्राप्त होती है, जिससे 72 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना संभव नहीं हो पाता। जन्म प्रमाण पत्र की व्यवस्था पहले से लागू जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उन्होंने बताया कि जिन अस्पतालों में प्रसूति होती है, वहां से जन्म प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था पहले से ही लागू है। इसे तत्काल व्यवस्था में परिवर्तित करना अभी संभव नहीं है। हर साल जारी होते हैं हजारों मृत्यु प्रमाण पत्र इंदौर नगर निगम द्वारा हर वर्ष औसतन 14 हजार मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। वर्ष 2026 में अब तक 1084 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में 15314, 2024 में 14119, 2023 में 13461 और 2022 में 14237 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।

जबलपुर में रेल यात्रियों को मिलेगा बड़ा तोहफा, पैसेंजर ट्रेनों में 20 कोच होंगे शामिल

जबलपुर   पैसेंजर ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड ने पैसेंजर ट्रेनों की लंबाई बढ़ाने पर सहमति दिए जाने के बाद रेल प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड ने सभी रेल जीनों से उन पैसेंजर ट्रेनों की जानकारी मांगी है, जिनमें अतिरिक्त कोच जोड़े जा सकते है। वर्तमान में अधिकांश पैसेंजर ट्रेनें 10 से 12 कोच के साथ संचालित हो रही है। योजना के तहत अब इन ट्रेनों में 12 से 20 कोच तक लगाए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही मेमू और डेमू ट्रेनों में भी कोचों की संख्या बढ़ाकर 8 से 12 करने का प्रस्ताव है।  पमरे जोन को मिलेगा विशेष लाभ सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद पश्चिम मध्य रेलवे (पमरे) जोन में संचालित करीब 40 पैसेंजर ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जाएंगे। अभी सीमित कोच होने के कारण सामान्य श्रेणी के यात्रियों को भारी परेशानी होती है और कई बार उन्हें खड़े होकर यात्रा करना पड़ती है। कोचों की संख्या बढ़ने से ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ कम होगी, वहीं स्टेशनों पर भी भीड़भाड़ नियंत्रित होने की उम्मीद है। जबलपुर मंडल में 10 जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन जबलपुर रेल मंडल में वर्तमान में 10 जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से जबलपुर-नैनपुर पैसेंजर, रीवा-जबलपुर पैसेंजर, जबलपुर-रीवा पैसेंजर, कटनी-चौपन पैसेंजर, कटनी-भुसावल पैसेंजर, बीना-कटनी पैसेंजर सहित अन्य ट्रेनें शामिल है। सीमित कोच होने के कारण कई बार 100 से 150 यात्री मजबूरी में भीड़भाड़ के बीच यात्रा करते है। छुट्टियों और त्योहारों के दौरान मेमू और डेमू ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ देखने को मिलती है। बड़ी संख्या में एमएसटी धारक यात्री यात्रा करते है, जिससे कई बार ट्रेन में चढ़ने तक में कठिनाई होती है। रीवा-रानी कमलापति के बीच स्पेशल ट्रेन रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए रीवा रानी कमलापति के बीच होली स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में एक एक ट्रिप संचालित की जाएगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना एवं विदिशा स्टेशनों पर रुकेगी। रीवा-रानी कमलापति सुपरफास्ट होली स्पेशल ट्रेन 28 फरवरी को रीवा से दोपहर 12:30 बजे प्रस्थान करेगी। इसी तरह रानी कमलापति-रीवा सुपरफास्ट होली स्पेशल ट्रेन रानी कमलापति से रात 22:15 बजे प्रस्थान करेगी।

छत्तीसगढ़ की पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट का विस्तार, केंद्र से 3,500 करोड़ के प्रस्ताव की मांग

रायपुर  केंद्र सरकार की भारत नेट योजना के तीसरे चरण (फेज-थ्री) में प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में आप्टिकल फाइबर केबल पहुंचाई जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा लोगों को मिलेगी। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को 3,500 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। इसके साथ प्रदेश में पांच हजार नए मोबाइल टावर भी लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। 11,693 ग्राम पंचायतें हैं त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत 11,693 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2024-25 की स्थिति में पहले और दूसरे चरण को मिलाकर भारत नेट परियोजना के तहत राज्य की 9,804 ग्राम पंचायतों को आप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा जा चुका है। इसके रखरखाव एवं संचालन के लिए 66 करोड़ की पूल निधि के गठन का भी प्रविधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वाई.फाई के माध्यम से हाट-स्पाट स्थापित कर प्रदेश भर में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रथम चरण में 1,000 ग्राम पंचायतों में वाईफाई की सुविधा के लिए पीएमवाणी परियोजना अंतर्गत 37 करोड़ का प्रविधान किया गया है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा उपयोग किए जा रहे ई. परिसंपत्ति, मोबाइल एप और वेबसाइट की साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक जांच एवं सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की जाएगी। बस्तर के माओवाद प्रभावित 735 गांवों में पहुंचाना है कनेक्टिविटी बस्तर संभाग में कुल 3,791 एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों में से 3,056 स्थानों पर मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध है, जबकि 735 ग्राम अब भी इससे वंचित हैं। शेष इलाकों में नेटवर्क विस्तार के लिए 481 नए मोबाइल टावरों की आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिन्हें स्वीकृति मिल चुकी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। योजना के अनुसार दिसंबर 2026 तक सभी स्वीकृत मोबाइल टावर स्थापित कर दिए जाएंगे। वर्तमान में टावर स्थलों का सर्वे कार्य प्रगति पर है। इन टावरों की स्थापना और संचालन का कार्य भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा किया जा सकता है। फेज टू की कंपनी के साथ कानूनी विवाद जानकारी के मुताबिक पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा चिप्स और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बीच 3,056 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था, जिसका लक्ष्य 6,000 गांवों तक ब्राडबैंड पहुंचाना था। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम न होने के कारण मई 2025 में टाटा प्रोजेक्ट्स ने अनुबंध समाप्त कर दिया गया था। कंपनी ने खुदाई में आने वाली बाधाओं और प्रशासनिक दिक्कतों को इसका मुख्य कारण बताया था। यह मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है। इस कानूनी विवाद और काम की धीमी गति के कारण फेज-दो का काम भी बाधित हुआ। अधिकारियों का क्या कहना अंकित आनंद, सचिव, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी का कहना है कि राज्य के हर गांव तक मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। भारत नेट योजना के तीसरे चरण में हम सभी ग्राम पंचायतों को कवर कर सकेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

सीहोर के लिए खुशखबरी: रुद्राक्ष महोत्सव से पहले दो एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज मिला

 सीहोर  रुद्राक्ष महोत्सव के आयोजन से पहले सीहोरवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सांसद आलोक शर्मा के प्रयासों से सीहोर रेलवे स्टेशन पर दो महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज स्वीकृत हुआ है। इससे धार्मिक, सामाजिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों तक सीधी रेल यात्रा संभव हो सकेगी।  सीहोर शहर के लिए यह निर्णय किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। कुबेरेश्वर धाम में 14 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले रुद्राक्ष महोत्सव से पहले रेलवे द्वारा दो प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का सीहोर स्टेशन पर स्टॉपेज स्वीकृत किया गया है। इस फैसले से देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। अब श्रद्धालु बिना भोपाल या अन्य बड़े स्टेशनों पर भटके सीधे सीहोर उतर सकेंगे। सांसद आलोक शर्मा के प्रयास रंग लाए भोपाल-सीहोर सांसद आलोक शर्मा द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही सीहोर की रेल कनेक्टिविटी की मांग आखिरकार पूरी हो गई। सांसद शर्मा ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से व्यक्तिगत मुलाकात कर सीहोर को बड़े शहरों से जोड़ने का आग्रह किया था। रेल मंत्री ने इस मांग को जनहित में स्वीकार करते हुए दो महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टॉपेज को मंजूरी दी। सांसद आलोक शर्मा ने दोनों एक्सप्रेस ट्रेनों के सीहोर रेलवे स्टेशन पर स्टापेज के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट भी जारी की है। प्रयागराज और वाराणसी जाने वालों को मिली बड़ी राहत सीहोर से प्रयागराज और वाराणसी जाने की मांग वर्षों से की जा रही थी। विशेष रूप से अस्थि विसर्जन जैसे धार्मिक कार्यों के लिए लोगों को पहले भोपाल जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती थी। अब सीधे सीहोर से प्रयागराज और वाराणसी तक यात्रा संभव हो सकेगी। यह निर्णय आम नागरिकों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है और उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस का विस्तृत लाभ गाड़ी संख्या 19489/19490 अहमदाबाद–गोरखपुर एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन सीहोर स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन अहमदाबाद, सूरत, रतलाम, उज्जैन, मैहर, सतना, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ती है। सीहोर के व्यापारियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह ट्रेन विकास की नई राह खोलेगी। गाड़ी सं. 19489 अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस अहमदाबाद से सोमवार को छोड़कर प्रतिदिन चलेगी। अहमदाबाद से एक्सप्रेस ट्रेन सुबह 9.17 बजे से चलकर आणंद, छायापुरी, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन होती हुई रात आठ बजे के करीब सीहोर स्टेशन पहुंचेगी। इसके बाद संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, प्रयासराज, वाराणसी, मउ, भटनी, देवरिया होते हुए अगले दिन शाम 6.15 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी सं. 19490 गोरखपुर स्टेशन से मंगलवार को छोड़कर प्रतिदिन रात 9.20 बजे रवाना होकर सीहोर स्टेशन गंतव्य दिवस के अगले दिन रात पौने छह बजे के करीब पहुंचेगी और फिर अहमदाबाद के लिए रवाना हो जाएगी। मुंबई बांद्रा-गोरखपुर हमसफर एक्सप्रेस से बढ़े अवसर सप्ताह में एक दिन चलने वाली मुंबई बांद्रा-गोरखपुर हमसफर एक्सप्रेस भी अब सीहोर स्टेशन पर रुकेगी। इससे मुंबई और सूरत जैसे औद्योगिक शहरों तक सीधी पहुंच संभव होगी। यह ट्रेन रोजगार, व्यापार और शिक्षा के लिए महानगरों से जुड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी। एक्सप्रेस ट्रेन 19091 मुंबई बांद्रा से सोमवार को सुबह 5.10 चलकर बोरोवली, वापी, सूरत, बडोदरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, शुजालपुर स्टेशनों से होती हुई रात आठ बजे के करीब सीहोर रेलवे स्टेशन पहुंचेगी। इसके बाद संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना,सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, प्रयागराज, वाराणसी, मउ, भटनी, देवरिया स्टेशन होती हुई अगले दिन मंगलवार को गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी तरह एक्सप्रेस ट्रेन 19092 गोरखपुर से मंगलवार को रात 9.20 बजे से चलकर वापस उन्हीं स्टेशनों से होती हुई बुधवार की शाम पौने छह बजे के करीब सीहोर रेलवे स्टेशन पहुंचेगी और फिर विभिन्न स्टेशनों से होती हुई गुरुवार की सुबह साढे़ आठ बजे मुंबई बांद्रा पहुंचेगी। श्रद्धालुओं और सीहोर के विकास को नई दिशा इन ट्रेनों के स्टॉपेज से कुबेरेश्वर धाम में कथा सुनने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। प्रसिद्ध कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा की कथा के दौरान सीहोर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। यह निर्णय न केवल यात्रा सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि सीहोर के सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक विकास को भी नई गति देगा।