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किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं रोक, किसानों को जागरूक किया जाए कि वे खेत का भूसा गौशालाओं में पहुंचाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करें समन्वित प्रयास – पशुपालकों के लिए तैयार हो रहा एक ऐप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना पर करें अमल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं। फरवरी में डिण्डोरी में होगा कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम, मार्च में होगा राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत किसानों के आईडी पंजीयन तथा किसान उन्मुखी योजनाओं के एग्रीस्टैक से एकीकरण के लिए निमाड़ क्षेत्र के किसी जिले में राज्यस्तरीय एग्रीस्टैक एवं डिजिटल कृषि प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसी तरह इस माह के अंतिम सप्ताह में कृषि मंथन के नाम से अलग-अलग जिलों में दो बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मार्च में राज्यस्तरीय सहकारिता सम्मेलन के जरिए किसानों को नये कृषि ऋण देने के अलावा कृषक न्याय मित्र योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जाएगा। इस … Read more

राज्य मंत्री श्री पटेल बोले—बकरी पालन और जीरो वेस्टेज मॉडल है बेहतर विकल्प

भोपाल. पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने धार जिले की तहसील धमरपुरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुंदरैल स्थित गोटवाला फार्म का भ्रमण किया। यह मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी बकरी पालन एवं प्रजनन केंद्र इकाई है। बकरी पालन के क्षेत्र में फार्म के संस्थापक दीपक पाटीदार को भारत सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। राज्यमंत्री पटेल ने पाटीदार द्वारा संचालित उन्नत नस्लों की इकाइयों का अवलोकन किया। उन्होंने सिरोही, सोजत, बीटल, करौली, बरबरी सहित अन्य नस्लों की गुणवत्ता, प्रजनन प्रणाली एवं प्रबंधन मॉडल की जानकारी प्राप्त की। साथ ही फार्म पर विकसित जीरो वेस्टेज मॉडल का भी निरीक्षण किया, जिसमें बकरी के मल से वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर ऑर्गेनिक सब्जी उत्पादन सहित संसाधनों के समुचित उपयोग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मंत्री पटेल ने संस्थापक दीपक पाटीदार से प्रदेश में बकरी पालन की संभावनाओं, इसके विस्तार, उद्यमिता विकास तथा शासन एवं उद्यमियों के संयुक्त सहयोग से पीपीपी मॉडल विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने शिव नर्सरी का भी भ्रमण किया, जहां संस्थापक शिवजी पाटीदार द्वारा नर्सरी की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही यहां पर टमाटर, मिर्च, पपीता, तरबूज सहित विभिन्न फसलों की जा रही खेती का भी अवलोकन किया। ग्राम पंचायत द्वारा विकसित पशु बाजार में गिर नस्ल की उन्नत गायों का अवलोकन कर राज्यमंत्री पटेल ने पंचायत एवं व्यापारी बंधुओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने दीपक पाटीदार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए बकरी पालन एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस दौरान उपसंचालक पशुपालन डॉ. आर.एस. सिसोदिया सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ की मौत

उदयपुर. लेक सिटी उदयपुर और क्रिकेट जगत के लिए एक दुखद खबर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले दिग्गज अंपायर और प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ (88) का निधन हो गया। वे पिछले 15 दिनों से अस्वस्थ थे और उदयपुर के एक अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था, जहां शाम करीब चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। बता दें कि प्रोफेसर राठौड़ का व्यक्तित्व बहुआयामी था। जहां एक ओर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की पिच पर सख्त अंपायरिंग की, वहीं दूसरी ओर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) में भूगोल के प्रोफेसर के रूप में हजारों छात्रों का भविष्य संवारा। उनके शिष्यों की सूची में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, पूर्व सांसद नमोनारायण मीणा और पूर्व आईएएस धर्मसिंह सागर जैसी दिग्गज हस्तियां शामिल हैं। अंपायरिंग करियर की प्रमुख उपलब्धियां प्रो. राठौड़ सेंट्रल जोन (राजस्थान, यूपी, एमपी, विदर्भ और रेलवे) से निकलने वाले अग्रणी अंतरराष्ट्रीय अंपायरों में से एक थे। करियर के मुख्य पड़ाव में अपना पहला टेस्ट मैच 1992 में चंडीगढ़ में भारत बनाम श्रीलंका के बीच कराया। साल 1993 में चेन्नई में भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच में भी उन्होंने अंपायर की कमान संभाली। उन्होंने कुल सात अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैचों में अंपायरिंग की, जिसमें पहला मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच था। तीन दशक तक संभाली उदयपुर क्रिकेट की कमान उनके घनिष्ठ मित्र और पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर बलवंत शर्मा ने बताया कि प्रो. राठौड़ का क्रिकेट प्रशासन में भी अतुलनीय योगदान रहा। वे 1966 से 1996 तक लगातार 30 वर्षों तक उदयपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव रहे। इसके बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी बलवंत शर्मा को सौंपी थी। खेल जगत में शोक की लहर उनके निधन की खबर मिलते ही वंडर क्रिकेट एकेडमी परिसर में एक शोक सभा आयोजित की गई। जिला क्रिकेट संघ के सचिव मनोज चौधरी, कोच और खिलाड़ियों ने मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उदयपुर के खेल प्रेमियों का कहना है कि प्रो. राठौड़ के निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिन्होंने शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों को समान रूप से समृद्ध किया।

राज्यस्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग की झांकी को दूसरा स्थान, मंत्री परमार ने दी शुभकामनाएं

भोपाल. उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर प्रस्तुत आकर्षक झांकी को राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान अर्जित करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलने पर, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को बधाई दी है। अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता पर आधारित रही उच्च शिक्षा विभाग की झांकी राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा रविंद्र भवन में आयोजित लोकरंग कार्यक्रम के दौरान, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर आकर्षक झांकी को द्वितीय स्थान मिलने पर सम्मानित किया गया। ज्ञातव्य है कि राज्य स्तरीय समारोह में प्रस्तुत 23 विभागों की झांकियों में, उच्च शिक्षा विभाग की झांकी ने राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उच्च शिक्षा विभाग की यह झांकी प्रदेश को अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता आधारित ज्ञान-व्यवस्था के अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत कर रही थी। इसका मूल भाव यह प्रतिपादित करता है कि उच्च शिक्षा में शोध, तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही समृद्ध, आत्मनिर्भर और सतत विकासशील मध्यप्रदेश की सुदृढ़ आधारशिला हैं। प्रदेश की प्रगति का मार्ग ज्ञान-सृजन, नवाचार और अनुसंधान आधारित समाधानों से होकर गुजरता है, यही इस झांकी का केन्द्रीय संदेश रहा है। झांकी के अग्र भाग में रिसर्च एवं एआई इनोवेशन जोन का सजीव चित्रण किया गया, जहाँ अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स, डेटा एनालिक्स और डिजीटल डैशबोर्ड के माध्यम से विद्यार्थी एवं शोधकर्ता नवाचार करते हुए दिखाई दे रहे थे। यह दृश्य, उच्च शिक्षा संस्थानों में विकसित होती अनुसंधान संस्कृति, स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीक आधारित समाधान निर्माण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को प्रभावी रूप से रेखांकित करता दिखाई दिया। झांकी का मध्य भाग प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्रतीकात्मक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्मार्ट कक्षाएँ, डिजीटल प्रयोगशालाएँ, इनोवेशन हब, सोलर पैनल और हरित संरचनाएँ यह दर्शाती दिखीं कि राज्य में उच्च शिक्षा को शोध-आधारित, कौशल-उन्मुख और सतत विकास से जोड़ा जा रहा है। झांकी के अगले भाग में व्यावहारिक अनुप्रयोगों को दर्शाया गया, जहाँ ड्रोन तकनीक, स्मार्ट कृषि, डेयरी विकास और जल-प्रबंधन जैसे दृश्य स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विकसित शोध सीधे ग्रामीण विकास और किसान सशक्तीकरण से जुड़ रहा है। झांकी के साथ चलते विद्यार्थी, युवा वैज्ञानिक और भावी उद्यमी, यह स्पष्ट संदेश देते दिखे कि ये ही राज्य की युवा शक्ति का प्रतीक हैं, जो ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से प्रदेश को विकास के नए शिखर पर ले जाने के लिए संकल्पित है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुढ़ के बाबा भैरवनाथ लोक और 17.13 करोड़ लागत के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नेa कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विरासत का संरक्षण करते हुए धार्मिक पर्यटन में नए आयाम स्थापित कर रही है। उज्जैन में बाबा महाकाल के महालोक, मंदसौर में भगवान श्रीपशुपतिनाथ लोक, ओरछा में राजा श्रीराम लोक और चित्रकूट धाम सहित 13 भव्य लोक आकार ले रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र के रीवांचल की पवित्रता ऐसी है कि भगवान श्रीराम ने अयोध्या छोड़ने के बाद अपने जीवन के महत्वपूर्ण 11 वर्ष से अधिक का समय चित्रकूट में बिताया। चित्रकूट धाम को भव्य और दिव्य रूप प्रदान करना मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है। यहां तीन हजार करोड़ की लागत के विकास कार्य होंगे और आगे भी समुचित राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं के रोजगार के लिए गुढ़ क्षेत्र में 100 एकड़ का नया औद्योगिक क्षेत्र बनाने की महत्वपूर्ण घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के बाबा भैरवनाथ मंदिर परिसर में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गुढ़ क्षेत्रवासियों को मिलीं सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा भैरवनाथ मंदिर के नए भवन सहित 17 करोड़ 13 लाख लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि भगवान भैरवनाथ मंदिर प्रांगण में विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। मंदिर प्रांगण में पुलिस चौकी और भैरवनाथ सरोवर का निर्माण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुढ़ में तीर्थयात्रियों के लिए विश्राम गृह और नई गौशाला बनाए जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 2 करोड़ रूपये के हितलाभ वितरित किये। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजनांतर्गत डेयरी शुरू करने के लिए आवश्यक राशि के चेक हितग्राही को सौंपे गये और मेधावी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में बढ़ रही मंदिरों की भव्यता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाहरी आक्रांताओं ने 1000 साल पहले गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त किया था। आजादी के बाद तत्कालीन केन्द्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका जीर्णोद्धार कराया और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में सोमनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा और भव्यता में वृद्धि हो रही है। अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण हो चुका है। गरीब, किसान, युवा और महिलाओं का कल्याण सर्वोपरि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने माता-बहनों के कल्याण के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना की राशि बढ़ाकर 1500 रुपए की गई है। बहनों के हाथ में जब धन आता है तो वह मायके और ससुराल दोनों की चिंता करती हैं। वर्तमान में राज्य और केंद्र सरकार के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 12 हजार रुपए सालभर में मिल रहे हैं। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रदेशभर में आधुनिक और भव्य सांदीपनि विद्यालय खोले गए हैं। प्रदेश का हर-घर अब सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। विंध्य क्षेत्र के लिए वरदान बनी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव उप-मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्प के बल पर रीवा जैसे स्थान पर भी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित हुई। अब देशभर के निवेशक अपने उद्योग लगाने के लिए विंध्य की धरती पर आ रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। रीवा जिले के संजय गांधी अस्पताल में 322 करोड़ की लागत से नई कैंसर यूनिट खोली जा रही है। क्षेत्रीय सांसद श्री जर्नादन मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार भैरव बाबा की कृपा से प्रदेश से गरीबी, बेरोजगारी खत्म कर रही है। राज्य के अनेक जिलों को सिंचाई परियोजनाओं के साथ औद्योगिक क्षेत्र की सौगात मिल रही है। विकास की यह रफ्तार आगे भी जारी रहेगी। गुढ़ मंदिर में स्थापित है भगवान भैरवनाथ की अद्भुत प्रतिमा स्थानीय विधायक श्री नागेंद्र सिंह ने कहा कि गुढ़ के मंदिर में विराजमान भगवान भैरवनाथ की यह प्रतिमा अद्भुत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विशेष सहयोग और मार्गदर्शन से भैरवनाथ मंदिर परिसर में विकास कार्यों को मूर्त रूप देना संभव हो पाया है। कार्यक्रम में विधायक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गिरीश गौतम, विधायक श्री सिद्धार्थ तिवारी, विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने पौधे रोपित कर दिया पर्यावरण-संरक्षण का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गुढ़ के समीप ग्राम खामडीह में मध्यप्रदेश शासन की एलएडी योजनांतर्गत भैरव बाबा मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सामुदायिक भवन निर्माण कार्य पूर्ण होने पर भैरवनाथ लोक परिसर का भव्य लोकार्पण किया गया। इसकी कुल लागत 2 करोड़ 19 लाख है। मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भैरव बाबा का विधिवत पूजन-अर्चन एवं हवन किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में ध्वज का आरोहण कर धार्मिक आस्था को नई ऊँचाई दी। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में त्रिवेणी बरगद, पीपल एवं नीम के पौधे रोपे और धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मंदिर परिसर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का लक्ष्मी स्वरूपा नारियों ने मंगल कलश और पुष्पवर्षा से स्वागत किया। इस अवसर पर 51 बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार कर वातावरण को गरिमा और धर्ममय बनाया।  

महंगा सोना-चांदी बना मुसीबत, जेवर छुड़ाने ग्राहकों की भीड़ सालों बाद व्यापारियों के पास

देवास  सोने-चांदी के दामों में जारी उठापटक से सराफा व्यापारी वर्ग पशोपेश में हैं. शुक्रवार को चांदी-सोने के दामों में हुई भारी गिरावट ने कारोबारियों में चिंता बढ़ा दी है. इस अस्थिरता से सर्राफा एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों को समझ नहीं आ रहा है कि वे दुकानों को खोलकर जेवर को बेचकर व्यापार करें या फिर दुकानों को बंद कर रेट के स्थिर होने का इंतजार करें. शुक्रवार को देवास में सराफा कारोबारियों ने अपनी दुकानों के बाहर एकत्रित होकर प्रदर्शन कर नाराजगी जताई है. सोने-चांदी अस्थिरता से कारोबारी परेशान सोने-चांदी के रेट में बेतहाशा वृद्धि ने आभूषणों की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दिया है. ज्वेलरी की दुकानों पर सन्नाटा पसर गया है. कारोबारी और कारीगरों की चिंता बढ़ा दी है. रोज बढ़-घट रहे भाव के चलते ग्राहकों ने खरीदारी से दूरी बना ली है. शादी का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे बढ़ घट रहे सोने-चांदी के दामों से शादी वाले घरों के लोगों को चिंता बढ़ रही है. शुक्रवार को सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट देखने को मिली है. इससे कुछ ग्राहकों ने जहां राहत की सांस ली, वहीं सराफा कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई हैं. मिल रही धमकियों से डरे सराफा कारोबारी देवास में सराफा व्यापारियों के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन नंबर (181) पर कॉल कर लोग शिकायत दर्ज करवा रहे हैं. इससे परेशान होकर सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपा है. साथ ही सालों बाद गिरवी जेवर वापस लेने आए लोगों से मिल रही धमकियों की शिकायत पुलिस से की है. सराफा व्यापारी दिलीप चौधरी का कहना है कि "कई लोग 5 से 10 साल पुराने गिरवी रखे सोना चांदी के मामलों को लेकर अब लोग शिकायत कर रहे हैं. इन शिकायतों पर बिना पूरी जांच के पुलिस व्यापारियों को थाने बुला रही है, जिससे उन्हें मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है और कामकाज भी प्रभावित हो रहा है." सालों बाद गिरवी जेवर छुड़ाने पहुंच रहे लोग व्यापारियों ने बताया कि जेवर गिरवी रखने के समय एक ग्राहक आता है, अब बाद में कई ग्राहक एक साथ आ रहे है. ग्राहकों को नियम, समय-सीमा और भुगतान की पूरी जानकारी दी जाती है. अगर तय समय पर पैसे नहीं चुकाए जाते, तो नियमों के अनुसार गिरवी सामान का निपटारा कर दिया जाता है. इसके बावजूद सालों बाद ग्राहक शिकायत कर रहा है, जो कि गलत है. एसोसिएशन ने मांग की है कि ऐसे मामलों को आपसी लेन-देन का मामला मानकर पुलिस दबाव न बनाया. साथ ही सराफा व्यापारियों ने सुरक्षा के लिए पुलिस गश्त भी बढ़ाने की मांग की है. सराफा कारोबारियों ने मांगी पुलिस सुरक्षा एडिशनल एसपी जयवीर सिंह भदौरिया ने कहा, "सराफा व्यापारियों ने अनावश्यक परेशान किए जाने को लेकर ज्ञापन दिया है. साथ ही उन्होंने सुरक्षा की मांग की है. ज्ञापन में उनका कहना है कि 5-6 साल पहले सोने-चांदी के जेवर गिरवी रख गए ग्राहक अब आ रहे हैं और हम पर बेमतलब जेवर वापस करने का दबाव बना रहे हैं. तय समय में ब्याज और मूलधन वापस नहीं करने आए थे. सभी गायब हो गए थे. जब से जेवर के दामों उछाल आई है, लोग जेवर वापस लेने आ रहे हैं. हम सराफा व्यापारियों को धमकियां मिल रही है. हमारी प्रशासन से मांग है कि किसी सराफा कारोबारी पर बेवजह कार्रवाई न की जाए."

धनबाद में बाउंड्री वॉल विवाद में वकीलों के बाद अब स्वास्थ्य कर्मी भी धरने पर बैठे

धनबाद. सदर अस्पताल परिसर स्थित पंचकर्म भवन के समीप बाउंड्री वॉल खड़ी करने के मामले ने शनिवार को वकील और स्वास्थ्यकर्मी आमने-सामने हो गए। तीन दिन धनबाद सिविल कोर्ट ठप है। बाउंड्री वॉल तोड़ने की मांग को लेकर एक ओर वकीलों का अनिश्चित कालीन पेन डाउन हड़ताल जारी है। इसे लेकर वकील बार एसोसिएशन परिसर में तीन दिन से धरना दे रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर व कर्मचारी भी विरोध में उतर गए। दोनों ओर से भारी जुटान हो गया। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर कर्मी, सहिया आदि विरोध पर उतर गए। सदर अस्पताल का ओपीडी पूरी तरीके से थक कर दिया गया। बिना इलाज के ही मरीज लौटने लगे। विरोध के कारण अस्पताल की ओपीडी से लेकर अन्य सभी नियमित सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं, जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से ही अस्पताल परिसर में कामकाज ठप नजर आया चिकित्सकों और कर्मचारियों ने अपने-अपने विभागों में काम बंद कर दिया और एकजुट होकर पंचकर्म भवन के समीप धरना पर बैठ गए। धरना स्थल पर जिले भर से आए स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हुए, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला। आंदोलन कारियों का कहना है कि पंचकर्म भवन के पास दीवार निर्माण का विरोध केवल एक निर्माण कार्य का मुद्दा नहीं, बल्कि अस्पताल की सुरक्षा, निजता और कार्यस्थल की गरिमा से जुड़ा मामला है । सिविल सर्जन, अस्पताल के उपाधीक्षक समिति अन्य पदाधिकारी भी थे। सेवाएं ठप, मरीज परेशान विरोध के चलते ओपीडी बंद रहने से सैकड़ों मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हो गए। जांच, परामर्श और दवाइयों के वितरण पर भी असर पड़ा है। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से मरीजों व उनके परिजनों में असमंजस की स्थिति बनी रही। कई मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को विवश हुए। हीरापुर से आए विकास कुमार ने बताया कि उनके पैर में दर्द है। लेकिन ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं मिले। जहां बाउंड्री वॉल, वहां स्वास्थ्य विभाग बना रहा छज्जा विवादित स्थल के पास एव स्वास्थ्य विभाग की ओर से सजा का निर्माण कराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि यहां पर उनके कई रिकॉर्ड है, इसलिए यहां शेड की जरूरत है। दोनों जगह पर पुलिस बल की तैनाती है।

यूपी-बिहार मिलकर करेंगे महिला किसानों की क्षमता वृद्धि, रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

लखनऊ. खेती में आधुनिक डिजिटल तकनीक, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश और बिहार ने अहम कदम उठाया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से संबद्ध महिला किसान उत्पादन संगठनों के राज्य स्तरीय संघ ‘भूस्वामिनी’ और ‘बिहप्रो कन्सोर्टियम ऑफ प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ (बिहार का पहला एफपीओ महासंघ) के बीच राजधानी लखनऊ में एमओयू किया गया है। इस एमओयू का उद्देश्य महिला किसानों की क्षमता निर्माण, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, खरीद-बिक्री की सशक्त व्यवस्था और ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में साझा प्रयास करना है। महिला किसानों के लिए तकनीक आधारित खेती को मिलेगा बढ़ावा एमओयू के तहत खेती में डिजिटल टेक्नोलॉजी और डेटा के व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे महिला किसान विज्ञान व तथ्य आधारित निर्णय ले सकेंगी। साथ ही क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेज को अपनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे बदलते मौसम के अनुरूप खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सके। यूपी और बिहार मिलकर करेंगे महिला किसानों की क्षमता वृद्धि एमओयू के माध्यम से उत्तर प्रदेश और बिहार की महिला किसान मिलकर क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्ड) कार्यक्रम चलाएंगी। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और नवाचार के जरिए महिला किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाएगा। इससे दोनों राज्यों की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर किसान से उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश में महिला किसानों के लिए अनेक लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसके तहत उन्हें केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि कृषि आधारित उद्यमिता, मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केट लिंकेज से जोड़ा जाएगा। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री को मिलेगा संगठित स्वरूप कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री के लिए सशक्त और पारदर्शी व्यवस्था तैयार की जा रही है। महिला किसान संगठनों को बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे उन्हें उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। साथ ही महिला किसानों के मूल्य संवर्धन और क्षमता निर्माण की योजनाओं पर भी संयुक्त रूप से काम किया जाएगा। इसके लिए हुए समझौते पर बिहप्रो के अध्यक्ष राजकुमार राज और भूस्वामिनी की अध्यक्ष मंजू देवी ने हस्ताक्षर किए। डिजिटल खेती, जलवायु अनुकूल कृषि और उद्यमिता के समन्वय से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा।

दौसा से कोटा के बीच 5 घंटे का सफर घटकर 2 घंटे में होगा पूरा

दौसा. जिलेवासियों के लिए खुश खबर है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दौसा से कोटा बीच होली तक वाहनों का आवागमन शुरू हो जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने लक्ष्य तय किया है कि फरवरी तक शेष बचे कार्यों को पूरा कर लिया जाएगा। कोशिश रहेगी कि फरवरी या होली से पहले शेष कार्य को पूरा कर लिया जाए। दौसा जिले के छात्र-छात्रा बड़ी संख्या में कोटा पढाई करते हैं। दौसा से कोटा के लिए सीधी ट्रेन नहीं है। ऐसे अधितकतर युवा सड़क मार्ग से ही सफर करते हैं। अभी पांच घंटे से ज्यादा लग रहे अभी दौसा से कोटा के लिए सड़क सही नहीं है। बीच में कई जगह काम चल रहा है। ऐसे में करीब पांच घंटे का समय लग रहा है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह सफर कार से करीब दो घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे समय व धन दोनों की बचत होगी। एक्सप्रेस-वे पर आवागमन शुरू होने से कोटा संभाग के लोगों को भी फायदा होगा। वर्तमान में कोटा से दिल्ली पहुंचने में करीब 9 घंटे का समय लगता है। लेकिन, एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद यह सफर करीब 5 में पूरा होगा। यहां चल रहा कार्य वर्तमान में लाखेरी (बूंदी) और सवाई माधोपुर के बीच चल रहा निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। दावा किया गया है कि जल्द ही इस हिस्से का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्तमान में इस छोटे से टुकड़े के अधूरे होने के कारण ट्रैफिक को डाइवर्ट करना पड़ता है, लेकिन फरवरी से वाहन चालक बिना किसी बाधा के सीधे दिल्ली की ओर बढ़ सकेंगे। विकास की नई राह खुलेगी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा दौसा व कोटा संभाग के लिए विकास की नई राह खोलेगा। इससे व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और पर्यटन के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलने की उम्मीद है। सुगम परिवहन व्यवस्था से न केवल लोगों को फायदा होगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी। दौसा वालों के लिए रणथम्भौर जाना आसान होगा। दरा टनल का काम मार्च तक होगा पूरा एक्सप्रेस-वे के दूसरे छोर यानी झालावाड़ की तरफ भी काम तेजी से चल रहा है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली दरा टनल का कार्य भी मार्च तक पूरा होने की संभावना है। यह टनल परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि इसके पूरा होने से झालावाड़ और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। इनका कहना है दौसा से कोटा के बीच अभी काम चल रहा है। हमारा प्रयास रहेगा कि फरवरी तक यातायात शुरू कर देंगे। इससे सफर सुगम हो जाएगा। दौसा से कोटा कार से करीब दो से सवा दो घंटे में पहुंच सकेंगे। -भरत सिंह जोइया, पीडी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण दौसा

यूपी का 11वां रामसर साइट्स बना एटा का पटना पक्षी अभयारण्य

लखनऊ.  विश्व वेटलैंड्स दिवस (02 फरवरी) से पहले उत्तर प्रदेश को बड़ा उपहार मिला। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के पटना पक्षी अभयारण्य (एटा) को रामसर साइट्स में शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि यूपी में पहले 10 रामसर साइट्स थीं, लेकिन पटना पक्षी अभयारण्य का नाम जुड़ने के साथ ही यह संख्या 11 हो गई है। उत्तर प्रदेश की इस बड़ी उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी है। देश में सर्वाधिक रामसर साइट्स तमिलनाडु में हैं, जबकि दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है।  108.86 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है पटना पक्षी विहार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एटा का पटना पक्षी विहार अब विश्व मानचित्र में शामिल हो चुका है। यहां संकटग्रस्त प्रजातियों को संरक्षण मिलता है। वर्ष 2017 के पश्चात अनवरत हो रहे कार्यों की बदौलत न सिर्फ प्रदेश की जैव विविधता, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली है। पटना पक्षी विहार 108.86 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है। इसकी संरक्षण क्षमता एक लाख से अधिक जल-पक्षियों की है। सर्दियों में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का भी आगमन होता है। 1990 में इस क्षेत्र को अभयारण्य घोषित किया था। इसका नाम एटा जनपद की जलेसर तहसील के पटना गांव के नाम पर रखा गया था। यह कुल 178 प्रजातियों के पक्षियों का आश्रय स्थल है। यहां जलीय पौधों समेत वनस्पतियों की 252 प्रजातियां पाई जाती हैं।  44 से अधिक जल-पक्षियों तथा 4 आर्द्र‌भूमि पक्षी प्रजातियों की शरणस्थली यह स्थल नियमित रूप से 44 से अधिक जल-पक्षी प्रजातियों और चार आर्द्र‌भूमि पक्षी प्रजातियों सरकिडियोर्निस मेलानोटस, अनहिंगा मेलानोगास्टर, मारेका स्ट्रेपेरा और एंसर एंसर की जैव-भौगोलिक आबादी के 1 प्रतिशत से अधिक का संरक्षण करता है। गर्मियों में जब आसपास की अधिकांश आर्द्रभूमि पूरी तरह से सूख जाती है तो पटना झील सारस क्रेन (ग्रस एंटीगोन) की शरणस्थली बन जाती है। यह अभयारण्य नीलगाय (बोसेलाफस ट्रैगोकैमेलस), जैकाल (कैनिस ऑरियस), मॉनिटर छिपकली (वरानस बेंगालेंसिसी), जंगली बिल्ली (फेलिस चाउस), पॉर्क्यूपाइन (हिस्ट्रिक्स इंडिका) आदि जानवरों का भी घर है। यहां वनस्पतियों की कई देशी प्रजातियां पाई जाती हैं। पटना पक्षी विहार के अंदर स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर आस्था और तीर्थयात्रा का महत्वपूर्ण केंद्र है।  उत्तर प्रदेश में अब तक थे 10 वेटलैंड  उत्तर प्रदेश में अब तक 10 वेटलैंड थे। इनके नाम नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (उन्नाव), पार्वती अरगा (गोंडा), समान (मैनपुरी), समसपुर (रायबरेली), सरसई नावर झील (इटावा), सांडी (हरदोई), सूर सरोवर (आगरा), बखीरा (संतकबीर नगर), ऊपरी गंगा नदी (बृजघाट से नरोरा तक, बुलंदशहर) व हैदरपुर वेटलैंड (मुजफ्फरनगर) हैं।  वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रही भारत की प्रतिबद्धताः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता निरंतर वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रही है। उत्तर प्रदेश के एटा स्थित पटना पक्षी अभयारण्य तथा गुजरात के कच्छ स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थलों के रूप में शामिल किया जाना नीति, संरक्षण और संवर्धन की उस यात्रा को दर्शाता है, जहां पारिस्थितिकी और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान सतत संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता की रक्षा के प्रति भारत के संकल्प को रेखांकित करता है। एटा, उत्तर प्रदेश के लोगों तथा आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए समर्पित सभी हितधारकों को हार्दिक बधाई। प्रधानमंत्री मोदी ने किया उपलब्धि का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि एटा (उत्तर प्रदेश) स्थित पटना पक्षी अभयारण्य तथा कच्छ (गुजरात) स्थित छारी-ढांड के रामसर स्थल घोषित होने पर अत्यंत प्रसन्नता है। वहां की स्थानीय जनता तथा आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई। ये मान्यताएं जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती हैं। ये आर्द्रभूमियां असंख्य प्रवासी व स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में निरंतर फलती-फूलती रहें, यही कामना है। बॉक्स 02 फरवरी को ललितपुर में मनाया जाएगा विश्व वेटलैंड्स दिवस  योगी सरकार के मार्गदर्शन में 02 फरवरी को विश्व वेटलैंड्स दिवस का आयोजन किया जाएगा। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने बताया कि यह आयोजन ललितपुर के देवगढ़ स्थित महावीर स्वामी वन्य जीव विहार में किया जाएगा। इस बार ‘आर्द्र‌भूमि और पारंपरिक ज्ञानः सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना’ विषय पर आयोजन होगा। इसका शुभंकर (मैसकॉट) रेड बिल्ड वल्चर को बनाया गया है।