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एमपी हाईकोर्ट अपडेट: जजों के खाली पदों की वजह से लंबित 4.8 लाख से ज्यादा केस, निपटान में लगेगा चार दशक

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि न्यायाधीशों की मौजूदा संख्या 42 से बढ़कर 75 या 85 नहीं होती है, तो साढ़े चार लाख 80 हजार से अधिक लंबित प्रकरणों का बैकलाग खत्म करने में पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है। एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण इस संबंध में एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी लंबित मामलों के बढ़ने का प्रमुख कारण है। ऐसे में हाई कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति और उनके समाधान पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत राज्य का यह दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाए। लेकिन यदि न्याय मिलने में दशकों का समय लगे, तो यह संवैधानिक प्रावधान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। वर्तमान स्थिति इसी ओर संकेत करती है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 11 जजों की कमी, बढ़ते मामलों से बढ़ेगी मुश्किल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की बात करें तो यहां 53 स्वीकृत पदों के मुकाबले फिलहाल केवल 42 न्यायाधीश कार्यरत हैं। यानी 11 पद रिक्त, जो कुल स्वीकृत संख्या का करीब 20.75 प्रतिशत है। यह आंकड़ा इसलिए और चिंताजनक हो जाता है, क्योंकि मध्य प्रदेश पहले से ही लंबित मामलों के मामले में देश के बड़े राज्यों में शामिल है। हाईकोर्ट में जजों की यह कमी न केवल मामलों की सुनवाई को धीमा करती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों के भरोसे को भी कमजोर करती है। वकीलों और सामाजिक संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि जजों की कमी के कारण नियमित सुनवाई संभव नहीं हो पाती और तारीख पर तारीख न्याय व्यवस्था की पहचान बनती जा रही है। केंद्र सरकार ने संसद को यह भी बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्ति और पदों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकार और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 1639 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें से 803 जज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जो कुल कार्यरत संख्या का 48.99 प्रतिशत है। वहीं, करीब 51 प्रतिशत न्यायिक अधिकारी अन्य वर्गों से हैं। हालांकि, सरकार ने संसद में जिला-वार रिक्त पदों का कोई अलग-अलग ब्योरा पेश नहीं किया। इससे यह साफ हो जाता है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निचली अदालतों पर बढ़ते बोझ के बावजूद, जजों की वास्तविक कमी का जिला स्तर पर कोई सार्वजनिक और पारदर्शी आकलन सामने नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि अगर जिला-वार आंकड़े सामने आएं, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आ सकती है। देशभर की स्थिति: कई हाईकोर्ट में हालात बेहद गंभीर अगर देशभर की तस्वीर पर नजर डालें, तो हालात केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में 94 स्वीकृत पदों में से 14 पद खाली हैं, यानी करीब 14.9 प्रतिशत। दिल्ली हाईकोर्ट में 60 में से 16 पद (26.6 प्रतिशत) और मद्रास हाईकोर्ट में 75 में से 22 पद (29.3 प्रतिशत) रिक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी 34 स्वीकृत पदों में से एक पद खाली है, जो भले ही प्रतिशत में कम लगे, लेकिन शीर्ष अदालत में हर एक जज की भूमिका बेहद अहम होती है। इलाहाबाद, कलकत्ता और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा संकट आंकड़ों के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी सबसे ज्यादा है। यहां 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 पद खाली हैं, यानी 31.25 प्रतिशत। कलकत्ता हाईकोर्ट की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 72 में से 29 पद रिक्त हैं, जो 40.3 प्रतिशत बैठता है। वहीं जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट में हालात बेहद चिंताजनक बताए गए हैं, जहां 44 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में न्यायपालिका संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है। मध्य प्रदेश की निचली अदालतों में वर्गवार प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों का वर्गवार विवरण भी संसद में पेश किया गया। इसके अनुसार:     अनुसूचित जाति (SC): 263 जज – लगभग 16.05%     अनुसूचित जनजाति (ST): 232 जज – लगभग 14.15%     अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 308 जज – लगभग 18.79%     अन्य वर्ग: 836 जज – लगभग 51.01% कुल मिलाकर 1639 कार्यरत न्यायिक अधिकारियों में से लगभग आधे SC, ST और OBC वर्ग से हैं। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पद ही पर्याप्त नहीं हैं, तो प्रतिनिधित्व के ये आंकड़े न्यायिक बोझ को कितना कम कर पा रहे हैं। भोपाल के एडवोकेट सुनील आदिवासी ने द मूकनायक से बातचीत में न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अदालतों में जजों की कमी तो पहले से ही एक बड़ी समस्या है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दलित और आदिवासी वर्ग से आने वाले जज केवल नाम मात्र के बराबर रह गए हैं। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय की जिस अवधारणा की बात संविधान करता है, वह तब तक अधूरी रहेगी, जब तक न्याय देने वाली व्यवस्था में ही वंचित तबकों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती। एडवोकेट सुनील आदिवासी ने आगे कहा कि जब न्यायपालिका में दलित-आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित होता है, तो इसका असर फैसलों की संवेदनशीलता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते जजों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व पर ध्यान नहीं दिया गया, तो न्यायपालिका से आम जनता का भरोसा कमजोर होना तय है। न्याय में देरी और न्याय से वंचित? विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की कमी सीधे-सीधे न्याय में देरी से जुड़ी हुई है। जब एक-एक जज पर हजारों मामलों का बोझ हो, तो त्वरित और प्रभावी न्याय की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक रिक्त पदों को भरने में हो रही देरी पर … Read more

तेज रफ्तार बनी मौत की वजह: यूपी में ट्रक-ऑटो टक्कर में पांच लोगों की जान गई

आगरा यूपी के आगरा में शनिवार को भीषण हादसा हो गया। एक तेज रफ्तार ट्रक ने दो ऑटो में टक्कर मार दी। ट्रक की टक्कर लगने से ऑटो में बैठे पांच लोगों की मौत हो गई। जबकि तीन लोग बुरी तरह से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी जगन्नाथपुरी से लौटे थे। ट्रक 100 की स्पीड में आ रहा था। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से भागने का प्रयास करने लगा लेकिन आसपास के लोगों ने पकड़कर उसकी पिटाई कर दी। हादसे की सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंची और मृतकों की शिनाख्त करके उनके घर वालों को सूचना दी। हादसा शनिवार को खंदौली थाना क्षेत्र में जलेसर रोड पर हुआ है। पुलिस ने बताया कि हाथरस जिले के थाना धाधयू के भादउ गांव के रहने वाले विजय सिंह उर्फ बीजो गौतम पुत्र राधेश्याम गौतम, लक्ष्मीचंद पुत्र भगवती प्रसाद, रघुवीर पुत्र जगन्नाथ प्रसाद, बिरला मिस्त्री और आगरा के शाहिद पुत्र मुंशी खान निवासी आजम पड़ा थाना शाहगंज समेत आठ दोस्त 20 जनवरी को जगन्नाथपुरी गए थे। दर्शन के बाद सभी शनिवार को जबलपुर होते हुए आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। सभी ने अपने-अपने गांव जाने के लिए दो ऑटो बुक किए थे। रामदत्त दवा लेने के लिए रास्ते में उतर गया। थोड़ी देर बाद नगला चंदन जलेसर रोड पर सामने से एक तेज रफ्तार ट्रक आ रहा था। उसने दोनों ऑटो को टक्कर मार दी, जिससे पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि धनप्रसाद और विजय गंभीर रूप से घायल हो गए। इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक और व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। 100 की स्पीड से आ रहा था ट्रक हादसे के बाद आसपास के लोगों ने ट्रक चालक को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर उनकी शिनाख्त की। पुलिस के अनुसार एक ऑटो शहीद खान चला रहा था। दूसरे चालक का नाम नहीं पता चल पाया है। पुलिस ने बताया कि ट्रक ड्राइवर नशे की हालत में था। वह 100 की रफ्तार से जलेसर रोड की तरफ ट्रक को लहराते हुए चल रहा था। ट्रक चालक ने पहले एक ऑटो को टक्कर मारी, फिर दूसरे को। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ऑटो उछलकर एक पेड़ से टकराकर गड्ढे में पलट गए। टेंपो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया।

औद्योगिक कानूनों के डी-क्रिमिनलाइजेशन पर उद्योग जगत ने जताया संतोष, आगे और सुधारों की अपेक्षा

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों की उपस्थिति में हुई उद्योग संगठनों और उद्यमियों के साथ विशेष के दौरान मुख्यमंत्री ने बजट 2026-27 के संदर्भ में उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित किए और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को और प्रभावी बनाने के लिए उद्यमियों तथा उद्योग संगठनों से व्यावहारिक सुझाव देने का आह्वान किया।  सीआईआई के वाइस चेयरमैन अभिषेक सराफ ने डिफेंस कॉरिडोर के लखनऊ नोड में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए भूमि आवंटन की आवश्यकता बताई और इस दिशा में शीघ्र निर्णय की अपेक्षा जताई। फिक्की के चेयरमैन मनोज गुप्ता ने औद्योगिक भूमि को फ्रीहोल्ड किए जाने की मांग रखते हुए कहा कि इससे निवेशकों का विश्वास और दीर्घकालिक निवेश दोनों बढ़ेंगे। इंडिया पेस्टीसाइड लिमिटेड  के प्रतिनिधि ने विभिन्न कानूनों के डी-क्रिमिनलाइजेशन के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसे उद्योगों के लिए बड़ा और सकारात्मक सुधार बताया। एसोचैम के को-चेयरमैन ने हसन याकूब 'वन कंपनी- वन रजिस्टर-वन लेटर' जैसी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया, जिससे अनुपालन प्रक्रिया सरल हो सके। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश के ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ की तर्ज पर फिलीपींस में भी एक कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जो प्रदेश की नीति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। वहीं एसोचैम उत्तर प्रदेश द्वारा युवाओं के प्लेसमेंट के लिए किए जा रहे नियोजित प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई। बैठक में औद्योगिक कौशल और वित्तीय बाजार से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने आईटीआई संस्थानों को और विकसित करने, वहां रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहित करने तथा इक्विटी मार्केट के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। इसे भविष्य की मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया। उद्योग संगठनों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामलों में ओटीएस योजना लाए जाने की मांग भी रखी गई। साथ ही यह सुझाव दिया गया कि देश के विभिन्न एक्सपोर्ट काउंसिल्स के साथ उत्तर प्रदेश की एमएसएमई इकाइयों का नियमित संवाद कराया जाए, जिससे निर्यात को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिल सके। नैस्कॉम के लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन रमीश जैदी ने छोटी आईटी कंपनियों के लिए प्लग-एंड-प्ले फैसिलिटी की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे स्टार्ट-अप्स और उभरती टेक कंपनियों को तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। क्रेडाई के यूपी के प्रेसीडेंट शोभित मोहन दास ने रियल एस्टेट सेक्टर की समस्याओं के समाधान के लिए उद्योग बंधु की तर्ज पर नियमित अंतराल पर “आवास बंधु” बैठक आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के स्टेट प्रेसिडेंट मनीष वर्मा से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कम से कम 10 युवा उद्यमियों को तैयार करने के लिए ठोस और योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि समावेशी औद्योगिक विकास को गति मिल सके।

एमपी ट्रांसको के सैलरी अकाउंट धारकों को बैंक ऑफ महाराष्ट्र से बीमा, लोन सहित कई सुविधाएं

एम.पी. ट्रांसको के सैलरी खाता धारकों के लिये बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र देगा बीमा,लोन सहित अन्य सुविधायें भोपाल  प्रदेश में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने अपने कार्मिकों के लिए अन्य बैंको से वेतन प्राप्त करने के विकल्प में बढ़ोतरी करते हुए बैंक आफ महाराष्ट्र के साथ एक एमओयू में हस्ताक्षर किए हैं। इसके अंतर्गत बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र अब सैलरी वेरियेंट के हिसाब से  सैलरी सेविंग अकाउण्‍ट स्‍कीम बैंकिंग सेवाओं के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाएं प्रदान करेगा। बैंक से ये मिलेगी सुविधाएं  मुख्य वित्तीय अधिकारी  मुकुल महरोत्रा ने जानकारी दी कि इस समझौते के तहत बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र, एम.पी. ट्रांसको के खाता धारक कार्मिकों को नई विशेष हितकारी सुविधाएं, जिनमें सामान्य मृत्यु बीमा 10 लाख तक, हवाई दुर्घटना बीमा कवर, दुर्घटना (मृत्यु) बीमा कवर, विकलांगता बीमा कवर, विभिन्‍न लोनों के प्रोसेसिंग फीस में छूट, चिकित्सा बीमा इत्यादि का लाभ प्रदान करेगा।  इसके अलावा बिना शुल्क, डिजिटल उत्पादों से लैस सैलरी सेविंग अकाउण्‍ट स्‍कीम बैंकिंग सुविधा प्रदान करेगा एवं ऋण खातों में प्रोसेसिंग फीस छूट, लॉकर किराए में छूट, बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र रू-पे कार्ड की विभिन्न सुविधाएं डेबिट कार्ड (टॉप वेरियंट), सुपर टॉपअप हेल्थ बीमा आदि सुविधायें बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र में एम.पी. ट्रांसको के वेतन खाता धारक कार्मिकों के लिये उपलब्ध रहेंगी।  

एमएसएमई नवाचार, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट प्रमोशन पर उद्योगों से सीधा संवाद

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में किया गया निवेश केवल एक राज्य में निवेश नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में किया गया निवेश है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश जिस आर्थिक मजबूती और स्थिरता की ओर बढ़ रहा है, उसमें उद्योग जगत की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की खुशहाली, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत सबसे बड़ा सहयोगी है और सरकार इस साझेदारी को और मजबूत करना चाहती है। शनिवार को राज्य स्तरीय उद्योग संगठनों और प्रमुख उद्यमियों के साथ आयोजित विशेष बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगों को केवल निवेशक नहीं, बल्कि विकास की साझेदारी का अभिन्न हिस्सा मानती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में निवेश करने वाला हर उद्यमी सरकार को अपने साथ खड़ा पाएगा और नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा प्रशासन, तीनों स्तरों पर सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने उद्योग समूहों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास और सामाजिक बदलाव का सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्योग समूह अपनी रुचि और विशेषज्ञता के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में सीएसआर के तहत योगदान कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उद्योगों के सामाजिक योगदान को प्रदेश के समावेशी विकास का मजबूत आधार मानती है। लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने एमएसएमई सेक्टर में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुझाव देने की बात कही। उन्होंने पैकेजिंग, डिजाइनिंग और एक्सपोर्ट प्रमोशन को और मजबूत करने में उद्योग समूहों से सहयोग का आह्वान किया। टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स सेक्टर में महिलाओं की बड़ी भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए अधिक अवसर सृजित करने हेतु ठोस और व्यावहारिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों के अनुरूप समय पर इंसेंटिव वितरण के लिए उद्यमियों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि घोषित प्रोत्साहन पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उद्योगों तक पहुंचे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने खिलौना उद्योग की संभावनाओं की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रदेश में खिलौना पार्क के विकास की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक भूमि की लागत कम करने पर भी विशेष जोर दिया और कहा कि भूमि, लॉजिस्टिक्स और अनुमोदन से जुड़ी लागत को कम कर निवेश को और आकर्षक बनाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमएसएमई इकाइयों और नए उद्यमियों के लिए सुगम वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। उद्योग बंधु की बैठकों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जनपद स्तर पर आयोजित उद्योग बंधु बैठकों में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में उद्योग जगत द्वारा रखी गई समस्याओं और अपेक्षाओं का समाधान अगली बैठक से पहले हर हाल में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि उद्योग बंधु की राज्य स्तरीय बैठक केवल लखनऊ तक सीमित न रहे, बल्कि अन्य मंडल मुख्यालयों पर भी आयोजित की जाए। कमिश्नरी स्तर पर मंडलायुक्त और एडीजी/आईजी की उपस्थिति में प्रत्येक दो माह में उद्योग बंधु की बैठक आयोजित की जाए। इसमें संबंधित मंत्रीगणों के साथ सीईओ इन्वेस्ट यूपी और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। राज्य स्तर पर प्रत्येक तिमाही बैठक मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की उपस्थिति में आयोजित की जाए, ताकि उद्यमियों की समस्याओं का त्वरित और संतोषजनक समाधान हो सके। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव आवास को निर्देश दिए कि आवासीय पार्किंग के लिए उपयोग हो रही भूमि पर अनावश्यक कर न लिए जाने के लिए आवश्यक व्यवस्था लागू की जाए, जिससे नागरिकों और उद्योग से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त भार न पड़े। महत्वपूर्ण बैठक मे एक विशेष प्रस्तुतिकरण के माध्यम से उद्यमियों को बीते लगभग नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की परिवर्तनकारी विकास यात्रा से अवगत कराया गया। प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि नीतिगत स्थिरता, व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और प्रशासनिक सुधारों के चलते उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में शामिल हो चुका है। बताया गया कि देश के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है, जिसकी कुल लंबाई करीब 1225 किलोमीटर है। वर्तमान में प्रदेश में 6 एक्सप्रेस-वे संचालित हैं और 7 निर्माणाधीन हैं। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है और दादरी में दोनों कॉरिडोर का इंटरसेक्शन राज्य को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करता है। यह भी बताया गया कि प्रदेश में 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कुल 16 हवाई अड्डे संचालित हैं, जबकि जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तेजी से आकार ले रहा है। इन सुविधाओं से उद्योगों के लिए कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। प्रस्तुतिकरण में निर्यात क्षेत्र की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का मर्चेंडाइज निर्यात बढ़कर लगभग ₹1.86 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो बीते सात-आठ वर्षों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, डिफेंस और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निर्यात की क्षमता लगातार बढ़ी है। बैठक में औद्योगिक विस्तार के आंकड़े साझा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2003 में प्रदेश में लगभग 8,980 फैक्ट्रियां पंजीकृत थीं, जो वर्तमान में बढ़कर करीब 27,000 तक पहुंच चुकी हैं। औद्योगिक निवेश अब महानगरों के साथ-साथ पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी तेजी से फैल रहा है। बैठक में यह भी बताया गया कि 04 ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से ₹15 लाख करोड़ से अधिक के निवेश परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा चुका है। और अब लगभग ₹6 लाख करोड़ की परियोजनाओं के लिए जीबीसी@5 आयोजित की जाने वाली है।  बैठक में नीतिगत सुधारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश को डिरेगुलेशन 1.0 में देश में पहला स्थान मिला है। भवन निर्माण उपविधि 2025, ऑटो-स्क्रूटनी प्रणाली, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और 40 से अधिक कानूनों में संशोधन कर लगभग 200 अनुपालनों को समाप्त किए जाने जैसे सुधारों से उद्योगों को बड़ी राहत … Read more

यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में इंटरनेशनल फिल्म सिटी से बदलेगी उत्तर प्रदेश की आर्थिक व सांस्कृतिक तस्वीर

लखनऊ  यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे सेक्टर-21 में विकसित की जा रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी, उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। एक हजार एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना को जून, 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इस फिल्म सिटी को प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक दिशा बदलने वाली परियोजना के रूप में देख रही है। इस फिल्म सिटी के बन जाने से उत्तर प्रदेश फिल्म निर्माण और मनोरंजन उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा। फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि योगी सरकार की इस परियोजना के पूरा होने के बाद एंटरटेनमेंट की दुनिया में बड़ा बदलाव आएगा।   यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा परियोजना की निगरानी के लिए इंजीनियरिंग एजेंसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों के चयन हेतु निविदाएं आमंत्रित की हैं, जिसे परियोजना के निर्माण चरण में प्रवेश का संकेत माना जा रहा है। इंटरनेशनल फिल्म सिटी को मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां अत्याधुनिक फिल्म स्टूडियो, शूटिंग फ्लोर, पोस्ट प्रोडक्शन यूनिट और फिल्म यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। उद्देश्य यह है कि फिल्म निर्माण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर संपन्न हो और अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। ख़ास है फिल्म सिटी की लोकेशन  फिल्म सिटी की लोकेशन को इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत माना जा रही है। यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधी कनेक्टिविटी और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से निकटता की वजह से देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए यहां पहुंचना आसान होगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण बड़े प्रोडक्शन हाउस उत्तर प्रदेश में शूटिंग के प्रति आकर्षित होंगे। फिल्मों व वेब सीरीज की शूटिंग के लिए यह आदर्श स्थान होगा।  रोजगार सृजन में भी होगी बड़ी भूमिका  योगी सरकार इस परियोजना को रोजगार सृजन से भी जोड़कर देख रही है। फिल्म सिटी के निर्माण और संचालन से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अभिनय, तकनीकी कार्य, कैमरा संचालन, संपादन, सेट डिजाइन और कॉस्ट्यूम डिजाइन जैसे क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं को काम मिलेगा। सरकार का फोकस है कि स्थानीय प्रतिभाओं को प्रदेश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराये जाएं। पर्यटन क्षेत्र को मिलेगी गति फिल्म सिटी के विकास से पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार की योजना है कि फिल्म सिटी के आसपास होटल, कन्वेंशन सेंटर और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों को विकसित किया जाए। इससे फिल्म पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। इसका सीधा लाभ स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और सेवा क्षेत्र को मिलेगा। मजबूत होगी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान  इंटरनेशनल फिल्म सिटी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिलेगी। इससे उत्तर प्रदेश एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा।

मैक्सीजोन घोटाले में गोविंदा, शक्ति कपूर समेत नौ पर धोखाधड़ी का केस

जमशेदपुर. गाजियाबाद की कंपनी मैक्सीजोन टच इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के 3000 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर जमशेदपुर के साकची थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। फिल्म अभिनेता गोविंदा, शक्ति कपूर, चंकी पांडेय, रजा मुराद, गायक मनोज तिवारी, कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह, उनकी पत्नी प्रियंका सिंह तथा परसुडीह निवासी सूर्य नारायण पात्रो के विरुद्ध धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज हुई है। यह प्राथमिकी बर्मामाइंस ईस्ट प्लांट बस्ती निवासी जसपाल सिंह और टेल्को कालोनी निवासी कुलदीप सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने अधिक ब्याज के लालच में कंपनी में करीब आठ लाख रुपये का निवेश किया था। कंपनी जमशेदपुर कार्यालय बंद कर फरार हो गई। कार्यालय साकची थाना क्षेत्र काशीडीह में थी। इससे पूर्व वर्ष 2022 में भी उक्त कंपनी तथा इससे जुड़े कलाकारों और अधिकारियों के विरुद्ध साकची थाना में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। कंपनी के खिलाफ जमशेदपुर के साकची थाना में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। कंपनी के निदेशक चंद्रभूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह वर्तमान में रांची जेल में बंद हैं। दोनों को पुलिस ने धनबाद से गिरफ्तार किया था। निदेशक दंपति बिहार के वैशाली जिले के निवासी हैं। मामले की ईडी भी जांच कर रही है। दोनों आरोपित पहले जमशेदपुर की जेल में थे। शिकायत के अनुसार, कंपनी ने प्रति निवेशक न्यूनतम एक लाख रुपये निवेश पर 15 प्रतिशत मासिक ब्याज देने का प्रलोभन दिया था। निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए कंपनी अपने कार्यक्रमों में नामी फिल्म कलाकारों को आमंत्रित करती थी। बताया गया कि केवल जमशेदपुर शहर से 10 हजार से अधिक निवेशकों ने कंपनी में 150 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जबकि पूरे झारखंड में निवेश की राशि करीब 600 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि जनवरी 2022 के बाद कंपनी ने निवेशकों को ब्याज का भुगतान बंद कर दिया। धोखाधड़ी का यह मामला सितंबर 2021 से फरवरी 2022 के बीच का बताया जा रहा है। साकची थाना प्रभारी आसंद मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच हो रही है। न्यायालय में दर्ज परिवाद पर प्राथमिकी दर्ज हुई है।

राज्यपाल ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत

भोपाल. राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि खेल, संकल्प सिखाता है। खेलों से हम प्रयास करना सिखते हैं। निरंतर अभ्यास हमे उत्कृष्टता का दृष्टिकोण प्रदान करता है। खेल ही हमे हार-जीत को स्वीकार करना सिखाते हैं। हमारे जीवन मूल्य विकसित करते हैं। सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। खेल भावना हर व्यक्ति को परस्पर जोड़ती है। खेल ही हम सबमें राष्ट्र प्रेम और देशभक्ति का भाव जगाते हैं। राज्यपाल  पटेल शनिवार को खेलो एमपी यूथ गेम्स के राज्य स्तरीय समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संभागवार विजेता प्रतिभागियों को पुरूस्कृत किया और बधाई दी। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित समारोह में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग भी मौजूद थे। प्रदेश देश का 'स्पोर्ट्स पावरहाउस' बनकर उभरा राज्यपाल  पटेल ने कहा कि खेल का मैदान, केवल हार-जीत का स्थान नहीं होता, वह चरित्र निर्माण की कार्यशाला भी होता है। खेल हमें सिखाते हैं कि मैदान पर कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता, कोई ऊंच-नीच नहीं होती। वहां केवल एक खिलाड़ी होता है और उसका तय लक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि पहले मध्यप्रदेश को खेलों के मामले में शांत राज्य माना जाता था, लेकिन आज हमारा प्रदेश देश का 'स्पोर्ट्स पावरहाउस' बनकर उभरा है। 'खेलो एमपी यूथ गेम्स' के आयोजनों ने प्रतिभाओं को गांव की गलियों से खोजकर राष्ट्रीय मंच पर लाया है। राज्यपाल  पटेल ने पारम्परिक खेलों और प्रदेशभर की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। मध्यप्रदेश की धरती ने खेलों में दिलाई अंतर्राष्ट्रीय पहचान राज्यपाल  पटेल ने कहा कि यह अत्यंत गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों से निकले खिलाड़ी आज केवल भोपाल या इंदौर का नाम नहीं, बल्कि पेरिस से लेकर लॉस एंजिल्स तक भारत का तिरंगा फहराने की क्षमता रखते हैं। हमारी शूटिंग रेंज हो, वाटर स्पोर्ट्स अकादमी हो या घुड़सवारी का मैदान, आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं प्रदेश के युवाओं के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेल ‘मलखम्ब’ हमारी सांस्कृतिक और खेल विरासत का शानदान उदाहरण है। मध्यप्रदेश की धरती ने इस खेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। सरकार की प्राथमिकता “खेल-खिलाड़ी और खेल का मैदान” : मंत्री  सारंग खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेलों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की प्राथमिकता “खेल-खिलाड़ी और खेल का मैदान” है। प्रदेश सरकार इसी प्राथमिकता के आधार पर कार्य भी कर रही है। उन्होंने बताया कि 'खेलो एमपी यूथ गेम्स' में 13 से 20 जनवरी तक विकासखंड एवं जिला स्तर तक और 21 से 25 जनवरी तक संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं हुईं। इसमें एक लाख से अधिक खिलाडियों की सहभागिता रही। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, नर्मदापुरम, शिवपुरी, रीवा एवं सागर में 27 से 31 जनवरी तक राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं हुईं, जिसमें 15 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया। राज्य स्तर पर 723 स्वर्ण, 723 रजत और 895 कास्य पदक विजेताओं को 31 हजार, 21 हजार, 11 हजार रूपये पुरस्कार राशि दी जा रही है। कुल 2341 पदक विजेताओं को लगभग 4 करोड़ की राशि वितरित की गई। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल का समारोह में मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र से स्वागत एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल  पटेल ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के संभागवार विजेताओं को ट्रॉफी प्रदान की। उन्होंने इंदौर संभाग को प्रथम, भोपाल संभाग को द्वितीय और जबलपुर संभाग को तृतीय पुरूस्कार प्रदान किया। आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले खेल विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी और स्वयंसेवकों को साधुवाद दिया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष सिंह, संचालक  राकेश गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारी, अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और ओलंपियन  विवेक प्रसाद सागर, निर्णायक गण एवं प्रतिभागी उपस्थित थे।

शिवराज का बीकानेर से संदेश: पत्नी की तारीफ के लिए चाहिए साहस, किताब लिखने का मन भी है

भोपाल/बीकानेर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने बेबाक और मजाकिया अंदाज के लिए जाने जाते हैं। राजस्थान के बीकानेर में आयोजित एक सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान उन्होंने एक ऐसी घोषणा की, जिसने महफिल लूट ली। शिवराज ने कहा कि वे जल्द ही अपनी 'पत्नी पर एक किताब' लिखेंगे। दरअसल राजस्थान में शिवराज सिंह चौहान मंच से मेघवाल की किताब से मिली प्रेरणा पर यह बात कर रहे थे। यह दिलचस्प वाकया तब हुआ जब शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मेघवाल ने अपनी पत्नी को समर्पित एक किताब ‘एक सफर हमसफर के साथ’ लिखी है। इसी का जिक्र करते हुए शिवराज ने उनकी जमकर तारीफ की। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती, पत्नी की खुलकर तारीफ कर दे शिवराज ने मजाकिया लहजे में कहा, 'भाभी जी पर आपने जो किताब लिखी है, उसे मैं एक अद्भुत घटना मानता हूं। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह पत्नी की खुलकर तारीफ कर दे, वरना लोग कहने लगते हैं कि ये तो जोरू का गुलाम है।' अब तो मैं भी एक किताब लिख ही दूंगा उन्होंने आगे कहा कि मेघवाल के साहस को देख अब वे भी प्रेरित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मंच से मुस्कुराते हुए कहा, 'अब तो मैं भी एक किताब लिख ही दूंगा। सच में, जीवन में धर्मपत्नी का बहुत बड़ा योगदान होता है।' कैलाश खेर ने मंच से लोगों को सुनाई खरी-खोटी गायक कैलाश खेर जब भी मध्य प्रदेश आते हैं, तो अपने गानों के साथ-साथ लोगों को खरी-खोटी सुनाने से भी नहीं चूकते। हाल ही में उन्होंने सतना में एक कॉन्सर्ट किया था, जिसका एक वीडियो अब सामने आया है। वीडियो में कैलाश खेर यह कहते नजर आ रहे हैं कि, ‘बहुत कम ऐसे कॉन्सर्ट होते हैं, जहां खाना भी चल रहा हो और गाना भी चल रहा हो। म्यूजिक को इज्जत तब मिलती है, जब खाना-वाना पहले डकार लिया जाए या फिर बाद में ठूंस लिया जाए।’ उन्होंने आगे मजाकिया लहजे में कहा- वैसे भी अपनों से ये कहने का बड़ा मन करता है कि बहुत खाते हो भाई। यह पहला मौका नहीं है जब कैलाश खेर के बयान चर्चा में आए हों। इससे पहले मंदसौर में वे एक भाजपा विधायक के नाम को लेकर मजाक कर चुके हैं और वहां की जनता को गरीब भी कह दिया था।

आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से ही साकार होंगे सपने – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर. आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से ही साकार होंगे सपने – मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर, लक्ष्यनिष्ठ और सशक्त बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की कड़ी में एक और उल्लेखनीय पहल सामने आई है। महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिले के भटगांव स्थित स्टेडियम ग्राउंड में कपिध्वज करियर गाइडेंस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 6 से 8 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर अपने भविष्य को दिशा देने का अवसर प्राप्त किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आज का युवा ही देश और समाज के भविष्य का निर्माणकर्ता है। युवाओं के कंधों पर राष्ट्र निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे निभाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य, सही मार्गदर्शन और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियाँ व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और सही निर्णय, समय प्रबंधन तथा सकारात्मक सोच के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। मंत्री  राजवाड़े ने शिक्षा को सफलता की सबसे मजबूत नींव बताते हुए विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने मूल्यों, जीवनशैली और दीर्घकालिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर करियर का चयन करें और ऐसे मार्गदर्शन कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठाएं। इस अवसर पर देश के प्रतिष्ठित करियर मार्गदर्शक एवं कोटा (राजस्थान) स्थित मोशन कोचिंग सेंटर के संस्थापक एवं सीईओ  नितिन विजय (एन वी सर) ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर चयन, समय प्रबंधन, आत्मविश्वास निर्माण और लक्ष्य आधारित अध्ययन पर प्रभावशाली मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “सोच ऊंची रखो, उड़ान भी ऊंची होगी।” कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करता है।  नितिन विजय ने कहा कि “सफलता दो बार प्राप्त होती है  पहले मन में और फिर वास्तविक जीवन में,” इसलिए विद्यार्थियों को मानसिक और व्यवहारिक दोनों स्तरों पर स्वयं को सफलता के लिए तैयार करना चाहिए। उन्होंने करियर चयन से पहले अपनी रुचि, क्षमता और व्यक्तित्व को समझने, गलतियों से सीखने और आत्मचिंतन को जीवन में आगे बढ़ने का मूलमंत्र बताया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, जिला पंचायत अध्यक्ष  चंद्रमणी देवपाल सिंह पैकरा,  राम कृपाल साहू,  परमेश्वरी राजवाड़े,  रजनी त्रिपाठी,  भीमसेन अग्रवाल,  राजेश महलवाला,  ठाकुर राजवाड़े,  नूतन विश्वास,  अनुज राजवाड़े,  अशोक राजवाड़े,  रेखा राजवाड़े,  रमेश गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।साथ ही जिला पंचायत सीईओ  विजेन्द्र पाटले, एसडीएम  चाँदनी कंवर, जिला कार्यक्रम अधिकारी  शुभम बंसल एवं अन्य अधिकारीगण, बड़ी संख्या में विद्यार्थी, युवा और क्षेत्रवासी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने बाल विवाह उन्मूलन और नशा मुक्त भारत के संकल्प के साथ शपथ लेकर सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया।