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मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा

सीएम योगी से मिले ‘गोदान’ फिल्म के निर्माता-निर्देशक, ट्रेलर लांच मुख्यमंत्री के गोरक्षा से जुड़े अभूतपूर्व कार्यों से मिली उनसे मुलाकात की प्रेरणा गोरक्षा के संकल्प, भारतीय संस्कृति और पंचगव्य विज्ञान को बड़े पर्दे पर लाएगी ‘गोदान’ पंचगव्य से पंच परिवर्तन व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है फिल्म, 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होगी लखनऊ गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व और पंचगव्य आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर फिल्म का ट्रेलर लांच किया गया। फिल्म के निर्माता व निर्देशक ने स्पष्ट किया कि देश में गो-रक्षा को लेकर सबसे व्यापक, ठोस और जमीनी स्तर पर कार्य उत्तर प्रदेश में हुआ है, और इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन और प्रतिबद्ध नेतृत्व है। इन्हीं बातों ने उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के लिए प्रेरित किया। सीएम योगी के सत्ता संभालते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर शुरु हुआ ताबड़तोड़ एक्शन योगी आदित्यनाथ के सीएम बनते ही उत्तर प्रदेश में गो तस्करों पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरु हुआ और बड़े पैमाने पर गो तस्करों की गिरफ्तारी की गई। गोवंश के प्रति मुख्यमंत्री के स्नेह और गो संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता का इसी बात से पता चलता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में साढ़े सात हजार से ज्यादा गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, 12 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा चुके हैं। गो सेवा और उनके संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में गो संरक्षण समितियों का गठन किया गया है। हर जनपद के डीएम व एसएसपी इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया विनोद चौधरी द्वारा निर्मित व निर्देशित ‘गोदान’ फिल्म 6 फरवरी को देशभर में एक साथ रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि गोमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का समग्र दस्तावेज है। निर्माता ने मुख्यमंत्री को फिल्म की विषयवस्तु, उद्देश्य और सामाजिक संदेश से अवगत कराया। गोरक्षा को लेकर सीएम योगी के अभूतपूर्व कार्य बने प्रेरणा फिल्म निर्माता विनोद चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान कहा कि आज देश में गो-रक्षा के क्षेत्र में जो ठोस कार्य दिख रहा है, उसका सबसे बड़ा केंद्र उत्तर प्रदेश है। प्रदेश में गोशालाओं का विस्तार, निराश्रित गोवंश की व्यवस्था, तस्करी पर सख्ती और गो संरक्षण को शासन की प्राथमिकता बनाना, ये सभी कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संभव हो पाए हैं। निर्माता विनोद चौधरी ने कहा कि जो दायित्व सामान्यतः समाज और हर नागरिक का होना चाहिए, उसे मुख्यमंत्री स्वयं उदाहरण बनकर निभा रहे हैं। गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा है, जो वैदिक काल से हमारे जीवन का आधार रही है। समुद्र मंथन से कामधेनु की प्राप्ति की कथा से लेकर आज तक गाय भारतीय सभ्यता की पोषक रही है। नई पीढ़ी को गाय के महत्व से जोड़ने का प्रयास विनोद चौधरी ने कहा कि नई युवा पीढ़ी धीरे-धीरे गाय के महत्व को भूलती जा रही है। दूध देने तक गाय को रखा जाता है और उसके बाद उसे छोड़ दिया जाता है, फिर यह कहा जाता है कि इसकी जिम्मेदारी सरकार निभाए। जबकि यह केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी नागरिकों का नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है कि गोमाता का पालन-पोषण करें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाय हमारी माता है। जो लोग गाय को केवल पशु कहते हैं, वे स्वयं पशुता की मानसिकता में जी रहे हैं। जैसे मां हमें पोषण देती है, वैसे ही गाय संपूर्ण मानव समाज का पोषण करती है।   पंचगव्य से पंच परिवर्तन का संदेश फिल्म ‘गोदान’ में पंचगव्य से पंच परिवर्तन को प्रमुखता से दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि पंचगव्य किस प्रकार मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। निर्माता के अनुसार, गाय पर हाथ फेरने मात्र से मानसिक शांति मिलती है, रक्तचाप संतुलित होता है और अनेक बीमारियों पर इसका प्रभाव पड़ता है। फिल्म में यह संदेश वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए फिल्म निर्माता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फिल्म को टैक्स-फ्री किए जाने की अपेक्षा भी व्यक्त की। उनका कहना था कि यह फिल्म किसी एक जाति, धर्म या वर्ग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए है। विशेषकर युवा पीढ़ी को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। स्कूल के बच्चों, परिवारों और समाज के हर वर्ग तक इसका संदेश पहुंचना चाहिए। सीएम योगी से मुलाकात के दौरान विनोद चौधरी (निर्माता), शांतनु शुक्ला (प्रचार-प्रसार प्रमुख), डॉ. कपिल त्यागी (सीएमडी, यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा) और नवल किशोर उपस्थित रहे। प्रदेश में गो सेवा-संरक्षण के अभूतपूर्व प्रबंध गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि धरती, कृषि, प्रकृति और मानव जीवन, सभी के लिए गोमाता  सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं। प्रदेश में गोसेवा और संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। गोमाता पर बनी यह फिल्म हर युवा, बच्चे और बुजुर्ग को सपरिवार देखनी चाहिए।

अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन: शांति, विश्वास और विकास का सामूहिक दौड़

रायपुर. अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन: शांति, विश्वास और विकास का सामूहिक दौड़ अबूझमाड़ की पावन धरती से शांति, सद्भाव और विकास का सशक्त संदेश देते हुए आज अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने आज अलसुबह नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर के समीप आयोजित हाफ मैराथन सहभागिता की और धावकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सांकेतिक रूप से स्वयं भी दौड़ लगाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विजयी प्रतिभागियों को प्रदान किए जाने वाले मैडल का अनावरण भी किया।    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज अबूझमाड़ की धरती से पूरे देश और दुनिया को अमन और शांति का मजबूत संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही अबूझमाड़ है, जहाँ कभी आम नागरिकों और जवानों का पहुँचना भी कठिन था, लेकिन आज सकारात्मक वातावरण के कारण हजारों लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में माओवाद से मुक्ति की दिशा में युवा वर्ग का जोश और उत्साह यह संकेत दे रहा है कि जल्द ही यह क्षेत्र खुशियों से आबाद होगा।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की नीतियों और नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है और बस्तर लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में लगे सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों के अदम्य साहस और पराक्रम को नमन करते हुए कहा कि उन्हीं के बलिदान और समर्पण से आज बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की मजबूत नींव पड़ी है।  मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में बस्तर क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है तथा नए विकास कार्यों की घोषणा भी की गई है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार दशकों से विकास से वंचित रहा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और बस्तर में विकास की गंगा निरंतर बहेगी। उन्होंने सम्पूर्ण बस्तर और छत्तीसगढ़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के सरकार के संकल्प को दोहराया।  उल्लेखनीय है कि यह 21 किलोमीटर लंबी हाफ मैराथन नारायणपुर से बासिंग तक आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से आए 60 से अधिक विदेशी प्रतिभागियों सहित बस्तर संभाग, प्रदेश एवं अन्य राज्यों के 10 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया। मैराथन से पूर्व हाईस्कूल परिसर में जुंबा वॉर्मअप कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों प्रतिभागियों ने एक साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की।  आत्मसर्पित माओवादी बने मैराथन का हिस्सा  इस आयोजन की सबसे विशेष और ऐतिहासिक बात यह रही कि आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं ने भी हथियार छोड़कर शांति और मुख्यधारा में लौटने का संदेश देते हुए मैराथन में हिस्सा लिया। नारायणपुर की अबूझमाड़िया जनजाति सहित स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी बनाया।  कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक   केदार कश्यप, जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद   महेश कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष   रूपसाय सलाम, वैद्यराज पद्म हेमचंद मांझी, मुख्यमंत्री के सचिव   राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर   डोमन सिंह, आईजी   पी. सुंदरराज, कलेक्टर  मती नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक   राबिनसन गुरिया, जिला सीईओ  मती आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

सर्वाधिक धनराशि बाढ़ से नुकसान की क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए की गई आवंटित

आपदा राहत प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध है प्रदेश सरकार, वर्ष 2025-26 में जारी किए 710.12 करोड़ रुपये सर्वाधिक धनराशि बाढ़ से नुकसान की क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए की गई आवंटित  निराश्रितों को शीतलहरी से बचाने के लिए रैन बसेरों, कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था से दी गई राहत लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार बाढ़, भूकंप, सूखा, अग्निकांड, शीतलहर एवं मानव-जीव संघर्ष जैसी आपादाओं से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध और संवेदनशील है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का राहत आयुक्त कार्यालय आपादा प्रभाव को कम करने तथा पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए सभी संभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा राहत निधि के तहत 710.12 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि से विभिन्न प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा पीड़ितों को सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही राज्य में आपदा राहत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किये गए हैं, जिससे वर्तमान में उत्तर प्रदेश आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है। त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को मिली रफ्तार    प्रदेश में आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, प्रभावी राहत वितरण एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में जारी 710.12 करोड़ रुपये में सर्वाधिक 365.73 करोड़ रुपये बाढ़ प्रभावितों के बचाव के लिए जारी किए गए। इसे विशेष रूप से सरयू, गंगा और घाघरा के बाढ़ प्रभावितों के पुनर्वास पर खर्च किया गया। चक्रवात व आंधी-तूफान से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति के लिए 14.13 करोड़, ओलावृष्टि से नुकसान की भरपाई के लिए 0.13 करोड़, अग्निकांड में क्षतिपूर्ति के लिए 14.63 करोड़ रुपये और शीतलहरी से बचाव के लिए 50.72 करोड़ रुपये जारी किये गये। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा अन्य आपदाओं के लिए लगभग 246.63 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। सामान्य मद के लिए 0.44 करोड़ व अन्य राहत कार्यों के लिए 17.71 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई। इस राशि को प्रदेश में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत, पुनर्वास एवं बचाव कार्यों को गति प्रदान करने एवं आपदा राहत तंत्र को प्रभावी बनाने में खर्च किया गया।  बांटे गये 5 लाख 89 हजार से अधिक कंबल  राहत आयुक्त कार्यालय ने ठंड के मौसम में बचाव के लिए व्यापक प्रबंध किए, जिससे इस वर्ष शीतलहर से होने वाली जनहानि में विशेष रूप से कमी आई। इस क्रम में प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित एवं असहाय व्यक्तियों को कंबल वितरण हेतु 45.51 करोड़ व अलाव जलाने के लिए 3.51 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई। जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में 27,027 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जहां अब तक 1,69,834 अलाव जलाए जा चुके हैं, जरूरत के हिसाब से ये कार्य अभी भी जारी है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा गरीबों और निराश्रितों को 5,89,689 कंबल वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही प्रदेश भर में 1,242 रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं, जहां अब तक 64 हजार से अधिक व्यक्तियों को रैन बसेरों ने राहत प्रदान की। ये व्यवस्थाएं शीतलहरी के दौरान निराश्रित और असहाय लोगों की जान बचाने में उल्लेखनीय प्रयास साबित हुईं। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि हर आपदा प्रभावित व्यक्ति को त्वरित सहायता मिले और जीवन-रक्षा के साथ आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित हो। इसके लिए राहत आयुक्त कार्यलय की ओर से आपदा प्रहरी एप और 1070 टोल फ्री नंबर का संचालन भी किया जाता है। जो आपदा प्रभावितों को त्वरित सहायता और प्रभावी समन्वय को सुनिश्चित करता है।

नारायणपुर-कोंडागांव निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का मुख्यमंत्री साय ने किया निरीक्षण

रायपुर. मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान नारायणपुरदृकोंडागांव के मध्य निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। डबल इंजन सरकार में बस्तर के विकास को गति डबल इंजन की सरकार के तहत विकास कार्यों को गति देते हुए बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता दी जा रही है। एनएच-130डी, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है, एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह मार्ग कोंडागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह मार्ग बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुंचता है, जहां यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। छत्तीसगढ़ में 122 किमी लंबा हिस्सा नेशनल हाईवे 130-डी का कोंडागांव से नारायणपुर तक लगभग 50 किलोमीटर का हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है, जबकि कुतुल से महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक 21.5 किलोमीटर की दूरी है। इस प्रकार इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी में से लगभग 122 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के पूर्ण होने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा, सुरक्षित और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा। साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुगम एवं सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित होगा। प्रधानमंत्री के सहयोग से मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी के सहयोग से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस एवं निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने कहा कि “राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल एक सड़क नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। सरकार इस परियोजना को तेज गति से पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगा, बल्कि बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी और क्षेत्र में विश्वास, निवेश तथा आवागमन को नई दिशा देगी। इस अवसर पर राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, सांसद   महेश कश्यप, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष   रूपसाय सलाम, मुख्यमंत्री के सचिव   राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

सेवा और समर्पण की मिसाल: मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण मिशन की भूमिका को सराहा

रायपुर. रामकृष्ण मिशन के सेवा कार्यों की मुख्यमंत्री ने की सराहना मुख्यमंत्री   विष्णुदेव साय ने आज नारायणपुर के रामकृष्ण मिशन आश्रम परिसर स्थित इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के बिना मानव जीवन अधूरा है। शिक्षित और अशिक्षित व्यक्ति के जीवन में बड़ा अंतर होता है। अशिक्षित व्यक्ति शोषण का शिकार होता है, जबकि शिक्षित व्यक्ति अपने विवेक का उपयोग कर निरंतर आगे बढ़ता है। रामकृष्ण मिशन के सेवा कार्यों की मुख्यमंत्री ने की सराहना मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह समय अध्ययन का है। उन्होंने एक आदर्श विद्यार्थी के पांच गुणों- “काकचेष्टा बको ध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च। अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पञ्चलक्षणम।” का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से लक्ष्य निर्धारित कर एकाग्रता के साथ अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने माता-पिता के सपनों को साकार करते हुए देश और प्रदेश की सेवा करें। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने नारायणपुर के रामकृष्ण आश्रम के बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में आर्थिक स्थिति कभी बाधा नहीं बननी चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, छात्रवृत्ति, प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। उच्च शिक्षा के लिए ऋण की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु नालंदा परिसर का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री   साय ने रामकृष्ण मिशन के सेवा भावी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अबूझमाड़ जैसे सुदूर और अंदरूनी क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना अत्यंत सराहनीय कार्य है। मिशन द्वारा यहां कृषि के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में भी लोगों की सहायता की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सेवा कार्य करते हुए रामकृष्ण मिशन को 40 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद प्रभावित होने के कारण पहले लोग इस क्षेत्र में आने से डरते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे माओवाद समाप्ति की ओर है और विकास कार्यों में तेजी आई है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से अब तक 400 ग्रामों में विकास कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। लोगों के राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी बन रहे हैं। राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय अपने भविष्य को संवारने का है। भगवान ने सभी को विवेक और क्षमता प्रदान की है, जिससे जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच रखने, अच्छी पुस्तकें पढ़ने और अच्छे संगत में रहने का आग्रह किया। इस अवसर पर बस्तर सांसद   महेश कश्यप, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष  रूपसाय सलाम, सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

80 लाख की प्रतिबंधित कफ सिरप के साथ 6 गिरफ्तार

पटना. मालसलामी थाना पुलिस ने प्रतिबंधित कोडीन सिरप के चल रहे अवैध धंधे से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए लगभग अस्सी लाख रुपये के सिरप जब्त करते हुए छह तस्करों को गिरफ्तार किया। छोटी नगला और दीदारगंज चेकपोस्ट के समीप की गई छापेमारी में जब्त छह वाहनों में से तीन पर डाक पार्सल लिखा था। एक टाटा 407 वाहन पर लदे तेज पत्ता के बीच से भी कफ सिरप बरामद किया गया। इन सभी वाहनों से 289 कार्टन में रखे 4485 लीटर सिरप पुलिस ने जब्त किया।  कटिहार, पटना और पटना सिटी में होनी थी सप्लाई  डीएसपी द्वितीय डॉ. गौरव कुमार ने शुक्रवार को बताया कि हिमाचल प्रदेश से मंगाई गई प्रतिबंधित कफ सिरप की बडी खेप कटिहार, पटना और पटना सिटी क्षेत्र में सप्लाई देने की तैयारी थी। पकड़े गए छह बदमाशों में मुख्य सरगना पटना के कदमकुआं थाना अन्तर्गत काजीपुर नया टोला निवासी 34 वर्षीय सूर्यप्रकाश उर्फ गन्नी भी शामिल है।  इसने पटना में सप्लाई देने के लिए एक सौ कार्टन कफ सिरप मंगाया था। गिरफ्तार तस्करों में वैशाली का दो, कटिहार का दो, सहरसा का एक बदमाश है। इस संबंध में डीएसपी द्वितीय डा. गौरव कुमार ने बताया कि वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार एवं नगर पुलिस अधीक्षक पटना पूर्वी की निगरानी में गठित की गयी मालसलामी थाना की पुलिस ने पूरे नेटवर्क का बेनकाब किया है।  गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी उन्होंने बताया कि पकड़े गए बदमाश वैशाली के मुकेश कुमार का पूर्व से आपराधिक रिकॉर्ड है। उन्होंने बताया कि गुरुवार की रात करीब साढ़े आठ बजे छोटी नगला में छापेमारी कर वाहनों के साथ मुकेश और गुड्डू को गिरफ्तार किया गया।  पूछताछ में उन्होंने गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी दी। दूसरी छापेमारी दीदारगंज चेकपोस्ट के समीप की गयी। वहां से अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी वाहन व कफ सीरप के साथ हुई। इनकी हुई गिरफ्तारी पटना के कदमकुआं थाना अन्तर्गत काजीपुर नया टोला निवासी स्व. प्रकाश प्रसाद सिंह का पुत्र 34 वर्षीय सूर्यप्रकाश उर्फ गन्नी, वैशाली के राघोपुर स्थित मोहनपुर थाना निवास सीताराम राय का 35 वर्षीय पुत्र मुकेश कुमार, इसी जगह निवासी जगदेव राय का 27 वर्षीय पुत्र गुड्डू कुमार शामिल है। इसके अलावा कटिहार के रोहतारा स्थित चूरबी घाट थाना निवासी अब्दुल बारी का 26 वर्षीय पुत्र मोहम्मद रहीम, इसी थाना क्षेत्र निवासी मोहम्मद जलालुद्दीन का 24 वर्षीय पुत्र मोहम्मद सगीर, सहरसा के कहरा स्थित भटहारा थाना क्षेत्र निवासी फूलेश्वर प्रसाद यादव का 29 वर्षीय पुत्र मिथिलेश कुमार शामिल है। बंगाल से जुड़ा हो सकता है नेटवर्क डीएसपी गौरव कुमार ने बताया कि पूछताछ में कफ सीरप के तस्करों ने कई अहम जानकारी दी है। बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर नशे के इन सौदागरों का नेटवर्क वहां से जुड़ा सकता है। सभी बिंदुओं पर बारीकी से छानबीन करते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

नारायणपुर अंचल में अमन शांति

रायपुर. दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास पर पहुँचे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अबूझमाड़ क्षेत्र में आयोजित पीस हाफ मैराथन के शुभारंभ के साथ-साथ अनेक सामाजिक, खेल और पर्यटन गतिविधियों में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन और स्थानीय सहभागिता को बढ़ाने के लिए राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का अवलोकन किया, उन्हें प्रोत्साहित किया तथा लोगों से संवाद कर सहभागिता और विश्वास को और मजबूत किया। बाइकर्स को दिखाई हरी झंडी  मुख्यमंत्री साय ने शांत सरोवर के समीप रायपुर के छत्तीसगढ़ राइडिंग क्लब के 40 बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बाइकर्स समूह नारायणपुर के सुदूर पर्यटन स्थल कच्चापाल तक की यात्रा करेगा। इस पहल के माध्यम से अबूझमाड़ को जानने, समझने और शांति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। शांत सरोवर में नौका विहार  बिजली गाँव के समीप स्थित शांत सरोवर में मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय ने वन मंत्री   केदार कश्यप, राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, सांसद बस्तर  महेश कश्यप एवं लघु वनोपज के अध्यक्ष   रूपसाय सलाम के साथ नौका विहार का आनंद लिया। स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष पहल स्थानीय प्रशासन के द्वारा की गई है।  तीर-धनुष से साधा लक्ष्य  मुख्यमंत्री साय ने बिंजली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीरंदाजी के स्थानीय युवा खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की और स्वयं तीर-धनुष उठाकर लक्ष्य साधते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अंचल में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आदिवासी समाज की पारंपरिक दक्षताओं को आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। शांति, आजीविका और खेलों के विकास में प्रशासन द्वारा समन्वित प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन, खेल प्रतिभाओं को मंच देने और विश्वास का वातावरण बनाने के लिए सतत कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव   राहुल भगत, कमिश्नर   डोमन सिंह, आईजी   सुंदरराज पी, कलेक्टर सु  नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक   रॉबिन्सन गुरिया, सीईओ सु  आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी बोले- ‘विकसित भारत @2047 की कुंजी है PRAGATI प्लेटफॉर्म’

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्रीनायब सैनी ने भारत सरकार के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की प्रशंसा करते हुए इसे विकास परियोजनाओं को तेज करने और जन शिकायतों का समाधान करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बताया। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र, राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए प्रमुख योजनाओं की प्रत्यक्ष, वास्तविक समय की निगरानी को सक्षम बनाता है। नायब सिंह सैनी के मुताबिक PRAGATI प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पारदर्शी, जवाबदेह शासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और विकसित भारत @2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे सार्वजनिक कल्याण पहलों का तेजी से निष्पादन और प्रभावी वितरण सुनिश्चित होता है। हरियाणा में वर्तमान में देखरेख अधीन 112 प्रमुख परियोजनाओं में से 57 पहले ही चालू हैं, जिनमें 94,153 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, जबकि शेष 55 परियोजनाएं जिनकी कीमत 5.44 लाख करोड़ रुपये है, अभी कार्यान्वयनाधीन हैं। चालू परियोजनाओं में से प्रधानमंत्री के PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) प्लेटफॉर्म के तहत 13 परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिनकी कीमत 30,463 करोड़ रुपये है। क्षेत्रवार, सड़कें और राजमार्ग 30 पूर्ण परियोजनाओं के साथ शीर्ष पर हैं, इसके बाद तेल और गैस (10), बिजली संचरण और वितरण (9), रेलवे (4), बिजली उत्पादन (3), और एक रियल एस्टेट परियोजना हैं। इन पूर्ण संपत्तियों ने हरियाणा की कनेक्टिविटी, ऊर्जा अवसंरचना और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को काफी मजबूत किया है। इस बीच, 55 कार्यान्वयनाधीन परियोजनाओं में से 13 उच्च मूल्य वाली परियोजनाएं, जिनमें 2.24 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, PRAGATI के तहत निकट देख रेख में हैं। क्षेत्रीय वितरण कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाओं पर निरंतर ध्यान दिलाता है, जिसमें सड़कें और राजमार्ग 22 परियोजनाओं के साथ सबसे आगे हैं, इसके बाद स्वास्थ्य सेवा (9), रेलवे (5), तेल और गैस (5), बिजली संचरण और वितरण (4), आईटी/आईटीईएस (3), और बिजली उत्पादन (3)। इसके अलावा, मेट्रो रेल, उद्योग और वाणिज्य, लॉजिस्टिक्स पार्क विकास, और सीमेंट विनिर्माण में प्रत्येक एक-एक परियोजना चल रही है। चल रही पहलों में से कई एनसीआर क्षेत्र की सबसे बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल हैं, जिनमें एक्सप्रेसवे, समर्पित माल गलियारे, टेलीकॉम संतृप्ति अभियान, और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं जो हरियाणा के दीर्घकालिक, विकास-उन्मुख अवसंरचना विकास की दिशा में प्रयासों को दर्शाते हैं।

परिवहन सुविधा की सौगात: नारायणपुर के परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय को मिलेगी बस

रायपुर. नारायणपुर के परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय को बस देने की घोषणा मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय आज नारायणपुर जिले के गरांजी स्थित परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय में अचानक छात्रों के बीच पहुंचे। विद्यालय पहुंचने पर संस्था में अध्ययनरत दिव्यांग छात्र रंजीत बड्डे सहित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा स्वागत गीत, हनुमान चालीसा एवं बस्तर अंचल के पारंपरिक गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मांग पर मुख्यमंत्री   साय ने विद्यालय को एक बस उपलब्ध कराने की घोषणा की। दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री साय  मुख्यमंत्री   साय ने बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। विद्यालय में उपलब्ध सुविधाएं अच्छी हैं, उनका पूरा लाभ लेकर सभी अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। उन्होंने बच्चों को आईएएस, आईपीएस जैसे उच्च पदों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया और कहा कि किसी भी प्रकार की शारीरिक कमी से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों पर ईश्वर का विशेष आशीर्वाद होता है। बच्चों ने जब उनसे पूछा गया कि उन्हें विद्यालय आकर कैसा लगा, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। एक बच्ची के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि बचपन में उन्हें पिट्ठू, फुटबॉल जैसे खेल खेलना बहुत पसंद था।   मुख्यमंत्री ने संस्था के सभी बच्चों को चॉकलेट वितरित कर आशीर्वाद दिया। दिव्यांग बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुख्यमंत्री   साय सहित राजस्व मंत्री   टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद   महेश कश्यप, अन्य जनप्रतिनिधियों, मुख्यमंत्री सचिव   राहुल भगत, कमिश्नर   डोमन सिंह एवं आईजी   सुंदरराज पी. ने सराहना की। उल्लेखनीय है कि परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय का शुभारंभ 11 सितंबर 2023 को किया गया था। इसका संचालन जिला खनिज न्यास निधि से किया जा रहा है। विद्यालय का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समावेशी शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिससे उनका आत्मविश्वास सुदृढ़ हो और वे समाज में अपनी भूमिका प्रभावी रूप से निभा सकें। यह विद्यालय सामान्य और दिव्यांग बच्चों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में विद्यालय में कुल 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में आडियोलॉजी, फिजियोथेरेपी, विशेष शिक्षा संगीत शिक्षा, खेलकूद, योग एवं व्यायाम, तथा कंप्यूटर शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हैं। 

प्राइमरी और मास्टर कैडर के अध्यापक लेंगे 12वीं के प्रैक्टिकल एग्जाम

चंडीगढ़. जहां एक तरफ विभाग के हजारों कर्मचारी अपनी प्रमोशन का इंतजार करते हुए रिटायर हो रहे हैं और विभाग कभी टेट तो कभी कोर्ट केस का बहाना लगाकर उन्हें तरक्की से दूर रख रहा है, वहीं अब शिक्षा विभाग ने एक तुगलकी फरमान जारी किया है। विभाग ने 2 फरवरी से शुरू होने वाली 12वीं कक्षा की प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए प्राइमरी और मास्टर कैडर के कर्मचारियों को 12वीं कक्षा के प्रैक्टिकल एग्जामिनर के तौर पर ड्यूटी लगाकर 'तरक्की' दी है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से बहुत से अध्यापकों के पास प्रैक्टिकल विषय में मास्टर डिग्री भी नहीं है। इसके ऊपर से उनकी ड्यूटी भी 50-60 किलोमीटर दूर लगाकर उन्हें परेशानी में डाल दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि यह परीक्षा विद्यार्थियों को परखने की जगह प्राइमरी और मास्टर कैडर को परखने के लिए है। परीक्षा का डर विद्यार्थियों से ज्यादा अध्यापकों को लग रहा है। गवर्नमैंट स्कूल लेक्चरर यूनियन, पंजाब ने इस मुद्दे का गंभीर नोटिस लेते हुए सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। यूनियन ने विभाग से मांग की है कि इन ड्यूटियों में सुधार किया जाए और दूर-दराज लगाई गई ड्यूटियों को ब्लॉक के अंदर ही एडजस्ट किया जाए।