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किसानों को मिलेगा तकनीकी लाभ: जशपुर में DST परियोजना के तहत सोलर टनल ड्रायर की स्थापना

रायपुर. जशपुर में DST प्रायोजित परियोजना के तहत सोलर टनल ड्रायर की स्थापना मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में नवाचार और स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिला महुआ फूल के मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल हो चुका है। जिले में महुआ नेक्टर, महुआ च्यवनप्राश, लड्डू, कुकीज़ सहित अनेक पारंपरिक एवं पोषक खाद्य उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। जशपुर में DST प्रायोजित परियोजना के तहत सोलर टनल ड्रायर की स्थापना हालांकि, पूरी मूल्य श्रृंखला में खाद्य-ग्रेड महुआ संग्रह और सुरक्षित निर्जलीकरण एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा स्वीकृत परियोजना “Technological Augmentation of Indigenous Practices of ST Communities of Chhattisgarh for Sustainable Livelihood and Entrepreneurial Development” वर्तमान में जशपुर जिले में क्रियान्वित की जा रही है। यह परियोजना DST द्वारा वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी को स्वीकृत की गई है, जिसे स्थानीय सहभागिता के साथ लागू किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM), कुंडली के वैज्ञानिक डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी द्वारा जशपुर जिले में सोलर टनल ड्रायर की स्थापना की गई है। इस पहल में स्थानीय स्तर पर जय जंगल फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का सक्रिय सहयोग रहा है। फूड प्रोसेसिंग कंसल्टेंट एवं युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि पारंपरिक खुले वातावरण में महुआ सुखाने की प्रक्रिया में धूल, नमी और कीटों के कारण गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे खाद्य उपयोग और बाज़ार की संभावनाएँ सीमित हो जाती हैं। इन व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक एवं नियंत्रित निर्जलीकरण प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई। स्थापित सोलर टनल ड्रायर के माध्यम से महुआ फूलों को नियंत्रित तापमान में स्वच्छ, तेज़ और समान रूप से सुखाया जा सकता है। इससे महुआ की गुणवत्ता, रंग, सुगंध और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं तथा दीर्घकालीन भंडारण संभव हो पाता है। यह प्रणाली वर्षा, धूल और कीटों से सुरक्षा प्रदान करती है तथा पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित होने के कारण पर्यावरण-अनुकूल भी है। महुआ के साथ-साथ परियोजना के अंतर्गत वनौषधियों के निर्जलीकरण पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। आदिवासी महिला लाभार्थियों को गिलोय, अडूसा जैसी महत्वपूर्ण वन औषधियों एवं पालक जैसी मौसमी सब्ज़ियों के वैज्ञानिक और स्वच्छ निर्जलीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं लाइव डेमोंस्ट्रेशन कराया गया। प्रशिक्षण में सुरक्षित हैंडलिंग, ट्रे लोडिंग, नमी नियंत्रण और भंडारण की वैज्ञानिक विधियों पर विशेष जोर दिया गया। उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रसन्ना कुमार जीवी पिछले तीन वर्षों से जशपुर जिले में निरंतर कार्य कर रहे हैं और खाद्य प्रसंस्करण एवं तकनीकी क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी दीर्घकालिक सहभागिता से यह परियोजना स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित एक व्यावहारिक और टिकाऊ मॉडल के रूप में विकसित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस प्रकार की वैज्ञानिक निर्जलीकरण प्रणालियाँ राज्य के अन्य महुआ एवं वनोपज संग्रहण क्षेत्रों में योजनाबद्ध ढंग से स्थापित की जाएँ, तो इससे अपव्यय में कमी, खाद्य-ग्रेड उत्पादों की उपलब्धता और आदिवासी समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। जशपुर में संचालित यह पहल छत्तीसगढ़ में वन-आधारित मूल्य संवर्धन और नवाचार की दिशा में एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर उभर रही है।

बिहार में भी घर बैठे मिलेगा पाइप लाइन गैस कनेक्शन

दरभंगा. भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) द्वारा संचालित पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) सेवा के लिए अब दरभंगा में ऑनलाइन ग्राहक पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही दरभंगा बिहार का पहला जिला बन गया है, जहां पाइपलाइन गैस कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की गई है। इस ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली का उद्घाटन सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने लहेरियासराय स्थित अपने संसदीय कार्यालय में किया। उन्होंने बीपीसीएल के गैस बिजनेस यूनिट (जियोग्राफिकल एरिया) द्वारा शुरू की गई इस डिजिटल सेवा का बटन दबाकर शुभारंभ किया। बीपीसीएल की ओर से दरभंगा शहर के साथ-साथ बहेड़ी और बेनीपुर क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। जल्द ही ग्रामीण इलाकों में भी इस योजना को विस्तार देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सांसद डॉ. ठाकुर ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली आम लोगों के लिए वरदान साबित होगी। अब नागरिक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे, अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी ले सकेंगे और कम समय में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। पीएनजी का अर्थ है पाइप्ड नेचुरल गैस। इसमें गैस सिलेंडर के बजाय पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों के किचन तक गैस पहुंचाई जाती है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस का उपयोग होता है, जो हवा से हल्की और सुरक्षित मानी जाती है।

अंबाला नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने मेयर और पार्षद के 2 फरवरी तक मांगे आवेदन

अंबाला. कांग्रेस ने अंबाला नगर निगम चुनावों के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने मेयर और पार्षद पदों के इच्छुक उम्मीदवारों से 2 फरवरी तक आवेदन मांगे हैं। इसके बाद किसी का फार्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाल ही में शहरी कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद यह कदम उठाया गया है, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह है। आवेदन बायोडाटा, जाति प्रमाण पत्र, आधार और वोटर कार्ड के साथ अंबाला शहर कांग्रेस भवन में या ईमेल द्वारा जमा किए जा सकते हैं। फार्मों में से चयन करने के बाद चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाई जाएगी। बता दें, बीते दिनों से कांग्रेस ने अपनी गतिविधियों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। जिला स्तर पर शहरी कांग्रेस कमेटियों का गठन कर दिया गया है। अब नगर निगम चुनावों को लेकर भी पूरी तरह से मैदान में उतरने का प्लान बनाया जा रहा है। इसी के चलते जिला स्तर पर कमेटी की ओर से फैसला लिया गया है, जिसमें मेयर से लेकर पार्षद तक से चुनाव में उतरने के लिए इच्छुक लोगों के आवेदन मांगे गए हैं। जिला कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन ठाकुर ने बताया कि कांग्रेस का संगठन बनने से कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के दिशा निर्देशानुसार, कांग्रेस पार्टी का समर्पित कोई भी कार्यकर्ता महिला या पुरुष मेयर का चुनाव या पार्षद का चुनाव लड़ना चाहता है तो वह प्रत्याशी अपने बायोडाटा के साथ-साथ अपना जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व वोटर कार्ड अंबाला शहर कांग्रेस भवन में जाकर जमा करवा सकता है। वहीं जिला कांग्रेस कमेटी ने एक ईमेल आईडी भी जारी किया है। प्रत्याशी चाहे तो इस ईमेल आईडी पर भी अपना आवेदन कर सकता है।

शिक्षा और परंपरा का संगम: लक्ष्मणेश्वर पीजी कॉलेज खरौद के हीरक जयंती समारोह में पहुंचे वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर. वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी छत्तीसगढ़ के वित्त, वाणिज्य एवं जांजगीर चांपा जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी आज जांजगीर-चांपा जिले के खरौद नगर पंचायत स्थित शासकीय लक्ष्मणेश्वर स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित हीरक जयंती समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय के दीर्घ शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि हीरक जयंती जैसे आयोजन भारत की गौरवशाली बौद्धिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत की स्मृति को सशक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि पहली सदी से 17वीं सदी तक लगभग 1600 वर्षों तक भारत विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्ति रहा है। शून्य जैसे महान आविष्कार और नालंदा–तक्षशिला जैसे ज्ञान केंद्र इस तथ्य के सशक्त प्रमाण हैं कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और नवाचार का वैश्विक केंद्र रहा है। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान युग तकनीक और नवाचार का युग है, ऐसे में शिक्षा को समयानुकूल, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुखी बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेज़ी से विकास पथ पर अग्रसर है और इस विकास की सबसे मजबूत नींव शिक्षा है। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय की स्मारिका दर्पणग्रंथ का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  सौरभ सिंह, पूर्व संसदीय सचिव  अम्बेश जांगड़े, कलेक्टर  जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक  विजय कुमार पांडेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सरस्वती शिशु मंदिर में अतिरिक्त कक्ष का शिलान्यास वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खरौद में 8 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले अतिरिक्त कक्ष का शिलान्यास किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने से सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में निर्णायक भूमिका निभाती है। वित्त मंत्री ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित आधुनिक तकनीकों के महत्व से अवगत कराते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

पूर्व विधायक ताहिर हुसैन को झटका, दिल्ली दंगा केस में जमानत नहीं मिली

 नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में पूर्व AAP विधायक ताहिर हुसैन, सलीम मलिक और अथर खान की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने तीनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक तीनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद समानता (पैरिटी) के आधार पर जमानत की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया. इन तीनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं. अभियोजन के मुताबिक, इनकी भूमिका 2020 के दंगों की साजिश में अहम रही है. अथर खान, जो पहले एक कॉल सेंटर कर्मचारी रह चुका है, पर आरोप है कि वह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अनुसार, अथर ने वहां भड़काऊ भाषण दिए और कथित तौर पर गुप्त बैठकों में हिस्सा लिया, जिनमें 'दिल्ली जलाने का समय आ गया है' जैसे बयान दिए गए. उस पर सीसीटीवी कैमरों को नष्ट कराने में समन्वय करने का भी आरोप है. वहीं सलीम मलिक पर भी आरोप है कि वह CAA-NRC विरोधी बैठकों के 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में शामिल था. पुलिस के अनुसार, इन आयोजकों में मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, शहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अय्यूब, मोहम्मद यूनुस, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और उसका भाई खालिद शामिल थे. गौरतलब है कि 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में पांच आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शारजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा था कि उमर खालिद और शारजील इमाम के खिलाफ UAPA के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और सभी आरोपी एक जैसी स्थिति में नहीं हैं. इस मामले में कुल 20 आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिनमें से दो अब भी फरार हैं. शेष 18 में से कई ने पहले जमानत याचिकाएं दायर की थीं. इनमें से सात आरोपी अब भी जेल में बंद हैं, जिनमें उमर खालिद, शारजील इमाम, अथर खान, सलीम मलिक, पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन, तसलीम अहमद और खालिद सैफी शामिल हैं.

राज्यपाल बागडे बोले- “एक भारत श्रेष्ठ भारत की आत्मा है कश्मीर”

जयपुर. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से गुरुवार को लोकभवन में भारत दर्शन के अंतर्गत कश्मीर के छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। राज्यपाल ने इस दौरान प्रतिनिधिमंडल से संवाद करते हुए कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की आत्मा है कश्मीर। विविधता में एकता लिए भारत की संस्कृति प्रांतों की परम्पराओं, वहां के ऐतिहासिक स्थलों और प्रकृति से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि "भारत दर्शन" का अर्थ ही है, एक भारत श्रेष्ठ भारत से साकार होना। उन्होंने कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और वहां की परम्पराओं को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भारत की आत्मा है। हम सभी मां भारती के लिए सोच रखते हुए कार्य करें। दसवीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, श्रीनगर के साथ आए इस "भारत दर्शन"  प्रतिनिधिमंडल में कश्मीर के श्रीनगर, पुलवामा, बारामुला, कुपवाड़ा आदि क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने राज्यपाल बागडे से यात्रा और भारतीय संस्कृति को लेकर अपने अनुभव भी साझा किए। राज्यपाल ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा: राजिम कुंभ कल्प 2026 हेतु सीएम विष्णुदेव साय को न्योता

रायपुर. छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से शिष्टाचार भेंट कर राजिम कुंभ कल्प 2026 के लिए उन्हें  आमंत्रित किया। यह भेंट मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित हुई, जहां मंत्री ने इस भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन की तैयारियों और महत्व पर विस्तार से चर्चा की।राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का प्रमुख प्रतीक है। यह कुंभ मेला परंपरा से प्रेरित विशाल स्नान पर्व है, जिसमें लाखों भक्तगण भाग लेते हैं। वर्ष 2026 का यह कल्प विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह राज्य की पर्यटन क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने का अवसर प्रदान करेगा। मंत्री अग्रवाल ने बताया कि आयोजन के दौरान पारंपरिक स्नान, धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोक उत्सव आयोजित किए जाएंगे, जो पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।इस शिष्टाचार भेंट के दौरान आयुक्त रायपुर  महादेव कावरे  एवं कलेक्टर गरियाबंद  बी.एस. उईके भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए आयोजन की सफलता के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प न केवल धार्मिक महत्व का है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक एकता और आर्थिक उन्नति को बढ़ावा देने वाला महापर्व सिद्ध होगा।राज्य सरकार द्वारा इस कुंभ के लिए विशेष तैयारियां तेजी से की जा रही हैं, जिसमें स्वच्छता अभियान, यातायात व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल प्रचार शामिल हैं। गरियाबंद जिला प्रशासन ने पहले ही स्थानीय स्तर पर समितियां गठित कर ली हैं। यह आयोजन छत्तीसढ़ के पर्यटन को राष्ट्रीय पटल पर लाने में मील का पत्थर साबित होगा। 

48 नगर निकायों में चुनाव के आज से चार फरवरी तक होंगे नामांकन

रांची. राज्य के 48 नगर निकायों में चुनाव को लेकर सभी जिलों में बुधवार को अधिसूचना जारी हो गई। उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों ने पूर्वाह्न 11 बजे अपने-अपने जिले के निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव की अधिसूचना जारी की। अब सभी निकायों में गुरुवार से नामांकन शुरू हो जाएगा। नामांकन की अंतिम तिथि चार फरवरी निर्धारित की गई है। सभी निकायों में नामांकन पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक संपन्न होगा। उम्मीदवार निर्वाची या सहायक निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। आयोग ने नामांकन प्रक्रिया को भी लेकर पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत किसी उम्मीदवार के नामांकन के समय निर्वाची पदाधिकारी कार्यालय की 100 मीटर की परिधि में महज तीन वाहनों का ही प्रवेश होगा। वहीं, नामांकन के समय अधिकतम पांच व्यक्ति का ही इस परिधि में प्रवेश हो सकेगा। निर्वाची पदाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि नामांकन पत्र दाखिल करने के समय ही नामांकन पत्रों की प्रारंभिक जांच कर ली जाए। जैसे उम्मीदवार और उनके प्रस्ताव के नाम मतदाता सूची में है या नहीं। सभी आवश्यक दस्तावेज नामांकन पत्र के साथ संलग्न है या नहीं। उम्मीदवार के साथ-साथ प्रस्ताव का भी मतदाता सूची में अनिवार्य रूप से होना चाहिए। नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी तथा प्रतिदिन की रिपोर्ट आयोग को भेजी जाएगी। बताते चलें कि पांच फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी तथा छह फरवरी तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। सात फरवरी को उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा। आयोग ने पहले ही चुनाव चिह्न निर्धारित कर दिए हैं। 23 फरवरी को मतदान होगा तथा 27 फरवरी को सुबह आठ बजे से मतगणना होनी है।

राजस्थान में आबकारी नीति 2025-29 में बड़े बदलाव की तैयारी

जयपुर. राजस्थान में शराब को लेकर सरकार ने चुपचाप ऐसा फैसला कर दिया है, जो प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सामाजिक ताने-बाने और अपराध नियंत्रण की नीति पर सीधा असर डाल सकता है। आबकारी एवं मद्य-संयम नीति 2025–29 में संशोधन करते हुए सरकार ने शराब दुकानों के खुलने और बंद होने का समय तय करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त को सौंप दिया गया है। यह बदलाव सोची-समझी रणनीति के तहत देर रात तक शराब बिक्री का रास्ता खोलने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। आबकारी महकमा लंबे समय से शराब दुकानों का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर रात 10 या 11 बजे तक बढ़ाने की पैरवी करता रहा है। अब जब समय निर्धारण का पूरा अधिकार उनके हाथ में है, तो सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार भविष्य में राजनीतिक जवाबदेही से बचते हुए अफसरों के जरिए शराब बिक्री का समय बढ़वाना चाहती है? जबकि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने बढ़ते अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए शराब दुकानों का समय रात 11 बजे से घटाकर रात 8 बजे कर दिया था। तब पुलिस और प्रशासन का तर्क था कि देर रात शराब बिक्री अपराधों को बढ़ावा देती है। अब उसी फैसले को अप्रत्यक्ष रूप से पलटने की जमीन तैयार की जा रही है। कुंभलगढ़-रणकपुर में बार लाइसेंस शुल्क तीन गुना कुंभलगढ़ और रणकपुर जैसे सीमित पर्यटक आवागमन वाले क्षेत्रों में बार लाइसेंस शुल्क तीन गुना बढ़ा दिया गया है। स्थानीय होटल व्यवसायियों का कहना है कि यहां पर्यटन साप्ताहिक और सीजनल है, ऐसे में इतनी अधिक फीस अव्यावहारिक है और इससे व्यवसाय प्रभावित होगा। पार्टी के लिए देना होगा ज्यादा शुल्क नीति में किया गया एक और बदलाव सीधे तौर पर आम परिवारों पर प्रहार माना जा रहा है। विभाग से रजिस्टर्ड स्थानों पर शादी, रिसेप्शन या अन्य सामाजिक आयोजनों में शराब परोसने के लिए लिए जाने वाले एक दिवसीय लाइसेंस की फीस को 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं घर पर पार्टी के लिए भी अब लाइसेंस लेने पर ज्यादा शुल्क देना होगी। वार्षिक गारंटी राशि में 12.5 प्रतिशत वृद्धि नीति संशोधन का दूसरा बड़ा फैसला शराब दुकानों के नवीनीकरण से जुड़ा है। वर्ष 2025–26 की वार्षिक गारंटी राशि को 12.5 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2026–27 के लिए तय किया गया है। दुकान पूरे वर्ष चली हो या आंशिक अवधि के लिए, हर स्थिति में बढ़ी हुई गारंटी राशि लागू होगी। क्लस्टर सिस्टम में भी यही व्यवस्था रहेगी। सरकार भले ही इसे राजस्व बढ़ाने का कदम बता रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ता पर पड़ेगा, क्योंकि कारोबारी बढ़ी हुई लागत की भरपाई शराब के दामों से करेंगे। अन्य प्रमुख प्रावधान देशी मदिरा और राजस्थान निर्मित मदिरा की न्यूनतम 3 प्रतिशत आपूर्ति एसेप्टिक ब्रिक पैक में अनिवार्य की गई है, जिसे भविष्य में 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा। होटल, रेस्टोरेंट, क्लब बार में सूक्ष्म मदिरा निर्माण इकाई पर पहले दो माह 50 प्रतिशत आबकारी शुल्क में छूट। हेरिटेज व अन्य होटलों के लाइसेंस शुल्क का पुनर्निर्धारण क्षेत्रफल, कमरों की संख्या के आधार पर किया गया। अवसर विशेष लाइसेंस के दुरुपयोग पर लाइसेंस निरस्तीकरण और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने सरगुजा ओलंपिक के लोगो और शुभंकर “गजरु” का किया अनावरण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में बस्तर ओलम्पिक की तर्ज पर आयोजित होने वाले सरगुजा ओलंपिक के प्रतीक चिन्ह (लोगो) एवं शुभंकर “गजरु” का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने सरगुजा अंचल के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब बस्तर की भांति सरगुजा की खेल प्रतिभाओं को भी अपनी क्षमता दिखाने का सशक्त मंच मिलेगा।  मुख्यमंत्री ने 12 खेल विधाओं में लगभग 3 लाख 50 हजार खिलाड़ियों के पंजीयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह संख्या सरगुजा अंचल के युवाओं के उत्साह, ऊर्जा और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलम्पिक में जनभागीदारी ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान दिलाई है और अब वही उत्साह सरगुजा ओलंपिक को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। पंजीयन से यह स्पष्ट है कि सरगुजा पूरे मनोयोग और उमंग के साथ इस आयोजन के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने आयोजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी लेते हुए सफल आयोजन की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।   उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने सरगुजा ओलंपिक के शुभंकर और लोगो के अनावरण कार्यक्रम में कहा कि इस आयोजन से सरगुजा के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा और कौशल दिखाने का अच्छा मंच मिलेगा। इसके विजेता खिलाड़ियों को राज्य की प्रशिक्षण अकादमियों में सीधे प्रवेश दिया जाएगा। उन्हें यूथ आइकॉन घोषित कर युवाओं व बच्चों को खेलों से जुड़ने और खेलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरगुजा ओलंपिक 2026 का लोगो इस अंचल की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और खेल भावना का जीवंत प्रतीक है। लोगो के केंद्र में मैनपाट स्थित प्रसिद्ध टाइगर पॉइंट जलप्रपात को दर्शाया गया है, जो हरियाली, ऊर्जा और निरंतर प्रवाह का प्रतीक है। मध्य भाग में अंकित “सरगुजा ओलंपिक 2026” आयोजन की स्पष्ट पहचान के साथ स्थानीय गौरव और अस्मिता को अभिव्यक्त करता है।   चारों ओर 12 खेलों के प्रतीक चिन्ह समावेशिता और समान अवसर का संदेश देते हैं। रंगों का संयोजन आयोजन की जीवंतता, उत्साह और एकता को प्रकट करता है। लाल रंग का विशेष सांस्कृतिक महत्व पहाड़ी कोरवा जनजाति की परंपराओं से भी जुड़ा है, जहाँ यह शक्ति, साहस और जीवन-ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह रंग सकारात्मकता और संरक्षण का भाव लिए हुए दैवीय शक्ति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाता है।     इसी प्रकार सरगुजा ओलम्पिक 2026 का शुभंकर गजरु को रखा गया है, जो सरगुजा अंचल की प्राकृतिक व सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। आदिवासी समाज में हाथी को बल, धैर्य, बुद्धिमत्ता और एकता का प्रतीक माना जाता है। इसकी विशेषताएँ—शक्ति, अनुशासन, संतुलन और निरंतर प्रयास—खेल भावना से जुड़ी हैं तथा झुंड में चलने की प्रवृत्ति टीम वर्क और सामूहिक सहभागिता का संदेश देती है।  विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित होगी खेल प्रतिभाएं सरगुजा ओलंपिक के लिए 28 दिसंबर 2025 से 25 जनवरी 2026 तक पंजीयन किया गया है, जिसमें 06 जिलों से लगभग 03 लाख 50 हजार लोगों ने पंजीयन कराया है। इसमें 1 लाख 59 हजार पुरुष और 01 लाख 89 हजार महिलाओं ने आयोजन में अपना पंजीयन कराया है। कबड्डी, खो-खो, तीरंदाजी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, कुश्ती, रस्साकसी समेत 12 विधाओं में विकासखंड, जिला तथा संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी।    समारोह में उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, सचिव  राहुल भगत, सचिव खेल  यशवंत कुमार, संचालक खेल मती तनुजा सलाम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।