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वीबी-जी रामजी योजना से बदलेगी हर गांव के विकास की तस्वीर: मंत्री राजपूत

सीहोरा में किए एक करोड़ से अधिक के विकास कार्यों के भूमि पूजन एवं लोकार्पण भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है वीबी-जी रामजी योजना जिससे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार कर गांव को समृद्ध बनायेंगे। इस योजना में 125 दिन के रोजगार की गांरटी है। साथ ही ग्राम पंचायतें अपने गांव के विकास के लिए खुद निर्णय लेकर विकास कार्य करेंगी। सीसी रोड और अधोसंरचना जैसे कार्य कर ग्राम पंचायतें शसक्त होंगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। यह बात खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर जिले के सीहोरा में विभिन्न विकास कार्य के लोकार्पण एवं भूमि पूजन के अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र के गांव-गांव में करोड़ों के विकास कार्य चल रहे हैं छोटे-छोटे गांव भी अब पक्की सड़कों से जुड़ चुके हैं। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए मैं और मेरा पूरा परिवार दिन-रात मेहनत करते हैं। हमारा संकल्प है कि सुरखी का विकास प्रदेश में अलग पहचान बनाए, जिसका नतीजा है कि आज हम सबसे कम समय में सबसे अधिक विकास कार्य करने वाले क्षेत्र में शामिल हैं । प्रधानमंत्री श्री मोदी तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जो विकास की तस्वीर बनाई, वह सुरखी विधानसभा क्षेत्र में नजर आती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के दृढ़ संकल्प ने विश्व में भारत को अलग पहचान दी, तो वही जन-जन के नेता डॉ. यादव की दूरदर्शी सोच ने मध्यप्रदेश में विकास की नई इमारत लिखी। हम सब आपके सर्वांगीण विकास के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। आपका आशीर्वाद और सहयोग इस विकास रथ को और गति देगा। मंत्री श्री राजपूत ने सीहोरा में नल जल योजना, पेयजल टैंकर, सी.सी. रोड निर्माण कार्य मुख्य बाजार से जैन मंदिर की ओर चबूतरा निर्माण, हाईमास्ट फाउन्डेशन कंट्रोल पैनल मय फिटिंग 02 स्थानों पर, मंगल भवन निर्माण कार्य संत रविदास मंदिर के पास, ,सीहोरा में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सीहोरा में राजस्व का आवासीय भवन, सीहोरा में उप तहसील कार्यालय भवन, सीहोरा में हाई स्कूल का अनुरक्षण कार्य, सीहोरा प्राथमिक शाला में फर्नीचर, प्री-फेब्रिकेटेड स्वागत द्वार निर्माण कार्य सिहोरा लोटना मार्ग पर, सामुदायिक, भवन, घाट निर्माण कार्य, श्रवण प्रताप चबूतरा निर्माण, शांतिधाम सौंदर्याकरण कार्य, पेवर ब्लॉक कार्य पंचायत भवन, टीन शेड निर्माण भूतेश्वर मंदिर, आदि का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करते हुए सीहोरा को मंत्री राजपूत ने एक करोड़ से अधिक की राशि के विकास कार्यों की सौगात दी। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि चैकी जंलधर मार्ग को वन विभाग से अनुमति दिला दी है, अब इसका कार्य शीघ्र पूर्ण होगा इससे करीब 50 ग्रामों को आवागमन की सुविधा होगी।  

एमपी ट्रांसको ने 500 एमवीए का अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर किया ऊर्जीकृत

मालवा क्षेत्र के पारेषण नेटवर्क की विश्वसनीयता में इजाफा भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के प्लानिंग क्राइटेरिया (नियोजन मानदंडों) के अनुरूप, मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने मालवा क्षेत्र में बढ़ती विद्युत डिमांड और ट्रांसमिशन नेटवर्क के रिलायवल्टी फेक्टर को ध्यान में रखते हुए 400 केवी बदनावर, धार सबस्टेशन में एक अतिरिक्त 500 एमवीए क्षमता का 400/220 केवी पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर उसे ऊर्जीकृत कर दिया है। इससे अब सरदार सरोवर गुजरात से मध्यप्रदेश के हिस्से की मिलने वाली बिजली भी पर्याप्त मात्रा मे पीजीसीआईएल राजगढ़ के माध्यम से धार जिले को मिल सकेगी। कंटेंनजेसी स्टेंडर्ड का भी हुआ पालन मंत्री श्री तोमर ने बताया कि नए ट्रांसफॉर्मर की स्थापना से न केवल मालवा क्षेत्र बल्कि प्रदेश के पारेषण नेटवर्क की विश्वसनीयता में इजाफा होने के साथ एन-1 कंटेंनजेसी स्टेंडर्ड (आकस्मिकता मानकों) का अनुपालन भी सुनिश्चित हुआ है। इससे भविष्य की लोड वृद्धि को हैंडल करने और राज्य के ट्रांसमिशन सिस्टम की उपलब्ध ट्रांसफर क्षमता (एटीसी) बढ़ाने में भी सहायता मिली है। क्षमता वृद्धि से यह क्षेत्र भी होंगे लाभांवित मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के अधीक्षण अभियंता श्री अनिल सक्सेना ने बताया कि पूर्व में इस सबस्टेशन में 315-315 एमवीए के दो ट्रांसफॉर्मर स्थापित थे। अतिरिक्त 500 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से 400 केवी सबस्टेशन बदनावर की क्षमता बढ़कर 1130 एमवीए की हो गई है श्री सक्सेना ने बताया कि इस नए ट्रांसफार्मर की स्थापना से बदनावर से जुड़े कानवन, बडनगर, रतलाम, वंडर सिमेंट के अलावा ओद्योगिक क्षेत्र स्थित पीथमपुर को लाभ मिलेगा।  

सोशल मीडिया की अपील रंग लाई, सीएम मोहन यादव ने दिव्यांग युवक को दिलाया स्टेडियम में मैच देखने का मौका

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर साबित किया है कि वे जनता के दिलों पर क्यों राज करते हैं। उनका मन जनता की एक आवाज पर पसीज जाता है। दरअसल, एक दिव्यांग ने प्रदेश के मुखिया से जब ये कहा कि उन्हें भारत-न्यूजीलैंड के बीच इंदौर में हो रहे मैच को मैदान से लाइव देखना है, लेकिन टिकट का इंतजाम नहीं हो पा रहा, तो ये सुनते ही सीएम डॉ. यादव ने बिना कोई देर किए उनके लिए टिकट का प्रबंध कर दिया। दिव्यांग ने ये अपील वीडियो के जरिये की थी। इच्छा पूरी होने के बाद दिव्यांग ने सीएम डॉ. यादव को धन्यवाद भी दिया। गौरतलब है कि, भारत-न्यूजीलैंड मैच लाइव देखने की अपील उज्जैन के बड़नगर तहसील के गांव बमनापानी के दिव्यांग अभिषेक सोनी ने की। उन्होंने इस अपील का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। इस बात की जानकारी जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लगी तो उन्होंने दिव्यांग की इच्छा पूरी करने में एक पल नहीं लगाया।   कई बार पेश की मानवता की मिसाल बता दें, जब से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की बागडोर संभाली है, तब से उन्होंने कई बार मानवता की मिसाल पेश की है। उन्होंने एक आम आदमी की तरह जनता से व्यवहार किया है। सीएम डॉ. यादव कभी यूपीआई पेमेंट कर आम खरीदे देखे जा सकते हैं, तो कहीं भी जनता के साथ चाय पीते देखे जा सकते हैं। एक बार वे भुट्टा खरीदने बाजार में उतर गए और बच्चे को दुलार किया। इस वाक्ये की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इसी तरह एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री आवास किसी मेरा आवास नहीं, बल्कि जनता का आवास है।

आग से जला मेडिकल स्टोर, बीमा क्लेम ठुकराने पर कंपनी को पड़ा महंगा—5.13 लाख भुगतान के निर्देश

भोपाल गाढ़े वक्त में बीमा दावे का भुगतान करने से मना करने की प्रवृत्ति पर उपभोक्ता आयोग ने तगड़ी चोट की है। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने एक फैसले में उपभोक्ता को राहत देते हुए उसे पांच लाख 13 हजार रुपये का बीमा दावा भुगतान का आदेश दिया है। मेडिकल स्टोर में आग लगने से उपभोक्ता का सारा माल जल गया, बीमा कंपनी ने नुकसान की भरपाई से पल्ला झाड़ लिया था। ऋण और बीमा का विवरण गांधीनगर निवासी रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक मंटू भारती ने अपनी दुकान के लिए बैंक से ऋण लिया था, जिसके तहत उन्होंने टाटा एआईजी से बीमा कराया था। वे नियमित रूप से ढाई हजार रुपये प्रीमियम का भुगतान कर रहे थे। दुकान का बीमा 21 मई 2022 से मई 2024 तक प्रभावी था।   अग्निकांड और नुकसान का आकलन इसी बीमित अवधि के दौरान, 30 जून 2024 की रात करीब दो से तीन बजे के बीच दुकान में भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में दवाइयां और अन्य सामग्री जलने से संचालक को लगभग 10 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। पीड़ित ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का मुआयना कर 5.05 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि की थी। इसके बावजूद, बीमा कंपनी ने दस्तावेजों में विसंगति का हवाला देते हुए क्लेम को पूरी तरह खारिज कर दिया। उपभोक्ता आयोग का फैसला और सख्त टिप्पणी न्याय की गुहार लेकर पीड़ित ने मार्च 2025 में उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। जिला आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल व सदस्य डा. प्रतिभा पांडेय की बेंच ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह गांधी नगर स्थित रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक को क्षतिपूर्ति के रूप में 5.13 लाख रुपये का भुगतान करे। आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक व्यवसायी का रोजगार छिन गया और कंपनी राहत देने के बजाय कागजी विसंगतियों का बहाना बनाती रही। उपभोक्ता मामले की अधिवक्ता मोना पालीवाल ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि जब सर्वेयर ने नुकसान का आकलन कर लिया था, तो कम से कम उतनी राशि का भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए था। कागजी विसंगतियों के आधार पर किसी का हक नहीं मारा जा सकता।

पशुपालन एवं पशु कल्याण को लेकर प्रदेश भर में चलेगा एक माह का जागरूकता अभियान

पशुपालकों, किसानों, छात्र-छात्राओं को पशुपालन एवं डेयरी से संबंधित योजनाओं एवं पशु कल्याण के बारे में किया जाएगा जागरूक राज्य, जिला एवं विकासखंड स्तर पर आयोजित की जाएगी विभिन्न गतिविधियां भोपाल भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा पशुपालकों, किसानों, छात्र-छात्राओं को पशुपालन एवं डेयरी से संबंधित योजनाओं एवं पशु कल्याण के बारे में जागरूक करने के लिए पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरूकता माह का आयोजन किया जा रहा है। जो 13 फरवरी 2026 तक चलेगा। केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार प्रदेश में भी पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरूकता माह का आयोजन किया जाएगा। एक माह तक चलने वाले कार्यक्रम को लेकर संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पीएस पटेल ने सभी जिलों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने बताया कि यह अभियान राज्य, जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर विभिन्न जागरूकता एवं हितग्राही मूलक गतिविधियों के माध्यम से संचालित होगा। अभियान के अंतर्गत पशुकल्याण, पशु चिकित्सा सेवाओं, उन्नत पशुपालन, डेयरी, बकरी एवं मुर्गी पालन से संबंधित योजनाओं के साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा पशुपालन से संबंधित चलाई जा रही हितग्राही मूलक योजनाओं के बारे में पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा। इसके लिए संगोष्ठियां, ऑनलाइन वेबिनार, युवा संवाद, गोशालाओं एवं पशु कल्याण संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही स्कूलों एवं कॉलेजों में विभागीय दलों द्वारा भ्रमण कर छात्र-छात्राओं को पशुपालन एवं पशु कल्याण की जानकारी दी जाएगी। जिले एवं विकासखण्ड स्तर पर सभी वेट्स-पेरावेट्स, गोसेवक-मैत्री कार्यकर्ता, कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, दुग्ध संघों के अधिकारी-कर्मचारी, स्वसहायता समूहों के सदस्य एवं पशु-सखी के समन्वय से अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

योगी सरकार की संवेदनशील पहल: गोवंश को मिल रहा पौष्टिक आहार, गोचर भूमि पर तेजी से बढ़ रहा हरा चारा उत्पादन

समग्र दृष्टि से पशु कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही योगी सरकार प्रदेश में 7140.37 हेक्टर चारागाह की भूमि को कब्जा मुक्त करके हरा चारा उत्पादन किया जा रहा, आगामी 2 वर्षों में 35000 हेक्टेयर भूमि का होगा उपयोग टैग्ड गोचर भूमि पर शत प्रतिशत हरे चारे का हो रहा उत्पादन, हाइब्रिड नेपियर और अन्य हरे चारे पर विशेष फोकस हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर हरा चारा उत्पादन करने वाले शीर्ष 4 जनपदों में शामिल लखनऊ,  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पशु कल्याण और गोवंश संरक्षण को लेकर लगातार ठोस कदम उठा रही है। गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में गोचर एवं चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका सकारात्मक असर अब ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में उपलब्ध कुल 61118.815 हेक्टेयर गोचर एवं चारागाह भूमि है। जिसमें 7140.37 हेक्टर चारागाह की भूमि को कब्जा मुक्त करके हरा चारा उत्पादन किया जा रहा है।यह प्रयास न केवल पशुओं के पोषण स्तर को बेहतर बना रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। अगले दो वर्षों में 35 हजार हेक्टेयर पर होगा हरा चारा उत्पादन योगी सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। आने वाले दो वर्षों में 35000 हेक्टेयर कब्जामुक्त एवं सिंचित चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन कराया जाएगा। इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में 1691.78 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर चारा और 5448.59 हेक्टेयर में अन्य हरे चारे (जई, बरसीम आदि) की बुआई की जा चुकी है। इससे गोवंश को सालभर पौष्टिक और संतुलित आहार उपलब्ध हो सकेगा। इन जनपदों में तेजी से बढ़ा हरा चारा उत्पादन प्रदेश के हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर जनपदों में हरा चारा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं टैग्ड गोचर भूमि पर शत-प्रतिशत हरा चारा उत्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। गोचर एवं चारागाह भूमि का समतलीकरण, सुरक्षाबाड़ा एवं खाई निर्माण जैसे कार्य मनरेगा कन्वर्जेन्स के माध्यम से कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है और पशुओं के लिए सुरक्षित चारागाह भी विकसित हो रहे हैं। शीतलहर से बचाव के भी निर्देश योगी सरकार ने गोवंश के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शीतलहर से बचाव के लिए बोरा-चट्ट ओढ़ाने, तिरपाल लगाने और गो-आश्रय स्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पशु स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें। कुल मिलाकर हरा चारा उत्पादन, चारागाह विकास और गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं के माध्यम से योगी सरकार यह स्पष्ट संदेश दे रही है कि प्रदेश में विकास के साथ-साथ पशु कल्याण भी शासन की प्राथमिकता है। यह पहल न केवल गोवंश संरक्षण को मजबूती दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को पशुपालन के क्षेत्र में एक सशक्त मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

घर वापसी अभियान: 200 लोगों ने अपनाया सनातन धर्म, समाज के वरिष्ठों ने किया अभिनंदन

कांकेर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में धर्मांतरण से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. कांकेर के पीढ़ापाल गांव में आज 50 से अधिक परिवारों के 200 धर्मांतरित लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर सामूहिक रूप से घर वापसी की है. इस दौरान 25 गांवों के समाज प्रमुखों समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे. समाज के वरिष्ठों की मौजूदगी में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और फिर गंगाजल छिड़क कर, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सम्मान के साथ मूल धर्म में वापसी कराई गई.  25 गांवों के समाज प्रमुख हुए शामिल जानकारी के अनुसार, इस मुहिम में पीढ़ापाल, धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुलगांव के ग्रामीण शामिल थे. बताया जा रहा है कि इन परिवारों ने आपसी सहमति और समाज के साथ लंबे संवाद के बाद स्वेच्छा से अपने पारंपरिक धर्म और संस्कृति की ओर लौटने का फैसला किया. बाकी बचे परिवार भी जल्द लौटेंगे: सर्व समाज सर्व समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने मीडिया को बताया कि यह समाज की एकजुटता का परिणाम है. उन्होंने कहा, “आज 50 परिवारों के 200 से अधिक लोग वापस आ गए हैं. क्षेत्र में अभी 3 से 4 परिवार और शेष हैं, जिन्होंने भी वापसी की इच्छा जताई है और वे जल्द ही मूल धर्म में लौट आएंगे.” प्रशासन की पैनी नजर इतने बड़े पैमाने पर हुई इस घर वापसी को लेकर पूरे बस्तर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है. इस संवदेनशील विषय को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. फिलहाल, क्षेत्र में शांति का माहौल है और समाज के लोगों में इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.

कान्हा से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के लिये नर बाघ रवाना

भोपाल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम कान्हा टाइगर रिज़र्व से एक नर बाघ को 18 जनवरी को सुरक्षित रूप से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) के लिए रवाना कर दिया गया है। नर बाघ को पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ परिक्षेत्र, सिवनी से रेस्क्यू किया गया था। उस समय बाघ शावक की उम्र लगभग 4 से 5 माह थी। इसके पश्चात बाघ को कान्हा टाइगर रिज़र्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़ा में पालन-पोषण कर प्राकृतिक शिकार एवं स्वतंत्र विचरण के लिये प्रशिक्षित किया गया। वर्तमान में बाघ की उम्र लगभग 33 से 35 माह है तथा वह पूर्णतः स्वस्थ एवं जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए सक्षम पाया गया है। विशेषज्ञ परामर्श के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि बाघ को ऐसे संरक्षित क्षेत्र में छोड़ा जाए जहाँ बाघों का घनत्व कम हो और पर्याप्त आवास उपलब्ध हो। बाघ को वन्यप्राणी चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा निश्चेत कर उसके शरीर के आवश्यक जैविक मापदंडों को विधिवत रूप से अभिलेखित किया गया। विशेषज्ञों की सतत निगरानी में तथा निर्धारित मानक प्रोटोकॉल के अनुरूप बाघ का सेटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व (नौरादेही) में सुरक्षित स्थानांतरण किया गया। टाइगर रिज़र्व में बाघ के दीर्घकालीन संरक्षण के लिये प्राकृतिक एवं अनुकूल आवास उपलब्ध है, जिससे वह स्वाभाविक रूप से स्वतंत्र विचरण कर सकेगा। यह प्रक्रिया क्षेत्र संचालक, कान्हा टायगर रिजर्व श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी के मार्गदर्शन में सम्पन्न की गई। इस पूरे स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान उप संचालक (कोर) श्री पुनीत गोयल, उप संचालक (बफर) सुश्री अमीथा के.बी, वन्यप्राणी चिकित्सक, कान्हा टाइगर रिजर्व डॉ. संदीप अग्रवाल, राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर डॉ. अनिरूद्ध मजूमदार एवं अन्य विशेषज्ञ दल तथा अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपलब्ध रहे।  

‘स्टार्ट इन यूपी’ को मिली संस्थागत मजबूती, 7 स्वीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी

ब्लॉकचेन, एआई, 5जी/6जी, हेल्थटेक, ड्रोन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस आईआईटी, आईआईएम और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से स्टार्टअप्स को मिल रहीं विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट से रोजगार के नए अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने में जुटी है। योगी सरकार ने 'स्टार्ट इन यूपी' नीति के अंतर्गत प्रदेश में 7 अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति प्रदान की है, जिन्हें अब तक कुल ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। इन केंद्रों की मदद से प्रदेश में नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिल रही है। इन सभी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट, नए रोजगार अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को बढ़ावा मिल रहा है। ब्लॉकचेन से ड्रोन टेक्नोलॉजी तक, भविष्य की तकनीकों पर फोकस प्रदेश में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी/6जी टेलीकॉम, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। ये सेंटर न केवल स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें ग्लोबल स्टैंडर्ड पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। आईआईटी और आईआईएम बने नवाचार के इंजन गौतम बुद्ध नगर, लखनऊ, कानपुर नगर, सहारनपुर और गाजियाबाद में स्थापित इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आईआईटी कानपुर, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, एसटीपीआई लखनऊ और एकेजीईसी गाजियाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। इससे स्टार्टअप्स को विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग) प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट मिल रहा है। 5 वर्षों में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, ₹10 करोड़ तक का संस्थागत सहयोग उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत प्रत्येक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्थापना की तिथि से 5 वर्षों की अवधि में अधिकतम ₹10 करोड़ तक की ग्रांट-इन-एड (पूंजीगत एवं संचालन व्यय सहित) प्रदान किए जाने का प्रावधान है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि ये सेंटर पांच वर्षों के भीतर आत्मनिर्भर बनें और दीर्घकालिक रूप से प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करें। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा गौतम बुद्ध नगर में स्थापित ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईएम लखनऊ ईआईसी द्वारा माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र 10,000 वर्ग फुट के अत्याधुनिक परिसर में अगले पांच वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करेगा। यहां स्टार्टअप्स को उच्च तकनीकी सुविधाओं के साथ ₹75 लाख तक की सीड फंडिंग, विशेषज्ञ मेंटरशिप और एंजेल व वेंचर कैपिटल नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश में एक सशक्त और टिकाऊ ब्लॉकचेन इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। मेडटेक और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स से आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था लखनऊ में स्थापित मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स (मेडटेक) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एसटीपीआई लखनऊ, एसजीपीजीआई, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग (उत्तर प्रदेश सरकार), एआईएमईडी, एएमटीजेड और केआईएचटी के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य मेडिकल डिवाइस और हेल्थ टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करना और मेक इन इंडिया व डिजिटल इंडिया को सशक्त करना है। यहां स्टार्टअप्स को तकनीकी विशेषज्ञों, डॉक्टरों, मेंटरशिप और वेंचर फंडिंग का सहयोग मिल रहा है। 5जी/6जी और एआई से भविष्य की तकनीकों पर फोकस कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित 5जी/6जी टेलीकॉम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों पर अनुसंधान और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा दे रहा है। अत्याधुनिक आरएफ लैब्स, एआई/एमएल सर्वर, सुपरकंप्यूटिंग टूल्स और टेस्टिंग सुविधाओं से लैस यह केंद्र भारत को वैश्विक टेलीकॉम नवाचार में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में स्थापित एआई एवं इनोवेशन आधारित उद्यमिता (एआईआईडीई) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईटी कानपुर और फिक्की के सहयोग से संचालित है, जहां हर वर्ष 50 एआई आधारित स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निवेश से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। सहारनपुर और गाजियाबाद से उभरता औद्योगिक नवाचार सहारनपुर में आईआईटी रुड़की द्वारा संचालित 5जी/6जी यूबिक्विटस वायरलेस कम्युनिकेशन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस 6जी विजन के अनुरूप कार्य कर रहा है। वहीं, गाजियाबाद में एकेजीईसी द्वारा स्थापित एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अत्याधुनिक थ्रीडी प्रिंटिंग और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के माध्यम से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है। ड्रोन और यूएवी तकनीक में यूपी को राष्ट्रीय हब बनाने की तैयारी कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित यूएवी डिजाइन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता, टेस्टिंग, डिजाइन वैलिडेशन और कंसल्टेंसी प्रदान कर रहा है। डीजीसीए अनुमोदित फ्लाइट टेस्टिंग जोन और उन्नत लैब्स के माध्यम से यह केंद्र प्रदेश को ड्रोन टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर है।

किसानों की अगली पीढ़ी सड़क पर: पांगरी बांध मुआवजे को लेकर बुरहानपुर में बच्चों का आंदोलन

बुरहानपुर जिले की पांगरी बांध परियोजना के तहत भूमि डूब में जाने से प्रभावित किसानों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। मुआवजे को लेकर सरकार और प्रशासन से संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण किसान लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते महीनों में किसान पत्थर खाओ आंदोलन, भैंस के आगे बीन बजाओ, अर्ध नग्न प्रदर्शन जैसे अनूठे तरीकों से अपना विरोध जता चुके हैं। आंदोलन में बच्चों की एंट्री रविवार को आंदोलन ने एक नया रूप ले लिया, जब प्रभावित किसानों के छोटे-छोटे बच्चों ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथ में ले ली। बच्चों ने हाथों में तख्तियां लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम पत्र लिखा और जमीन का दोगुना मुआवजा देने की मांग की। तख्तियों पर “हमें न्याय चाहिए” और “जय जवान जय किसान” जैसे नारे लिखे हुए थे।   प्रशासन पर कानून तोड़ने का आरोप आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने आरोप लगाया कि प्रशासन भूमि अधिग्रहण कानून को तोड़-मरोड़ कर किसानों के सामने प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को विधिवत दो गुना मुआवजा और सांत्वना राशि मिलनी चाहिए। प्रशासन की मौजूदा प्रक्रिया कानून के विपरीत है, जिसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 300 से अधिक परिवार प्रभावित पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत पांगरी, बसाली और नागझिरी गांवों के 300 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। इन गांवों की लगभग 287 हेक्टेयर भूमि बांध के डूब क्षेत्र में चली गई है। यह भूमि गन्ना, केला और कपास जैसी व्यावसायिक फसलों के लिए जानी जाती थी। विस्थापन योजना का अभाव किसानों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग ने न तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और विस्थापन की कोई ठोस योजना बनाई है और न ही परियोजना से जुड़े आवश्यक सर्वे कराए गए हैं। जिला प्रशासन कलेक्टर दर से भूमि का मूल्य और उतनी ही पारितोषिक राशि दे रहा है, जिसे किसान अपर्याप्त बता रहे हैं। दो बार हो चुकी बैठकें, समाधान नहीं डॉ. रवि पटेल के अनुसार मुआवजे को लेकर जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ दो बार बैठक हो चुकी है। किसान जल संसाधन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट से भी मुलाकात कर चुके हैं। मंत्री ने अधिकारियों को समस्या सुलझाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। निर्माण कार्य भी प्रभावित मुआवजा विवाद के चलते बांध के बाद नहरों और अन्य निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें कानून के अनुसार पूरा मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान नंदू पटेल, राहुल राठौर, संजय चौकसे, माधो नाटो, कालू चौकसे, ओमप्रकाश सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।