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भैरवनाथ मंदिर में उप मुख्यमंत्री की भव्य पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दौरे की तैयारियों का लिया जायजा भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के गुढ़ स्थित नवनिर्मित भैरवनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने गजमाला अर्पित करके भगवान भैरवनाथ की पूजा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है। इसका धार्मिक के साथ-साथ पर्यटन के रूप में विकास किया जा रहा है। यहाँ दिनोंदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से मंदिर का महत्व अपने आप स्पष्ट हो जाता है। वर्षों से भैरवनाथ की खुले में रखी प्रतिमा पर अब भव्य मंदिर तैयार हो गया है। इसका इसी महीने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकार्पण करेंगे। भैरवनाथ मंदिर रीवा के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दौरे की तैयारियों का लिया जायजा उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने हेलीपैड, मुख्य कार्यक्रम स्थल तथा मंदिर का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आमजन शामिल होंगे। वाहनों की पार्किंग, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था तथा कार्यक्रम से जुड़े अन्य प्रबंधों पर विशेष ध्यान दें। मुख्यमंत्री डॉ यादव के दौरे की तैयारियों में किसी तरह की कोरकसर बाकी न रखें। मंदिर से जुड़े निर्माण कार्य 25 जनवरी तक हर हाल में पूरे कराएं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ मंदिर धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके विकास से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। विधायक गुढ़ ने मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मेहताब सिंह गुर्जर, स्थानीय जन प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

2026 में हरियाणा के सरकारी स्कूलों का कायाकल्प, करोड़ों की योजना लागू

कुरुक्षेत्र नए वर्ष पर प्रदेशभर के 1019 राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन चमचमाते दिखेंगे। इन भवनों के लिए प्राथमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक की ओर से 20 करोड़ 10 लाख 42 हजार रुपये जारी किए हैं। इस राशि से इन विद्यालयों के भवनों पर नए सिरे से रंग-रोगन किया जाएगा। विद्यालय भवनों की साफ-सफाई होगी और यह नए लुक में नजर आएंगे। इनमें सबसे अधिक नूंह जिला के 340 विद्यालय और सबसे कम महेंद्रगढ़ जिला का एक विद्यालय शामिल हैं। इसमें कुरुक्षेत्र के भी 11 और करनाल के 58 प्राथमिक विद्यालय भवन शामिल हैं। गौरतलब है कि प्रदेशभर के विद्यालयों की ओर से विद्यालय भवनों की मरम्मत, रख-रखाव और अन्य जरूरतों को लेकर अपनी मांग भेजी थी। इसी को देखते हुए प्राथमिक शिक्षा विभाग महानिदेशालय की ओर से वार्षिक बजट में से 20.10 करोड़ रुपये की राशि विद्यालय भवनों पर सफेदी के लिए जारी की गई है।   सबसे अधिक नूंह के 340 और महेंद्रगढ़ का एक स्कूल शामिल इस सूची में सबसे अधिक नूंह जिला के 340 विद्यालयों को शामिल किया है, जबकि महेंद्रगढ़ जिला का एक ही विद्यालय शामिल किया है। इस सूची में अंबाला के आठ, फरीदाबाद के 72, गुरुग्राम के 92, करनाल के 58, पलवल के 78 और पानीपत के 64 विद्यालय शामिल हैं।  

सड़क हादसे में मातम: तेज रफ्तार कार ने मजदूरों को रौंदा, दो की गई जान

जबलपुर एमपी के जबलपुर में रविवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहां एक अनियंत्रित तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे काम कर रहे 13 मजदूरों को कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। डिवाइडर रेलिंग लगाने का काम कर रहे थे मजदूर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पल्लवी शुक्ला के अनुसार, यह घटना बरेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिग्मा कॉलोनी के सामने एकता चौक के पास दोपहर करीब 2 बजे हुई। उस समय ये सभी मजदूर सड़क पर डिवाइडर रेलिंग लगाने के काम में लगे थे और काम के बीच में लंच कर रहे थे, तभी बेकाबू कार उन्हें रौंदते हुए निकल गई।   एक की हालत बेहद नाजुक, अन्य का इलाज जारी पुलिस ने बताया कि सभी हताहत मजदूर मंडला जिले के रहने वाले हैं। घायलों को इलाज के लिए तुरंत जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां एक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।

बीजापुर में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, मुठभेड़ में छह नक्सलियों का सफाया

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली नेता दिलीप बेदजा समेत छह माओवादियों को मार गिराया। पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से शवों के साथ दो एके-47 राइफलें व अन्य हथियार व गोला-बारूद बरामद किए  हैं। राज्य में जनवरी में अब तक 20 नक्सली मारे जा चुके हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में नक्सल कमांडर पापा राव और डिविजनल कमेटी सदस्य दिलीप बेदजा के होने की सूचना पर नक्सली विरोधी अभियान शुरू किया गया था। इसी दौरान शनिवार सुबह जिले के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र की जंगली पहाड़ियों में मुठभेड़ हुई। अभियान में पुलिस की विशेष टास्क फोर्स, जिला रिजर्व गार्ड व सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवान शामिल थे। मारे गए अन्य नक्सलियों की पहचान के प्रयास जारी हैं। बेदजा नेशनल पार्क एरिया समिति में सक्रिय था और कई हमलों में शामिल था। इससे पहले तीन जनवरी को बीजापुर सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में दो मुठभेड़ों में 14 नक्सलियों को मार गिराया गया था। पिछले साल छत्तीसगढ़ में कुल 285 नक्सली मारे गए थे। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली नेता दिलीप बेदजा समेत छह माओवादियों को मार गिराया। पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से शवों के साथ दो एके-47 राइफलें व अन्य हथियार व गोला-बारूद बरामद किए  हैं। राज्य में जनवरी में अब तक 20 नक्सली मारे जा चुके हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में नक्सल कमांडर पापा राव और डिविजनल कमेटी सदस्य दिलीप बेदजा के होने की सूचना पर नक्सली विरोधी अभियान शुरू किया गया था। इसी दौरान शनिवार सुबह जिले के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र की जंगली पहाड़ियों में मुठभेड़ हुई। अभियान में पुलिस की विशेष टास्क फोर्स, जिला रिजर्व गार्ड व सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवान शामिल थे। मारे गए अन्य नक्सलियों की पहचान के प्रयास जारी हैं। बेदजा नेशनल पार्क एरिया समिति में सक्रिय था और कई हमलों में शामिल था। इससे पहले तीन जनवरी को बीजापुर सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में दो मुठभेड़ों में 14 नक्सलियों को मार गिराया गया था। पिछले साल छत्तीसगढ़ में कुल 285 नक्सली मारे गए थे।

उत्तर प्रदेश से बढ़ेगी मेडिकल टेक्नोलॉजी की दौड़, मुख्यमंत्री योगी का बड़ा ऐलान

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ 25 करोड़ की आबादी वाला राज्य ही नहीं, बल्कि देश व पड़ोसी राज्यों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र भी है। प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर इनोवेशन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का राष्ट्रीय तथा वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है, जिसके परिणाम आज ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े हेल्थकेयर कंज्यूमर मार्केट के रूप में 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का भार वहन करता है। उन्होंने कहा कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वह परिवर्तन किया है, जिसकी कल्पना पहले संभव नहीं थी। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। इसके अतिरिक्त दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लागू होने से पहले किसी गरीब परिवार में यदि कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता था, तो पूरा परिवार भय और आर्थिक संकट में घिर जाता था। इलाज अधूरा छूट जाता था, क्योंकि न सरकार का सहयोग होता था और न ही संसाधन। आज उत्तर प्रदेश में 5.5 करोड़ परिवारों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से प्रति परिवार ₹5 लाख तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जो पात्र परिवार किसी कारणवश आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से कवर किया गया है। आयुष्मान कार्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है। कई जनपद ऐसे हैं, जहां ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है। एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी। वर्ष 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया। समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लागू की गई। मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है। डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अगला लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ विजन को साकार करना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग आवश्यक है। स्क्रीनिंग की प्रक्रिया गांव स्तर से शुरू होनी चाहिए, ताकि मरीज को अनावश्यक रूप से 40-50 किलोमीटर दूर न जाना पड़े। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ही यह तय हो जाए कि मरीज को किस स्तर की चिकित्सा की आवश्यकता है। टेली कंसल्टेशन, टेलीमेडिसिन और एआई आधारित स्क्रीनिंग से यह संभव है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क का विकास युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर भारत नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में आगे बढ़ना है। कोविड काल ने यह सिखाया कि संकट के समय दुनिया अपनी मोनोपोली दिखाती है। ऐसे में देश व प्रदेश को स्वास्थ्य और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना ही होगा। मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय और वैद्य जीवक की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा हमेशा यह मानती रही है कि “नास्ति मूलमनौषधम्” यानि कोई भी वनस्पति ऐसी नहीं, जिसमें औषधीय गुण न हों। उसी तरह “अयोग्य: पुरुषो नास्ति” यानि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, आवश्यकता केवल सही योजक की होती है। आज सरकार की नीतियां वही योग्य योजक हैं, जो युवाओं, स्टार्टअप्स व इनोवेटर्स को अवसर प्रदान कर रही हैं।

इंडिया एआई मिशन-देश को बना रहा है एआई अवसंरचना की वैश्विक शक्ति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंडिया एआई मिशन-भारत को राष्ट्रीय स्तर की एआई अवसंरचना विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वैश्विक एआई रैंकिंग-2025 में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एआई को उत्पादकता बढ़ाने तथा देश की आईटी प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभांश और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभावी उपयोग के लिए रणनीतिक साधन के रूप में अपनाया गया है। स्वदेशी डेटासेट्स, भारतीय भाषाओं पर आधारित फाउंडेशन मॉडल्स, सब्सिडी आधारित कंप्यूटर अवसंरचना और सुरक्षित व भरोसेमंद एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क इंडिया एआई की प्रमुख विशेषताएँ हैं। एआई कोश और जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर से स्टार्टअप को बढ़ावा उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट्स प्रभावी एआई प्रणालियों की नींव होते हैं। ‘एआई कोश’ प्लेटफॉर्म पर 6,250 से अधिक स्वदेशी क्यूरेटेड डेटासेट्स उपलब्ध हैं, जिनके साथ सैंडबॉक्स टूल्स और निःशुल्क कंप्यूटर एक्सेस प्रदान किया जा रहा है। सब्सिडाइज्ड दरों पर 38 हजार जीपीयू उपयोग में लाए जा रहे हैं। इससे बड़े पैमाने पर एआई नवाचार को गति मिली है। 'इनोवेशन सेंटर' के माध्यम से 12 स्टार्टअप को स्वदेशी एलएलएम और एसएलएम विकसित करने में सहयोग दिया जा रहा है। स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के प्रभावी उदाहरण केआरएआई डायग्नोस्टिक्स ने छाती के एक्स-रे से एआई के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया विकसित की है। उदाहरण प्रस्तुत किया। इंडिया एआई के सहयोग से यह तकनीक 105 से अधिक देशों में लागू हो चुकी है और इसे एफडीए की स्वीकृति भी प्राप्त है। कंवर्ज इन (नोकोबा) सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण प्रणालियों में एआई एजेंट्स के उपयोग पर काम कर रहा है। व्हाट्सएप आधारित संवाद प्रणाली, शत-प्रतिशत कॉल ऑडिटिंग और एसओपी अनुपालन से परिचालन लागत घटी है और नागरिक संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एआई प्रतिभा निर्माण पर विशेष जोर इंडिया एआई मिशन के ‘एआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम के अंतर्गत उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम, फेलोशिप्स और देशभर में 570 एआई एवं डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटर एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन में जीआईएस और एआई का एकीकृत उपयोग ‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टम’ के माध्यम से जमीनी स्तर पर योजना और निगरानी को सशक्त किया जा रहा है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के एकीकृत उपयोग से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में पारदर्शिता लाई जा रही है। भारत प्रारंभिक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। आधार, यूपीआई, कोविन, डिजिलॉकर, भाषिणी और ओएनडीसी इस परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन गये हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के एकीकरण से स्वास्थ्य जांच, बहुभाषी सेवा वितरण और निर्णय समर्थन प्रणालियों में शासन की दक्षता कई गुना बढ़ाई जा सकती है। भाषाई समावेशन डिजिटल समानता का आधार है। नेतृत्व-आधारित परिवर्तन और क्षमता निर्माण एकीकृत बैक-एंड प्लेटफॉर्म्स के लिये आवश्यक हैं। आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण के लिए एआई एआई उत्पादकता वृद्धि, रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन गई है। एआई को केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित और सामाजिक प्रभाव आधारित दृष्टिकोण के साथ अपनाये जाने की आवश्यकता है। कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण और सलाह प्रणालियों को किसानों की निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाने वाला तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स रोग पहचान में तेजी लाने वाला प्रभावी उपकरण बन गया है। एमएसएमई और टियर-2 व टियर-3 क्षेत्रों में एआई विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा प्लेटफॉर्म और उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिये तैयार डिजिटल एवं एआई अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एआई अब आकांक्षात्मक तकनीक नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा वितरण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल शासन की मूल आवश्यकता बन चुकी है। एआई अवसंरचना है भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी सॉवरेन डेटा और कंप्यूटर अवसंरचना के रणनीतिक महत्व की दृष्टि से उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्वदेशी हार्डवेयर, सुरक्षित डेटा सेंटर और मजबूत सप्लाई चेन को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। गोपनीयता, अनुपालन, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में अंतर्निहित किया जाना चाहिए। भरोसेमंद और सुरक्षित एआई अवसंरचना भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी है।  

सौर ऊर्जा के बढ़ते क्षेत्र से दिनों-दिन कम हो रही है पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पारंपरिक ऊर्जा के संसाधनों पर अपनी निर्भरता दिनों दिन कम करता जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में वर्ष 2070 तक कार्बन फुट-प्रिंट को शून्य तक लाने और समाप्त होते जीवाश्म ईंधन के विकल्प तलाशने के लिए वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट (अक्षय) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्यप्रदेश पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ योगदान दे रहा है। राज्य में पिछले 12 वर्षों में नवीन और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 14 प्रतिशत अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिससे अब कुल ऊर्जा उत्पादन में सहभागिता 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गत वर्ष हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में सौर ऊर्जा के क्षेत्र देश में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य वर्तमान में लगभग 31 हजार मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता रखता है, जिसमें से 30% हरित ऊर्जा है। हमारे लिये गौरव की बात है कि मध्यप्रदेश के रीवा सोलर पार्क और देश के सबसे बड़े ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्लांट का भी उल्लेख पूरे देश में हो रहा है। इससे अक्षय ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा मिली है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। इस नीति में सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों को अनुकूल और लचीले अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नया आयाम जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण देश के अग्रणी ऊर्जा सरप्लस राज्यों में से एक है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्म निर्भरता को प्राथमिकता देते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है। मध्यप्रदेश हरित ऊर्जा हब के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राज्य में 5 बड़ी सौर परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 2.75 गीगावाट (2,750 मेगावाट) है। सरकार की योजना वर्ष 2030 तक नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट (20,000 मेगावाट) करने की है। नवकरणीय ऊर्जा में 5.72 लाख करोड़ से अधिक के निवेश से 1.4 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मध्यप्रदेश सरकार नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.21 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर रही है, जिससे 1.46 लाख रोजगार सृजित होंगे। राज्य सरकार की यह पहल भारत के 'नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य वर्ष-2070 को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मध्यप्रदेश तेजी से नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश का नेतृत्वकर्ता बन रहा है और आत्मनिर्भर भारत व स्वच्छ ऊर्जा मिशन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।  

AAP विधायक का इस्तीफा, पंजाब में पार्टी को बड़ा नुकसान

चंडीगढ़ बीते दिनों मुक्तसर माघी मेले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ये कहा था कि जो गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता पावन स्वरूपों का मामला चल रहा है उसमें से कुछ स्वरूप बंगा के पास गांव माजारा नौ आबाद में धार्मिक अस्थान रसोखाना श्री नाभ कंवल राजा साहिब से मिले हैं। इस बयान के बाद उक्त धार्मिक अस्थान से जुड़ी संगत ने सख्त प्रतिक्रिया दी और मान सरकार की कड़ी निंदा की। उसी दिन देर शाम इस इलाके के विधायक डॉ. सुखविंदर सुक्खी, जो अकाली दल बादल की टिकट से जीतकर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे और आम आदमी पार्टी ने उन्हें कैबिनेट रैंक दिया था। इसके साथ ही विभाग का चेयरमैन कन्वीनर लगाया गया था। उन्होंने उसी दिन देर रात श्री राजा साहिब अस्थान पर जाकर इस बयान की निंदा की था और इसे अपनी आस्था का केंद्र बताया था। इस मामले से अस्थान से श्रद्धा से जुड़ी संगत में सरकार के प्रति काफी रोष पैदा हुआ है। वहीं आज फिर करीब 12 बजे विधायक डॉ. सुखविंदर सुक्खी ने अस्थान पर जाकर अपना रोष जताते हुए चेयरमैन पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया और कहा कि इस मामले में उन्हें बहुत ठेस पहुंची है। उन्होंने सीधे शब्दों में आम आदमी सरकार के इस कदम से माहौल खराब होने के बारे में खुलासा करते हुए कहा कि वह कुछ लोग गलत प्रोपेगैंडा फैला रहे हैं, जिससे वे दुखी हैं। 

लालकिला विस्फोट चार्जशीट: ED का दावा, डॉक्टरों की भूमिका सामने आई

नई दिल्ली फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 260 पेज की चार्जशीट दाखिल की है. जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इसमें डॉक्टर्स की भर्ती मामले में भी बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के ही नवंबर 2025 के 'लाल किला ब्लास्ट' से जुड़े संदिग्ध डॉक्टरों की भर्ती की थी. इनको रखने से पहले अल फलाह ने पुलिस वेरिफिकेशन ही नहीं करवाई थी। बता दें कि इन तीन डॉक्टरों में से दो को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा डॉक्टर वही सुसाइड बॉम्बर था, जिसने धमाके को अंजाम दिया था।    चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि अल फलाह ने मेडिकल इंस्पेक्टर को बेवकूफ बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नकली मरीजों को भर्ती किया, ताकि उनको ऐसा लगे कि बहुत मरीज और जरूरी सुविधाएं हैं,जिससे कि कॉलेज की डिग्री की मान्यता बनी रहे। ED ने यूनिवर्सिटी के 61 साल के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ PMLA के तहत दिल्ली की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. ईडी ने इस मामले में पहले ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी।जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी से जुड़े फंड्स को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया और इनके असली स्रोत को छुपाया गया।

पानीपत के मरीज के लिए आर्टिफिशियल अंग: HC ने मेडिकल कॉर्पोरेशन को टेंडर जारी करने कहा

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड पंचकूला को निर्देश दिए है कि वह रमन के लिए आर्टिफिशियल अंग खरीदने के लिए टेंडर आदि जारी करें। जानकारी के मुताबिक पानीपत के सनोली खुर्द गांव का रहने वाला रमन स्वामी 3 नवंबर 2011 को अपने घर की छत पर लटक रहे हाई-टेंशन बिजली के तार के संपर्क में आ गया था। जिसमें उसने अपने दोनों हाथ और बायां पैर गवां दिया। तब वह सिर्फ पांच साल का था। कोर्ट ने अगस्त 2025 में अंतरिम आदेश में हरियाणा के डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज को निर्देश दिया था कि लड़के के लिए ट्रांसप्लांट सर्जरी सहित सभी विकल्पों का पता लगाने के लिए ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की एक टीम बनाई जाए। जस्टिस सुवीर सहगल ने आदेश में कहा कि अंतरिम आदेश के बाद याचिकाकर्ता की 6 अगस्त 2025 को जांच की गई और DGHS की ओर से 24 नवंबर, 2025 की तारीख का एक हलफनामा के साथ रिपोर्ट जमा की गई, जिसमें कहा गया है कि 17 साल के रमन की जांच मेडिकल बोर्ड के सदस्यों ने PGIMS रोहतक में क्लिनिकली और रेडियोलॉजिकली की। हाईकोर्ट ने कहा कि उपरोक्त पृष्ठभूमि और कोर्ट द्वारा पारित विभिन्न आदेशों को देखते हुए हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड पंचकूला को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिकाकर्ता के लिए आर्टिफिशियल अंग खरीदने के लिए टेंडर आदि जारी करके कदम उठाए, जैसा कि 6 अगस्त, 2025 की रिपोर्ट में सलाह दी गई है, छह सप्ताह का समय दिया गया है।