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बिहार पुलिस 50 एडवांस ड्रोन से यातायात और भीड़ करेगी कण्ट्रोल

पटना. बिहार पुलिस अब कानून-व्यवस्था और यातायात नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। राज्य में पहली बार बिहार पुलिस की एक अलग ड्रोन यूनिट का गठन किया जाएगा। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और यातायात कण्ट्रोल करेगी। एडीजी (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन यूनिट के गठन से पुलिसिंग अधिक प्रभावी, तेज और तकनीक आधारित बनेगी। ड्रोन यूनिट का गठन, 50 आधुनिक ड्रोन खरीदेंगे एडीजी सुधांशु कुमार के अनुसार, इस यूनिट के लिए कुल 50 आधुनिक ड्रोन खरीदे जाएंगे, जिन पर लगभग 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें से 40 ड्रोन राज्य के विभिन्न पुलिस जिलों को दिए जाएंगे, जबकि 10 ड्रोन विशेष कार्यों के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को मिलेंगे। इन ड्रोन की खरीद केंद्र सरकार की ASUMP (असिस्टेंस टू स्टेट्स एंड ड्यूटीज फॉर मॉडर्नाइजेशन ऑफ पुलिस) योजना के तहत की जा रही है। उम्मीद है कि यह ड्रोन यूनिट मार्च तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। निगरानी में होगा ड्रोन का प्रमुख उपयोग ड्रोन तकनीक का एक प्रमुख उपयोग यातायात निगरानी में होगा। एडीजी ने बताया कि ड्रोन कैमरों की मदद से बिना हेलमेट वाहन चलाने, गलत लेन में ड्राइविंग करने, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने और जाम लगाने जैसी स्थितियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों के खिलाफ ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ड्रोन यूनिट बड़े आयोजनों, त्योहारों, वीआईपी मूवमेंट और संवेदनशील इलाकों में भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऊंचाई से पूरे क्षेत्र की लाइव निगरानी संभव होगी, जिससे स्थिति का तुरंत आकलन कर पुलिस बल की प्रभावी तैनाती की जा सकेगी। अपराधियों पर होगी सख्त निगरानी STF को दिए जाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर दियारा क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में सक्रिय अपराधियों की निगरानी के लिए किया जाएगा। एडीजी ने कहा कि, इन इलाकों में पुलिस की भौतिक पहुंच सीमित रहती है, लेकिन ड्रोन के जरिए अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। ड्रोन यूनिट के गठन से बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। इससे अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

बुलडोजर एक्शन और मणिकर्णिका का भविष्य, काशी के ‘महाश्मशान’ की तस्वीरों में नई दिशा

वाराणसी काशी में इन दिनों मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प का काम चल रहा है. निर्माण कार्य में हो रही तोड़फोड़ को लेकर हंगामा भी बरपा हुआ है. कांग्रेस इसे लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर है. इस बीच शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे. उन्होंने कहा कि 'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे हैं'. इस बीच यूपी सरकार ने मणिकर्णिका के प्रस्तावित नए स्वरूप की तस्वीरें जारी की हैं जिनमें इस 'महाश्मशान' के भविष्य के स्वरूप को देखा जा सकता है. मणिकर्णिका घाट का प्लेटफार्म काफी बड़ा बनाया जाएगा ताकि एक साथ किए जाने वाले अंतिम संस्कार को लेकर विश्व स्तरीय सुविधाएं वहां मिल सकें. सरकार ने मणिकर्णिका घाट को नए सिरे से बनाने की तैयारी की है. इस प्रोजेक्ट की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अंतिम संस्कार के लिए बना यह घाट कायाकल्प के बाद कैसा दिखाई देगा. 35 करोड़ की राशि आवंटित फिलहाल मणिकर्णिका घाट पहुंचने के लिए तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ता है. यहां दाह संस्कार की मूलभूत सुविधाएं बेहद जर्जर और गंदगी से भरी पड़ी थीं. लेकिन पीएम मोदी ने कुछ समय पहले काशी कॉरिडोर से सटे मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प की परियोजना को अपने विजन काशी में शामिल किया था. पहले ही प्रथम चरण के लिए 35 करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी है और जल्द ही मणिकर्णिका घाट नए तरीके से बनकर सामने आएगा.  मणिकर्णिका पर कभी नहीं बुझती चिता की आग मणिकर्णिका घाट के बारे में यह कहा जाता है कि यहां 24 घंटे 365 दिन कभी चिता की आग नहीं बुझती. यहां जलने वाली चिताओं से निकलने वाली भस्म कॉरिडोर तक आती हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में अब जब कॉरिडोर बिल्कुल मणिकर्णिका घाट से सट गया है, इसके कायाकल्प की जरूरत भी महसूस की जा रही थी. हालांकि यहां एक चबूतरे के विध्वंस के बाद हंगामा मच गया क्योंकि वहां कई मूर्तियां थीं. सरकार अब नए तरीके से इसे बना रही है. 'कुछ लोग काशी को बदनाम कर रहे' शनिवार को वाराणसी के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. जब काशी विश्वनाथ धाम परियोजना की शुरुआत हुई थी, तब भी इसके खिलाफ साजिशें रची गई थीं. आज वही लोग टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह भ्रम फैला रहे हैं कि मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं, जबकि इससे बड़ा सफेद झूठ कुछ नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि काशी की प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे देश और दुनिया के सामने नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. इसी सोच के तहत बीते वर्षों में काशी में बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं. कांग्रेस ने साधा निशाना यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, 'देश, काशी और हिंदू धर्म की विरासत को मोदी-योगी सरकार ने ध्वस्त कर दिया है. कॉरिडोर के नाम पर मॉल बनाया गया और काशी विश्वनाथ जी के कई मंदिर तोड़े गए. वट वृक्ष को खत्म कर दिया गया. कसौटी के पत्थर पर लक्ष्मी नारायण जी के मंदिर को तोड़ दिया है. 2023 में मणिकर्णिका घाट का स्वनीकरण की जगह उसे विध्वंस कर दिया गया.' 'ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है' कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं. विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है. इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं. काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए.  

26 जनवरी से पहले दिल्ली के खिलाफ बांग्लादेशी आतंकी हमला कर सकते हैं, सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट

नई दिल्ली  रिपब्लिक डे पर दिल्ली समेत भारत के कुछ शहरों पर आतंकी खतरे का साया मंडरा रहा है. खालिस्तानी और बांग्लादेशी आंतकियों को लेकर 26 जनवरी से पहले सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा अलर्ट आया है. 26 जनवरी के पहले खुफिया विभाग ने अपने अहम अलर्ट में कहा है कि खालिस्तानी आतंकी संगठन और बांग्लादेश के आतंकी संगठन 26 जनवरी 2026 के मद्देनजर देश की राजधानी दिल्ली समेत दूसरे कई शहरों को निशाना बनाने की फिराक में हैं. इस अलर्ट को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. खुफिया विभाग के अलर्ट में यह भी कहा गया है कि पंजाब के गैंगस्टर अब विदेश में बैठे खालिस्तानी और कट्टरपंथी हैंडलरों के फुट सोल्जर बनते जा रहे हैं. खूफिया विभाग के अलर्ट के मुताबिक, ये गैंगस्टर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय हैं, जो खालिस्तानी आतंकवादियों से जुड़ रहे है. उनके इशारे पर ही ये गैंगस्टर अब आतंकी बनकर दहशत फैलाने की फिराक में हैं. खालिस्तानी आतंकी और बांग्लादेश के कुछ आतंकी मिलकर 26 जनवरी के मद्देनजर देश का माहौल खराब कर सकते हैं. खुफिया अलर्ट में यह भी कहा गया है कि पंजाब और उत्तर भारत–एनसीआर के अन्य हिस्सों में सक्रिय संगठित आपराधिक सिंडिकेट्स के पास न केवल देशी हथियार बल्कि अत्याधुनिक हथियारों की भी बड़ी खेप मौजूद है. यही आंतरिक सुरक्षा के लिहाज़ से गंभीर चिंता का विषय है. अलर्ट के मुताबिक विदेशी खालिस्तानी और कट्टरपंथी हैंडलर इन गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. वहीं, बांग्लादेश के कुछ आतंकी और प्रतिबिंबित संगठन से जुड़े ऑउटफिट दिल्ली में गड़बड़ी मचा सकते हैं. न्यूज18 इंडिया के पास खूफिया अलर्ट की कॉपी मौजूद है. फिलहाल, आतंकी संगठन के नाम का खुलासा नहीं हुआ है.

कांग्रेस नेता छत्रपति यादव के भोज में पहुंचे दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में गुटबाजी और तेज हो गई है। बिहार कांग्रेस के नाराज गुट की ओर से शुक्रवार को मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। पूर्व विधायक छत्रपति यादव के पटना स्थित आवास पर आयोजित इस भोज में दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कई जिला अध्यक्ष समेत प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे कई नेता शामिल हुए। यह भोज सूबे के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। दही-चूड़ा भोज का आयोजन एआईसीसी सदस्य आनंद माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, राजकुमार राजन एवं नागेंद्र पासवान विकल की ओर से किया गया। छत्रपति यादव ने कहा कि भोज में सभी कांग्रेसियों के अलावा उन नेताओं को भी बुलाया गया जिन्हें प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में निमंत्रण नहीं दिया गया था। आनंद माधव ने कहा कि यह कोई राजनीतिक भोज नहीं है। बीते सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी का आधिकारिक दही-चूड़ा भोज आयोजित हुआ था। उसमें नाराज गुट के नेता नहीं दिखे थे। पार्टी के सभी 6 विधायकों ने भी इससे दूरी बनाए रखी थी। हालांकि, नेताओं की नाराजगी की बात से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इनकार किया था। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस के एक गुट ने प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पैसे लेकर बाहरियों को चुनाव में टिकट देने का आरोप लगाया था। चुनाव नतीजों में पार्टी को करारी हार मिली तो नाराज गुट का विरोध तेज हो गया। पटना से लेकर दिल्ली तक पार्टी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया गया। अब इस गुट को दो पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह और मदन मोहन झा का भी खुलकर समर्थन मिल गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में गुटबाजी चरम पर पहुंचने के आसार नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, एनडीए की ओर से कांग्रेस के सभी 6 विधायकों के पाला बदलने के दावे भी किए जा रहे हैं।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में खत्म होगा आरजेडी, कांग्रेस और RLM में टूट का सस्पेंस?

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 2 फरवरी से होने जा रही है। यह सत्र कई मायनों में रोचक रहने वाला है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार का सदन में 3 फरवरी को पहला बजट पेश करेगी। सदन की कार्यवाही के दौरान विधायकों के सीटिंग अरेंजमेंट पर भी सबकी निगाहें रहेंगी। दरअसल, लालू एवं तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट के दावे और अटकलबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब इन दावों से सस्पेंस बजट सत्र में खत्म होने के आसार नजर आ रहे हैं। बिहार चुनाव में प्रचंड जीत और नई सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेताओं की ओर से विपक्ष में टूट के दावे किए जाने लगे। विधानसभा में 25 सदस्यों वाली आरजेडी और 6 सदस्यों वाली कांग्रेस के अधिकतर विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने और खरमास के बाद पाला बदलने के दावे किए जा रहे हैं। इससे सियासी पारा गर्माया हुआ है। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस बात को लगातार खारिज किया जा रहा है। कांग्रेस विधायकों की पार्टी के भोज से दूरी बीते सोमवार को पटना स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। इसमें पार्टी के कोई भी विधायक नहीं पहुंचे। इससे विपक्ष में टूट के दावों को और बल मिल गया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कांग्रेस में सब कुछ ऑल इज वेल होने का दावा किया। मगर विधायकों की गैरमौजूदगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम में भी खटपट चल रही है। बिहार चुनाव में RLM के 4 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। इनमें से कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता को छोड़ अन्य 3 विधायक शीर्ष नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी भाजपा से नजदीकी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया, जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पार्टी में नाराजगी बढ़ गई और कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था। इसी वजह से पार्टी के 3 विधायक एकजुटता दिखा रहे हैं। पिछले दिनों तीनों विधायक (माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक कुमार सिंह) ने उन्होंने कुशवाहा की लिट्टी पार्टी से दूरी बनाए रखी। हाल ही में वे भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के दही-चूड़ा भोज में दिखे। इससे कुशवाहा की पार्टी में बिखराव की अटकलें लगाई जा रही हैं। बजट सत्र में खत्म होगा सस्पेंस? खरमास खत्म हो गया है लेकिन विभिन्न दलों में टूट और खटपट के दावों पर फिलहाल संशय बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले महीने होने वाले बिहार विधानसभा के बजट सत्र में यह सस्पेंस खत्म हो जाएगा। सदन के अंदर आरजेडी-कांग्रेस के विधायक विपक्ष के खेमे में ही बैठेंगे या नहीं, साथ ही आरएलएम के विधायकों का सीटिंग अरेंजमेंट कैसा होगा, यह 2 फरवरी को सत्र के पहले दिन स्पष्ट हो जाएगा।

पटना की घुरदौड़–ज्ञान निकेतन रोड सहित 9 सड़कों को मिला नया नाम

पटना. नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की सामान्य बैठकों में राजधानी की 9 सड़कों का नामकरण किया गया। साथ ही 5 पार्कों के नामकरण को भी स्वीकृति प्रदान की गई। समिति से मंजूरी मिलने के उपरांत नगर निगम प्रशासन द्वारा नामकरण से संबंधित सूचना डाक विभाग को भेजी जाती है। उल्लेखनीय है कि बीते एक माह के भीतर सशक्त स्थायी समिति की दो बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। दीघा रोड, घुरदौड़ से ज्ञान निकेतन गर्ल्स स्कूल तक की सड़क अब आचार्य किशोर कुणाल के नाम से जानी जाएगी। अशोक राजपथ स्थित नंद गोला मेन रोड पर डॉ. विजय कांत शर्मा के आवास से पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी श्रीराम कुमार के आवास तक के मार्ग को पूर्व पार्षद श्रीराम कुमार पथ नाम दिया गया। पूर्व पार्षद नथुनी राम यादव के नाम पर सड़क श्रीकृष्णापुरी पार्क के मेन गेट के सामने से लेकर एलएफ फ्लैट पार्क तक की सड़क का नामकरण न्यायमूर्ति इंदु प्रभा सिंह पथ किया गया। इसी प्रकार 15 दिसंबर को हुई बैठक में वार्ड 72 में अशोक राजपथ मुख्य सड़क लिंक पथ से अनिल कुमार यादव (बजरंगबली मंदिर) के मकान से सहदरा चौड़ाहा तक का नामकरण वरिष्ठ समाजसेवी व पूर्व पार्षद नथुनी राम यादव के नाम पर किया गया। दीघा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आशियाना दीघा रोड से आकाशवाणी रोड के बीच पड़ने वाली सड़क को मुंदर साह पथ नाम दिया गया। कंकड़बाग वार्ड 33 के पूर्वी इंद्रानगर स्थित सुधा देवी लेन रोड नंबर एक-ए का पूर्वी इंद्रा नगर नामकरण किया गया। रोड नंबर छह, राजेंद्र नगर सुपर स्पेशलिटी नेत्र अस्पताल से लेकर ज्योतिषाचार्य पं. रामलोचन पांडेय के घर के कोने तक सड़क को डॉ. ब्रजकिशोर सिन्हा मार्ग नाम दिया गया। एग्जीबिशन रोड-फ्रेजर रोड लिंक सड़क का नामकरण पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. दुखन राम मार्ग किया गया। वार्ड 44 अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय के समीप नगर निगम द्वारा निर्मित वाटिका एवं उसके सामने एसबीआइ शाखा से लेकर कंकड़बाग देवी स्थान तक जाने वाले मार्ग का नामकरण यदुनंदन प्रसाद मार्ग किया गया। पाटलिपुत्र कालोनी के पार्क को मिला अटल बिहारी वाजपेयी का नाम 15 दिसंबर को हुई बैठक में दीघा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाटलिपुत्रा कालोनी स्थित पार्क को अटल पार्क नाम दिया गया है। इस पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पहले से स्थापित है। चितकोहरा पंजाबी कालोनी स्थित पार्क का नामकरण गुरु गोबिंद सिंह पार्क किया गया। वहीं, न्यू पुनाईचक स्थित पार्क को भामा शाह पार्क नाम दिया गया है, जहां दानवीर भामा शाह की प्रतिमा पूर्व से ही स्थापित है। वार्ड 44 के अंतर्गत डाक्टर कालोनी में जीवक हार्ट हास्पिटल के दक्षिण स्थित पार्क का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी एवं क्रांतिकारी चंद्रमा सिंह के नाम पर किया गया।

असलम चमड़ा का साम्राज्य: स्लॉटर हाउस अफसरों की मदद और सिस्टम की छांव में कैसे बढ़ा कारोबार

भोपाल  राजधानी भोपाल में जिंसी के पास भोपाल नगर निगम की अनुमति और सहयोग से स्लॉटर हाउस संचालित करने वाले असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा आज कई करोड़ों का आसामी है। भोपाल में करीब 25 से 30 साल पहले असलम कुरैशी चमड़े का कारोबार करता था। यहीं से उसका नाम असलम चमड़ा पड़ा।  पुलिस सूत्रों के अनुसार असलम चमड़ा पर बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को बसाकर स्लॉटर हाउस में कार्य कराने की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तक की जा चुकी है लेकिन भोपाल पुलिस ने सवालों के घेरे में आए असलम चमड़ा के बयान के आधार पर उसे निर्दोष बताते हुए शिकायत की फाइल क्लोज कर दी।  इतना ही नहीं उसने भोपाल नगर निगम के प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में चलाए जा रहे स्लॉटर हाउस में गायों का मांस को भैंस का मांस का बताने वाला सर्टिफिकेट भी नगर निगम के डॉक्टर से बनवा लिया था। इसी के आधार पर वह मुंबई और हैदराबाद से लेकर विदशों तक मांस की सप्लाई कर रहा था। अगर बजरंग दल द्वारा पकड़े गए कंटेनर के मांस की लैब में जांच नहीं कराई जाती तो असलियत सबके सामने नहीं आती। 8 जनवरी को सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में उक्त कंटेनर में गौमांस होने की पुष्टि हो गई है, जबकि भोपाल नगर निगम के डॉ. बेनीप्रसाद गौर द्वारा इसे भैंस का मांस होने का सर्टिफिकेट दिया गया था। इस खुलासे के बाद राजधानी में असलम चमड़ा को लेकर हर कोई  जानना चाहता है कि  भोपाल शहर, मध्यप्रदेश और देश में भाजपा की सरकार होने के बाद भी गौहत्या कर उनके मांस की सप्लाई करने वाला असलम चमड़ा आखिर है कौन? भोपाल नगर निगम के पूर्व अधिकारियों से जुटाई गई जानकारी के अनुसार असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा 25 से 30 साल पहले पुराने भोपाल में मृत मवेशियों को उठाकर उनके मांस से  चमड़े और हड्डियों को निकालकर बेचता था। समय बदला और भोपाल नगर निगम द्वारा मृत मवेशियों को उठाने के लिए कर्मचारी रख लिए गए लेकिन उनको उठाने और उसके बाद होने वाले खर्च को निकालने की व्यवस्था कहां से हो? ये एक बड़ा सवाल था। इसके लिए भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने असलम चमड़ा से अघोषित सौदा किया और मृत मवेशियों को उठाकर असलम को दिया जाने लगा।   असलम चमड़ा नाम कैसे पड़ा ? चूंकि असलम कुरैशी वर्षों तक चमड़े का कार्य करता रहा, इसलिए उसका नाम असलम चमड़ा हो गया। नगर निगम के संपर्क में आने के बाद असलम मृत मवेशियों के चमड़े और हड्डियों के कारोबार को और फैलाता गया। बाद में डेयरियों और अन्य स्थानों पर मृत मवेशियों को उठाकर उसके चमड़े-हड्डी का कारोबार करने के लिए कई कर्मचारी भी रख लिए। स्लॉटर हाउस का संचालन शुरू किया  भोपाल नगर निगम के पूर्व अधिकारियों ने बताया कि भोपाल नगर निगम द्वारा जब मैनुअली स्लॉटर हाउस का संचालन किया जा रहा था, तब भी असलम चमड़ा ही उसका ठेका लेता था। इसके बाद स्लॉटर हाउस से निकलने वाले वेस्ट को बेचकर वो कमाई करता था। आगे चलकर वह जिस भी दल की सरकार रहे, उस राजनीतिक दल के नेताओं और तत्कालीन अधिकारियों से सांठगांठ करने लगा और मांस की सप्लाई का ठेका भी लेने लगा था।  भोपाल वन विहार में वर्षों तक की सप्लाई  भोपाल में स्थित वन विहार नेशनल पार्क में कई मांसाहारी जानवर हैं, जिसमें बाघ, शेर व अन्य जानवर शामिल हैं। मध्यप्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क में घायल होने वाले जानवरों को यहीं लाकर इलाज किया जाता है। वन विहार में रहने वाले मांसाहारी जानवरों को खिलाए जाने वाले कच्चे मांस की सप्ताल भी असलम चमड़ा ही करता था। स्लॉटर हाउस में गायों को काटकर गौमांस सप्लाई का खुलासा होने के बाद वन विहार में उसका मीट सप्लाई का ठेका निरस्त कर दिया गया है। I जिंसी स्लॉटर हाउस का आधुनिकीकरण    दस्तावेजों की पड़ताल और नगर निगम के अधिकारियों से जानकारी जुटाने पर पता चला कि भोपाल में जब आधुनिक स्लॉटर हाउस का संचालन किया जाने लगा तो इसके लिए महापौर परिषद ने शहर के अंदर स्लॉटर हाउस संचालन की अनुमति नहीं दी। इसके बाद आदमपुर छावनी के पास स्लॉटर हाउस लगाने के लिए उत्तरप्रदेश की एक बड़ी मीट कंपनी ने प्रस्ताव दिया, लेकिन आदमपुर छावनी और आसपास के गांव के लोगों ने विरोध किया तो मामला ठंडा पड़ गया। इसके बाद जिंसी स्थित पुराने स्लॉटर हाउस के स्थान पर ही आधुनिक स्लॉटर हाउस को संचालित करने की तिकड़म भी अधिकारियों ने निकाल ली और वर्ष 2022 में नगर निगम के आयुक्त और प्रशासक रहे अधिकारियों ने असलम चमड़ा को आधुनिक स्लॉटर हाउस संचालन का ठेका भी दे दिया। अधिकारियों की मेहरबानी नगर निगम सूत्रों की मानें तो असलम चमड़ा निगम के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से सांठगांठ कर अपने हिसाब से स्लॉटर हाउस का संचालन करता था। वह नगर निगम द्वारा पशुओं की मेडिकल जांच और मांस को सर्टिफाइड करने के लिए पदस्थ किए गए पशु चिकित्सक और कर्मचारियों से अपने हिसाब से कार्य कराता था। सूत्रों की मानें तो स्लॉटर हाउस में पदस्थ डॉ. बेनीप्रसाद गौर मीट के ब्लैंक सर्टिफिकेट और कटने से पहले पशुओं के होने वाले चिकित्सकीय परीक्षण की खाली रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर असलम चमड़ा को दे देते थे और वह अपने हिसाब से मीट और मवेशियों की स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट भरता रहता था। तीन दर्जन संपत्तियां और आलीशान बंगले बनाए असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा ने भोपाल नगर निगम के साथ मिलकर जब से मांस और चमड़े का कारोबार शुरू किया, तब से अब तक वह भोपाल शहर और आसपास करीब तीन दर्जन संपत्तियां बना चुका है। वह भोपाल के सेंट्रल जेल रोड स्थित पॉश कॉलोनी में करोड़ों की आलीशान कोठी में परिवार के साथ रहता है। उसके सट्टेबाजी और जुआ खेलने के लिए मुंबई और दुबई जाने के दावे भी सामने आए हैं। तीन साल पहले भी असलम पर भोपाल की जीवदया गौशाला के पास बड़ी संख्या में मृत गायों को फेंकने का आरोप लगा था। 

पटना में पूरी तरह खुले स्कूल, सुबह 9 बजे से रहेंगी क्लास

पटना. पटना जिले में स्कूल पूरी तरह खोल दिए गए हैं। 17 जनवरी से जिले के तमाम निजी और सरकारी विद्यालयों में सभी कक्षाओं की पढ़ाई सुचारू कर दी गई है। बिहार में पड़ रही प्रचंड ठंड और शीतलहर को देखते हुए पिछले दिनों स्कूलों में पाबंदी लगाई गई थी। 16 जनवरी तक प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं पर पाबंदी थी, जिसे शनिवार को हटा दिया गया। इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) ने आदेश जारी किया है। पटना के डीएम त्यागराजन द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया कि जिले के सभी निजी एवं सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, किसी भी शिक्षण संस्थान में सुबह 9 बजे से पहले पढ़ाई नहीं हो पाएगी। स्कूलों का संचालन 9 बजे के बाद ही किया जाएगा। यह आदेश फिलहाल 20 जनवरी तक लागू रहेगा। ठंड में और राहत मिलने पर टाइमिंग में और राहत दी जाएगी। ठंड के चलते बंद किए गए थे स्कूल पटना समेत बिहार के कई जिलों में ठंड के चलते निजी एवं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बंद की गई थी। इस महीने की शुरुआत में जिले के सभी स्कूलों में 8वीं तक के बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। यह पाबंदी 11 जनवरी तक जारी रही थी। इसके बाद चरणवार तरीके से विभिन्न कक्षाओं की छुट्टियां खत्म की गईं। सबसे पहले, 12 जनवरी से छठी से आठवीं तक के स्कूल खोल दिए गए, लेकिन कक्षा 5 तक पाबंदी जारी रही। बाद में 14 तारीख से कक्षा 1-5 तक के लिए स्कूल खोले गए, लेकिन प्राइमरी एवं प्री-प्राइमरी के बच्चों की छुट्टियां जारी रहीं। अब सभी कक्षाओं पर लगी रोक को हटा दिया गया है।

हरियाणा के निजी स्कूलों के 49 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी

हिसार. प्रदेश के 10 जिलों में सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों का स्वास्थ्य असुरक्षित हैं। सुनने में अजीब है लेकिन यह सच है। स्कूल हेल्थ की ओर से ग्रुप ए में अंबाला, करनाल, पानीपत, पंचकूला, यमुनानगर और ग्रुप बी में फरीदाबाद, गुरुग्राम, झज्जर, रोहतक व सोनीपत जिलों के सरकारी व निजी स्कूलों में पढ़ रहे कुल 10.08 हजार विद्यार्थियों में हीमोग्लोबिन की जांच की, जिनमें विद्यार्थियों की उम्र 10 से 19 साल तक रही। जब रिपोर्ट उजागर हुई तो हैरान कर देने वाली थी। उपरोक्त ग्रुप-ए के तहत जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 46 प्रतिशत व निजी स्कूलों में पढ़ रहे 49 प्रतिशत विद्यार्थियों में खून की कमी मिली। ग्रुप-बी के तहत जिलों के सरकारी स्कूलों में 50 व निजी स्कूलों में 53.6 प्रतिशत विद्यार्थियों में खून की कमी मिली।

जबलपुर में RTE की धज्जियाँ उड़ाई गईं, गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, ईओडब्ल्यू की जांच में हुआ खुलासा

जबलपुर  ईओडब्ल्यू ने जबलपुर में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूलों में हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 6 स्कूल संचालकों और 5 नोडल अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने एक ही छात्र का कई बार दाखिला दिखाकर सरकारी फीस प्रतिपूर्ति राशि में हेरफेर किया है। 2011 से 2016 साल तक चला घोटाला यह घोटाला साल 2011 से 2016 के बीच हुआ है। ईओडब्ल्यू को शिकायत मिली थी कि कुछ स्कूल संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शिक्षा के अधिकार के तहत, प्राइवेट स्कूलों को 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे वाले बच्चों के लिए मुफ्त रखनी होती हैं। इसके बदले सरकार स्कूलों को फीस देती है। 6 स्कूलों का नाम खुला जांच में पता चला कि जबलपुर के 466 प्राइवेट स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति के तौर पर 3 करोड़ 27 लाख 83 हजार रुपये दिए गए थे। लेकिन, 6 स्कूलों ने 628 छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाकर करीब 26.50 लाख रुपये का गबन किया। इन पर दर्ज हुआ मामला ईओडब्ल्यू ने स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी के संचालक मनीष असाटी और नोडल अधिकारी श्रीमती चंद्र कोष्टा, अशासकीय आदर्श ज्ञान सागर शिक्षा शाला की संचालक श्रीमती नसरीन बेगम और नोडल अधिकारी श्रीमती गुल निगार खान, गुरू पब्लिक स्कूल के मो तौफिक और नोडल अधिकारी अख्तर बेगम, अस्मानिया मिडिल स्कूल के संचालक मो शमीम और नोडल अधिकारी राजेंद्र बुधौलिया, और सेंट अब्राहम स्कूल के संचालक मोहम्मद शफीक और नोडल अधिकारी डी के मेहता के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।