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बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की दूसरे दिन की यात्रा भी सुखद

भोपाल भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के द्वारा सीएसआई – एमपीरी में आयोजित दो दिवसीय "आईपी यात्रा" के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में रिसर्चरस, स्टार्टअप्स एवं एमएसएमई के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यात्रा आयोजक एमएसएमई विकास कार्यालय इंदौर के सहायक निदेशक श्री निलेश त्रिवेदी ने अपने आरम्भिक सम्बोधन में जानकारी दी कि आईपी यात्रा के प्लेटफार्म से हम अनुसंधानकर्ता विभागों की नवीनतम तकनीकों को एमएसएमई इकाईयों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रकाश में लाने में सफल हुए हैं। आईपी यात्रा समाप्त नहीं होगी अपितु इसके बाद भी एमएसमएमई विकास कार्यालय इंदौर छोटे उद्योगों और अनुसंधान करने वाली संस्थाओं के मध्य तकनीकी हस्तातरण और उनके आईपी अधिकारों के संरक्षण की प्रक्रिया में सदैव सहयोग, समन्वय और सेतु की भूमिका के लिए तत्पर रूप से सक्रिय रहेगी। आईपी यात्रा के तकनीकी सत्र में सीएसआईआर- एमपीरी के श्री संदीप सिंघई ने सीएसआईआर में उपलब्ध नवीन तकनीकों एवं इनके हस्तातरण की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी प्रदान की एवं प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने सीएसआईआर में उपलब्ध तकनीकों की अत्यंत उपयोगी जानकारी साझा की। विषय विशेषज्ञ श्री राकेश सोनी ने बौद्धिक सम्पदा के पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, ट्रेड सीक्रेट, डिजाइन प्रमाणन प्राप्त करने के बाद उनके व्यवसायिकरण की प्रक्रिया की चरणबद्ध रुपरेखा की विस्तार से जानकारी प्रदान की एवं इसके अंतर्गत संबंधित नियमों की जानकारी भी प्रदान की. उन्होंने विभिन्न प्रकरणों के उदाहरण देकर केस स्टडी भी प्रस्तुत की। एमएसएमई के श्री निलेश त्रिवेदी ने अपने प्रस्तुतिकरण में ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट, के विवादित ओद्योगिक और सेलिब्रेटी से संबंधित विवादित न्यायिक प्रकरणों की विस्तार से जानकारी बहुत ही रोचक रूप से प्रस्तुत की। आईपी यात्रा कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम पश्चात प्रतिक्रिया में बहुत ही उत्कृष्ट श्रेणीकरण और सकारात्मक प्रतिक्रिया प्रस्तुत की एवं ऐसे उपयोगी कार्यक्रमों को सभी विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित करने का अनुरोध किया। आईपी यात्रा के प्रतिभागियों को आईपी विषय पर पाठ्य सामग्री भी वितरित की गई। आईपी यात्रा में आईपी फेसिलिटेशन सेंटर में उपलब्ध की सुविधाओं की जानकारी आआईटी इंदौर के श्री आदित्य व्यास ने प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में आईपी अधिकारों और तकनीकी हस्तातरण से लाभ प्राप्त करने वाले सफल उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानी प्रस्तुत की और प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया।  

JNU कैंपस में नारेबाजी को लेकर गिरिराज सिंह सख्त, कहा– ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए’

नई दिल्ली/पटना केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के कैंपस में लगे विवादित नारे के बाद कहा है कि भारत को बांटने और पाकिस्तान की सोच रखने वाले गलतफहमी में न रहें। चरमपंथियों और नक्सलियों के साथ-साथ 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को भी खत्म कर दिया जाएगा। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "जेएनयू कैंपस 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का सेंटर बन गया है, जिसमें राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी पार्टियां और दूसरे विपक्षी दल शामिल हैं। देश इसे ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा।" उन्होंने कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया, मैं उसका स्वागत करता हूं। इसी बीच, गिरिराज सिंह ने कहा, "जो लोग भारत को बांटने की बात करते हैं और पाकिस्तान जैसी सोच रखते हैं, उनकी इस देश में कोई जगह नहीं है। गलतफहमी में न रहें। यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार है। जिस तरह चरमपंथियों और नक्सलियों को खत्म किया जा रहा है, उसी तरह 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को भी खत्म कर दिया जाएगा।" वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि जेएनयू में लगाए जा रहे नारे एक अर्बन-नक्सली विचारधारा है जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी सपोर्ट करते हैं। यह वही विचारधारा है जिसे बौद्धिक आतंकवाद में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब से देशद्रोही उमर खालिद, जो कहता है कि भारत ने जम्मू-कश्मीर पर गैर-कानूनी कब्जा किया है, या देशद्रोही शरजील इमाम जो कहता है कि वह चिकन नेक को भारत से अलग करना चाहता है, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रदीप भंडारी ने आगे कहा, "उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में कांग्रेस के नेता आए हैं। जिस तरह जेएनयू कैंपस में नारे लगे हैं, इन नारों का समर्थन मौन स्वीकृति के जरिए कांग्रेस पार्टी कर रही है। चुनाव के मैदान में जनता के सामने इनका देशविरोधी चेहरा होता है। यही कारण है कि जनता उन्हें बार-बार विपक्ष में बैठाती है।"

नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप किया जाए क्रियान्वित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनहित में नगरों में निजी निवेश को प्रोत्साहन, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और अन्य गतिविधियों को करें प्राथमिकता से मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के संचालक मंडल की हुई बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वित किया जाए। नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुधारने, नगरीय क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ाने, नागरिक सेवा में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के अधिकाधिक उपयोग, अर्बन मोबिलिटी तथा ई-वाहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। 'नमामि गंगा अभियान' के समान ही 'नमामि नर्मदे परियोजना' पर कार्य आरंभ कर नर्मदा नदी तट की नगरीय बसाहटों के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय सुधार और उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए कार्य योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरीय निकायों में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्थाओं के प्रति विशेष रूप से सजगता और सतर्कता बरती जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के संचालक मंडल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन तथा संचालक मंडल के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कंपनी के प्रबंधकीय, वित्तीय और लेखा परीक्षा तथा अंकेक्षण संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में शहरी विकास के लिए म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी में 4 स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभागों के गठन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई। इसमें परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी मोड, सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी गतिशीलता और नमामि नर्मदे तथा हरित एवं नदी संरक्षण के लिए प्रभागों का गठन प्रस्तावित है। परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी प्रभाग के अंतर्गत नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने, जन हित कार्यों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, वित्तीय अनुशासन, नीति आयोग तथा अन्य संबद्ध विभागों से समन्वय तथा मेट्रोपोलिटन एरिया डेवलपमेंट प्लानिंग को प्राथमिकता से लिया जाएगा। इसमें सोलर प्रोजेक्ट्स, हरित बांड, अप्रयुक्त परिसंपत्तियों के वैकल्पिक उपयोग जैसे नवाचार भी प्रस्तावित हैं। सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग के अंतर्गत ई-नगर पालिका प्रणाली, सीसीटीवी-जीआईएस आधारित निगरानी व्यवस्था, नागरिक सेवा प्लेटफार्म के उन्नयन, टोल संग्रह ई-पोर्टल एवं ऑनलाइन राजस्व संग्रहण जैसी स्मार्ट सिटी प्रणालियां संचालित की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नगरीय निकायों के आस-पास के क्षेत्रों के नियोजित विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नर्मदा और तापी नदी के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए नदियों के समग्र और सर्वांगीण विकास के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि 'नमामि गंगे' के समान 'नमामि नर्मदे परियोजना' का क्रियान्वयन सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से करें। इसमें नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विभाग, उद्योग विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। बैठक में बताया गया कि शहरी गतिशीलता प्रभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश ईवी पॉलिसी क्रियान्वयन, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, रोपवे, मल्टी लेवल पार्किंग, सार्वजनिक साइकिल सेवा, सिटी मोबिलिटी प्लान तथा ई-वाहन चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा। बैठक में अपर मुख्‍य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री संजय दुबे, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह, श्री पी. नरहरि, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं आवास श्री संकेत भोंडवे तथा कंपनी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।  

मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्री-परिषद सदस्यों को मिले टैबलेट

पारदर्शिता और समय की बचत के लिए सभी मंत्री नई व्यवस्था का लें लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में हुआ महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन ई-प्रशासन में नवाचार से प्रसन्न हुए मंत्रि-परिषद सदस्य भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में एक नए नवाचार करते हुए आज मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों को टैबलेट वितरण किया। उन्होंने बताया कि मंत्रि-परिषद से संबंधित संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्रालय में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कैबिनेट के सदस्यों और मंत्रि-परिषद के भारसाधक सचिवों को टैबलेट प्रदाय करने की शुरूआत हुई। कैबिनेट के सदस्यों ने टैबलेट प्राप्त किए और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ई-कैबिनेट की पहल हुई है। ई-कैबिनेट एप्लीकेशन के संबंध में संबंधितों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह एप्लीकेशन आधुनिक तकनीक, पेपरलैस, सुरक्षित और ऐसी गोपनीय प्रणाली है, जिसे मंत्रि-परिषद सदस्य कभी भी और कहीं भी अपनी सुविधा के अनुसार अवलोकन कर सकते हैं। मुख्य रूप से मंत्रि-परिषद की कार्य सूची देखने, ई-कैबिनेट एप्लीकेशन द्वारा पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों का पालन-प्रतिवेदन देखने में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पारदर्शिता और समय की बचत के लिए मंत्रि-परिषद सदस्य नई व्यवस्था का पूरा लाभ लेंगे। प्रारंभ में मंत्रि-परिषद बैठक का एजेण्डा भौतिक एवं डिजिटल रूप दोनों फार्मेट में भेजा जाएगा, बाद में यह पूर्णता डिजिटल रूप में भेजा जाएगा। इस पेपरलैस व्यवस्था अर्थात ई-कैबिनेट एप्लीकेशन प्रारंभ होने से भौतिक रूप से होने वाले फोल्डर वितरण, कागज एवं समय की बचत हो सकेगी। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि वर्ष 1960 से लेकर अब तक लिए गए मंत्रि-परिषद के निर्णयों को डिजिटलाइज किया गया है। गत 2 वर्ष के मंत्रि-परिषद के निर्णय एक क्लिक पर देखे जा सकते हैं। मंत्रि-परिषद की बैठक के अंत में एक प्रेजेंटेशन द्वारा मंत्रियों को टैबलेट के उपयोग को प्रारंभ करने के उद्देश्य, व्यापक उपयोगिता और टैबलेट के कार्य संचालन की बुनियादी जानकारी दी गई।  

खनन क्षेत्र में मध्यप्रदेश बना अग्रणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक से पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले मंत्रीगण को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं, गत पखवाड़े की प्रमुख उपलब्धियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही सरकार के आने वाले तीन वर्ष के प्रमुख लक्ष्यों से भी अवगत करवाया। वर्ष-2026 की मंत्रिपरिषद की प्रथम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कैलेंडर वर्ष 2026 की बधाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों को कैलेंडर वर्ष 2026 प्रारंभ होने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन अनुसार जनकल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनेगा और नागरिकों के हित में योजनाओं और परियोजनाओं के व्यवस्थित क्रियान्वयन में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार के 2 वर्ष के सफल कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। खनन क्षेत्र में अग्रणी बना मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को बताया कि वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर देश में अग्रणी रहा है। यह उपलब्धि प्रदेश की पारदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। खनिज नीलामी वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज ब्लॉकों में से 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई, जो देश में सर्वाधिक है। खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को अभूतपूर्व गति मली है। चूना, पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को मजबूती मिली है। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने गत 25 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न से सम्मानित स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट का शुभारंभ किया।इसमें 2 लाख करोड़ रूपए से अधिक लागत से विभिन्न औद्योगिक और निर्माण इकाइयों के भूमि-पूजन हुआ है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने 5,810 करोड़ रूपए की परियोजनाओं का लोकार्पण किया। यही नहीं, 860 वृहद औद्योगिक इकाईयों के लिए 725 करोड़ की निवेश प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। इसी अवसर पर विशेष प्रदर्शनी में 'निवेश से रोजगार-अटल संकल्प' विषय पर चित्रों का संयोजन किया गया। मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति और आर्थिक विकास की झलक प्रदर्शनी में देखने को मिली। पोखरण परमाणु परीक्षण जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि को भी प्रदर्शित किया गया। प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी के संबोधनों और उनकी जीवन यात्रा और विचारधारा को भी प्रदर्शित किया गया। वर्ष-2026 कृषि वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष-2026 – कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। वर्ष 2025 उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया। प्रदेश में किसान कल्याण, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता, पशुपालन, डेयरी विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास, राजस्व, ऊर्जा, नवकरणीय ऊर्जा से जुड़े आयामों पर विशेष कैलेंडर आगामी 11 जनवरी को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जारी किया जाएगा। इसी दिन 1100 ट्रैक्टरों की रैली भी निकलेगी। जनवरी से दिसम्ब्र तक सभी विभागों की गतिविधियों का निर्धारण कर जिला एवं संभाग स्तर पर कार्यक्रम होंगे। आगामी तीन वर्ष का लक्ष्य निर्धारित कर गतिविधियां संचालित की जाएंगी। जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन रहा ऐतिहासिक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर में गत 2 जनवरी को जहां गीता भवन का लोकार्पण हुआ, वहीं अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में देश-दुनिया से आए करीब 125 विद्वानों के व्याख्यान भी हुए। पद्मभूषण स्वामी रामभद्राचार्य सहित अनेक संत और विद्वतजन सम्मेलन में शामिल हुए। सुंदरकांड से सम्मानित पाठ में व्यापक भागीदारी रही। प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने गत 23 दिसम्बर को पीपीपी मॉडल पर प्रदेश के धार और बैतूल में बनने वाले मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास किया। देश में ये मेडिकल कॉलेज इस मॉडल पर निर्मित होने वाले प्रथम मेडिकल कॉलेज होंगे। नवाचार का सिलसिला निरंतर चलेगा। आगामी 23 जनवरी को कटनी और पन्ना में मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास की तैयारी की जा रही है। प्रदेश में चिकित्सा जगत में यह नई उपलब्धि है। गत 2 वर्ष में 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुए। इसके पहले वर्ष 2002-03 तक प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में इनकी संख्या 33 हो गई है। राष्ट्रीय पेसा सम्मेलन और मध्यप्रदेश के व्यंजनों का प्रचार-प्रसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि विशाखापटनम में हाल ही में राष्ट्रीय पेसा दिवस पर पेसा सम्मेलन का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश के चयनित 9 जिलों की 20 महिला सरपंच प्रतिनिधियों ने पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया। प्रदेश के 20 जनजातीय बहुल क्षेत्रों से चयनित 9 जिलों अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया एवं डिंडोरी से कुल 152 सदस्य पेसा महोत्सव में शामिल हुए। इस सम्मेलन में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में उपयोग में लिए जाने वाले पारम्परिक व्यंजनों का प्रचार-प्रसार भी हुआ। खासतौर पर मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी के ताजा शुद्ध और स्वादिष्ट पकवान सम्मेलन में पसंद किए गए। विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने मध्यप्रदेश के तिल, गुड और महुए के लड्डू भी प्रसंद किए।  

पीएम जनमन योजना की निरंतरता के लिए 795 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति

ग्रामीण सड़कों का नवीनीकरण एवं उन्नयन के लिए 10 हजार 196 करोड़ 42 लाख रुपये की स्वीकृति सिंचाई परियोजनाओं को नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वित्त पोषित करने की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना लागत 922 करोड़ 91 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना से खकनार तहसील के 42 ग्रामों की 17 हजार 700 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी, जिससे 11 हजार 800 कृषक परिवार लाभांवित होंगे। मंत्रि-परिषद द्वारा बुरहानपुर जिले की नेपानगर तहसील की नावथा वृहद सिंचाई परियोजना लागत 1,676 करोड़ 6 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना से खकनार तहसील के 90 ग्रामों की 34 हजार 100 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी और 22 हजार 600 कृषक परिवारों को लाभ मिलना अनुमानित है। पीएम जनमन योजना की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गई। योजना में अनुमानित व्यय 795 करोड़ 45 लाख रुपये होगा। इसके तहत 1,039 किमी सड़क का निर्माण एवं 112 पुल निर्माण किया जायेगा। यह योजना 22 जिलों में निवासकरने वाली 3 विशेष जनजाति बैगा, भारिया एवं सहरिया के लिए लागू है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की निरंतरता की स्वीकृति मंत्रि- परिषद ‌द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गई। योजनांतर्गत अनुमानित व्यय 17,196 करोड़ 21 लाख रुपये होगा। इसके तहत 20 हजार किमी सड़क और 1200 पुल का निर्माण किया जायेगा। ग्रामीण सड़कों का नवीनीकरण एवं उन्नयन की स्वीकृति मंत्रि- परिषद द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अंतर्गत निर्मित सड़कों का नवीनीकरण एवं उन्नयन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गई। योजनांतर्गत अनुमानित व्यय 10 हजार 196 करोड़ 42 लाख रुपये है। योजना में 88 हजार 517 किमी मार्गों का नवीनीकरण एवं उन्नयन किया जाएगा। सिंचाई परियोजनाओं को नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वित्त पोषित करने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ‌द्वारा नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत सिंचाई परियोजनाओं को त्वरित क्रियान्वयन के लिए नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वित्त पोषित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी। स्वीकृति अनुसार नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा आरंभ की गई वे परियोजनाएँ जिनका निर्माण कार्य नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड द्वारा वित्तीय व्यवस्था कर पूर्ण कराया जा रहा हैं। उसका सम्पूर्ण स्वामित्व नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड का होगा। इन परियोजनाओं में राज्य शासन द्वारा बजट प्रावधान के माध्यम से व्यय की गई राशि के समतुल्य अंश पूजी कंपनी द्वारा राज्य शासन को जारी किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर प्राप्त राजस्व, कंपनी की आय के रूप में ग्रहण किया जाएगा। कंपनी द्वारा वर्तमान में 2 परियोजनाएं वित्त पोषित की जा रही है, जिसमें नर्मदा क्षिप्रा बहुउद्‌देशीय परियोजना लागत 2,489 करोड़ 65 लाख रुपये और बदनावर माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन परियोजना लागत 1,520 करोड़ 92 लाख रूपये शामिल है। बैठक में मंत्रि-परिषद के सदस्यों और उनके भारसाधक सचिवों को ई-कैबिनेट के लिए टैबलेट प्रदान किये गये एवं प्रशिक्षण दिया गया।  

चोरी करने घुसा था एग्जॉस्ट फैन से, बीच में फंसा चोर; पुलिस ने किया रेस्क्यू

कोटा आपने यह कहावत तो खूब सुनी होगी कि आसमान से गिरा खजूर में अटका। राजस्थान के कोटा में हुई हालिया घटना पर यह एकदम मुफीद बैठती है। कोटा के एक घर में चोर को चोरी करना महंगा पड़ गया या कहिए चोर की गजब बेइज्जती हो गई। घुसा तो चोरी के बहाने ही लेकिन जिस जगह से घुसा वही उसके लिए मुसीबत बन गई। सूने घर को साफ करने का मंसूबा एग्जॉस्ट फैन के छेद ने पूरा नहीं होने दिया और वह उस छेद में ऐसा फंसा कि निकल ही नहीं पाया। बाद में घरवालों ने पुलिस को बुलाकर उसे इस छेद से बाहर निकाला। अब चोरी की ये अनोखी घटना सोशल मीडिया पर वायरल है।   पूरी घटना जानिए अब घटना को पूरी तफ्शील से जानते हैं। कोटा में रहने वाले सुभाष कुमार रावत ने बताया कि वह पत्नी के साथ 3 जनवरी को खाटू श्याम जी दर्शन करने के लिए गए थे और 4 जनवरी की रात को घर लौटे। जब सुभाष स्कूटी लेकर घर के अंदर जा रहे थे तभी उसकी रोशनी में रसोई के एग्जॉस्ट के छेद में एक व्यक्ति फंसा हुआ दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर-शराबे की आवाज सुनकर एक चोर तो मौके से भाग गया पर उसका साथी एग्जॉस्ट में फंस गया। एक कार भी बाहर खड़ी थी जिसमें पुलिस का स्टीकर लगा हुआ था। शोर शराबा सुनकर आस-पड़ोस के लोग जाग गए और घर में घुसकर चोर को रंगे हाथों पकड़ लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में आए दिन संदिग्ध व्यक्ति घूमते हुए नजर आते हैं। इस मामले में बोरखेड़ा थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू कर दी है। पुलिस की लापरवाही पर लोगों की नाराजगी स्थानीय लोगों ने पुलिस की लापरवाही पर भी अपनी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि कई बार इस इलाके में गश्त के लिए पुलिस से अपील की गई, लेकिन उसके बावजूद भी यहां पर पुलिस की गाड़ियां नहीं आती है। आज सतर्कता की वजह से एक घर में बड़ी चोरी होने से बच गई। चोरी की वारदातें कोटा शहर में लगातार बढ़ रही है।

मतदाताओं का बड़ा फैसला: पंचायत चुनाव में शराब बांटने वाले प्रधान प्रत्याशी का होगा सामाजिक बहिष्कार

लखनऊ यूपी के पंचायत चुनाव की तैयारियां चल रही है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच बागपत जनपद से एक खबर है। यहां के ढिकौली गांव में जिला जाट सभा की पंचायत में पंचों के साथ-साथ आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान किसी भी कीमत पर शराब नहीं बांटने की शपथ ली।   पंचायत में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। जिला जाट सभा अध्यक्ष, अधिवक्ता सोमेन्द्र ढाका के आवास पर रविवार को नशा मुक्त समाज के संकल्प के साथ आयोजित की गई इस पंचायत में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी ढाका ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा को दी। पंचायत आयोजक सोमेंद्र ढाका ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को शराब मुक्त बनाने के लिए यह पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें किसान नेता अन्नू मलिक, रामछेल पंवार, विक्रम आर्य, संदीप प्रधान, विनय ढाका, जयकुमार और राजू के अलावा खाप मुखिया, प्रत्याशी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पंचायत में समाज सुधार के लिए नशे को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया गया और सभी से इस दिशा में संकल्प लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आगामी पंचायत चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी शराब का वितरण कर समाज को दूषित करने का प्रयास करेगा, तो उसका मिलकर बहिष्कार किया जाएगा। पंचायत में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों ने कहा कि चुनाव में हार स्वीकार्य है, लेकिन शराब बांटकर जीत हासिल करना स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि यदि कोई शराब के नाम पर वोट मांगने आएगा तो उसे गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

एक साल में 10 लाख AI एक्सपर्ट! केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया मेगा प्लान

जयपुर भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आम नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान से एक मेगा स्किलिंग अभियान की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य मात्र एक वर्ष में देश के 10 लाख युवाओं को एआई कौशल प्रदान करना है। यह कार्यक्रम न केवल युवाओं को रोजगार योग्य बनाएगा, बल्कि छोटे व्यवसायों में उत्पादकता बढ़ाने और दैनिक जीवन में एआई के उपयोग को बढ़ावा देगा। मंत्री ने कहा कि तेजी से हो रहे 5G रोलआउट की तरह ही सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभा विकास और एआई कौशल विकास का काम भी उतनी ही तेजी से होगा।   मंत्री ने एआई की तुलना बिजली से की राजस्थान क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मंत्री वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन गई है, ठीक उसी तरह जैसे कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, इंटरनेट और मोबाइल फोन द्वारा संचालित पिछली तकनीकी क्रांतियां थीं। उन्होंने कहा कि एआई एक समान पैमाने के परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, और इसकी भविष्य की भूमिका की तुलना बिजली से की, जिसने एक समय में हर घर और व्यक्ति तक पहुंचकर समाजों को नया रूप दिया था। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्वव्यापी होने वाली है और हर व्यक्ति, घर और इमारत तक पहुंचेगी। इसके संभावित लाभों पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि इस तकनीकी बदलाव को अपनाना चाहिए और इसे दैनिक जीवन में एकीकृत करना चाहिए। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए मंत्री वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री का एक स्पष्ट और सुस्पष्ट दृष्टिकोण है, जो समाज के व्यापक हित के लिए एआई के उपयोग पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण का पहला मार्गदर्शक सिद्धांत एआई का लोकतंत्रीकरण है, यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक नागरिक को प्रौद्योगिकी तक पहुंच और इसके उपयोग का समान अवसर प्राप्त हो। भारत के एआई मिशन को मिल चुकी है वैश्विक मान्यता मंत्री ने कहा कि भारत के एआई मिशन को वैश्विक मान्यता मिल चुकी है और कई देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण के भारत के मॉडल का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मिशन का एक प्रमुख स्तंभ किफायती कंप्यूटिंग अवसंरचना उपलब्ध कराना है। जीपीयू की उच्च लागत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हर किसी के लिए इतने महंगे संसाधनों का मालिक होना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि कई पश्चिमी देशों में, बड़ी-बड़ी कंपनियां 3.50 से 4 अमेरिकी डॉलर प्रति घंटे की दर से सेवाएं प्रदान करके एआई कंप्यूटिंग पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में उच्च गुणवत्ता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं को बहुत कम लागत पर उपलब्ध कराने का विचार प्रस्तुत किया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र, स्टार्टअप, युवा, वैज्ञानिक और इंजीनियर वित्तीय बाधाओं के बिना विश्व स्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग कर सकें। मंत्री वैष्णव ने कहा कि एआई मिशन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लोकतंत्रीकरण को समर्थन देने के लिए 38000 जीपीयू पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उन्होंने इस पहल को 'कॉमन कंप्यूट' की परिकल्पना बताया। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के नवीनतम एआई इंडेक्स का भी हवाला दिया, जिसमें भारत को चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता में शीर्ष तीन देशों में स्थान दिया गया है। मंत्री वैष्णव के अनुसार, यह इंडेक्स एआई के विकास, तैनाती और अनुसंधान में हुई प्रगति का मूल्यांकन करता है।  

स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर जोर, प्रदेश में नवाचार का माहौल बना रही सरकार : भजनलाल शर्मा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान सदी में मानवता के लिए एक नया कोड-एक नई भाषा लिख रहा है। उन्होंने एआई को प्रदेश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि इसके विवेकपूर्ण उपयोग से सरकार ई-गवर्नेंस और डिजिटल समावेशन को और अधिक व्यापक एवं जन केन्द्रित बना रही है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को जयपुर के जेईसीसी में आयोजित राजस्थान रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन लाकर लोगों के जीवन को बेहतर बना रहा है और विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने उद्यमियों, निवेशकों और युवाओं को एआई के उभरते क्षेत्र में सहभागी बनने के लिए राजस्थान में आमंत्रित भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश एआई के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री का मानना है कि एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि 21वीं सदी में राष्ट्रीय शक्ति और समृद्धि का आधार है। एआई देश की नीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सामाजिक संरचना को बेहतर स्वरूप दे रहा है। एआई-एमएल पॉलिसी से नवाचार को बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तकनीक और स्टार्टअप के सशक्त इकोसिस्टम के निर्माण के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार द्वारा लाई गई एआई-एमएल पॉलिसी से एआई सिस्टम अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और निजता-संरक्षण के प्रति जवाबदेह बनेंगे। इस नीति से सार्वजनिक सेवा वितरण अधिक त्वरित, नागरिक-केंद्रित और पारदर्शी होगा तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि एआई से जुड़े साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग और समाधान की प्रक्रिया सरल की जाएगी, प्रदेश में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होगा तथा स्कूलों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और कॉलेजों में एआई शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उद्योग, स्टार्टअप और रिसर्च संस्थानों को भी विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। 5 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, राजस्थान में डेटा सेंटर की स्थापना केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा करते हुए कहा कि राजस्थान में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उद्योग संगठनों के सहयोग से नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके तहत राज्य में 5 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, आने वाले समय में राजस्थान में डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए शीघ्र ही आवश्यक प्रक्रियाएं प्रारंभ होंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विशेष फोकस के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। बीकानेर से जैसलमेर और सीमावर्ती इलाकों तक रेल नेटवर्क को मजबूत करने के कार्य प्रगति पर हैं, जिससे सुरक्षा, विकास और संपर्क में उल्लेखनीय सुधार होगा। डिजिफेस्ट स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल गेटवे मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिफेस्ट ने स्टार्टअप्स को निवेशकों से, विद्यार्थियों को अवसरों से और उद्योग को सरकार से जोड़ डिजिटल राजस्थान का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल गेटवे साबित हो रहे हैं, जहां फंडिंग के साथ-साथ विश्वस्तरीय मेंटर्स का मार्गदर्शन भी मिल रहा है। एआई-एमएल, फिनटेक, एग्रीटेक, एआर-वीआर और प्रॉपटेक जैसे क्षेत्रों में विचार-विमर्श से नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं। राजस्थान में हर माह 81 हजार करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन शर्मा ने कहा कि राजस्थान में 6 करोड़ 50 लाख से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं और हर माह औसतन 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन हो रहे हैं। ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग को देखते हुए साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन एंटी वायरस के माध्यम से साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एवीजीसी-एक्सआर पॉलिसी, डेटा सेंटर नीति 2025, अटल इनोवेशन स्टूडियो, स्टार्टअप लॉन्चपैड, लीप प्रोग्राम और सेंटर फॉर एडवांस्ड स्किलिंग जैसी पहलों से प्रदेश में रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है। एआई के विस्तार के साथ-साथ भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए निवेश समझौतों में से बड़ी संख्या में परियोजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। निवेश अनुकूल वातावरण, नई नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और राजनिवेश पोर्टल के कारण राजस्थान निवेशकों के लिए शीर्ष राज्यों में शामिल हुआ है। प्रवासी राजस्थानियों के लिए बनाई गई नीति और विभाग से उन्हें प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिल रहा है। एआई जीवन का अभिन्न अंग बनेगा, जन-जन तक पहुंचेगी कंप्यूट सुविधा – केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव कार्यक्रम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में मानव जीवन का अभिन्न अंग बनेगा और हर व्यक्ति, हर घर तथा हर उद्यम तक इसकी पहुंच होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में एआई को समावेशी, सुलभ और जनोपयोगी बनाने की दिशा में ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए जा रहे हैं।