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आल्हामाड़ा केवल तीर्थ नहीं, आदिवासी अस्मिता का केंद्र हैः रामविचार नेताम

एमसीबी : जनजातीय आस्था का तीर्थ आल्हामाड़ा: सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक बना छेरता तिहार आल्हामाड़ा केवल तीर्थ नहीं, आदिवासी अस्मिता का केंद्र हैः रामविचार नेताम आल्हामाड़ा तीर्थ स्थल को मिलेगी नई पहचानः प्रभारी मंत्री ने किया मंच व सामुदायिक भवन के लिए 40 लाख की घोषणा छेरता पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है – श्याम बिहारी जायसवाल एमसीबी  छत्तीसगढ़ की महान, गौरवशाली एवं प्राचीन लोकसंस्कृति को संजोए रखने वाला लोकपर्व छेरता तिहार इस वर्ष आल्हामाड़ा धाम, ग्राम पंचायत बंजी में अपार श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। यह भव्य आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ी लोकपरंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत करता रहा, बल्कि सामाजिक एकता, जनविश्वास, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। तीन दिवसीय इस महापर्व का आयोजन 03 जनवरी 2026 से 05 जनवरी 2026 तक बंजी ग्राम पंचायत स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र आल्हामाड़ा धाम में किया गया। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। दूर-दराज के गांवों से श्रद्धालु, जनजातीय समाज के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी वर्ग, जनप्रतिनिधि और सांस्कृतिक प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर छेरता पर्व की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते नजर आए। छेरता तिहार के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति से ओत-प्रोत विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं। सुवा नृत्य, सैला, कर्मा, लोकड़ी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया, वहीं कबड्डी प्रतियोगिता जैसे खेल आयोजनों ने युवाओं में विशेष उत्साह भर दिया। पूरे परिसर में पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और ढोल-मांदर की गूंज ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस गरिमामय अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला अध्यक्ष चंपादेवी पावले, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, जिला पंचायत सदस्य रामजीत लकड़ा, श्रीमती अनीता सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और समाजसेवी मंचासीन रहे। सभी ने लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का सामूहिक संदेश दिया। इस अवसर पर डीएम ने हसदेव क्षेत्र की ओर से समस्त क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आल्हामाड़ा की पावन धरती पर छेरछेरा पर्व का यह भव्य आयोजन अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि छेरछेरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गांवों की मूल और जीवंत संस्कृति की पहचान है, जिसे हम पीढ़ी दर पीढ़ी सहेजते आ रहे हैं। उन्होंने बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर दिए गए संदेश की सराहना करते हुए कहा कि यह हमारी आने वाली पीढ़ी की जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने संस्कृति और प्रकृति को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए आयोजन समिति की सराहना की और 11 हजार रुपये के सहयोग की घोषणा की। वहीं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आल्हामाड़ा और जोगी डोंगरी की जयघोष के साथ अपने संबोधन में कहा कि छेरता पर्व और इससे जुड़ा मेला इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह स्थान न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण ऐसा स्थल है, जहां दूर-दूर से लोग आते हैं। उन्होंने जिले में स्वीकृत और निर्माणाधीन सड़कों, किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना और श्रमिक परिवारों के कल्याणकारी कार्यों की जानकारी देते हुए सरकार की जनकल्याणकारी सोच को रेखांकित किया। भारी मंत्री रामविचार नेताम ने धरती माता, गहिवार बाबा, जोगी डोंगरी और बूढ़ादेव की जयकारा के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि छेरछेरा पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने आल्हामाड़ा को आदिवासी समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से आल्हामाड़ा की पहचान प्रदेश और देशभर में स्थापित की जानी चाहिए। जनजातीय समाज के उत्थान के लिए संचालित योजनाओं, प्रयास आवासीय विद्यालयों, पीएम जनमन और पीवीजीटी योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए राजधानी में निर्मित ट्राइबल म्यूजियम की जानकारी दी। अंत में उन्होंने आल्हामाड़ा में मंच एवं सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 40 लाख रुपये की घोषणा की, जिस पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ स्वागत किया। बड़ादेव धाम समिति आल्हामाड़ा बंजी एवं ग्राम पंचायत बंजी की सक्रिय भूमिका से यह आयोजन सुव्यवस्थित, सफल और स्मरणीय बन सका। श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए की गई व्यवस्थाओं की चारों ओर सराहना हुई। लोकपर्व छेरता ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला महोत्सव है, जो छत्तीसगढ़ की आत्मा को एक सूत्र में बांधता है। अंत में प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आयोजन स्थल पर चल रही कबड्डी प्रतियोगिता का अवलोकन करते हुए महिला एवं पुरुष खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की। मंत्रियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके खेल कौशल की सराहना की और ग्रामीण अंचलों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए शासन की प्रतिबद्धता दोहराई। खिलाड़ियों एवं उपस्थित दर्शकों ने अतिथियों का करतल ध्वनि से स्वागत किया। इस अवसर पर मनोज विश्नोई महाप्रबंधक हसदेव क्षेत्र, चन्द्रकान्त पटेल, शरण सिंह मरपच्ची, श्रीमती सीता देवी, सुरेन्द्र सिंह, देव कुमार, रमेश सिंह, दलप्रताप सिंह, हीरा सिंह, लखनलाल श्रीवास्तव, रामलखन पैकरा, ममता सिंह, उजित नारायण सिंह सहित सभी जनप्रतिनिधि एवं जनपद सीईओ सुवैशाली सिंह, तहसीलदार सुश्रुति धुर्वे सहित अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

एमसीबी: सरगुजा ओलंपिक 2025-26 में जनजातीय अंचल की खेल प्रतिभा को मिलेगा नया मंच

एमसीबी : सरगुजा ओलंपिक 2025-26: जनजातीय अंचल की खेल प्रतिभा को मिलेगा नया मंच एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग, रायपुर के निर्देशानुसार विकासखण्ड स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2025-26 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सरगुजा संभाग अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहाँ युवाओं में खेलों के प्रति अपार नैसर्गिक प्रतिभा विद्यमान है। इसी प्रतिभा को पहचानने, निखारने और राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से सरगुजा ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। सरगुजा ओलंपिक 2025-26 का मुख्य उद्देश्य शासन और जनता के मध्य मजबूत एवं प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करना, युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना तथा उनकी खेल एवं रचनात्मक प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सशक्त खिलाड़ी के रूप में विकसित करना है। इसी क्रम में प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ियों से पंजीयन हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पंजीयन प्रक्रिया खिलाड़ियों के लिए पंजीयन की अवधि 28 दिसंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। इच्छुक खिलाड़ी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन करा सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन के लिए पोर्टल https://rymc.cg.gov.in/ rgujaOlympic2025/  उपलब्ध कराया गया है, साथ ही बारकोड सुविधा भी दी गई है। ऑफलाइन पंजीयन फार्म संबंधित विकासखण्ड के जनपद पंचायत कार्यालय, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, नगर पंचायत/नगर पालिका निगम कार्यालय अथवा जिला खेल अधिकारी कार्यालय से प्राप्त कर वहीं जमा किए जा सकते हैं। प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों का पंजीयन अनिवार्य होगा। एक खिलाड़ी केवल एक ही पंजीयन फार्म जमा कर सकेगा। दलीय खेलों के लिए सभी खिलाड़ियों के फार्म एक साथ जमा कराना अनिवार्य रहेगा। प्रतियोगिताएँ एवं आयु वर्ग सरगुजा ओलंपिक 2025-26 में एथलेटिक्स के अंतर्गत 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊँची कूद, शॉटपुट, हैमर थ्रो, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो तथा 4×100 मीटर रिले रेस आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी (जिला स्तर), कुश्ती (जिला स्तर), कराते, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल तथा रस्साकस्सी (प्रदर्शनात्मक केवल महिला सीनियर वर्ग) प्रतियोगिताएँ भी शामिल हैं। प्रतियोगिताएँ दो आयु वर्गों में आयोजित की जाएगी जूनियर वर्ग: 14 से 17 वर्ष (बालक एवं बालिका) सीनियर वर्ग: आयु बंधन नहीं (महिला एवं पुरुष) पंजीयन फार्म के आधार पर ही खिलाड़ियों की भागीदारी विकासखण्ड एवं जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में सुनिश्चित की जाएगी। सभी स्तरों पर खिलाड़ियों को आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र अथवा बैंक पासबुक की छायाप्रति जैसे मान्य पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। सरगुजा ओलंपिक 2025-26 निश्चित रूप से आदिवासी अंचल के युवाओं के लिए अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने, आगे बढ़ने और खेल के माध्यम से नई पहचान बनाने का एक ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होगा।

ग्रामीणों का बड़ा फैसला, पंचायत चुनाव में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार

लखनऊ  यूपी के पंचायत चुनाव की तैयारियां चल रही है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच बागपत जनपद से एक खबर है। यहां के ढिकौली गांव में जिला जाट सभा की पंचायत में पंचों के साथ-साथ आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान किसी भी कीमत पर शराब नहीं बांटने की शपथ ली। पंचायत में शराब बांटने वाले प्रत्याशी का सामाजिक बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। जिला जाट सभा अध्यक्ष, अधिवक्ता सोमेन्द्र ढाका के आवास पर नशा मुक्त समाज के संकल्प के साथ आयोजित की गई इस पंचायत में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी ढाका ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा को दी। पंचायत आयोजक सोमेंद्र ढाका ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को शराब मुक्त बनाने के लिए यह पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें किसान नेता अन्नू मलिक, रामछेल पंवार, विक्रम आर्य, संदीप प्रधान, विनय ढाका, जयकुमार और राजू के अलावा खाप मुखिया, प्रत्याशी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पंचायत में समाज सुधार के लिए नशे को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया गया और सभी से इस दिशा में संकल्प लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आगामी पंचायत चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी शराब का वितरण कर समाज को दूषित करने का प्रयास करेगा, तो उसका मिलकर बहिष्कार किया जाएगा। पंचायत में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों ने कहा कि चुनाव में हार स्वीकार्य है, लेकिन शराब बांटकर जीत हासिल करना स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने संकल्प लिया कि यदि कोई शराब के नाम पर वोट मांगने आएगा तो उसे गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

एमपी में 23,700 करोड़ की लागत से बनेगा एक्सप्रेस-वे, यूपी-राजस्थान की दूरी होगी कम, गांवों से ली जाएगी जमीन

  भिण्ड भिण्ड चंबल संभाग के तीनों जिलो के लिए क्रांतिकारी माने जा रहे अटल प्रोग्रेस-वे (Atal Progress Way) के निर्माण पर 26 माह से बंद प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। राज्य सरकार ने फिर से कवायद तेज करने के निर्देश जारी किए तो जिले के की उम्मीदें जाग उठीं। तीन राज्यों और पांच जिलों को सीधे प्रभावित करने वाले अटल प्रोग्रेस-वे की एनएचएआई स्तर पर निरंतर प्रक्रिया चल रही है। यही वजह है कि 11500 करोड़ रुपए का यह प्रस्ताव अब 23 हजार 700 करोड़ तक पहुंच गया है। इस मार्ग के बन जाने से कोटा के लिए सडक मार्ग से 10-11 घंटे की यात्रा छह से सात घंटे रह जाएगी। 3 राज्यों के 5 जिलों से होकर गुजरेगी रोड उत्तरप्रदेश में इटावा जिले के ननावा से शुरू होने वाला अटल प्रोग्रेस-वे मप्र में भिण्ड, मुरैना और श्योपुर होकर राजस्थान के कोटा जिले में सीमाल्या पर जुड़ेगा। सर्वाधिक करीब 168 किलोमीटर मुरैना जिले में और सबसे कम करीब 22 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान के खाते में आएगा। किसानो के विरोध के बाद रोका गया था काम अटल प्रोग्रेस-वे को लेकर किसानों के तीखे विरोध के चलते अक्टूबर 2023 में तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यह प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। वर्ष 2017 से चंबल एक्सप्रेस के नाम से यह कवायद चल रही थी। वर्ष 2021 में भारत माला परियोजना में इसे शामिल करके नाम बदलकर अटल प्रगति पथ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले भोपाल में हुई बैठक के बाद इसे फिर से शुरू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। चार हजार हेक्टेयर भूमि चाहिए कुल खेतों से होकर निर्माण के प्रस्ताव में मध्यप्रदेश में 188.1, उत्तरप्रदेश में 180.76 एवं राजस्थान में 492.51 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। इसमें राजस्थान में 70.78, मप्र में 1604 एवं उत्तरप्रदेश में 36.35 हेक्टेयर शासकीय भूमि, राजस्थान में 380.93, मप्र 1180 एवं उत्तरप्रदेश में 134.7 हेक्टेयर निजी, जल संरचनाओं से लगी राजस्थान में 40.8 हेक्टेयर राजस्थान में, 404 हेक्टेयर एमपी में और 9.71 हेक्टेयर भूमि यूपी में अधिग्रहित की जानी है। लेकिन निजी भूमि के अधिग्रहण का भिण्ड में और निजी व वन भूमि का विरोध मुरैना में हो रहा है। 454 हेक्टेयर भूमि का होना है अधिग्रहण खेतों से होकर निर्माण पर वन विभाग की 454.51 हेक्टेयर भूमि अधिगृहित की जानी है। राजस्थान में कोटा जिले के सीमाल्या गांव के पास मुंबई-बड़ोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 27 से शुरू होकर मध्यप्रदेश के तीन जिलों को कवर करते हुए उत्तरप्रदेश के इटावा जिले में निनावा तक प्रस्तावित इस मार्ग के निर्माण भिण्ड और इटावा जिले के लोगों को कोटा जाने के लिए सीधा शॉर्टकट और सुगम आवागमन उपलब्ध हो सकेगा। इसके आसपास लॉजिस्टिक हथ, औद्योगिक क्षेत्र और चंबल पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। किस जिले में कितनी प्रस्तावित लंबाई अटल प्रौग्रेस वे में जिले की 29 ग्राम पंचायतों, दो जनपदों के 41 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें अटेर में कछपुरा, उदोतगढ़, कनेरा, अहरौली काली, शुक्लपुरा, खडेरी, चौम्हों, तरसोखर, निवारी, बलारपुरा, जम्होरा, प्रतापपुराः बड़पुरा, रिदौली, गोहदूपुरा, जौरी-कोतवाल, सुरपुरा, दुल्हागन, मटघाना, भिण्ड में गोपालपुरा, भववासी, भदाकुर, नाहरा एवं सराय गांव शामिल हैं। (MP News) शासन को इस मामले में जल्द कोई निर्णय लेना चाहिए, किसान असमंजस में हैं। किसान अपनी कृषि भूमि का भी सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।- लक्ष्मण सिंह नरवरिया, किसान, अटेर शासन स्तर पर बैठक होने की सूचना तो मिली है. हमारे पास कोई अधिकृत जानकारी अभी नहीं आई है। अपडेट कोई होगा तो जानकारी दी जाएगी। – उमाकांत मीणा, ईई, एनएचएबाई, ग्वालियर।

वृद्धजनों की देखभाल के लिए केयर गिवर्स प्रशिक्षण शुरू, 53 युवा सीख रहे हैं सेवा के गुर

वृद्धजनों की देखभाल के लिये केयर गिवर्स प्रशिक्षण प्रारंभ, 53 युवा जन सीख रहे है वृद्धों की देखभाल के गुर भोपाल  वृद्धजनों की देखभाल कैसे की जाए, इस विषय पर 75 दिवसीय केयर गिवर्स प्रशिक्षण राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (निमहर) सीहोर में प्रारंभ किया गया है। दिव्यांजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिकन्याय और अधिकारिका मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अटल वयों अभ्यूदय योजनांतर्गत यह प्रशिक्षण शिविर 5 जनवरी से 26 मार्च 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इसमें 53 युवा वृद्धों की देखभाल, उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। प्रमुख सचिव, सामाजिकन्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि अटल वयो अभ्यूदय योजना के अंतर्गत स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसमें (NISD) नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस तथा लक्ष्मी बेन सुरजी फाउंडेशन मुंबई के संयुक्त तत्वाधान वरिष्ठजनों की देखभाल के लिये युवाओं को तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों द्वारा युवाजनों को बुर्जुगों की देखभाल के तरीकों, उनके अनुभव को साझा करने की प्रक्रिया और बुर्जुगों के साथ संवेदनशील बरताओं के लिय तैयार किया जाएगा। यह अपने तरह का प्रथम प्रशिक्षण है जो प्रदेश में आयोजित किया जा रहा है।  

स्मार्ट सिटी की ओर कदम, AI कैमरों से रियल-टाइम ट्रैफिक जाम की मिलेगी जानकारी

भोपाल  आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों का समाधान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), सेंसर और डेटा आधारित तकनीकें के माध्यम से होगा। मैनिट और ट्रिपल आइ‌टी के छात्रों द्वारा विकसित नवाचार शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक बड़े बदलाव की नींव रख रहे हैं। स्मार्ट कैमरों और सेंसर की मदद से यह तकनीक समझ सकेगी कि किस दिशा में वाहनों का दबाव अधिक है, जिससे ट्रैफिक सिग्नल स्वत: उसी अनुसार संचालित हो सकेंगे और जाम की समस्या कम होगी। वहीं डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मरीज के शरीर से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा को रियल-टाइम में रिकॉर्ड किया जाएगा। जिसे डॉक्टर दूर बैठे भी देख सकेंगे। इससे समय पर इलाज संभव होगा और अस्पतालों पर दबाव भी घटेगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (एसआइएच) 2025 में छह से अधिक टीमों के आइडिया राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए हैं। इन आइडियाज की खास बात यह है कि ये सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए है। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम स्मार्ट सेंसर आधारित वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कचरा पात्रों में लगे सेंसर से नगर निगम को अलर्ट भेजेगा कि कहां कचरा भर चुका है। इससे समय पर सफाई होगी और शहर साफ रहेंगे। वहीं, डाक विभाग के लिए विकसित एआइ आधारित समाधान से पार्सल और पत्रों की प्रोसेसिंग तेज होगी। फेक न्यूज और देशविरोधी प्रचार की पहचान मैनिट की एक टीम ने ऐसा टूल बनाया है, जो सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण कर संदिग्ध पोस्ट, ट्रेंड और कैंपेन को चिन्हित करेगा। यह सिस्टम पैटर्न पहचानकर बताएगा कि कौन सा कंटेंट संगठित तरीके से फैलाया जा रहा है, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में क्या बदलेगा ट्रिपल आईटी की टीम ने ग्रामीण इलाकों के लिए डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म बनाया है। इसमें मरीज का इलाज, जांच और दवाओं का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। इससे बार-बार फाइल ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी और डॉक्टर दूर बैठे भी मरीज की स्थिति समझ सकेंगे। साइबर ठगी से आम लोगों की सुरक्षा डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ा है। छात्रों ने फेक बैंकिंग एपीके डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जो ऐप के कोड, परमिशन और व्यवहार का विश्लेषण कर यह बताएगा कि ऐप सुरक्षित है या नहीं। स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल मैनिट की टीम ने एआइ आधारित स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है। मौजूदा सिस्टम में सिग्नल तय समय पर बदलते हैं, चाहे सड़क खाली हो या जाम से भरी। नया सिस्टम रीयल-टाइम डेटा, कैमरों और सेंसर की मदद से यह समझेगा कि किस दिशा में ज्यादा वाहन हैं। उसी आधार पर सिग्नल का समय अपने आप बदलेगा। इससे जाम कम होगा, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को रास्ता मिलेगा और ईंधन की बर्बादी भी रुकेगी।

देश का पहला ऐतिहासिक महाभारत समागम 16 से 24 जनवरी तक भारत भवन में, CM डॉ. मोहन होंगे शामिल

 भोपाल  राजधानी भोपाल के भारत भवन से शांति का संदेश दिया जाएगा। दरअसल, 16 से 24 जनवरी तक ऐतिहासिक महाभारत समागम का आयोजन होगा। नौ दिवसीय आयोजन में CM डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे।  भारत सहित इंडोनेशिया, श्रीलंका और जापान के रंग समूह लेंगे भाग वीर भारत न्यास के आयोजन में भारत सहित इंडोनेशिया, श्रीलंका और जापान के प्रतिष्ठित रंग समूह भाग लेंगे। नौ दिवसीय आयोजन में नाटक, नृत्य-नाट्य, कठपुतली कार्यशालाएं, लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियां, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और इमर्सिव डोम थिएटर के माध्यम से युद्ध के विरुद्ध शांति और संवाद का सशक्त संदेश दिया जाएगा।  शांति और संवाद का मंच बनेगा भोपाल का भारत भवन वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध, हिंसा और सभ्यताओं के टकराव के दौर में भोपाल का भारत भवन शांति और संवाद का मंच बनेगा। महाभारत समागम देश का पहला और अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है। जो महाभारत को केवल युद्ध कथा नहीं, बल्कि मानवता, विवेक और करुणा की महागाथा के रूप में प्रस्तुत करेगा।  युद्ध कभी समाधान नहीं नौ दिवसीय आयोजन में नाटक, नृत्य-नाट्य, लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि युद्ध कभी समाधान नहीं होता। श्रीकृष्ण के संवाद आधारित प्रयास आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक हैं। नेपथ्य कला, अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह और पताकाओं की प्रदर्शनी दर्शकों को महाभारत के दृश्य संसार से परिचित कराएगी। महाभारत आधारित चित्र प्रदर्शनी और भारतीय कठपुतली कला भी आयोजन का अहम हिस्सा होंगी। इसके साथ ‘सभ्यताओं की सांस’ और ‘भूली बिसरी सभ्यताएं’ पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। 

रुद्राक्ष महोत्सव: कुबेरेश्वर धाम में मंच साझा करेंगे प्रदीप मिश्रा–धीरेंद्र शास्त्री, जानें वितरण होगा या नहीं

सीहोर  कुबेरेश्वर धाम 17 फरवरी को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक गौरव का साक्षी बनने जा रहा है। धाम पर आयोजित होने वाले भव्य रुद्राक्ष महोत्सव के अवसर पर बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन होगा। विट्ठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव महादेव की भक्ति और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित है। इस साल महोत्सव का स्वरूप दिव्य होगा। पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में लाखों भक्त एक साथ महादेव का पूजन और अभिषेक करेंगे। विट्ठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य ने बागेश्वर धाम पर पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से भेंट की और रुद्राक्ष महोत्सव पर चर्चा की। पंडित शास्त्री ने कहा कि 17 फरवरी को कुबेश्वरधाम पर होने वाले भव्य महोत्सव में वह शामिल रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक लाख 80 हजार वर्ग फीट में विशाल पंडाल तैयार किया गया है। इसके अलावा लगभग 10 एकड़ भूमि पर भोजनशाला का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि महोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रुद्राक्ष से शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा महोत्सव के दौरान शिव तत्व और सनातन धर्म की महिमा पर विशेष सत्संग सत्र आयोजित किए जाएंगे। मंदिर परिसर में लाखों रुद्राक्ष से एक भव्य शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा, जिसका श्रद्धालुओं के बीच नियमित अभिषेक किया जाएगा। विट्ठलेश सेवा समिति के जनसंपर्क प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि 17 फरवरी का दिन कुबेरेश्वर धाम के इतिहास में विशेष महत्व रखेगा, जब दोनों प्रमुख कथावाचक एक मंच पर उपस्थित रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि महोत्सव के दौरान रुद्राक्ष का वितरण नहीं किया जाएगा और पूरा आयोजन महादेव की आराधना तथा संतों के सानिध्य पर केंद्रित रहेगा। 80 हजार स्क्वायर फीट में बन रहा पंडाल: सालों से होने वाले ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव में लाखों की संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु शामिल होते हैं। आयोजन के लिए एक लाख 80 हजार स्क्वायर फीट का भव्य पंडाल बनाया गया है। इसके अलावा 10 एकड़ में भोजन शाला का निर्माण किया जा रहा है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री होंगे शामिल विट्ठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला समेत अन्य ने बागेश्वर धाम पर पहुंचकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से भेंट कर आगामी ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव को लेकर चर्चा की। वहीं पंडित शास्त्री ने कहा कि आगामी 17 फरवरी को कुबेरेश्वर धाम पर होने वाले भव्य महोत्सव में वह शामिल रहेंगे। गौरतलब है कि बीते कई सालों से होने वाले ऐतिहासिक रुद्राक्ष महोत्सव में लाखों की संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालु शामिल होते है। भव्य आयोजन को लेकर एक लाख 80 हजार स्कावयर फीट का भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है। इसके अलावा 10 एकड़ में भोजन शाला का निर्माण किया जा रहा है। शिव महापुराण एवं सत्संग महोत्सव के दौरान शिव तत्व और सनातन धर्म की महिमा पर विशेष सत्संग सत्र आयोजित होंगे। लाखों रुद्राक्ष से मंदिर परिसर में भव्य शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा। जिसका नियमित रूप से लाखों श्रद्धालुओं के मध्य अभिषेक किया जाएगा। विशाल धार्मिक समागम यह आयोजन देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बनेगा। दो महान विभूतियों का महामिलन विट्ठलेश सेवा समिति के जनसंपर्क प्रभारी मनोज दीक्षित ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि 17 फरवरी का दिन कुबेरेश्वर धाम के इतिहास में अविस्मरणीय होगा। इस दिन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा महाराज और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक ही मंच पर उपस्थित रहेंगे। देश के इन दो सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक व्यक्तित्वों का मिलन सनातन संस्कृति की एकजुटता और वैचारिक शक्ति का परिचायक होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महोत्सव के दौरान रुद्राक्ष का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि पूरा कार्यक्रम महादेव की आराधना और संतों के सानिध्य पर केंद्रित रहेगा। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए समिति की ओर से आवास, पेयजल और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। ताकि भक्तों को सुलभ दर्शन और सत्संग का लाभमिल सके। समिति समस्त धर्मप्रेमी जनता से इस गौरवशाली और भक्तिमय अवसर पर सादर पधारने की अपील की है।

भोपाल में शुरू होगा बिना चीरफाड़ वाला पोस्टमॉर्टम, आधे घंटे में पूरी होगी प्रक्रिया, एम्स को मिली मंजूरी

भोपाल   डिजिटल अटॉप्सी ' सेंटर अपनी योजना के अनुसार कामयाब रहा तो यह सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से क्रांतिकारी कदम होगा। इसके तहत बिना चीर-फाड़ किए पोस्टमॉर्टम किया जा सकेगा। इससे शव को सम्मान दिया जा सकेगा और अंतिम समय में लोग अपने प्रियजन के शरीर को बगैर क्षत-विक्षत हुए विदाई दे सकेंगे।  भोपाल जल्द ही देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकता है, जहां बिना चीरफाड़ के पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। जापान और अन्य विकसित देशों की तर्ज पर एम्स भोपाल में वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया गया है।  एम्स भोपाल प्रबंधन ने भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक में इसका औपचारिक प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी थी। अब इसे वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि प्रस्ताव पर रिस्पॉन्स सकारात्मक रहा है और जल्द ही इसके लिए फंड जारी होने की संभावना है। यह परियोजना मंजूर होती है तो एम्स भोपाल मध्यप्रदेश का पहला ऐसा अस्पताल होगा, जहां वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा शुरू होगी। शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि फांसी के मामलों में वर्चुअल ऑटोप्सी और पारंपरिक ऑटोप्सी के नतीजों में 90 प्रतिशत तक समानता रही। डिजिटल एविडेंस होते हैं तैयार विशेषज्ञों के अनुसार, वर्चुअल ऑटोप्सी से तैयार होने वाली रिपोर्ट डिजिटल साक्ष्य के रूप में बेहद मजबूत होती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति की मौत नस में ब्लॉकेज के कारण हुई है, तो रिपोर्ट में उस नस की 3डी तस्वीर होगी। यह तस्वीर तीन स्तरों में होगी- पहले पूरे शरीर में ब्लॉकेज की स्थिति, फिर संबंधित अंग और अंत में उस खास नस की क्लोज-अप इमेज। इन डिजिटल साक्ष्यों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और अदालत में भी प्रमाण के तौर पर पेश किया जा सकता है। परिजनों के आक्रोश का नहीं करना होगा सामना कई मामलों में परिजन धार्मिक या सामाजिक कारणों से शव की चीरफाड़ नहीं चाहते। इसे लेकर अस्पतालों में विवाद की स्थिति भी बन जाती है। जिसका सामना कई बार मौजूद डॉक्टरों को करना पड़ता है। पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराती है, लेकिन इससे परिवार मानसिक रूप से आहत होता है। वर्चुअल ऑटोप्सी इस समस्या का समाधान बन सकती है, क्योंकि इसमें शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए जांच पूरी की जाती है। इससे परिजनों को शव सही अवस्था में सौंपा जा सकेगा। आधा घंटे में पूरी प्रक्रिया एम्स के फॉरेंसिक विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जहां पारंपरिक पोस्टमॉर्टम में कई घंटे लग जाते हैं, वहीं वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया लगभग आधे घंटे में पूरी हो सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से ट्रॉमा केस, सड़क हादसों और संक्रामक बीमारियों से जुड़ी मौतों में बेहद उपयोगी मानी जा रही है। कोविड जैसी महामारियों के दौरान यह स्टाफ के लिए संक्रमण के खतरे को भी कम करती है। देश में 38 वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर बनाने का टारगेट भारत में सबसे पहले 2021 में एम्स दिल्ली में वर्चुअल ऑटोप्सी की शुरुआत हुई थी। अब 2026 की शुरुआत तक देशभर में 38 से अधिक विशेष वर्चुअल ऑटोप्सी लैब स्थापित करने की योजना है। एम्स दिल्ली के अलावा शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस में भी वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा मौजूद है। इसके अलावा एम्स ऋषिकेश में भी यह सेटअप तैयार करने की मंजूरी दी गई है। कम होगा भार  एक अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक तरीके से किए जाने वाले पोस्टमॉर्टम में काफी समय जाता है। इस तरीके से किए जाने वाले पोस्टमॉर्टम रात में नहीं किए जाते हैं। पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल आने वाले 70 प्रतिशत मामले सामान्य मौत के होते हैं। यानी केवल इनकी मौत का कारण पता करना होता है। हालांकि 30 प्रतिशत ऐसे मामले होते हैं, जिनमें कानूनी अड़चनें होती हैं। इस मशीन के जरिए 70 प्रतिशत सामान्य पोस्टमॉर्टम को करने में काफी मदद मिलेगी।  पश्चिमी देशों में इस तकनीकी का बहुत इस्तेमाल किया जाता है। डिजिटल अटॉप्सी के जरिए 30 मिनट के अंदर पोस्टमॉर्टम हो जाता है, जबकि पारंपरिक तरीके से होने वाले पोस्टमॉर्टम में 1-2 घंटे या उससे भी अधिक समय लग सकता है। बता दें कि नायर अस्पताल में सालाना 2000-2500 पोस्टमॉर्टम होते हैं। इनमें से तकरीबन 400 कानूनी मामलों से जुड़े पोस्टमॉर्टम होते हैं। ऐसे करेगा काम सामान्य मौत के मामलों में यह वर्चुअल अटॉप्सी मशीन काफी फायदेमंद साबित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, एमआरआई की तरह इस मशीन में उच्च क्वॉलिटी का स्कैनर लगा होता है। शव को मशीन के अंदर भेजा जाता है, जिससे शरीर के अंदर प्रभावित हुए अंगों के बारे में पता चलता है। स्कैन के जरिए कंप्यूटर पर शरीर के अंदर की चीजों को आसानी से रेडियोलॉजिस्ट और फरेंसिक विशेषज्ञ देखते हैं और मौत के कारणों का पता लग सकता है। दुर्घटनाग्रस्त मामलों या ‘मास कैज्युअलिटी’ के दौरान इस तरह की मशीन से काफी मदद मिल सकती है।

इंदौर में रियल एस्टेट गतिविधियों में तेजी, विजयनगर और बायपास में रजिस्ट्री में उछाल

 इंदौर  शहर में रियल एस्टेट गतिविधियां लगातार गति पकड़ रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में संपत्ति की खरीदी-बिक्री का रुझान बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2.28 प्रतिशत बढ़ा है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान विजय नगर स्थित इंदौर-3 पंजीयन कार्यालय का रहा, जहां पंजीयन में 16.51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यहां वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में 4320 अधिक दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार विजय नगर, बायपास और देवास नाका क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की खरीदी-बिक्री बढ़ी है। दस्तावेजों के पंजीयन में इजाफा इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में पंजीयन कार्यालयों में कुल 1 लाख 26 हजार 328 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष इसी अवधि में 1 लाख 23 हजार 512 दस्तावेज दर्ज हुए थे। इस तरह कुल 2816 दस्तावेज अधिक पंजीकृत हुए। हालांकि, दस्तावेज पंजीयन बढ़ने के बावजूद राजस्व लक्ष्य हासिल करने में विभाग पीछे रहा। राजस्व संग्रहण और वार्षिक लक्ष्य इंदौर पंजीयन कार्यालय को 3500 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य दिया गया था, जिसमें नौ माह में 2328 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जाना था। लेकिन अब तक विभाग केवल 1730 करोड़ रुपये ही एकत्र कर सका है। फिर भी यह राशि वर्ष 2024 की समान अवधि में जुटाए गए 1659 करोड़ रुपये से अधिक है। पंजीयन कार्यालयवार आंकड़ों पर नजर डालें तो नौ माह में इंदौर-4 कार्यालय में सर्वाधिक 34,632 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि सबसे अधिक राजस्व 479.08 करोड़ रुपये इंदौर-3 कार्यालय से प्राप्त हुआ। पुराने क्षेत्रों में मांग कमजोर मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय में दस्तावेज पंजीयन में 15.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो शहर के कुछ पुराने क्षेत्रों में संपत्तियों की मांग कमजोर होने का संकेत देती है।