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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विक्रम अवार्ड-2023 पर अंतरिम रोक लगाई, कोर्ट ने दूसरी दावेदार से मांगा जवाब

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने साहसिक खेलों के लिए दिए जाने वाले विक्रम अवार्ड-2023 का आयोजन करने पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने दूसरी दावेदार भावना डेहरिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई पांच जनवरी, 2026 को निर्धारित की। कहा कि तब तक विक्रम अवार्ड-2023 आयोजन न किया जाए। सीहोर निवासी पर्वतारोही मेघा परमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा व अधिवक्ता अतुल जैन ने पक्ष रखा। दलील दी कि याचिकाकर्ता इस अवार्ड की सही दावेदार है, इसलिए अंतिम निराकरण तक उक्त अवार्ड किसी अन्य को नहीं दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मप्र शासन ने साहसिक खेलों के लिए विक्रम अवार्ड 2023 की घोषणा की है। इसके लिए छिंदवाड़ा की पर्वतारोही भावना डेहरिया का चयन किया गया है। याचिकाकर्ता को भावना के चयन पर कोई आपत्ति नहीं है। उसका कहना है कि 22 मई 2019 को दुनिया की सबसे ऊंची छोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वालों में वह अग्रणी थीं। भावना डेहरिया से पहले तिरंगा फहराया था। दोनों के बीच पांच घंटे का अंतराल था। मेघा सुबह पांच बजे चोटी पर पहुंच गई थीं, जबकि भावना पौने 10 बजे पहुंची थीं। इस लिहाज से भावना की भांति मेघा का भी विक्रम अवार्ड पर हक है। नियम शिथिल करें विगत सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता तन्खा ने दलील दी थी कि 2022 में विक्रम अवार्ड के चयन की प्रक्रिया में नियमों को शिथिल करते हुए प्रदेश के दो पुरुष खिलाड़ियों पर्वतारोही भगवान सिंह और रत्नेश पांडेय के नामों पर मुहर लगाई थी। दोनों के बीच लक्ष्य हासिल करने में एक घंटे का अंतराल था। एक वर्ष में सिर्फ एक खिलाड़ी को अवार्ड देने का नियम बदलने का दृष्टांत सामने है। याचिकाकर्ता मेघा के लिए विक्रम अवार्ड पाने का नामांकन प्रक्रिया के अनुसार यह अंतिम अवसर है। कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में संचालित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में याचिकाकर्ता मेघा परमार को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया गया था और भावना को यह अवसर मेघा के बाद हासिल हुआ।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में अब भक्तों को मिलेगा 24 घंटे लड्डू प्रसाद, नया काउंटर शुरू

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में अब भक्तों को चौबीस घंटे भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद मिल सकेगा। मंदिर समिति पं.सूर्यनारायण व्यास यात्री गृह (हरसिद्धि धर्मशाला) के सामने नया प्रसाद काउंटर स्थापित करने जा रही है। बता दें वर्तमान में भक्तों को परिसर स्थित प्रसाद काउंटरों से सुबह 6 से रात 11 बजे तक ही लड्डू प्रसाद मिल पाता है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्री महाकाल महालोक, मंदिर परिसर तथा मंगलनाथ मंदिर स्थित काउंटर से लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जाता है। यह सभी काउंटर मंदिरों की व्यवस्था अनुसार पट खुलन के बाद खोले जाते हैं तथा पट बंद होने पर बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में इन काउंटरों से 24 घंटे प्रसाद विक्रय नहीं किया जा सकता है। इसलिए मंदिर समिति ने भक्तों को 24 घंटे प्रसाद विक्रय करने के लिए हरसिद्धि धर्मशाला के बाहर नया काउंटर शुरू करने का निर्णय लिया है। इस काउंटर से दोनों प्रकार के श्री अन्न रागी तथा बेसन के लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जाएगा। 400 रुपये किलो लड्डू, विभिन्न पैक में उलब्ध बेसन व रागी के लड्डू की कीमत एक समान 400 रुपये किलो है। समिति 100 ग्राम, 200 ग्राम व 500 ग्राम के पैक में प्रसाद का विक्रय कर रही है। इसकी कीमत क्रमश: 50 रुपये, 100 रुपये तथा 200 रुपये है।

डॉ. मोहन यादव का उभरता मध्यप्रदेश: नीतियों और निवेश से आकार ले रहा औद्योगिक नवयुग

मप्र के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन जी यादव की सरकार के दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं । भोपाल  किसी भी राज्य का विकास केवल परियोजनाओं और आंकड़ों से नहीं मापा जाता, बल्कि उस दृष्टि से पहचाना जाता है जो शासन को दिशा देती है। मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्ष इसी दृष्टि के सशक्त उदाहरण के रूप में उभरे हैं। यह कालखंड प्रशासनिक निरंतरता का नहीं, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, निवेश–मित्र वातावरण और संरचनात्मक सुधारों का काल रहा है। ‘उद्योग करना आसान’ जैसी अवधारणाओं को व्यवहार में उतारते हुए सरकार ने मध्यप्रदेश को निवेशक, विश्वास आधारित राज्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। नीति आधारित शासन और औद्योगिक स्पष्टता डॉ. मोहन यादव सरकार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने विकास को आकस्मिक निर्णयों पर नहीं, बल्कि सुस्पष्ट नीतिगत ढांचे पर आधारित किया। एक साथ 18 नीतियों को लागू करना केवल प्रशासनिक घोषणा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि सरकार उद्योग, सेवा, कृषि, पर्यटन, तकनीक और ऊर्जा, सभी क्षेत्रों को एक साझा विकास दृष्टि से देख रही है। इन नीतियों के माध्यम से निवेशकों को यह भरोसा मिला कि राज्य में नियम अस्थिर नहीं हैं और प्रक्रियाएँ अनुमानित तथा पारदर्शी हैं। औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति, आईटी, आईटीईएस और इलेक्ट्रॉनिक्स निवेश नीति, स्टार्ट-अप नीति और लॉजिस्टिक्स नीति ने मध्यप्रदेश को पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नवीन और उभरते क्षेत्रों के लिए भी आकर्षक बनाया। डिजिटल स्टेट नीति और ड्रोन आधारित सेवाओं को प्रोत्साहन देने वाली नीति ने यह स्पष्ट किया कि सरकार केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी कर रही है। निवेशक–मित्र वातावरण और प्रशासनिक भरोसा इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने निवेश को केवल आमंत्रण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि निवेशक के साथ खड़े रहने की नीति अपनाई। ‘निवेशक मित्र नीति’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने वाला व्यक्ति या संस्था अकेली नहीं है; सरकार उसकी प्रक्रियात्मक, संरचनात्मक और प्रशासनिक आवश्यकताओं में सहभागी है। सिंगल विंडो सिस्टम, समयबद्ध स्वीकृतियाँ और स्पष्ट उत्तरदायित्व ने प्रशासन को निवेश के लिए सहयोगी बनाया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 इस नीति का प्रत्यक्ष परिणाम रही, जहाँ ₹26 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आए। यह उपलब्धि केवल एक आयोजन की सफलता नहीं, बल्कि उस भरोसे का परिणाम है जो सरकार ने उद्योग जगत में निर्मित किया। इसी क्रम में सात रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और चौदह इंटरैक्टिव सेशन्स ने यह सुनिश्चित किया कि निवेश संवाद केवल राजधानी तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के विभिन्न अंचलों तक पहुँचे। रोजगार, कौशल और मानव संसाधन का पुनर्गठन मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में रोजगार को केवल सांख्यिकीय लक्ष्य के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण के माध्यम के रूप में देखा गया। 23 लाख से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन इस बात का प्रमाण है कि निवेश को कौशल और स्थानीय संसाधनों से जोड़ा गया। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग–शैक्षणिक समन्वय के प्रयासों ने रोजगार को अल्पकालिक नहीं, बल्कि स्थायी आर्थिक आधार प्रदान करने की दिशा में कार्य किया। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास नीति के माध्यम से युवाओं को आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने का प्रयास किया गया। इससे रोजगार केवल महानगरों तक सीमित न रहकर छोटे शहरों और औद्योगिक अंचलों तक पहुँचा। नवीकरणीय ऊर्जा और हरित विकास की दिशा विकास की आधुनिक अवधारणा पर्यावरणीय संतुलन के बिना अधूरी मानी जाती है। इस दृष्टि से मोहन यादव सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा नीति को विकास का अभिन्न अंग बनाया। 278 मेगावाट की सोलर परियोजनाएँ और सैकड़ों एकड़ में ऊर्जा आधारित निवेश यह दर्शाते हैं कि मध्यप्रदेश ने हरित विकास को विकल्प नहीं, अनिवार्यता के रूप में स्वीकार किया है। नवीकरणीय ऊर्जा नीति ने न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि राज्य को निवेशकों के लिए एक जिम्मेदार और दीर्घकालिक दृष्टि वाला गंतव्य भी बनाया। यह नीति आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को ऊर्जा आधारित उद्योगों का केंद्र बनाने की क्षमता रखती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स : औद्योगिक प्रवाह की रीढ़ औद्योगिक विकास का वास्तविक आधार मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। लॉजिस्टिक्स नीति, औद्योगिक कॉरिडोर और परिवहन नेटवर्क के विस्तार ने मध्यप्रदेश को कनेक्टिविटी आधारित राज्य के रूप में उभारा है। सड़क, एक्सप्रेस-वे और माल परिवहन की बेहतर व्यवस्था ने उद्योगों के लिए लागत घटाई और समयबद्ध आपूर्ति को संभव बनाया। यह इंफ्रास्ट्रक्चर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि, पर्यटन और सेवाक्षेत्र के विस्तार में भी सहायक बना। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुआयामी गति मिली। पर्यटन, संस्कृति और आर्थिक पुनर्जीवन डॉ. मोहन यादव सरकार की एक विशिष्ट पहचान यह रही कि उसने विकास को सांस्कृतिक जड़ों से अलग नहीं किया। पर्यटन नीति, फिल्म पर्यटन नीति और धार्मिक–सांस्कृतिक स्थलों के विकास ने यह स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश अपनी विरासत को केवल स्मृति नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में देखता है। महाकाल लोक, राम वन गमन पथ और अन्य धार्मिक–पर्यटन परियोजनाओं ने न केवल राज्य की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया, बल्कि स्थानीय रोजगार और सेवा क्षेत्र को भी नई ऊर्जा दी। यह मॉडल दर्शाता है कि संस्कृति और विकास एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। प्रशासनिक कार्यशैली : निर्णय, संवाद और मैदान में उपस्थिति मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली उनकी निरंतर सक्रियता में परिलक्षित होती है। वे केवल नीतियाँ घोषित करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके क्रियान्वयन की सतत समीक्षा भी करते रहे। उद्योगपतियों, अधिकारियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद ने प्रशासन को अधिक उत्तरदायी बनाया। यह कार्यशैली शासन को कागजी प्रक्रियाओं से निकालकर परिणाम आधारित प्रशासन की ओर ले जाती है, जहाँ निर्णय का मूल्यांकन उसके प्रभाव से होता है। निष्कर्ष : हम कह सकते है कि डॉ मोहन यादव की सरकार ने मप्र में एक नवयुग की ठोस आधारशिला रख दी है ,क्योंकि मोहन यादव सरकार के ये दो वर्ष मध्यप्रदेश के लिए परिवर्तन के संकेत नहीं, बल्कि परिवर्तन की ठोस आधारशिला हैं। नीतिगत स्पष्टता, निवेश–मित्र वातावरण, रोजगार सृजन, हरित ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक चेतना—इन सभी का समन्वय एक ऐसे विकास मॉडल की ओर संकेत करता है जो राज्य को केवल विकसित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाता है। यदि यही नीति–निरंतरता और प्रशासनिक सक्रियता बनी रहती है, तो आने वाले … Read more

मध्य प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप, इंदौर में 5.2 डिग्री, भोपाल और ग्वालियर में पारा गिरा; 5 जिलों में अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। प्रदेश का तापमान 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर एक बार फिर सबसे सर्द रहा। यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रहा। वहीं इंदौर में बीते 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। दरअसल, पचमढ़ी से भी ठंडी इंदौर की रात रही है। यहां रात का तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, बीती रात अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे ही रहा। राजगढ़ में 5.2 डिग्री, नौगांव में 6.4 डिग्री, उमरिया में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मलाजखंड में 7.2 डिग्री, मंडला में 7.6 डिग्री, रायसेन, शिवपुरी-नरसिंहपुर में 8 डिग्री, बैतूल में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा-खजुराहो में 9 डिग्री, सतना में 9.1 डिग्री, टीकमगढ़-रतलाम में 9.5 डिग्री, दमोह में 9.8 डिग्री और दतिया में 9.9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई बर्फबारी से मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी देखने को मिल रही है। प्रदेश में आ रही उत्तरी हवाओं के चलते शीतलहर की स्थिति बनी है। आज शुक्रवार को पांच जिलों भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में कोल्ड वेव का अलर्ट है। इससे पहले गुरुवार को भोपाल, इंदौर, राजगढ़, सीहोर और रायसेन में शीतलहर चली। वहीं शहडोल में कोल्ड डे यानी, शीतल दिन रहा। प्रदेश में पारा 5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। अधिकांश शहरों में 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। इंदौर में 4.5 डिग्री, पचमढ़ी में 4.8 डिग्री, राजगढ़ में 5 डिग्री और शाजापुर के गिरवर में 5.2 डिग्री तापमान रहा। 204 किमी की रफ्तार से बह रही जेट स्ट्रीम मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर भी है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। इस कारण शुक्रवार को भी शीतलहर का अलर्ट है। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ाएगी। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही होना है। उत्तर से बर्फीली हवाएं आ रही देश के उत्तरी हिस्से यानी, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी हुई है। इस वजह से हवा की रफ्तार उत्तरी हो गई हैं। बर्फीली हवा की वजह से ही प्रदेश में शीतलहर की स्थिति है। दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी मौसम विभाग की माने तो इस बार सर्दी का असर तेज है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी है। ऐसी ही सर्दी दिसंबर में भी है। इंदौर में दिसंबर की सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी। 20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की मानें तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का     मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से … Read more

ED ने कफ सिरप घोटाले में की बड़ी छापेमारी, 3 राज्यों के 25 ठिकानों पर चली कार्रवाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश में कोडीन आधारित कफ सिरप (CBCS) के अवैध उत्पादन, तस्करी और सीमापार सप्लाई से जुड़े बड़े रैकेट पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को सख्त कार्रवाई की. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत उत्तर प्रदेश, झारखंड और गुजरात में कुल 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. तीन राज्यों में ईडी की छापेमारी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और सहारनपुर के अलावा रांची और अहमदाबाद में भी चल रही है. ED ने यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया है. मामला उस समय बड़ा बना जब यूपी सरकार ने राज्य में कोडीन आधारित कफ सिरप के दुरुपयोग, अवैध निर्माण और तस्करी के कई मामलों पर संज्ञान लिया था. ED अधिकारियों के अनुसार, लगभग 30 एफआईआर यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई थीं, जिनमें इस अवैध व्यापार का भंडाफोड़ हुआ था. जांच में सामने आया कि कफ सिरप को बड़े पैमाने पर गलत तरीके से तैयार किया जा रहा था और राज्य के बाहर ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश सीमा तक इसकी अवैध ढुलाई की जा रही थी. मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल देश छोड़कर फरार जांच में सामने आए मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के देश छोड़कर दुबई भागने की जानकारी भी मिली है. उसके पिता को यूपी पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था. वहीं आलोक सिंह, अमित सिंह और अन्य सहयोगियों के ठिकानों पर भी छापेमारी चल रही है. इसके साथ ही एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विष्णु अग्रवाल के परिसरों पर भी ED की कार्रवाई जारी है, जिन्हें रैकेट के वित्तीय लेनदेन में शामिल होने का आरोप है. ED अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में करीब 1,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का संदेह है, जो मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अलग-अलग खातों और संस्थाओं में घुमाया गया. यूपी पुलिस इस मामले में अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और SIT गठित कर विशेष जांच कर रही है.

जगदलपुर : केंद्रीय गृह मंत्री के प्रवास के अवधि में नो ड्रोन फ्लाइंग जोन घोषित

जगदलपुर कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी द्वारा जारी  आदेश के तहत केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, भारत सरकार   अमित शाह का  13 दिसंबर 2025 को बस्तर जिला प्रवास कार्यक्रम नियत है। बस्तर जिला प्रवास दौरान  केन्द्रीय गृह मंत्री, की सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए सम्पूर्ण जगदलपुर शहर को समय दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक के लिए नो ड्रोन फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।

एमसीबी में सघन कुष्ठ खोज अभियान, स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर कर रही हैं जांच

एमसीबी  राज्य में कुष्ठ रोग उन्मूलन के उद्देश्य से समुदाय में संक्रमण रोकथाम तथा संभावित रोगियों की प्रारंभिक पहचान को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सघन प्रयास जारी हैं। प्रारंभिक अवस्था में रोगियों की पहचान और समय पर उपचार से न केवल कुष्ठ के प्रसार पर नियंत्रण संभव है, बल्कि इससे कुष्ठ से होने वाली विकलांगता को भी रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने 05 दिसंबर 2025 को समस्त खंड चिकित्सा अधिकारियों एवं बीपीएम की बैठक लेकर 08 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक सघन कुष्ठ खोज अभियान चलाने हेतु दिशा-निर्देश जारी किए। इसके अतिरिक्त कलेक्टर डी. राहुल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित कर अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा सभी विभागों से आवश्यक सहयोग के निर्देश भी प्रदान किए गए। अभियान के अंतर्गत 08 दिसंबर से स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर कुष्ठ रोग के लक्षणों की जांच एवं संभावित रोगियों की पहचान कर रही है। जिन व्यक्तियों में कुष्ठ के धनात्मक लक्षण पाए जाएंगे, उनका तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। कलेक्टर डी. राहुल एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि वे अभियान में सहयोग करें, स्वास्थ्य टीम को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं तथा त्वचा पर किसी प्रकार के दाग, सुन्नपन या असामान्य लक्षण होने पर जांच अवश्य कराएं। यह अभियान समुदाय को स्वस्थ, सुरक्षित और कुष्ठ-मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पुनर्वास की नई मिसाल, मुख्यधारा में लौटे 30 युवाओं ने पूरा किया राजमिस्त्री प्रशिक्षण

रायपुर : जिन हाथों में कभी बंदूक थीं, वही हाथ अब बनाएँगे गरीबों का आशियाना जिन हाथों में कभी बंदूक थीं पुनर्वास की नई मिसाल, मुख्यधारा में लौटे 30 युवाओं ने पूरा किया राजमिस्त्री प्रशिक्षण रायपुर: जिन हाथों में कभी बंदूक थी, अब वही हाथ बनाएंगे गरीबों का आशियाना" रायपुर बस्तर संभाग के दुर्गम माड़ क्षेत्रों में कभी बंदूक थामे भय और हिंसा का पर्याय बने युवक अब समाज निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। शासन की सतत पहल और पुनर्वास के प्रयासों के चलते नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर भटके युवा अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं। ऐसे ही बीजापुर के 30 युवाओं ने राजमिस्त्री प्रशिक्षण  द्वारा भवन निर्माण की कला को सफलतापूर्वक सीख लिया है। यह परिवर्तन न केवल क्षेत्र में शांति का संकेत है, बल्कि आत्मनिर्भरता और उम्मीद की नयी शुरुआत भी है। अब गरीबों के लिए बनेंगे आशियाने बनाएंगे युवा        राजमिस्त्री कौशल हासिल करने के बाद ये युवा अब अपने हुनर का उपयोग जरूरतमंद और गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित आवास निर्माण में करेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों में भी ये प्रशिक्षित युवा योगदान देंगे, जिससे जिले में आवास निर्माण की गति और गुणवत्ता दोनों सुधरेंगी। नींव से लेकर फिनिशिंग तक निर्माण का युवाओं को मिला प्रशिक्षण        प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को नींव एवं दीवार निर्माण,प्लास्टरिंग,माप-जोख,निर्माण में सुरक्षा मानक,आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण कौशल सिखाए गए। सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूर्ण होने पर प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे भविष्य में सरकारी एवं निजी निर्माण कार्यों में रोजगार पा सकें। उत्साह से भरे युवा अब समाज में हो रहे शामिल         इस संबंध में आर-सेटी प्रशिक्षकों ने बताया कि इन युवाओं ने सीखने और काम करने में अद्भुत उत्साह दिखाया। यह परिवर्तन प्रेरणादायक है। जो युवा कभी समाज से दूर थे, वे अब समाज को संवारने का कार्य कर रहे हैं बस्तर में पुनर्वास मॉडल की नई कहानी         यह पहल जिले में लौट रहे युवाओं के सफल पुनर्वास का सशक्त उदाहरण है, जहाँ कौशल विकास के साथ-साथ उन्हें सम्मानजनक आजीविका का अवसर दिया जा रहा है। इन युवाओं का यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक है कि हिंसा नहीं, कौशल और विकास ही प्रगति का रास्ता है।

रायपुर : साकरीबेड़ा एनीकट निर्माण कार्य के लिए तीन करोड़ रूपए से अधिक की राशि स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा नारायणपुर जिले के विकासखण्ड-नारायणपुर के साकरीबेड़ा एनीकट निर्माण कार्य के लिए तीन करोड़ 5 लाख 41 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत जल संवर्धन, निस्तारी, पेयजल एवं किसानों के द्वारा स्वयं के साधन से 60 हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो जाएगा। योजना के निर्माण कार्य कराने जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।

मोहाली के सरकारी अस्पताल (PILBS) में पहली सफल लिवर ट्रांसप्लांट, मान सरकार ने बनाए नए मानक

चंड़ीगढ़ पंजाब के स्वास्थ्य इतिहास में एक नया सूर्योदय हुआ है! आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार के संकल्प और दूरदर्शिता का परिणाम है कि पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ़ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (PILBS), मोहाली ने सफलतापूर्वक अपनी पहली लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी करके एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। यह उपलब्धि केवल चिकित्सा के क्षेत्र में एक कदम नहीं है; यह उन हजारों ग़रीब और मध्यम-वर्गीय परिवारों के लिए आँसू पोंछने वाला एक चमत्कारी वरदान है, जो अब तक इस जीवन-रक्षक इलाज को केवल एक सपना मानते थे। यह पंजाब के सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम की शक्ति और क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह केवल "पहली लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी" नहीं है। यह है, एक पिता को मिला जीवनदान: जिसने सोचा था कि वह अपने बच्चों को खेलते हुए नहीं देख पाएगा। एक बेटे का वापस मुस्कुराना, जिसने अपनी माँ की आँखों में निराशा देखी थी।एक परिवार का दोबारा एक होना, जिसने टूटने का डर देखा था। प्राइवेट सेक्टर में जहाँ यह ऑपरेशन लाखों-करोड़ों की कीमत रखता है, वहीं मान सरकार के नेतृत्व में PILBS ने यह सुविधा राज्य के नागरिकों के लिए किफायती दरों पर उपलब्ध कराकर सच्ची लोक कल्याणकारी भावना का परिचय दिया है। इस सफलता के पीछे संस्थान के समर्पित डॉक्टरों, नर्सों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की वर्षों की अथक मेहनत, त्याग और अटूट समर्पण छिपा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर सरकारी संस्थानों को सही संसाधन, नेतृत्व और प्रोत्साहन मिले, तो वे विश्व के किसी भी श्रेष्ठतम अस्पताल से मुकाबला कर सकते हैं। लिवर फेलियर से जूझ रहे मरीज़ों के लिए यह खबर जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर है। ट्रांसप्लांट की ज़रूरत वाले परिवारों के लिए, PILBS अब केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि आशा का मंदिर है। यह सफलता पंजाब के हर उस नागरिक के लिए गर्व का विषय है, जिसने अब तक महंगी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण हार मान ली थी। यह स्पष्ट करता है कि मान सरकार का ध्यान केवल विकास पर नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन और कल्याण पर केंद्रित है। PILBS की यह उपलब्धि पंजाब में स्वास्थ्य क्रांति की एक मजबूत नींव रखती है। यह ऐतिहासिक कदम पंजाब के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांति की शुरुआत है। भगवंत मान सरकार ने साबित कर दिया है कि वे पंजाब के हर नागरिक के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में, 'आप' सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता दी है, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम हम देख रहे हैं। इस संस्थान की स्थापना का मूल उद्देश्य पंजाब को लिवर और पित्त संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए एक अग्रणी केंद्र बनाना था। पहली सफल ट्रांसप्लांट सर्जरी उस विज़न की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सफलता है। सरकार का संकल्प स्पष्ट है: स्वास्थ्य सुविधाओं में भौगोलिक और आर्थिक असमानता को खत्म करना, ताकि राज्य का कोई भी नागरिक गुणवत्तापूर्ण इलाज से वंचित न रहे। यह ऐतिहासिक सफलता न केवल पंजाब के लिए, बल्कि पूरे भारत के सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम के लिए एक प्रेरणा है। PILBS, मोहाली ने राष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी जगह बनाई है और अब यह संस्थान देश के अन्य राज्यों के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है। हालाँकि, यह सफलता एक शुरुआत मात्र है। भविष्य की चुनौतियाँ जटिल हैं, जिनमें अंगदान (Organ Donation) की दर बढ़ाना, उन्नत अनुसंधान और विशेषज्ञ डॉक्टरों का निरंतर प्रशिक्षण शामिल है। सरकार को अब इस उपलब्धि को एक स्थायी और सतत सेवा में बदलने के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखनी होगी। PILBS की यह सफलता एक उज्ज्वल और मानवीय भविष्य का संकेत है। यह उस सरकार की कहानी है जो अपने लोगों के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील है। यह जीत केवल चिकित्सा की नहीं, बल्कि मानवीय दृढ़ता और लोक-कल्याण की है। पंजाब सरकार का यह कदम साबित करता है कि "उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा अब सबका अधिकार है, सिर्फ़ विशेषाधिकार नहीं।" यह ऐतिहासिक क्षण पंजाब के हर कोने में खुशहाली और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के आने वाले युग की गहरी और भावनात्मक घोषणा है। यह सर्जरी पंजाब के उन हर कोने में बैठे लोगों की जीत है, जो हमेशा से मानते थे कि बेहतरीन इलाज सिर्फ अमीरों के लिए है। आज, हमारी अपनी सरकारी छत के नीचे, पंजाब के डॉक्टरों ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि इंसानियत और बेहतरीन इलाज अब अमीरी की मोहताज नहीं है। मान सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो दृढ़ संकल्प दिखाया है, वह काबिले तारीफ है। इस उपलब्धि के पीछे, उनका एक ही संदेश है, "पंजाब का हर नागरिक हमारा परिवार है, और हमारे परिवार का हर सदस्य स्वस्थ रहेगा। पैसे की कमी के कारण अब पंजाब में किसी की जान नहीं जाएगी।" यह एक ऐसी भावनात्मक सुरक्षा है जो पंजाब के हर नागरिक को मिल रही है। यह दिखाता है कि सरकार केवल सड़कें और पुल नहीं बना रही, बल्कि लोगों के जीवन और उनके विश्वास को पुनर्निर्मित कर रही है। यह बताता है कि बदलाव की शुरुआत हो चुकी है, और यह बदलाव अमीरी-ग़रीबी का भेद मिटाकर, हर चेहरे पर मुस्कान लाएगा!