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भोपाल में 15 दिन की कोल्ड वेव खत्म, मध्य प्रदेश में अब शीतलहर से मिलेगी थोड़ी राहत

भोपाल  मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों में मौसम आमतौर पर सूखा ही रहा। खरगौन में शीतलहर का प्रभाव था। वहीं नरसिंहपुर में शीतल दिन रहा। अधिकतम तापमान में अधिकतर जिलों में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ। इंदौर, उज्जैन, चंबल, रीवा और सागर में तापमान सामान्य से 1.5°C-2.0°C कम था। बाकी जिलों में तापमान सामान्य स्तर पर बना रहा। न्यूनतम तापमान में भी कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ। भोपाल और इंदौर में तापमान सामान्य से 3.6°C-3.9°C तक कम रहा। अन्य जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य स्तर पर रहा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में मौसम में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, रात के तापमान में गिरावट हो सकती है। ठंड का असर अगले कुछ दिनों में बढ़ सकता है।  तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ—     नौगांव (छतरपुर): 8.2°C     मंदसौर: 8.6°C     नरसिंहपुर: 8.6°C     शाजापुर: 8.8°C     राजगढ़: 9°C भोपाल में भी रातें जमाने लगी हैं और न्यूनतम तापमान 9.4°C दर्ज किया गया। बड़े शहरों में हल्की राहत, लेकिन सुबह की सर्दी तेज दिन का तापमान सामान्य बना हुआ है, लेकिन सुबह की ठंड शहरों में भी महसूस की जा रही है।     इंदौर: 11.7°C     ग्वालियर: 12.1°C     जबलपुर: 12.2°C     उज्जैन: 12.5°C अगले 5 दिनों का मौसम: बादल रहेंगे, ठंड भी जारी मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के सक्रिय होने के कारण कई हिस्सों में बादलों की मौजूदगी बनी रहेगी। इससे दिन के तापमान में मामूली बढ़ोतरी होगी, लेकिन रातें ठंडी ही रहेंगी। पूर्वानुमान —     इस सप्ताह शीतलहर की कोई संभावना नहीं     रात के तापमान में 2–3 डिग्री की और गिरावट के संकेत     विंध्य और मालवा में घना कोहरा बढ़ सकता है     दिसंबर की शुरुआत से ठंड का असली दौर सामने आने की संभावना   मप्र का तापमान: पांच शहरों का मौसम मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पांच प्रमुख बड़े शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इंदौर में 9.8 डिग्री, भोपाल में 10.2 डिग्री, उज्जैन में 11.2 डिग्री, ग्वालियर में 8.3 डिग्री और जबलपुर में रात का पारा 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दूसरी तरफ, नरसिंहपुर में दिन का तापमान 23.6 डिग्री तक आ गया। मंडला में 30.0 डिग्री, उज्जैन में 29.7 डिग्री, सीहोर में 29.6 डिग्री, नर्मदापुरम में 29.4 डिग्री और विदिशा में 29.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रविवार को प्रदेश में सबसे कम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस पचमढ़ी में रिकॉर्ड किया गया जबकि दिन का अधिकतम तापमान 30.0 डिग्री सेल्सियस मंडला में दर्ज किया गया। ग्री, नौगांव में 8.8 डिग्री, नरसिंहपुर में 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा। बाकी शहरों में पारा 10 डिग्री या इससे अधिक ही दर्ज किया गया। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि विंड पैटर्न चेंज हुआ है। इस वजह से दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। फिलहाल अगले 5 दिन तक कहीं भी शीतलहर का अलर्ट नहीं है। कई शहरों में 100 मीटर के बाद देखना भी मुश्किल कड़ाके की ठंड से राहत मिलने के बाद अब घना कोहरा भी छाने लगा है। कई जगहों पर तो 100 मीटर के बाद दूर नहीं दिखा। शनिवार को शाजापुर में घना कोहरा छाया। अकोदिया, शुजालपुर क्षेत्र में सुबह विजिबिलिटी 100 मीटर तक ही रही। इससे गाड़ियों की हेड लाइटें चालू रही। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, दतिया, इंदौर, जबलपुर में 1 हजार मीटर तक विजिबिलिटी रही। गुना, ग्वालियर, सतना, रीवा, खजुराहो में 500 से 1 हजार मीटर विजिबिलिटी दर्ज की गई। मौसम विभाग की एडवाइजरी-फ्लू, सर्दी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाएं     ट्रैफिक- कोहरा होने पर गाड़ी चलाते समय या किसी ट्रांसपोर्ट के जरिए ट्रैवल करते समय सावधान रखें। ड्राइविंग धीरे करें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।     हेल्थ- तेज ठंड होने पर शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ-पैर की उंगलियों को अच्छे से ढंके। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाए। विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।     कृषि- जहां मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, वहां गेहूं, चना, सरसों-मटर की बुआई करें। जहां बुआई हो चुकी है, वहां जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें। पिछली फसलों के अवशेष यानी, ठूंठ को कभी न जलाएं। एमपी में ठंड से अब तक दो की मौत कड़ाके की ठंड की वजह से पिछले दो दिन में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। रीवा के अमहिया थाना क्षेत्र स्थित अस्पताल चौराहा पर सड़क किनारे एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली थी। इससे पहले रायसेन में भी एक शख्स की मौत हो चुकी है। परिजनों का दावा है कि ठंड की वजह से ही मौत हुई, लेकिन प्रशासन ने ठंड से मौत होने की पुष्टि नहीं की है।

मेरठ में हवा ‘बेहद खराब’, सुबह-सुबह AQI 349 से बढ़ी सांसों की तकलीफ़

मेरठ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से रविवार को जारी देश के 248 शहरों की सूची में वायु प्रदूषण में मेरठ सातवें स्थान पर रहा। एनसीआर में वायु प्रदूषण के मामले में पांचवें नंबर पर सूचीबद्ध किया गया है। खतरनाक स्तर पर प्रदूषित हवा में सांस लेने में लोगों को दिक्कतें हो रही हैं।   सोमवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स 349 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। सुबह की हल्की धूप भी प्रदूषण कम नहीं कर पा रही। पल्लवपुरम शहर का सबसे ज्यादा प्रदूषित एरिया रहा, जहां AQI 366 मापा गया। शहर में पिछले एक महीने से वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है। न सुबह की हवा साफ है, न रात की। प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में भारीपन और आंखों में जलन की समस्याएं बढ़ रही हैं। महीने भर से मेरठ समेत आसपास के जिलों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खराब श्रेणी में चल रहा है। वायु प्रदूषण को देखते हुए जो ग्रेप सिस्टम के दावे किए गए थे, वह फेल साबित होते दिखाई दे रहे हैं।     धीमी हवा और बारिश न होने से बढ़ रहा प्रदूषण पिछले 10 दिन से हवा की रफ्तार बेहद धीमी है, जिसके कारण प्रदूषण और भी ज्यादा बढ़ गया है। बारिश न होने से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक नीचे नहीं बैठ रहे। मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, जब तक हवा तेज और साफ दिशा में नहीं चलेगी, तब तक प्रदूषण में कोई सुधार नहीं होगा। अगले दो-तीन दिनों में तापमान में 1–2 डिग्री की गिरावट की संभावना है, लेकिन इससे प्रदूषण के स्तर पर खास असर नहीं पड़ेगा।   मेरठ और आसपास में अभी तक कहीं पर भी वायु प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। जगह-जगह कूड़े जलाए जा रहे हैं और ग्रेप सिस्टम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खराब हवा से लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। सुबह बाहर टहलने वालों को दिक्कत हो रही है। मेरठ यह रहा प्रदूषण का हाल गंगानगर        324 जय भीम नगर    356 पल्लवपुरम      366 अन्य शहरों में यह रहा प्रदूषण का हाल बागपत        345 बुलंदशहर      368 दिल्ली        395 गाजियाबाद     429 ग्रेटर नोएडा    396 हापुड़        433 मेरठ        349 नोएडा        414 मुजफ्फरनगर   388 वायु प्रदूषण रोकने के उपाय -वाहन का उपयोग कम करें पैदल चलें और साइकिल चलाएं या सार्वजनिक परिवहन जैसे बस या मेट्रो का उपयोग करें। -अगर आपको गाड़ी चलानी ही है तो कारपूलिंग करें और अपनी गाड़ी का सही रखरखाव करें। -स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करें। जीवाश्म ईंधन से बनने वाली बिजली की जगह सौर या पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करें। घरों और उद्योगों में सोलर पैनल लगवाएं। -अधिक पौधे लगाएं। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ऑक्सीजन छोड़ते हैं, इससे हवा साफ होती है। पौधरोपण में भाग लें या अपने आसपास पेड़ लगाएं। मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच बढ़ी ठंड मौसम में उतार- चढ़ाव के बीच ठंड में बढोतरी हो रही है। रविवार को दिन में मौसम सर्द रहा और धूप ने राहत दी। चौधरी चरण सिंह विवि की मौसम वेधशाला में दिन का अधिकतम तापमान 26.2 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि तीन -चार दिन तक मौसम में उतार- चढ़ाव बना रहेगा। फिलहाल अभी प्रदूषण के स्तर में सुधार के आसार नहीं है। प्रदूषण का लेवल अभी लाल श्रेणी में ही रहेगा।  

प्रदेश भर से आए फरियादी, हर पीड़ित से स्वयं मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर ‘जनता दर्शन’ किया। ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश भर से 52 से अधिक फरियादी पहुंचे। सीएम योगी हर फरियादी के पास स्वयं पहुंचे, उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण के निर्देश दिए। सीएम ने सभी जिलाधिकारियों और एसएसपी को निर्देशित किया कि वह पीड़ितों की शिकायतें सुनकर जनपद में ही उनका निस्तारण कराएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों के साथ आए बच्चों को दुलारा, उन्हें चॉकलेट दी और कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो।  *पीड़ितों की शिकायतें सुनकर निर्धारित समयावधि में कराएं समाधान * मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान आर्थिक सहायता, अवैध कब्जे, बिजली, शिक्षा, पुलिस आदि से जुड़ी शिकायतों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों सहित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि वह जनपद स्तर पर सभी फरियादियों की शिकायतें सुनकर उनका निराकरण कराएं। जिलाधिकारी देखें कि जनपदों में सभी विभागों के द्वारा पीड़ितों की शिकायतें सुनकर निर्धारित समयावधि में समाधान कराया जाए।  आमजन की सेवा-सुरक्षा ही सरकार का संकल्प  ‘जनता दर्शन’ में गोरखपुर, शामली, झांसी, कन्नौज आदि जनपदों से पीड़ित पहुंचे थे। सभी ने अपनी समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। जिस पर सीएम योगी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की सेवा और सुरक्षा ही सरकार का संकल्प है। सरकार हर जरूरतमंद की सहायता के लिए खड़ी है। सरकार के स्तर पर प्रदेशवासियों की हर उचित परेशानी का निरंतर निदान कराया जा रहा है और आगे भी कराया जाता रहेगा।  बच्चों को दी चॉकलेट, पढ़ाई के बारे में भी पूछा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों के साथ आए बच्चों से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सभी से नाम पूछा, चॉकलेट दी और मन लगाकर पढ़ने करने को कहा। सीएम ने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद भी दिया।

हेलीकॉप्टर सेवा प्रभावित, पचमढ़ी में नहीं मिल रही जमीन; हेलीपैड 40 किमी दूर होगा

पचमढ़ी  पीएमश्री हेली सेवा इको सेंसटिव जोन (eco-sensitive zone) को पेंच फंसने के बाद सैलानियों का हेलीकॉप्टर उतारने के लिए हेलीपैड बनाने नर्मदापुरम जिला प्रशासन को भूमि नहीं नहीं मिल रही है। इस कारण हेलीकॉप्टर सेवा फिलहाल प्रभावित है। पचमढ़ी के लिए पिपरिया के ग्राम सिमरा में समतल भूमि देखी है लेकिन पचमढ़ी से इसकी दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। इसपर भी अंतिम निर्णय होना बाकी है।  पिपरिया तहसीलदार वैभव बैरागी ने बताया कि ग्राम सिमारा की समतल भूमि पर हेलीपैड बनाया जा सकता है। सोमवार को इसका निरीक्षण कर रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजेंगे। इसके बाद तकनीकी परीक्षण होने के बाद निर्माण कार्य को लेकर कार्रवाई होगी। ग्राम सिमारा से पचमढ़ी जाने के लिए सैलानियों को लगभग 40 किलोमीटर सड़क मार्ग से जाना पड़ेगा। लगभग सवा घंटे की इस यात्रा में सैलानियों को मटकुली से पचमढ़ी के बीच के 26 किलो मीटर के घाटी सेक्शन को भी पार करना होगा। सिमरा में हेलीपैड बनाने का अंतिम निर्माण होना बाकी है। इस कारण हेलीपैड बनने तक पचमढ़ी हेलीकॉप्टर सेवा प्रभावित रहेगी। ग्राम रैनीपानी में भूमि का निरीक्षण सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मई आने वाले पर्यटकों का हेलीकॉप्टर कहां उतरेगा। इसको लेकर भी असामंजस बना हुआ है। मढ़ई के करीब ग्राम रैनीपानी में हेलीपैड के लिए जगह देखी गई है। जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने भूमि का निरीक्षण किया गया है। इस पर भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस बीच कोई सैलानी हेलीकॉप्टर से मढ़ई आएगा तो उसका हेलीकॉप्टर को सोहागपुर में बने हेलीपैड पर उतारा जाएगा।  एजेंसी को काम शुरू करने को कहा है हेलीपैड बनाने के लिए कहीं भी जगह फाइनल नहीं हुई है। पचमढ़ी के लिए सिमारा में समतल भूमि देखी है। सोहागपुर के लिए भी रैनीपानी में भूमि का निरीक्षण किया है। अंतिम निर्माण होने के बाद ही कुछ बता सकते हैं। – हिमांशु जैन, सीईओ, जिला पंचायत, नर्मदापुरम

मप्र निर्वाचन आयोग ने बदले नगरपालिका चुनाव नियम, उम्मीदवारों के लिए नई पारदर्शिता जरूरी

भोपाल  लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह अब नगरीय निकायों के चुनाव में पर्चा भरने वाले प्रत्याशियों को भी नामांकन के साथ शपथ-पत्र देना होगा। उन्हें शपथ-पत्र में खुद पर दर्ज आपराधिक प्रकरण और उनकी स्थिति की जानकारी देनी होगी। इसके साथ चुनावी खर्च का ब्यौरा भी राज्य निर्वाचन आयोग को देना होगा। उनके खर्च की अधिकतम सीमा नगरीय विकास विभाग आयोग से परामर्श करने के बाद तय करेगा। प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकायों के चुनाव 2027 में होंगे। इस बीच कोई उपचुनाव हुआ तो उसमें भी नए नियम लागू होंगे। रद्द किया जाएगा नामांकन मप्र राज्य निर्वाचन आयोग ने मप्र नगरपालिका निर्वाचन नियम में बदलाव के संबंध में ये नियम बनाए हैं। इनकी अधिसूचना भी जारी की है। इसमें कहा, महापौर, पार्षद, नगर पालिका परिषद, नगर परिषद के अध्यक्ष-पार्षद पद का उम्मीदवार नामांकन के साथ शपथ-पत्र देगा। इसमें आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्तियों, दायित्यों, शैक्षणिक योग्यताओं की जानकारी देनी होगी। ऐसा न होने नामांकन रद्द किया जाएगा। शपथ पत्र में देनी होगी ये जानकारियां -राज्य निर्वाचन आयोग के तय शपथपत्र के प्रारूप में महापौर, नपा अध्यक्ष, पार्षद पद के उम्मीदवार को बताना होगा कि दो साल या अधिक सजा वाले कितने आपराधिक केस दर्ज हैं। थाना, एफआइआर व जिले का ब्योरा भी देना होगा। -स्वयं, पत्नी या पति और तीन बच्चों की आमदनी, टैक्स, लोन आदि की जानकारी देनी होगी। आय के साधन बताने होंगे। संयुक्त स्वामित्व वाली चल और अचल संपत्ति, शेयर और कंपनियों में किए निवेश, कर्ज की जानकारी देनी होगी।

चार दिन के महोत्सव में ओरछा में फोर व्हीलर प्रवेश बंद, चार जगह बनाई गई पार्किंग

ओरछा मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के ओरछा में श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव की धूम है। ऐसे में यहां श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में आने का सिलसिला जारी है। ऐसे में प्रशासन ने अव्यवस्थाओं से बचने के लिए ट्रैफिक प्लान जारी किया है। प्रशासन ने तीन दिन के महोत्सव को लेकर 24 से 26 नवंबर तक ओरछा में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस दौरान ओरछा में ट्रक, बस, डंपर सहित अन्य बड़े वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही ओरछा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने चारों दिशाओं में वाहन पार्किंग की व्यवस्था की है। नगर में किसी भी वाहन का प्रवेश नहीं होने दिया जाएगा। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी ओरछा में 24 से 26 नवंबर तक आयोजित होने वाले श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर पूरा प्लान तैयार किया है। साथ ही, कलेक्टर जमुना भिड़े ने आदेश जारी कर ओरछा से निकलने वाले भारी वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी। ऐसे में झांसी से पृथ्वीपुर, टीकमगढ़ की ओर ओरछा से आने वाले सभी वाहनों को अब निवाड़ी होकर आना होगा। वहीं, टीकमगढ़, पृथ्वीपुर की ओर से झांसी की ओर जाने वाले वाहन भी इसी मार्ग से होकर जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए ऐसी रहेगी पार्किंग व्यवस्था प्रशासन ने जाम की स्थिति से बचने के लिए वाहनों के आने की दिशा के अनुसार अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए हैं। ऐसे में श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालु इस प्लान के अनुसार ही ओरछ में प्रवेश करने के पूर्व अपने वाहनों को पार्क कर असुविधा से बच सकते है। पार्किंग व्यवस्था अपनी दिशा देखें -झांसी, निवाड़ी और तिगेला की ओर से आने वाले बस और ट्रैक्टरों को आजाद पार्क में पार्क किया जाएगा। -कार और जीप राजमंदिर होटल और थाना पार्किंग में रखे जाएंगे। -ललितपुर और बबीना की ओर से आने वाले बस और ट्रैक्टर गुदरई दरवाजा और हेलीपैड में पार्क होंगे। -कार और जीप लक्ष्मी मंदिर पार्किंग में रखे जाएंगे। -टीकमगढ़ और पृथ्वीपुर की ओर से आने वाले सभी वाहन सेंचुरी पार्किंग में रखने की व्यवस्था बनाई गई है। -दो पहिया वाहन गणेश दरवाजा या केशव भवन के पास पार्क करने की सुविधा मिलेगी।

MP के मंदसौर जिले में बदलाव, टीआई की पोस्टिंग पर लगी नई सीमा: 6 महीने

मंदसौर  मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में थानों में होने वाली गड़बड़ियों, पैसों के लेन-देन और आपराधिक सांठ-गांठ के मामलों ने पुलिस की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इसी स्थिति को सुधारने के लिए एसपी विनोद मीना अब थानेदारों पर कड़ा एक्शन मोड अपनाने जा रहे हैं। एसपी ने रोस्टर सिस्टम तैयार किया है, जिसके तहत कोई भी थाना प्रभारी (टीआई) 3 से 6 महीने से ज्यादा एक ही थाना नहीं संभाल पाएगा। पहला जिला बनेगा मंदसौर! अगर यह सिस्टम लागू होता है, तो मंदसौर प्रदेश का पहला जिला होगा जहां थाना प्रभारियों की पोस्टिंग फिक्स समय सीमा पर बदला करेगी। इस सिस्टम के बाद— कमज़ोर प्रदर्शन करने वाले टीआई को 3 महीने में बदल दिया जाएगा अच्छा काम करने वाले टीआई को लंबे समय तक उसी थाने पर रखा जाएगा थानों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी राजनीतिक दबाव और हस्तक्षेप में कमी आएगी चल रहे अभियानों के नतीजे और बेहतर मिल सकेंगे एसपी विनोद मीना ने कहा— “रोस्टर सिस्टम एक अच्छा मॉडल है। फायदे-नुकसान को देखकर इसे सही तरीके से लागू किया जाएगा।” अवैध तस्करी और पुलिस-कर्मियों की सांठ-गांठ ने बढ़ाई चिंता मंदसौर जिला लंबे समय से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के लिए बदनाम रहा है। हाल ही में तस्करों और पुलिसकर्मियों के बीच लेन-देन के बड़े खुलासे हुए, जिसके बाद कई पर कार्रवाई की गई— तत्कालीन टीआई धर्मेंद्र शिवहरे — निलंबित उपनिरीक्षक अविनाश सोनी — निलंबित प्रधान आरक्षक दिलीप बघेल — निलंबित दलौदा टीआई मनोज गर्ग — लाइन अटैच भानपुरा टीआई आरसी डांगी — आरोप सिद्ध, कार्रवाई बाकी इन मामलों ने पुलिस विभाग को मजबूर किया कि व्यवस्था में सुधार के लिए कुछ बड़ा और सख्त कदम उठाया जाए। रोस्टर सिस्टम क्यों ज़रूरी? थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी राजनीतिक प्रभाव सीमित होगा टीआई और चौकी प्रभारियों का प्रदर्शन बेहतर होगा  जनता को मिलेगा भरोसेमंद पुलिस सिस्टम

युवक-युवती सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने किया पुस्तकों का विमोचन, गोंड समाज को आर्थिक सहायता भी दी

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के टिकरापारा स्थित गोंडवाना भवन में आयोजित गोंड युवक-युवती परिचय सम्मेलन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री का पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया और उन्होंने भगवान बूढ़ादेव का पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गोंड समाज को सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 05 लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम में आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम द्वारा लिखित दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। आदिवासी ऐतिहासिक निरंतरता से वर्तमान चुनौतियों तक विरासत का सम्मान : वैश्विक दृष्टिकोण पर सवाल मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोंड समाज का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजातीय समाज के हितों के प्रति संवेदनशील हैं और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार जनजातीय नायकों के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है और नागरिकों से नया रायपुर स्थित जनजातीय संग्रहालय का भ्रमण करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवक-युवती परिचय सम्मेलन समाज के लोगों को एक-दूसरे को समझने और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस अवसर पर विकास मरकाम ने गोंड समाज के गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और नवाचारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डबल-इंजन की सरकार में जनजातीय समुदाय के हितों, विकास और उत्थान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गोंड समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री जग्गू सिंह, उपाध्यक्ष श्री किशोर ध्रुव, श्री सेवाराम ध्रुव, श्री हरि सिंह ठाकुर सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। 

12.43 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति जब्त, उत्पाद अधीक्षक ने कहा– मुझे साजिश के तहत फंसाया गया

पटना/ औरंगाबाद औरंगाबाद के उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आजाद को बेहतर काम के लिए विभाग से तीन-तीन मेडल दिया गया था। किसी से सोचा नहीं होगा कि उन्होंने अपने पास इतनी संपत्ति रखी होगी। स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने जब उत्पाद अधीक्षक के पटना, जहानाबाद, औरंगाबाद समेत चार ठिकानों पर छापेमारी की तो सब लोग दंग रह गए। कैश इतना मिला कि टीम को नोट गिनने के लिए मशीन मंगानी पड़ी। सभी ठिकानों पर मिली संपत्तियों को जोड़ा गया तो 12.43 की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ। दो माह बाद होना था रिटायर उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आजाद की 20 माह पहले औरंगाबाद में इसी पद पर हुई थी और दो माह बाद ही उन्हे रिटायर होना था। इसके पहले ही एसवीयू ने एक साथ उनके चार ठिकानों पर छापेमारी कर दी। अनिल कुमार आजाद ने फोन पर बताया कि यह सब स्प्रिट माफियाओं की साजिश है। उनलोगों ने साजिश कर निगरानी में शिकायत की है। उनके ऊपर जो भी आरोप लगाया जा रहा है, वह सरासर गलत और बेबुनियाद है। उन्होने खुद निगरानी की टीम को छापेमारी में सहयोग किया है।                बेहतर काम के लिए मिलें हैं तीन-तीन मेडल अनिल कुमार आजाद ने कहा कि उत्पाद विभाग में बेहतर काम की बदौलत तीन-तीन मेडल मिले है। बदले की भावना से छापेमारी की गई है। कल उनके भतीजे की शादी थी और आज ही बारात से लौट कर पटना पहुंचा हूं। इसके बाद छापेमारी टीम पहुंची। जांच में मैं सहयोग कर रहा हूं।' इन स्थानों पर एसवीयू की टीम ने की छापेमारी       औरंगाबाद में उत्पाद अधीक्षक का कार्यालय, मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग, बड़वा मोड़ से पश्चिम, हनुमान बिगहा के पास               औरंगाबाद शहर के सत्येंद्रनगर मुहल्ले में अनिल कुमार आजाद के किराए के आवास, डॉ. केके. सिंह अस्पताल के पास       जहानाबाद में अनिल कुमार आजाद के घर, एक निजी स्कूल (शिव मंदिर) के पास, सुमेरा, थाना-टेहटा            पटना के शिवपुरी में अनिल कुमार आजाद का आवासीय भवन, श्रीराम निकुंज, 3 मानस मार्ग, पश्चिमी शिवपुरी -23                जानिए क्या आरोप लगे हैं औरंगाबाद के उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आजाद पर आरोप है कि उन्होंने विभिन्न सरकारी पदों पर रहते हुए पद का दुरुपयोग कर एक करोड़ 58 लाख, 45 हजार 888 रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है। इसी आरोप के आलोक में पुख्ता जानकारी जुटाने के बाद विशेष निगरानी इकाई ने अनिल कुमार आजाद के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जन के साथ अन्य कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद कोर्ट से इनके परिसरों की तालाशी का वारंट प्राप्त किया। कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद रविवार को विशेष निगरानी इकाई की अलग-अलग टीमों ने अनिल कुमार आजाद के औरंगाबाद, जहानाबाद और पटना में उनके आफिस और आवास में एक साथ छापेमारी की। छापेमारी में यह सब मिला सूत्रों की यदि माने तो छापेमारी में अनिल कुमार आजाद के ठिकानों से जमीन में निवेश के कुछ दस्तावेज, कुछ बैंक पासबुक के साथ अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही रुपयों की गिनती के लिए नोट गिनने की मशीन भी मंगाई गई है। फिलहाल औरंगाबाद, जहानाबाद और पटना में एसवीयू की कार्रवाई जारी है। सूत्र जानकारी दे रहे है कि अनिल कुमार आजाद के ठिकानों से और भी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल होने की उम्मीद हैं। विस्तृत समाचार की प्रतीक्षा है।  

छठा साल लगातार बिना बढ़ोतरी के बिजली दरें, यूपी का ऊर्जा मॉडल बना पूरे देश के लिए उदाहरण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने लगातार छठे वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी न करके देश के सामने एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। यह दिखाता है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी योजना और वित्तीय अनुशासन मिलकर जनता को वास्तविक लाभ पहुंचा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में हुए सुधारों का परिणाम है कि यूपी आज देश का पहला ऐसा राज्य है जहां छह वर्षों से बिजली दरें समान हैं। अन्य राज्यों में बिजली महंगी, यूपी ने दी राहत जब कई राज्यों में बढ़ती लागत की वजह से बिजली दरें बढ़ रही हैं, उसी समय यूपी ने गरीबों, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और मध्यम वर्ग को राहत दी है। सरकार का साफ उद्देश्य है कि जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और घरेलू बजट स्थिर रहे। राजस्व अधिशेष और मजबूत वित्तीय प्रबंधन का असर इस निर्णय के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुव्यवस्थित योजना काम कर रही है। बिजली वितरण कंपनियों ने पिछले वर्षों में ₹15,000 करोड़ से ज्यादा का राजस्व अधिशेष हासिल किया है। यह अचानक नहीं हुआ, बल्कि आर्थिक अनुशासन, बिजली चोरी पर नियंत्रण, तकनीक आधारित बिलिंग, लाइन लॉस में कमी, समय पर मेंटेनेंस तथा ढांचागत सुधारों का परिणाम है। ऊर्जा उत्पादन और ट्रांसमिशन में बड़े सुधार नई विद्युत उत्पादन परियोजनाएं, ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़ता निवेश भी लागत नियंत्रण में बेहद उपयोगी साबित हुआ है। बढ़ते शहरीकरण, उद्योग विस्तार और माइग्रेशन के बावजूद सब्सिडी को प्रभावी बनाकर सरकार ने व्यवस्था को संतुलित रखा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मजबूत बिजली व्यवस्था ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ओवरलोडिंग कम करने, केबलिंग को भूमिगत करने, पुराने तार और ट्रांसफॉर्मर बदलने जैसे कार्यों ने बिजली आपूर्ति प्रणाली को मज़बूत किया है। ऊर्जा बचत अभियानों और स्मार्ट मीटरों के बड़े पैमाने पर उपयोग से बिलिंग और खपत पारदर्शी हुई, जिससे राजस्व बढ़ा और लीकेज कम हुआ। स्थिर बिजली दरों का उद्योग और निवेश पर सकारात्मक असर स्थिर बिजली दरें उपभोक्ताओं को राहत देती हैं और उद्योगों की उत्पादन लागत भी नियंत्रित करती हैं। इससे निवेश माहौल बेहतर होता है। निवेशक ऐसे राज्यों को प्राथमिकता देते हैं जहाँ ऊर्जा कीमतें स्थिर हों, आपूर्ति सुरक्षित हो और नीति पारदर्शी हों। यूपी ने इन तीनों क्षेत्रों में भरोसे का माहौल बनाया है, जिससे यह उभरते औद्योगिक राज्यों में शामिल हो गया है। गरीबों, किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ा लाभ योगी सरकार का स्थिर बिजली मॉडल दिखाता है कि जनहित और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूत किया जा सकता है। गरीब परिवारों की जेब सुरक्षित है, किसानों पर सिंचाई का अतिरिक्त बोझ नहीं आता, मजदूरों और कामगारों पर अतिरिक्त खर्च नहीं बढ़ता और छोटे व्यापारियों का बजट संतुलित रहता है। उद्योगों को भी प्रतिस्पर्धी माहौल मिलता है। सौर ऊर्जा में यूपी की तेज प्रगति उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। खासकर रूफटॉप सोलर और ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। शहरों और गांवों में लग रहे सोलर पैनल न सिर्फ बिजली पैदा कर रहे हैं बल्कि पर्यावरण सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बिजली आवश्यकता और उद्योग विस्तार के साथ सोलर ऊर्जा एक महत्वपूर्ण समाधान बनकर उभरी है। रूफटॉप सोलर योजनाओं में यूपी का राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा स्थान प्रदेश में कुल 13,46,040 आवेदन मिले थे, जो दर्शाते हैं कि लोग बदलाव के लिए उत्सुक थे। सिर्फ 18 महीने में 2,81,769 रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए गए और पिछले 4.5 महीनों में 1,30,000 संयंत्रों की स्थापना ने यूपी को महाराष्ट्र और गुजरात के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य बना दिया है। रोजगार सृजन में भी सौर ऊर्जा का बड़ा योगदान सौर ऊर्जा ने न केवल ऊर्जा बढ़ाई बल्कि रोजगार भी दिया। अकेले यूपी में 54,000 से अधिक युवाओं को सीधा रोजगार मिला है। देशभर में सोलर मॉड्यूल निर्माण, इन्वर्टर, वायरिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के क्षेत्र में लाखों नए रोजगार बने हैं। UP बिजली टैरिफ 2025–26: प्रमुख तथ्य यूपी में लगातार छठे साल बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ग्रीन एनर्जी टैरिफ में राहत देते हुए HV उपभोक्ताओं के लिए दर ₹0.36 से घटाकर ₹0.34 प्रति यूनिट और LV उपभोक्ताओं के लिए ₹0.17 प्रति यूनिट तय की गई है। डिस्ट्रीब्यूशन लॉस में मध्यांचल और पश्चिमांचल ने लक्ष्य हासिल किया, जबकि पूर्वांचल का प्रदर्शन कमजोर रहा। ऊर्जा नियामक आयोग के वित्तीय अनुमोदन FY 2023–24 के लिए 85,082.83 करोड़ रुपये का ARR और 1,246.55 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी सरप्लस मंजूर हुआ। FY 2025–26 के लिए 1,10,993.33 करोड़ रुपये का ARR और 13.35% डिस्ट्रीब्यूशन लॉस मंजूर किए गए हैं। राज्य सरकार 17,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी। रेगुलेटरी गैप और सरप्लस के आंकड़े इस वर्ष 7,710.04 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी गैप दर्ज हुआ, जबकि 1 अप्रैल 2025 तक यूपीपीसीएल के पास 18,592.38 करोड़ रुपये का रेगुलेटरी सरप्लस उपलब्ध रहेगा। औसत सप्लाई कॉस्ट ₹8.18 और औसत बिलिंग रेट ₹7.61 प्रति यूनिट तय की गई है। PAN अपडेट, TDS सर्टिफिकेट, क्रॉस-सब्सिडी समायोजन और TOD टैरिफ पूर्ववत रखने के निर्देश दिए गए हैं। मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग व टाउनशिप से जुड़े मुद्दों पर अलग कंसल्टेशन पेपर जारी होगा।