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मंत्री विश्वास सारंग ने किया 8.5 करोड़ से अधिक की लागत से पीएम ई-बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन

भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को नरेला विधानसभा क्षेत्र के कस्तूरबा नगर में प्रधानमंत्री ई-बस योजना के अंतर्गत प्रस्तावित नवीन इलेक्ट्रिक बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन किया एवं इलेक्ट्रिक बस का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ई-बस योजना के माध्यम से शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुविधाजनक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। कस्तूरबा नगर में निर्मित होने वाले इस नवीन ई-बस डिपो की क्षमता 50 इलेक्ट्रिक बसों की होगी। डिपो के निर्माण में 7 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सिविल कार्य तथा 1.60 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इलेक्ट्रिकल कार्य किए जाएंगे। डिपो के तैयार होने के बाद क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, रख-रखाव एवं प्रबंधन को बेहतर आधारभूत संरचना प्राप्त होगी। भूमिजन के दौरान भोपाल महापौर मती मालती राय, जिला महामंत्री  प्रदीप शेखावत, एमआईसी सदस्य  अशोक वाणी, मंडल अध्यक्ष  भूपेंद्र सिंह चौहान, पार्षद  सूर्यकांत गुप्ता, स्थानीय पार्षद  राकेश यादव, पार्षद  विमलेश ठाकुर, नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी, भाजपा कार्यकर्ता सहित क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था होगी सुगम मंत्री  सारंग ने कहा कि नवीन इलेक्ट्रिक बस डिपो एवं इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने तथा स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी। आगे उन्होंने कहा कि कस्तूरबा नगर में प्रस्तावित ई-बस डिपो नरेला विधानसभा क्षेत्र सहित भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में विकसित किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि डिपो में 50 इलेक्ट्रिक बसों की क्षमता के साथ आवश्यक सिविल एवं इलेक्ट्रिकल सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे भविष्य में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और प्रबंधन को बेहतर एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया जा सकेगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी इलेक्ट्रिक बसें पीएम ई-बस योजना के अंतर्गत संचालित होने वाली इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम परिवहन को ध्यान में रखते हुए अनेक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यात्रियों को डिजिटल टिकटिंग के लिए क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल टिकट एवं बस पास बनवाने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इससे यात्रियों को टिकट एवं पास प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं लगाना पड़ेगा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। वहीं यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बस में 5 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की त्वरित सहायता के लिए बसों में इमरजेंसी पैनिक बटन एवं स्टॉप बटन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। दिव्यांग एवं वरिष्ठ यात्रियों की सुविधा का भी रखा गया ध्यान इलेक्ट्रिक बसों में दिव्यांग यात्रियों के लिए ऑटोमेटिक हाइड्रोलिक व्हीलचेयर लिफ्टिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए बस में चढ़ना और उतरना अधिक सुगम एवं सुरक्षित होगा। इसके अतिरिक्त यात्रियों को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए बसों में पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम तथा पब्लिक इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से यात्रियों को बस से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण घोषणाएं आसानी से प्राप्त हो सकेंगी।  

प्रदेश के सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण

भोपाल  लोक निर्माण विभाग के कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार कार्य योजना के अंतर्गत 20 सितम्बर को सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने नर्मदापुरम, जबलपुर, दतिया, आलीराजपुर, मऊगंज, आगर-मालवा और टीकमगढ़ जिलों में रैंडम आधार पर चयनित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण किए गए कार्यों में लोक निर्माण विभाग सड़क एवं पुल के 21, परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू-भवन) के चार, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के पांच, मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के तीन तथा राष्ट्रीय राजमार्ग के दो कार्य शामिल हैं। निरीक्षण दलों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की। बैठक में प्रमुख अभियंता सड़क एवं पुल  आर.एल. वर्मा, प्रमुख अभियंता एमपीआरडीसी  के.पी.एस. राणा सहित समस्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी उपस्थित रहे। जबलपुर में ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश जबलपुर जिले में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अंतर्गत परफॉर्मेंस गारंटी अवधि वाले जबलपुर–हिरण नदी मार्ग खंड की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। प्रबंध संचालक  यादव ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार मेसर्स बागड़ इन्फ्रॉ प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश मुख्य अभियंता एमपीआरडीसी को दिए। आलीराजपुर जिले में लोक निर्माण विभाग सड़क एवं पुल के अंतर्गत निर्माणाधीन रिंगोले-मालमसुरी से खंडीवाव-भंडारी फलिया मार्ग की प्रगति और गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। संबंधित कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी, उप यंत्री तथा ठेकेदार मेसर्स डेडा राम को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों की सराहना दतिया जिले में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अंतर्गत पोरसा–मेहगांव–मौ–सेवढ़ा मार्ग पर सिंध नदी में निर्मित उच्चस्तरीय पुल (एसएच-01) का कार्य गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक पाया गया। प्रबंध संचालक  यादव ने संभागीय प्रबंधक  राजेश दायमा, सहायक संभागीय प्रबंधक  पारस रत्नाकर, प्रबंधक सु दिव्यांशी जैन तथा निर्माण एजेंसी मेसर्स मंगलम बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के कार्य की सराहना की। टीकमगढ़ जिले में लोक निर्माण विभाग भवन के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लारखुर्द के भवन निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। इसके लिए कार्यपालन यंत्री  के.एस. परस्ते, अनुविभागीय अधिकारी  आर.के. पाठक, उपयंत्री  आर.के. अरजरिया तथा ठेकेदार मेसर्स यादव ट्रेडर्स की प्रशंसा की गई। निरीक्षण के दौरान 13 निर्माण कार्यों में आंशिक सुधार की आवश्यकता पाई गई। संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को चिन्हित कमियों को दूर कर आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। 30 अक्टूबर तक पूर्ण हों सड़क मरम्मत के सभी कार्य प्रबंध संचालक  यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि औचक निरीक्षण प्रतिवेदनों में की गई अनुशंसाओं का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य अभियंता कॉन्फ्रेंस में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह द्वारा दिए गए निर्देशों को भी प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाए। मुख्य अभियंता निरीक्षण के लिए निर्धारित कार्यों के साथ मार्ग में आने वाली अन्य सड़कों की स्थिति की भी नियमित जानकारी लें। प्रबंध संचालक  यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सड़क मरम्मत के सभी कार्य 30 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाएं। संधारण कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरम्मत कार्यों के साथ सड़क सुरक्षा, जंगल सफाई, रोड मार्किंग, संकेतक बोर्डों की मरम्मत एवं पेंटिंग तथा सड़क और पुल-पुलियों के आवश्यक संधारण कार्य भी निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं। उन्होंने संधारण कार्यों में लोक निर्माण विभाग द्वारा पूर्व में जारी परिपत्रों का पालन करने तथा सड़कों से अवैध पार्किंग और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखने के निर्देश भी दिए। सीएम हेल्पलाइन और लोकपथ ऐप पर हुई शिकायतों का समय पर हो समाधान समीक्षा में सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का संतोषजनक निराकरण करते हुए शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए गए। मुख्य अभियंताओं एवं अधीक्षण यंत्रियों को इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा गया, जिससे आगामी माह की विभागीय ग्रेडिंग में सुधार हो। लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों का निर्धारित चार दिवस की समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के साथ ही नागरिकों के बीच ऐप के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए गए।  

स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता के 854 पदों पर होगी भर्ती

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता के 854 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री  विष्णु देव साय द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 5 हजार शिक्षकीय पदों पर भर्ती की घोषणा के क्रम में विभाग द्वारा व्याख्याता पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा जारी जानकारी के अनुसार व्याख्याता के कुल 854 पदों में ई-संवर्ग की शालाओं में 424 पद तथा टी-संवर्ग की शालाओं में 430 पद भरे जाएंगे।विषयवार रिक्त पदों में हिन्दी के 120, अंग्रेजी के 120, संस्कृत के 120, भौतिकी के 94, राजनीति शास्त्र के 100, इतिहास के 100, भूगोल के 100 तथा अर्थशास्त्र के 100 पद शामिल हैं। भर्ती के लिए आवश्यक शैक्षणिक अर्हता, आयु सीमा एवं अन्य शर्तों की विस्तृत जानकारी भर्ती विज्ञापन में दी जाएगी। भर्ती परीक्षा का पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा। विस्तृत विज्ञापन व्यापम की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। व्याख्याता पदों के लिए लिखित भर्ती परीक्षा का आयोजन छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSB) द्वारा किया जाएगा। भर्ती परीक्षा की संभावित तिथि 29 नवम्बर 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भरने की तिथि एवं अन्य आवश्यक जानकारी CGSSB द्वारा पृथक से जारी की जाएगी।

लंबित पेंशन प्रकरणों का 30 सितंबर तक करें निराकरण

रायपुर स्कूल शिक्षा विभाग ने लंबित पेंशन प्रकरणों के त्वरित निराकरण के साथ ही सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका और पासबुक समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय द्वारा प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए पत्र जारी किया गया है। विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि विभिन्न स्तरों पर पेंशन प्रकरण लंबित रहने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। इसे देखते हुए सभी लंबित पेंशन प्रकरणों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा कर 30 सितंबर 2026 तक उनका निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका तथा पासबुक को पहले से पूर्ण करने कहा गया है। सेवा पुस्तिका में वेतन निर्धारण की जांच एवं सत्यापन कोष एवं लेखा से करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि सेवानिवृत्ति के समय पेंशन एवं अन्य स्वत्वों के भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो। विभाग ने प्रत्येक सत्र में 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक विकासखंड स्तर पर विशेष कैम्प आयोजित कर सेवा पुस्तिका एवं पासबुक पूर्ण करवाने के निर्देश दिए हैं। वहीं न्यायालयीन कारणों से लंबे समय से लंबित पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए कोर्ट सेल बिलासपुर की सहायता लेकर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया है। इसके अलावा अक्टूबर 2026 से सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पीपीओ उसी माह जारी कराने तथा अन्य देय स्वत्वों का भुगतान भी सेवानिवृत्ति वाले माह में ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की इस पहल का उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन और अन्य देयकों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना तथा सभी प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है।

ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी सिम नेटवर्क पर मध्यप्रदेश पुलिस की प्रभावी कार्रवाई

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त होने वाले फर्जी सिम कार्ड की सप्लाई चेन पर प्रभावी कार्रवाई के लिए ऑपरेशन FAST 2.0 (Forged–Activated–SIM–Termination) चलाया जा रहा है। ऑपरेशन के तहत तकनीकी विश्लेषण एवं साइबर अपराधों से जुड़े डेटा के आधार पर संदिग्ध सिम और उनके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंच बनाई जा रही है। माह में अब तक ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी दस्तावेजों, आधार कार्ड, फोटो एवं बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर सिम कार्ड जारी/एक्टिवेट कराने वाले व्यक्तियों, POS एजेंटों एवं ऐसे सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। ग्वालियर ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत ग्वालियर पुलिस ने फर्जी सिम जारी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए 09 प्रकरण दर्ज किए हैं। जांच में सामने आया कि आधार, फोटो एवं फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर फर्जी सिम जारी किए गए, जिनका उपयोग विभिन्न राज्यों में साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में किया गया। संबंधित मामलों में करीब ₹12.20 करोड़ के साइबर फ्रॉड से संबंध सामने आया है। इंदौर इंदौर पुलिस ने फर्जी सिम के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए 151 संदिग्ध सिम की पहचान की, जिनका उपयोग 212 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में पाया गया। जांच में जींस-पैंट की थोक बिक्री/फ्रेंचाइजी का झांसा देकर ठगी तथा पैसों के लालच में सिम आगे उपलब्ध कराने की कड़ी सामने आई। मामले में 01 आरोपी गिरफ्तार किया गया। राज्य साइबर सेल इंदौर राज्य साइबर सेल, जोन इंदौर ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड पर स्वयं के फोटो का उपयोग कर 101 सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिवेट किए थे। जांच में सामने आया कि आरोपी POS एजेंट के रूप में सिम एक्टिवेशन का कार्य करता था और ग्राहकों के KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लाइव फोटो के स्थान पर स्वयं तथा अन्य व्यक्तियों के फोटो अपलोड कर सिम जारी करता था। आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी एवं आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। छतरपुर छतरपुर के थाना गढ़ीमलहरा पुलिस ने ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी सिम एक्टिवेट कर साइबर अपराधों में उपयोग हेतु उपलब्ध कराने वाले आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों द्वारा फर्जी तरीके से सिम एक्टिवेट कर अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराने का खुलासा हुआ। सतना सतना पुलिस ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत अवैध SIM पोर्टिंग एवं साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में 20 से अधिक अवैध सिम की सप्लाई का खुलासा हुआ। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद जेल भेजा गया। टीकमगढ़ टीकमगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड एवं साइबर अपराधों के लिए सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत की गई। कटनी कटनी पुलिस ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी तरीके से सिम जारी कर साइबर अपराधों में उपयोग कराने वाले POS एजेंट के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 01 आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी द्वारा दो व्यक्तियों के नाम पर फर्जी तरीके से सिम जारी कर उन्हें अन्य व्यक्तियों को बेचने का खुलासा हुआ। आरोपी के कब्जे से 98 मोबाइल सिम, बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन एवं 03 मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री जब्त की गई। मामले में एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। वहीं थाना कुठला पुलिस ने भी आधार कार्ड एवं फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर फर्जी सिम जारी कर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। झाबुआ झाबुआ पुलिस ने फर्जी दस्तावेज एवं बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर सिम एक्टिवेट करने वाले 03 POS संचालकों/एजेंटों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए हैं। कार्रवाई में 01 आरोपी गिरफ्तार किया गया तथा मोबाइल, Airtel LAPU SIM एवं फर्जी दस्तावेज जब्त किए गए। KYC एवं बायोमेट्रिक के दुरुपयोग पर पुलिस की सख्त नजर ऑपरेशन FAST 2.0 के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है, जो आम नागरिकों के पहचान दस्तावेजों एवं बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर फर्जी सिम तैयार कराते हैं और उन्हें साइबर अपराधों के लिए उपलब्ध कराते हैं। तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से फर्जी सिम के उपयोग एवं उनसे जुड़े साइबर अपराधों की कड़ियों की जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि सिम जारी कराते समय e-KYC एवं बायोमेट्रिक प्रक्रिया में सावधानी बरतें, OTP/वेरिफिकेशन की पुष्टि स्वयं करें, अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की समय-समय पर जांच करें तथा अपनी पहचान संबंधी जानकारी अथवा दस्तावेज अनधिकृत व्यक्ति को न दें। अपनी पहचान पर किसी अन्य व्यक्ति को सिम जारी न कराएं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ऑपरेशन FAST 2.0 के अंतर्गत फर्जी सिम की पहचान, उनके स्रोत तक पहुंच और साइबर अपराधों में इनके उपयोग से जुड़े नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है।  

औद्योगिक निवेश की दिशा में हब के रूप स्थापित हो रहा छत्तीसगढ़

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्रों में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवागंन के मार्गदर्शन में लागू हुई। 01 नवंबर 2024 से 31 मार्च 2030 तक प्रभावी यह नीति उद्योगों को आकर्षक प्रोत्साहन देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार, एमएसएमई विकास, नवाचार और क्षेत्रीय औद्योगिक संतुलन पर विशेष जोर देती है। उक्त नीति ‘अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विजन-2047‘ पर केन्द्रित है जिसके तहत मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण, आधुनिकीकरण और प्रतिस्थापन के लिए खास तौर पर प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नए एवं उभरते हुए क्षेत्रों में फोकस किया गया है। निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन नवीन औद्योगिक विकास नीति के तहत पात्र उद्योगों को कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी, ब्याज अनुदान,Net SGST प्रतिपूर्ति, बिजली शुल्क में छूट, स्टाम्प ड्यूटी में छूट, तकनीकी एवं पेटेंट सहायता तथा रोजगार आधारित प्रोत्साहन जैसे अनेक लाभ दिए जा रहे हैं। पात्रता के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक की छूट, कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी 50 प्रतिशत तक तथा EPF प्रतिपूर्ति 75 प्रतिशत तक का प्रावधान है। नए क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन नीति का दायरा पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों तक सीमित नहीं है। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल एवं इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, एआई एवं रोबोटिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस एवं स्पेस टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे उभरते क्षेत्रों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। एमएसएमई व स्थानीय उद्यमिता के साथ रोजगार और कौशल विकास पर जोर नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को विशेष सहायता का प्रावधान है। विकासखंडों को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत कर पिछड़े एवं अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया गया है।SC/ST  उद्यमियों के लिए भी विशेष प्रोत्साहन पैकेज उपलब्ध है। इसके अलावा नई औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा युवाओं के कौशल विकास को प्रोत्साहित करना नीति का प्रमुख ध्येय है। रोजगार सृजन से जुड़े उद्योगों के लिए विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है। नए व उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान छत्तीसगढ़ की नवीन औद्योगिक विकास नीति में पारंपरिक खनिज एवं कृषि आधारित उद्योगों के साथ-साथ कई नए क्षेत्रों को बढ़ावा दिया गया है। जैसे- फार्मास्युटिकल्स एवं मेडिकल डिवाइस, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी और डेटा सेंटर, एआई एवं रोबोटिक्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस एवं स्पेस टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल एवं इंजीनियरिंग, पर्यटन, स्टील, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स इत्यादि के प्रोत्साहन की व्यापक संभावनाओं का प्रावधान इसमें किया गया है।    सब्सिडी के जरिए आर्थिक प्रोत्साहन नवीन औद्योगिक विकास नीति के अंतर्गत विभिन्न पात्र उद्योगों को कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी, ब्याज अनुदान, तकनीकी पेटेंट सब्सिडी, टेक्नोलॉजी खरीद सब्सिडी, रोजगार सहायता, ईपीएफ प्रतिपूर्ति और स्टाम्प ड्यूटी में छूट जैसी सुविधाएं दी गई हैं। प्रमुख सुविधाओं में 100 प्रतिशत तक स्टाम्प ड्यूटी छूट, 50 प्रतिशत तक कैपिटल इन्वेस्टमेंट, ब्याज, टेक्नोलॉजी खरीद, टेक्निकल पेटेंट सब्सिडी और 75 प्रतिशत तक ईपीएफ प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है। * ताराशंकर सिन्हा

महिला नव आरक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु दो दिवसीय शिविर आयोजित

भोपाल  विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) के निर्देशों के अनुपालन में तथा उपनिदेशक, मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भोपाल  रामजी वास्तव के मार्गदर्शन में पुलिस प्रशिक्षण शाला भोपाल में प्रशिक्षणरत महिला नव आरक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु 19 एवं 20 सितंबर 2026 को दो दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन LBS Hospital, भोपाल के सहयोग से प्रशिक्षण शाला परिसर में किया गया। पुलिस अधीक्षक मती यास्मीन जहरा की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में LBS Hospital भोपाल के नोडल अधिकारी  हरविंदर सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वैशाली पाठक तथा जनरल फिजिशियन डॉ. हारून सिद्दीकी द्वारा प्रशिक्षुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं के ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर एवं ब्लड प्रोफाइल सहित आवश्यक स्वास्थ्य जांच की गई। शिविर के प्रथम दिवस ऐसे प्रशिक्षणार्थियों को प्राथमिकता से स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिन्हित किया गया, जो लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण प्रशिक्षण सुचारू रूप से प्राप्त नहीं कर पा रहे थे। प्रथम दिवस उपलब्ध 104 प्रशिक्षणार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा डॉ. वैशाली पाठक द्वारा आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। शिविर के द्वितीय दिवस 170 प्रशिक्षुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस प्रकार दो दिवस में कुल 274 महिला नव आरक्षकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। चिकित्सकों द्वारा परीक्षण के साथ-साथ आवश्यक उपचार, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों तथा स्वयं के उत्तम स्वास्थ्य को बनाए रखने के संबंध में आवश्यक परामर्श भी दिया गया। मध्यप्रदेश पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षणरत पुलिसकर्मियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को प्रशिक्षण की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रशिक्षु स्वस्थ एवं बेहतर शारीरिक क्षमता के साथ अपने प्रशिक्षण को प्रभावी ढंग से पूर्ण कर सकें।  

सेवा संकल्प अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक और रंगोली से विद्यार्थियों ने दिया जागरूकता एवं राष्ट्र निर्माण का संदेश

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पेंड्रा में मल्टीपर्पस स्कूल के सामने विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक एवं रंगोली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डाइट के बालक-बालिकाओं ने प्रभावी अभिनय, संवाद और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से सेवा भाव, सामाजिक जिम्मेदारी, स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश आमजन तक पहुंचाए। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को सहज एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से स्वच्छ गांव और स्वस्थ समाज की अवधारणा को सामने रखते हुए नागरिकों से स्वच्छता अपनाने, पानी और बिजली की बचत करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। प्रस्तुति में युवाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और मेहनत एवं लगन के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए युवाओं से समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि युवा केवल अपने भविष्य के निर्माण तक सीमित न रहकर सामाजिक बदलाव और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एकता, भाईचारे और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश नुक्कड़ नाटक के दौरान एकता, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया गया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज में सकारात्मक बदलाव केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता से संभव है। सेवा भाव और सामाजिक सरोकारों को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए आमजन को प्रेरित किया गया। रंगोली के रंगों से दिया जागरूकता का संदेश कार्यक्रम में रंगोली भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। विद्यार्थियों ने रंगों और कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। रंगोली के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश सहज और प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाया कि छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने बढ़ाया आयोजन का प्रभाव पूरे आयोजन में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। नुक्कड़ नाटक और रंगोली के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करने के साथ सामाजिक विषयों के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी प्रदर्शित की। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जागरूक युवा न केवल अपने भविष्य का निर्माण करते हैं, बल्कि समाज के विकास और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से नागरिकों को सेवा भाव, स्वच्छता, सामाजिक एकजुटता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों ने सामाजिक जागरूकता के संदेशों को आमजन तक सहज तरीके से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष  राजा उपेंद्र बहादुर सिंह,  राकेश चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी  रजनीश तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं नगरवासी उपस्थित रहे।  

बांधवगढ़ में बढ़ रहा गौर का कुनबा, कान्हा में वन भैंसा पुनर्स्थापना से मजबूत होगा पारिस्थितिकी तंत्र

भोपाल  कहानी बदलाव की मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ एवं कान्हा टाइगर रिजर्व में बड़े शाकाहारी वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। बांधवगढ़ में गौर (इंडियन बायसन) की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं कान्हा टाइगर रिजर्व में वन भैंसा (वाइल्ड बफेलो) को पुनः बसाने की प्रक्रिया जारी है। गौर और वन भैंसा देखने में कुछ समान प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग प्रजातियों से संबंधित हैं और इनके आवास तथा खान-पान में भी अंतर है। बांधवगढ़ में पुनः स्थापित किया गया गौर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय के अनुसार गौर, जिसे भारतीय बायसन भी कहा जाता है, एशिया का सबसे बड़ा जंगली गौवंश है। बांधवगढ़ में गौर वर्ष 1998 में विलुप्त हो गया था। इसके बाद वर्ष 2011-12 में कान्हा से 50 गौर लाकर बांधवगढ़ में पुनः स्थापित किए गए। इनकी संख्या बढ़कर लगभग 170 तक पहुंची। आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से सतपुड़ा से भी गौर लाने की योजना बनाई गई। फरवरी 2025 में 23 गौर, जिनमें 18 मादा और 5 नर शामिल थे, बांधवगढ़ लाए गए। इसके बाद जनवरी 2026 में दूसरे चरण में 27 गौर, जिनमें 22 मादा और 5 नर शामिल थे, लाए गए। इस प्रकार 50 नए गौर लाने का लक्ष्य पूरा किया गया। इन वन्यजीवों की निगरानी के लिए वीएचएफ कॉलर, हॉर्न स्लीव और ईयर टैग लगाए गए हैं। वर्तमान में बांधवगढ़ लैंडस्केप में गौर की संख्या लगभग 220 से 240 के बीच बताई गई है। कान्हा में वन भैंसा पुनर्स्थापना की दिशा में प्रयास कान्हा टाइगर रिजर्व में वन भैंसा यानी वाइल्ड बफेलो को पुनः बसाने का कार्य किया जा रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व के उप संचालक  पी.के. वर्मा के अनुसार तीन वर्ष में 50 वन भैंसे लाने की योजना है। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को वन भैंसों की पहली खेप लाई गई। अब तक दो खेप में चार-चार की संख्या में कुल 8 वन भैंसे कान्हा पहुंच चुके हैं। वन भैंसों को प्रारंभिक अवधि में बाड़े में रखा जाएगा। इनकी संख्या बढ़ने के बाद आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे इन्हें प्राकृतिक रहवास क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। कुछ वन भैंसों को बाहर और कुछ को निर्धारित क्षेत्र में रखा जाएगा, ताकि इनकी संख्या और आबादी को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया जा सके। गौर और वन भैंसा में अंतर गौर गौवंश से संबंधित है, जबकि वन भैंसा भैंस वंश से संबंधित है। गौर की पहचान उसके विशाल शरीर, कंधे पर उभरे कूबड़, पीले-सफेद निचले पैरों और घुमावदार सींगों से की जा सकती है। वहीं वन भैंसा अपेक्षाकृत छोटा होता है और उसके कंधे पर गौर की तरह स्पष्ट कूबड़ नहीं होता। वन भैंसा सामान्यतः गीले घास के मैदानों, दलदली क्षेत्रों और जल स्रोतों के आसपास पाया जाता है। गौर घास के साथ-साथ जंगल में उपलब्ध अन्य वनस्पतियों को भी खाता है, जबकि वन भैंसा कठोर और ऊंची घास को भी खा सकता है। जल एवं नमी वाले क्षेत्रों में उगने वाली ऊंची घास को नियंत्रित करने में वन भैंसे की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के प्राकृतिक इंजीनियर गौर और वन भैंसा जैसे बड़े शाकाहारी वन्यजीव जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके द्वारा घास और वनस्पतियों के सेवन से अत्यधिक ऊंची घास नियंत्रित होती है तथा नए कोमल पत्ते और घास विकसित होने का अवसर मिलता है। इससे चीतल, सांभर सहित अन्य शाकाहारी वन्यजीवों को भोजन उपलब्ध होता है। इस प्रकार बड़े शाकाहारी वन्यजीव वन क्षेत्र में वनस्पति संरचना को संतुलित रखने और अन्य वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने में योगदान देते हैं। यही कारण है कि गौर और वन भैंसे जैसे वन्यजीवों को जंगल के प्राकृतिक इंजीनियर भी कहा जाता है। इनके संरक्षण और पुनर्स्थापना से मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों में जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।  

सेवा संकल्प अभियान के तहत अरपा उद्गम स्थल पर नदी घाट स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आज जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा में अरपा उद्गम स्थल के समीप नदी घाट स्वच्छता अभियान एवं नगरीय जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण एवं जल संवर्धन के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना तथा नागरिकों को जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करना रहा। अरपा नदी छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है और इसका उद्गम क्षेत्र गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय पहचान से जुड़ा हुआ है। अरपा उद्गम स्थल के समीप आयोजित स्वच्छता अभियान के माध्यम से जल स्रोतों की स्वच्छता को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने सहभागिता करते हुए नदी घाट और आसपास के क्षेत्र की स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम में मरवाही विधानसभा क्षेत्र के विधायक  प्रणव कुमार मरपची, जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैंकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  राजा उपेन्द्र बहादुर, नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के उपाध्यक्ष  शरद गुप्ता,  लालजी यादव,  राकेश चतुर्वेदी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। स्वच्छ जल स्रोत स्वस्थ समाज का आधार कार्यक्रम के दौरान जल स्रोतों को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने कहा कि नदी, तालाब और अन्य जल स्रोत केवल पानी के स्रोत नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण, जैव विविधता और मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए शासन के प्रयासों के साथ-साथ आमजन की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। नदी घाट की स्वच्छता के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों में कचरा न डालें और उनके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। स्थानीय स्तर पर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ने से जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी। जल संरक्षण के साथ जल संवर्धन पर भी जोर कार्यक्रम में जल संरक्षण के साथ जल संवर्धन की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। वर्षा जल के संरक्षण, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर नागरिकों को जागरूक किया गया। उपस्थित लोगों को दैनिक जीवन में पानी की बचत करने तथा उपलब्ध जल संसाधनों का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अरपा उद्गम स्थल के समीप आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी भावना को मजबूत करता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। अरपा के संरक्षण से जुड़ा जनभागीदारी का संदेश अरपा नदी क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। इसके उद्गम क्षेत्र की स्वच्छता और संरक्षण का महत्व और भी बढ़ जाता है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की सहभागिता से स्थानीय नागरिकों को जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आगे आने का संदेश मिला। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को स्वच्छता को अपनी दैनिक आदतों में शामिल करने, नदी एवं अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा जल संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजन ने सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।