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खादी महोत्सव का शुभारम्भ: उद्यमिता, रोजगार और स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा देने का बड़ा मंच

खादी महोत्सव के जरिये पारंपरिक और हस्तशिल्प को प्रोस्ताहित करने का प्रयास   स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ने से प्रदेश के स्थानीय उद्योगों को मिलेगा मजबूत आधार लखनऊ,  उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने स्थानीय उद्यमिता को सुदृढ़ करने और परंपरागत कला तथा खादी आधारित उद्योगों को नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए 21 से 30 नवंबर तक लखनऊ स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय गोमती नगर में 10 दिवसीय खादी महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को महोत्सव का उद्घाटन प्रदेश के सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम तथा खादी ग्रामोद्योग रेशम उद्योग और हथकरघा विभाग के मंत्री राकेश सचान ने किया। यह महोत्सव प्रदेश में रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ साथ स्वदेशी उत्पादों को एक बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में खादी ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना पीएम एफएमई योजना और राज्य की सूक्ष्म उद्योग नीतियों के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार मिला है। खादी महोत्सव इन्हीं प्रयासों का विस्तृत प्रदर्शन है, जो उद्यमियों को बाजार विस्तार, तकनीकी विकास और व्यापार के नए अवसर प्रदान करेगा। यह आयोजन न केवल कारीगरों और बुनकरों का मनोबल बढ़ाता है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का भी संचार करता है। स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ने से प्रदेश के स्थानीय उद्योगों को मजबूत आधार मिलेगा और उद्यमियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। खादी महोत्सव 2025 इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्थानीय उद्योग, परंपरागत कला और ग्रामीण रोजगार को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और इसे प्रदेश की आर्थिक प्रगति का आधार बना रही है।  इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 160 से अधिक उद्यमी और इकाइयां अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगी। प्रदर्शनी में सहारनपुर का नक्काशीदार फर्नीचर, भदोही की कालीन, अमरोहा के गमछे और सदरी, सीतापुर की दरी और तौलिये वाराणसी की रेशमी साड़ियां, प्रतापगढ़ के आंवला उत्पाद, लखनऊ की रॉयल हनी मिट्टी कला, बीकानेरी पापड़, लेदर वस्त्र और कई स्वदेशी उत्पाद शामिल होंगे। यह विविधता प्रदेश की समृद्ध कला और कारीगरी की पहचान को उजागर करेगी। रोजगार और स्वरोजगार को नई दिशा महोत्सव के दौरान चयनित उद्यमियों और लाभार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही राज्य स्तरीय उत्कृष्ट इकाइयों को पुरस्कार दिए जाएंगे। सरकार द्वारा पांच पांच चयनित लाभार्थियों को दोना मेकिंग मशीन पॉपकॉर्न मशीन और हनी बॉक्स दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त चार लाभार्थियों को विद्युत चालित चाक और एक लाभार्थी को पग मिल मशीन प्रदान की जाएगी। इन मशीनों और उपकरणों से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और नए स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह पहल स्थानीय युवाओं को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेगी जिससे क्षेत्रीय रोजगार में वृद्धि होगी।

बांकेबिहारी मंदिर में बदलाव: नई व्यवस्था के साथ भक्तों को मिलेगा सुगम दर्शन

 मथुरा वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशी की खबर है। अब जल्द ही वे अपने घर बैठकर भी श्री बांकेबिहारी जी के दर्शन कर सकेंगे। वहीं मंदिर के आसपास खड़े भक्तों के लिए भी बड़ी स्क्रीन के माध्यम से ठाकुरजी के लाइव दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही मंदिर में आने वाले भक्तों को मोहनभोग का प्रसाद भी वितरित किया जाएगा। हाईपावर्ड प्रबंध कमेटी ने इन व्यवस्थाओं को लागू करने की अनुमति दे दी है। कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया बृहस्पतिवार को आयोजित कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने लाइव स्ट्रीमिंग की मंजूरी देते हुए निर्देश दिए कि मंदिर के पास स्थित तिराहों और चौराहों पर बड़ी स्क्रीन लगाई जाएंगी, ताकि अधिक संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं को ठगौरजी के दर्शन हो सकें। इसके लिए सुयोग्य मीडिया के पदाधिकारियों ने स्क्रीन पर लाइव प्रस्तुति का प्रदर्शन भी किया। सेवायतों से विचार-विमर्श किया जाएगा कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि मोहनभोग प्रसाद की व्यवस्था को लेकर अभी मंदिर के अन्य सेवायतों से विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि हलवाई किस प्रकार प्रसाद तैयार करेंगे, खर्च का निर्धारण कैसे होगा और वितरण की प्रक्रिया क्या होगी। इसके संबंध में अंतिम निर्णय आगामी बैठक में लिया जाएगा।

खुदाई में मिली राम प्रतिमा से हड़कंप, सागर में पुलिस ने संभाला मोर्चा

सागर जिले की बंडा तहसील के पापेड़ गांव में मस्जिद की बाउंड्री वॉल की खुदाई के दौरान भगवान राम की प्रतिमा निकली है। मूर्ति निकलने के बाद वहां पर हिंदू संगठनों के लोग पहुंचे कुछ देर बाद मुस्लिम समाज के लोग भी वहां पहुंच गए। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हिंदू संगठन ने की मंदिर बनाने की मांग हिंदू संगठनों ने भगवान राम का अभिषेक किया चबूतरा बनाकर उनकी स्थापना की है हिंदू संगठन की मांग है कि यहां पर मंदिर बनाया जाए उनका कहना है कि यहां पर पूर्व में पहले मंदिर था जिसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। फिलहाल मौके पर तनाव के स्थिति बनी हुई है पुलिस और प्रशासन की भी मौजूद है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (आईसीसीजेडब्ल्यू) के उद्घाटन समारोह में दिया बड़ा संदेश

अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए अराजकता का वातावरण पैदा करने वालों के खिलाफ संवाद महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए संवाद को बाधित किया जाता रहा हैः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बोले: बस्ते के बोझ से बच्चे डिप्रेस्ड न हों, इसके बारे में भी हमें करना होगा विचार लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वसुधैव कुटुम्बकम् यानी 'होल वर्ल्ड इज वन फैमिली, हैज बीन बेसिक फिलॉसफी ऑफ इंडिया फॉर थाउजैंड्स ऑफ ईयर्स' की भावना से विश्व को अवगत कराते हुए इसे भारत की हजारों वर्षों की परंपरा करार दिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय शरण देने और आगे बढ़ाने में भारत ने हमेशा योगदान दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को सिटी मॉन्टेसरी स्कूल द्वारा आयोजित 26वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (आईसीसीजेडब्ल्यू) के उद्घाटन समारोह में अपनी बातें रखीं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें यूएन की उस घोषणा को भी स्मरण करना होगा, जिसमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के बारे में दुनिया के देशों से आह्वान किया गया था। सस्टेनेबल गोल्स शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल संसाधन, रोजगार-कौशल विकास, पर्यावरण और वन संपदा की रक्षा के विषयों पर आधारित हैं। इन 16 गोल्स में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। कभी न भूलें क्या है वास्तविक समस्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें ये कभी विस्मृत नहीं करना चाहिए कि विश्व की वास्तविक समस्या क्या है। उन्होंने कहा कि जब हम इसकी तह में जाते हैं तो लगता है कि डायलॉग एक-दूसरे के बीच में नहीं है। स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए डायलॉग को बाधित किया गया। ये कॉन्फ्रेंस अपने आप में डायलॉग का एक माध्यम है। दुनिया के न्यायाधीशों के माध्यम से यह मानवता और उन लोगों के लिए भी एक उद्घोषणा है कि जिन्होंने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए अराजकता का वातावरण पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जब हम दुनिया के अंदर शिक्षा की बात करते हैं तो 250 करोड़ से अधिक बच्चों के लिए क्वॉलिटी एजुकेशन पर फोकस करते हैं। हमें विचार करना होगा कि बस्ते के बोझ से बच्चे डिप्रेस्ड न हों। यह महत्वपूर्ण भाव है, क्योंकि शिक्षा किसी भी व्यवस्था का, फिर चाहे व्यक्ति हो, समाज हो या राष्ट्र हो, डायलॉग की स्थापना, मैन टू मैन, सोसाइटी टू सोसाइटी या फिर कंट्री टू कंट्री, यह स्थापित तभी हो सकती है जब हम उसके बेसिक भाव पर विचार करें। यह बेसिक भाव एजुकेशन के माध्यम से हम प्रत्येक छात्र-छात्राओं के मन में पैदा कर सकते हैं, लेकिन आज भी यह चुनौती बनी हुई है। समस्याओं के समाधान के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने कहा दुनिया में जहां अशांति व अराजकता है, वर्चस्व को लेकर एक-दूसरे की संप्रभुता को हड़पने की होड़ हो, वहां पर एजुकेशन, हेल्थ तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात बेमानी सी दिखती है। उन स्थितियों में हम सभी को इस बारे में विचार करना चाहिए कि कैसे इन समस्याओं के समाधान के लिए हर एक स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर एक संस्था अपने स्तर पर पिछले 25 वर्षों से इस प्रयास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, तो क्यों नहीं अन्य स्तर पर यह प्रयास आगे बढ़ाया जा सकता है?  सीएम योगी ने प्रदेश की राजधानी में अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज जब हम दुनियाभर से जुड़े न्यायविदों के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उपस्थित हुए हैं, ऐसे में सीएमएस लखनऊ के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी की स्मृतियों को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने विश्व की एकता, अखंडता व न्याय के लिए इंटरनेशनल कॉन्फ्रेस ऑफ चीफ जस्टिसेस के कार्यक्रम का लंबे समय से आयोजन किया तथा इसके माध्यम से एक-दूसरे को समझने व नया संदेश देने का काम किया था। बड़ी लकीर खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका का करना होगा निर्वहन सीएम योगी ने कहा कि एक ओर हमारे सामने दुनिया के अंदर की प्रतिस्पर्धा चुनौती के रूप में है, तो वहीं हमारे सामने जलवायु परिवर्तन और उससे उत्पन्न होने वाला संकट भी नई चुनौती के रूप में हैं। उन्होंने कहा कि हमारे सामने इमर्जिंग टेक्नोलॉजी जीवन को सहज और सरल करने में जहां उपयोगी भूमिका का निर्वहन कर रही है, वहीं इसके द्वारा उत्पन्न अभूतपूर्व कानूनी चुनौतियां भी हम सभी के सामने खड़ी हुई हैं, जिसमें साइबर क्राइम, डेटा चोरी और अन्य समस्याएं प्रमुख हैं। ऐसे अस्थिर समय में न्याय, नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून विश्व शांति और मानव सभ्यता के लिए बड़ी लकीर खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। यूएन के द्वारा 80 वर्ष पहले जिन बातों की घोषणा की गई थी, हम सभी को उस पर फिर से विचार करना चाहिए, उन्होंने उस समय कहा था कि दुनिया को अब एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और जवाबदेही वैश्विक प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा की सार्थकता आज भी उसी रूप में बनी हुई है। भारत की सोच निकाल सकती है वैश्विक चुनौतियों का रास्ता मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हम केवल उन पुरानी बातों तक सीमित न रहें, बल्कि आज की उन ज्वलंत समस्याओं के बारे में भी हमें विचार करते हुए जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य के संकट, वैश्विक आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी मुखर होकर यूएन जैसे प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग करना चाहिए। एक ऐसे व्यावहारिक और उद्देश्यपरक गठबंधन को जो और भी प्रभावी हो सके, इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस बारे में हमें भारत की उस प्राचीन व्यवस्था पर विचार जरूर करना चाहिए, जहां पर हमने इस पूरी व्यवस्था को पांच अव्यवों पर आधारित माना, जिसमें पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, इन सभी की उपासना को इसका आधार मानकर भारत की परंपरा ने सदैव इसे अपने जीवन का अंग माना। न केवल इनकी पवित्रता, बल्कि सुरक्षा और संरक्षण को सदैव प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि दुनिया के लिए वर्तमान में जलवायु परिवर्तन की चुनौती हो या फिर इसके माध्यम से उत्पन्न उन वैश्विक संकट के समाधान का रास्ता, भारत की सोच के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाल सकती है। आंख बंद करने से नहीं मिलेगा हल, मिलकर निकालना होगा समाधान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दुनिया ने इस युग की … Read more

पंजाब रोडवेज बस को महिलाओं ने रोका, यात्रियों सहित पुलिस स्टेशन पहुंची बस—जानिए पूरा विवाद

जलालाबाद  जलालाबाद बस स्टैंड पर आज उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब कुछ महिलाओं ने फाजिल्का से चंडीगढ़ जा रही पंजाब रोडवेज की बस को घेर लिया। महिलाओं का आरोप है कि बस ड्राइवर और कंडक्टर ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे हाईवे पर ट्रैफिक जाम हो गया। जानकारी के मुताबिक, जब बस जलालाबाद पहुंची तो कुछ महिलाएं बस में चढ़ रही थीं। कंडक्टर ने उन्हें आगे बढ़ने को कहा, इसी दौरान दोनों पक्षों में बहस हो गई। महिलाओं का आरोप है कि कंडक्टर ने उनके साथ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया। इस मौके पर जब बस ड्राइवर ने कहा, “कौन बदतमीजी कर रहा है?” जिसके बाद मामले ने दूसरा मोड़ ले लिया और महिलाओं ने बस को घेर लिया। कंडक्टर ने क्या कहा कंडक्टर का कहना है कि बस की कैपेसिटी 50 थी लेकिन उसमें 100 से ज़्यादा यात्री थे। भीड़ और टिकट कटने की वजह से महिलाओं से उसकी बहस हुई थी, लेकिन उसने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने से इनकार किया। जब झगड़ा बढ़ा तो पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ट्रैफिक जाम खुलवाया और बस को यात्रियों समेत थाने ले जाया गया, जहां दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अगला फैसला लिया जाएगा। रोडवेज यूनियन का बयान पंजाब रोडवेज यूनियन के प्रेसिडेंट प्रितपाल सिंह गिल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने सरकार पर नई बसें न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “50 की कैपेसिटी वाली बस में 100 से ज़्यादा लोग सवार होते हैं। बसें कम हैं, यात्री ज्यादा हैं और सारा इल्जाम ड्राइवर-कंडक्टर पर आता है।” 

करोड़ों का धान घोटाला! यमुनानगर में मिलर परिवार की संपत्ति जब्ती की तैयारी तेज

यमुनानगर  यमुनानगर जगाधरी के पौंटी स्थित किसान राइस मिल में धान-चावल की करोड़ों रुपए की हेराफेरी मामले में कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। हैफेड की जांच में 4.57 करोड़ रुपए मूल्य का सरकारी चावल गायब मिलने के बाद मिलर के खिलाफ बड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने मिलर जावेद खान की करीब आठ करोड़ रुपए कीमत की 32 कनाल प्रॉपर्टी तो पहले ही अटैच कर ली है, अब इसके अलावा हैफेड मिलर के परिवार व ब्लड रिलेशन वालों के रिकॉर्ड को भी खंगाल कर उनकी प्रॉपर्टी की जांच कर रही है। हैफेड के अनुसार वर्ष 2024-25 में किसान राइस मिल को68.823 क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था। 9,994.665 क्विंटल चावल जिसकी कीमत 4.57 करोड़ रुपए है न तो जमा कराया गया और न ही उसकी राशि जमा की गई। नोटिस देने के बावजूद मिलर राशि जमा नहीं करा सका, जिसके बाद उसकी संपत्ति अटैच कर दी गई। जिला हैफेड अधिकारी उधम सिंह ने बताया कि मिलर जावेद खान के नाम दर्ज संपत्ति को अटैच कर दिया गया है। अब उनके परिवार के सदस्यों और ब्लड रिलेशन वालों की प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं हेराफेरी का धन अन्य संपत्तियों में तो नहीं लगाया गया। 

फिर से जोड़े जाएंगे नए लाभुक: मंईयां योजना कैंप में इन जरूरी कागज़ों के साथ पहुँचे

पलामू आज से झारखंड में 'आपकी सरकार-आपके द्वार' कार्यक्रम की शुरुआत हो रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू से ‘आपकी सरकार-आपके द्वार’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इस दौरान आम जनता की समस्याओं को सुना और निपटाया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ‘आपकी सरकार-आपके द्वार’ कार्यक्रम में ही नए लाभुकों को मंईयां योजना से जोड़ने वाले हैं। आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पलामू के लेस्लीगंज में इस अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। लाभुक अपने जरूरी दस्तावेज के साथ आपकी सरकार, आपकी योजना, आपके द्वार कार्यक्रम के कैंप में पहुंचेंगे और वहीं दस्तावेजों की जांच के बाद आवेदन स्वीकृत कर दिया जाएगा। कैंप लगाकर पात्र महिलाओं से लिया जाएगा आवेदन मंईयां सम्मान योजना में आवेदन के लिए आवेदकों को आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी, बैंक पासबुक, स्व-सत्यापन फॉर्म, दो पासपोर्ट साइज फोटो देनी होगी। 18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को ही योजना का लाभ मिलेगा। सभी जिलों में कैंप लगाकर पात्र महिलाओं से आवेदन लिया जाएगा। कैंप में ही दस्तावेज की जांच और स्वीकृति दोनों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अगर आप के परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, टैक्स जमा करता हो तो आप इस योजना में नहीं जुड़ सकती है। इन सब के बावजूद अगर आप योजना से जुड़ती है तो आप पर कार्रवाई भी की जा सकती है और फिर पैसे की वसूली भी की जाती है।

थैले में फेंकी गई नवजात: समय पर मदद से अस्पताल पहुंचाया गया शिशु

मनेन्द्रगढ़ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चनवारीडांड स्थित वन विभाग डिपो के पास शुक्रवार सुबह थैले में नवजात शिशु लावारिस हालत में मिली. सुबह टहलने निकले लोगों को रोने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद उसे अस्पताल लाया गया. फिलाहाल शिशु का स्वास्थ स्थिर बताया जा रहा है. उसे मेडिकल टीम की विशेष निगरानी में रखा गया है. जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत चनवारीडांड क्षेत्र में शुक्रवार सुबह किसी ने एक नवजात शिशु को झोले में डालकर सड़क किनारे छोड़ दिया. स्थानीय लोगों ने शिशु को तत्काल चिकित्सीय सहायता के लिए अस्पताल लाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को “स्वस्थ्य और स्थिर” बताया है. अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया. नन्हीं जान सुरक्षित बताई जा रही है और उसे मेडिकल टीम की विशेष निगरानी में रखा गया है. वहीं सूचना पर कोतवाली मनेंद्रगढ़ पुलिस भी अस्पताल पहुंच गई. पूरी घटना की जांच शुरू कर दी गई है.

AQI रिपोर्ट में गाजियाबाद ने Delhi को छोड़ा पीछे, वैज्ञानिक ने बताई प्रदूषण की वजह

गाजियाबाद गाजियाबाद एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. सीपीसीबी के हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस शहर ने दुनिया में सबसे प्रदूषित शहर का तमगा हासिल कर चुके दिल्ली को भी खराब एक्यूआई के मामले में पीछे छोड़ दिया है. गाजियाबाद की हवा इस कदर जहरीली हो चुकी है कि यहां रहने वाले स्वस्थ लोग भी इस हवा में सांस लेने के बाद बीमार हो रहे हैं, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि 20 नवंबर को एक बार फिर गाजियाबाद का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में पहुंचकर 430 हो गया. जो कि दिल्ली और नोएडा से कहीं ज्यादा रहा. इससे पहले गाजियाबाद 17 और 19 नवंबर को भी प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पर पहुंच गया था. 17 नवंबर को प्राइवेट एक्यूआई मॉनीटर एजेंसियों ने यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 800 से भी ऊपर दर्ज किया था. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि यह शहर सबसे प्रदूषित शहर क्यों बन गया. गाज‍ियाबाद में सड़कों पर धूल और वाहनों से प्रदूषण स्‍तर लगातार बढ़ रहा है. इस बारे में भारतीय मौसम विभाग के पूर्व डीजीएम और दिल्ली के जाने-माने वैज्ञानिक के जे रमेश ने बताया कि गाजियाबाद का हाल बेहद खराब है. तीन दिन पहले भी यह प्रदूषित शहरों में टॉप पर था, एक बार फिर यहां प्रदूषण स्तर सबसे ज्यादा रिकॉर्ड हुआ है. यहां पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा हवा में बहुत ज्यादा है. इसके सबसे प्रदूषित शहर बनने की कई वजहें हैं. धूल है सबसे बड़ा प्रदूषक गाजियाबाद में धूल सबसे प्रमुख प्रदूषक है. इस शहर के किसी भी इलाके, यहां तक कि मेट्रो स्टेशनों के अंदर तक धूल का अंबार लगा होता है. यहां बड़ी संख्या में सड़कें टूटी हुई हैं. चाहे रिहाइशी हो या कमर्शियल यहां लगातार कंस्ट्रक्शन चलता रहता है. पूरे दिन बड़े और छोटे वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं और धूल उड़ाते हैं. बारिश न होने और हवा की गति सर्दियों में सुस्त पड़ने के चलते ये धूल हवा में घूमती रहती है, जो प्रदूषण स्तर को बढ़ाती है. औद्योगिक इलाके और उनसे उत्सर्जन गाजियाबाद में बड़ी संख्या में फैक्ट्रीज हैं. इसके साहिबाबाद, भोपुरा और लोनी जैसे इलाकों पूरी तरह इंस्ट्रीज के लिए ही बने हैं. यहां कारखानों से खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता रहता है. ग्रैप की पाबंदिया लागू जरूर होती हैं लेकिन कितनी सफलता से ये काम करती हैं, इसका कोई व्हाइट पेपर कभी नहीं आया है. वाहनों और कूड़े को जलाने से निकलने वाला धुआं गाज‍ियाबाद में खुले में कूड़ा जलाने से हवा की गुणवत्‍ता पर असर पड़ रहा है. इस शहर में छोट से लेकर बड़े वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है. इलेक्ट्रिक के मुकाबले पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां काफी हैं, साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की मॉनिटरिंग और उन पर सख्ती भी कम है, लिहाजा ये हवा की गुणवत्ता में जहर घोलते रहते हैं. इस शहर में खुले में कूड़ा जलाने से धुआं होने के भी मामले देखे गए हैं, जिनसे हवा में जहरीली गैसें बढ़ती हैं. दिल्ली से नजदीकी और उपायों की कमी गाजियाबाद दिल्ली और नोएडा के नजदीक है, जिसका असर भी इसकी जलवायु पर पड़ता है. इन शहरों में जब प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो वह आगे बढ़कर गाजियाबाद को भी गिरफ्त में लेता है. इसके अलावा इस शहर में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए स्थाई तो दूर अस्थाई उपाय भी नहीं किए जाते हैं, जैसे सड़कों पर पानी का छिड़काव, पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाना, ग्रैप को सख्ती से लागू करना आदि. वैज्ञानिक के जे रमेश कहते हैं कि जब तक गाजियाबाद के स्थानीय कारणों को जानकर वहां के लिए अलग नियम नहीं बनाए जाएंगे, सभी अथॉरिटीज मिलकर प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक रूप से काम नहीं करेंगी, गाजियाबाद क्या किसी भी शहर की हवा को साफ कर पाना मुश्किल है. इस शहर में फैक्ट्री और कारखानों से उत्सर्जन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए. यहां कूड़ा जलाने को भी प्रतिबंधित करने की जरूरत है, साथ ही सड़कों की मरम्मत एक बड़ा मुद्दा है.

इंटरसिटी ट्रेन 21 दिन प्रभावित: जयपुर तक नहीं जाएगी, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज

उदयपुर जयपुर रेलवे स्टेशन के स्टेशन यार्ड में एयर कंकॉर फेज-2 का निर्माण शुरू होने के बाद रेलवे ने कई दिनों का ब्लॉक किया गया है। इस ब्लॉक का सीधा असर उदयपुर से चलने वाली उदयपुर सिटी-जयपुर इंटरसिटी पर पड़ा है। रेलवे ने इस ट्रेन को 21 दिनों के लिए आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। अब यह ट्रेन जयपुर तक नहीं जाएगी। तय अवधि में सिर्फ अजमेर तक चलेगी। गाड़ी संख्या 12991 और 12992 को 21 नवंबर से 10 दिसंबर तक और 13 दिसंबर को जयपुर की जगह अजमेर से ही संचालित होगी। इंटरसिटी के आंशिक रद्द होने के बाद यात्रियों को अब सीधे जयपुर पहुंचने के लिए अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है। ट्रेन अजमेर तक ही जाती है, जिससे आगे की यात्रा के लिए बस या दूसरी ट्रेन पकड़ना मजबूरी बन गया है। कई यात्रियों का कहना है कि अजमेर पहुंचने के बाद कनेक्शन ट्रेनें समय पर नहीं मिल रहीं, जबकि कुछ लोग बस स्टैंड तक पहुंचने में ही देर होने की शिकायत कर रहे हैं। रोजाना जयपुर आने-जाने वाले डेली पैसेंजर्स के लिए यह बदलाव सबसे ज्यादा परेशानी भरा साबित होगा। मौजूदा हालात इसलिए भी चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि नवंबर-दिसंबर में शादियों का भारी सीजन शुरू हो रहा है। इन महीनों में बड़ी संख्या में विवाह मुहूर्त होते हैं और शादी से जुड़े कामों के लिए भी लोग जयपुर की ओर यात्रा करते हैं। उदयपुर से कई परिवार रिश्तेदारी, शॉपिंग, डॉक्यूमेंट वर्क और होटल बुकिंग आदि के लिए जयपुर जाते हैं। इंटरसिटी उनकी पहली पसंद थी, लेकिन अब उन्हें दूसरी ट्रेनों या रोड ट्रांसपोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे समय भी ज्यादा लग रहा है और खर्च भी बढ़ रहा है। फिलहाल उदयपुर से जयपुर जाने वाले यात्रियों को अजमेर के बाद आगे की यात्रा के लिए अन्य साधनों पर निर्भर रहना होगा। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दिसंबर के पहले हफ्ते के बाद इंटरसिटी अपनी नियमित सेवा में जल्द लौटेगी, ताकि रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को फिर से राहत मिल सके।