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RTO ने बदले रजिस्ट्रेशन नियम: पुरानी गाड़ियों के मालिक हो जाएं सावधान

लुधियाना  आर.टी.ओ. विभाग ने 2 साल बाद पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन और फिटनैस रिन्यूअल की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी है लेकिन इसके साथ ही जुर्माने का बोझ इतना बढ़ा दिया गया है कि अब कई वाहन मालिकों के लिए पुराना वाहन रखना घाटे का सौदा बन गया है। विभाग की नई प्रणाली के तहत अब 2023 में फिटनैस रिन्यू न कराने वालों से 7200 से 12000 रुपए तक का अतिरिक्त जुर्माना वसूला जा रहा है। इतना ही नहीं, दोपहिया वाहनों पर हर महीने 300 रुपए और चौपहिया वाहनों पर 500 रुपए तक का विलंब शुल्क भी लगाया जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि जुर्माने की राशि उनके पुराने वाहन की कीमत से भी ज्यादा हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर 19 साल पुराने स्कूटर का रजिस्ट्रेशन न करवाने पर अब 16 हजार रुपए तक का जुर्माना बन रहा है, जबकि उसी मॉडल का सैकेंड हैंड स्कूटर मार्कीट में 10-12 हजार रुपए में मिल जाता है। ऑनलाइन सिस्टम में गड़बड़ी से बढ़ी परेशानी वाहन मालिकों के अनुसार ऑनलाइन फिटनैस पोर्टल पर सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है जिससे वे समय पर फीस जमा नहीं कर पा रहे। कई लोगों को फिटनैस फीस के साथ लेट फीस भी भरनी पड़ रही है। कुछ लोगों ने कहा कि वे कई बार दफ्तर के चक्कर लगाकर थक चुके है, लेकिन क्लीयरैंस नहीं मिल रही। 1992 से पहले के मॉडल पर भी वसूला जा रहा टैक्स नियमों के अनुसार 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को तभी सड़क पर चलाया जा सकता है जब उनका फिटनैस सर्टीफिकेट रिन्यू हो लेकिन अब विभाग 1992 या उससे पुराने वाहनों से भी टैक्स और पैनल्टी वसूल रहा है, जबकि ये वाहन अधिकांशतः चलने लायक ही नहीं बचे।   लुधियाना के वाहन मालिक हरविंदर सिंह ने कहा, “मेरे स्कूटर की कीमत 12 हजार है और फिटनैस के साथ जुर्माना 16 हजार रुपए लग गया। यह नाइंसाफी है। विभाग को व्यावहारिक नीति बनानी चाहिए, नहीं तो आम लोग पुराने वाहन सड़क से हटा देंगे।” विशेषज्ञों की राय- नीति में राहत की जरूरत ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि विभाग को पुराने वाहनों के लिए एकमुश्त रजिस्ट्रेशन स्कीम लानी चाहिए जिससे मालिकों को राहत मिले और प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ प्रशासनिक प्रक्रिया भी सरल बने।

FSL रिपोर्ट का इंतजार: दिल्ली ब्लास्ट की जांच में 13 संदिग्धों से लगातार पूछताछ

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के सूत्रों के मुताबिक लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट केस में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की पहली रिपोर्ट मंगलवार को आने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट से बरामद सामान की प्रकृति और बनावट के बारे में साफ जानकारी मिलने की संभावना है। इस धमाके के सिलसिले में फिलहाल 13 लोगों से पूछताछ की जा रही है।   सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने फरीदाबाद से बरामद विस्फोटकों के बारे में फरीदाबाद क्राइम ब्रांच और जम्मू-कश्मीर पुलिस से जानकारी मांगी है। स्पेशल सेल के सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में अमोनियम नाइट्रेट के निशान मिले हो सकते हैं। हालांकि, विस्फोटक की सही प्रकृति की पुष्टि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। सूत्रों ने आगे बताया कि घटनास्थल पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) ब्लास्ट जैसा कुछ नहीं मिला। इस बीच, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि लाल किले के बाहर हुए तेज धमाके में दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में एक i20 कार का जम्मू-कश्मीर के पुलवामा से कनेक्शन सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, जिस कार में धमाका हुआ, उसे कथित तौर पर पुलवामा के एक निवासी ने खरीदा था। लाल किले के बाहर कार में हुए धमाके के बाद दिल्ली पुलिस की टीमों ने पहाड़गंज, दरियागंज और आस-पास के इलाकों के होटलों में रात भर बड़े पैमाने पर छापेमारी और सर्च ऑपरेशन चलाया। छापेमारी के दौरान सभी होटल रजिस्टरों की अच्छी तरह से जांच की गई। इस ऑपरेशन के दौरान, चार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। फरीदाबाद से आई थी कार दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कई जगहों की सीसीटीवी फुटेज को ध्यान से देखा गया है, जिसमें बदरपुर बॉर्डर से लेकर लाल किले की सुनहरी मस्जिद के पार्किंग एरिया तक, साथ ही आउटर रिंग रोड से कश्मीरी गेट-लाल किला रूट तक की फुटेज शामिल है। अलग-अलग रास्तों की फुटेज की जांच में करीब 200 पुलिसकर्मी शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, जिस कार में ब्लास्ट हुआ था वह हरियाणा के फरीदाबाद से बदरपुर के रास्ते दिल्ली में घुसी थी। 13 लोगों से पूछताछ सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग जगहों से मिले सीसीटीवी सबूतों के आधार पर फिलहाल करीब 13 लोगों से पूछताछ करने के साथ ही उन पर नजर रखी जा रही है। फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़े एक व्यक्ति के i20 कार में सफर करने का शक है, हालांकि मरने वाले व्यक्ति की पहचान डीएनए टेस्ट के बाद ही कन्फर्म होगी। यह घटना जम्मू और कश्मीर और हरियाणा पुलिस द्वारा हरियाणा के फरीदाबाद से 360 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री और गोला-बारूद बरामद करने के बाद हुई है, जिसमें दो लोगों डॉ. मुजम्मिल और आदिल राथर को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस ने ब्लास्ट के सिलसिले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), विस्फोटक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला भी दर्ज किया है।

खुलने से पहले ही अस्पताल सील! जालंधर में बड़ा प्रशासनिक एक्शन

जालंधर पॉश कॉलोनी न्यू जवाहर नगर में नए खुलने जा रहे एक मैटरनिटी एंड चाइल्डकेयर Cloud 9 अस्पताल को नगर निगम ने सील कर दिया। यह कार्रवाई कॉलोनी निवासियों की शिकायत पर की गई, जिन्होंने मेयर वनीत धीर और कमिश्नर संदीप ऋषि से मुलाकात कर बताया था कि अस्पताल की बिल्डिंग में पार्किंग की सुविधा नहीं है, जिससे आने वाले दिनों में पूरे इलाके में ट्रैफिक और पार्किंग की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। शिकायत के बाद नगर निगम कमिश्नर ने बिल्डिंग शाखा को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद एम.टी.पी. मेहरबान सिंह और ए.टी.पी. रविंद्र की अगुवाई में निगम की टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण करने के बाद अस्पताल की बिल्डिंग को सील कर दिया।  निगम अधिकारियों ने बताया कि भले ही इस बिल्डिंग का नक्शा अस्पताल के रूप में पास करवाया गया है लेकिन ग्राऊंड फ्लोर पर पार्किंग के लिए जो जगह दिखाई गई थी, वह मौके पर नहीं मिली। वहां निर्माण कार्य किया गया है, जो नियमों का उल्लंघन है। नगर निगम ने बिल्डिंग मालिकों को नोटिस जारी कर निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द बिल्डिंग के नक्शे और संबंधित दस्तावेज पेश करें, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। 

कलेक्टर की कार्रवाई: कर्मचारियों को कॉल कर समय पर आने को कहा, 13 सस्पेंड

मुरैना   कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने  ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है. बिल्कुल फिल्म नायक की तरह, कलेक्ट्रेट से ही वीडियो कॉल के जरिए पंचायत भवनों की लाइव उपस्थिति चेकिंग शुरू की गई. सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मुख्यालय पर अनुपस्थित रहने पर 8 पटवारी और 4 सचिव सहित 13 शासकीय कर्मचारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया. अनुपस्थित रहने पर 13 सरकारी कर्मचारियों पर गिरी गाज कलेक्टर द्वारा सभी कर्मचारी को समय पर मुख्यालय पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद सरकारी कर्मचारी समय पर मुख्यालय नहीं पहुंच रहे थे. जिसके बाद सोमवार को जिला अधिकारी ने कर्मचारियों को वीडियो कॉल किये, जिसमें 8 पटवारी और 5 सचिव सहित कुल 13 लोग मुख्यालय पर मौजूद नहीं थे. कलेक्टर ने बिना कोई बहाना सुने 13 सरकारी कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया. साथ ही विकासखंड मुख्यालय पर अटैच करने के निर्देश भी जारी किए. इस कार्रवाई से कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है. दोपहर तक नहीं पहुंचे पंचायत भवन मुरैना में  प्रशासनिक मोर्चे पर ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सभी को अनिल कपूर की फिल्म 'नायक' की याद दिला दी. कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में से ही पंचायत भवनों पर अचानक वीडियो कॉलिंग के द्वारा उपस्थिति चेकिंग शुरू कर दी. एक-एक कर कई कर्मचारियों को कॉल लगाया. इस दौरान कई कर्मचारी पंचायत भवन पर अनुपस्थि पाए गए. जिससे कलेक्टर पूरी तरह नायक मोड में आ गए. उन्होंने तत्काल 13 को सस्पेंड के आदेश सुना दिए. इस कार्रवाई से जिलेभर में हड़कंप मचा हुआ है. निजी कामों में व्यस्त पाए गए कर्मचारी जानकारी के अनुसार, कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने सरकारी योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पटवारियों को प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं हल करने के निर्देश दिए हैं. इसी प्रकार पंचायत सचिव/जीआरएस को सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करने के निर्देश दिये हैं. जनता के काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर्मचारी उनके आदेश का अनुपालन ठीक तरह से कर रहे है या नहीं, इसकी वस्तुस्थिति जानने के लिए सोमवार की दोपहर उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में जनपद सीईओ और तहसीलदारों की बैठक ली. इस बैठक में उन्होंने सीईओ व तहसीलदारों के जरिये पटवारी और पंचायत सचिव/जीआरएस से वीडियो कॉन्फ्रेंस के से बातचीत की. बातचीत के दौरान पता चला कि कार्यालय समय में कोई पटवारी अपने घर के निजी कार्यों में व्यस्त हैं, तो कोई बाजार में खरीददारी कर रहा है. ऐसी ही स्थिति पंचायत सचिव-जीआरएस की पाई गई. कलेक्टर लोकेश कुमार ने बताया कि "वीडियो कॉल के माध्यम से पटवारी और सचिवों की लोकेशन चेक किया था, क्योंकि उनको पंचायत भवन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्या समाधान के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 13 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है." निलंबन सूची में शामिल पटवारियों के नाम     सुजान सिंह गुर्जर (बानमौर)     समल मनोरथ पाठक (पोरसा)     अजय गुर्जर (मुरैना ग्रामीण)     शिवराज तोमर (मुरैना शहर)     मयंक यादव (अंबाह)     सोनू जादौन (सबलगढ़)     दुर्गेश शर्मा (कैलारस)     संजीव तिवारी (जौरा) निलंबित पंचायत सचिव/जीआरएस     नरेश सिंह तोमर, ग्राम पंचायत कोटरा     हाकिम जाटव, ग्राम पंचायत बर्रेड     सौरभ सिकरवार, जीआरएस (ग्रामीण संसाधन सहायक)     रामरूप कुशवाह, ग्राम पंचायत सुनावली     नरेश, ग्राम पंचायत ककरारी

चुनाव में दिलचस्प मोड़: पवन सिंह की पत्नी ने वोटरों से क्यों कही ‘सॉरी’?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान शुरू होते ही भोजपुरी अभिनेता और हाल ही में सुर्खियों में रहे पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने मतदाताओं के नाम एक भावुक संदेश जारी किया। उन्होंने कम समय में चुनाव प्रचार होने का जिक्र करते हुए कहा कि जनता से मिलने और हर गली-मोहल्ले तक पहुंचने में उन्हें पूरा समय नहीं मिल पाया। इसी बात का उन्हें मलाल है और उन्होंने खुले दिल से मतदाताओं से माफी मांगी।   ज्योति सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इस चुनाव में मैदान में हैं। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “मेरी बस एक ही कमी रह गई कि प्रचार के लिए समय थोड़ा मिला। फिर भी मैंने अपनी पूरी कोशिश की। जिन लोगों तक नहीं पहुंच पाई, उनसे दिल से माफी मांगती हूं। लेकिन जनता का जो स्नेह और प्यार मिल रहा है, वह मेरे लिए किसी जीत से कम नहीं।” पवन सिंह और ज्योति के बीच खूब मचा था ड्रामा पिछले कुछ दिनों से पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के रिश्ते को लेकर खूब हलचल मची रही। कुछ दिन पहले ही ज्योति, पवन से मिलने उनके फ्लैट पहुंचीं तो हालात कुछ तनावपूर्ण दिखे और मामला सुर्खियों में आ गया। पवन सिंह हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे और चर्चा थी कि वे काराकाट विधानसभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं, ज्योति सिंह का कहना था कि उन्होंने पहले ही चुनाव में उतरने का मन बना लिया था। उनका तर्क था कि जब पवन सिंह काराकाट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब उन्होंने जमकर प्रचार किया था और लोगों की भावनाएं समझीं। जनता ने ही उनसे आग्रह किया था कि वे विधानसभा चुनाव में उतरें। ऐसी चर्चाएं भी थीं कि काराकाट सीट पर पति-पत्नी आमने-सामने होंगे, लेकिन ऐन वक्त पर पवन सिंह ने घोषणा कर दी कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके बाद ज्योति के लिए माहौल और दिलचस्प हो गया, क्योंकि लोगों की नजर अब सीधे उन पर टिक गई।

उथली और खेत खदानों से आए 79 हीरे, पन्ना कार्यालय में तैयार नीलामी

पन्ना  मध्य प्रदेश की हीरा नगरी पन्ना लोगों को रंक से राजा बनाने की पहचान रखती है. यहां आए दिन मजदूर-किसान और जिसने खदान ली हो, उसे हीरे मिलते रहते हैं. जिन लोगों को यह हीरे मिलते हैं, वे हीरा कार्यालय में जमा करते हैं. जिसके बाद जब हीरों की निलामी होती है, तो उसके पैसे हीरा मिलने वाले लोगों को दिए जाते हैं. पन्ना में हीरा कार्यालय सन 1961 में खुला था. तब से लगातार यहां पर शासकीय रूप से हीरे जमा होते हैं. उनकी सरकार द्वारा व्यवस्थित नीलामी कराई जाती है और 12% टैक्स काटकर बाकी राशि हीरा पाने वाले के खाते में ट्रांसफर की जाती है. यहां होती है हीरों की नीलामी सन 1961 से लेकर अभी तक यहां पर हीरों की लगातार नीलामी होती आ रही है. हीरा कार्यालय पहले कलेक्ट्रेट भवन, महेंद्र भवन में संचालित होता था. 2017 में नए कलेक्ट भवन बन जाने के कारण यह हीरा कार्यालय वहां पर शिफ्ट हो गया है. 27 अक्टूबर 2025 को नया हीरा कार्यालय बन गया है. हालांकि वहां पर अभी ये शिफ्ट नहीं हुआ है. नए कलेक्ट भवन में ही संचालित हो रहा है. यहां पर शासन द्वारा शासकीय रकवा हीरा खदान के लिए खोले गए हैं. जिन पर शासन स्तर पर पट्टा बनाया जाता है. इन्हीं खदानों को उथली हीरे की खदान बोला जाता है. निजी खेत खदान भी होती है, जहां पर लोग अपने खेतों में हीरे की खदान खोदते हैं. जिन लोगों को हीरा मिलता है, वे सभी लोग उसे हीरा कार्यालय में जमा कराते हैं. इन्हीं हीरो की नीलामी शासन स्तर पर होती है. जिसमें देश के कोने-कोने से हीरा व्यापारी पन्ना पहुंचते हैं और हीरे की नीलामी में हिस्सा लेते हैं. जो हीरा उन्हें पसंद आता है, उसे वह खरीद लेते हैं. पिछली नीलामी में 3 करोड़ की हुई थी बिक्री पिछली वर्ष हीरे की नीलामी 4 दिसंबर से 6 दिसंबर 2024 तक चली थी. यह नीलामी तीन दिनों की थी. जिसमें देश के कोने-कोने से हीरा व्यापारी यहां पर पहुंचे थे. इस नीलामी में मुख्य आकर्षण का केंद्र 32 कैरेट और 19 कैरेट का हीरा था. जो अच्छी कीमत में बिके थे. इस नीलामी में करीब 3 करोड़ रुपए के हीरे की बिक्री हुई थे. अभी तक इतने हीरे हुए जमा पिछली नीलामी दिनांक 6 दिसंबर 2024 के बाद से आज दिनांक 10 दिसंबर 2025 तक हीरा कार्यालय में कुल 79 नग हीरे जमा हुए हैं. जिनका वजन 142.84 कैरेट है. इसमें मुख्य आकर्षण का केंद्र 17.11 कैरेट का हीरा है. जो प्रकाश कुशवाहा निवासी नयापुरवा को दिनांक 17 दिसंबर 2024 को मिला था. यह हीरा इस वर्ष जमा हुए हीरों में सबसे बड़ा है. पिछली नीलामी में भी कुछ हीरे बच गए थे, जो नीलाम नहीं हो सके थे, उनकी संख्या करीब 40 है. रामेश्वर जाटव लिपिक हीरा कार्यालय पन्ना ने बताया कि "अभी तक कुल 79 नग हीरे जमा हुए हैं. पिछले वर्ष नीलामी में 40 नग हीरे शेष बचे थे. आगामी जल्द होने वाली नीलामी में इन सभी हीरो को बिक्री के लिए रखा जाएगा."

दुकान-मकान तोड़ने से प्रभावित लोगों को राहत, नगर निगम ने शुरू की मुआवजे की प्रक्रिया

 ग्वालियर शहर में सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों के लिए जिनकी दुकानें और मकान तोड़े गए थे, उन्हें छह साल के लंबे इंतजार के बाद अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने इन प्रभावितों को मुआवजा के रूप में फ्लोर एरिया रेशो (FAR) देने की कवायद शुरू कर दी है। किला गेट, सेवा नगर, हजीरा, मुरार नदी और एलिवेटेड रोड के निर्माण में बाधा बनी संपत्तियों को तोड़ने के समय मुआवजा के रूप में टीडीआर (ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट) या एफएआर देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह मामला वर्षों से लंबित था। क्या है एफएआर (FAR) का नियम टीएंडसीपी के अफसरों के अनुसार, सरकार ने वर्ष 2018 में टीडीआर नियम बनाए थे। इसके तहत, यदि किसी सरकारी योजना के लिए लोगों की निजी जमीन, मकान या भवन लिया जाता है, तो उन्हें बढ़ा हुआ फ्लोर एरिया रेशो (FAR) दिया जाता है। भवन स्वामी इस एफएआर को किसी बिल्डर या अन्य व्यक्ति को बेच सकते हैं। एफएआर का अनुपात जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन कीमत के आधार पर तय किया जाता है। टीएंडसीपी ने अब शुरू की प्रक्रिया अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने इस दिशा में कदम उठाया है। टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक केके कुशवाह ने नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, हाउसिंग बोर्ड सहित सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि यदि उन्होंने किसी की निजी जमीन या मकान को निर्माण कार्य में लिया है, तो वे संबंधित स्वामियों से आवेदन लेकर उन्हें भेजें। प्रभावित लोग टीडीआर या एफएआर के लिए टीएंडसीपी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कुशवाह ने बताया कि एफएआर करीब 6 से 7 महीने में संबंधित को मिल जाता है और यह दस साल के लिए वैलिड रहता है। इन क्षेत्रों के लोग होंगे लाभान्वित इस कवायद से ग्वालियरशहर के 400 से अधिक संपत्ति स्वामी लाभान्वित होंगे, जिनमें प्रमुख रूप से किला गेट से सेवा नगर और हजीरा तक के 281 संपत्ति स्वामी, मुरार मरघट रोड के 72, और एलिवेटेड रोड फेज-1 व फेज-2 के करीब 143 संपत्ति स्वामी शामिल हैं।

आधुनिक ड्रोन सिस्टम के साथ बीएसएफ का नया स्कूल, पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच शुरू

 डबरा  देश की सीमाओं की सुरक्षा अब आधुनिक ड्रोन सिस्टम से सुसज्जित महिला जवानों के हाथों में होगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने इस विशेष टीम को 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' नाम दिया है। इसके लिए देश का पहला 'स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर' बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में शुरू किया है, जहां महिला जवानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर का उद्घाटन 2 सितंबर 2025 को बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने किया था। यह भारत में बीएसएफ का अपनी तरह का पहला व्यवस्थित स्कूल है, जहां ड्रोन वॉरियर्स और ड्रोन कमांडो तैयार किए जाएंगे। पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच वर्तमान में, पंजाब फ्रंटियर की 30 महिला जवानों का पहला बैच 6 सप्ताह की ट्रेनिंग ले रहा है। इन्हें ड्रोन हमलों से निपटने, ड्रोन के माध्यम से हमला करने के टिप्स, ड्रोन उड़ाने, नियंत्रित करने और निगरानी मिशनों के लिए डेटा एकत्रित करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्वालियर के डबरा स्थित बीएसएफ अकादमी ने ड्रोन ड्रिल का आयोजन किया, जिसमें इन प्रशिक्षित महिला जवानों ने ड्रोन वॉर को लेकर डैमो दिया। इसमें लोकेशन का पता लगाना, हमला कर लौटना और कंट्रोल रूम से प्लान तैयार करना जैसे इवेंट शामिल थे। महिलाएं कमांड भूमिका का पालन अच्छी तरह करती हैं- डॉ. शमशेर सिंह बीएसएफ अकादमी के निदेशक डॉ. शमशेर सिंह ने बताया कि महिला प्रहरियों को प्रशिक्षित करने के पीछे उनका यह मानना है कि महिलाओं में धैर्य, आत्मविश्वास, सटीक निशाना लगाने के साथ ही वे कमांड भूमिका का अच्छी तरह से पालन करती हैं। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि वर्तमान में युद्ध और बॉर्डर सुरक्षा में ड्रोन टेक्नोलॉजी के बिना काम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, आने वाले दिनों में ड्रोन से निगरानी रखना, दुश्मन के ड्रोन को गिराना और ऑपरेशन लॉन्च करना आदि काम होंगे। प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक निदेशक ने बताया कि ड्रोन केवल हमला करने या निगरानी के लिए ही नहीं, बल्कि आपात स्थिति में प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक होंगे, खासकर उन दुर्गम स्थानों पर जहां घायल जवान तक तुरंत पहुंचना संभव नहीं होता। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' की ये महिला जवान हर परिस्थिति में सीमाओं पर देश विरोधी दुश्मनों से निपटने के लिए तैयार रहेंगी।

तरनतारन में सिर्फ 11% मतदान, क्या अपनी सीट बचा पाएगी आम आदमी पार्टी?

तरन तारन   पंजाब की बहुचर्चित तरन तारन विधानसभा सीट पर मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शुरू हुआ। अधिकारियों ने बताया कि सुबह 7 बजे से मतदान प्रारंभ हुआ जो शाम 6 बजे तक चलेगा। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 11 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है। यह उपचुनाव आम आदमी पार्टी (आप) के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश में है। वहीं कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल सहित विपक्षी दल इस मौके पर जनसमर्थन बढ़ाने और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति में जुटे हैं। तरन तारन सीट आम आदमी पार्टी विधायक कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद रिक्त हुई थी। मतगणना 14 नवंबर को होगी।

नगर निगम ने 2,500 से अधिक कर्मचारियों का 16-31 अक्टूबर का बकाया वेतन दिया

भोपाल  मध्यप्रदेश में नगर निगम प्रशासन ने सोमवार को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का 16-31 अक्टूबर तक का बकाया वेतन जारी कर दिया। इससे 2,500 से अधिक कर्मचारियों के बीच खुशी की लहर है, जिनका लगभग 1.80 करोड़ रुपए का वेतन नए अटेंडेंस सिस्टम लागू होने के कारण रुका हुआ था। नए अटेंडेंस सिस्टम से हुई थी देरी नगर निगम में हाल ही में लागू किए गए नए अटेंडेंस सिस्टम के कारण कर्मचारियों के वेतन में देरी हुई थी। इससे पहले सात नवंबर को निगम प्रशासन ने 1-15 अक्टूबर का वेतन जारी किया था, लेकिन बाकी बकाया राशि न मिलने से कर्मचारी असंतोष जता रहे थे। कर्मचारियों ने कियाथा प्रदर्शन कर्मचारियों ने इससे पहले माता मंदिर मुख्यालय के सामने जमा होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। सफाई कर्मचारियों की नाराजगी इतनी अधिक थी कि उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर कचरा वाहन नहीं चलाए, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। निगमायुक्त संस्कृति जैन के हस्तक्षेप के बाद ही सफाई कार्य फिर से शुरू हो सका था। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वासन दिया था कि 16-31 अक्टूबर का वेतन 10-11 नवंबर को जारी किया जाएगा। प्रशासन ने अपना वादा निभाते हुए 10 नवंबर को ही वेतन जारी कर दिया।