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जनता दर्शन में सीएम योगी के निर्देश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई; शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अधिकारियों से कहा कि समाज में वैमनस्यता फैलाने वाले लोग मामूली घटनाओं को बड़ा बनाना चाहते हैं। ऐसे में जनपदों में हर छोटी से छोटी घटना पर जिलाधिकारी और एसपी स्वयं नजर रखें। तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों की सुनवाई करें और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई कर मामलों को खत्म कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी उदासीनता और लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सीएम योगी जनता दर्शन में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनने के बाद प्रार्थना पत्रों को लेकर अफसरों को कई निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में कुर्सियों पर बैठे हर पीड़ित से मिले। उनकी समस्याओं और शिकायतों को सुना। मुख्यमंत्री ने प्रशासन, पुलिस, राजस्व, विद्युत आदि से जुड़ी शिकायतों का प्रार्थना पत्र लेते हुए कहा कि सरकार साढ़े 9 साल से बिना भेदभाव हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान करा रही है। अधिकारी संवेदनशील होकर जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। पात्र व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाएं, मरीजों के इलाज की व्यवस्था कराएं और भूमाफिया/दबंगों पर कठोरतम कार्रवाई करें। पुलिस से संबंधित शिकायतों पर हुए सख्त सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने पुलिस और राजस्व से जुड़ीं शिकायतें अधिक रहीं। इस पर मुख्यमंत्री सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी नियमित रूप से जनसमस्याओं का जनपदों में निराकरण कराएं। यदि किसी मातहत द्वारा लापरवाही की शिकायत मिले तो उस पर भी कार्रवाई करें। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। बच्चे से पूछा- कैसे हो, कहां पढ़ते हो ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आए नन्हे बच्चे से मुख्यमंत्री ने हालचाल पूछा। फिर पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने उसकी तरफ चॉकलेट बढ़ाई तो उसने झट से चॉकलेट ले ली। फिर सीएम ने चॉकलेट वापस मांगी तो बच्चे ने मना कर दिया। इस पर पूरा हॉल खिलखिला उठा। मुख्यमंत्री ने सुखद भविष्य का आशीर्वाद देते हुए बच्चे से मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा। सीएम योगी मेरठ रवाना, एनएच-58 पर भारी वाहनों की नो-एंट्री लखनऊ में जनता दर्शन के बाद सीएम योगी मेरठ रवाना हो गए हैं। योगी वहां भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ कई बैठकों और सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मेरठ में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान एनएच-58 पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जरूरी न हो तो इस मार्ग का इस्तेमाल न करें। एसपी यातायात राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि दिल्ली-गाजियाबाद की ओर से मेरठ आने वाले वाहन चालक एनएच-58 से बचते हुए वैकल्पिक मार्ग अपनाएं। मोदीपुरम फ्लाईओवर, कंकरखेड़ा फ्लाईओवर, रोहटा रोड फ्लाईओवर और बागपत रोड फ्लाईओवर की ओर भी यातायात व्यवस्था पर विशेष निगरानी रहेगी। वाहन चालकों से अपील की है कि वीवीआईपी कार्यक्रम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं मीना दीदी

कहानी बदलाव की स्व सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं मीना दीदी पशुपालन और तार फेसिंग सहित विभिन्न गतिविधियों से बढ़ी आमदनी, बनीं लखपति दीदी अनूपपुर  ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए आजीविका मिशन के स्व सहायता समूह अवसर उपलब्ध कराने का माध्यम बन रहे हैं। अनूपपुर जिले के विकासखण्ड जैतहरी के ग्राम सिवनी की मीना दीदी ने स्व सहायता समूह से जुड़कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ाया। समूह से मिले सहयोग और ऋण के माध्यम से उन्होंने पशुपालन के साथ तार फेसिंग,धान कटाई मशीन और ईंट निर्माण जैसी गतिविधियों को भी आगे बढ़ाया। समूह से जुड़कर मिली आगे बढ़ने की राह मीना दीदी बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी। पति की आय से घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान वे मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं और 12 अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह का गठन किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, बैंकिंग और ऋण के माध्यम से अपनी आजीविका गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने अलग-अलग अवसरों पर लगभग 5 लाख रुपये का आजीविका ऋण लेकर विभिन्न गतिविधियों में निवेश किया। पशुपालन से नियमित आमदनी मीना दीदी ने पशुपालन को अपनी प्रमुख आजीविका गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके पास 25 गाय, 20 बछड़े और 5 भैंसें हैं। प्रतिदिन लगभग 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसकी बिक्री मोजर बेयर कंपनी को की जाती है। इसके साथ ही वे तार फेसिंग सहित अन्य गतिविधियों से भी आय अर्जित कर रही हैं। अपनी आजीविका गतिविधियों के संचालन में वे स्थानीय स्तर पर 8 मजदूरों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 35 से 40 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम मीना दीदी कहती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। समूह से प्राप्त सहयोग और ऋण ने उन्हें अपने स्तर पर काम शुरू करने का हौसला दिया। वे अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने के साथ समूह से प्राप्त ऋण की अदायगी भी कर रही हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। आज मीना दीदी अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग देने के साथ अन्य लोगों के लिए रोजगार का माध्यम भी बन रही हैं। पशुपालन, तार फेसिंग और अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती मीना दीदी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए बदलाव और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

राजस्थान के 5 नगर निगमों में मेयर चुनाव के नतीजे, 4 पर BJP और बीकानेर में कांग्रेस

 जयपुर  राजस्थान के नगर निगमों में महापौर चुनाव के नतीजों ने कई जगह दिलचस्प राजनीतिक समीकरण सामने रखे हैं। सोमवार को हुए चुनाव में अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, अलवर और पाली नगर निगम में महापौर पद के परिणाम घोषित हुए। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा के महापौर निर्विरोध चुने जा चुके हैं। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर पद का चुनाव 25 सितंबर को होगा। इन परिणामों में सबसे कम वोटों के अंतर से जीत पाली में दर्ज हुई। यहां भाजपा की नमिता बुबकिया ने निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को महज 4 वोटों से हराया। नमिता को 33 और राजबाला को 29 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन को तीन वोट मिले। पाली में कुल 65 वार्ड हैं और महापौर बनने के लिए 33 वोट जरूरी थे। पाली और अजमेर में बेहद करीबी मुकाबला पाली के बाद सबसे कम अंतर से जीत अजमेर में रही। यहां भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। यानी भाजपा प्रत्याशी ने 6 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। अजमेर में भाजपा के 32 और कांग्रेस के 37 पार्षद थे, जबकि 11 निर्दलीय पार्षद थे। परिणाम में भाजपा प्रत्याशी को पार्टी के घोषित संख्या बल से अधिक वोट मिले। उदयपुर में सबसे बड़ा अंतर उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी ने सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले। दोनों के बीच 30 वोट का अंतर रहा। उदयपुर में भाजपा के पास 53 पार्षद थे और सिंघवी को इससे दो अधिक वोट मिले। बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला को 50 वोट मिले और भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। यहां कांग्रेस ने 20 वोट के अंतर से महापौर पद जीता। वहीं अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल को 42 और कांग्रेस को 23 वोट मिले, जिससे जीत का अंतर 19 वोट रहा। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशियों का निर्वाचन निर्विरोध हुआ। अब प्रदेश की निगाहें जयपुर, जोधपुर और कोटा पर हैं, जहां महापौर चुनाव 25 सितंबर को होगा। इन परिणामों के बाद अब उपमहापौर और उपाध्यक्ष पदों के लिए भी राजनीतिक समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। महापौर चुनाव के परिणाम और जीत का अंतर नगर निगम             कुल वार्ड    महापौर             पार्टी          विजेता के वोट    दूसरे प्रत्याशी के वोट    जीत का अंतर अजमेर                       80    अनामिका शर्मा      भाजपा           43                    कांग्रेस 37                6 वोट उदयपुर                       80    पारस सिंघवी         भाजपा          55                    कांग्रेस 25                30 वोट बीकानेर                    80    अनिल कल्ला            कांग्रेस         50                    भाजपा 30                  20 वोट अलवर                      65    सुमनलता अग्रवाल    भाजपा       42                       कांग्रेस 23                  19 वोट पाली                        65    नमिता बुबकिया        भाजपा       33                       निर्दलीय 29                   वोट भरतपुर                   65    अनुराधा सिंह            भाजपा        निर्विरोध                —                                निर्विरोध भीलवाड़ा                 70    जसवंत कंवर            भाजपा       निर्विरोध                  —                                निर्विरोध

गेमिंग-रील्स के चक्कर में साइबर ठगी का खतरा, राजस्थान पुलिस ने दी पैरेंट्स को चेतावनी

जयपुर बस पांच मिनट और मॉम। आप कई बार मोबाइल को लेकर बच्चों को टोकते हैं, लेकिन वे आपसे बस 5 मिनट और रुकने की कहते हैं। ध्यान रखें यही 5 मिनट कहीं आपके लाड़ले के लिए भारी न पड़ जाएं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स के बढ़ते चलन के बीच राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों और बच्चों को सख्त चेतावनी दी है। पुलिस ने कहा है कि गेमिंग और रील्स के चक्कर में बच्चे फर्जी प्रोफाइल और साइबर बुलिंग के शिकार न हों। ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखें, अनुचित कंटेंट को तुरंत ब्लॉक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 नंबर पर दें। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें राजस्थान पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी पोस्ट में साफ कहा गया है कि बच्चे आसानी से फर्जी अकाउंट बनाकर या दोस्ती का झांसा देकर साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। गेमिंग प्लेटफॉर्म और शॉर्ट रील्स ऐप्स पर अजनबियों से बातचीत, दोस्ती या चैलेंज स्वीकार करने से मानसिक तनाव, ब्लैकमेलिंग और यहां तक कि शारीरिक नुकसान तक का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। फर्जी प्रोफाइल बनाकर ऐसे फंसाते हैं बच्चों को साइबर अपराधी आकर्षक फोटो और झूठी कहानियों के साथ फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं। गेमिंग या रील्स के नाम पर वे बच्चों से संपर्क साधते हैं, फिर धीरे-धीरे निजी जानकारी, फोटो या वीडियो मांगते हैं। बाद में इन्हीं चीजों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में तुरंत 1930 पर कॉल करना सबसे जरूरी कदम है। अभिभावकों की जिम्मेदारी सबसे बड़ी अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना चाहिए। गोपनीयता सेटिंग्स चेक करें, अजनबी फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने की आदत डालें और नियमित बातचीत से बच्चों को जागरूक बनाएं। अनुचित कंटेंट दिखने पर तुरंत रिपोर्ट और ब्लॉक करें। पुलिस का कहना है कि समय पर सतर्कता कई बड़े अपराधों को रोक सकती है। राजस्थान में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं राजस्थान में हाल के महीनों में इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर दोस्ती के नाम पर नाबालिगों को फंसाने, ब्लैकमेल करने और यहां तक कि दुष्कर्म के मामले सामने आए हैं। जयपुर, अलवर और अन्य जिलों में ऐसे कई मामले दर्ज हुए हैं, जहां फर्जी दोस्ती से शुरू होकर पीड़ितों को मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचाया गया। ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के मामले भी प्रदेश में काफी संख्या में दर्ज हो रहे हैं। इन घटनाओं ने पुलिस को लगातार जागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया है। 1930 नंबर ही सबसे बड़ा सहारा किसी भी साइबर अपराध या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 पर दें। शिकायत cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है। राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है। पुलिस का संदेश साफ है—बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी परिवार और समाज दोनों की है। सतर्क रहें, जागरूक रहें और समय पर रिपोर्ट करें ताकि गेमिंग और रील्स का मजा अपराध का कारण न बने।

नशे में बेटे ने मां को जिंदा जलाया, पटना में 60 वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत

पटना पटना में एक नशेड़ी बेटे के महापाप ने सभी को हैरान कर दिया है। नशे में धुत बेटे ने रोंगटे खड़ी कर देने वाली वारदात को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि खाजेकलां थाने के दीवान मोहल्ले, दुल्ली घाट में एक कलयुगी बेटे ने नशे की हालत में अपनी ही मां को जिंदा जलाकर मार डाला। घटना शनिवार देर रात की है। मृतका की पहचान 60 वर्षीय रेखा देवी के रूप में हुई है, जो स्व. नन्हकी साहनी की पत्नी थीं। आसपास के लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों के अनुसार, रेखा देवी अपने पुत्र चिंटू कुमार के साथ बसंत लाल के मकान में किराये पर रहती थीं। ऑटो चालक चिंटू हाल के दिनों में नशे का आदी हो गया था। वृद्धा को कमरे से खींचकर बाहर ला रहा था शनिवाद देर रात नशे की हालत में उसने एलपीजी गैस से मां के शरीर में आग लगा दी। कमरे से धुआं निकलता देख अन्य किरायेदार जाग गए। उन्होंने कमरा खुलवाया तो देखा कि रेखा देवी बुरी तरह जल चुकी हैं और चिंटू उन्हें खींचकर बाहर ला रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। मृतका के रिश्तेदार अमर साहनी ने खाजेकलां थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए चिंटू पर मां को जलाकर मारने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि शनिवार देर रात पड़ोसियों ने घटना की जानकारी दी। जब वे मौके पर पहुंचे तो कमरे में धुआं भरा था और रेखा देवी का अधिकांश शरीर जला हुआ था। पटना सिटी के एसएसपी राजकिशोर ने कहा कि वृद्धा की हत्या में आरोपित उसके पुत्र चिंटू को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित नशा करने का आदी था। नशे में विवाद के बाद घटना होने की बात सामने आई है। मामले से जुड़े हर बिंदु पर जांच की जा रही है। पुलिस को देख विक्षिप्त जैसी हरकत करने लगा आरोपित एएसपी राजकिशोर सिंह व खाजेकलां पुलिस ने शव को कमरे से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस को देखते ही आरोपित चिंटू विक्षिप्त जैसी हरकत करने लगा। एएसपी ने बताया कि युवक नशे का आदी है और नशे की हालत में ही उसने मां को आग लगाकर मार डाला। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस की निगरानी में हुआ अंतिम संस्कार एनएमसीएच में पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेखा देवी का दाह संस्कार पुलिस की निगरानी में कराया गया। उधर, आग से जलाकर वृद्धा की हत्या के बाद दुल्ली घाट व आसपास के इलाके में मातम पसरा है।

ओखला में बनेंगे अफसरों के 2 टावर, 160 फ्लैट्स के साथ होगी बेसमेंट पार्किंग

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर कैडर खत्म कर आईएएस अफसरों को एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्र शासित प्रदेश) कैडर में शामिल करने के बाद दिल्ली सरकार में अफसरों की संख्या बढ़ गई है। इस रैंक के अफसरों के लिए सरकारी आवास की संख्या अब कम पड़ रही है। इसलिए सरकार ओखला स्थित अपोलो हॉस्पिटल के पास 16,175.12 वर्ग मीटर में टाइप-5 व टाइप-6 के फ्लैट्स के निर्माण की योजना बना रही है। यहां दो टावर बनाए जाएंगे। प्रत्येक टावर में 80-80 फ्लैट्स होंगे। दो मंजिला बेसमेंट पार्किंग की सुविधा भी होगी। इस प्रोजेक्ट पर कुल 319.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेजिडेंशियल टावर के निर्माण के लिए दो मॉडल चुने गए हैं, जिनमें एक अक्षरधाम के पास बना कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज और दूसरा केंद्र सरकार की जीपीआरए कॉलोनियां हैं। धारा 370 हटने के बाद बदला कैडर ढांचा पीडब्ल्यूडी अफसरों के अनुसार, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद सिविल सर्विसेज के जम्मू-कश्मीर कैडर को खत्म कर दिया था। जम्मू-कश्मीर कैडर को एजीएमयूटी कैडर में शामिल कर दिया गया है। ऐसे में दिल्ली सरकार में कार्यरत अफसरों की संख्या में इजाफा हो गया है। ओखला में बनेंगे 160 अफसर फ्लैट ऐसे में प्लान बनाया गया है कि ओखला के पास टाइप-5 के 80 और टाइप-6 के भी 80 फ्लैट्स बनाए जाएं। टाइप-5 के टावर में दो ब्लॉक होंगे, जिसमें एक ए-ब्लॉक और दूसरा बी-ब्लॉक होगा। दोनों टावर का निर्माण 16,175.12 वर्ग मीटर (3.9 एकड़) में किया जाएगा। अफसरों का कहना है कि जिस तरह से डीडीए ने अक्षरधाम के पास कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज बनाया है, उस मॉडल की भी स्टडी की जा रही है। दूसरा मॉडल केंद्र सरकार की जीपीआरए कॉलोनियां है। दोनों में से किसी एक मॉडल के आधार पर ऑफिसर फ्लैट्स बनाए जाएंगे। दिल्ली सरकार इस पर खर्च करेगी 319.72 करोड़ रुपये दोनों टावर आसपास ही होंगे। दोनों के लिए कॉमन बेसमेंट पार्किंग बनाई जाएगी, जो दो मंजिला होगी। टावर-1 के निर्माण पर कुल 54.28 करोड़ और टावर-2 (ए व बी-ब्लॉक) के निर्माण पर 78.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बेसमेंट पार्किंग के निर्माण पर 63.78 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है। इसके अलावा दोनों टावर के चारों तरफ इंटरनल रोड, लैंडस्केपिंग व सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस कार्य पर कुल 9.40 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है।

पंजाब में बढ़ा स्वाइन फ्लू का प्रकोप, 347 मरीज मिले

चंडीगढ़. पंजाब में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) यानी स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, एक जनवरी से अब तक प्रदेश में कैटेगरी-सी के 1,926 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें 347 मरीजों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। स्वाइन फ्लू से लुधियाना और जालंधर में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। जिलेवार आंकड़ों में लुधियाना सबसे आगे है। यहां कैटेगरी-सी के 746 संदिग्ध मामले मिले हैं, जबकि 95 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। संदिग्ध मामलों में मोहाली 135 और जालंधर 115 मामलों के साथ अगले स्थान पर हैं। पटियाला में 110, बठिंडा में 89 और होशियारपुर में 80 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजे जारी, 7 में से 6 मेयर पद BJP के नाम

जयपुर राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में सोमवार को महापौर, सभापति और नगर पालिकाध्यक्ष के चुनाव के साथ ही शहरों की नई राजनीतिक तस्वीर साफ होने लगी। प्रदेश के 10 नगर निगमों में से सात में महापौर पद का फैसला हुआ, जबकि जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा। आज हुए पांच महापौर पद के चुनावों में चार पर भाजपा ने कब्जा जमाया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके थे। इस तरह सात में से छह पर भाजपा का कब्जा हो गया है, वहीं केवल एक पर ही कांग्रेस जीती है। दोपहर बाद आए परिणामों में भाजपा की बढ़त का असर पूरे प्रदेश के निकाय प्रमुखों के चुनाव में भी दिखाई दिया। दोपहर दो बजे तक 273 निकायों में 179 निकाय प्रमुखों के परिणाम घोषित हो चुके थे। इनमें भाजपा के 122 और कांग्रेस के 53 निकाय प्रमुख चुने जा चुके थे। अलवर में निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा का बोर्ड अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस की अनामिका शर्मा को हराकर महापौर पद हासिल किया। सुमलता को 42 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 23 वोट मिले। अलवर में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और 13 निर्दलीय तथा एक बसपा पार्षद हैं। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। ऐसे में निर्दलीय और बसपा पार्षदों का समर्थन निर्णायक रहा। पाली में त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा आगे पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया महापौर चुनी गईं। उन्हें 33 वोट मिले। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की सुमित्रा जैन को तीन वोट मिले। यहां कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय पार्षद थे। लिहाजा मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी की मौजूदगी ने पूरे चुनाव को रोचक बना दिया। पाली को पहली महिला महापौर भी मिली है। बीकानेर में कांग्रेस ने पलटा गणित बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला 50 वोट लेकर महापौर बने। भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। बीकानेर में कांग्रेस के पास पार्षदों का बहुमत होने के कारण कांग्रेस का बोर्ड बनना पहले से ही मजबूत स्थिति में था। उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी महापौर उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी को 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट मिले। भाजपा के पास 53 पार्षद थे और सिंघवी को दो अतिरिक्त वोट मिले। इस परिणाम में निर्दलीयों की भूमिका भी सामने आई। अजमेर में फिर भाजपा, भरतपुर-भीलवाड़ा में निर्विरोध अजमेर में भाजपा की अनामिका शर्मा ने कांग्रेस की किरण गढ़वाल को हराकर महापौर पद हासिल किया। यहां कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और 11 निर्दलीय पार्षद थे। बहुमत के लिए 41 वोट चाहिए थे, इसलिए निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक रहा। भाजपा ने आठवीं बार बोर्ड और महापौर बनाया। भरतपुर में भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध महापौर चुनी गईं और सोमवार को उन्होंने पद एवं गोपनीयता की शपथ भी ली। भीलवाड़ा में भी भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी जा चुकी हैं। अब सबकी नजरें जयपुर, जोधपुर व कोटा पर अब सबसे ज्यादा नजर जयपुर, जोधपुर और कोटा पर रहेगी। इन तीनों बड़े नगर निगमों में महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा। इसके साथ ही आज के परिणामों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि किन निकायों में क्रॉस वोटिंग हुई, निर्दलीयों ने किसका साथ दिया और अब उपमहापौर व उपाध्यक्ष पदों के लिए किस तरह के नए राजनीतिक समीकरण बनते हैं। राजस्थान के 10 नगर निगमों में महापौर चुनाव की स्थिति क्रम    नगर निगम    परिणाम/स्थिति    महापौर    पार्टी    प्रमुख तथ्य 1    जयपुर    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना 2    जोधपुर    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना 3    कोटा    चुनाव 25 सितंबर को    —    —    25 सितंबर को मतदान/मतगणना 4    भरतपुर    निर्विरोध    अनुराधा सिंह    भाजपा    निर्विरोध चुनी गईं, आज शपथ ली 5    अलवर    भाजपा की जीत    सुमलता अग्रवाल    भाजपा    42 वोट; कांग्रेस को 23 वोट 6    पाली    भाजपा की जीत    नमिता बुबकिया    भाजपा    33 वोट; निर्दलीय राजबाला को 29, कांग्रेस को 3 7    बीकानेर    कांग्रेस की जीत    अनिल कल्ला    कांग्रेस    50 वोट; भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 8    उदयपुर    भाजपा की जीत    पारस सिंघवी    भाजपा    55 वोट; कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 9    अजमेर    भाजपा की जीत    अनामिका शर्मा    भाजपा    बीजेपी को 43 और कांग्रेस को 37 वोट मिले 10    भीलवाड़ा    निर्विरोध    जसवंत कंवर    भाजपा    निर्विरोध निर्वाचन; अब उपमहापौर पर मंथन

विदेशी छात्रों की सुरक्षा को लेकर कलेक्टर-SP की बैठक, दिए जरूरी निर्देश

रायपुर. कलेक्ट्रेट रायपुर में आज कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने जिले में संचालित विभिन्न विश्वविद्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों के कुलपतियों के साथ प्रतिनिधियों की बैठक ली। इस बैठक में विदेशी विद्यार्थियों के सुरक्षित और सुव्यवस्थित आवास, संस्थानों की जिम्मेदारी, स्थानीय प्रशासन के साथ पुलिस के साथ समन्वय को लेकर चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि विदेशी विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेशी विद्यार्थी भारत में अध्ययन के लिए आते हैं, इसलिए उनके लिए सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विदेशी विद्यार्थियों के आवास आवागमन की व्यवस्था के निर्देश बैठक में विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को निर्देशित किया गया कि विदेशी विद्यार्थियों के आवास के साथ आवागमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वर्तमान में जो विदेशी विद्यार्थी विश्वविद्यालय/कॉलेज के छात्रावास से बाहर निजी मकानों, पीजी या अन्य स्थानों पर रह रहे हैं, उन्हें अगले 15 से 30 दिनों के अंदर संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए अथवा संस्थान से संबद्ध सुरक्षित छात्रावास में स्थानांतरित करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश इस संबंध में संस्थानों को विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा, स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध आवासीय व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। बैठक में कहा गया कि किसी भी अप्रिय घटना, दुर्घटना या कानून-विरोधी गतिविधि की स्थिति उत्पन्न होने से पहले ही उसके संभावित कारणों की पहचान कर आवश्यक निरोधात्मक कदम उठाए जाएं। प्रशासन और पुलिस को स्थानीय नागरिकों से समय-समय पर विदेशी विद्यार्थियों से संबंधित शिकायतों के साथ सूचनाएं प्राप्त होती रही हैं। कुछ मामलों में विद्यार्थियों द्वारा अनुशासनहीनता या कानून-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका से संबंधित शिकायतें भी सामने आई हैं। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए संस्थानों को अपने स्तर पर प्रभावी निगरानी, काउंसलिंग और अनुशासन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कानून उल्लंघन की स्थिति में की जाएगी नियमानुसार कार्रवाई यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी विद्यार्थी के विरुद्ध केवल उसकी राष्ट्रीयता के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। कानून का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि विभिन्न देशों से आने वाले विद्यार्थियों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भारत की स्थानीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों से अलग हो सकती है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को चाहिए कि विदेशी विद्यार्थियों को भारतीय कानून, स्थानीय सामाजिक व्यवहार, रीति-रिवाज, सार्वजनिक आचरण एवं स्थानीय संवेदनशीलताओं के संबंध में आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करें। विदेशी विद्यार्थियों के सहयोग की अपील साथ ही स्थानीय नागरिकों से भी अपील की गई कि विदेशी विद्यार्थियों के प्रति सहयोगात्मक और संवेदनशील व्यवहार रखें। किसी भी वास्तविक समस्या या कानून-विरोधी गतिविधि की सूचना तत्काल संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस या जिला प्रशासन को दें। सभी विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को निर्देशित किया गया कि उनके संस्थान में अध्ययनरत विदेशी विद्यार्थियों से संबंधित अद्यतन एवं सत्यापित जानकारी संस्थान स्तर पर व्यवस्थित रूप से संधारित करें और आवश्यकतानुसार जिला प्रशासन के साथ साझा करें। इसमें विद्यार्थियों की संख्या, देश, पाठ्यक्रम, संस्थान में प्रवेश की स्थिति, छात्रावास/आवास का विवरण और आवश्यक संपर्क जानकारी सहित प्रासंगिक अभिलेखों को अद्यतन रखने पर जोर दिया गया। संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि विदेशी विद्यार्थियों के भारत आगमन से लेकर अध्ययन अवधि एवं आवास संबंधी आवश्यक जानकारी का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध रहे तथा किसी भी महत्वपूर्ण परिवर्तन की जानकारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को समय पर दी जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन को विदेशी विद्यार्थियों के लिए नियमित ओरिएंटेशन एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा उन्हें आपातकालीन संपर्क नंबर, पुलिस सहायता, यातायात नियम, साइबर सुरक्षा, नशीले पदार्थों एवं अन्य कानून-विरोधी गतिविधियों से दूर रहने संबंधी जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन, विदेशी विद्यार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों से अपील की कि रायपुर को विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, शांतिपूर्ण एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने में सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाएं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रबंधन, विद्यार्थी, अभिभावक एवं स्थानीय समाज के समन्वित प्रयास से ही सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

50% पंजीयन छूट से रचना सोनी को मिली राहत, बचाए ₹35 हजार

सेवा की कहानी : पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से रचना सोनी ने बचाए 35 हजार रुपये अपने नाम संपत्ति होने से बढ़ा आत्मविश्वास, बची राशि से परिवार की आर्थिक योजना को मिली मजबूती ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत रचना सोनी ने साझा किया अनुभव, महिलाओं के लिए शुल्क रियायत को बताया उपयोगी पहल रायपुर शासन की जनहितकारी नीतियों का लाभ जब किसी परिवार की आर्थिक योजना को आसान बनाता है, तो उसका प्रभाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य में भी दिखाई देता है। बिलासपुर की श्रीमती रचना सोनी के लिए महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत ऐसा ही एक अवसर लेकर आई। अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराने पर उन्हें लगभग 35 हजार रुपये की बचत हुई। रचना सोनी ने बताया कि शुल्क में मिली इस राहत से संपत्ति पंजीयन का खर्च कम हुआ और परिवार के लिए आर्थिक रूप से भी सहूलियत मिली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप, वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत दी जा रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन पहलों के जमीनी प्रभाव, उनके अनुभव और सुझावों को जान रहा है। रजिस्ट्री का खर्च घटा, परिवार के लिए बनी आर्थिक राहत श्रीमती रचना सोनी ने बताया कि संपत्ति अपने नाम कराने के दौरान पंजीयन शुल्क में मिली 50 प्रतिशत की छूट से उन्हें 35 हजार रुपये की बचत हुई। उनके अनुसार, संपत्ति खरीदने या पंजीयन कराने में होने वाले खर्च के बीच यह बचत परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत है। इससे एक ओर पंजीयन का आर्थिक बोझ कम हुआ, वहीं दूसरी ओर बची राशि का उपयोग परिवार की अन्य आवश्यकताओं और भविष्य की आर्थिक योजना में किया जा सकता है। रचना सोनी के लिए यह सुविधा केवल शुल्क में कमी तक सीमित नहीं रही। अपने नाम संपत्ति का पंजीयन होने से उन्हें संपत्ति पर अपने स्वामित्व का अनुभव मिला और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी को भी मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व से जोड़ने वाली ऐसी पहल उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वासी बनाने में सहायक होती है। 4 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत हुआ पंजीयन शुल्क महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस तरह महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिल रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करना और उन्हें सीधे आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना है। रचना सोनी की कहानी इसी पहल के जमीनी प्रभाव को सामने लाती है। 35 हजार रुपये की बचत उनके लिए पंजीयन प्रक्रिया में मिली आर्थिक राहत है, लेकिन इसके साथ अपने नाम संपत्ति का स्वामित्व उनके लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास से भी जुड़ा है। ‘सेवा संकल्प’ से सामने आ रही बदलाव की कहानियां ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभाग द्वारा हितग्राहियों से किए जा रहे सीधे संवाद से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि शासन की सुविधाओं और सुधारों का नागरिकों के जीवन पर किस तरह प्रभाव पड़ रहा है। रचना सोनी का अनुभव बताता है कि जब किसी नीति का लाभ सीधे परिवार तक पहुंचता है, तो वह बचत, सुविधा और आत्मविश्वास के रूप में दिखाई देता है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहन देने वाली यह पहल आर्थिक राहत के साथ महिलाओं की संपत्ति में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। रचना सोनी ने इस सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को संपत्ति पंजीयन में मिल रही यह रियायत उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उपयोगी कदम है।