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पावर परचेज कॉस्ट बढ़ने से बिजली दरों में बदलाव, व्यापारियों और इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली बिजली के बिलों में पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) की बढ़ोतरी के फैसले पर सरकार ने दावा किया है कि बिजली सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद दिल्ली सरकार ने राजधानी के बिजली उपभोक्ताओं को राहत दी है। बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर PPAC में हुई बढ़ोतरी का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। आशीष सूद ने साफ किया कि PPAC कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि बिजली कानूनों के तहत पहले से लागू एक नियामक प्रावधान है। इसके जरिए विजली वितरण कंपनियां ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत का एडजस्टमेंट करती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारणों से पिछले एक महीने में बिजली खरीद की लागत में करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उपभोक्ताओं पर इसका असर सिमित ऊर्जा मंत्री के अनुसार, इतनी बड़ी लागत वृद्धि के बावजूद दिल्ली सरकार के प्रयासों से उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रखा गया है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत PPAC बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि पहले PPAC की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि DERC के आदेश में बिजली वितरण कंपनियों को लागत की वसूली चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव न्यूनतम रहे। सूद ने कहा कि यह कदम बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे है, जबकि सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सूद ने बताया कि पहले PPAC की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है दुकानदारों और फैक्ट्री मालिकों की मुश्किलें बढ़ीं PPAC में बढ़ोतरी को लेकर दुकानदारों और फैक्ट्री मालिकों की टेशन बढ़ गई है। व्यापारी संगठन सीटीआई बृजेश गोयल ने सीएम रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है। दावा है कि इस बढ़ोतरी से हरियाणा और यूपी के अपेक्षा दिल्ली में कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। बिजली की नई दरें 10 जून से लागू हो चुकी है, जिसका असर जुलाई में आने वाले बिजली बिलो में दिखाई देगा बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली में कमर्शल और इंडस्ट्रीज के लिए बिजली की दरे पहले से ही पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा है। इंडस्ट्रीज हरियाणा और उत्तर प्रदेश शिफ्ट हो सकती हैं बिजली की दरे और बढ़ने से दिल्ली की इंडस्ट्रीज पड़ोसी राज्यो हरियाणा और उत्तर प्रदेश में शिफ्ट हो सकती है क्योंकि वहां बिजली की दरें और न्यूनतम मजदूरी दिल्ली की तुलना में सस्ती होने से लागत कम पड़ेगी। बृजेश गोयल ने कहा कि रेजिडेशल बिजली दरो में सब्सिडी मिलती है, लेकिन कमर्शल और इंडस्ट्रीज में सब्सिडी नहीं मिलने से यहां बिजली की दरे हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा हो जाएंगी। जिससे व्यापारियों और फैक्ट्री मालिको पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और वस्तुओ के दाम बढ़ने की संभावना बढ़ेगी। अगर यही स्थिति रही तो कारोबारी अपना कारोबार हरियाणा या यूपी में शिफ्ट करने को मजबूर होगे। सबसे ज्यादा बोझ बीएसईएस उपभोक्ताओं पर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए PPAC दरों में संशोधन के बाद 2 किलोवॉट स्वीकृत लोड वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिल में वितरण कंपनियों के अनुसार अलग अलग बढ़ोतरी होगी। बृजेश गोयल ने कहा कि DERC के आदेश में बिजली कंपनियो को लागत की वसूली चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव न्यूनतम रहे। जानिए किसे कितना चुकाना होगा बिल बीआरपीएल का PPAC 14.5% से बढ़कर 17.9% हो गया है। इसके चलते 200 यूनिट का बिल 866 रुपये से बढ़कर 889 रुपये यानी 23 रुपये अधिक होगा, लेकिन सब्सिडी के चलते बिल जीरो आएगा। 400 यूनिट का बिल 2,086 रुपये से बढ़कर 2.142 रुपये यानी 56 रुपये अधिक होगा। 600 यूनिट का बिल 3,850 रुपये से बढ़कर 3,952 रुपये हो जाएगा, यानी 102 रुपये की बढ़ोतरी होगी। BYPL में PPAC 11.7% से बढ़कर 17.4% कर दिया गया है, जो सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। 200 यूनिट का बिल 847 रुपये से बढ़कर 885 रुपये होगा, लेकिन बिल जीरो ही रहेगा। 400 यूनिट का बिल 2,041 रुपये से बढ़कर 2,133 रुपये यानी 92 रुपये अधिक होगा। 600 यूनिट का बिल 3,766 रुपये से बढ़कर 3,936 रुपये हो जाएगा, यानी 170 रुपये की बढ़ोतरी होगी। वहीं, TPDDL में PPAC 15.9% से बढ़कर 16% हुआ है। इसके बावजूद 200. 400 और 600 यूनिट की खपत पर बिल क्रमशः 876 रुपये, 2,110 रुपये और 3,894 रुपये ही रहेगा। बढ़ोतरी नहीं होगी।  

अब तक 1 लाख 82 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

भोपाल.  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत द्वितीय चरण के अंतिम दिन 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में 1 लाख 82 हजार 473 विद्यार्थियों ने प्रवेश प्राप्त कर लिया है। द्वितीय चरण में अब तक 86 हजार 679 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जिनमें 64 हजार 535 विद्यार्थी स्नातक (UG) तथा 22 हजार 141 स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी हैं। इससे पूर्व प्रथम चरण में 72 हजार 477 विद्यार्थियों ने स्नातक तथा 17 हजार 463 विद्यार्थियों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया था। अब तक कुल प्रवेशित विद्यार्थियों में 1 लाख 37 हजार 12 विद्यार्थी स्नातक पाठ्यक्रमों, 39 हजार 607 विद्यार्थी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों तथा 5 हजार 854 विद्यार्थी एनसीटीई पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले चुके हैं। एनसीटीई पाठ्यक्रमों के प्रथम चरण में आवंटित विद्यार्थियों के लिए प्रवेश शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित है। विभाग ने विद्यार्थियों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर शुल्क जमा कर प्रवेश सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरण के रूप में कॉलेज लेवल काउंसलिंग (CLC) के लिए पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। इच्छुक अभ्यर्थी 20 जून तक पंजीयन कर सकेंगे और 23 जून को महाविद्यालय आवंटन किया जाएगा तथा आवंटित अभ्यर्थी 30 जून तक प्रवेश शुल्क जमा कर अपने प्रवेश की पुष्टि कर सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु एवं पारदर्शी ढंग से संचालित किया जा रहा है तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले में 295 करोड़ रुपये से अधिक के 341 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पोंड़ी (राछा) में आयोजित कार्यक्रम में जिलेवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री साय ने 295 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 341 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 70.10 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 159 कार्यों का लोकार्पण तथा 224.90 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 182 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इन विकास कार्यों के माध्यम से सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, नगरीय अधोसंरचना तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा और जिले के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधिविधान से पूजा-अर्चना कर विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया तथा बटन दबाकर पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण कर उन्हें जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज का दिन जांजगीर-चांपा जिले के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि जांजगीर चांपा जिले को लगभग 295 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मिल रही है, जिससे क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और जनजीवन अधिक सुगम बनेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और अधोसंरचना से जुड़े कार्यों के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से जिले में विकास की नई संभावनाएं सृजित होंगी तथा आमजन को सीधे लाभ मिलेगा। विभिन्न विभागों के कार्य शामिल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लोकार्पित 159 कार्यों में जल संसाधन, वन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, सीजीएमएससी, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्य शामिल हैं। वहीं भूमिपूजन के 182 कार्यों में जल संसाधन विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, लोक निर्माण विभाग, सीजीएमएससी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के महत्वपूर्ण विकास कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्य केवल निर्माण नहीं होते, बल्कि वे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है और इसी सोच के साथ प्रदेश में विकास एवं जनकल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े तथा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

लंबित मामलों के निपटारे को मिलेगी रफ्तार, समर अवकाश के बाद कल से खुलेगा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में करीब एक माह से चल रहे समर वेकेशन ख़त्म हो गये हैं. अब यहां सोमवार 15 जून से सभी निर्धारित बेंचों में नियमित सुनवाई होगी . सोमवार से शुरू हो रहे सप्ताह की काज लिस्ट भी जारी कर दी गई है. हाईकोर्ट में गत 18 मई से समर वेकेशन शुरू हो गए थे जो करीब एक माह बाद अब समाप्त हो गये हैं. इस बीच हाईकोर्ट में आने वाले जरूरी मामलों की सुनवाई के लिए हर सप्ताह अलग अलग वेकेशन बेंचें निर्धारित की गईं थीं. इनमें सप्ताह के दो दिन डिवीजन बेंच समेत सिंगल बेंचों में भी सुनवाई होती रही, इस बीच कुछ महत्वपूर्ण निर्णय भी पारित किये गए. अब वेकेशन खत्म होते ही सब कुछ पहले की तरह होगा. गौरतलब है कि इससे पूर्व हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्क फ्रॉम होम की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. समर वेकेशन के बाद सोमवार 15 जून से जब यहाँ नियमित कामकाज प्रारंभ होगा, तब कोर्ट में पुरानी व्यवस्था के तहत सुनवाई होगी. कोर्ट रूम में अधिवक्ता खुद मौजूद रहकर अपने मामलों की पैरवी करेंगे हालांकि वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा भी पहले की तरह लागू रहेगी.

दो दिवसीय पुलिस महानिरीक्षक जोन/विसबल जोन की त्रैमासिक समीक्षा बैठक संपन्न

भोपाल.  पुलिस मुख्यालय भोपाल के कॉन्फ्रेंस हॉल मेंआयोजित जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक तथा विशेष सशस्त्र बल (विसबल) जोनों की दो दिवसीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक रविवार को संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने की। बैठक के समापन अवसर पर पुलिस महानिदेशक मकवाणा ने प्रदेश में बेहतर पुलिसिंग, प्रशासनिक दक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार प्रदान किया जाना है, उनके प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर दायित्व सौंपे जाएं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में गति आए और कर्मचारियों का मनोबल बढ़े। डीजीपी मकवाणा ने सभी इकाइयों को लंबित न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों, रिट याचिकाओं तथा स्थगन आदेशों की स्थिति की ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सतत निगरानी की जाए तथा समय-सीमा में जवाब दावा एवं आवश्यक अभिमत प्रस्तुत कर प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर विशेष बल देते हुए निर्देशित किया कि सभी कार्यालयीन कार्यों को अधिकतम रूप से डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से भारमुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाए। डीजीपी ने विभागीय जांच प्रकरणों के त्वरित निराकरण, उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कृत करने तथा उनके नाम विभिन्न राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों, विशेषकर के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों को पहचान और सम्मान मिलना आवश्यक है, जिससे पुलिस बल में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा एवं कार्य संस्कृति विकसित हो सके। उन्होंने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी मामलों की व्यक्तिगत स्तर पर समीक्षा कर उनका प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करें। सीसीटीवी नेटवर्क, सेफगार्ड योजना एवं संसाधन प्रबंधन पर विशेष जोर पुलिस महानिदेशक ने निर्देशित किया कि प्रदेश में स्थापित सभी सीसीटीवी कैमरे सदैव चालू एवं कार्यशील स्थिति में रहें तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सेफ सिटी, टेलीकॉम तथा थाना सीसीटीवी योजनाओं का प्रभावी संचालन अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों की पहचान में किया जाए। नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में भी सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार प्राथमिकता से किया जाए।सेफगार्ड योजना के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित लगभग एक लाख कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाए, जिसका उपयोग कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन एवं अपराध नियंत्रण सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके। डीजीपी ने उपलब्ध मानव संसाधनों के समुचित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पर बल देते हुए निर्देशित किया कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर पर पदस्थापना की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार संसाधनों का पुनर्विन्यास किया जाए। उन्होंने पुराने अभिलेख एवं आदेशों की समीक्षा कर लंबित प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी जिलों को पुलिस भूमि एवं परिसंपत्तियों का व्यवस्थित जिलेवार प्रबंधन सुनिश्चित करने, पुलिस भूमि की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवॉल निर्माण कराने तथा वृक्षारोपण अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य डीजीपी मकवाणा ने कहा कि जिस प्रकार प्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त हुआ है, उसी प्रकार अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” का लक्ष्य प्राप्त करना है। यह अभियान केंद्र सरकार एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री जी की प्राथमिकताओं के अनुरूप संचालित किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान संचालित किया जाए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध रूप से “ड्रग फ्री जोन” बनाने के निर्देश दिए। डीजीपी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में पुलिस कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण हेतु जिला पुलिस अधीक्षक प्रतिमाह सिविल सर्जन के साथ बैठक आयोजित करें। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए तथा चिन्हित अस्पतालों के साथ एमओयू कर उपचार एवं भर्ती की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाया जाए। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने, समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण और क्रम से निराकरण सुनिश्चित करने तथा नियमित जनसुनवाई आयोजित कर नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में पुलिस अधीक्षकों की बैठक आयोजित कर समीक्षा बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जोनल स्तर पर प्रत्येक माह विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित कर योजनाओं एवं अभियानों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाए। कार्यों को व्यवस्थितएवं परिणामोन्मुख तरीके से संचालित किया जाए। प्राथमिक जांचों एवं अन्य लंबित प्रकरणों को बिना अंतिम निष्कर्ष के लंबित न रखा जाए, बल्कि उन्हें तार्किक एवं विधिसम्मत परिणाम तक पहुंचाया जाए। विभिन्न शाखाओं की कार्यप्रणाली एवं अपराध नियंत्रण की हुई विस्तृत समीक्षा दो दिवसीय बैठक में प्रदेश के सभी जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, विसबलजोनों के अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा कर प्रभावी पुलिसिंग के लिए रणनीति तैयार करना था। समीक्षा के दौरान मध्यप्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत अपराध विश्लेषण की विस्तृत समीक्षा की गई। इसमें महिलाओं के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती तथा मॉबलिंचिंग जैसी गंभीर घटनाओं की स्थिति का जोनवार एवं जिलावार विश्लेषण किया गया। अपराध नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों एवं आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर भी चर्चा हुई। न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा के अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय में लंबित मामलों, अवमानना प्रकरणों, सेवा संबंधी दावों, रिट याचिकाओं, स्थगन आदेशों तथा समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को न्यायालयीन मामलों की सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों तथा विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों से संबंधित लंबित प्रशासनिक मामलों की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त सूबेदार, निरीक्षक एवं रक्षित निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के बुनियादी प्रशिक्षण की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत विगत छह माह में की गई कार्यवाहियों, चिन्हित ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों, मादक पदार्थों के … Read more

पटना कोचिंग विवाद में नया मोड़, खान सर केस में नोटिस जारी कर थाने बुलावा

पटना  केस मुकदमे में फंसे कोचिंग गुरु फैसल खान उर्फ खान सर के कोचिंग सेंटर खान ग्लोबल स्टडीज से मैनेजर कन्हैया सिंह समेत तीन कर्मियों को पटना पुलिस ने नोटिस भेजकर तलब किया है। कोचिंग सेंटर पर नोटिस चस्पा करके तीनों को कदमकुआं थाने पर की गयी है। कोचिंग पर हमला, हंगामा और तोड़फोड़ के मामले में मैनेजर कन्हैया सिंह ने एफआईआर दर्ज कराया था। बार-बार बुलाने और रिमांडर देने पर भी वे पुलिस के पास नहीं जा रहे थे। रविवार को बजरिए नोटिस उन्हें थाने पर तलब किया गया है। खान ग्लोबल स्टडीज के 2 अन्य कर्मियों अजित कुमार और अंकित कुमार पांडे को भी पुलिस ने थाने पर तलब किया गया है। तीनों के नाम से निकले नोटिस में कहा गया है कि कदमकुआं थाना कांड संख्या 410/26 में अनुसंधान के क्रम में पूछताछ के लिए आपका सहयोग नहीं मिल रहा है। पहले से मौखिक और लिखित रुप से सूचना देने पर भी आप लोग थाने पर केस सी जानकारी देने के लिए नहीं आ। कहा गया है कि आपकी उपस्थिति थाने में अनिवार्य है। थाने में उपस्थित होकर पूछताछ में सहयोग करें। निर्देश का पालन नहीं करने पर कार्वाई की चे यह भी कहा गया है कि यदि आप बिना उचित कारण के इस नोटिस का अनुपालन नहीं करते हैं तो आपके खिलाफ विधि सम्मत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी जिसके लिए आप स्वयं उतरदायी होंगे। चार बजे तक उन्हें थाने पर पहुंचने का निर्देश दिया गया था। जानकारी के अनुसार निर्धारित समय पर ये लोग नहीं पहुंचे थे। कोचिंग में तोड़ फोड़ मामले में कन्हैया सिंह ने पटना पुलिस को आवेदन दिया गया था। इसी के आधार पर केस दर्ज हुआ और ज्ञान बिन्दु के संचालक रोशन सर की गिरफ्तारी हुई। इसी दौरान खान सर के गार्ड द्वारा फायरिंग किए जाने पर एक और एफआईआर दर्ज किया गया और दो गार्ड को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसी मामले में खान सर की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट से रोक लगी है। ज्ञान बिंदु कोचिंग के छात्र-छात्राओं ने खान सर की गिरफ्तारी के लिए गांधी मैदान के पास जोरदार प्रदर्शन किया। गिरफ्तारी की आशंका के बीच खान सर अंडर ग्राउंड हो गए। कोर्ट में सरेंडर की खबरें भी आईं।खान सर की ओर से एंटिसिपेटरी बेल पेटिशन दाखिल किया गया। इससे पहले खान सर प्रकरण में दिन रात हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। इधर कोचिंग विवाद में जेल में बंद रोशन सर के भाई प्रिंस यादव की नेपाल के एक होटल में मौत हो गई। प्रिंस की हत्या की बात बताई जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – राज्य सरकार प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों की स्थापना को कर रही है प्रोत्साहित

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है। छोटे उद्योग करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश में रोजगारपरक उद्योगों की स्थापना को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। हमारा उद्देश्य वर्ष 2047 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई स्थापित करने का है। सूक्ष्म, लघु, और मध्यम उद्यम प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हर जिले में उद्योग, हर परिवार में रोजगार और हर युवा को अवसर देना राज्य सरकार का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत, दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। जिस प्रकार हर 12 वर्ष में सिंहस्थ स्नान का अवसर मिलता है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन के 12 वर्ष से देशवासियों को अमृत स्नान का अवसर प्राप्त हुआ है। बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एमएसएमई क्षेत्र का कायाकल्प हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक से प्रोत्साहन राशि और हितलाभ वितरण के लिए आयोजित 'समृद्ध एमएसएमई- विकसित मध्यप्रदेश' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्ट-अप प्रोत्साहन के लिए संचालित गतिविधियों पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का औद्योगिक संगठनों ने किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया। साथ ही 31 मार्च 2026 तक की समस्त देयताओं का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को दो करोड़ 02 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को एक करोड़ 07 लाख रुपये मण्डीशुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों का विद्युत टैरिफ रुपए तीन करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण सिंगल क्लिक से किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी किया। विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा, अलाना ग्रुप के संस्थापक सुराशि बहल मेहरा और उद्यमी कुणाल ज्ञानी ने मध्यप्रदेश में उद्यम स्थापित करने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिक्की के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल सरवैया तथा उद्यमी श्रीमती प्रतिभा यादव, डॉ. सुरेश दुबे, दिनेश चंदवानी, यशराज वर्मा से संवाद भी किया। 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में सवा करोड़ से अधिक लोगों को मिला रोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यमशीलता और नवाचारों में मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी है। प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसमें 4 लाख 41 हजार से अधिक इकाइयों की कमान बहनें संभाल रही हैं, यह महिला सशक्तिकरण का उदाहरण भी है। आगामी ढाई वर्षों में 4 हजार 500 करोड़ रुपये देकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मजबूती देने का लक्ष्य है। एमएसएमई विकास, नीति उद्यमियों को मजबूती प्रदान कर रही है। इसके अंतर्गत निवेश पर 40 प्रतिशत, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को 60 प्रतिशत तक प्रोत्साहन तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों को 8 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता प्रदान की जा रही है। एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने के लिए नियमों को सरल किया गया है। पिछले ढाई वर्षों में 30 नए औद्योगिक क्षेत्र और 14 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही 1 हजार 63 भूखंड, उद्यमियों को आवंटित किए जा चुके है। आने वाले ढाई वर्षों में 60 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर विकसित करने और 6 हजार से अधिक भू-खंड नए उद्यमियों को देने का लक्ष्य है। सरकार द्वारा दी जा रही सहायता केवलू अनुदान नहीं, बल्कि उद्यमियों के सपनों को गति देने का माध्यम है। इससे नए उद्योग स्थापित होंगे, उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। प्रदेश के युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को इससे नए अवसर प्राप्त होंगे। मध्यप्रदेश के उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। सरकार तकनीक, वित्त और आवश्यक मार्गदर्शन देकर स्थानीय उद्यमों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। स्टार्ट-अप रैंकिंग में मध्यप्रदेश को "लीडर" श्रेणी का सम्मान मिला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप आज देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 7 हजार 400 से अधिक हो चुकी है, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत 3 हजार 400 से अधिक स्टार्ट-अप्स का नेतृत्व हमारी बहनें कर रही हैं। स्टार्ट-अप्स के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना' के तहत पिछले ढाई वर्षों में 23 हजार 500 से अधिक युवाओं को 1 हजार 630 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। स्टार्टअप रैंकिंग में मध्यप्रदेश को "लीडर" श्रेणी का सम्मान मिला है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर हो। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में सब्सिडी युक्त 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल पर को-वर्किंग स्पेस तैयार किए जाएंगे। राज्य शासन की हैंडहोल्डिंग नीतियों से प्रदेश के युवा उद्यमी वैश्विक स्तर पर बना रहे हैं पहचान सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को औद्योगिक विकास में आगे रखने के लिए अनथक परिश्रम किया है। वे प्रदेश के विभिन्न जिलों में सभी वर्ग के उद्यमियों के साथ संवाद कर रहे हैं। प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अभूतपूर्व विकास हुआ है। प्रदेश की जीडीपी में कृषि की 40 प्रतिशत और उद्योगों की हिस्सेदारी मात्र 19 प्रतिशत थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे बदलने का संकल्प लिया है, उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश बदल रहा है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। राज्य शासन की हैंडहोल्डिंग नीतियों के परिणाम स्वरूप प्रदेश के युवा उद्यमी राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। … Read more

सीएम योगी ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति व्यक्त की संवेदना

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कई जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली गिरने से हुई जनहानि के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनहानि, पशुहानि का आकलन कर पीड़ित परिवारों को 24 घंटे में मुआवजा उपलब्ध कराएं। किसी भी आवश्यकता पर शासन को तत्काल अवगत कराएं।  शनिवार को कासगंज, चंदौली, मीरजापुर, बाराबंकी जिले में वर्षा व आकाशीय बिजली गिरने से जनहानि व पशुहानि हुई। इसकी जानकारी होने पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रशासन के आलाधिकारी प्रभावित परिवारों से संवाद बनाकर उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाएं। मुख्यमंत्री ने आंधी, पानी, ओलावृष्टि आदि के मद्देनजर वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में रहकर आमजन से संवाद करने और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों के सम्बंध में भी जानकारी ली। आपदा पीड़ित मंडलों के आयुक्त, जनपदों के जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उन्होंने निर्देश दिया कि घायलों का उचित इलाज हो, उन्हें दवाएं व स्वास्थ्य सुविधाएं समय से उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने घायलों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।  मुख्यमंत्री ने आमजन से भी अपील की कि विपरीत मौसम में बचाव का विशेष ध्यान रखें। आंधी में होर्डिंग, ग्लोसाइन बोर्ड, बिजली के तार आदि के पास न खड़ें हों। घर के बच्चों, बुजुर्गों के साथ ही पशुओं का भी विशेष ध्यान रखें।

रक्तदान सबसे बड़ा दान, इससे बड़ी कोई सेवा नहीं – राज्यपाल डेका

रायपुर.  मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है दूसरे के जीवन की रक्षा करना और यह अपने ही रक्त के एक बूंद से हो सके तो इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं है। रक्त का दान सबसे बड़ा दान होता है। राज्यपाल रमेन डेका ने आज प्रदेश के स्वैच्छिक रक्तदाताओं का सम्मान करते हुए उक्त बातें कहीं। 30 स्वैच्छिक रक्तदाताओं सहित विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के सदस्य हुए सम्मानित विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मानित करने के लिए लोकभवन में समारोह आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस के अध्यक्ष राज्यपाल डेका ने सर्वाधिक रक्तदान करने वाले प्रदेश के 30 स्वैच्छिक रक्तदाताओं सहित विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर लोकभवन में रेडक्रॉस द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमें लोकभवन के अधिकारियों- कर्मचारियों सहित अन्य लोगों ने उत्सव पूर्वक रक्तदान किया। रक्तदाताओं ने निःस्वार्थ भाव से रक्तदान कर लोगों को नया जीवन दिया है कार्यक्रम को संबोधित करने हुए राज्यपाल ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है और यह केवल स्वस्थ व्यक्ति के स्वैच्छिक दान से ही उपलब्ध हो सकता है। राज्यपाल ने कहा कि थैलेसीमिया, सिकल सेल, एनीमिया, हिमोफिलिया, कैंसर तथा दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में रक्त की आवश्यकता जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां के लोगों में जो सेवा भाव है वह दूसरी जगह देखने को नहीं मिलती। रक्तदाताओं ने वर्षो से निःस्वार्थ भाव से रक्तदान कर अनेक लोगों को नया जीवन दिया है। ऐसे रक्तदाता समाज के लिए प्रेरणा हैं और उनकी सेवा भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण है। राज्यपाल ने रेडक्रॉस ब्लड बैंक और उसकी टीम के कार्यो की भी सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था वर्षो से जरूरत मंदों तक जीवनदायी रक्त पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। रेडक्रॉस स्मारिका का विमोचन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमेन तोमन साहू ने स्वागत उदबोधन दिया तथा छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव डॉ. रूपल पुरोहित ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर रेडक्रॉस स्मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस के उपाध्यक्ष रूपेश पाणिग्रही, कोषाध्यक्ष संजय पटेल, रेडक्रॉस ब्लड सेंटर रायपुर के प्रभारी डॉ. सत्यनारायण पाण्डेय, पूर्व चेयरमेन अशोक अग्रवाल रेडक्रॉस के पदाधिकारी, स्वैच्छिक रक्तदाता तथा सहयोगी, संस्थानों तथा संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – मातृ शक्ति का आशीर्वाद बना संबल, विकास पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बुन्देलखंड की धरती ने अपने गौरवशाली अतीत को संजोकर रखा है। बुन्देलखंड के वीरों ने अतीत से लेकर आज तक देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है। मातृ शक्ति का आशीर्वाद सरकार के लिए संबल प्रदान कर रहा है। उनकी सहभागिता एवं नेतृत्व के माध्यम से आज मध्यप्रदेश विकास पथ पर आगे बढ़ता हुआ भारत को विकसित बनाने में अपना सहयोग दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर जिले के केसली में रविवार को आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगभग 190.85 करोड़ रुपये की लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करते हुए शिलापट्टिका का अनावरण किया। इसमें लगभग 68.83 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 25 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं 122.02 करोड़ रुपये की लागत से 28 कार्यों का भूमि-पूजन कर लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त भी जारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृ शक्ति का सशक्तिकरण और उनका नेतृत्व वर्तमान की आवश्यकता है और सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार का कार्य कर रही है। लाड़ली बहना योजना तीसरे साल में प्रवेश कर रही है, जिसके माध्यम से प्रत्येक माह बहनों के बैंक खातों में राशि प्रदान की जा रही है। लाड़ली बहना योजना हमारी माताओं बहनों के आर्थिक स्वावलंबन का आधार बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इससे सुखद बात क्या हो सकती है कि लाड़ली बहना योजना से मिली राशि से बहनें अपने परिवार के संचालन में सहयोग कर रही हैं। यह उनका समर्पण है, उनका अपना त्याग है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक स्तर में बड़ा सुधार आया है। उन्होंने कहा कि बहनों एवं मातृशक्ति के आशीर्वाद से राज्य सरकार निरंतर विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। आज उनके मन में शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का विश्वास बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश सरकार कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। उनके खेतों के लिए पानी की व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक करने का है। जब किसान के खेत में पानी आता है तो उसके साथ उसके जीवन में बदलाव आता है। दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के लिए भी सरकार कार्य कर रही है। जहाँ सरकार ने गौमाताओं के लिए प्रतिदिन खर्च को बढाया है, वहीं दुग्ध उत्पादन एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए सरकार योजनाएं चला रही है एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनुदान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों तक लगातार प्रधानमंत्री पद रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की लोकल्याणकारी योजनओं के माध्यम से आज जरूरतमंदों को आवास, स्वास्थ्य सहित समस्त सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अनेक कार्य किए जा रहे है। आवासहीनों को आवास, भूमिहीनों को भूमि के पट्टे मिल रहे हैं और महिलाओं को संबल मिल रहा है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से महिलाओं की समाज एवं परिवार में स्थिति मजबूत हुई है। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि सरकार द्वारा आपके लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, पात्रता अनुसार उनका लाभ उठाइए। मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केसली में आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने केसली में सांदीपनि विद्यालय सेकण्ड फेज का कार्य प्रारंभ करने, शासकीय हाई स्कूल चिरचिटा सुखजू में हायर सेकण्डरी स्कूल तक उन्नयन करने, शासकीय हाई स्कूल देवरी, नाहरमऊ, नन्ही देवरी का उन्नयन करने, कृषि उपज मंडी केसली का नाम रानी अवंतिबाई के नाम पर रखने, देवरी में 100 बिस्तरों का अस्पताल स्टाफ सहित प्रारंभ करने की घोषणा की। वहीं मुख्यमंत्री ने केसली क्षेत्र में थावरी जलाशय (लागत लगभग 550 करोड़) की योजना को स्वीकृति दी तथा कहा कि किसानों की इस बहुप्रतीक्षित मांग से क्षेत्र में कृषि के क्षेत्र में क्रांति आएगी। मुख्यमंत्री ने देवरी में प्याज और लहसुन की खरीदी के लिए मंडी में खरीदी केन्द्र बनाने की घोषणा की। शासकीय महाविद्यालय देवरी में विज्ञान संकाय तथा कला संकाय में राजनीति विषय का आरंभ करने, केसली महाविद्यालय में कला एवं वाणिज्य संकाय में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्ररंभ करने, देवरी नगर का नाम देवपुरी करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग के अनुरूप देवखंडेराव मंदिर का पर्यटन स्थल के रूप में विकास किया जाएगा। ग्राम पंचायत गौरझामर एवं ग्राम पंचायत केसली को नगर पंचायत बनाने की भी घोषणा की। जनसामान्य में दिखा अपार उत्साह, मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहनों पर की पुष्पवर्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सागर जिले के देवरी विधानसभा अंतर्गत केसली ब्लॉक में यह पहला और महत्वपूर्ण आगमन था। मुख्यमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में उनका यह पहला दौरा था, जिसे लेकर स्थानीय जनता और प्रशासन में भारी उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैंप से लाड़ली बहनों के बीच पहुंचकर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कार्यक्रम में उपस्थित लाड़ली बहनों में उत्साह एवं उल्लास देखने को मिला। इस अवसर पर महिलाओं ने धन्यवाद लाड़ले भैया लिखे प्लेकार्ड प्रदर्शित कर मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। लाड़ली बहनों संग खेला सितोलिया, 'लाड़ली बहना खेल सप्ताह' का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर जिले के केसली में एक बेहद अनूठे और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहाँ लाड़ली बहनों के साथ पारंपरिक खेल सितोलिया (पिट्टू) खेलकर 'लाड़ली बहना खेल सप्ताह' का भव्य शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने न केवल कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि खुद मैदान में उतरकर खेलों में सक्रिय सहभागिता की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर और उन्हें बच्चों व युवाओं की तरह पारंपरिक खेल खेलते देख वहाँ मौजूद महिलाओं और लाड़ली बहनों का उत्साह दोगुना हो गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को स्वस्थ, जागरूक और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। हितग्राहियों को वितरित किए … Read more