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UP में स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार, CHC से PHC तक बढ़ी सुविधाएं

योगी सरकार में यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिली नई रफ्तार – साढ़े नौ वर्षों में स्वास्थ्य ढांचे का हुआ विस्तार, सीएचसी से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक बढ़ी सुविधाएं – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 821 से बढ़कर 977 हुए, करीब 19% की हुई वृद्धि  – नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 542 से बढ़कर 721 हुए, करीब 33% का हुआ इजाफा – सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं और क्रिटिकल केयर सुविधाओं का भी हुआ विस्तार  लखनऊ  योगी सरकार के कार्यकाल में साढ़े नौ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। प्रदेश में जिला स्तर से लेकर सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का नेटवर्क बढ़ा है। इसके साथ ही क्रिटिकल केयर, डायग्नोस्टिक सेवाओं, नर्सिंग शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। सीएचसी नेटवर्क में 19 प्रतिशत का हुआ इजाफा योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए साढ़े नौ वर्षों में चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ाने, प्राथमिक और सामुदायिक स्तर पर सुविधाएं मजबूत करने तथा विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को जिलों और ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया है। वर्ष 2017 में प्रदेश में 109 जिला स्तरीय राजकीय एवं विशिष्ट चिकित्सालय थे, जिनकी संख्या वर्ष 2026 में बढ़कर 234 हो गई। इस तरह इन संस्थानों की संख्या में करीब 115 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। इसी अवधि में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की संख्या 821 से बढ़कर 977 हो गई। सीएचसी नेटवर्क में करीब 19 प्रतिशत का विस्तार हुआ। वहीं, ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 2,811 से बढ़कर 3,035 हुई है, जो करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि है। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विस्तार अपेक्षाकृत अधिक रहा। वर्ष 2017 में 542 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र थे, जबकि वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 721 हो गई। इस स्तर पर करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी 3,353 से बढ़कर 3,756 हो गई, जो करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि है। 29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर से स्वास्थ्य सेवाओं को मिली रफ्तार  प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे निचली इकाई माने जाने वाले स्वास्थ्य उपकेंद्रों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। वर्ष 2017 में प्रदेश में 20,573 स्वास्थ्य उपकेंद्र थे, जबकि वर्ष 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 28,845 हो गई। यह करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का संकेत मिलता है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ योगी सरकार ने नई सुविधाओं को भी स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने पर जोर दिया है। वर्ष 2017 में नगरीय आयुष्मान आरोग्य मंदिर नहीं थे, वर्ष 2026 तक इनकी संख्या 1,425 हो गई। प्रदेश में कुल 29,896 आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से 14,872 तथा अन्य माध्यमों से संचालित केंद्र भी शामिल हैं। 543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर खोले गये एनेस्थीसिया क्लीनिक   स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार के साथ मानव संसाधन तैयार करने के लिए नर्सिंग शिक्षा के नेटवर्क को भी बढ़ाया गया है। वर्ष 2017 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ नर्सिंग कॉलेजों की संख्या शून्य थी, जो वर्ष 2026 में 73 हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है। कुल 543 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनेस्थीसिया क्लीनिक तथा मानव संसाधन तैनाती की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट की संख्या 189 और ब्लड स्टोरेज यूनिट की संख्या 161 तक पहुंच चुकी है। क्रिटिकल केयर सेवाओं को मजबूत करने के लिए डिजिटल एक्स-रे मशीनों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। ईसीआरपी-2 के तहत 370 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डिजिटल एक्स-रे मशीनों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। योगी सरकार ने ऑक्सीजन प्लांट, ब्लड स्टोरेज, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, क्रिटिकल केयर ब्लॉक और इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब जैसी सुविधाओं को भी विस्तार दिया है।

पटना ग्रीनफील्ड टाउनशिप में हर भूखंड का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, GIS में दर्ज होगा डेटा

पटना  ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन का सर्वे पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण का काम शुरू होगा। इसमें सर्वे के दौरान जुटाए गए जमीन के आंकड़ों का राजस्व विभाग के रिकार्ड से मिलान किया जाएगा। हर भूखंड की माप, स्थिति और क्षेत्रफल की जांच राजस्व रिकार्ड के आधार पर होगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही टाउनशिप का अंतिम आधार नक्शा तैयार किया जाएगा। सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी को संबंधित विभागों के सहयोग से नवीनतम बंदोबस्त वर्ष के राजस्व रिकार्ड, अधिकार अभिलेख, मुकदमा अभिलेख, जमीन के नक्शे और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज जुटाने होंगे। सर्वे के बाद तैयार नक्शे का अंचल स्तर पर उपलब्ध राजस्व रिकार्ड से मिलान किया जाएगा। नक्शा सर्वे नंबर के आधार पर तैयार होगा। यदि मौके पर मिली जमीन की स्थिति और सरकारी रिकार्ड में दर्ज स्थिति में अंतर मिलता है तो उसे नक्शे में अलग से दर्ज किया जाएगा। हर भूखंड का अलग-अलग तैयार होगा डेटा टाउनशिप क्षेत्र के प्रत्येक भूखंड का अलग-अलग क्षेत्रफल दर्ज किया जाएगा। इसमें सर्वे के दौरान मिले क्षेत्रफल के साथ राजस्व रिकार्ड में दर्ज क्षेत्रफल की जानकारी भी रहेगी। यह पूरा डेटा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) में भी दर्ज किया जाएगा। इसके साथ जमीन के स्वामित्व और उसकी श्रेणी की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इससे टाउनशिप की योजना बनाते समय यह साफ रहेगा कि किसी भूखंड का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है, सरकारी रिकार्ड में कितना दर्ज है और जमीन किसके नाम या किस श्रेणी में दर्ज है। विभाग के अनुसार राजस्व रिकार्ड और मौके पर मिली स्थिति का मिलान करने से जमीन से जुड़े संभावित विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही टाउनशिप की योजना और भूमि उपयोग तय करने में भी सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे।  

झारखंड भाजपा की नई टीम में युवाओं और महिलाओं को मिलेगा ज्यादा प्रतिनिधित्व

रांची झारखंड प्रदेश भाजपा ने अपने सभी मोर्चा और प्रकोष्ठों के अध्यक्ष के नाम घोषित कर दिए हैं। अब इनकी अपनी कमेटी बननी है। सात मोर्चा में कुल मिलाकर 60 से अधिक नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया जाना है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड में नेताओं की अगली पीढ़ी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कमेटियों में शामिल होने वाले नामों में युवाओं की संख्या अधिक रहेगी। अपने सांगठनिक ढांचे में भाजपा 33 प्रतिशत महिलाओं को रखने की भी योजना बना रही है। खासकर युवा, महिला और किसान मोर्चा में नए नामों को शामिल कर भविष्य के लिए पार्टी नया कैडर का आधार तैयार करेगी। इन मोर्चों में करीब 60 प्रतिशत युवा, महिला, ओबीसी और आदिवासी समुदाय के नाम शामिल किए जाएंगे। प्रदेश नेतृत्व की तरफ से सभी मोर्चा अध्यक्षों को अपनी टीम दुर्गापूजा से पहले तैयार करने को कहा गया है। जिलों के प्रमुख चेहरों को मोर्चा में मिलेगा स्थान प्रदेश भाजपा के मोर्चों की कमेटी में जिलों के कार्यकर्ताओं को स्थान दिया जाएगा। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जिला स्तर पर अनुभवी नेताओं की कमी को देखते हुए इन नेताओं को प्रदेश में काम करने का मौका देकर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला प्रभारियों को ऐसे नाम बताने को कहा गया है। पिछले दिनों स्थानीय निकाय चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने जिलों में मजबूत सामाजिक आधार वाले नेताओं को सामने लाने का निर्देश दिया था।

गोशालाओं में होंगे मांगलिक कार्यक्रम, गो-पर्यटन से गांवों को मिलेगा नया रोजगार

गोशालाओं में हो सकेंगे मांगलिक कार्यक्रम, गो-पर्यटन से गांवों को मिलेगा कमाई का नया रास्ता स्थानीय ग्रामीणों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए बनेंगे आय के नए अवसर चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी योगी सरकार परंपरा और स्थानीय संस्कृति को देगी मंच, क्षेत्र की विशेषता के अनुसार तैयार होंगे गो-पर्यटन के अलग-अलग मॉडल लखनऊ  आने वाले समय में गांव की गोशालाएं भी स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की पहचान बनेंगी। योगी सरकार का यह विजन जल्द ही मूर्त रूप लेने वाला है। गो-संरक्षण के लिए संचालित गोशालाओं को अब परंपरा, भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की तैयारी है। चयनित गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को गो-पर्यटन से जोड़कर गांवों में आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते तलाशे जाएंगे। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गोशालाओं के इस प्रस्तावित नए स्वरूप में संरक्षण के साथ पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को भी स्थान मिलेगा। इसका उद्देश्य किसी क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा को वहां की गोशाला से जोड़ना है। इससे गोशाला केवल पशु संरक्षण का स्थान न रहकर ग्रामीण जीवन और स्थानीय पहचान से परिचित कराने वाला केंद्र बन सकती है। क्षेत्र के अनुरूप यहां ऐसी गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं, जो बाहर से आने वाले लोगों को गांव की जीवनशैली, पशुपालन और स्थानीय परंपराओं से जोड़ें। मांगलिक कार्यक्रमों के लिए भी खुलेंगे द्वार चयनित गोशालाओं में मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी व्यवस्था विकसित किए जाने की तैयारी है। इससे गोशालाओं का उपयोग केवल दैनिक गो-संरक्षण गतिविधियों तक सीमित न रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से भी जुड़ सकेगा। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसे स्थलों को विकसित करने की योजना है, जहां ग्रामीण परिवेश के बीच पारंपरिक कार्यक्रमों के आयोजन की सुविधा उपलब्ध हो सके। इससे गोशालाओं के आसपास आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अवसर बनेंगे। गो-पर्यटन का यह मॉडल हर जगह एक जैसा नहीं होगा। जिस क्षेत्र की जो विशेषता होगी, उसी के अनुरूप गोशाला का स्वरूप विकसित करने पर जोर रहेगा। कहीं लोक संस्कृति और परंपराएं आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं तो कहीं स्थानीय खान-पान, कला, शिल्प या ग्रामीण जीवनशैली को गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी अपनी विशेषताओं के आधार पर गो-पर्यटन के अलग-अलग मॉडल आकार ले सकते हैं। स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे अवसर आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गो-पर्यटन विकसित होने पर इसका दायरा केवल गोशाला परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के ग्रामीणों, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, छोटे कारोबारियों और खान-पान से जुड़े लोगों के लिए भी इससे नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय उत्पादों और सेवाओं की मांग बनने की संभावना है। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक स्वरूप संबंधित गोशाला और वहां विकसित की जाने वाली गतिविधियों पर निर्भर करेगा। इस मॉडल में गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गोशाला से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। गोशाला के आसपास स्थानीय उत्पादों, ग्रामीण कला और पारंपरिक गतिविधियों को स्थान मिलने से गांव की विशिष्ट पहचान को सामने लाने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित गतिविधियों का एक नया आधार तैयार हो सकता है। कान्हा हाउस और बड़े केंद्र भी होंगे विकसित उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो-संरक्षण केंद्रों को नया स्वरूप देने की रणनीति बनाई गई है। चयनित गोशालाओं के साथ कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को भी विकसित करने की तैयारी है। पूरी पहल का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि गोशालाओं को गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना से जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे संरक्षण की मूल भूमिका बरकरार रखते हुए उनके उपयोग का दायरा बढ़ सकता है। गांव आने वाला व्यक्ति केवल गोशाला देखने तक सीमित न रहे, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन को भी अनुभव कर सके, इसी सोच के अनुरूप मॉडल विकसित किए जाने की तैयारी है। गांव की पहचान बनेगी अपनी गोशाला ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन का आकर्षण अक्सर वहां की स्थानीय पहचान में छिपा होता है। हर गांव और क्षेत्र की अपनी कहानी, परंपरा और जीवनशैली होती है। यदि इन्हें व्यवस्थित ढंग से गोशालाओं से जोड़ा जाता है तो ये केंद्र ग्रामीण पर्यटन के नए पड़ाव बन सकते हैं। आने वाले समय में चयनित गोशालाओं का यह बदला हुआ स्वरूप गांव की पहचान का हिस्सा बन सकता है।

जींद के सुमित कुंडू की बॉक्सिंग में जीत, हिमांशु ने शूटिंग में जीता रजत

जींद. आइची-नागोया एशियन गेम्स में भारतीय बाक्सिंग अभियान की शुरुआत जींद जिले के गांव ढाकल के बाक्सर सुमित कुंडू ने शानदार जीत के साथ की। पुरुषों के 70 किलोग्राम भार वर्ग में सुमित कुंडू ने अपने शुरुआती मुकाबले में थाईलैंड के बुंजोंग सिंसिरी को 5-0 से हराकर अगले दौर यानी राउंड आफ-16 (प्री-क्वार्टर फाइनल) में जगह बनाई। एशियन गेम्स के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार सुमित का मुकाबला 21 सितंबर को निस्शियो जिम्नेजियम में हुआ। सुमित कुंडू की इस जीत से ढाकल गांव ही नहीं, बल्कि पूरे जींद और हरियाणा में खुशी का माहौल है। संघर्षों से भरा रहा है सुमित कुंडू का जीवन गांव ढाकल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी तक पहुंचने का सुमित कुंडू का सफर संघर्षों से भरा रहा है। सुमित ने 2018 नेशनल स्कूल गेम्स और 2019 खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2021 में उन्होंने अपने पदार्पण पर सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब हासिल किया। 2022 में थाईलैंड ओपन में स्वर्ण पदक जीतने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। लगातार दूसरी बार सुमित कुंडू ने कामनवेल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वे मेडल नहीं जीत सके। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल की उम्मीद है। हिमांशु ने फाइनल के लिए किया क्वालिफाई 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत की टीम ने रजत पदक अपने नाम किया। चीन ने स्वर्ण पदक और भारतीय टीम ने रजत पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम में रुद्राक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों व राकेश पार्थ शामिल रहे।

जयपुर से बाहर भी मिलेंगी विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं, राजस्थान में बनेगा नया हेल्थ मॉडल

 जयपुर  राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अब केवल नए अस्पताल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार का फोकस ऐसा एकीकृत स्वास्थ्य तंत्र विकसित करने पर है, जिसमें छोटे शहरों और क्षेत्रीय केन्द्रों तक विशेषज्ञ चिकित्सक, आधुनिक जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और डिजिटल हेल्थ की सुविधा पहुंच सके। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था के केंद्र में मरीज और उसका कल्याण होना चाहिए। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा। मुख्य सचिव जयपुर में एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन-2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘अगले दशक के लिए राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण’ विषय पर राज्य की भावी स्वास्थ्य कार्ययोजना साझा की। जयपुर से आगे बढ़ेगी आधुनिक चिकित्सा की पहुंच श्रीनिवास ने कहा कि उन्नत चिकित्सा सुविधाएं केवल जयपुर और बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। क्षेत्रीय केन्द्रों और छोटे शहरों में अस्पतालों के साथ विशेषज्ञ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और मजबूत रेफरल सिस्टम विकसित करना जरूरी है। इससे गंभीर बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। साथ ही छोटे शहरों में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक पहुंच, सार्वजनिक वित्त पोषण और नीतिगत दिशा देती है, जबकि निजी क्षेत्र निवेश, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ सेवाओं और नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों क्षेत्रों को मरीजों के हित में साझेदार के रूप में काम करना होगा। अस्पतालों की संख्या के साथ गुणवत्ता भी जरूरी मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के साथ होना चाहिए। संक्रमण नियंत्रण, पारदर्शी उपचार परिणाम, चिकित्सकीय जवाबदेही और निरंतर गुणवत्ता सुधार को अस्पतालों की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की इमारत और उपकरण अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन कुशल डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और स्वास्थ्य प्रबंधक तैयार करने में लंबा समय लगता है। इसलिए अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सतत चिकित्सा शिक्षा पर जोर देना होगा। डिजिटल हेल्थ में राजस्थान की मजबूत मौजूदगी श्रीनिवास ने बताया कि राजस्थान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में 8.37 करोड़ विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पंजीकरण में राजस्थान देश में दूसरे, स्वास्थ्य सुविधा पंजीकरण में पांचवें और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता पहचान संख्या के सृजन में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य का अगला चरण उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल और विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच समन्वय है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड से मरीजों को निर्बाध उपचार सुविधा मिलेगी और डॉक्टरों को मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बेहतर तरीके से उपलब्ध हो सकेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल चिकित्सा और प्रशासनिक निर्णयों में सहायक हो सकता है, लेकिन मानवीय निगरानी और मरीज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों, चिकित्सा शिक्षा, आतिथ्य सुविधाओं और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण राजस्थान में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर्यटन का बड़ा केन्द्र बनने की संभावनाएं हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र आने वाले समय में राज्य में निवेश, रोजगार और कौशल विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

पंजाब में पराली जलाने के 15 केस, अमृतसर सबसे आगे

पटियाला. पंजाब में खरीफ सीजन 2026 के तहत धान की कटाई के साथ ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर सैटेलाइट से पैनी नजर रखी जा रही है। पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) द्वारा 15 सितंबर से शुरू की गई विशेष सैटेलाइट मॉनिटरिंग के बाद शुरुआती आंकड़े जारी किए हैं। शुरुआती 6 दिनों में राज्य में आग लगने के 15 मामले सामने आए हैं। राहत की बात यह है कि पिछले दो वर्षों (2024 और 2025) की तुलना में इस बार 15 से 20 सितंबर के शुरुआती छह दिनों के दौरान पराली जलाने के मामलों में काफी गिरावट देखने को मिली है। जारी सैटेलाइट डेटा के अनुसार, 15 सितंबर से पराली जलाने के मामलों की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी गई। पहले दिन दो मामले सामने आए, जबकि 16 सितंबर को तीन मामले दर्ज किए गए। 17 सितंबर को खेतों में आग लगाने का कोई मामला नहीं मिला। वहीं, 18 और 19 सितंबर को एक-एक मामला सामने आया। अब 20 सितंबर को कुल 8 मामले सामने आए हैं। जिलावार कुल पराली जलाने के मामले (15 से 20 सितंबर 2026)

प्लॉट विवाद को लेकर टावर पर चढ़ी महिला, CM आवास के पास मची अफरातफरी

लखनऊ लखनऊ के गौतमपल्ली क्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास के पास सोमवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब आगरा से आई एक महिला पार्क रोड स्थित ऊंचे टावर पर चढ़ गई। महिला की पहचान तुलसा के रूप में हुई है। उसे टावर पर चढ़ा देखकर आसपास लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तुलसा का जमीन को लेकर पड़ोसी से विवाद चल रहा है। महिला का आरोप है कि पड़ोसी ने उसके प्लॉट पर कब्जा कर रखा है। उसने इस संबंध में स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की थी। तुलसा का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। आगरा से आई महिला लखनऊ में टावर पर चढ़ी महिला अपनी शिकायत अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए आगरा से लखनऊ पहुंची थी। सोमवार को वह मुख्यमंत्री आवास के पास पार्क रोड पर स्थित टावर पर चढ़ गई। महिला के टावर पर चढ़ने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। इससे कुछ देर के लिए वहां भीड़ और अफरातफरी की स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने महिला से बातचीत शुरू की और उसे नीचे आने के लिए समझाया। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों को भी मौके से दूर कर दिया, ताकि बचाव अभियान में किसी तरह की परेशानी न हो। पुलिस के समझाने पर मानी, क्रेन से उतारा गया काफी देर तक बातचीत और समझाने के बाद महिला पुलिस के आश्वासन पर टावर से नीचे उतर आई। पुलिस ने उसे सुरक्षित नीचे उतारने के बाद उसकी शिकायत और जमीन विवाद से जुड़ी जानकारी ली। अधिकारियों के मुताबिक, महिला के प्लॉट पर कब्जे के आरोपों की अभी प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है। मामले में महिला की शिकायत के आधार पर संबंधित तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों ठगे, CG में महिला समेत 2 गिरफ्तार

धमतरी. मंत्रालय में नौकरी और आवास दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले दो शातिर आरोपियों को धमतरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने गृह मंडल का पारिजात भवन दिलाने का झांसा देकर पीड़ित से 9 लाख से अधिक रुपए के अधिक की रकम ली थी. मामले में शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए आरोपी शशि प्रभा साहू और अमित देवांगन गिरफ्तार किया है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, भानपुरी, थाना गुरूर, जिला बालोद निवासी प्रार्थी मनीष साहू (27 वर्ष) ने धमतरी सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. प्रार्थी के अनुसार, फरवरी 2024 में उसकी मुलाकात रुद्री रोड स्थित एक होटल में शशि प्रभा साहू एवं अमित कुमार देवांगन से हुई थी. दोनों ने उसे अपने झांसे में लेते हुए स्वयं को मंत्रालय में कार्यरत बताया और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा पारिजात भवन (आवास) का आबंटन कराने का प्रलोभन दिया. आरोपियों ने प्रार्थी को विश्वास में लेने के लिए बाकायदा मंत्रालय (महानदी भवन) में ले जाकर बाहर खड़ा किया और भवन की कुल कीमत 14,12,000 रुपये बताई. प्रार्थी से विभिन्न बैंक खातों, फोन-पे, गूगल-पे और नकद माध्यमों से किश्तों में कुल 9,08,000 रुपये ऐंठ लिए. इसके अलावा प्रार्थी से बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टेट बैंक के दो खाली हस्ताक्षरित चेक भी ले लिए गए. जब प्रार्थी को अपने साथ ठगी का अहसास हुआ और उसने रकम वापस मांगी, तो केवल 2,98,999 रुपये लौटाए गए तथा शेष रकम हड़प ली. प्रार्थी की रिपोर्ट पर धमतरी सिटी कोतवाली में धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया. मामले में धमतरी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करते हुए तकनीकी साक्ष्यों और सूचना के आधार पर शशि प्रभा साहू पति प्रीतम साहू, (50 वर्ष) और अमित कुमार देवांगन पिता स्व. सुखराम देवांगन (38 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की. आरोपियों के जुर्म स्वीकार करने पर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. 

हुनर से स्वावलंबन तक, छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए बदल रही उच्च शिक्षा की तस्वीर

"सेवा_संकल्प_अभियान" छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की नई भोर: हुनर, शोध और स्वावलंबन से गढ़ा जा रहा युवाओं का भविष्य  रायपुर  ​छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अब केवल किताबों और कक्षाओं के पारंपरिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार युवाओं को केवल डिग्री देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का अभूतपूर्व कार्य कर रही है। ​सेवा का संकल्प: गुणवत्ता और समावेशी विकास का 'मिशन मोड'       ​राज्य सरकार ने 'सेवा का संकल्प' निभाते हुए शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 'छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन' की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत महाविद्यालयों के ढांचागत और शैक्षणिक उन्नयन के लिए विशेष बजटीय संबल दिया जा रहा है। पारदर्शी और सख्त मॉनिटरिंग तंत्र यह सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी सहायता का सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे।       ​शैक्षणिक गुणवत्ता को शीर्ष पर ले जाने के लिए 3,000 से अधिक छात्र संख्या वाले उत्कृष्ट कॉलेजों को चिन्हित कर 36 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, अध्यापन व्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्राध्यापकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी गई है और उद्योग जगत के व्यावहारिक विशेषज्ञों को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में परिसरों से जोड़ा जा रहा है। ​सेवा आपके द्वार: वनांचल से शहरों तक उच्च शिक्षा की आसान पहुँच        ​'सेवा आपके द्वार' की भावना को चरितार्थ करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी और दूरस्थ वनांचल अंचलों में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। अब बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा उनके अपने अंचल में ही उपलब्ध हो रही है। चार वर्षीय बी.एड. (ITEP) और बी.पी.एड. जैसे एकीकृत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। ​कहानी बदलाव की: आधुनिक तकनीक और स्वावलंबन से युवाओं का सशक्तीकरण         ​यह बदलाव केवल व्यवस्थागत नहीं, बल्कि हर उस युवा की 'कहानी बदलाव की' है जो कल तक केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित था। स्वावित्तीय पाठ्यक्रम नीति के तहत अब स्थानीय और वैश्विक मांग के अनुसार युवाओं को तैयार किया जा रहा है। ​   भविष्य में उपयोगी विभिन्न तकनीकों और कौशल को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग जैसे विषयों को प्रमुखता से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह ​स्थानीय व कृषि-आधारित उद्योग के तहत रेशम कीट पालन, टसर टेक्नोलॉजी, फिशरीज, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, फ्लोरीकल्चर और हर्बल कल्टीवेशन की शिक्षा युवाओ को आर्थिक रूप से मजबूत करेंगे।        ​इन व्यावहारिक विषयों के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योग जगत के साथ MoU किए गए हैं, जिससे युवाओं को सीधी इंटर्नशिप, व्यावहारिक अनुभव और कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा मिल रही है।         रिसर्च, कौशल विकास, उद्योग समन्वय और वनांचल तक शिक्षा के विस्तार के इस संगम से छत्तीसगढ़ तेजी से देश के अग्रणी 'एजुकेशन हब' के रूप में स्थापित हो रहा है। विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक