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शराब के शौकीनों के लिए खबर: दिल्ली में आज कोई दुकान नहीं खुलेगी

नई दिल्ली दिवाली के पावन पर्व के अवसर पर आज दिल्ली में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सोमवार को राजधानी में किसी भी शराब की दुकान को संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। यह निर्णय त्योहार के दौरान शांति और मर्यादा बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। विभाग ने सभी शराब विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश का सख्ती से पालन करें। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में हर साल त्योहारों के दौरान शराब की बिक्री पर रोक लगाने की परंपरा रही है, ताकि उत्सव का माहौल शांतिपूर्ण रहे। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस नियम का सम्मान करें।  

आलू की कमाई बढ़ाने का तरीका: दीघोट में उन्नत बीज और सिंचाई के गुर किसानों के लिए

होडल खंड के दीघोट गांव में किसान कल्याण मंच के तत्वाधान में किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों को शरद ऋतु में आलू की उन्नत खेती एवं अधिक पैदावार कैसे लें विषय पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डाॅ. महावीर सिंह मलिक मुख्य रूप मौजूद रहे, जबकि अध्यक्षता सरपंच ललित द्वारा एवं संचालन वीर सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर डाॅ. महावीर सिंह मलिक ने बताया कि आजकल आलू बिजाई का उचित समय चल रहा है,आलू की बाजार में सदैव मांग रहती है तथा अन्य सब्जियों की अपेक्षा इसका भाव भी अच्छा मिलता है। इसलिए किसान आलू की खेती करके काफी अच्छा लाभ कमा सकते हैं।  उन्होंने बताया कि आलू में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज लवण, प्रोटीन तथा उपयोगी अमीनो एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं। आलू का उपयोग आम आदमी की रसोई से लेकर महंगे होटलों में लजीज व्यंजन बनाने जैसे पापड़, चिप्स, चटनी, रायता व पकौड़े आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है, अपनी अत्यधिक उपयोगिता के कारण से ही आलू को सब्जियों का सम्राट भी कहा जाने लगा है। मलिक ने बताया कि आलू की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए किसान इसकी उन्नत तकनीक से खेती करके मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। आलू की अधिकतम पैदावार के लिए उन्नत किस्मों का प्रमाणित बीज, उचित समय पर बिजाई, संतुलित खादों का प्रयोग, समुचित सिंचाई तथा फसल को रोग व सर्दियों में पड़ने वाले पाले से सुरक्षा करना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि आलू की कुफरी बादशाह, कुफरी सतलुज, कुफरी सिंदरी, कुफरी स्वाति, कुफरी गंगा, कुफरी नीलगिरी आदि अच्छी पैदावार देने वाली किस्में है। आलू का स्वस्थ्य एवं विषाणु रहित बीज किसी भी प्रमाणित संस्था से लेना चाहिए। कोल्ड स्टोर से निकलने के बाद बीज को बोने से 10 से 12 दिन पहले छायादार स्थान में रखकर अंकुरित कर लेना चाहिए, क्योंकि आलू की बिजाई का समय अक्टूबर माह है। इसकी अगेती बिजाई सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी की जाती है। आलू को शरदकालीन गन्ना में अतः फसल के रूप में उगाकर दोहरा लाभ भी कमाया जा सकता है। कार्यक्रम में रामसिंह,बाबू ,रामस्वरूप, बुधन,राजवीर, शीशराम, लच्छी, हरी, तुहिराम आदि किसान मौजूद थे।     हल्की से भारी दोमट मिट्टी इसके लिए उपयोगी है। खेत में गोबर की खाद डालकर अच्छी तरह जुताई करके तैयार कर लेना चाहिए।     आलू का 10 से 12 कुंतल बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है तथा लाइन से लाइन का फैसला 60 सेंटीमीटर और केंद्र से केंद्र का फासला 20 सेंटीमीटर रखकर बिजाई करें। अगर केंद्र बड़े हो तो फैसला थोड़ा बढ़ा दे।     30 से 60 ग्राम वजन का आलू बीज बिजाई के लिए उपयुक्त रहता है तथा एक एकड़ के बीज को 250 ग्राम मैंकोजेब दवा को 100 लीटर पानी में मिलाकर उपचारित करने से बीज जनित बीमारियों से बचाव हो जाता है।     आलू में सामान्य सिफारिश के अनुसार 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 65 किलोग्राम में म्यूरेट पोटाश और 70 किलोग्राम यूरिया व 10 किलो जिंक सल्फेट बिजाई के समय ही डाल देना चाहिए।     बाद में 30 किलोग्राम यूरिया बोने के 25 से 30 दिन बाद डालकर मिट्टी चढ़ा दे। आलू में पहली सिंचाई बिजाई के 8-10 दिन बाद की जाए तथा बाद की सिंचाईय 10-15 दिन के अंदर पर करते रहें।     आलू में सिंचाई हल्की करें ताकि आलू की मेड़ दो तिहाई से ज्यादा पानी में न डूबे। यदि पानी हल्का तैलीय हो तो जांच के आधार पर जिप्सम का प्रयोग सिंचाई के साथ डालना चाहिए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश: त्यौहार मनाएं सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को संजोते हुए

प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के भाव से मनाएं आगामी त्यौहार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाए धूमधाम से आत्मनिर्भर भारत और जीएसटी उत्सव का सभी विधानसभा क्षेत्रों में हो आयोजन दीपावली पर स्वदेशी वस्तुओं के क्रय-विक्रय को करें प्रोत्साहित सभी जिलों में सामाजिक समरसता पर हों कार्यक्रम दीपावली पर वृद्धाश्रम, गरीब बस्तियों और अनाथ आश्रमों में साझा की जाएं खुशियां कलेक्टर्स, संवेदनशील घटनाओं और खबरों पर तत्काल लें संज्ञान सभी ओर हो पुलिस की उपस्थिति : जनसामान्य करे सुरक्षा की भावना महसूस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी त्यौहारों के संबंध में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस से किया संबोधित सांसद, विधायक, सहित सभी जिलों के कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक-नगरीय निकायों के पदाधिकारी और अधिकारी वीसी में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के लिए आगामी 21 और 22 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और गौशालाओं में गोवर्धन पूजा का आयोजन धूमधाम से किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियों का संचालन किया जाए। इन आयोजनों में मंत्री, सांसद, विधायक, नगरीय निकायों के पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हों। स्थानीय स्तर पर सक्रिय सांस्कृतिक मंडलों को सम्मिलित करते हुए कार्यक्रमों को उत्सव के रूप में मनाया जाए। पशुपालन विभाग इन आयोजनों के लिए नोडल विभाग रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगामी त्यौहारों के संबंध में रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से सांसद, विधायक, सहित सभी जिलों के कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक-नगरीय निकायों के पदाधिकारी और अधिकारियों को वीसी के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी दीपावली मनाते हुए आत्मनिर्भर भारत के भाव को सशक्त करने के उद्देश्य से त्यौहारों में स्वदेशी वस्तुओं के क्रय विक्रय को प्रोत्साहित किया जाए। आत्मनिर्भर भारत और जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आगामी 25 दिसंबर तक जारी रहेंगे। सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी मंत्रीजनप्रतिनिधि और कलेक्टर्स परस्पर समन्वय से तिथियां निर्धारित करते हुए आत्मनिर्भर भारत/जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आयोजित करें। इन आयोजनों में स्वदेशी वस्तुओं के प्रदर्शन एवं क्रय-विक्रय को बढ़ावा दिया जावे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक जिले में सामाजिक समरसता के आयोजन सम्पन्न किए जायें। इन आयोजनों में सामाजिक चेतनाशील प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए और सामाजिक समरसता की दिशा में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए विचार-विमर्श भी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिवाली पर्व हम सबके लिए है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से आहवान किया कि वे दीपावली पर वृद्धाश्रम, गरीब बस्तियों और अनाथ आश्रम जाकर उनके साथ दिवाली मनाएं। दिवाली के दूसरे दिन मजदूर मैदान, मजदूर हाट में जाकर श्रमिकों के साथ दिवाली की खुशियां साझा की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर्स द्वारा संवेदनशील घटनाओं और खबरों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। कलेक्टर्स की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं और समाचारों के संबंध में प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद तथा विधायकगण को वस्तुस्थिति से तत्काल अवगत करायें, उनके द्वारा आवश्यकतानुसार मौका स्थल का भ्रमण भी किया जाए। जिला कलेक्टर्स ऐसी सूचनाओं और खबरों पर तत्काल फैक्ट चेक और आवश्यकता हो तो खंडन जारी करें। प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री, सांसद, विधायक भी भ्रामक और समाज में सद्भावना बिगाड़ने वाली खबरों के संबंध में सही स्थिति रखें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस आवश्यक रूप से घनी बस्ती और चौराहों पर रहे, पुलिस बल भी इलाके में घूमें, पुलिस की उपस्थिति जनता के बीच दिखना चाहिए, जिससे जनता में सुरक्षा की भावना महसूस हो। विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा और विधायक भगवानदास सबनानी ने भी अपने विचार रखे।  

मध्य प्रदेश में बदलेगा शिकायत निवारण का सिस्टम, अब मुख्य सचिव देखेंगे लंबित मामलों को

 भोपाल  मुख्यमंत्री (सीएम) हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का शीघ्र समाधान हो, इसके लिए अब संबंधित विभाग के अधिकारी के अलावा लंबित शिकायतें मुख्य सचिव तक पहुंचेंगी। मध्य प्रदेश सरकार एल-4 के बाद अब एल-5 स्तर को भी जोड़ने जा रही है। यहां मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव की निगरानी में लंबित शिकायतों का समाधान होगा। एल-1 यानी पहले स्तर के अधिकारी को जवाबदेह बनाने के लिए कार्रवाई विवरण भरने के कालम में संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इसके अलावा अन्य स्तर पर भी अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर करने का नियम लागू किया जाएगा। सीएम हेल्पलाइन-181 में दर्ज समस्याओं के समाधान में लगातार देरी के बीच राज्य सरकार इसमें यह महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। फोर्स क्लोज करने से पहले शिकायतकर्ता को बताना होगा कारण शिकायतों के निराकरण के लिए एल-1, एल-2, एल-3 व एल-4 हैं। एल-1 से एल-3 तक निराकरण नहीं होता है तो वह एल-4 पर जाती हैं। यहां फिर भी लंबित रहती हैं या उसे फोर्स क्लोज कर दिया जाता है। अब ऐसा करने से पहले एल-5 लेबल पर मुख्य सचिव या अपर मुख्य सचिव भी शिकायतों का समाधान करेंगे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को यह भी बताना होगा कि उसकी शिकायत को फोर्स क्लोज क्यों किया जा रहा है। गुजरात मॉडल पर होगा काम यह पूरी व्यवस्था गुजरात मॉडल पर होगी। इसके लिए मप्र सरकार के अधिकारियों का एक दल गुजरात भेजा गया था। यहां दल ने गुजरात की सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली और निराकरण करने के तरीके व मानीटरिंग सिस्टम को समझा। गुजरात से आए दल ने मध्य प्रदेश की सीएम हेल्पलाइन की विशेषताओं और खामियों का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश की थी। इसमें बताया गया कि एल-1 स्तर पर उचित जिम्मेदारी नहीं होने से शिकायतों के समाधान में देरी होती है। अधिकांश कार्रवाई का विवरण कंप्यूटर आपरेटरों के भरोसे चलता है, जिसमें शिकायत का केवल प्रारंभिक ब्यौरा ही दिया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही नई व्यवस्था की जा रही है। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है     गुजरात मॉडल की तर्ज पर मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतें के निराकरण के लिए एल-5 स्तर को जोड़ा जा रहा है, इसमें मुख्य सचिव तक शिकायतें भेजी जाएगी। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है, शासन से अनुमति मिलने पर लागू करेंगे। – संदीप आष्ठाना, अवर सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय  

महाकाल की नगरी में भजनों की गूंज! दिवाली से शुरू होगा ‘महाकाल बैंड’, 30 कलाकार शामिल

उज्जैन  भगवान श्री महाकाल का धाम करोड़ों भक्तों की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर में लगभग 300 वर्ष पुरानी सिंधिया परंपरा के साथ अब मंदिर समिति नया अध्याय जोड़ने जा रही है. मंदिर समिति खुद का एक बैंड तैयार करने में जुटी है, जिसे बाबा महाकाल की होने वाली सभी आरती व अन्य आयोजनों के दौरान उपयोग में लिया जाएगा. सिंधिया शासन काल के वक़्त से शहनाई और नगाड़े आरती के दौरान बजाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है. मंदिर समिति अब भगवान महाकाल की पांचों आरतियों के दौरान विशेष बैंड तैयार करवा रही है. मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिकका कहना है "विशेष प्रकार का बैंड तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे ही काम पूरा हो जाएगा तो सभी को जानकारी साझा की जायेगी कि इसे कब-कहां, कैसे उपयोग में लाया जाना है." अभी मंदिर में दो बार होता है शहनाई वादन श्री महाकाल मंदिर में हर रोज आरती के दौरान नगाड़े बजते हैं तो वहीं सुबह भस्म आरती के बाद 06 बजे करीब और शाम में 07 बजे करीब संध्या आरती के आसपास शहनाई वादन की परंपरा है, जोकि लगभग 300 साल पुरानी सिंधिया शासन काल के दौरान शुरू की गई थी. मंदिर समिति के अनुसार जिस बैंड को तैयार किया जाना है, उसके लिए वाद्य यंत्रों की दानदाताओं के माध्यम से खरीदारी शुरू कर दी गई है. साथ ही मंदिर समिति बैंड बजाने के लिए वाद्य वादकों की भर्ती प्राक्रिया भी शुरू करने की तैयारी में है, जिसके लिए संभवतः आउटसोर्स के माध्यम से प्रयास होगा. बैंड पूरी तरह से धार्मिक परंपरा का हो श्री महाकाल मंदिर के महेश पुजारीका कहना है "शिव तो आदि अनादि हैं. उन्हें पौराणिक कथाओं में वाद्यों का रचयिता भी कहा गया है. वे नटराज हैं, कलाधर हैं. अगर मंदिर समिति बैंड पर विचार कर रही है और आरती के दौरान व अन्य आयोजन के लिए तो यह एक अच्छा प्रयास है. पुरानी परंपराओं के साथ नई परंपराओं को भी जोड़ना अच्छा है. बस सब कुछ धर्मसंवत् होना चाहिए. बैंड धार्मिक और सांस्कृतिक उपयोग के लिए ही हो."  

दिवाली पर बड़वानी में हिंगोट पर पाबंदी, ड्रोन से चेकिंग, पुलिस मुस्तैद

बड़वानी  दिवाली की रात कुछ जगहों पर 'आग के गोले' बरसने की पुरानी परंपरा देखने को मिलती है. इस बार बड़वानी प्रशासन और पुलिस ने इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. जिले में हिंगोट के निर्माण, भंडारण, क्रय-विक्रय और चलाने पर दो माह के लिए रोक लगा दी गई है. पुलिस को आदेश दिए गए हैं कि नियमों का कड़ाई से पालन कराए जाए. शहर-गांव की सड़कों पर जगह-जगह तैनात पुलिस अब हिंगोट चलाने वालों की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती. कई जगह डंडे लेकर खड़ी टीमें नजर आ रही हैं और निगरानी के लिए सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों का उपयोग भी किया जा रहा है. क्यों उठाया यह कदम, चोटें और जान-माल की आशंका हिंगोट जिसे कुछ स्थानों पर 'दीपावली युद्ध' का हिस्सा माना जाता है, असल में एक फल होता है, जिसे खाली करके उसमें बारूद और विस्फोटक सामग्री भरी जाती है. युद्ध की तरह खेले जाने पर यह तेज रफ्तार से उड़ता हुआ किसी के भी शरीर में घातक चोट पहुंचा सकता है. पिछले कुछ वर्षों में बड़वानी जिले में हिंगोट खेलने के दौरान कई गंभीर दुर्घटनाएं हुई हैं. पिछले साल एमजी रोड पर एक 8 वर्षीय बच्चे को गंभीर सिर की चोट लगी. अस्पताल में जांच में उसकी खोपड़ी में फ्रैक्चर व दिमाग पर असर पाया गया और लाखों रुपये खर्च कर उसकी जान बचाई गई थी. इसी तरह दर्ज घटनाओं व संभावित जान-माल के जोखिम को देखते हुए प्रशासन ने आपात कदम उठाने का निर्णय लिया. प्रशासनिक आदेश, दो माह का पूर्ण प्रतिबंध कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी जयति सिंह ने हिंगोट के निर्माण, भंडारण, विक्रय और उपयोग पर दो माह के लिए प्रतिबंध आदेशित किया है. एसडीएम भूपेंद्र रावत ने निर्देशों का पालन कराने और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी. आदेश में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम 1884, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, विस्फोटक नियम 2008 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 208 समेत अन्य प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है. पुलिस की तैयारी, पेट्रोलिंग, ड्रोन, सीसीटीवी और मुकदमे एडिशनल एसपी धीरज सिंह बबर ने बताया कि, ''एसपी के निर्देशानुसार पुलिस हिंगोट चलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर रही है. जिलेभर में कई संदिग्धों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं. दिन-रात पेट्रोलिंग, संदिग्ध व्यक्तियों व विक्रेताओं की निगरानी, मुखबिर नेटवर्क को सक्रिय करने के साथ-साथ जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. मुहल्लों में जाकर टीमों द्वारा लोगों को समझाया जा रहा है कि यह खतरनाक प्रथा क्यों बंद होनी चाहिए और इसे रोकना किस तरह समुदाय की सुरक्षा के लिए आवश्यक है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के उल्लंघन करने वालों के साथ सख्ती होगी. न केवल एफआईआर दर्ज की जाएगी, बल्कि आवश्यकतानुसार संपत्तियों व भंडारण पर भी कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की तुरंत सूचना पुलिस कंट्रोल रूम पर दें.      समाज का समर्थन और चेतावनी कई वार्डों व मोहल्लों के लोगों ने प्रशासन के निर्णय का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में हुई दुर्घटनाओं ने सबको हिलाया है और युवा वर्ग को इस तरह की खतरनाक रस्मों से दूर रखना चाहिए. वहीं कुछ परंपरावादी समुदायों में अभी भी यह रस्म जारी रखने की जिद दिखाई देती है, जिससे प्रशासन चौकन्ना है. एसडीएम भूपेंद्र रावत ने कहा, 'हमारा लक्ष्य केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि इस खतरनाक कुप्रथा को जड़ों से खत्म करना है ताकि आने वाले वर्षों में कोई भी परिवार इस तरह की त्रासदी का सामना न करे.'' हिंगोट क्या है, जानें खतरनाक प्रक्रिया हिंगोट मूल रूप से जंगलों से कच्चा तोड़ा जाने वाला फल है. इसे भीतर से खोखा कर लिया जाता है और फिर उसमें बारूद व विस्फोटक सामग्री भर दी जाती है. दीपावली के दिन ग्रामीण व युवा इसे एक खेल की तरह आपस में उछालते हैं, इस दौरान तेज धमाके व उड़ान के कारण गंभीर चोटें, आँखों व चेहरे पर आघात, हाथ-पैर कटने व यहाँ तक कि जान जाने तक की घटनाएं देखने को मिली हैं. इसलिए प्रशासन के लिए इसे नियंत्रित करना अनिवार्य हो गया है.

रामलला के अपमान पर CM योगी ने किया हमला, सपा पर जमकर बरसे अयोध्या में

अयोध्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अयोध्या में समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने न केवल रामलला को कैद करके रखा, बल्कि रामभक्तों पर गोली चलवाई और अयोध्या की पहचान मिटाने की कोशिश की। सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम को 500 सालों तक अपमान सहना पड़ा, लेकिन सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। सीएम योगी ने कहा, "सपा ने अयोध्या के साथ अन्याय किया। राम मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाए गए और रामभक्तों पर गोलीबारी की गई। यह वही लोग हैं जिन्होंने हमारी आस्था को खंडित करने की कोशिश की। अयोध्या की पहचान को मिटाने का प्रयास किया गया, लेकिन सत्य की हमेशा जीत होती है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि रामलला को 500 साल तक तिरस्कार और अपमान का सामना करना पड़ा, लेकिन अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है, जो देश की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। सीएम योगी ने अपने संबोधन में सपा की पूर्ववर्ती सरकारों पर अयोध्या के विकास को बाधित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "जब सपा की सरकार थी, तब अयोध्या की उपेक्षा की गई। मंदिर निर्माण में बाधाएं डाली गईं, लेकिन आज अयोध्या विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रही है। यह न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र भी है।"  

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बुजुर्गों के साथ मनाई खुशियों भरी दीवाली

ममता और स्नेह के दीपों से झिलमिलाया वृद्धाश्रम, बुजुर्गों के चेहरों पर लौटी मुस्कान रायपुर, दीपावली के अवसर पर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने माना रायपुर स्थित  वृद्धाश्रम पहुँचकर वहाँ निवासरत वरिष्ठ नागरिकों के साथ दीवाली पर्व की खुशियाँ साझा कीं। उन्होंने स्वयं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की और बुजुर्गों को मिठाई, नए वस्त्र एवं उपहार प्रदान किए। वृद्धजनों के बीच बैठकर उन्होंने आत्मीय संवाद किया और उनके स्वास्थ्य तथा आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हमारे ये वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। इनके अनुभव और आशीर्वाद से ही समाज की नींव मजबूत होती है। शासन का प्रयास है कि वृद्धजन सम्मानपूर्वक और आत्मसम्मान के साथ जीवन व्यतीत करें। कार्यक्रम के दौरान वृद्धाश्रम परिसर को दीपों और रंगोलियों से सजाया गया था। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों ने मिलकर बुजुर्गों के साथ दीप जलाए।      मंत्री राजवाड़े ने वृद्धाश्रम में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि बुजुर्गों की देखभाल में किसी प्रकार की कमी न रहे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार वृद्धजनों के कल्याण हेतु वृद्धजन सेवा योजना, पेंशन सुविधा, स्वास्थ्य जांच शिविर, मानसिक-सामाजिक परामर्श केंद्र जैसी योजनाओं का प्रभावी संचालन कर रही है। राजवाड़े ने कहा कि दीवाली केवल दीपों का पर्व नहीं, बल्कि संवेदनाओं को साझा करने का अवसर है। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे इस पावन पर्व पर अपने आसपास के बुजुर्गों से मिलें, उनका आशीर्वाद लें और उन्हें अपनत्व का अहसास कराएँ।

अयोध्या की गलियों में चमकी दीपों की रोशनी, पर्यटन मंत्री ने किया दीपोत्सव का उद्घाटन

अयोध्या रामनगरी अयोध्या में आज होने वाले दीपोत्सव को लेकर लोगों में उमंग नजर आ रहा है। सुबह से शाम तक चलने वाले इस आयोजन में परंपरा, गरिमा और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दीपोत्सव पर झांकियों की शोभायात्रा का आगाज हो गया है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। सुरक्षा के बड़े व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वहां पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि शोभायात्रा साकेत महाविद्यालय से निकली। यह रामपथ पर लगभग चार किलोमीटर की दूरी तय करेगी। कई प्रदेशों के लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। रामकथा पार्क में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर को शोभायात्रा का स्वागत करेंगे। झांकियों में विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित अयोध्या की उपलब्धियों को दर्शाया गया है। इसके अलावा रामायण कालीन प्रसंग की भी छटा देखने को मिल रही है। अयोध्यावासी पूरे रास्ते घरों की छतों से पुष्प वर्षा करके स्वागत करेंगे। हजारों की संख्या में लोग इस शोभायात्रा को देखने के लिए साकेत महाविद्यालय पहुंचे हैं। इसमें स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश के पर्यटक और श्रद्धालु भी शामिल हैं। भगवान श्रीराम माता सीता के साथ पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर से अयोध्या में पधारेंगे। यहां सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उनकी अगवानी करेंगे। रामकथा पार्क में भव्य राज्याभिषेक समारोह होगा। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में इस बार राम की पैड़ी पर बनाया जा रहा भव्य पुष्पक विमान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण और सेल्फी प्वाइंट बनने जा रहा है। त्रेतायुग की उस अलौकिक कथा को, जब भगवान श्रीराम लंका विजय के बाद पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे थे, इस दीपोत्सव में वास्तविक रूप में साकार किया जा रहा है। राम की पैड़ी के किनारे बन रहा यह राजशाही लुक वाला पुष्पक विमान अयोध्या की पहचान को नया आयाम देगा। इसकी लंबाई 32 फीट, ऊंचाई 25 से 30 फीट, और चौड़ाई 20 फीट होगी। मोर की आकृति पर आधारित इस डिजाइन को ईपीसी सीट पर तैयार किया जा रहा है, जिससे विमान हल्का, आकर्षक और लंबे समय तक संरक्षित रह सके। पुष्पक विमान के सामने रामायण काल के दृश्यों को उकेरा जाएगा, जिसमें भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या आगमन की झांकी सजाई जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान सेल्फी प्वाइंट के रूप में खोला जाएगा, ताकि हर आगंतुक इस दिव्य दृश्य को अपनी यादों में सहेज सके। संध्या के समय लेज़र लाइट शो, दीपों की रेखा और पुष्पवर्षा के साथ यह स्थान अयोध्या के सांस्कृतिक पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी के कुशल शिल्पकार मिलकर इस पुष्पक विमान को आकार दे रहे हैं। पारंपरिक कला में आधुनिक तकनीक का संगम इस कृति को अनोखा बना रहा है। स्वर्णिम रंगों, मोरपंखी डिजाइन और राजशाही शैली का यह विमान दीपोत्सव की शोभा में चार चांद लगाएगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा चयनित कार्यदाई संस्था सार्क मीडिया के मालिक सौरभ कुमार सिंह का कहना है कि उनका लक्ष्य दीपोत्सव के दौरान ऐसा वातावरण तैयार करना है, जो न केवल दर्शनीय रूप से आकर्षक हो बल्कि अयोध्या के समृद्ध सांस्कृतिक मूल्यों को भी प्रतिबिंबित करें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धरती आबा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कलेक्टर चंदन त्रिपाठी को किया सम्मानित

रायपुर, देश की राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ऑन आदि कर्मयोगी अभियान’ में छत्तीगसढ के कोरिया जिले ने एक बार फिर अपनी विकास यात्रा से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान में उत्कृष्ट कार्यों के लिए कोरिया जिले की कलेक्टर चंदन त्रिपाठी को सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम एवं राज्यमंत्री दुर्गा दास उइके भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा को भी राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त हुआ। 154 जनजातीय ग्रामों में विकास की नई मिसाल ‘धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के अंतर्गत कोरिया जिले के 154 जनजाति बहुल ग्रामों,  बैकुंठपुर ब्लॉक के 138 और सोनहत ब्लॉक के 16 ग्रामों में लगभग 38 हजार जनजातीय परिवारों को शासन की 17 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। शिविरों और डोर टू डोर अभियानों के माध्यम से लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड, पीएम जन धन योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम उज्जवला, जाति-निवास प्रमाण पत्र, वनाधिकार पट्टा, राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम आवास योजना, सिकल सेल टेस्टिंग, सुकन्या समृद्धि योजना तथा पीएम विमान बीमा योजना जैसे योजनाओं से जोड़ा गया। समयबद्ध क्रियान्वयन और मैदानी स्तर पर नवाचारों के चलते यह पहल जनसहभागिता का प्रतीक बनी है। राष्ट्रीय स्तर पर नवाचारों की सराहना छत्तीसगढ के कोरिया जिले के जनजातीय अंचलों में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना जिले के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान नवाचार, जनसहभागिता और सतत विकास की दिशा में कोरिया की उपलब्धियों का प्रतीक है। बस्तर से सरगुजा तक हर जनजातीय परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए- साय  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा श्यह सम्मान हमारे उन कर्मयोगियों की पहचान है जिन्होंने जनजातीय सशक्तीकरण को धरातल पर साकार किया है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बस्तर से सरगुजा तक हर जनजातीय परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए और उन्हें हर स्तर पर सशक्त किया जाए। योजनाओं की रोशनी को जन-जन तक पहुंचाना ही सुशासन छत्तीसगढ़ शासन में आदिम जाति विकास मंत्री एवं कोरिया जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने कहा यह उपलब्धि हमारे अधिकारियों, फील्ड स्टाफ और जनप्रतिनिधियों की मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद योजनाओं की रोशनी को जन-जन तक पहुँचाया है, उन्होंने कहा कि जन-जन तक योजनाओं को पहुंचाना व लाभ मिलना ही सुशासन है।