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भाजपा बनाम कांग्रेस: सांप-गोली वाले बयान पर सुशील आनंद का जवाब

रायपुर सौहार्द के पर्व दिवाली पर भी राजनीतिक पार्टियां बयानबाजी से नहीं चूक रही है. भाजपा और कांग्रेस के बीच अब पटाखे वाली सियासत शुरु हो गई है. भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने रविवार को कांग्रेस और पीसीस अध्यक्ष पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि दीपक बैज में परिपक्वता नहीं है. दिवाली का त्योहार है, मां लक्ष्मी और भगवान धनवंतरी की पूजा करें. कांग्रेस संगठन का काम सांप पटाखा जैसा है. वह किसी की तुलना पटाखे से नहीं करें, अगर बम फट गया तो आंख चौंधिया जाएगा. इस बयान पर कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने पलटवार किया है. कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने पलटवार करते हुए कहा कि पुरंदर मिश्रा को बीजेपी के बमों का अध्ययन करना चाहिए. वो स्वयं फुस्सी बम है. बीजेपी में बहुत सारे पटाखा बम है. स्वास्थ्य मंत्री पटाखा बम है. सारे अस्पतालों की स्थिति दयनीय है. इसी तरह तेज आवाज करने वाले बड़बोला बम है गृहमंत्री, जो कानून व्यवस्था नहीं संभाल पाते हैं. वहीं मंत्री ओपी चौधरी लक्ष्मी बम है, जहां भी हाथ मारेंगे, वहां से लक्ष्मी आएगी. बिहार चुनाव में 8वीं फेल नेता लड़ रहे चुनाव : विधायक मिश्रा विधायक पुरंदर मिश्रा ने बिहार चुनाव में कांग्रेस नेताओं को मिली जिम्मेदारी पर कहा कि बिहार का चुनाव महत्वपूर्ण चुनाव है. वहां नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता है. बिहार में 8वीं फेल नेता चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन नितीश कुमार जैसे नेता इस चुनाव को दिलचस्प बनाएंगे. कांग्रेस के नेता वहां जा कर क्या करेंगे. उनको हारने के लिए अभी से बढ़ाई देता हूं. नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर बड़ा बयान नक्सलियों के आत्मसमर्पण को लेकर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि देश और प्रदेश के विकास के लिए उनका मुख्यधारा से जुड़ना सराहनीय है. उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का परिणाम है. उन्होंने विश्वास जताया कि तय समय सीमा में नक्सलवाद का समाप्त हो जाएगा. बचे हुए नक्सली भी जल्द ही मुख्यधारा से जुड़ना चाहेंगे.

मुस्तैदी की मिसाल: रायपुर स्टेशन पर आरपीएफ की चेकिंग, उच्च अधिकारियों ने किया निरीक्षण

रायपुर त्योहारों पर घर जाने वाले लाखों यात्रियों को ट्रेन में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए रेलवे का पूरा अमला दिन रात लगा हुआ है. इसी बीच रायपुर रेलवे स्टेशन में पिछले दिनों आईजी और डीआईजी ने भी दौरा किया था, जिसमें उन्होंने क्राउड मैनेजमेंट को लेकर आरपीएफ कमांडेंट और पोस्ट प्रभारियों की बैठक ली थी. रायपुर रेलवे स्टेशन में इन दिनों यात्रियों की भीड़ को मैनेज करने के लिए 3 आरपीएफ इंस्पेक्टर और 30 से अधिक स्टॉफ को ड्यूटी के लिए बाहर से बुलाया गया है. रायपुर रेल मंडल के एएससी भी रायपुर रेलवे स्टेशन में मुस्तैदी से ड्यूटी करते नजर आए. वहीं दुर्ग रेलवे स्टेशन में भी आरपीएफ कमांडेंट पहुंचे थे, जहां उन्होंने यात्रियों को किसी भी प्रकार की ट्रेन में चढ़ने और उतरने में परेशानी हो इसका ख्याल रखने के निर्देश दिए गए थे. वहीं आरपीएफ ने सिविल ड्रेस में भी आरपीएफ स्टॉफ को गुप्त निगरानी में रखा हुआ है, जो ये सुनिश्चित करते है कि ट्रेन में चढ़ते-उतरते समय किसी भी यात्री का कोई सामान चोरी न हो. इसके अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे से भी पैनी नजर रखी जा रही है.

दीपावली का असली जादू: थानेदार ने खरीद लिए सारे बचे हुए दीये, बूढ़ी माता की खुशी लौट आई

हापुड़ उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में एक पुलिसकर्मी ने एक बुजुर्ग महिला की दिवाली बना दिया। दरअसल, पुलिसकर्मी पैदल ही गश्त पर निकले थे। सड़क के किनारे एक बूढ़ी माता मिट्टी के दिए बेच रही थी लेकिन उनका दिया एक भी नहीं बिका था और वह मायूस होकर बैठी थी। गश्त कर रहे पर हापुड़ देहात थाना प्रभारी विजय गुप्ता ने बुजुर्ग को मायूस देखकर कारण पूछा तो बूढ़ी माता ने कहा कि कहा कि सुबह से दीये सजाए थे, लेकिन धनतेरस पर कोई भी दीये खरीदने नहीं आय। इतना सुनते ही विजय गुप्ता ने उनकी मायूसी दूर करने की ठान ली और सारे दीए खरीद लिए। इस नेक कार्य से धर्मवती की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने पुलिस को आशीर्वाद दिया। दीए बेचकर वे खुशी-खुशी घर लौटीं।  बुजुर्ग माता का बयान घूसखोरी के जमाने में पुलिस का ऐसा वर्ताव देखने के बाद धर्मवती ने कहा, "पुलिस का यह रूप मैंने पहले कभी नहीं देखा। दीए न बिकने से मैं बहुत परेशान थी, लेकिन पुलिस ने मेरी समस्या हल कर दी।" बुजुर्ग महिला ने यह भी बताया कि सरकार की योजनाओं से उन्हें काफी राहत मिली है। बच्चों के पालन-पोषण में कोई दिक्कत नहीं है और फ्री राशन भी मिल रहा है। उन्होंने कहा, "मोदी-योगी खूब काम कर रहे हैं। 

शासन की उपेक्षा के बावजूद, गुड़ियापदर के लोग खुद बना रहे सड़क

जगदलपुर बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बसे गुड़ियापदर गांव के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन की वर्षों से जारी उपेक्षा से तंग आकर स्वयं सड़क निर्माण का बीड़ा उठाया है. समाजसेवी शकील रिजवी ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और दानदाताओं से इस मानवता भरे प्रयास में सहयोग करने की अपील की है. गुड़ियापदर वही गांव है, जहां कुछ दिन पहले एक गर्भवती महिला को खटिया को स्ट्रेचर बनाकर कीचड़ और नालों को पार करते हुए डिमरापाल अस्पताल तक ले जाना पड़ा था. गांव में अब तक सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, पेयजल और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. ग्रामीणों की यह परेशानी नई नहीं कई बार मरीजों को इसी तरह कठिन रास्तों से अस्पताल पहुंचाना पड़ा है. गुड़ियापदर गांव को वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा कम्युनिटी फॉरेस्ट रिसोर्स एक्ट (CFRA) के तहत कांगेर घाटी उद्यान क्षेत्र में रहने की अनुमति दी गई थी. लेकिन यहां गोंड समुदाय के लगभग 35 परिवार वर्ष 2002 से निवासरत हैं. CFRA स्वीकृति के बावजूद अब तक उन्हें कोई बुनियादी सुविधा नहीं मिल पाई है. बीते वर्षों में मलेरिया जैसी बीमारियों से दो बच्चों की मौत भी हो चुकी है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. सरकार की अनदेखी से निराश ग्रामीणों ने अब अपने बूते सड़क बनाने का संकल्प लिया है. गांव के लोग सामूहिक श्रमदान कर पगडंडी की सफाई, गड्ढों की भराई और कच्ची सड़क का निर्माण कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है की सरकार से उम्मीद टूट चुकी है, अब हम अपने बल पर अपने गांव तक सड़क बनाएंगे. फिलहाल ग्रामीण सामूहिक सहयोग से यह काम कर रहे हैं. आने वाले दिनों में सड़क पर मुरूम और गिट्टी डालने की योजना है. ग्रामीणों का मानना है कि दीपावली के अवसर पर यदि समाज आगे बढ़कर सहयोग करे, तो उनके लिए यह सड़क केवल रास्ता नहीं, बल्कि आशा की नई किरण साबित होगी.

वीडियो वायरल होने के बाद सस्पेंड हुआ SHO, पुलिस कर्मियों का शराब बांटना बना विवाद

चरखी दादरी पुलिस की वर्दी में सिटी थाना के एसएचओ सन्नी कुमार द्वारा दादरी के लघु सचिवालय परिसर में मिठाइयों के साथ शराब बांटने के मामले में एसपी अर्श वर्मा ने संज्ञान लेते हुए सस्पेंड कर दिया है। साथ ही अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच होगी और विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में अधिवक्ताओं द्वारा पुलिस के आला अधिकारियों को भी शिकायत भेजी गई थी। बता दें कि शुक्रवार को धनतेरस पर्व पर दादरी शहर के थाना प्रभारी सन्नी कुमार द्वारा अपनी टीम के साथ निजी व पुलिस की गाड़ी से मिठाइयां व शराब की बोतलें बांटने का पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में पुलिस एसएचओ वर्दी में ही शराब की बोतलें बांटते दिखाई दे रहा है। देर शाम अधिवक्ता संजीव तक्षक की अगुवाई में अधिवक्ताओं ने पुलिस के आला अधिकारियों को शिकायत भेजी। जिस पर एसपी अर्श वर्मा ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की बात कही थी।  डीएसपी हेडक्वार्टर धीरज कुमार ने प्रेस वार्ता करते हुए बताया कि मामले में सिटी एसएचओ सन्नी कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। उसे थाना प्रभारी के पद से हटाते हुए सस्पेंड के दौरान पुलिस लाइन में रिपोर्ट करनी होगी। डीएसपी ने बताया कि मामले शराब कहां से आई और कौन-कौन कर्मचारी संलिप्त हैं, इसकी जांच की जा रही है। अन्य कर्मचारी शामिल मिले तो ठोस कार्रवाई होगी। हालांकि पूरे मामले में विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

एक दर्जन बैंक खाते फ्रीज! DIG भुल्लर की समस्याएँ बढ़ीं

रूपनगर/चंडीगढ़ पंजाब के रूपनगर रेंज के डी.आई.जी. हरचरण सिंह भुल्लर, जिन्हें स्क्रैप डीलर से 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था, के खिलाफ सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने उनके करीब एक दर्जन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है ताकि उन खातों से कोई भी लेन-देन न किया जा सके। शनिवार को सीबीआई की टीमें डीआईजी भुल्लर की जायदादों का रिकॉर्ड जुटाने के लिए पंजाब और अन्य राज्यों में गईं। जांच में सीबीआई को डीआईजी भुल्लर की कई बेनामी संपत्तियों का भी पता चला है, जिनका पूरा रिकॉर्ड एजेंसी ने अपने कब्जे में ले लिया है। सीबीआई ने बैंकों को पत्र लिखकर उनके लॉकर भी सील करवा दिए, ताकि उनके अंदर रखी वस्तुओं को बाहर न निकाला जा सके। जल्द ही सीबीआई, भुल्लर के गनमैन और स्टाफ को भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगी। जांच में खुलासा हुआ है कि भुल्लर ने करोड़ों रुपये नकद घर के क्रॉकरी कैबिनेट, स्टोर और बेड के अंदर सूटकेसों में रखे हुए थे। इसके अलावा सोने के गहनों के लिए विशेष स्थान बनाया गया था। सीबीआई को 7.5 करोड़ रुपये पांच अलग-अलग जगहों से, और ऐसे बैग मिले जिनमें ऊपर कपड़े और नीचे 500-500 रुपये के नोटों के बंडल रखे गए थे। सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि डीआईजी भुल्लर को हर महीने लाखों रुपये “मंथली” के रूप में मिलते थे। वह एसएसपी को नजरअंदाज कर अपने निजी बिचौलियों के जरिए यह रकम लेते थे। जेल में बेचैनी में कटी रात डीआईजी भुल्लर ने बुड़ैल जेल में रातभर बैरक में जागकर बिताई। सूत्रों के अनुसार, वह पूरी रात बेचैन होकर टहलते रहे। उनके साथ बैरक में मौजूद आईपीएस अधिकारी ज़हूर ज़ैदी (गुड़िया हत्याकांड में सजा प्राप्त) और आईपीएस मालविंदर सिंह सिद्धू (जमाई की हत्या केस में सजा प्राप्त) ने कई बार उन्हें आराम करने के लिए कहा, लेकिन भुल्लर पूरी रात करवटें बदलते रहे। बैरक में उनके लिए जमीन पर गद्दा और तकिया भी दिया गया था। इस बैरक में केवल 50 वर्ष से अधिक आयु वाले और अच्छे आचरण वाले कैदियों को रखा जाता है। भुल्लर के साथ रिश्वत मामले में पकड़े गए नाभा निवासी बिचौलिया “कृष्णू” को अलग बैरक में रखा गया है। सीबीआई को मिली 50 बेनामी और अचल संपत्तियों के दस्तावेज़ जांच में सीबीआई के सामने डीआईजी भुल्लर की कुल संपत्ति 120 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उनके और उनके परिवार के नाम पर 50 अचल और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज़ मिले हैं। सीबीआई ने उनके घरों और अन्य ठिकानों से 7.5 करोड़ रुपये नकद, 2.5 किलो सोना और गहने, 26 लग्जरी घड़ियां, 4 हथियार और 100 कारतूस बरामद किए हैं। इसके अलावा समराला स्थित फार्महाउस से 5.7 लाख रुपये नकद, 9 पेटियां (108 बोतलें) इंपोर्टेड शराब और 17 कारतूस भी जब्त किए गए सीबीआई को उनके पास कई निजी बैंकों के लॉकरों की चाबियां भी मिली हैं। डीआईजी भुल्लर के पास पंजाब, चंडीगढ़ और लुधियाना में कई फ्लैट, फार्महाउस और जमीनें हैं। उनकी प्रमुख संपत्तियों में शामिल हैं: जालंधर के कोट कलां गांव में 6 कनाल का फार्महाउस, चंडीगढ़ सेक्टर 39-बी और सेक्टर 40-बी में फ्लैट, लुधियाना के अयाली खुर्द में 3 कनाल (18 मरला) जमीन, कपूरथला के खजूराला में 5 कनाल (10 मरला) जमीन, और मोहाली, पटियाला तथा बरनाला के निजी बिल्डर प्रोजेक्ट्स में प्रॉपर्टी शेयर। 

पूर्व मेयर संजीव शर्मा बिट्टू की वापसी: पटियाला में कांग्रेस को मिली नई ताकत

पटियाला  पटियाला के मेयर संजीव शर्मा बिट्टू ने आज एक बार फिर कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया है। जानकारी के अनुसार, संजीव शर्मा पहले कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। उन्होंने पटियाला ग्रामीण सीट से कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा बनाई गई पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) पार्टी से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। इसके बाद उन्हें पटियाला जिले का भाजपा जिला प्रधान भी नियुक्त किया गया था। हालांकि अब उन्होंने फिर से कांग्रेस पार्टी में वापसी कर ली है। उनकी घर वापसी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर देखने को मिल रही है।

समस्तीपुर से उठेगा चुनावी जादू, पीएम मोदी ने रैली की तारीख की घोषणा की

पटना 6 नवंबर से शुरू हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों का शेड्यूल तय हो गया है। पीएम मोदी 24 अक्टूबर से बिहार में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। इस दौरान वह प्रदेश के कई जिलों में जनसभाएं करेंगे और जनता से सीधा संवाद करेंगे। चुनावी अभियान की शुरुआत समस्तीपुर से होगी, जहां प्रधानमंत्री मोदी कर्पूरी ग्राम जाकर समाजवादी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के घर पहुंचेंगे। वहां वह कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देंगे। इसी कार्यक्रम से प्रधानमंत्री अपने बिहार दौरे और चुनावी रैलियों की औपचारिक शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री के दौरे का यह आगाज बेहद प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि कर्पूरी ठाकुर को बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा और सामाजिक न्याय का प्रतीक माना जाता है। कर्पूरी ग्राम से शुरुआत करके पीएम मोदी एक बार फिर 'सबका साथ, सबका विकास' के संदेश के साथ बिहार में एनडीए की ताकत को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे। जानकारी के मुताबिक, 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समस्तीपुर और बेगूसराय में दो बड़ी चुनावी सभाएं करेंगे। इसके बाद उनका अगला चरण 30 अक्टूबर को तय है, जब वह मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां संबोधित करेंगे। सूत्रों के अनुसार, 2 नवंबर, 3 नवंबर, 6 नवंबर और 7 नवंबर को भी प्रधानमंत्री बिहार के अलग-अलग जिलों में जनसभाएं करेंगे। इन रैलियों के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी की रैलियों से बिहार में एनडीए के चुनावी अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समस्तीपुर से शुरुआत करना एक रणनीतिक कदम है, क्योंकि यह क्षेत्र न सिर्फ समाजवादी राजनीति की धरती रहा है, बल्कि उत्तर बिहार की राजनीति में इसका विशेष प्रभाव है। बिहार में पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर को होनी है और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी और इसके साथ ही चुनाव के नतीजे सामने आ जाएंगे।

आदिवासियों के झोपड़े ढहे, बाबाओं के महल सुरक्षित: MP में न्याय पर उठे सवाल

सतना वन परिक्षेत्र सिंहपुर में वन विभाग ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया, लेकिन इस कार्रवाई ने सिस्टम की दोहरी नीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां गरीब और आदिवासी वर्ग के आशियाने जेसीबी से मिटा दिए गए, वहीं दूसरी ओर इन्हीं जंगलों की सैकड़ों एकड़ भूमि तथाकथित बाबाओं और धार्मिक संस्थाओं को सामुदायिक पट्टों के नाम पर दी जा रही है। वन विभाग की कार्रवाई भले ही वन भूमि की सुरक्षा के नाम पर की गई हो, लेकिन इसने प्रशासन की प्राथमिकताओं और न्याय की समानता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग की टीम में परिक्षेत्र सहायक अंजनी कुमार पटेल, मोतीलाल पटेल, बीट प्रभारी ब्रजेश बागरी, पुष्पेंद्र सिंह, स्थायी कर्मी ब्रदी प्रसाद कुशवाहा, राजू सिंह गोंड समेत सुरक्षा श्रमिक दल शामिल रहा। विभाग ने बताया कि कार्रवाई के बाद भूमि की गहरी खुदाई कर उसे पुनः सुरक्षित किया गया, ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके।   आदिवासियों की बेघर कहानी कार्रवाई के दौरान जिन परिवारों के आशियाने उजड़े, वे अधिकतर आदिवासी और मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। कई परिवार वर्षों से इसी भूमि पर खेती या झोपड़ी बनाकर जीवन-यापन कर रहे थे। कार्रवाई के बाद अब वे बेघर और बेसहारा हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “गरीबों पर बुलडोज़र चलता है, लेकिन बाबाओं और प्रभावशाली लोगों के कब्जे पर विभाग चुप रहता है।” बाबा और पट्टा संस्कृति पर सवाल सूत्र बताते हैं कि इसी परिक्षेत्र में कुछ धार्मिक संस्थाओं और आश्रमों को सामुदायिक उपयोग के नाम पर 100 से अधिक एकड़ वनभूमि दी गई है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि “वन संरक्षण के नाम पर सरकार दोहरा रवैया अपनाती है एक तरफ आदिवासी परिवारों को हटाया जा रहा है, दूसरी तरफ बाबाओं को वनभूमि पर ‘कानूनी कब्जा’ दिया जा रहा है।” कार्रवाई का ब्योरा वन परिक्षेत्राधिकारी नितेश कुमार गंगेले के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में बीट शिवराजपुर और मोरा के अतिक्रमण को हटाया गया। शिवराजपुर बीट (कक्ष क्र. पी-265) में कुल 8.00 हेक्टेयर भूमि पर से कब्जा हटाया गया। अतिक्रमणकारियों में रामभगत यादव (4.00 हे.), कामता उर्फ नत्थू यादव (2.00 हे.), अन्नू यादव (1.00 हे.), अशोक यादव (0.50 हे.) और संदीप यादव (0.50 हे.) शामिल रहे। वहीं मोरा बीट (कक्ष क्र. पी-253) में 17.00 हेक्टेयर भूमि से कब्जा हटाया गया। इसमें जगलाल गोंड (4.00 हे.), रामू गोंड (4.00 हे.), चिंतामणि पाल (3.00 हे.), बबलू पाल (3.00 हे.) और सोनेलाल पाल (3.00 हे.) के नाम सामने आए।

तीन दिन से लापता युवक डेम के पास मृत पाया गया, पुलिस जांच में जुटी

रायगढ़ किरोड़ीमल नगर क्षेत्र स्थित उच्चभिट्ठी डेम के पास एक लापता युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई. मृतक जिंदल प्लांट में मजदूरी का काम करता था. मौके पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और आगे की कार्रवाई में जुट गई है. जानकारी के मुताबिक, युवक पिछले तीन दिनों से लापता था और परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट कोतरा रोड थाने में दर्ज कराई थी. रविवार को डेम के पास शव मिलने की सूचना पर कोतरा रोड पुलिस मौके पर पहुंची. साथ ही फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है. परिजनों ने युवक की हत्या की आशंका जताई है. फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है.