samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर दीपावली से पूर्व कर्मचारियों को अग्रिम वेतन का तोहफा

रायपुर  दीपावली के शुभ अवसर पर राज्य शासन ने अपने शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए माह अक्टूबर 2025 का वेतन 17 एवं 18 अक्टूबर को अग्रिम रूप से भुगतान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने सभी विभागों को आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मेरे लिए शासन केवल तंत्र नहीं, बल्कि उन कर्मठ साथियों का परिवार है जो पूरे मन से जनता की सेवा में लगे हैं। दीपावली पूर्व अग्रिम वेतन भुगतान का यह निर्णय उसी आत्मीयता का प्रतीक है — कि सरकार अपने हर साथी की खुशियों में सहभागी बने और हर घर में उजियारा तथा प्रसन्नता फैले। उन्होंने कहा कि दीपावली का पर्व प्रसन्नता, एकता और उत्साह का प्रतीक है। शासन का उद्देश्य है कि प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी इस पर्व को परिवार सहित उल्लासपूर्वक मना सके और किसी प्रकार की आर्थिक असुविधा का सामना न करना पड़े। वेतन भुगतान की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न करने हेतु राज्य के सभी कोषालय एवं उपकोषालय 18 अक्टूबर (शनिवार, अवकाश दिवस) को भी खुले रहेंगे, ताकि किसी कर्मचारी को भुगतान प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। राज्य शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मजदूरी, मानदेय एवं पारिश्रमिक जैसे अन्य मदों में भी नियमानुसार अग्रिम भुगतान किया जा सकेगा।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दीपावली पूर्व अग्रिम वेतन भुगतान से न केवल शासकीय कर्मचारियों को आर्थिक सुविधा और राहत प्राप्त होगी, बल्कि इससे जीएसटी बचत उत्सव के दौरान राज्य के बाजारों में रौनक, व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि और आर्थिक प्रवाह में तीव्रता आएगी। इससे स्थानीय व्यापारियों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को भी प्रत्यक्ष लाभ होगा तथा राज्य की अर्थव्यवस्था में उत्सव और विश्वास का वातावरण बनेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन का हर निर्णय अपने कर्मठ साथियों की खुशियों और सम्मान से जुड़ा है। दीपावली से पहले अग्रिम वेतन भुगतान उसी आत्मीय भावना का प्रतीक है कि हर घर में उजियारा फैले और हर हृदय में प्रसन्नता एवं विश्वास का दीप जले।

प्रदेश में चलाया गया दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गो-माता और गो-पालन का हमारी सनातन संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। जो गो-पालन करता है वह गोपाल है और जहां गो-पालन होता है वह घर गोकुल है। गो-संरक्षण एवं संवर्धन सरकार की उच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए सरकार समाज के सहयोग से निरंतर कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर पशुपालक किसानों की आय को दोगुना किया जाएगा। मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ गो-वंश से समृद्ध राज्य है। देश के दुग्ध उत्पादन का लगभग 9प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है। हमारी सरकार का लक्ष्य है इसे 20 प्रतिशत तक ले जाना। इसके लिए प्रदेश के गांव-गांव में दुग्ध समृद्ध‍ि संपर्क चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत पशु चिकित्सक घर-घर जाकर पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के विभिन्न आधुनिक तरीकों, पशुओं में नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य एवं पशु पोषण आदि के संबंध में जानकारी दे रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2024-25 को गो-संरक्षण एवं संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया गया। हर जिले में मनाया जाएगा गोवर्धन पर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 21 अक्टूबर को गोवर्धन पर्व लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाए। आयोजन में गौशालाओं तथा पशुपालकों को विशेष रूप से सहभागी बनाया जाए। साथ ही गोवर्धन पर्व पर पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां दर्ज करने और नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित भी किया जाएगा। प्रदेश की गौ-शालाओं में गोवर्धन पर्व का सामुदायिक आयोजन होगा। गोवर्धन पर्व का मुख्य आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में किया जाएगा, जिसमें गोवर्धन पूजन, परिक्रमा, अन्नकूट भोग मुख्य होगा। इस अवसर पर पशुचारक समुदायों की कला, बरेदी और ठाट्या नृत्य आदि का प्रस्तुतीकरण होगा। कार्यक्रम में जैविक उत्पादक, दुग्ध उत्पाद, गोबर आधारित शिल्प के स्टॉल लगाए जाएंगे, साथ ही पशुपालन, कृषि, सहकारिता विभाग की योजनाओं की जानकारी देने के लिए विशेष व्यवस्था होगी। इसके साथ ही ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार के लिए भी गतिविधियों का संचालन होगा। गोवर्धन पर्व पर सभी जिलों में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। आंगनवाड़ी केंद्रों में पंचगव्य उत्पाद जैसे घी, दूध, पनीर और दही से बनी सामग्री का वितरण किया जाएगा। प्रदेश में चलाया गया दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया गया। अभियान के अंतर्गत गांव गांव में घर-घर जाकर पशुपालकों को पशुओं में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं के टीकाकरण, उनकी स्वास्थ्य रक्षा, संतुलित पशु आहार, पशु पोषण आदि के बारे में तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी गई। पशुपालकों को उपलब्ध संसाधनों में कम खर्च पर अधिक दूध उत्पादन करने और ज्यादा लाभ कमाने के बारे में जागरूक किया गया। अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत विभाग के अधिकारी–कर्मचारियों द्वारा 10 या अधिक गौवंश–भैंस वंश पालने वाले पशुपालकों से संवाद करने के लक्ष्य अनुसार समस्त जिलों में तीन लाख 70 हजार से अधिक पशुपालकों से उनके घर पहुंचकर भेंट की और उन्हें पशुपालन के संबंध में जानकारी दी, साथ ही उनकी समस्याओं का निराकरण भी किया। अभियान के दौरान मुख्य फोकस पशुओं के दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने पर रहा. अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधि, संभागीय आयुक्त, जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों और समाज के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा भी विभिन्न स्थानों पर पशुपालकों से भेंट की गई और उन्हें दूध उत्पादन और पशुपालन से ज्यादा लाभ उठाने के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान की गई एवं पशुपालकों के अनुभव भी साझा किए गए। किसानों और पशुपालकों ने भी उत्साहपूर्वक इस अभियान में सहभागिता की। गो-शालाओं की अनुदान राशि में वृद्धि मध्यप्रदेश शासन गो-पालन, गो-संवर्धन व गो-वंश के बेहतर व्यवस्थापन के लिए कृत संकल्पित है। राज्य शासन ने गो-शालाओं में गो-वंश के आहार आदि के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को 20 रुपये प्रति गो-वंश प्रतिदिन से बढ़ाकर 40रुपये प्रति गो-वंश प्रतिदिन कर दिया है। गो-शालाओं में उपलब्ध गो-वंश के भरण-पोषण के लिए 2 वर्ष पहले तक 90 करोड़ रूपये का बजट था, जिसे पिछले वर्ष बढ़ा कर 250 करोड रूपये किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में इस राशि को बढ़ा कर 600 करोड़ रूपये कर दिया गया है। गो-वंश के व्यवस्थापन के लिए डीबीटी के माध्यम से अनुदान की राशि सीधे गो-शालाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। प्रत्येक माह लगभग 50 करोड़ रूपये की राशि गो-शालाओं को अंतरित की जा रही है। 1000 से अधिक नवीन गो- शालाएं वर्तमान में प्रदेश में 2900 गो-शालाएं संचालित है, जिनमें लगभग 4 लाख 25 हजार गो-वंश का व्यवस्थापन किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में मुख्यमंत्री गो-सेवा योजना के अंतर्गत 2203 गो-शालाएं निर्मित कर संचालित की जा रही हैं, जिनमें 2 लाख 11हजार गो-वंश का व्यवस्थापन किया जा रहा है। विगत एक वर्ष में 1000 से अधिक नवीन गो-शालाएं प्रारंभ की गई हैं, जिनमें एक लाख से अधिक गो-वंश का व्यवस्थापन किया जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गो-वंश के आश्रय एवं भरण-पोषण के लिए नगर पालिक निगम ग्वालियर, उज्जैन औरइंदौर में वृहद गौशालाएं खोली गई हैं। भोपाल में 69.18 एकड़ भूमि पर 10,000 गौवंश क्षमता की वृहद गो-शाला का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिसकी कुल लागत लगभग 45करोड़ रूपये है। 

कुम्हारों के लिए खुशखबरी! योगी सरकार देगी दीपावली पर ज़मीन का तोहफा, नहीं करना होगा आवेदन

लखनऊ पारंपरिक माटी कला को आगे बढ़ाने वाले कुम्हारों को प्रदेश सरकार ने दीपावली का उपहार दिया है। जिस गांव में माटी कला को आगे बढ़ाने वाले एक भी कारीगर काम कर रहें होंगे, उन्हें बिना आवेदन ही मिट्टी की खोदाई के लिए तालाब या जमीन का पट्टा दिया जाएगा। माटी कला बोर्ड के प्रस्ताव पर प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद की ओर से शासनादेश जारी कर दिया गया।  सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को भेजे आदेश में चकबंदी मैनुअल के पैरा 178 के प्रावधानाें के अनुसार जिस गांव में कुम्हारों की संख्या बहुत कम है या एक कुम्हार हो, जो मिट्टी कला को संजोए रखने का कार्य कर रहा हो और उसने आवेदन या प्रस्ताव भले न दिया हो, लेकिन उसे मिट्टी के लिए भूमि अवश्य सुरक्षित की जाए। शासनादेश के बाद अब कुम्हारों को मिट्टी की किल्लत नहीं होगी और माटी कला को बुलंदी मिलेगी। माटी कला बोर्ड के योजना अधिकारी एलके नाग ने बताया कि पिछले साल प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इस पर नौ अक्टूबर को मुहर लग गई। मुहर लगने के साथ ही प्रदेश के सभी 822 ब्लॉकों के 97,941 गांवों में यह व्यवस्था लागू हो गई है। सरकार की पहल सराहनीय राजधानी के चिनहट में माटी कला को आगे बढ़ाने वाले राजेश प्रजापति ने बताया कि के लौलाई गांव में मिट्टी की खुदाई को लेकर आए दिन बवाल होता है। इसकी वजह से इस कला को आगे बढ़ाने में दिक्कत होती है। सरकार के इस शासनादेश से कारीगरों को अधिकार मिलेगा और राजस्व विभाग की जिम्मेदारी होगी कि वह मिट्टी के लिए तालाब या जमीन का इंतजाम करे। सरकार की पहल सराहनीय है।  

अंबाला तैयार: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का एयरफोर्स स्टेशन दौरा इस दिन तय

अंबाला हरियाणा के अंबाला में स्थित एयरफोर्स स्टेशन द्वारा 29 अक्टूबर को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल होंगी। पहले यह दौरा 18 अक्टूबर को प्रस्तावित था, जिसे बाद में स्थगित कर दिया गया था। राष्ट्रपति का यह दौरा भारतीय वायुसेना के एक कार्यक्रम के तहत निर्धारित किया गया है, जो अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के संभावित दौरे को देखते हुए अंबाला जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों की प्रारंभिक बैठकों का दौर जारी है। सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और प्रोटोकॉल को लेकर प्रशासन ने पुलिस, एयरफोर्स व अन्य संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति के आगमन से पहले उनके प्रोटोकॉल अधिकारी अंबाला पहुंचकर सभी तैयारियों का जायजा लेंगे।  गौरतलब है कि अंबाला एयरफोर्स स्टेशन देश के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण वायुसेना ठिकानों में से एक है। यहां पर कई बार शीर्ष स्तर के सैन्य और राजकीय कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बार भी वायुसेना से जुड़े एक अहम आयोजन की योजना बनाई जा रही है, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।   अंबाला में राष्ट्रपति का यह दौरा बेहद खास माना जा रहा है। यहां वायुसेना की 17 स्क्वाड्रन तैनात है, जिसके पास राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं। माना जा रहा है कि कार्यक्रम का संबंध वायुसेना दिवस (8 अक्टूबर) के बाद की किसी औपचारिक गतिविधि से जुड़ा हो सकता है। राष्ट्रपति के इस दौरे के दौरान भारतीय वायुसेना के एक विशेष समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कार्यक्रम में वायुसेना अधिकारियों से बातचीत करेंगी और देश की सुरक्षा एवं रक्षा तैयारियों को लेकर जानकारी लेंगी।

दिवाली से पहले बड़ा फैसला: पटाखों की बिक्री पर लगा सख्त प्रतिबंध

फिरोजपुर  लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर भारती नागरिक एक्ट 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अमित सरीन ने फिरोजपुर जिले के बाजारों में किसी भी प्रकार के तेज आवाज वाले पटाखों, आतिशबाजी आदि के (अनधिकृत) निर्माण, भंडारण, खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने जिले में पटाखों की बिक्री/खरीद के लिए स्थान निर्धारित किए हैं। पटाखा विक्रेताओं द्वारा फिरोजपुर शहर में ओपन ग्राउंड आईटीआई (लड़के), फिरोजपुर कैंट में ओपन ग्राउंड मनोहर लाल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ममदोट में स्टेशन बीएसएफ ग्राउंड ममदोट के पास, तलवंडी भाई में ओपन ग्राउंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लड़के), जीरा में ओपन ग्राउंड श्री गुरदास राम मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और जीरा में ओपन ग्राउंड श्री जीवन मल्ल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मल्लांवाला में ओपन ग्राउंड श्री सुखविंदर सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मक्खू में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लड़के), गुरुहरसहाय में गुरु रामदास स्टेडियम, मक्खू में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (लड़के) में पटाखे बेचे जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि पटाखे बेचने का समय सुबह 10.00 बजे से शाम 7.30 बजे तक रहेगा। इसके अलावा फिरोजपुर के भीतर किसी अन्य स्थान का उपयोग पटाखों और आतिशबाजी की खरीद/बिक्री के लिए नहीं किया जा सकता है और केवल हरित पटाखों (जिनमें बोरॉन लवण या एंटीमनी, लिथियम, पारा, आर्सेनिक, सीसा या स्ट्रोंटियम क्रोमेट का मिश्रण इस्तेमाल नहीं किया जाता है) के इस्तेमाल की अनुमति है। उपरोक्त स्थानों को धूम्रपान निषेध क्षेत्र घोषित किया गया है। पंजाब सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग के निर्देशानुसार, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने फिरोजपुर जिले में पटाखे फोड़ने का समय निर्धारित किया है: 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) दिवाली पर रात्रि 8.00 बजे से 10.00 बजे तक, 5 नवंबर 2025 गुरुपर्व (बुधवार) के अवसर पर प्रात: 4 बजे से 5 बजे तक (एक घंटा) और रात्रि 9 बजे से 10 बजे तक (एक घंटा), 25-26 दिसंबर 2025 (गुरुवार, शुक्रवार) क्रिसमस पर रात्रि 11.55 बजे से 12.30 बजे तक, तथा 31 दिसंबर 2025-01 जनवरी 2026 (बुधवार, गुरुवार) को रात्रि 11.55 बजे से 12.30 बजे तक। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, न्यायालयों, धार्मिक स्थलों आदि जैसे शांत क्षेत्रों के आस-पास पटाखे फोड़ने और आतिशबाजी करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

बूथ रणनीति 2025: कांग्रेस तैनात करेगी 73,000 कार्यकर्ताओं को, जांच होगी दो स्तर पर

भोपाल मध्य प्रदेश में कांग्रेस सभी बूथों पर कार्यकर्ता तैनात करेगी। इनका चयन क्षेत्र में सक्रियता के आधार पर होगा। विधानसभा क्षेत्र प्रभारी इनका सत्यापन करेंगे। मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य प्रभारी से इस पर मुहर लगवाई जाएगी। यदि दोनों की रिपोर्ट कार्यकर्ता के पक्ष में आती है तो फिर जिला अध्यक्ष इन्हें नियुक्त करेंगे। प्रदेश कांग्रेस इन सभी को प्रशिक्षित करेगी और ये बूथ प्रबंधन का संपूर्ण काम देखेंगे। मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य पर नजर रखने का पूरा जिम्मा इनका ही रहेगा। कांग्रेस प्रदेश में संगठन वर्ष मना रही है। इसमें हर स्तर पर नई टीम बनाई जा रही है। इसी कड़ी में अब 73 हजार मतदान केंद्रों पर पार्टी कार्यकर्ताओं को तैनात किए जाने की योजना है।   दरअसल, अभी तक स्थानीय विधायक या वरिष्ठ नेता के कहने पर बूथ प्रबंधन का जिम्मा दे दिया जाता था लेकिन इस बार बकायदा चयन प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए दो स्तर पर जांच का प्रविधान किया है। इनके माध्यम से ही पार्टी बूथ स्तर पर कार्यक्रम संचालित करेगी। प्रदेश स्तर पर दिलाया जाएगा प्रशिक्षण- प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि प्रदेश में लगभग आठ हजार मतदान केंद्र बढ़ने वाले हैं। इन्हें मिलाकर सख्या 73 हजार से अधिक हो जाएगी। इसके दृष्टिगत जिला अध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की तैनाती को प्राथमिकता दें।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: नॉमिनेशन के बाद ही बिहार की वोटर लिस्ट जारी होगी

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही मतदाता सूची (Voter List) विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) मामले में चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि दोनों चरणों के नामांकन पूरा होने के बाद ही बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. अदालत ने आयोग के इस रुख को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 4 नवंबर तय की है. मतदाता सूची को वेबसाइट पर डालना चाहिए- प्रशांत भूषण सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आयोग को उस मतदाता सूची को वेबसाइट पर डालना चाहिए. जिसके आधार पर मतदान कराया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने SIR की अंतिम सूची के बाद भी संशोधन की अनुमति दी है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. नामांकन के बाद प्रकाशित होगी वोटर लिस्ट इस पर चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि आयोग पहले से ही तय प्रक्रिया के तहत काम कर रहा है. उन्होंने बताया, “पहले चरण का नामांकन 17 अक्टूबर और दूसरे चरण का नामांकन 20 अक्टूबर को पूरा हो जाएगा. इसके तुरंत बाद अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित कर दी जाएगी.” याचिकाकर्ता कर सकते हैं वोटर लिस्ट की समीक्षा जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और जिम्मेदार संस्था है, जो अपने कर्तव्यों को भलीभांति समझती है. अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद याचिकाकर्ता उसकी समीक्षा कर सकते हैं, और यदि कोई गड़बड़ी दिखे, तो उसे अदालत में उठाया जा सकता है. राकेश द्विवेदी ने याचिकाकर्ताओं पर उठाए सवाल राकेश द्विवेदी ने याचिकाकर्ताओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि “पूरा अवसर मिलने के बावजूद कोई भी व्यक्ति, जिसका नाम सूची से हटाया गया, अपील के लिए आगे नहीं आया. प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को लोगों की मदद करनी चाहिए थी, लेकिन वे अदालत में सिर्फ आंकड़े दिखाकर भ्रम फैलाने में जुटे हैं.” गोपाल शंकरनारायण ने खड़ा किया सवाल दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने SIR प्रक्रिया की वैधानिकता पर ही सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि पहले इस बात पर फैसला होना चाहिए कि SIR कानूनी रूप से वैध है या नहीं. 4 नवंबर को अगली सुनवाई कोर्ट ने कहा कि वह 4 नवंबर को SIR की वैधानिकता पर आयोग की दलीलें सुनेगा और फिर आगे का आदेश पारित करेगा. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बिहार की वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ही किसी ठोस आपत्ति पर विचार किया जाएगा. 

17% मुस्लिम आबादी, फिर भी NDA के सिर्फ 4 मुस्लिम उम्मीदवार — क्या है रणनीति?

पटना  एनडीए के सभी घटक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इस मामले में महागठबंधन पिछड़ गया. एनडीए में जेडीयू को छोड़ किसी भी घटक दल ने मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. जेडीयू ने 17 प्रतिशत आबादी वाले मुस्लिम समाज से सिर्फ 4 कैंडिडेट देकर एनडीए की लाज बचा ली है. बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के सभी घटक दलों ने अपने हिस्से की सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. जेडीयू ने बुधवार को 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी और गुरुवार को दूसरी सूची जारी कर बचे उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर दिए. एनडीए की दूसरी सहयोगी भाजपा ने भी अपने 101 उम्मीदवारों के नाम 3 किस्तों में जारी कर दिए हैं. एनडीए की तीसरी पार्टी हम (HAM) ने भी हिस्से में मिली 6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं. चौथी सहयोगी चिराग पासवान की लोजपा-आर ने भी 14 उम्मीदवारों की एक सूची जारी की है. उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम ने भी नाम तय कर दिए हैं. चिराग पासवान को बंटवारे में 29 सीटें मिली हैं. एनडीए की कैंडिडेट लिस्ट में जेडीयू को छोड़ किसी ने मुस्लिम कैंडिडेटट नहीं दिए. जेडीयू ने सिर्फ 4 मुसलमानों को इस बार मौका दिया है. जेडीयू ने 2020 में 11 मुस्लिम कैंडिडेट दिए थे. उम्मीदवारों के चयन में जातीय समीकरण यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार की सियासत में जातीय समीकरण की कितनी अहमियत होती है. इसी अहमियत को ध्यान में रख कर लालू यादव के नेतृत्व वाले आरजेडी ने वर्षों पहले मुस्लिम-यादव समीकरण बनाया था. नीतीश कुमार ने जब से लालू का साथ छोड़ा, तब से लेकर अब तक सभी जातियों को समान रूप से साधने का प्रयास किया है. यही वजह है 5 प्रतिशत से भी कम आबादी वाली कुर्मी जाति से आने वाले नीतीश ने अपना बड़ा जनाधार तैयार कर लिया है. हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने उम्मीदवारों के चयन में यह सावधानी बरती है. जेडीयू की लिस्ट में 4 मुस्लिम कैंडिडेट जेडीयू की सूची में एक बात खटकती है. इस बार सिर्फ 4 मुस्लिम कैंडिडेट सूची में हैं. जेडीयू ने अक्टूबर 2005 के चुनाव में 9 मुस्लिम कैंडिडेट दिए थे. 2010 में भी यह सिलसिला बरकरार रहा. तब 17 मुससलमानों को विधानसभा का टिकट जेडीयू से मिला था. 2015 में जेडीयू को इस बार की तरह ही 101 सीटें मिली थीं. फिर भी नीतीश ने 7 मुसलमानों को उम्मीदवार बनाया था. तब नीतीश आरजेडी के साथ चुनाव लड़े थे. बाद में वे भाजपा में लौट गए. नतीजा यह हुआ कि 2020 में जब उन्होंने 11 मुसलमानों को टिकट दिया तो उनकी जमात ने स्वजातीय या स्वधर्मी उम्मीदवारों का साथ नहीं दिया. जेडीयू के सारे मुस्लिम कैंडिडेट हार गए. 2015 तक मुसलमानों का मिला साथ मुस्लिम-यादव के मजूबत समीकरण की वजह से आरजेडी के प्रति मुसलमानों का आकर्षण भले कभी अधिक रहा हो, लेकिन नीतीश कुमार के उदय के बाद और उनके द्वारा किए गए काम से खुश होकर मुसलमानों का बड़ा तबका जेडीयू के साथ आ गया था. मुसलमानों में पिछड़े तबके की पहचान कर नीतीश ने उनके विकास के लिए काम किए तो उनका झुकाव उनके प्रति स्वाभाविक था. आम मुसलमानों के हित में भी नीतीश ने कई उल्लेखनीय काम कर उनके दिलों में अपनी जगह बना ली थी. नीतीश ने भी मुसलमानों को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इसके बावजूद 2020 के चुनाव में मुसलमानों ने उनका साथ नहीं दिया. जेडीयू ने 11 मुस्लिम कैंडिडेट उतारे थे, लेकिन एक भी नहीं जीत पाया. बसपा के जमा खान अगर नीतीश के साथ नहीं आते तो विधानसभा में जेडीयू का कोई मुस्लिम विधायक ही नहीं होता. इसके संकेत पहले से ही मिलने लगे थे जेडीयू पर मुसलमानों का भरोसा नहीं रहा, यह संकेत तो स्पष्ट तौर पर 2020 में ही मिल गया था, जब उसके सारे मुस्लिम कैंडिडेट हार गए. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सांसद देवेश चंद्र ठाकुर और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने खुल कर कहना शुरू किया कि जेडीयू को मुसलमानों के वोट नहीं मिलते. यह अलग बात है कि नीतीश कुमार ने मुसलमानों के लिए सर्वाधिक और उल्लेखनीय काम किए हैं. मुसलमानों में नीतीश के प्रति नाराजगी की वजह शायद भाजपा की संगत रही है. भाजपा के साथ तो वे सर्वाधिक समय तक सरकार चलाते रहे हैं, लेकिन कई मौकों पर उन्होंने भाजपा की खुल कर मुखालफत भी की है. सांसद चुने जाने के बाद देवेश चंद्र ठाकुर ने गुस्से में यहां तक कह दिया कि उन्हें मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, इसलिए वे उनका काम नहीं करेंगे. वक्फ कानून पर भाजपा के साथ जेडीयू का खड़ा होना भी मुसललमानों को नागवार लगा था. इसकी झलक उस दिन मिली, जब नीतीश ने रमजान के महीने में इफ्तार की पार्टी दी. मुस्लिम जमात के लोगों ने उसका बायकाट किया था. जेडीयू ने इस बार सिर्फ 4 मुसलमानों को ही मौका दिया है तो इसकी यही वजह समझ में आती है.  

4.90 लाख सरकारी स्कूल छात्रों को सरकार का तोहफा, मिलेगी मुफ्त साइकिल

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 4.90 लाख बच्चों को नि:शुल्क साइकिल स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष किया 215 करोड़ बजट का प्रावधान भोपाल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों के नामांकन दर और शिक्षा गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग की नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना में इस शैक्षणिक सत्र में 4 लाख 90 हजार बच्चों को साइकिल का वितरण किया गया है। इस वर्ष विभाग ने योजना के लिये 215 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान किया है। योजना के माध्यम से उन बच्चों को नि:शुल्क साइकिल का लाभ दिया जा रहा है, जिन्होंने कक्षा-5 और कक्षा-8 उत्तीर्ण कर ली है। ऐसे विद्यार्थियों के अगली कक्षा की दूरी मजरे टोले की दूरी 2 किलोमीटर या उसे अधिक की दूरी पर हो उन्हीं बच्चों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। इस योजना में उन बालिकाओं को भी योजना का लाभ दिया जा रहा है जो छात्रावास में रहकर अध्ययन कर रही है। बच्चों को साइकिल की सुविधा स्कूल आने-जाने के लिये प्रदान की गई है। पिछले वर्ष विभाग ने 4 लाख 80 हजार बच्चों को नि:शुल्क साइकिल वितरित की थी। लोक शिक्षण संचालनालय ने साइकिल खरीदी की प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से लघु उद्योग निगम की सहयोग से पूरी की है। बच्चों को साइकिल वितरण के लिये संचालनालय में विस्तृत दिशा निर्देश भी जारी किये थे। कक्षा-6 के बच्चों को 18 इंच और कक्षा-9 के विद्यार्थियों को 20 इंच की साइकिल प्रदाय की गई है।  

दिवाली पर सेहत का आशीर्वाद! महाकाल मंदिर में मिलेंगे रागी लड्डू, ब्लड प्रेशर-शुगर कंट्रोल का दावा

उज्जैन  श्री महाकाल मंदिर का लड्डू प्रसाद यूं तो पहले से ही FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) द्वारा 5 स्टार रेटिंग प्रमाणित है. जो गुणवत्ता और शुद्धता को दर्शाता है. यह प्रसाद देश में सुरक्षित भोग के लिए नंबर 1 है. लेकिन अब इसमें एक और खास प्रसाद को जोड़ा जा रहा है. मंदिर में श्री अन्न रागी के लड्डू प्रसाद की शुरुवात दीपावली पर्व से होने जा रही है. मंदिर समिति का दावा है देश में पहली बार कोई मंदिर रागी के लड्डू को प्रसाद रूप में बेचने जा रहा है. इसमें गुड़ और पंचमेवा भी शामिल रहेगा. बीमारियों से बचाएगा बाबा महाकाल का प्रसाद! हालांकि इसके साथ बेसन के लड्डू भी मिलते रहेंगे. रागी ब्लड प्रेशर एवं शुगर कंट्रोल के लिए फायदेमंद माना जाता है. एनीमिया से भी बचाता है. ऐसे में माना जा रहा है कि, अब महाकाल का प्रसाद ब्लड प्रेशर, शुगर कंट्रोल और एनीमिया से बचाव करेगा. श्री अन्नम रागी के लड्डू कैसे और कहां मिलेंगे? क्या होगी इसकी कीमत? स्वास्थ्य के लिए यह कितने फायदेमंद होंगे? आइए जानते हैं तमाम सवालों के जवाब. खास होने जा रहा है बाबा महाकाल का प्रसाद  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का धाम लाखों-करोड़ों श्रद्धलुओं की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर में प्रसाद के तौर पर बेसन के लड्डू मंदिर समिति द्वारा 'नो प्रॉफिट नो लॉस' में बेचे जाते हैं. मंदिर प्रशासक प्रथम कोशिक के अनुसार, ''श्री अन्न रागी के लड्डू का प्रसाद भी 'नो प्रॉफिट नो लॉस' के साथ मंदिर में दिए जाएंगे. बेसन के लड्डू के बराबर ही रागी के प्रसाद की कीमत होगी. श्रद्धालुओं के पास दोनों खरीदने के ऑप्शन रहेंगे. बाद में अच्छा रिस्पांस मिलता है तो समय अनुसार बदलाव होंगे. मंदिर समिति जल्द ही इसके भाव साझा करेगी.'' क्या है अभी कीमत? मंदिर में मिल रहे बेसन के लड्डू प्रसाद, श्री चिंतामण गणेश मंदिर मार्ग पर श्री महाकालेश्वर लड्डू प्रसाद यूनिट में बनाकर तैयार किए जाते हैं. जहां से प्रसाद मंदिरों के काउंटर तक पहुंचता है. मंदिर में मिलने वाले प्रसाद की कीमत 400रु किलो है. अभी 50रु, 100रु, 200रु और 400रु के अलग अलग पैकेट मिलते हैं. इसी तरह रागी के लड्डू भी मिलेंगे. महाकाल भगवान को भोग के बाद होगी शुरुआत मंदिर प्रशासक प्रथम कोशिक ने बताया, ''दीपावली पर्व पर भगवान को श्री अन्नम रागी के लड्डू प्रसाद का भोग लगाया जाएगा. जिसके बाद लड्डू प्रसाद को मंदिर के अलग-अलग प्रसाद काउंटर से बेचना शुरू कर दिया जाएगा. मंदिर के सभी प्रवेश और निकासी द्वार पर लड्डू प्रसाद के काउंटर बने हुए हैं. मंदिर में प्रसाद के लिए मशीने भी लगी हैं, जहां से श्रद्धालु खुद ही मशीन ऑपरेट कर प्रसाद ले जाते हैं.'' क्या होंगे रागी के लड्डू के फायदे? मंदिर समिति का दावा है कि रागी के लड्डू का ये प्रसाद श्रद्धालुओं के वरदान साबित होगा. श्रीअन्नम रागी के लड्डू जो ब्लड प्रेशर, शुगर कंट्रोल के साथ ही एनीमिया से बचाएंगे, हड्डियों को मजबूत रखेंगे, ऊर्जा का बेहतर स्त्रोत होंगे और त्वचा के लिए फायदेमंद होंगे. रागी में कैल्शियम, मैग्नेशियम और फॉस्फोरस होता है जो हड्डियों को मजबूत करता है. विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा के लिए बेहतर है. यह एजिंग के लक्षणों को रोकेगा. इससे शरीर में थकान महसूस नहीं होती, एनर्जी बूस्ट करता है व अन्य फायदे हैं. इसलिए इसे प्रसाद के रूप में देने का विचार मंदिर समिति कर रहा है.