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दिल्ली के LG का बड़ा फैसला: जनप्रतिनिधियों पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ

नई दिल्ली सीपीसीआर अधिनियम, 2005 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतें अब पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों के खिलाफ भी मामलों की सुनवाई कर सकेंगी। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों को इसके दायरे में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे राउज एवेन्यू स्थित इन विशेष अदालतों का दायरा बढ़ गया है।   इससे पहले, जुलाई 2023 में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों से निपटने के लिए राजधानी के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में तीन नामित/विशेष अदालतों की स्थापना को मंजूरी दी थी। गौरतलब है कि यह अधिसूचना दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद 2020 में जारी की गई थी। हालाँकि, केजरीवाल सरकार ने बिना किसी कारण के इस अधिसूचना को तीन साल से ज़्यादा समय तक लंबित रखा। सीपीसीआर अधिनियम की धारा 25 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 28 के तहत इन नामित/विशेष अदालतों के गठन के लिए उपराज्यपाल की मंज़ूरी हेतु प्रस्ताव दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया था और विधि विभाग द्वारा इसकी जाँच की गई थी। ये तीन अदालतें बच्चों के विरुद्ध अपराधों, बाल अधिकारों के उल्लंघन और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए पहले से अधिसूचित आठ अदालतों के अतिरिक्त हैं। पॉक्सो अधिनियम की धारा 28(1) में कहा गया है कि त्वरित सुनवाई के लिए, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए प्रत्येक ज़िले के लिए एक सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में नामित करेगी। सीपीसीआर अधिनियम की धारा 25 में कहा गया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध या बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, अधिसूचना द्वारा, राज्य में कम से कम एक न्यायालय या प्रत्येक जिले के लिए, उक्त अपराधों की सुनवाई के लिए एक सत्र न्यायालय को बाल न्यायालय के रूप में निर्दिष्ट कर सकती है। बशर्ते कि इस धारा की कोई भी बात लागू नहीं होगी यदि – (क) सत्र न्यायालय को पहले से ही एक विशेष न्यायालय के रूप में नामित किया गया है या (ख) किसी अन्य कानून के तहत ऐसे अपराधों के लिए पहले से ही एक विशेष न्यायालय का गठन किया गया है। इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से नामित न्यायालय 1. विशेष न्यायाधीश (पीसी अधिनियम) (सीबीआई) का न्यायालय – 09, राउज एवेन्यू, न्यायालय परिसर 2. विशेष न्यायाधीश (पीसी अधिनियम) (सीबीआई) का न्यायालय – 23, राउज एवेन्यू, न्यायालय परिसर 3. विशेष न्यायाधीश (पीसी अधिनियम) (सीबीआई) का न्यायालय – 24, राउज एवेन्यू, न्यायालय परिसर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 01 नवंबर को पांच कार्यक्रमों में होंगे शामिल

अपर मुख्य सचिव श्री पिंगुआ ने तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए रायपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। 01 नवंबर को प्रधानमंत्री श्री मोदी नया रायपुर अटल नगर में राज्योत्सव स्थल में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा वे शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित भवन और प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग सेंटर एकेडमी फार ए पीसफुल वर्ल्ड “शांति शिखर” का शुभारंभ और सत्य सांई हॉस्पिटल में हृदय का ऑपरेशन कराने वाले बच्चों से चर्चा करेंगे।  अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ ने आज नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी 31 अक्टूबर की रात्रि राजधानी रायपुर पहुंचेंगे और अगले दिन कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान नए विधानसभा भवन के लोकार्पण और राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर सभाएं होंगी। इन आयोजनों के लिए सभी तैयारियां शुरू कर दी जाए। बैठक में कलेक्टर श्री गौरव सिंह ने प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर की जा रही तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन, कमिश्नर रायपुर श्री महादेव कावरे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेंद सिंह सहित जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।   अपर मुख्य सचिव श्री पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रवास के मद्देनजर ट्रैफिक प्लान और पार्किंग की व्यवस्था कर ली जाए। इसी प्रकार राज्योत्सव मेला स्थल और अन्य कार्यक्रमों के स्थल पर पार्किंग, पेयजल, शौचालय की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि नया रायपुर के चौक-चौराहों को व्यवस्थित और सौंदर्यीकरण कर ली जाए। राज्योत्सव मेला स्थल में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए को सेक्टरों में बांटकर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। कार्यक्रम के दौरान सतत् रूप से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी जाए। इसी प्रकार साउंड सिस्टम उच्च गुणवत्तायुक्त हो। साथ ही दूर संचार विभाग के अधिकारियों को संचार व्यवस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए।  राज्योत्सव मेला स्थल पर मुख्य मंच के सामने तीन विशाल डोम बनाएं जा रहे हैं। जिनमें 60 एलईडी स्क्रीनिंग लगाए जाएंगे। मेला स्थल पर लोगों बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की जा रही है। लोगों के प्रवेश के लिए दो द्वार होंगे। एक द्वार विभागीय प्रदर्शनी के लिए होगा। विभागीय प्रदर्शनी में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मुख्य मंच के नजदीक ही डिजिटल प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मेला स्थल पर प्रधानमंत्री आवास का मॉडल भी बनाया जाएगा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्योत्सव मेला स्थल के दोनों तरफ 20-20 हजार वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य शहरों से रायपुर पहुंचने वाले मार्गों पर भी पार्किंग, पेयजल आदि की व्यवस्था की जा रही है। राज्योत्सव मेला स्थल पर 300 शौचालय बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 बैड का हॉस्पिटल तथा आईसीयू बनाया जा रहा है। इसके अलावा 25 एम्बुलेंस और पर्याप्त संख्या में फायर ब्रिगेड वाहन की व्यवस्था की जा रही है।

करीब 150 से अधिक कम्पनियों ने यूपी में बड़े निवेश के लिए जताई इच्छा

– योगी सरकार की पहल से यूपी बन रहा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन – 15 लाख करोड़ निवेश के बाद सरकार का फोकस अब विदेशी कंपनियों पर – MoU साइनिंग की तैयारी में इन्वेस्ट यूपी, दक्षिण कोरिया की शीर्ष कंपनियों से भी जुड़ रहा उत्तर प्रदेश – जर्मनी, फ्रांस और रूस में वन-टू-वन मीटिंग्स जारी, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में ताइवान का निवेश बढ़ने की संभावना – गल्फ और सिंगापुर की कंपनियां दिखा रहीं गहरी दिलचस्पी, यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक रफ्तार लखनऊ उत्तर प्रदेश को उद्योग प्रदेश और 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार तेज़ी से काम कर रही है। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतारा जा चुका है, और अब सरकार बड़े पैमाने पर विदेशी निवेशकों को भी प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षित कर रही है। इन्वेस्ट यूपी की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, जापान, सिंगापुर, कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, रूस, ताइवान और खाड़ी देशों की करीब 150 से अधिक कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में बड़े निवेश की इच्छा जताई है। सरकार की पहल पर उद्यमियों के साथ ‘वन-टू-वन’ बैठकें जारी हैं और कई MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है। फोकस कंट्री डेस्क और प्रगति जापान : विश्व एक्सपो, ओसाका के दौरान इन्वेस्ट यूपी की टीम ने कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास के साथ नियमित संपर्क में रहते हुए, JETRO के साथ समय-समय पर वार्ताएं हो रही हैं। अब तक जापान की 30 से अधिक कंपनियों के साथ वन-टू-वन बैठकें की जा चुकी हैं और कुछ निवेश परियोजनाएं ग्राउंड ब्रेकिंग के चरण में हैं। दक्षिण कोरिया : यहां इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स को साझेदार के रूप में जोड़ा गया है और जल्द ही MoU पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। कोरिया में स्थापित शीर्ष 25 कंपनियों के साथ संपर्क स्थापित किया गया है, जबकि भारतीय मिशनों और दूतावासों के साथ नीतिगत संवाद और प्रचार सामग्री का आदान-प्रदान जारी है। जर्मनी, फ्रांस और रूस : इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स से संपर्क स्थापित किया गया है। भारत और रूस में बीटूजी (बिजनेस टू गवर्नमेंट) बैठकों और गोलमेज वार्ताओं के माध्यम से निवेश पर चर्चा हुई है। साथ ही, जर्मनी और फ्रांस में भारतीय मिशनों के साथ वर्चुअल मीटिंग्स भी आयोजित की गई हैं। 13 से अधिक यूरोपीय कंपनियों ने यूपी में निवेश में रुचि दिखाई है। ताइवान : ताइवान की कई प्रमुख कंपनियों के साथ इन्वेस्ट यूपी ने बैठकें की हैं। सितंबर 2025 में बैंगलुरु में आयोजित इलेक्ट्रोनिका इंडिया एक्सपो के दौरान 40 से अधिक ताइवानी कंपनियों के साथ समर्पित बैठकें हुईं। इससे इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण में निवेश की दिशा में बड़ी संभावनाएं खुली हैं। सिंगापुर और गल्फ देश : सिंगापुर और खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, क़तर, कुवैत, ओमान, बहरीन) में भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किए गए। गल्फ की 20 से अधिक और सिंगापुर की 25 से अधिक कंपनियों के साथ संपर्क स्थापित किया गया है। कई कंपनियां आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश की इच्छा जता चुकी हैं। निवेश से मिलेगा रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती  योगी सरकार की यह पहल न केवल प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि यूपी को राष्ट्रीय औद्योगिक हब बनाने की दिशा में भी निर्णायक साबित होगी। विदेशी निवेश से तकनीकी सहयोग और उत्पादन क्षमता में भी इजाफा होगा।

आयुक्त नगरीय प्रशासन की अध्यक्षता में जी-हब क्रियान्वयन इकाई का गठन

भोपाल  राज्य शासन द्वारा जी हब पहल के अन्तर्गत शहरी क्षेत्र को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संचालन समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही जी-हब क्रियान्वयन इकाई समिति भी गठित की गयी है। इस पहल द्वारा चिन्हित नगरीय क्षेत्र के आर्थिक विकास की रणनीति तथा इसे प्राप्त करने के लिए रोडमैप तैयार किया जायेगा। इस कार्य में नीति आयोग द्वारा सहयोग प्रदान किया जायेगा। मध्यप्रदेश शासन द्वारा भोपाल आर्थिक क्षेत्र (भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रायसेन एवं सीहोर) के लिए एवं इंदौर आर्थिक क्षेत्र (इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, रतलाम, शाजापुर एवं खंडवा) को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने के लिए इकोनॉमिक प्लान तैयार करने का अनुरोध नीति आयोग को भेजा जा चुका है। संचालन समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास, वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम, उदयम, पर्यावरण, वन, गृह, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, ऊर्जा, स्कूल शिक्षा, सदस्य होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग को सदस्य-सचिव बनाया गया है। संचालन समिति के कार्य अंतर्गत राज्य स्तर पर G-Hub Initiative की दिशा एवं रणनीति निर्धारण करना, भोपाल आर्थिक क्षेत्र एवं इंदौर आर्थिक क्षेत्र के लिए इकोनॉमिक प्लान तैयार करने के लिए नीति आयोग एवं अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जायेगा। अंतर्विभागीय समन्वय सुनिश्चित करना एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना, प्रगति की नियमित समीक्षा करना और अन्य राज्यों/अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बेस्ट प्रैक्टिसेज को अपनाने के लिए मार्गदर्शन देना जैसे काम समिति द्वारा किये जायेंगे। जी-हब क्रियान्वयन अंतर्गत भोपाल आर्थिक क्षेत्र मे अध्यक्ष आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को बनाया गया है। आयुक्त-भोपाल एवं नर्मदापुरम, जिला कलेक्टर-भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम एवं सीहोर और नगर निगम आयुक्त-भोपाल, मुख्य नगरपालिका अधिकारी- राजगढ़, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, एवं सीहोर समिति में सदस्य होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग को सदस्य-सचिव बनाया गया हैं। जी-हब क्रियान्वयन अंतर्गत इंदौर आर्थिक क्षेत्र मे अध्यक्ष आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को बनाया गया है। आयुक्त इंदौर एवं उज्जैन, जिला कलेक्टर-इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, रतलाम, शाजापुर एवं खंडवा और मुख्य नगरपालिका अधिकारी-धार, खरगोन एवं शाजापुर सदस्य होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग को सदस्य-सचिव बनाया गया हैं। जी-हब क्रियान्वयन (भोपाल एवं इंदौर आर्थिक क्षेत्र) के कार्य अंतर्गत संबंधित रीजन (भोपाल/इंदौर) के लिए बेसलाइन डेटा संग्रहण एवं आर्थिक प्रोफाइल तैयार करना, नीति आयोग द्वारा साझा किए गए प्रारूपों, प्रश्नावलियों एवं अन्य इनपुट्स के अनुसार डेटा एकत्रित कर समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना, जिलों एवं नगरीय निकायों से सुझाव, आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं का संकलन कर इकोनॉमिक प्लान का प्रारूप तैयार किया जायेगा। निवेश, उद्योग, अवसंरचना, शहरी विकास, कृषि, स्वास्थ्य एवं सामाजिक क्षेत्रों की प्राथमिकताओं को पहचानकर कार्य योजना बनाना, स्थानीय स्तर पर परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करना तथा पीएम गति शक्ति एवं अन्य राष्ट्रीय राज्य स्तरीय योजनाओं के साथ उनका समन्वय करना, संचालन समिति को समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट एवं समीक्षा विवरण प्रस्तुत करना, कार्यक्रम की निगरानी एवं मूल्यांकन सुनिश्चित करना तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम सुझाना और अन्य राज्यों एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन कर क्षेत्रीय योजनाओं में उनका समावेश किया जायेगा।  

लाखों की गबन की गुत्थी सुलझी, नशा मुक्ति केंद्रों में भ्रष्टाचार का खुलासा

तरनतारन  जिले में सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों को दी जाने वाली बुपिरोनोर्फिन दवा के बड़े पैमाने पर घोटाले की जांच कर रहे सहायक सिविल सर्जन तरनतारन को एक विदेशी नंबर से फोन करके जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। यह पूरा मामला स्वास्थ्य मंत्री पंजाब के संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि जिले भर के नशा मुक्ति केंद्रों में कथित तौर पर लाखों रुपए का घोटाला लंबे समय से चल रहा है, जिसमें कई कर्मचारी पहले भी फर्जी डिग्रियों के सहारे काम कर चुके हैं। जानकारी के अनुसार, जिले के डिप्टी कमिश्नर राहुल को विभिन्न लोगों द्वारा शिकायत की जा रही थी कि बुपिरोनोर्फिन नामक दवा को बेचने का काला धंधा बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करते हुए जारी है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. गुरप्रीत सिंह राय द्वारा पिछले दिनों तीन टीमों का गठन किया गया था, जिसमें मनोचिकित्सक डॉ. विनोद कुमार, पुनर्वास केंद्र के डॉ. नवदीप कौर बुट्टर और सहायक सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत सिंह शामिल थे। पिछले दिनों में तीनों सदस्यों ने जिले भर के विभिन्न नशा मुक्ति केंद्रों की जांच शुरू की थी, जिसके दौरान विभिन्न केंद्रों में मरीजों को दी जाने वाली दवा में हेराफेरी देखी गई थी। इन टीमों द्वारा शुरू की गई जांच के दौरान नशा मुक्ति केंद्र कैरों, भिखीविंड, खेमकरण, किरतोवाल, खडूर साहिब, डालेके में कई कमियां पाई गईं। इसके बाद जिन केंद्रों में हेरा-फेरी पाई गई थी, वहां मौजूद स्टाफ को सिविल सर्जन डॉ. गुरप्रीत सिंह राय और जिला मेडिकल कमिश्नर डॉ. रूपम चौधरी ने इधर से उधर भेज दिया था। जानकारी के अनुसार दूसरी जगह बदले गए कुछ स्टाफ ने वहां भी हेरा-फेरी और काम में ढिलाई बरतनी शुरू कर दी थी। इस संबंध में सिविल सर्जन कार्यालय ने काम में कोताही बरतने वाले कर्मचारियों से दो बार जवाब मांगा, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। जानकारी के अनुसार नशा मुक्ति केंद्र कैरों और डालेके में मरीजों की फर्जी आई.डी. बनाकर रोजाना बड़ी मात्रा में करीब 400 ब्यूपिरोनॉर्फिन गोलियों की हेराफेरी की जा रही थी, जो बाजार में ऊंचे दामों पर बेची जा रही थी।   इस काले कारोबार की जांच कर रही टीम के सदस्य व सहायक सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत सिंह को दो दिन पहले एक जर्मन नंबर से आए फोन पर व्यक्ति ने जान से मारने की धमकी दी है। फोन करने वाले ने सहायक सिविल सर्जन को धमकाते हुए कहा कि आप कर्मचारियों को परेशान कर रहे हो और क्या आपको अपनी जान की परवाह नहीं है। इस संबंध में सहायक सिविल सर्जन डॉ. जसप्रीत सिंह ने यह पूरा मामला स्वास्थ्य मंत्री पंजाब डॉ. बलबीर सिंह के ध्यान में लाया है, साथ ही, डी.एस.पी. पट्टी लवकेश सैनी को एक लिखित शिकायत दर्ज करवाई। सहायक सिविल सर्जन डा. जसप्रीत सिंह ने बताया कि सिविल सर्जन के आदेश पर जिले भर के नशा मुक्ति केंद्रों में दी जाने वाली बूपीरोनॉरफिन दवा में बड़े पैमाने पर हेरा-फेरी का मामला सामने आ रहा है। इस संबंध में वह सरकार के आदेशों के चलते जांच को आगे बढ़ा रहे थे, लेकिन फोन करने वाले ने पंजाबी में बात करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कर्मचारियों को परेशान करने की बातों से साफ है कि यह धमकी चल रही जांच से जुड़ी है। डॉ. जसप्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने पुलिस प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। क्या कहते हैं सिविल सर्जन इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. गुरप्रीत सिंह राय ने बताया कि यह पूरा मामला स्वास्थ्य मंत्री पंजाब डॉ. बलबीर सिंह के संज्ञान में आ गया है, जिन्होंने जिले के एस.एस.पी. को तुरंत मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश करने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। क्या कहते हैं डी.एस.पी. इस संबंध में डी.एस.पी. पट्टी लवकेश सैनी ने बताया कि पुलिस द्वारा इस मामले की गहनता से जांच की जा रही है, साथ ही बनती कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

‘स्ट्रेंथेनिंग डिजास्टर रेजिलिएन्स’ पर राज्य स्तरीय राउंडटेबल सेमिनार

आपदाओं में न्यूनतम नुकसान के दृष्टिगत पूर्व सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी : मुख्य सचिव जैन भोपाल  मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच अब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि हम अपने विकास मॉडल को रेजिलिएंट और सस्टेनेबल बनाएं। उन्होंने कहा कि आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए हमें प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व-सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि राज्य शासन का उद्देश्य ऐसा आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा विकसित करना है, जो कठिन परिस्थितियों में भी जीवन और आजीविका की निरंतरता बनाए रखे। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, यूएनडीपी इंडिया और आपदा प्रबंधन संस्थान, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्ट्रेंथेनिंग डिजास्टर रेजिलिएन्स’ विषय पर बुधवार को राज्य स्तरीय राउंडटेबल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली में स्थायी परिवर्तन का प्रयास है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से लेकर संस्थानों तक सभी को पर्यावरण-संवेदनशील व्यवहार अपनाना होगा। उन्होंने उल्लेख किया कि शहरी नियोजन ऐसा होना चाहिए जो आपदाओं को रोक सके, न कि नई आपदाओं को जन्म दे। उन्होंने सभी विभागों और स्थानीय निकायों से आग्रह किया कि वे जलवायु और आपदा जोखिमों को अपने नीति-निर्माण और परियोजना योजना का अभिन्न हिस्सा बनाएं। यूएनडीपी इंडिया की प्रतिनिधि सुश्री इसाबेल चान ने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने आपदा प्रबंधन के लिए राज्यों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए हैं, जिससे स्थानीय संस्थाओं को भी सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नवोन्मेषी वित्तपोषण, संस्थागत क्षमता-विकास और समुदाय आधारित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है। महानिदेशक, होमगार्ड एवं आपदा प्रबंधन श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि गृह विभाग रेजिलिएंट मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य अब प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सक्रिय और पूर्व-तैयारी आधारित तंत्र की ओर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन में होमगार्ड संगठन की भूमिका केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, जनजागरूकता और क्षमता निर्माण तक विस्तारित हो रही है। इस अवसर पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. के. रविचंद्रन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के श्री मयंक अग्रवाल, नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के श्री जॉनी असिन, यूएनडीपी इंडिया के श्री मनीष मोहनदास, आपदा प्रबंधन संस्थान भोपाल के श्री आशीष भार्गव और म्यूनिच आरई के रीजनल हेड श्री मंगेश पाटनकर ने भी संगोष्ठी में अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने आपदा प्रबंधन में डेटा-आधारित नीति-निर्माण, जोखिम आकलन, सामुदायिक सहभागिता और नवाचार आधारित समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया। संस्थान के संचालक श्री ऋषि गर्ग ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आपदा जोखिम प्रबंधन केंद्र की स्थापना प्रस्तावित है जो नीति विश्लेषण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से राज्य में एकीकृत आपदा प्रबंधन प्रणाली के विकास में सहयोग करेगा। उन्होंने बताया कि संस्थान वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को ‘डिजास्टर रेजिलिएंट स्टेट’ के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी, बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञ, अकादमिक संस्थान, विकास सहयोगी संस्थाएं और नीति विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आपदा प्रबंधन को शासन की प्राथमिक विकास नीति के रूप में एकीकृत किया जाना चाहिए ताकि मध्यप्रदेश एक संवहनीय और रेजिलिएंट राज्य के रूप में विकसित हो सके।  

एसीएस सामान्य प्रशासन की अध्यक्षता में विभागीय आडिट समिति का गठन

भोपाल  महालेखाकार ग्वालियर द्वारा प्रतिवर्ष राज्य लेखों का अंकेक्षण किया जाता है। अंकेक्षण प्रतिवेदन में संवैधानिक प्रावधानों के अधीन उठाई गई विभागीय अंकेक्षण आपत्तियों के प्रभावी पुनरावलोकन एवं त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन ने अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्षता में  विभागीय आडिट समिति का गठन किया गया है। समिति में संबंधित सभी विभागाध्यक्ष एवं अन्य संस्था और वित्त विभाग का प्रतिनिधि अपर सचिव/उप सचिव, बजट-8 अनुभाग सदस्य होंगे। वरिष्ठ उप महालेखाकार और उप महालेखाकार को सदस्य सचिव बनाया गया है।  

ओरछा में हो रहे हैं 239 करोड़ रूपए से अधिक लागत के कई निर्माण कार्य

प्रदेश में ओरछा सहित हो रहा 18 लोकों का निर्माण निवाड़ी प्रदेश का दूसरा जिला, जहां हर घर नल से पहुंच रहा है जल पृथ्वीपुर में 3200 करोड़ रूपए से 300 हेक्टेयर में हो रही इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट की स्थापना श्रीराम राजा लोक के निर्माण के दूसरे चरण के कार्यों का हुआ भूमिपूजन मुख्यमंत्री ने 332.85 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन एवं लोकार्पण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि श्रीराम का नाम ही काफी है। यथा नाम तथा गुण। राम अपने गुणों से, अपने आचरण से, अपनी पितृभक्ति से और प्रजाजन का पालनहार बनकर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम बने। ओरछावासी बड़े ही भाग्यशाली हैं कि भगवान श्रीराम ने अपने दरबार के लिए ओरछा को चुना। ओरछा के लोगों को हर दिन अवधपति श्रीराम राजा सरकार के दरबार दर्शन का पुण्य मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को निवाड़ी जिले के ओरछा में श्रीराम राजा लोक के दूसरे चरण के निर्माण कार्यों के भूमिपूजन सहित अन्य‍ विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्ण विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर श्रीराम राजा लोक में दूसरे चरण के निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओरछा के प्रमुख मंदिर पहुंचकर श्रीराम राजा सरकार के दरबार में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने श्रीराम राजा लोक के भव्य निर्माण के लिए पहले चरण में मंजूर एवं वर्तमान में निर्माणाधीन कार्यों का मौके पर जाकर अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ओरछा के साथ चित्रकूट में भी करीब 2200 करोड़ रूपए के निर्माण कार्य चल रहे हैं। श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण के लीला स्थलों को तीर्थ क्षेत्र बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने राशि मंजूर कर दी है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश इलेक्ट्रानिक विकास निगम एवं एक एनजीओ के बीच करार की प्रक्रिया पूरी होने पर संस्था को लेटर ऑफ अवार्ड भी प्रदान किया। निवाड़ी को नगर पालिका परिषद का दर्जा शीघ्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवाड़ी शहर को 'नगर पालिका परिषद' का दर्जा देने के लिए जल्द ही परीक्षण कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ओरछा को धार्मिक पर्यटन सहित एयर एम्बुलेंस एवं हेलीकॉप्टर सेवाओं से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए एयर स्ट्रीप बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने नेंदुआ के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन कर नया अस्पताल बनाने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नए सड़क मार्गों के निर्माण की भी घोषणा की गई। 332 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अयोध्या और ओरछा का 500 साल से अधिक पुराना नाता है। ओरछा के बुंदेला शासक मधुकर शाह की महारानी कुंवरि गणेश जो भगवान श्रीराम की उपासक थीं, 16वीं शताब्दी में भगवान श्रीराम को अयोध्या से लेकर ओरछा आई थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ओरछा में जिस रूप में श्रीराम राजा पूजे जाते हैं, वैसे कहीं और नहीं पूजे जाते। उन्होंने ओरछा के विषय में बताया कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम अपना दिन ओरछा में ही बिताते हैं, केवल शयन करने के लिए ही अयोध्या जाते हैं। उन्होंने कहा‍कि आज निवाड़ी जिले को 332.85 करोड़ रुपए की लागत के 21 से अधिक विकास कार्यों की सौगात मिली है। क्षेत्रवासियों को नया सांदीपनि विद्यालय और नया शासकीय महाविद्यालय भी आज मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रभु श्रीराम की अनंत कृपा से हम ओरछा में एक दिव्य और भव्य श्रीराम राजा लोक का निर्माण कर रहे हैं। आज श्रीराम राजा लोक निर्माण के पहले चरण के 130 करोड़ रुपए की लागत वाले विभिन्न कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज ही श्रीराम राजा लोक के दूसरे चरण के लगभग 125 करोड़ रूपए की लागत वाले दूसरे चरण के निर्माण कार्यों की आधारशिला भी रखी जा रही है। साथ ही यहां के ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण एवं पुरातात्विक परिसर का भूमिपूजन भी किया जा रहा है। देशी-विदेशी पयर्टकों को मिलेगी सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि श्रीराम राजा लोक के पहले चरण में लगभग 5.50 करोड़ रूपए की लागत से तैयार 103 नवीन दुकानों एवं प्लाज़ा का लोकार्पण भी आज ही किया जा रहा है। यह विकास कार्य ओरछा आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की सुविधाओं में और अधिक इजाफा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ओरछा में श्रीराम राजा लोक के निर्माण के दोनों चरणों सहित सात विभिन्न प्रकार की विकास परियोजनाओं पर करीब 239 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के कई निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। यह सभी कार्य श्रीराम राजा सरकार के चरणों में अर्पित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवाड़ी प्रदेश का दूसरा जिला जहां हर घर में नल से जल इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट की स्थापना होगी। प्रदेश का दूसरा ऐसा जिला है, जहां हर घर में नल से जल पहुंच रहा है। निवाड़ी केन-बेतवा परियोजना से भी लाभान्वित होने जा रहा है। इससे संपूर्ण क्षेत्र को भरपूर लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रीराम राजा लोक के निर्माण से ओरछा में धार्मिक एवं पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा। क्षेत्र का विकास होगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि लाड़पुरा खास एवं राधापुर ग्राम की महिलाओं द्वारा संचालित होम-स्टे मध्यप्रदेश में पहले एवं दूसरे स्थान पर रहे हैं। इस वर्ष चंदपुरा तथा जमुनियां खास में एक दर्जन नए होमस्टे प्रारंभ किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया‍कि निवाड़ी औद्योगिक विकास में भी आगे आ रहा है। जिले के पृथ्वीपुर में पेसिफिक इंडस्ट्री मेटल लिमिटेड द्वारा 3200 करोड़ रूपए की लागत से करीब 300 हेक्टेयर भूमि में 'इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट' की स्थापना की जा रही है। इससे बड़ी संख्या में जिले के युवाओं को ही रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ओरछा अब वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा ओरछा में पर्यटन अधोसंरचनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत टूरिस्ट एक्सपीरियंस सेंटर, हुनरशाला, एंट्री प्लाजा के साथ यात्रा पथ का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओरछा को यूनेस्को की एच.यू.एल. (हिस्टोरिकल अर्बन लैंडस्केप) पहल के तहत चुना गया है। … Read more

UP में कृषि क्रांति की नई शुरुआत: हर जिले में बनेगा अपनी खास फसल का क्लस्टर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि ‘कमोडिटी क्लस्टर’ दृष्टिकोण के तहत बुंदेलखंड में मूंगफली, वाराणसी में लाल मिर्च व सब्जी, बाराबंकी से आज़मगढ़ के बीच केला, कालानमक चावल, हरी मटर, उड़द और आलू आदि के क्लस्टर विकसित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘टिशू कल्चर’ को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सेक्टोरल विशेषज्ञों की नियुक्ति पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री मंगलवार को उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (यूपी एग्रीज) की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना शामिल है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य में ‘डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम’ के निर्माण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, ताकि फसल, मौसम, बीज, सिंचाई, उर्वरक, बीमा, बाजार, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत सेवाओं से संबंधित सभी सूचनाएं एकीकृत प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डिजिटल कृषि नीति तैयार की जाए, जो राष्ट्रीय तकनीकी मानकों पर आधारित हो और सुरक्षित साइबर अवसंरचना तथा नवाचार आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करे। उन्होंने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की प्रक्रिया को समग्र दृष्टिकोण से जोड़ते हुए यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और राज्य के कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से उन्नत एवं डिजिटल टिकाऊ कृषि तंत्र की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कृषि से उद्योग तक’ की सोच के साथ कार्य करते हुए मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाए। निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश विविध कृषि सहायता परियोजना (यूपी डास्प) के समन्वयन में यूपी एग्रीज का क्रियान्वयन करते हुए कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और किसान उत्पादक संगठनों को भी परियोजना से जोड़ा जाए। बैठक में बताया गया कि यह परियोजना लगभग ₹4000 करोड़ (यूएस $500 मिलियन) की लागत से विश्व बैंक के सहयोग से छह वर्षों की अवधि के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 28 जनपदों में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप कृषि उत्पादन में सतत वृद्धि करना और किसानों को बाजार से बेहतर रूप में जोड़ना है। परियोजना में उत्पादकता वृद्धि, संसाधनों के कुशल उपयोग, कृषि आधारित उद्योगों के विकास और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृषि वित्तीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत छोटे एवं सीमांत किसानों तथा कृषि आधारित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ऋण सुविधा, जोखिम प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था और निजी निवेश को प्रोत्साहन पर बल दिया जाए। बैठक में बताया गया कि परियोजना से संबंधित संस्थागत तैयारियों में ठोस प्रगति हुई है। सामाजिक एवं पर्यावरणीय मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। मॉनिटरिंग, लर्निंग एवं इवैल्यूएशन एजेंसी तथा तकनीकी सहायता एजेंसी का चयन किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इर्री) के साथ छह वर्षीय उत्पादकता कार्यक्रम के लिए अनुबंध स्वीकृत हो चुका है। किसान उत्पादक संगठनों की क्षमता निर्माण के लिए तकनीकी सहायता एजेंसी का चयन शीघ्र किया जाएगा, जबकि तकनीकी परामर्शी एजेंसी का चयन अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक घटक के परिणामों की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यूपी एग्रीज की सतत मॉनिटरिंग के लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश भी दिए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नाइक के निधन पर दु:ख व्यक्त किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री रवि नाइक के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने शोक संदेश में कहा है कि स्व. रवि नाइक ने जनसेवा के लिए जीवन का बड़ा हिस्सा समर्पित किया है। विभिन्न पदों पर रहते हुए वे समाज के कमजोर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य करते रहे। गोवा राज्य के विकास के लिए वे सदैव प्रयासरत रहते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. नाइक की आत्मा की शांति के लिए और शोक-संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की महाकाल से प्रार्थना की है।