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कांग्रेस नेता भूपेश बघेल बोले, 1-2 दिन में तय होगा बिहार महागठबंधन का सीट बंटवारा

रायपुर एनडीए में सीट बंटवारे के बाद अब सब की नजर महागठबंधन पर है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद और नेता प्रतिपक्ष दिल्ली में हैं। वहीं कांग्रेस के भी कई प्रमुख नेता दिल्ली में कैंप कर रहे हैं। आज कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। वहीं बैठक से पहले कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने बिहार में महागठबंधन के सीट बंटवारे पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह 1-2 दिन में हो जाएगा। सारी तैयारी हो चुकी है, ये जल्दी हो जाएगा। बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार के विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह सीटें दी गई हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को भी छह सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिला है। भाजपा महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर लिखा, संगठित व समर्पित एनडीए…आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए परिवार के सभी सदस्यों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति से सीटों का वितरण पूर्ण किया, जो कि इस प्रकार है– भाजपा – 101 सीट जदयू – 101 सीट लोजपा (रामविलास) – 29 सीट रालोमो – 06 सीट हम – 06 सीट आज दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक आज कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। इसके बाद संभावना है कि शाम तक सीट बंटवारे की घोषणा हो जाएगी। हालांकि कई सीटों पर कांग्रेस और राजद के बीच पेज फंसा हुआ ही है। इसलिए कांग्रेस ने इस बार अलग-अलग नीति बनाने शुरू कर दी है। 2020 के विधानसभा के तरह ही इस बार भी कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची भी पूरी तरह से तैयार कर ली है। दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस पर मोहर भी लग जाएगी। सूत्र बता रहे हैं कि राजद और वामदल अब भी कांग्रेस को 70 सीट देने के लिए तैयार नहीं हैं।  

इलाज में देरी पर हंगामा, डॉक्टर बोले- हमें नहीं पता था कि मरीज सिंगर राजवीर जवंदा हैं

पिंजौर  मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता राजवीर जवंदा की सड़क हादसे में हुई मौत को लेकर नया खुलासा सामने आया है। अब यह साफ हो गया है कि हादसा हिमाचल प्रदेश के बद्दी में नहीं, बल्कि पिंजौर-बद्दी हाईवे पर सेक्टर-30 टी प्वाइंट के पास हुआ था। जवंदा की बाइक के आगे अचानक आवारा पशु (गौवंश) आ गया, जिससे बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज में देरी बनी जानलेवा हादसा 27 सितंबर की सुबह हुआ था। गंभीर रूप से घायल जवंदा को उनके साथियों ने तुरंत जे.एन. शौरी मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल, पिंजौर में भर्ती कराया।लेकिन आरोप है कि निजी अस्पताल ने इलाज करने से मना कर दिया और सिर्फ प्राथमिक उपचार देकर उन्हें पंचकूला सेक्टर-6 सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं से उन्हें आगे मोहाली के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद 8 अक्तूबर को उनकी मौत हो गई।स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अगर जवंदा को समय पर उचित इलाज मिल जाता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। डॉक्टरों ने दी सफाई—“मरीज बेहोश था, बाहरी चोट नहीं दिखी” जे.एन. शौरी अस्पताल के डॉक्टर विमल शौरी और मोहित शौरी ने बताया कि राजबीर नामक एक बेहोश मरीज को दो साथी सुबह लगभग 9 बजे अस्पताल लेकर आए थे। डॉ. मोहित ने बताया,  “मरीज के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं थी। हमने तुरंत इंजेक्शन और दवाइयां देकर करीब 15–20 मिनट तक होश में लाने की कोशिश की, लेकिन वे रिवाइव नहीं हुए। हमें लगा कि मरीज को बड़े अस्पताल में आगे का इलाज मिलना चाहिए, इसलिए हमने रेफर कर दिया।”

मोहन सरकार का दिवाली गिफ्ट संभव! मप्र में बढ़ सकता है डीए-डीआर, केंद्र से 3% पीछे

भोपाल  केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाने के फैसले के बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं। प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दीपावली से पहले समान लाभ देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार के पहले बोनस और फेस्टिवल एडवांस में बढ़ोतरी की घोषणा की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ खुशियां मना सकें। 3% डीए-डीआर और बोनस की मांग मध्यप्रदेश के कर्मचारियों ने दीपावली से पहले 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीए-डीआर) देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बोनस और फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि त्योहारी सीजन में खर्च बढ़ जाता है, इसलिए सरकार को समय रहते राहत प्रदान करनी चाहिए।तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा- दीपावली पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को बोनस के साथ 3% डीए और डीआर देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारी और पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। प्रदेश में मिल रहा 55% डीए, केंद्र में बढ़कर हुआ 58% वर्तमान में मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डीए अब 3% बढ़कर 58% हो गया है। राज्य के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2025 से ड्यू है, जिसे अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें हमेशा केंद्र के बाद देरी से डीए वृद्धि मिलती है। 29 साल से बंद है बोनस कर्मचारी संगठनों ने याद दिलाया कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है। उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में दिया जाता था। केंद्र सरकार और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस देती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा वर्षों से बंद है।कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार कहती है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना उनकी ‘कथनी और करनी’ में फर्क दिखाता है। 10 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स होंगे प्रभावित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा 55% डीए वर्तमान में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 58% डीए प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के कर्मचारियों का जुलाई 2025 से डीए ड्यू है। 29 साल से बंद बोनस देने की मांग कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है, जबकि उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में मिलता था। केंद्र और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस दे रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। यह फिर से शुरू किया जाना चाहिए। संगठनों ने कहा कि सरकार एक ओर दावा करती है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना “कथनी और करनी में अंतर” दर्शाता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दीपावली से पहले कर्मचारियों को राहत देने का फैसला लेकर त्योहार की खुशियां दो गुनी करेंगे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों को दीपावली के पहले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य के कर्मचारी भी मोहन सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहा है कि एमपी में काम कर रहे कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देकर बोनस दिया जाए ताकि कर्मचारी त्यौहार खुशियों के साथ मना सकें। इसके साथ ही फेस्टिवल एडवांस भी बढ़ी हुई राशि के साथ देने की मांग की जा रही है। उधर माना जा रहा है कि जल्दी ही राज्य सरकार भी कर्मचारियों के लिए डीए देने का ऐलान कर सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जिस प्रकार से केंद्र एवं रेलवे द्वारा दीपावली के अवसर पर बोनस एवं 3% महंगाई भत्ता, महंगाई राहत एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों को प्रदान कर दी गई है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार भी दीपावली के त्योहार पर कर्मचारियों को आर्थिक रूप से खुशियां दे। प्रदेश में वर्ष 1996 से बोनस बंद है। वर्ष 1996 तक 1079 रुपए बोनस के रूप में कर्मचारियों को प्राप्त होते थे। वर्तमान में प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आज भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है वहीं मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को बोनस से वंचित कर दिया गया है। संगठनों के अनुसार एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा कहा जाता है कि केंद्र के समान कर्मचारियों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी वहीं बोनस न देना कथनी और करनी में अंतर बताता है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्चा बढ़ जाता है। इसकी भरपाई के लिए सरकार को बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए जिसका फायदा प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। इसी तरह कर्मचारी नेता जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दिवाली के पहले महंगाई भत्ते की किस्त देने की मांग की है। जुलाई 2025 से 3% महंगाई भत्ता बढ़ाने पर इतना मिलेगा लाभ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी -1395 से 1620 तृतीय श्रेणी कर्मचारी -1755 से 4419 द्वितीय श्रेणी अधिकारी – 5049 से 6048 प्रथम श्रेणी अधिकारी -7191 से 12690 तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ने पर महीने का इतना हो जाएगा वेतन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेतन मान – 55 %भत्ता – 58% भत्ता 15500-– 24025 24490 16100— 16985—25438 … Read more

महिला वकीलों की आवाज़ बुलंद: कोर्ट में चेंबर और बैठने की जगह की मांग पर दिया ज्ञापन

नई दिल्ली 15 से 25 साल हो गए और देख‍ि‍ए, इसके बाद भी देश भर के न्यायालयों-बार काउंस‍िल्स में मह‍िला वकीलों के लिए आज बैठने तक के लिए जगह नहीं है. बरसों से हम हर तरह से सह रहे हैं. 90 के दशक तक तो कभी ये हालात थे कि ज्यूड‍िशरी में मह‍िलाओं का आना ही बहुत अच्छा नहीं माना जाता था. आज जब मह‍िलाओं की संख्या यहां बढ़ी है तो उन्हें सुव‍िधाएं नहीं मिल रहीं. कई पीपल के पेड़ के नीचे बैठ रही हैं तो कई बस एक सही जगह के इंतजार में रहती हैं…सुप्रीम कोर्ट महिला अधिवक्ता एसोसिएशन की जनरल सेक्रेटरी एडवोकेट प्रेरणा सिंह कहती हैं कि अब हम सुप्रीम कोर्ट से अपने लिए बराबरी से ज्यादा व्यवहार‍िक जरूरत पूरी करने की मांग कर रहे हैं.  मह‍िला अध‍िवक्ताओं की याच‍िका में क्या है?  गौरतलब है कि देश की वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याच‍िकाकर्ताओं में 15 से 25 साल अनुभव वाली इन वकीलों ने अदालत से देश भर की अदालतों और बार एसोसिएशनों में महिला वकीलों को प्रोफेशनल चैंबर या केबिन देने के लिए एक समान और लैंगिक रूप से संवेदनशील नीति बनाने की मांग की है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर प्रतिवादियों से जवाब मांगा है.  याचिका में महिला अधिवक्ताओं ने कहा है कि बरसों से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की चैम्बर वेटिंग लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें प्रोफेशनल कामों के लिए उचित जगह नहीं मिली. याचिका में ये भी कहा गया है कि भविष्य में होने वाले चैंबर या केबिन आवंटन में महिला वकीलों को प्राथमिकता दी जाए या उनके लिए सीटें आरक्षित हों.  इसके अलावा याचिका में उन महिला वकीलों के लिए भी चैंबर बनाने और प्राथमिकता देने की बात की गई है जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 25 साल से ज्यादा प्रैक्टिस की है और जो अभी सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की प्रतीक्षा सूची में हैं पेड़ के नीचे बैठकर प्रैक्ट‍िस… एडवोकेट प्रेरणा महिला वकीलों की प्रैक्ट‍िकल समस्या का जिक्र करती हैं. वो कहती हैं कि इतने सालों की प्रैक्टिस होने के बाद भी हमें बैठने के लिए कोई जगह नहीं मिलती. कंसल्टेशन रूम हमेशा बुक रहता है. लोग दिन भर वहीं बैठे रहते हैं. तमाम अदालतों में महिला वकीलों को अक्सर पेड़ के नीचे बैठकर क्लाइंट से मिलने या काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. कल्पना कीजिए आप पेड़ के नीचे बैठकर काम कर रही हैं, चाय वाला आता है और कहता है ‘चाय ले लो मैडम’. आप जवाब देती हैं, ‘नहीं, आगे जाएं’. चायवाला आगे कहेगा कि कोई नहीं क्लाइंट को पिला दो. बताओ आपकी उस समय क्या इज्जत रह जाती है.  कहने का अर्थ ये है कि ऐसी बहुत सारे हालात हम लोगों ने देखा और महसूस किया है. तभी हमें लगा कि ये जरूरी है कि हमें एक सम्मानजनक स्थान दिया जाए. हमारी मांग रिजर्वेशन के लिए नहीं बल्कि हमें बेसिक सुविधाएं चाहिए. हमारा मकसद केवल ये है कि महिलाओं को काम करने के लिए सुविधाजनक चेम्बर मिले. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज नोटिस जारी किया और उन्होंने सकारात्मक संकेत दिया कि महिलाओं, दिव्यांगों और अन्य जरूरतमंदों को कार्य और सुविधा के लिए जगह दी जानी चाहिए. हमें उम्मीद है कि जल्द ही कुछ सकारात्मक आदेश और निर्देश मिलेंगे. कार्यक्षमता पर पड़ रहा असर  याच‍िकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट महिला वकील संघ की उपाध्यक्ष एडवोकेट भक्ति पासरिजा का कहना है कि महिला वकीलों को चेंबर की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है. महिला वकील लंबे समय से चेंबर के लिए आवेदन कर रही हैं, लेकिन उन्हें कोई पॉजिट‍ि रेस्पांस नहीं मिल रहा है. वो कहती हैं कि हम कभी भी रिजर्वेशन की बात नहीं करते. यहां मुद्दा समान अवसर और कार्यक्षमता का है. हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सकारात्मक कदम उठाएगा. मेरा मानना है कि महिला वकीलों के लिए कार्यस्थल होंगे तो पेशेवर संरचना में सुधार होगा.  मांगें पूरी हुई तो क्या बदलेगा  सुप्रीम कोर्ट की सीन‍ियर एडवोकेट सोन‍िया माथुर कहती हैं कि आज लड़क‍ियां ज्यूड‍िशरी में करियर बनाने का सपना देखने लगी हैं. कोर्ट पर‍िसरों में मह‍िला अध‍िवक्ताओं की संख्या बढ़ी है. ऐसे में न्यायालय पर‍िसर भी जेंडर सेंसेट‍िव होने चाहिए. मह‍िलाएं न्याय के क्षेत्र में आती हैं तो उन्हें यहां का माहौल भी उनके अनुरूप मिलना चाहिए. ठीक यही बात दिव्यांगों के लिए भी लागू होती है. उन्हें भी अदालतों में चेंबर के अलावा हर सहूल‍ियत मिलनी चाहिए. न्यायालय में समय समय पर महिलाओं के लिए आवाज उठाई जाती है. देश भर के न्यायालयों में न स‍िर्फ चेंबर बल्क‍ि महिलाओं के ल‍िए क्रेच की सुव‍िधा, साफ टॉयलेट और भेदभाव रहित माहौल मिलना चाहिए. इससे उनकी प्रोफेशनल कार्यक्षमता बढ़ेगी. साथ ही ज्यूड‍िशरी में मह‍िलाओं की संख्या और ज्यादा बढ़ेगी. 

सवार कुत्ते की टिकट नहीं कटने पर बस में तीखी बहस, अब जांच में सामने आएंगे सच

हरियाणा  हरियाणा रोडवेज की भट्टू से फतेहाबाद आ रही बस में रविवार को उस समय हंगामा हो गया, जब एक यात्री अपने पालतू कुत्ते को साथ लेकर बस में सवार हुआ और उसका टिकट नहीं काटा गया। घटना को लेकर बस परिचालक और टिकट जांच उड़नदस्ता टीम के बीच तीखी बहस हुई। मामला बढ़ने पर रोडवेज मुख्यालय ने परिचालक पर जांच बैठा दी है। कुत्ते की सीट के नीचे बैठने पर यात्रियों ने की आपत्ति जानकारी के अनुसार, भट्टू निवासी एक परिवार अपने डेढ़ साल के पालतू कुत्ते के साथ बस में सवार हुआ और कुत्ते को सीट के नीचे बैठा दिया। कुछ यात्रियों ने कुत्ते की उपस्थिति पर असहजता जाहिर की और इसकी शिकायत बस परिचालक कमलदीप से की। आरोप है कि परिचालक ने शिकायत को नजरअंदाज कर दिया और नियमानुसार कुत्ते का टिकट भी नहीं काटा। फ्लाइंग टीम ने मांगा टिकट, परिचालक से हुई बहस जब बस मिनी बाईपास पहुंची, तो वहां मौजूद टिकट जांच (फ्लाइंग) टीम ने कुत्ते को देखकर उसका टिकट मांगा। टिकट न मिलने पर टीम और परिचालक के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि परिचालक ने टीम का वीडियो बनाकर दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि जांच टीम ने परिचालक पर राजस्व गबन का आरोप लगाते हुए मौके पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, कमलदीप पहले भी एक सवारी को टिकट न देने के मामले में निलंबित किया जा चुका है। जांच में दोष सिद्ध न होने पर हाल ही में उसे बहाल किया गया और दोबारा उसी रूट पर ड्यूटी दी गई थी। फतेहाबाद डिपो के ट्रैफिक मैनेजर सुरेंद्र ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों को सोमवार को कार्यालय में तलब किया गया है। रोडवेज नियमों के अनुसार, जानवरों के लिए दो टिकट का किराया अनिवार्य हरियाणा रोडवेज नियमों के अनुसार, किसी भी पालतू जानवर को बस में ले जाने के लिए उसका किराया दो टिकटों के बराबर देना होता है। इसके अतिरिक्त, किसी जानवर को यात्रियों के बीच खुले में ले जाना भी नियमों के विरुद्ध है। ऐसा न करने पर परिचालक के खिलाफ गबन का मामला बन सकता है, क्योंकि इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है।  

अयोध्या में दिखेगी योगी सरकार के विकास की झांकियां

दीपोत्सव 2025: दीपोत्सव पर दिखेगा विकास और संस्कृति का अनूठा संगम अयोध्या में दिखेगी योगी सरकार के विकास की झांकियां दीपोत्सव पर योगी सरकार की उपलब्धियों पर साकेत से निकाली जाएंगी 22 झांकियां पर्यटन व संस्कृति विभाग रामायण के सातों कांड पर निकालेगा झांकियां  झांकियों के साथ दिखेगी राज्यों की लोक कलाएं – हरियाणा का फाग और केरल का कथककली लोक नृत्य होंगे आकर्षण का केंद्र  पांच सौ से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुति अयोध्या भगवान राम की नगरी अयोध्या में इस बार नौवां दीपोत्सव न केवल दीपों की जगमगाहट से, बल्कि प्रदेश के विकास और भारतीय संस्कृति की जीवंत झांकियों से भी सजेगा। योगी सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए सूचना विभाग द्वारा 15 आकर्षक झांकियां निकाली जाएंगी, जबकि पर्यटन संस्कृति विभाग रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीम पर झांकियां प्रस्तुत करेगा। जिसमें 22 झांकियां साकेत महाविद्यालय में तैयार हो रही हैं। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे।  जिला सूचना अधिकारी संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि सूचना विभाग की झांकियां योगी सरकार के विकास कार्यों को दर्शाएंगी। इनमें उत्तर प्रदेश में हुए बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास जैसे क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। ये झांकियां प्रदेश की प्रगति और समृद्धि का प्रतीक होंगी। दूसरी ओर, संस्कृति विभाग द्वारा रामायण के सात कांडों बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड पर आधारित झांकियां तैयार की जा रही हैं। ये झांकियां भगवान राम के जीवन और रामायण की शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी। झांकियों को आकर्षक व तकनीकी बनाने के लिए दिया जा रह विशेष ध्यान संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि सूचना विभाग द्वारा नामित की गई कम्पनी ने झांकियों को आकर्षक और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए विशेष ध्यान दिया है। ये झांकियां न केवल दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली होंगी, बल्कि इनमें आधुनिक तकनीक का उपयोग भी किया जाएगा ताकि दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्राप्त हो। इसके अतिरिक्त, दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या को दीपों से सजाया जाएगा। रामपथ, भक्ति पथ और अन्य प्रमुख स्थानों पर लाखों दीप जलाए जाएंगे, जो विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में एक और कदम होगा। इस आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी शामिल होंगे। जानिए, कौन कौन से राज्य की दिखेंगी लोककलाएं  इस बार दीपोत्सव में सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं और नृत्य इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे। हरियाणा का फाग, केरल का कथककली, राजस्थान का झूमर, पंजाब का भांगड़ा, ओडिशा का संबलपुरी, गाजीपुर का डिबिया और पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश की लोक कलाएं अयोध्या के रामपथ पर अपनी छटा बिखेरेंगी। ये प्रस्तुतियां न केवल सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी, बल्कि देश की एकता और विविधता को भी रेखांकित करेंगी। इस भव्य आयोजन में लगभग 500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे। सरकार की उपलब्धियों को ये झांकियां करेंगी प्रस्तुत इवेंट के लिए जिम्मेदार कंपनी विविद इंडिया के एक प्रतिनिधि के अनुसार दीपोत्सव में प्रयागराज महाकुंभ, काशी कॉरिडोर, कृषि पशु पालन, आयुष्मान कैशलेस, डिफेंस कॉरिडोर, उत्तर प्रदेश को बेहतर बनाना हमारी प्रतिबद्धता, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसितअ भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस सुरक्षा,  प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा कराए गए कार्यों की झलक दिखाई पड़ेगी।

नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी का शुभारंभ: अमित शाह ने कहा, न्याय तक पहुंचेगा पारदर्शी मार्ग

जयपुर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को अपने तीसरे राजस्थान दौरे पर जयपुर पहुंचे। यहां उन्होंने जयपुर एक्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर, सीतापुरा में तीन नए आपराधिक कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम पर आधारित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी एक जुलाई 2024 से लागू इन नए कानूनों के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई है। इस अवसर पर शाह ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम विकास और न्याय दोनों का समन्वय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्याय व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन हो रहा है। इन तीनों कानूनों के माध्यम से आम नागरिकों की न्याय तंत्र तक तेजी से, सुलभ और पारदर्शी रूप में पहुंच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को अब औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर आधुनिक भारत की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है। शाह ने बताया कि देशभर में इन नए कानूनों के सफल क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार लगातार निगरानी और सुधार कर रही है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से जनसामान्य को कानूनों की बारीकियों और उनके व्यवहारिक उपयोग से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का यह दिन केवल न्याय व्यवस्था के नवाचार का नहीं बल्कि राजस्थान के विकास के नए अध्याय की शुरुआत का भी प्रतीक है। उन्होंने बताया कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के दौरान 35 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे, जिनमें से 3 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुके हैं और 4 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का भूमिपूजन आज इसी मंच से किया गया। इसके अलावा उन्होंने लगभग 9,600 करोड़ रुपए के 1100 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस अवसर पर पीएम सूर्य घर योजना के तहत 150 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल की भी शुरुआत की गई। शाह ने कहा कि यह योजना गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में उपस्थित डीजीपी राजीव शर्मा ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों का लागू होना देश के लिए ऐतिहासिक कार्य है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इतने बड़े पैमाने पर आपराधिक न्याय प्रणाली में बदलाव पहली बार हुआ है। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने धारा 370 हटाने और नक्सली समस्या के समाधान जैसे ऐतिहासिक निर्णय देखे हैं। वहीं राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि यह प्रदर्शनी आमजन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इससे नागरिकों को नए कानूनों की उपयोगिता और प्रावधानों की जानकारी सरल भाषा में प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि कानून केवल दंड का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का सशक्त आधार भी है। कार्यक्रम में केंद्रीय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, न्याय पालिका के सदस्य, पुलिस विभाग, विधि विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में छात्र एवं नागरिक उपस्थित रहे।

दिवाली से पहले पंजाब में बेटियों को मिली राहत, मान सरकार ने किया ऐलान

पंजाब  सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा अशीर्वाद योजना के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति वर्ग की 5751 लाभार्थी बेटियों को कुल 29.33 करोड़ रूपए की राशि जारी की गई है। इस संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि अशीर्वाद योजना के तहत जिला बठिंडा, बरनाला, फरीदकोट, फाज़िल्का, फिरोज़पुर, श्री फतेहगढ़ साहिब, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, लुधियाना, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब, पटियाला, रूपनगर, एस.ए.एस. नगर (मोहाली), एस.बी.एस. नगर (नवांशहर), संगरूर और मालेरकोटला जिलों की 5751 लाभार्थी बेटियों के आवेदन अशीर्वाद पोर्टल पर प्राप्त हुए थे। इन सभी लाभार्थियों को सहायता प्रदान करने के लिए कुल 29.33 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। उन्होंने बताया कि इस राशि से जिला बरनाला की 58, बठिंडा की 633, फरीदकोट की 67, फिरोज़पुर की 349, श्री फतेहगढ़ साहिब की 106, गुरदासपुर की 265 और होशियारपुर की 70 लाभार्थी बेटियों को वित्तीय सहायता दी गई है। इसी प्रकार जालंधर की 1087, लुधियाना की 839, मोगा की 885, श्री मुक्तसर साहिब की 192, पटियाला की 357, रूपनगर की 147, एस.ए.एस. नगर की 65, एस.बी.एस. नगर की 359, संगरूर की 210 और मालेरकोटला की 62 लाभार्थी बेटियों को भी इस योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि अशीर्वाद योजना के तहत राज्य सरकार गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु 51,000 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यह योजना मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लोक-कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक पंजाब राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए, उसका परिवार गरीबी रेखा से नीचे हो, और वह अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित हो। परिवार की वार्षिक आय सभी स्रोतों से 32,790 रुपए से कम होनी चाहिए। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को ही लाभ दिया जा सकता है। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी बी टी ) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग के लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार जहाँ सभी वर्गों की भलाई के लिए कार्य कर रही है, वहीं अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के कल्याण के लिए भी लगातार प्रयासशील है।

भवन स्वीकृति के बदले रिश्वत मांग रहा था ASI, लोकायुक्त ने पकड़ा रंगे हाथ

शहडोल  जिले के धनपुरी नगरपालिका में सोमवार को लोकायुक्त रीवा टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) इंद्र बहादुर सिंह उर्फ आईबी सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। एएसआई 3 हजार रुपए की रिश्वत वार्ड नंबर 2 के निवासी योगेंद्र वर्मा से भवन निर्माण की स्वीकृति के लिए ले रहा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से पूरे नगरपालिका परिसर में हड़कंप मच गया। भवन स्वीकृति के नाम पर मांगी थी 10 हजार की रिश्वत जानकारी के अनुसार, पीड़ित योगेंद्र वर्मा ने अपने घर के निर्माण के लिए नगरपालिका से अनुमति के लिए आवेदन किया था। इस दौरान एएसआई इंद्र बहादुर सिंह ने उससे 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। काफी मोलभाव के बाद राशि 5 हजार रुपए तय हुई, जिसमें से 2 हजार रुपए पहले ही दिए जा चुके थे। शेष 3 हजार रुपए की दूसरी किस्त देने के समय ही लोकायुक्त ने जाल बिछाया और एएसआई को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। 15 सदस्यीय टीम ने दी दबिश लोकायुक्त रीवा की 15 सदस्यीय विशेष टीम ने शुक्रवार को धनपुरी नगरपालिका कार्यालय में दबिश दी। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम बरामद की और आरोपी एएसआई को हिरासत में ले लिया। कार्रवाई के दौरान परिसर में मौजूद कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई, कई लोग कार्यालय से भाग निकले। नपा का स्थाई कर्मचारी भी शामिल सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में एएसआई के साथ नगरपालिका का स्थायी कर्मचारी रज्जन चौधरी भी शामिल था। लोकायुक्त टीम ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल दोनों से पूछताछ जारी है ताकि रिश्वतखोरी के नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। नगरपालिका में मचा हड़कंप लोकायुक्त की इस अचानक कार्रवाई से नगरपालिका में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी मौके से गायब हो गए, वहीं कुछ ने दस्तावेज़ों को छिपाने का प्रयास किया। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि धनपुरी नगरपालिका में लंबे समय से भ्रष्टाचार और मनमानी चल रही थी। लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती थी।  

गायक राजवीर जवंदा के बाइक हादसे में बड़ा खुलासा, पिंजौर में हुआ था एक्सीडेंट

चंडीगढ़  प्रसिद्ध पंजाबी गायक और अभिनेता 35 वर्षीय राजवीर जवंदा का निधन 8 अक्तूबर को अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया था। शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया था कि उनकी मौत हिमाचल प्रदेश के बद्दी में हुए सड़क हादसे के कारण हुई, लेकिन अब सामने आई नई जांच रिपोर्ट ने इस दावे को गलत ठहराया है। जांच में खुलासा हुआ है कि बाइक दुर्घटना बद्दी में नहीं, बल्कि पिंजौर में हुई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हादसा 27 सितंबर को उस समय हुआ, जब जवंदा शिमला की ओर जा रहे थे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और आरोप है कि पिंजौर स्थित एक निजी अस्पताल ने प्रारंभिक इलाज देने से मना कर दिया। इस देरी के कारण उनकी हालत और बिगड़ गई, जो संभवतः उनके जीवन के लिए घातक साबित हुई। लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल (LFHRI) की जांच रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पिंजौर पुलिस स्टेशन की डेली डायरी रिपोर्ट (DDR) और स्थानीय जांच के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि पिंजौर के शौरी अस्पताल ने घायल गायक को आपातकालीन प्राथमिक उपचार देने से इनकार कर दिया। इसके बाद राजवीर जवंदा को क्रमशः पंचकूला के सरकारी अस्पताल, फिर पंचकूला के एक निजी अस्पताल और अंततः मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन वे जीवन की जंग हार गए। कानूनी कार्रवाई की तैयारी एडवोकेट नवकिरण सिंह LFHRI के महासचिव हैं। उन्होंने एक पत्रकार के साथ मिलकर दुर्घटना स्थल का दौरा किया और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। अब संगठन हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है, जिसमें चिकित्सीय लापरवाही (Medical Negligence) का मामला उठाया जाएगा। यह याचिका न केवल जवंदा के मामले में न्याय की मांग करेगी, बल्कि इन व्यापक मुद्दों को भी उजागर करेगी जैसे आपात स्थिति में अस्पतालों और डॉक्टरों की जिम्मेदारी, सड़कों पर आवारा पशुओं से बढ़ता खतरा और आपातकालीन चिकित्सा ढांचे की कमी।