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मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए काशी पहुंचे पीएम मोदी  

राज्यपाल व सीएम योगी ने काशी में किया प्रधानमंत्री का स्वागत  मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए काशी पहुंचे पीएम मोदी   जीएसटी में सुधार के बाद पहली बार वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री का भाजपा कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत कर जताया आभार  जीएसटी और धन्यवाद लिखी हुई तख्ती लेकर रास्ते में खड़े रहे भाजपा कार्यकर्ता  भाजपा कार्यकर्ताओं ने शंखनाद और हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ पीएम पर पुष्पवर्षा भी की  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाथ हिलाकर काशीवासियों का किया अभिवादन वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को 'अपनी काशी' पहुंचे। वे यहां मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए आए हैं। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचने पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। एयरपोर्ट से पीएम हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन पहुंचे। यहां से ताज होटल के लिए निकले प्रधानमंत्री के काफिले का भाजपा कार्यकर्ताओं व आमजन ने शंखनाद, हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी ने भी हाथ हिलाकर काशीवासियों का अभिवादन किया। रास्ते में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कलाकारों ने भी उनका स्वागत किया। वहीं द्विपक्षीय वार्ता के लिए मॉरीशस के प्रधानमंत्री बुधवार को ही प्रतिनिधिमंडल के साथ वाराणसी पहुंच गए थे।  काशीवासियों व भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरे रास्ते में किया स्वागत पुलिस लाइन से निकलते ही भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और काशीवासियों ने अपने सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया। बटुकों ने शंखनाद, भाजपा कार्यकर्ता और लोगों ने ढोल- नगाड़ों के बीच उनका स्वागत किया। हर- हर महादेव के जयकारे से काशी गूंजती रही। जीएसटी में सुधार के बाद पहली बार वाराणसी पहुंचे प्रधानमत्री का आभार जताने के लिए रास्ते में जीएसटी और धन्यवाद लिखी तख्ती लेकर भाजपा कार्यकर्ता खड़े रहे। प्रधानमंत्री द्विपक्षीय वार्ता के बाद काशी से निकल जाएंगे।  सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच किया गया स्वागत प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पूरे रास्ते को सजाया गया था। छह स्थानों पर भाजपा पदाधिकारियों और जनप्रतिधियों ने मंच बनाकर प्रधानमंत्री पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर स्वागत किया। पुलिस लाइन से ताज होटल तक रोड शो जैसा मंजर देखने को मिला। जहां सड़क के दोनों ओर बड़ी तादाद में खड़े काशीवासियों ने मोदी पर पुष्प वर्षा भी की। प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर अपने काशीवासियों का अभिवादन स्वीकार किया। कचहरी,अम्बेडकर चौराहा समेत कई स्थानों पर लोकनृत्य समेत अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम से प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत हुआ। बुधवार को ही काशी पहुंचे थे मॉरीशस के पीएम  मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम बुधवार को ही काशी पहुंच गए थे। काशीवासियों ने अपनी परंपरा के अनुरूप मॉरीशस के प्रधानमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल का भी भव्य स्वागत किया था । मॉरीशस के प्रधानमंत्री गुरुवार की शाम क्रूज़ से गंगा आरती देखेंगे। फिर 12 सितंबर की सुबह बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन करेंगे। इसके बाद वे अयोध्या रवाना होंगे। अध्यात्म व आधुनिकता के संगम 'नई काशी' में पीएम का स्वागत  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने 'एक्स' अकाउंट पर पोस्ट भी किया। सीएम योगी ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का अध्यात्म व आधुनिकता के संगम उनकी 'नई काशी' में हार्दिक स्वागत व अभिनंदन।

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा सुरक्षा ऑपरेशन, गौर जेल के 5 फरार कैदी धर दबोचे गए

मोतिहारी नेपाल में जारी हिंसा और तनाव के बीच रौतहट जिले के गौर जेल से फरार हुए पांच कैदियों को भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी ने धर दबोचा। पकड़े गए सभी कैदी नेपाल के ही निवासी बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, मोतिहारी के कुंडवा चैनपुर बॉर्डर पर तैनात एसएसबी की टीम ने बुधवार दोपहर महुलिया बॉर्डर के पास जांच के दौरान इन कैदियों को पकड़ा। बताया जाता है कि नेपाल में जारी विद्रोह का फायदा उठाकर सभी आरोपी जेल तोड़कर भाग निकले थे। एसएसबी की 20वीं बटालियन, सीतामढ़ी के कमांडेंट गिरीशचंद्र पांडेय ने पुष्टि की कि कुंडवा चैनपुर बटालियन ने ही इन कैदियों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए कैदियों की पहचान रौतहट जिले के गौर गढ़वा वार्ड नंबर-5 निवासी विश्वनाथ यादव, रवि यादव, राहुल राय यादव, चंद्रानिकाहपुर के सूरज राय और गरुवा निवासी राम विनोद प्रसाद के रूप में हुई है। पूछताछ के बाद सभी को कुंडवा चैनपुर थाना पुलिस को सौंप दिया गया। थानाध्यक्ष मनीष कुमार ने बताया कि आगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी कैदियों को नेपाल की महुलिया पुलिस के हवाले कर दिया गया है।  

दरभंगा राजघराने में चिंता, महारानी कामसुंदरी देवी अस्पताल में

 दरभंगा दरभंगा महाराजधीरज सर कामेश्वर सिंह की पत्नी और राजघराने की महारानी कामसुंदरी देवी (95) की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, वह बाथरूम में गिर गई थीं, जिसके चलते उन्हें ब्रेन हेमरेज और ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हुई है। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। महारानी के बीमार होने की खबर मिलते ही उनके पौत्र कुमार कपिलेश्वर सिंह दिल्ली से दरभंगा पहुंचे और सीधे अस्पताल जाकर दादी से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से भी उनकी स्थिति की जानकारी ली। मीडिया से बातचीत में कुमार कपिलेश्वर सिंह ने दादी की देखरेख में लापरवाही पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि इतनी उम्र में भी महारानी के स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता नहीं बरती गई, जबकि पैसों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे खुद अपनी दादी की देखभाल करेंगे और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें अपने घर ले जाकर सेवा करेंगे। बताया जा रहा है कि राजघराने के अंदरूनी पारिवारिक विवादों के चलते महारानी लंबे समय से अलग रह रही हैं। इसी वजह से कई बार परिवार के सदस्यों तक अहम जानकारियां समय पर नहीं पहुंच पातीं। वर्तमान हालात में भी पारिवारिक विवाद के बीच बीमारी की सूचना देर से मिलने पर कुमार कपिलेश्वर सिंह ने असंतोष जताया है।  

IPS कैडर में शामिल होंगे MP के 5 अधिकारी, 15 नाम UPSC को भेजे गए

भोपाल   मध्यप्रदेशराज्य पुलिस सेवा के पांच अधिकारियों का आईपीएस अवार्ड होगा। इसके लिए डीपीसी 12 सितंबर को कराने की तैयारी है। इस बार राज्य पुलिस सेवा के कुल पांच अधिकारियों को आइपीएस(IPS Officer) बनाया जाएगा। जिसमें 1997-98 बैच के 15 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा। लेकिन 5 अधिकारियों को ही आइपीएस बनाया जाएगा। 15 अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार कर यूपीएससी को भेजा है। बता दें डीपीसी में यूपीएससी के एक मेंबर के साथ सीएस अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाना और एसीएस होम शिवशेखर शुक्ला शामिल होंगे। दो नामों पर फंसा पेंच वरिष्ठता के क्रम में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी सीताराम ससत्या का नाम सबसे पहले है। लेकिन उनका एक विभागीय प्रकरण होने के कारण पेंच फंसा है। ऐसे ही वरिष्ठता में दूसरा नंबर अमृत मीणा का है लेकिन जाति प्रमाण पत्र का एक मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। इन नामों पर होगा विचार डीपीसी में राज्य पुलिस सेवा के 1997-98 बैच के 15 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।     सीताराम ससत्या     अमृत मीणा     विक्रांत मुराब     सुरेंद्र कुमार जैन     आशीष खरे     राजेश रघुवंशी     निर्मिषा पांडेय     राजेश कुमार मिश्रा     मलय जैन     अमित सक्सेना     मनीषा पाठक सोनी     सुमन गुर्जर     संदीप मिश्रा     सव्यसाची सर्राफ     समर शर्मा

नियमितीकरण नीति 2014: सरकार ने डाटा अपडेट के लिए अधिकारियों को दिया अंतिम समय

हरियाणा  सुप्रीम कोर्ट में लंबित स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम योगेश त्यागी केस को लेकर हरियाणा सरकार ने सभी विभागों, निगमों और बोर्डों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत कितने कर्मचारियों को स्थायी किया गया, कितनों का अभी तक नहीं हुआ और कितनों का होना बाकी है – इसकी पूरी और ताज़ा जानकारी 12 सितंबर तक भेजनी होगी। मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 28 जुलाई 2025 को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से नवीनतम आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा था। इससे पहले 95 विभागों, बोर्डों और निगमों की रिपोर्ट महाधिवक्ता कार्यालय, चंडीगढ़ को भेजी जा चुकी है। अब अदालत ने दोबारा अपडेटेड डेटा मांगा है। विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने पुराने आंकड़ों में कोई बदलाव है तो उसे अपडेट करें और तुरंत भेजें। जानकारी न होने की स्थिति में भी ‘शून्य सूचना’ अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। सभी विभागों को यह रिपोर्ट मानव संसाधन-1 शाखा को ई-मेल के माध्यम से भेजनी है। लापरवाही पर जवाबदेही तय सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। अदालत से होने वाले किसी भी प्रतिकूल आदेश की जवाबदेही उसी विभाग/अधिकारी की होगी जिसने जानकारी देने में लापरवाही बरती। इसलिए उठाया कदम सरकार की ओर से यह पत्र इसीलिए जारी किया है ताकि समय पर ताज़ा आंकड़े उपलब्ध हों और अदालत में सरकार की स्थिति मजबूत हो। नियमितीकरण नीति 2014 से जुड़े विवादित मुद्दों पर न्यायिक फैसला तेज़ी से आ सकेगा। साथ ही, विभागीय जवाबदेही तय होने से आगे लापरवाही पर अंकुश लगेगा। विभागों के सामने चुनौती मानव संसाधन विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को ही सभी प्रशासनिक सचिवों को यह पत्र जारी किया है। जानकारी के लिए उन्हें केवल एक दिन का समय दिया है। यानी शुक्रवार तक उन्हें पूरी जानकारी देनी होगी। कम समय में सभी विभागों और निगमों से सटीक आंकड़े जुटाना कठिन है। पुराने रिकॉर्ड और नई जानकारी में अंतर होने से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। समयसीमा चूकने पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी और प्रतिकूल आदेश का खतरा है।   इस तरह समझें पूरा केस स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम योगेश त्यागी एवं अन्य (विशेष अनुमति याचिका संख्या 31566/2018) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि हरियाणा सरकार ने 2014 में नियमितीकरण नीति लागू की थी। इसमें लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने का प्रावधान था। कर्मचारियों ने दावा किया कि नीति लागू करने में भेदभाव हुआ। इसलिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कुछ कर्मचारियों ने अदालत का रुख किया और नीति की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इसके बाद सरकार ने इस पर सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की। अब अदालत यह तय करेगी कि किन संविदा कर्मचारियों को स्थायी किया जाए। अदालत ने सरकार से ताज़ा और सही आंकड़े मांगे हैं। इसी कारण सरकार ने सभी विभागों को 12 सितंबर तक रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। अहम बिंदु सुप्रीम कोर्ट में 2014 की नियमितीकरण नीति पर सुनवाई जारी हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को रिपोर्ट जमा करने का आदेश 12 सितंबर तक भेजनी होगी जानकारी, वरना अधिकारी होंगे जिम्मेदार पहले ही 95 विभागों की रिपोर्ट महाधिवक्ता कार्यालय को दी जा चुकी है

पंजाब के मॉडल को हरियाणा में लागू करने की मांग, CM सैनी से BKU नेताओं की चर्चा

हरियाणा  पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी ‘जिसका खेत-उसकी रेत’ पॉलिसी लागू करने की मांग भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने मुखर रूप से उठाई है। संगठन का कहना है कि बाढ़ और बारिश के कारण हजारों किसानों के खेतों में रेत जम गई है। अगर इस रेत को बेचने का अधिकार किसानों को मिले, तो वे हुए भारी नुकसान की भरपाई कर सकेंगे। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी के नेतृत्व में यूनियन प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की और 11 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। भाकियू नेताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि धान की खरीद 15 सितंबर से शुरू की जाए। उनका कहना था कि खरीफ सीजन में पहले ही किसानों को मौसम की मारझेलनी पड़ी है, ऐसे में फसल बिकने में देरी किसानों की हालत और बिगाड़ देगी।   बाढ़ पीड़ितों को 50 हजार मुआवजा प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजा बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ किया जाए। साथ ही बाढ़ में खराब हुए ट्यूबवेलों के लिए विशेष मुआवजा दिया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि जब तक नदियों और बरसाती नालों की सफाई व तटीय बंदों की मरम्मत नहीं होगी, तब तक हर साल यह संकट दोहराया जाएगा। भाकियू ने सीएम से बातचीत में दो-टूक कहा, “सिर्फ राहत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।” हांसी-बुटाना नहर पर उठे सवाल चीका हलका क्षेत्र की समस्या को भी जोरदार ढंग से रखा गया। भाकियू का कहना है कि हांसी-बुटाना नहर के कारण घग्गर नदी बार-बार उफान पर आती है और खेतों में पानी भर जाता है। सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई गई। यहां बता दें कि पूर्व की हुड्डा सरकार के समय हांसी-बुटाना नहर बनी थी लेकिन इस पर अभी तक विवाद बना हुआ है। खाद वितरण और बीमा योजना पर आपत्ति यूरिया खाद वितरण को पोर्टल से जोड़ने पर किसानों ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि पोर्टल सिस्टम से किसानों को लंबी लाइनों और तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भाकियू ने इसे बंद करने की मांग की। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी सवाल उठे। यूनियन ने कहा कि इसमें किसानों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलता, इसलिए इसके लिए कानूनी प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमा योजना कागजों में मजबूत है, लेकिन जमीनी स्तर पर कमजोर।   गन्ना, कपास और बिजली टावर का मुद्दा किसानों ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने और कपास की पूरी खरीद सरकारी स्तर पर करने की मांग रखी। साथ ही उन्होंने कहा कि जो बड़े बिजली टावर किसानों की जमीन से गुजरते हैं और एक राज्य से दूसरे राज्य में बिजली ले जाते हैं, उनका मुआवजा भी किसानों को मिलना चाहिए। किसानों को मुख्यमंत्री से उम्मीद भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसानों की समस्याएं गंभीर हैं और सरकार को इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेंगे।

नए रोजगार के दरवाजे खुलेंगे: 23.36 करोड़ के निवेश से गारमेंट्स सेक्टर को प्रोत्साहन

मुजफ्फरपुर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर जिले के बेला औद्योगिक क्षेत्र, फेज-2 में M/s Gogreen Apparel Limited द्वारा 55 लाख पीस प्रति वर्ष क्षमता वाली रेडिमेड गारमेंट्स इकाई स्थापित करने के लिए 2,336.22 लाख रुपये (23.36 करोड़ रुपये) निजी पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रोत्साहन मंजूरी देने की घोषणा की है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कंपनी को इकाई की स्थापना से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे भूमि संबंधी कागजात, परियोजना प्रतिवेदन, बैंक एप्रेज़ल रिपोर्ट और बैंक ऋण स्वीकृति पत्र प्रस्तुत करने की शर्त रखी गई थी। इन सभी शर्तों को पूरा करने के बाद ही यह मंजूरी प्रदान की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोत्साहन वितरण के समय वास्तविक परियोजना व्यय के आधार पर अनुदान की गणना की जाएगी। सम्राट चौधरी ने बताया कि यह इकाई टेक्सटाइल और लेदर क्षेत्र के अंतर्गत आती है और राज्य सरकार की उच्च प्राथमिकता सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह कदम बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में अहम साबित होगा। उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर पैदा करने और राज्य की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि बिहार में हाल ही में नई औद्योगिक नीति 2025 को मंजूरी दी गई है, और रेडिमेड गारमेंट्स इकाई के लिए वित्तीय प्रोत्साहन क्लियरेंस इसकी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सम्राट चौधरी ने आश्वस्त किया कि इस तरह के निवेश से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बिहार औद्योगिक विकास की नई दिशा की ओर बढ़ेगा।

चुनाव से पहले राजद में उठा घमासान: तेजस्वी के PA ने कॉल नहीं उठाया, पार्टी ने छोड़ा साथ

वैशाली वैशाली जिले के मलिकपुर पंचायत निवासी राजकुमार राय उर्फ आला राय की बुधवार देर रात पटना के राजेंद्र नगर स्थित उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान मलिकपुर पंचायत के रामपुर श्याम चक निवासी के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, राजकुमार राय 2000 से 2020 तक लगातार पंचायत चुनावों में सक्रिय रहे। उन्होंने मुखिया का चुनाव तीन बार लड़ा, जिसमें दूसरे स्थान पर रहे। 2020 में उन्होंने जिला परिषद का चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहे। उस चुनाव में उन्हें लगभग 4,200 वोट प्राप्त हुए। स्थानीय लोगों ने बताया कि शुरुआती दौर में राजकुमार राय जीप चलाते थे। इसके बाद उन्होंने जमीन के कारोबार में कदम रखा। पैसा कमाने के बाद उन्होंने पटना के राजेंद्र नगर में घर बनाया और पूरा परिवार पटना में शिफ्ट हो गया, लेकिन राघोपुर के लोगों से उनकी लगातार कनेक्टिविटी बनी रही। राघोपुर के लोग किसी भी समस्या के लिए फोन करते या मिलते, तो वह जाकर उनका काम कराया करते थे। 2020 में वह जिला परिषद का चुनाव लड़ा, जिसमें वह तीसरे स्थान पर रहे। जिला परिषद के चुनाव में उन्हें लगभग 4,200 वोट प्राप्त हुए। इसके बाद लगभग 1 साल पहले उन्होंने राजद पार्टी ज्वाइन की और रजत के द्वारा उन्हें पंचायती राज प्रकोष्ठ, वैशाली जिला का अध्यक्ष बनाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही बात तेजस्वी यादव के पीए और वैशाली जिले के राजद जिला अध्यक्ष के साथ विवाद का कारण बना। उस समय राजकुमार राय ने कहा था कि यह लोग केवल लोगों को राजद में जोड़ने में ही लगे हैं, जबकि हम लोगों की सेवा करना चाहते हैं। इसीलिए उन्होंने राजद पार्टी छोड़ दी। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर इस बार वे विधायक का निर्दलीय चुनाव लड़ते, तो उन्हें लगभग 10–15 हजार वोट मिल सकते थे।

भर्ती परीक्षा में नकल का शॉकिंग मामला: महिला सुपरवाइजर सलाखों के पीछे

बीकानेर एसओजी ने सरकारी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह पर बड़ी कार्रवाई की है। महिला अधिकारिता विभाग में सुपरवाइजर पद पर कार्यरत मंजू कुमारी बिश्नोई (30) को गिरफ्तार किया गया है। मंजू पर आरोप है कि उसने सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) भर्ती परीक्षा 2018 में ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल कर नकल करके चयन हासिल किया था। मंजू कुमारी मुक्ताप्रसाद नगर, सेक्टर-5 की रहने वाली है और वर्तमान में बज्जू स्थित महिला अधिकारिता विभाग में सुपरवाइजर के पद पर तैनात थी। परीक्षा के दौरान नकल गैंग ने ब्लूटूथ डिवाइस से उसे प्रश्नपत्र हल करवाए थे। एसओजी की जांच में मंजू की संलिप्तता सामने आने के बाद उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया। अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। एसओजी ने बताया कि मंजू से पूछताछ कर नकल गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। एसओजी द्वारा जारी वांटेड आरोपियों की सूची में मंजू का नाम भी शामिल था। बीकानेर एसपी कावेन्द्र सागर के निर्देश पर मुक्ताप्रसाद नगर थानाधिकारी विजेन्द्र कुमार और उनकी टीम ने मंजू को गिरफ्तार कर जयपुर एसओजी के सुपुर्द किया। अदालत में पेशी के बाद पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया। अब एसओजी उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा के दौरान वह किन लोगों से जुड़ी थी और नकल गिरोह के अन्य सदस्यों तक कैसे पहुंचा जा सकता है।

एमपी में शुरू होगी आधुनिक बस सेवा, परिवहन विभाग ने की बड़े पैमाने पर तैयारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में लगभग 20 साल पहले बंद हुई लोक परिवहन सेवा अब पीपीपी मॉडल पर शुरू होने जा रही है। यह संभव हो रहा है ।  मध्यप्रदेश में सुविधा शुरू करने के लिए कई प्रदेशों की बस सेवा (Government Bus Service) का अध्ययन किया गया है। अब पर्यटन विभाग (Transport Department) ऐसा आदर्श मॉडल तैयार कर रहा है जो देश में अपने तरीके का इकलौता होगा। घर बैठे प्री-टिकट, सीट रिजर्वेशन, रियल टाइम बस लोकेशन जैसी सुविधा मिलेगी। सुरक्षा के लिए वीएलडीटी से हर 5-10 सेकंड में बस की जानकारी कंट्रोल रूम पर पहुंचेगी। परिवहन मंत्री ने गिनाई सुविधाएं परिवहन मंत्री (Transport Minister) उदयप्रताप सिंह ने बताया, आधुनिक और सर्व सुविधायुक्त बस टर्मिनल, बस स्टैंड का निर्माण होगा। इंट्रीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) आधारित मॉडल में यात्री और बस ऑपरेटर्स के लाभ व सरकार की संतुष्टि तीनों पक्षों को प्राथमिकता पर रखा है। ज्ञात रहे कि बस सेवा की शुरुआत इंदौर संभाग से की जानी है। यह मार्च-अप्रेल 2026 से संभव है। 50% पंचायत वंचित, गांवों में पहुंच बढ़ेगी परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने बताया, वर्तमान में ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां के लिए परमिट जारी हुए हैं लेकिन, बसें नहीं चलतीं। इसके विपरीत रूट वाइलेंस की स्थिति भी मिलती है। ऐसी बातों को देखते हुए बसों के रूट तय किए जा रहे हैं। अभी लगभग 50 प्रतिशत पंचायतों तक यात्री बसों (public transport service) की पहुंच है। नई व्यवस्था में यह पहुंच बढ़कर 75 प्रतिशत तक हो जाएगी। सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्र के यात्रियों को मिलेगा। रोडवेज की बसें बंद होने के सालों बाद प्रदेश की डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का संचालन गांव तक शुरू करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए सरकार के द्वारा अलग से मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधो संरचना लिमिटेड के नाम से एक कंपनी का गठन भी किया जा चुका है। इस कंपनी के द्वारा बस सेवा को शुरू करने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस दिशा में अब तक हुए कामकाज की कल भोपाल में समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में डॉ यादव ने कहा कि इस बस सेवा को इंदौर से जल्द शुरू किया जाए। इस बस सेवा में यात्रियों की सुविधाओं और किफायती किराए का ध्यान रखा जाए। इस बैठक में बताया गया कि इंदौर से ही यह बस सेवा शुरू की जाएगी। पूरे प्रदेश में इंदौर ही बसों की आवाजाही का सबसे बड़ा केंद्र है। यह निश्चित किया गया है कि इस बस सेवा के तहत जो बसें संचालित की जाएगी उन बसों में आगे के कांच पर उन शहरों और गांव के नाम लिखे जाएंगे जहां पर की यह बस जाएगीं। इस बैठक में प्रदेश के परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि उज्जैन जिले में सार्वजनिक बस के संचालन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। जबलपुर और इंदौर में रूट सर्वे तथा श्रेणी वार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और आवश्यक सर्वे भी लगभग पूरा किया जा चुका है। इस सर्वे में 6 बिंदुओं पर प्राथमिकता के साथ ध्यान दिया जा रहा है। इसमें संस्थागत व्यवस्था एवं स्टाफ, नियम एवं करो में संशोधन रूट सर्वे एवं स्कीम की अधिसूचना, आईटी प्लेटफार्म तथा एजेंसी का चयन और परिवहन संरचना की योजना ऑपरेटर से चर्चा कैपेसिटी बिल्डिंग पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत सरकार के द्वारा निजी क्षेत्र की भागीदारी से पूरे रूट पर बस स्टैंड, बस स्टॉप का निर्माण किया जाएगा। बसों की पार्किंग के लिए दीपक बनाए जाएंगे। पूरी अधो संरचना का विकास किया जाना है। यह पूरा कार्य निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ किया जाएगा। इसमें जो बेसन का संचालन होगा वह भी निजी क्षेत्र की भागीदारी का ही होगा।