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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की खराब सेहत को देखते हुए कैबिनेट बैठक हुई स्थगित

चंडीगढ़  आज शाम होने वाली पंजाब कैबिनेट की बैठक स्थगित कर दी गई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की खराब सेहत को देखते हुए यह बैठक आज नहीं होगी। बैठक की नई तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी। मुख्यमंत्री मान ने पंजाब में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए यह बैठक बुलाई थी, लेकिन अब उनकी सेहत में सुधार होने के कारण यह बैठक आज नहीं होगी। बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान हाल ही में बीमार पड़ गए थे। तेज बुखार होने के कारण सीएम मान अपनी सरकारी रिहायश में हैं। आम आदमी पार्टी सुप्रीमो और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उनका हालचाल जानने मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। इसके बाद उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से भी मुलाकात की। आपको ये भी बता दें कि इस समय पंजाब के कई इलाके बाढ़ की मार झेल रहे हैं और मुख्यमंत्री मान रोजाना ही बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे थे।   

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा- मध्यप्रदेश मातृ-शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में सतत सुधार की राह पर

एमएमआर में 17, यू5 एमआर में 5, आईएमआर और एनएमआर में 2-2 अंकों का सुधार भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के केन्द्रित एवं समन्वित प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहे हैं। मध्यप्रदेश मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में सही मार्ग पर है। हम स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मैनपावर की वृद्धि, बेहतर लक्ष्यीकरण, सतत् मॉनिटरिंग और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान के माध्यम से आगामी वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम-2023 की रिपोर्ट में प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए हैं—मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 159 से घटकर 142, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 29 से घटकर 27, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 40 से घटकर 37 और 5 वर्ष से कम आयु बाल मृत्यु दर (यू5 एमआर) 49 से घटकर 44 हो गई है। ये आँकड़े सकारात्मक संकेत हैं कि हमारे प्रयास सही दिशा में हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने यह उपलब्धि प्रदेश की स्वास्थ्य टीम की अथक मेहनत का परिणाम है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ, नर्स, डॉक्टर, विशेषज्ञ, प्रशासक और नीति निर्धारक सभी ने मिलकर निरंतर कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह सफलता आगे बढ़ने की प्रेरणा है। सतत प्रयास, वैज्ञानिक योजना और जनभागीदारी के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 7 अप्रैल 2025 को मातृ शिशु संजीवन मिशन और अनमोल 2.0 पोर्टल का शुभारंभ इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 80 प्रति लाख, नवजात मृत्यु दर को 10 प्रति हजार से कम और शिशु मृत्यु दर को 20 प्रति हजार से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। अनमोल 2.0 और ई-पीएमएसएमए जैसे डिजिटल टूल्स के माध्यम से हाई रिस्क गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान और प्रबंधन किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जाँच हर माह की 9 और 25 तारीख को की जा रही है तथा पोषण किट, आयरन सप्लीमेंट और आवश्यक इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चिन्हित अस्पतालों को एफआरयू के रूप में सक्रिय कर एचडीयू/आईसीयू, एसएनसीयू/एनबीएसयू को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। मातृ-शिशु संजीवन मिशन के साथ-साथ सीएचसी और पीएचसी को सुदृढ़ बनाने, टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ सेवाएँ उपलब्ध कराने, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की पहचान और समय पर देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुस्कान और लक्ष्य कार्यक्रमों से गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है तथा ई-रूपी और “यू कोट वी पे” योजनाओं के तहत सोनोग्राफी और एनेस्थीसिया सेवाएँ सुलभ हुई हैं। उन्होंने कहा कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारों के साथ-साथ किशोर स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में स्वस्थ गर्भधारण सुनिश्चित हो सके। शत-प्रतिशत ट्रैकिंग, मातृ एवं शिशु प्रकरणों की रिपोर्टिंग और समीक्षा, टीबी व सिकल सेल स्क्रीनिंग, कैंसर नियंत्रण, एनसीडी स्क्रीनिंग और एचपीवी टीकाकरण जैसे उपायों से व्यापक स्वास्थ्य सुधार का रोडमैप तैयार किया गया है।  

मुख्यमंत्री साय ने किया बायंग एनीकट कम काजवे का भूमिपूजन, 38 करोड़ की लागत से सिंचाई और आवागमन सुविधा होगी बेहतर

  100 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर संयंत्र और पाइपलाइन के जरिए उपलब्ध होगी सिंचाई सुविधा रायगढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ जिले के ग्राम बायंग (कछार) में 38 करोड़ रुपये की लागत से मांड नदी बायंग एनीकट कम काजवे निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इससे लाभान्वित गांवों में भू-जल संवर्द्धन होगा तथा आवागमन की सुविधा भी बढ़ेगी। एनीकट कम काजवे निर्माण से 100 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर संयंत्र और पाइपलाइन के जरिए सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री साय ने लोकार्पण कार्यक्रम में ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्र में जब भी मैं आता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे अपने ही परिवार के बीच आया हूँ। आप सभी ने 20 वर्षों तक आशीर्वाद देकर मुझे सांसद बनाकर दिल्ली भेजा, अब मुख्यमंत्री के रूप में मैं अपने परिवार से मिलने आप सबके बीच आया हूँ। मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विगत 20 महीनों में ‘मोदी की गारंटी’ के तहत अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। इनमें धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से, 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता, तेंदूपत्ता संग्राहकों को पुनः चरण पादुका वितरण, किसानों को धान बोनस तथा 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद जैसी योजनाएँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने कहा था कि छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आज प्रदेश के युवा देख रहे हैं कि जिन्होंने पीएससी परीक्षा में घोटालेबाजी की, वे जेल के अंदर हैं और कुछ जाने की तैयारी में हैं। श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार में श्रद्धालुओं के लिए रामलला दर्शन योजना और बुजुर्गों के लिए तीर्थ स्थलों की यात्रा की योजना प्रारंभ की गई है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने एनीकट भूमिपूजन के अवसर को बायंग (कछार) गांव के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि हमने जो वादा किया था, उसे पूरा किया। अब गांव-गांव में प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं, महतारी वंदन योजना का पैसा समय पर हर महीने मिल रहा है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन तथा डबल इंजन की सरकार में विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्र का संसद में पिछले 20 वर्षों से प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे मुख्यमंत्री प्रत्येक गांव के लिए परिवार के सदस्य जैसे हैं। रायगढ़ से सांसद रहते हुए शायद ही ऐसा कोई गांव बचा हो जहाँ मुख्यमंत्री श्री साय न गए हों। छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बने मात्र 20 महीने हुए हैं और इस अवधि में अनेक कार्य किए गए हैं। किसानों के एक-एकड़ पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी, दो वर्षों का बकाया बोनस, भूमिहीन मजदूरों के खाते में हर साल 10 हजार रुपये की राशि पहुँच रही है। हर गांव में प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत मकान बनाए जा रहे हैं। राजमिस्त्री और सेंट्रिंग प्लेट कम पड़ गए हैं, फिर भी लगातार कार्य हो रहे हैं। केवल कछार गांव में ही 180 से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास की नई गाथा लिख रहा है। हमारी माताएँ-बहनें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ग्राम पंचायत कछार के किसानों के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। एनीकट बनने से कृषि संबंधी सुविधाएँ बढ़ेंगी। छत्तीसगढ़ की जनता देख रही है कि विष्णुदेव साय के सुशासन में सभी घोषणाएँ पूरी हो रही हैं और ऐसी योजनाएँ चलाई जा रही हैं जिनके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति कर रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविन्द्र गबेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुजाता सुखलाल चौहान, जनपद पंचायत सदस्यगंगाबाई पटेल, ग्राम बायंग के सरपंच गौरीशंकर सिदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

एमपीसीएसटी में एनजीओ के लिए प्रस्ताव लेखन में समस्या कथन की पहचान पर हुई कार्यशाला

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और विज्ञान भारती द्वारा शुक्रवार को एमपीसीएसटी भोपाल के ऑडिटोरियम में एनजीओ के लिए “प्रस्ताव लेखन में समस्या कथन की पहचान” विषय पर एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला 12 से 14 सितंबर, 2025 को ग्वालियर में आयोजित होने वाले “टेक फॉर सेवा” कार्यक्रम के अंतर्गत थी। कार्यशाला एनजीओ के लिए प्रस्ताव लेखन में वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही। एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि प्रस्ताव स्पष्ट, तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए। समस्या कथन में उसकी जड़ तक जाना आवश्यक है जिससे निर्धारित उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके। उन्होंने “टेक फॉर सेवा” में अधिक से अधिक एनजीओ से भागीदारी की अपील की, जिससे तकनीक को नया आयाम मिल सके। विज्ञान भारती (मध्य क्षेत्र) के संगठन मंत्री श्री विवस्वान हेबालकर ने कहा कि प्रस्ताव में समस्या को स्पष्ट और सटीक रूप से प्रस्तुत करना जरूरी है। समाज के उत्थान के लिए नवाचारों को अपनाना होगा और “टेक फॉर सेवा” इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एमपीसीएस के कार्यकारी संचालक डॉ. विवेक कटारे ने कहा कि समस्या कथन लिखना एक कला है। इसे जितना स्पष्ट और सटीक लिखा जाएगा, परिणाम उतने ही बेहतर होंगे। कॉपी-पेस्ट से बचकर जमीनी स्तर के कार्यों को आधार बनाना चाहिए। नर्मदा समग्र न्यास के सीईओ श्री कार्तिक सप्रे ने सुझाव दिया कि प्रस्ताव तैयार करते समय गहन शोध और स्पष्ट समस्या कथन जरूरी है। एमपीसीएसटी के प्रिंसिपल साइंटिस्ट श्री विकास शेंडे ने कहा कि प्रभावी समस्या कथन के लिए गहरी समझ और ठोस शोध की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, दस्तावेज़ को व्यवस्थित और सटीक रखने तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित फंडिंग स्कीम्स के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञ डॉ. तृप्ती सिंह ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से समस्या कथन को प्रभावी बनाने के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्किल डेवलपमेंट और जागरूकता से जुड़े 50 से अधिक एनजीओ के प्रतिनिधि और संस्थापक शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने "प्रस्ताव लेखन में समस्या कथन की पहचान" और प्रभावी लेखन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। कार्यशाला में एमपीसीएसटी के सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. जी.डी. बैरागी, तकनीकी अधिकारी डॉ. एस.के. गर्ग सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेश संवर्धन पहल का परिणाम

मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र को मिली मजबूती, आया नया निवेश, बढ़ेगी ऊर्जा सुरक्षा 32,500 करोड़ का निवेश,17 हजार को मिलेगा रोजगार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवेश संवर्धन प्रयासों के फलस्वरुप ऊर्जा क्षेत्र और ज्यादा मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सुरक्षा बढ़ रही है। मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य के रूप में पहचान बना चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से अब इस क्षेत्र में नया निवेश आ रहा है। टोरेंट पॉवर और अडानी पॉवर जैसी बड़ी कंपनियों ने अब ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रदेश में काम करना शुरू कर दिया है। टोरेंट पॉवर कंपनी 22 हजार करोड़ और अडानी पॉवर कंपनी 10 हजार 500 करोड़ रूपये का निवेश करेगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार 17,000 को रोजगार मिलेगा। टोरेंट पॉवर 1600 मेगावॉट थर्मल प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश में 22 हजार करोड़ रूपये का निवेश करेगी। टोरेंट पॉवर लिमिटेड को एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) से 1,600 मेगावॉट के कोयला आधारित बिजली संयंत्र की स्थापना के लिए "लेटर ऑफ अवार्ड (LoA)" दे दिया है। यह अहमदाबाद-स्थित समूह द्वारा बिजली क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। यह परियोजना ग्रीनफील्ड 2×800 मेगावॉट की अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी और इसे डिज़ाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। टोरेंट इस संयंत्र की पूरी क्षमता MPPMCL को 25 साल की पॉवर परचेज एग्रीमेंट पॉवर परचेस एग्रीमेंट के तहत 5.829 रूपये प्रति यूनिट की दर से आपूर्ति करेगा। यह परियोजना PPA पर हस्ताक्षर होने के 72 महीनों के भीतर चालू होनी है। परियोजना लागत का लगभग 70% ऋण के माध्यम से पूरा किया जाएगा। इस संयंत्र के लिए कोयले का आवंटन MPPMCL द्वारा केंद्र सरकार की SHAKTI नीति के अंतर्गत किया जाएगा। यह परियोजना अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी, जिससे पारंपरिक थर्मल यूनिट्स की तुलना में बेहतर दक्षता और कम उत्सर्जन मिलेगा। टोरेंट पॉवर का यह निवेश केंद्र सरकार के 2032 तक 80 गीगावॉट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ग्रिड को स्थिर करने के लिए आवश्यक बेसलोड क्षमता जुड़ेगी। इस परियोजना के निर्माण के दौरान 10 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। अडानी पॉवर मध्यप्रदेश में 800 मेगावॉट का ताप विद्युत संयंत्र 10 हजार 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित कर मध्यप्रदेश को बिजली आपूर्ति करेगी। इस परियोजना के तहत 800 मेगावॉट की क्षमता वाला एक नया ताप विद्युत संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यह संयंत्र अनूपपुर ज़िले में स्थित होगा। संयंत्र को 54 महीनों में चालू किया जाएगा। यह कदम प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र विकसित करने और उससे बिजली आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) दे चुकी है। यह संयंत्र डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत स्थापित किया जाएगा। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, देश की बिजली की मांग, विशेष रूप से बेस लोड पॉवर की मांग, लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा अधोसंरचना में निवेश अत्यंत आवश्यक है, जिससे बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। अनूपपुर संयंत्र विश्वसनीय, सस्ती और प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह न केवल भारत बल्कि मध्यप्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा और राज्य के सतत विकास को गति देगा। इस संयंत्र के लिए कोयले की आपूर्ति भारत सरकार की 'शक्ति योजना' (SHAKTI Policy) के तहत मध्यप्रदेश को आवंटित की गई है। परियोजना निर्माण चरण में 7,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और चालू होने के बाद इसमें लगभग एक हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत होंगे।  

हर ग्राम पंचायत में बनेंगे सुव्यवस्थित एवं निर्बाध पहुँच वाले श्मशानघाट

5वें राज्य वित्त आयोग मद में प्राप्त राशि से होगा विकास पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5वें राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत अधोसंरचना विकास अनुदान मद की राशि से प्रदेश में सुव्यवस्थित श्मशान घाटों का विकास किया जायेगा। श्मशान घाटों के विकास कार्यों के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं। सभी जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत के सीईओ को कार्यवाही करने के निर्देश दिए गये हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन आमजन के लिये प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय एवं प्रत्येक आश्रित ग्राम में वित्तीय वर्ष 2025-26 तक न्यूनतम एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सहज तथा बारहमासी निर्बाध पहुँच वाले श्मशान घाट की उपलब्धता के लिये प्रतिबद्ध है। ग्रामों में श्मशान घाटों के विकास के लिये त्रिस्तरीय पंचायत राज प्रशासन से न्यूनतम आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराये जाने की अपेक्षा की गई है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक ग्राम में "श्मशान मद" के लिये आवश्यक भूमि आरक्षित हो। आरक्षित भूमि की संपूर्ण रूप से फेंसिंग की गई हो। स्थल पर पहुँचने के लिये साल के बारहों महीने निर्बाध एवं सहज पहुँच मार्ग उपलब्ध हो। श्मशान मद में आरक्षित भूमि अतिक्रमण से मुक्त हो। इन मापदण्डों की अनुपलब्धता की स्थिति में प्रत्येक ग्राम पंचायत को राजस्व अभिलेखों से यह ज्ञात करना होगा कि ग्राम पंचायत के किस ग्राम में पहले से श्मशान घाट के लिये भूमि आरक्षित होकर श्मशान घाट है और किस ग्राम में नहीं है। प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रत्येक ग्राम में, जिसमें श्मशान के लिये भूमि उपलब्ध नहीं है, आवश्यक उपयुक्त भूमि आरक्षित कराने के लिये मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत संबंधित जिला कलेक्टर को आवेदन कर भूमि आरक्षित करानी होगी। जहां पहले से श्मशान घाट है और आरक्षित भूमि की यदि समुचित फेंसिंग नहीं है, तो उस भूमि की फेंसिंग प्रमुख अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा तैयार किये गये मानकों के आधार पर कराई जाये। चेन लिंक के लिये प्राक्क्लन के अनुसार अथवा स्थानीय बोल्डरों, पत्थरों से निर्मित खखरी के द्वारा की जा सकेगी। श्मशान घाट तक निरापद रूप से पहुँचने के लिये समुचित मार्ग उपलब्ध नहीं हो अथवा मार्गों में पुलिया/रपटा नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में आवागमन दुष्कर होता है, ऐसे स्थलों पर निर्बाध पहुँच के लिये आवश्यकतानुसार समीपवर्ती मार्ग से श्मशान स्थल तक 3.75 मीटर (लगभग) चौड़ाई की सी.सी. रोड और यथाआवश्यक पुलिया/रपटा भी बनाया जाये। आवश्यक भूमि की अनुपलब्धता की स्थिति में जिला कलेक्टर से निर्धारित प्रक्रिया से मार्ग निर्धारण कराये जाने की कार्यवाही की जाये। श्मशान घाट के लिये पूर्व से आरक्षित भूमि पर यदि किसी भी प्रकार का अतिक्रमण है तो संबंधित सीईओ जिला पंचायत द्वारा राजस्व एवं पंचायत अमले के सहयोग से तत्काल अतिक्रमण हटाये जाने की कार्यवाही करायी जाकर आरक्षित भूमि पर फेंसिंग की जाये। ये समस्त कार्य ग्राम पंचायतों को 5वें राज्य वित्त आयोग अंतर्गत अधोसंरचना विकास अनुदान मद के तहत प्रदाय की जाने वाली राशि से किये जायेंगे। इसके बाद अवशेष राशि का व्यय किसी अन्य कार्य पर किया जा सकेगा। आवश्यकता होने पर अन्य योजनाओं की राशि से नियमानुसार अभिसरण अनुमत्य होगा। इसके लिये आवश्यक जनभागीदारी एवं जनसहयोग भी प्राप्त किया जा सकता है। यदि ग्राम पंचायत के खाते में पूर्व से 5वें वित्त मद की राशि उपलब्ध है तो उस राशि से कार्य तत्काल प्रारंभ कराये जायेंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, पंचायत समन्वय अधिकारी तथा उपयंत्री उत्तरदायी रहेंगे। इसी प्रकार जनपद स्तर पर सहायक यंत्री, कार्यक्रम अधिकारी/सीईओ जनपद पंचायत, खण्ड पंचायत अधिकारी और जिला स्तर कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत/परियोजना अधिकारी तथा पंचायत सेल उत्तरदायी होंगे।  

राहत शिविर का दौरा करने पहुंचे केजरीवाल, लोगों ने जताई असंतोष की भावना

नई दिल्ली  दिल्ली में बाढ़ और जलभराव ने एक बार फिर राजधानी की तैयारियों की पोल खोल दी है। जिन इलाकों में पहले राहत शिविरों में समय पर टेंट लगते थे, मच्छरदानी, खाना, पीने का पानी और डॉक्टरों की व्यवस्था रहती थी, आज उन्हीं शिविरों में बदइंतज़ामी और लापरवाही साफ देखी जा सकती है। बढ़ते संकट के बीच लोग खुद यह कहते नजर आ रहे हैं कि जब अरविंद केजरीवाल की सरकार थी, तो राहत का इंतज़ाम तेज़ और मानवीय होता था। कहीं पानी भरने से पहले पंप लगाए जाते थे, नाले समय से साफ होते थे, और राहत शिविरों में व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाता था। अब जबकि दिल्ली की सत्ता में आम आदमी पार्टी नहीं है, और MCD व केंद्र दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, ऐसे में हालात काबू से बाहर होते दिख रहे हैं। टेंट समय पर नहीं लगे, लोगों को खाना नहीं मिला, पीने का साफ पानी नहीं है और मच्छरों से परेशान लोग खुद दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। लोगों की नाराज़गी इस बात से भी है कि जिन समस्याओं को पहले खुद मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर पहुंचकर हल करते थे, अब उन पर ध्यान देने वाला कोई नहीं दिखता। न तो कोई ज़िम्मेदार मंत्री हालात का जायज़ा लेने आया, न कोई ठोस कार्रवाई की गई। हर ओर एक किस्म की ‘प्रशासनिक चुप्पी’ पसरी हुई है।   केजरीवाल ने राहत शिविरों में जाकर जो हालात देखे, वो बताने के लिए काफी हैं कि आज की सरकारें सिर्फ बयानबाज़ी में व्यस्त हैं, ज़मीन पर कुछ नहीं कर पा रहीं। उन्होंने सरकारों से अपील की कि राहत व्यवस्था को राजनीति से ऊपर रखकर देखें, क्योंकि यह मानवीय संकट है, और इसमें देरी का मतलब है जनता को और तकलीफ़ देना। दिल्ली के लोगों को अब वो दिन याद आ रहे हैं जब अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में हर संकट को तुरंत जवाब मिलता था। अब जबकि सत्ता में वे नहीं हैं, तो लोग कह रहे हैं, "आज के हालात देखकर समझ आता है कि पहले अरविंद केजरीवाल की सरकार वाकई हमारे लिए काम करती थी।  

SDRF की बहादुरी: पार्वती नदी के कारण ठप हाईवे से सुरक्षित निकाले गए 15 लोग, गर्भवती महिला भी शामिल

श्योपुर जिले की वीरपुर तहसील का दीमरछा गांव शुक्रवार को चंबल और कूनो नदी की लहरों से घिर गया। इसके बाद प्रशासन को एक गर्भवती महिला समेत 15 ग्रामीणें का रेस्क्यू करना पड़ा। दो घंटे के ऑपरेशन में सभी ग्रामीण रेस्क्यू किए जा सके। गर्भवती महिला को नजदीक के अस्पताल में पहुंचाया गया है। रुक-रुक कर हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उधर पार्वती नदी में आए उफान के कारण कुहांजापुर पुल पर सुबह 11 बजे तक तीन फीट के आसपास पानी रहा। दोपहर बाद पार्वती नदी का पानी उतरने पर 24 घंटे से बंद श्योपुर-बारां हाईवे पर आवागमन शुरू हो सका।   गुजरे तीन-चार दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से जलस्तर बढ़ने के कारण वीरपुर क्षेत्र के दिमरछा गांव का मुख्य रास्ता चंबल और कूनो नदी की लहरों के बीच समा गया। गांव के पास कूनो और चंबल का संगम होने से स्थिति और विकट हो गई। इसी दौरान गांव की रहने वाली नीलम पत्नी कुलदीप रावत 24 साल की डिलीवरी होनी थी। जिला प्रशासन को इस बारे में सुबह सूचना मिली। इसके बाद एसडीआरएफ टीम को मौके पर बुलाया गया। मौके पर हालातों को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू चलाने का निर्णय लिया। एसडीआरएफ ने प्रशासन और पुलिस की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।। टीम ने महिला को सुरक्षित निकालकर एंबुलेंस से वीरपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। रेस्क्यू के दौरान पता चला कि गांव में 15 अन्य लोग भी फंसे हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थे। एसडीआरएफ की टीम ने सभी को बारी-बारी से बाहर निकाला। इनमें से कुछ लोगों को बीमार होने पर नजदीक के अस्पताल भेजा गया है। टीआई वीरपुर भारत सिंह गुर्जर के अनुसार नदी के तेज बहाव के कारण एसडीआरएफ टीम को नाव और रस्सियों का सहारा लेना पड़ा। दो घंटे के रेस्क्यू अभियान में सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया। रेस्क्यू दल में नवदीप शर्मा, पवन नामदेव, सुनील भूरिया और स्थानीय वीरपुर थाने के पुलिसकर्मी शामिल थे। ग्रामीणों ने प्रशासन और रेस्क्यू दल का आभार जताया। पिछले दिनों से हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर है। निचले इलाकों के गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। 24 घंटे बाद श्योपुर-बारां हाईवे पर शुरू हो सका आवागमन प्रदेश के कई हिस्सों के साथ ही मालवा अंचल में हो रही भारी बारिश का असर श्योपुर जिले की चंबल और पार्वती नदियों पर पड़ रहा है। पार्वती नदी के कुहांजापुर के सूरथाग पुल पर गुरूवार दोपहर 3 फीट के ऊपर पानी छलांगे मारने लगा। यही वजह है कि श्योपुर का बारां से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया था। ऐसे में सैकड़ों वाहन फंस गए। जिला प्रशासन ने पार्वती नदी किनारे बसे गांवों में निगरानी बढ़ाते हुए लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी। गुरूवार को सुबह 11 बजे तक पार्वती उफन रही थी। दोपहर में धीरे-धीरे नदी का जलस्तर कम होने लगा। कुहांजापुर पुल के पास नदी के उतरने के बाद पुल पर पुलिस ने आवागमन खोला। 24 घंटे के लगभग बारां हाईवे से आवागमन बंद रहा।

मुख्यमंत्री ने पन्ना जिले के अमानगंज में महिला सम्मेलन में हितलाभ वितरित किये

पन्ना में शीघ्र होगा मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पन्ना हीरा और महावीरों की धरती है। ईश्वर ने पन्ना को विशेष आशीर्वाद दिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण के लिए हमारी सरकार कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी बहनों को अनेक योजनाओं की सौगात दीं। लाड़ली बहनों को 250 रुपए राखी का शगुन अलग से भेजा गया है। अब लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद भाई-दूज से हर माह 1500 रुपए प्रति माह मिलेंगे। धीरे-धीरे वर्ष 2028 तक लाड़ली बहनों को 3000 रुपए देंगे। लाड़ली बहनों के लिए सरकार के खजाने में कोई कमी नहीं है। कुछ दिन पहले एक सर्वे आया है कि जहां-जहां लाड़ली बहना योजना लागू की गई हैं। वहां घरों में सुख-समृद्धि आई है। प्रदेश सरकार हर कीमत पर माताओं-बहनों के सम्मान की रक्षा करेगी और उन्हें आर्थिक समृद्धि प्रदान करने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को पन्ना जिले के अमानगंज में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पन्ना जिले को 106 करोड़ लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पन्ना और बुंदेलखंड में आज भी महाराज छत्रसाल और आल्हा-ऊदल की वीरता की गाथाएं गाई जाती हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र त्याग और बलिदान में कभी पीछे नहीं रहा। इसी प्रकार प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय सेना ने पराक्रम दिखाया और बहनों के सिंदूर उजाड़ने वालों को सबक सिखाकर बदला लिया। पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की बड़ी निर्ममता से हत्या की थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सेना दुश्मन देश में घुसी और आतंकियों को मिट्टी में मिला दिया। कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा बुंदेलखंड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार हर जिले में उद्योगों को बढ़ावा दे रही है और युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए हर संभव कार्य कर रही है। प्रदेश में पुलिस के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती की जा रही है। सालभर में कुल 1 लाख से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां होंगी। अब मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रदेश को 1 लाख करोड़ की नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से पन्ना सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलेगा। बुंदेलखंड के किसान अपनी जमीन न बेचें। भविष्य में बुंदेलखंड कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार ने गरीब-जरूरतमंदों को पक्के मकान दिए हैं। नल जल योजना के माध्यम से घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है। आयुष्मान योजना से 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त हो रहा है। राज्य सरकार भी स्कूली बच्चों को स्कूटी, लैपटॉप, छात्रवृत्ति, गणवेश, साइकिल, कॉपी-किताब सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की विकास कार्यों की घोषणाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे जल्द ही मेडिकल कॉलेज का भूमि-पूजन करने के लिए पन्ना आएंगे। पन्ना को खजुराहो से रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। पन्ना में एक स्टेडियम और स्थाई हेलीपैड बनाया जाएगा। अमानगंज में अस्पताल के उन्नयन सहित विधानसभा क्षेत्र गुनौर में सात उप स्वास्थ्य केन्द्र खोलने, सलेहा में नवीन महाविद्यालय की स्थापना, देवेन्द्रनगर के शासकीय महाविद्यालय में नवीन संकाय प्रारंभ करने एवं स्कूल उन्नयन, अगस्त्य मुनि आश्रम के सौंदर्यीकरण, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के तहत बरगी नहर सिंचाई प्रणाली की उद्वहन सिंचाई परियोजना की घोषणा की। इस परियोजना के क्रियान्वयन से क्षेत्र के 114 गांव लाभांवित होंगे और 25 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। मुख्यमंत्री ने गढ़ीपडरिया के वृन्दावन बांध की क्षमता बढोत्तरी कर नहरों के जीर्णोद्धार कार्य सहित गुनूसागर सिंचाई परियोजना की भी घोषणा की। सांसद श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए प्रयासरत हैं। 12 हजार 500 करोड़ के जल जीवन मिशन में पन्ना जिले की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पन्ना और गुनौर विधानसभा क्षेत्र में अस्पताल, नदी के पुल, खेल मैदान, सड़क जैसे अनेक विकास कार्य प्रगति पर हैं। पन्ना विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और विधायक गुनौर श्री राजेश वर्मा ने भी संबोधित किया। विकास प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की योजनाओं पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित सामग्री देखी। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग आयोग श्री रामकृष्ण कुसमरिया, विधायक पवई श्री प्रहलाद लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मीना राजे परमार, नगर पालिका अध्यक्ष पन्ना श्रीमती मीना पाण्डेय, कमिश्नर सागर संभाग श्री अनिल सुचारी, पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती हिमानी खन्ना, पुलिस उपमहानिरीक्षक श्री ललित शाक्यवार, कलेक्टर श्री सुरेश कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री साईं कृष्ण एस थोटा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक एवं माताएं-बहनें उपस्थित थीं।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने ब्रह्मचारी महर्षि गिरीश से की सौजन्य भेंट

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भोपाल में ब्रह्मचारी महर्षि गिरीश से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने आध्यात्म एवं स्वास्थ्य विषयों पर चर्चा कर मार्गदर्शन प्राप्त किया।