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सतपुड़ा की वादियों में बसे छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन-ग्राम अब पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण बन गये

पर्यटन स्टोरी भोपाल  सतपुड़ा की वादियों में बसे छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन-ग्राम अब पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण बन गये हैं। ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, पहाड़ी ट्रैकिंग और लोक नृत्य सब कुछ एक ही जगह पर्यटकों को मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों में यहां बनाये गये होम-स्टे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली है। मध्यप्रदेश में होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति तथा ग्रामीण जीवन के अनुभव कराने के उद्देश्य से ग्रामीण पर्यटन परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के 100 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। होम-स्टे से रूका पलायन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किये गये छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे देश-प्रदेश के पर्यटकों को खूब भा रहे हैं। हर सप्ताह यहां हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। जिले के 12 गांवों को पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित किया गया है। इनमें से 7 गांव सावरवानी, देवगढ़, काजरा, गुमतरा, चोपना, चिमटीपुर और धूसावानी में 36 होम-स्टे पर्यटकों के लिये खोले जा चुके हैं। होम-स्टे खुलने से ग्रामीण रोजगार और उच्च शिक्षा का रूझान बढ़ा है। साथ ही जनजातीय परिवारों का पलायन भी रूक गया है। गांव के युवा गाइड के रूप, लोक नृत्य और भजन मंडली की प्रस्तुति और बैलगाड़ी संचालन से सैलानियों को ग्रामीण जन-जीवन से अवगत कराते हुए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। हर पर्यटन ग्राम की अपनी पहचान छिंदवाड़ा जिले के हर पर्यटन ग्राम की अपनी विशेषता है। भोपाल मार्ग पर साल के जंगल के बीच बसे चोपना में देवना नदी का अद्भुत नजारा, पातालकोट के चिमटीपुर गांव की रहस्यमयी वादियां, पेंच नेशनल पार्क के करीब ऑफबीट डेस्टीनेशन गुमतारा, देवगढ़ में गोंड शासन का ऐतिहासिक किला, काजरा में बंधान डेम के बेकवॉटर्स का सौंदर्य और धूसावानी गांव के चौरागढ़ महादेव मंदिर का दृश्य और आम के बागान पर्यटकों को यहां बार-बार आने के लिये प्रेरित करते हैं। होम-स्टे में पर्यटक गाय का दूध दोहने, खेत के कामों में हाथ बटाने और पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करने जैसे अनुभव जीते हैं। ढोलक-मंजीरे के साथ भजन और कर्मा नृत्य मंडलियों की प्रस्तुति भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। अब छिंदवाड़ा सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि सतत ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।  

महिला उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा: हरियाणा सरकार का स्टार्टअप मिशन, 60% महिलाओं की भागीदारी पर फोकस

हिसार  हरियाणा अब महिलाओं को स्टार्टअप इकोनॉमी की नई ताकत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं की भागीदारी को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए न केवल हर जिले में उद्यमिता विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे, बल्कि नए इनक्यूबेशन सेंटर्स में भी महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी। चंडीगढ़ में स्टार्टअप पॉलिसी को लेकर आयोजित बैठक में सीएम ने कहा कि हरियाणा का भविष्य तभी मजबूत होगा जब हमारी बेटियां और बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी। स्टार्टअप पॉलिसी में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई पर ले जाना इसी दिशा में एक ठोस कदम है। वर्तमान में हरियाणा के लगभग 50 प्रतिशत स्टार्टअप्स महिलाएं चला रही हैं, जो देशभर में एक रिकॉर्ड है। अब लक्ष्य इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना है, ताकि हरियाणा महिला स्टार्टअप्स की राजधानी के रूप में उभरे। बैठक में बताया गया कि नए इनक्यूबेशन सेंटर्स में महिलाओं को मेंटॉरशिप, टेक्नोलॉजी सपोर्ट, फंडिंग और नेटवर्किंग की विशेष सुविधाएं दी जाएंगी। साथ ही, बूटकैंप्स और पिचिंग सत्रों में महिला उद्यमियों को प्राथमिकता मिलेगी। हरियाणा में पहले से ही 9,100 से अधिक स्टार्टअप्स कार्यरत हैं। इनमें से कई का संचालन महिलाएं कर रही हैं। देश के 117 यूनिकॉर्न में से 19 हरियाणा से हैं और इनमें महिला उद्यमियों की भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में हरियाणा की महिला नेतृत्व वाली स्टार्टअप्स देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाएंगी। कृषि-टेक, आईटी, ई-कॉमर्स और हेल्थकेयर सेक्टर में महिला स्टार्टअप्स ने राज्य की रोजगार व नवाचार शक्ति को नई दिशा दी है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- पशुपालन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, मिलेगा आत्मनिर्भरता का रास्ता

भोपाल  प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें पशुपालन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह हमारा संकल्प है कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन निरंतर बढ़े और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की 'मिल्क कैपिटल' बनाया जाये। गो- संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। प्रदेश में पशुपालन विभाग को गो-पालन विभाग का नाम दिया गया है। प्रदेश में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9% होता है, जिसे 20% तक ले जाने का सरकार का लक्ष्य है। प्रदेश में गोवंश के लिए आहार की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रतिमाह दी जाने वाली राशि को ₹20 से बढ़कर ₹40 कर दिया गया है। 'हर घर गोकुल' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश में 946 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना में प्रदेश के ग्रामों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के लिए प्रत्येक जनपद में एक वृंदावन ग्राम बनाया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन से अधिक आय के लिए मध्यप्रदेश दुग्ध संघ के सांची ब्रांड को अधिक लोकप्रिय बनाया जा रहा है, इसके लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड से करार भी किया गया है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ दुग्ध उत्पादों की बेहतर ब्राडिंग, गोवंश की समुचित देखभाल, वेटनरी क्षेत्र में आवश्यक प्रशिक्षण और उन्नत अधोसंरचना स्थापित करने में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की विशेषज्ञता का हरसंभव लाभ लिया जा रहा है। वर्ष 2030 तक प्रदेश के 26 हजार गांवों तक डेयरी नेटवर्क का विस्तार सुनिश्चित किया जाना है। इससे 52 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन होगा। बढ़े हुए दुग्ध संकलन का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए आधुनिकतम दुग्ध प्रसंस्करण अवसंरचना विकसित की जाएगी। प्रदेश में निर्मित होने वाले दुग्ध उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर ब्राडिंग सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में पशुपालन और डेयरी विकास के लिए सरकार द्वारा नई योजनाएं शुरू की गई हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना में पशुपालक को 25 दुधारू पशु गाय, संकर गाय, भैंस की इकाई प्रदान की जाएगी। इस इकाई की लागत 36 से 42 लाख रुपए के बीच रहेगी।  योजना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों के लिए 33 प्रतिशत एवं अन्य वर्ग के लिए 25% अनुदान की व्यवस्था की गई है। सरकार अब सिर्फ भैंस का नहीं गाय का दूध भी खरीदेगी। गाय के दूध की खरीद की कीमत बढ़ाई जाएगी। प्रदेश में "स्वावलंबी गो-शालाओं की स्थापना नीति 2025" भी लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में उपलब्ध गो वंश के आश्रय एवं भरण पोषण के लिए 05 हजार गो-वंश से अधिक की क्षमता वाली वृहद गो-शालाएं नगर निगम ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, भोपाल और जबलपुर में स्थापित की जा रही हैं।  गो-संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन गया है।  मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, नस्ल सुधार कार्यक्रम के साथ ही विभिन्न केंद्रीय योजनाओं का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में न केवल गोवंश का समुचित पालन-पोषण किया जा रहा है, अपितु दुग्ध उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। प्रदेश में स्वाबलंबी गो-शालाओं की स्थापना नीति पर तेज गति से कार्य किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत प्रदेश में 28 स्थान चिन्हित किए गए हैं तथा 8 स्वयं सेवी संस्थाओं को भूमि भी आबंटित भी की जा चुकी है। योजना में 5000 एवं अधिक गो-वंश के पालन पर शासन की ओर से 130 एकड़ तक भूमि आवंटित किए जाने का प्रावधान है। गो-शालाओं के लिए चारा-भूसा अनुदान योजना के अंतर्गत इस वित्त वर्ष में विभिन्न गो-शालाओं को 133.35 करोड रुपए दिए गए हैं। गत वर्ष इस योजना में 270.40 करोड़ रुपए गो-शालाओं को अनुदान के रूप में दिए गए थे। प्रदेश में गो संवर्धन बोर्ड के अंतर्गत 2942 गो-शालाएं पंजीकृत हैं, जिनमें 2828 गो-शालाएं संचालित हैं। इन गो-शालाओं में 04 लाख 22 हजार गो-वंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। गत एक वर्ष में प्रदेश में कुल 623 गौशालाएं पंजीकृत हुई हैं, जिनमें 596 गौशालाएं मनरेगा योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं तथा 27 का संचालन स्वयंसेवी संस्थाएं कर रही हैं।   प्रदेश में अति पिछड़े बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारु पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा 90% अनुदान पर प्रत्येक हितग्राही को दो-दो मुर्रा भैंस/ गाय प्रदान की जाती है। योजना में गत वर्ष 660 के विरुद्ध 639 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया था तथा इस वर्ष 483  को पशु प्रदान किए जाने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर विदिशा तथा रायसेन जिलों में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में कुल 1500 " मैत्री" की स्थापना के लिए 12 करोड़ 15 लख रुपए की राशि प्राप्त हुई है।  प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशु नस्ल सुधार के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।  

स्पोर्ट्स साइंस सेंटर से बदलेगा खेलों का भविष्य, मध्यप्रदेश बनेगा राष्ट्रीय हब

स्पोर्ट्स स्टोरी स्पोर्ट्स साइंस सेंटर मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर देगा नयी पहचान स्पोर्ट्स साइंस सेंटर से बदलेगा खेलों का भविष्य, मध्यप्रदेश बनेगा राष्ट्रीय हब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा मध्यप्रदेश का स्पोर्ट्स साइंस सेंटर खिलाड़ियों को मिलेगी आधुनिक ट्रेनिंग: स्पोर्ट्स साइंस सेंटर से चमकेगा मध्यप्रदेश का नाम भोपाल  भोपाल अब स्पोर्ट्स साइंस और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग का राष्ट्रीय हब बनने जा रहा है। खेल विभाग द्वारा नाथु बरखेड़ा स्थित स्पोर्ट्स सिटी में लगभग 25 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एवं हाई-परफॉर्मेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। यह केंद्र नवीनतम खेल प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक शोध से लैस होगा, जिससे खिलाड़ियों को शारीरिक क्षमता बढ़ाने के साथ मानसिक दृढ़ता, चोट से बचाव और प्रदर्शन सुधार का भी संपूर्ण सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं खेलों में गहरी रूचि रखते हैं और युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिये प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि आज के दौर में खिलाड़ियों को केवल पारंपरिक प्रशिक्षण से सफलता नहीं मिल सकती, उन्हें वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों का सहयोग भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ भोपाल में स्पोर्ट्स साइंस और हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की स्थापना की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई खेलों में गहन ध्यान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्कता होती है। अक्सर प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल तकनीकी कमी, मनोवैज्ञानिक दबाब या चोटो के कारण लक्ष्य हासिल करने में असफल हो जाते हैं। वर्तमान में खेलों में केवल कौशल या अच्छी कोचिंग ही पर्याप्त नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कढ़ी प्रतिस्पर्धा में खिलाड़ियों को हर उस कमी पर काम करना पड़ता है, जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित करती है। जैसे मनोविज्ञान, पोषण, बॉयोमेकेनिक्स। ऐसे परिदृश्यों को देखते हुए भोपाल में बड़े पैमाने पर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की आवश्यकता महसूस की गई। केंद्र की मुख्य विशेषताएँ भोपाल में बन रहा यह स्पोर्ट्स साइंस सेंटर देश का पहला ऐसा मॉडल होगा, जहां एक ही परिसर में खिलाड़ियों को फिजियोलॉजी, बॉयोमेकेनिक्स, काइन्सियोलॉजी, मनोविज्ञान, बॉयोकेमिस्ट्री और पोषण विज्ञान का समन्वित प्रशिक्षण उपलब्ध होगा। केन्द्र में खिलाड़ियों के लिये अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ और इकाइयां बनाई जा रही हैं। इसमें फिजियोलॉजी लैब, जिसमें VO2 मेक्स टेस्टिंग, बॉडी कंपोजीशन एनालिसिस, बॉयोमेकेनिक्स लैब जिसमें मोशन कैप्चर, गेट एनालिसिस, फोर्स-प्लेट टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त मनोविज्ञान इकाई जिसमें खिलाड़ियों की मानसिक दृढता, तनाव एवं चिंता प्रबंधन पर काम किया जायेगा। सेंटर में पोषण और बॉयोकेमिस्ट्री सपोर्ट यूनिट की स्थापना भी की जायेगी, जिसमें ब्लड मार्कर टेस्टिंग और वैज्ञानिक डाईट सपोर्ट से खिलाड़ियों पर निगरानी रखी जायेगी। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिये रिकवरी सूट की भी व्यावस्था की गई है, जिससे हाईड्रोथेरेपी, क्रायोथेरेपी और फिजियोथेरेपी की जा सकेगी। केंद्र में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, पोषण विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट और डेटा विश्लेषक खिलाड़ियों की व्यक्तिगत प्रोफाइल बनाकर उनके प्रदर्शन सुधार के लिए सलाह देंगे। खिलाड़ी की कमजोरियों और आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार होंगे। स्पोर्ट्स साइंस सेंटर न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई ऊँचाई देगा, साथ ही प्रदेश के उभरते हुए खिलाड़ियों को भी वैज्ञानिक प्रशिक्षण का लाभ उपलब्ध कराएगा। यह पहल भोपाल को स्पोर्ट्स साइंस का राष्ट्रीय हब बनायेगी और भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने की दीर्घकालिक रणनीति को गति देगी।  

नितिन गडकरी करेंगे लोकार्पण, प्रदेश को मिला देश का सबसे बड़ा केबल स्टे ब्रिज

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर का एक नए फ्लाई ओवर की सौगात मिलने जा रही है. करीब 1100 करोड़ की लागत से बना 7 किमी लंबा यह फ्लाई ओवर प्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाई ओवर है. साथ ही इसमें रेल मार्ग के ऊपर बना देश का सबसे लंबा सिंगल स्पान केबल स्टे ब्रिज भी बना है, जिसकी लंबाई 192 मीटर है. इसमें 3 बो स्ट्रिंग ब्रिज बनाए गए हैं, जिसमें दो रानीताल और एक बलदेवबाग में बनाया गया है, जो पूरी तरह स्टील से निर्मित है. इसकी लंबाई करीब 70 मीटर होगी. अभी मदनमहल से दमोह नाका तक जाने में वाहन को लगभग 40 से 45 मिनट लगते हैं, लेकिन फ्लाई ओवर से गुजरने के बाद यह दूरी सिर्फ 6 से 8 मिनट में तय हो जाएगी. यह फ्लाई ओवर न केवल जबलपुर के यातायात को व्यवस्थित करेगा, बल्कि जबलपुर के महानगरीय स्वरूप के लिए मील का पत्थर साबित होगा.  प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर और देश के सबसे बड़े केबल स्टे ब्रिज को शुक्रवार को जनता के लिए खोला जाएगा। फ्लाईओवर की घोषणा से लेकर उसके लोकार्पण तक छह साल का लंबा समय लगा। निर्माण के दौरान कानूनी अड़चनें, भ्रष्टाचार के आरोप और राजनीतिक श्रेय की होड़ जैसी कई समस्याएं सामने आईं। दमोह नाका–मदन महल फ्लाईओवर की लंबाई लगभग आठ किलोमीटर है। इस पर मदन महल स्टेशन के ऊपर देश का सबसे बड़ा केबल स्टे ब्रिज बनाया गया है। फ्लाईओवर शुरू होने से लोगों को जाम से राहत मिलेगी और 40 मिनट का सफर अब सिर्फ 10 मिनट में तय किया जा सकेगा। इस फ्लाई ओवर के नीचे पर्यावरण संरक्षण के लिए लगभग 50 हजार पौधों का रोपण किया गया है. साथ ही फ्लाई ओवर के नीचे ही बास्केटबल कोर्ट, ओपन जिम, बच्चों के लिए पार्क बनाए गए हैं. पूरे फ्लाई ओवर में 10 स्थानों पर दिशा सूचक बोर्ड लगाए गए हैं.  मध्यप्रदेश के सबसे बड़े फ्लाई ओवर 'मदनमहल से दमोह नाका' का लोकार्पण केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुखयमंत्री मोहन यादव शनिवार 23 अगस्त को करेंगे.   7 Km लंबा MP का सबसे बड़ा फ्लाईओवर. MP के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि 2014 में केंद्र में बीजेपी सरकार बनने के बाद सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मध्यप्रदेश आए थे। उनसे फ्लाई ओवर निर्माण की मांग रखी गई और गडकरी ने तत्काल इसकी स्वीकृति देते हुए इस फ्लाई ओवर का निर्माण सीआरएफ से कराने का आदेश जारी किया. फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू होने और पूर्ण होने तक कई तरह की अड़चनें सामने आईं, उनके निराकरण की दिशा में कार्य किया गया, आज यह फ्लाई ओवर बनकर तैयार है.   केंद्रीय मंत्री गडकरी करेंगे उद्घाटन इस फ्लाईओवर का उद्घाटन आगामी 23 अगस्त को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे। फ्लाईओवर का भूमि पूजन भी नितिन गडकरी ने 22 फरवरी 2019 को किया था। उन्होंने ही वर्ष 2016 में इस फ्लाईओवर की मंजूरी प्रदान की थी। इसकी प्रारंभिक लागत ₹758 करोड़ थी, जो निर्माण कार्य पूरा होते-होते बढ़कर ₹1,053 करोड़ तक पहुंच गई। तीन साल में होना था तैयार फ्लाईओवर का निर्माण कार्य तीन साल में पूरा होना था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें दोगुना समय यानी छह साल लग गए। इस दौरान फ्लाईओवर की लंबाई भी एक किलोमीटर बढ़ा दी गई। हाईकोर्ट में पहुंचा मामला फ्लाईओवर के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आधा सैकड़ा से अधिक याचिकाएं दायर की गईं थीं। इनमें कहा गया था कि बिना मुआवज़ा दिए मनमाने ढंग से ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके अलावा मास्टर प्लान से अधिक चौड़ाई किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी। राजनीतिक श्रेय को लेकर आरोप फ्लाईओवर के एक हिस्से महानद्दा से मदन महल तक का शुभारंभ सितंबर 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया था। विधानसभा चुनाव के दो माह पूर्व अधूरे फ्लाईओवर का उद्घाटन करने पर कांग्रेस ने भाजपा पर "विकास कार्यों में श्रेय की राजनीति" करने का आरोप लगाया था। इसके अलावा, जून में कांग्रेस नेता पूर्ण निर्माण के बावजूद उद्घाटन न किए जाने पर खुद फ्लाईओवर का उद्घाटन करने पहुंच गए थे। इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन व बल प्रयोग करना पड़ा था। भ्रष्टाचार के लगे आरोप उद्घाटन से पूर्व फ्लाईओवर में दरारें दिखने पर निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। इसके बाद पीडब्ल्यूडी के अपर प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने 9 जनवरी 2025 को फ्लाईओवर का निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया था कि फ्लाईओवर के स्ट्रक्चर और डिजाइन में कोई कमी नहीं है। एक्सपेंशन जॉइंट में जो गैप आया है, वह मौसम में तापमान के अंतर (30 से 40 डिग्री) के कारण है। इससे 10 से 40 मिमी तक का एक्सपेंशन गैप बनता है। यह केवल ऊपरी सतह पर होता है, जबकि अंदर स्टील और सीमेंट की मजबूत परत मौजूद है। गैप को भरने के लिए तकनीकी टीम का सहयोग लिया जाएगा। टीम यह जांचेगी कि दरारों से पानी तो नहीं जा रहा या अन्य कोई समस्या तो नहीं है। दरारों को थीनेल, डामर और थर्मल पेंट से भरा जाएगा, ताकि वाहन चालकों को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा, रोटरी के पास पत्थर इसलिए लगाए गए हैं ताकि तेज गति में आने वाले वाहन फिसलें नहीं। समय के साथ ये पत्थर ठीक से सेट हो जाएंगे।  

500 मेगावाट यूनिट ठप, एमपी में बिजली संकट की चिंता; मरम्मत में लगेंगे दो साल

 उमरिया बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र एक बार फिर तकनीकी संकट में फंस गया है। केंद्र की सबसे बड़ी 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट रोटर की गंभीर खराबी के कारण बंद पड़ी है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि रोटर की मरम्मत में करीब दो साल का समय लग सकता है। इसका सीधा असर प्रदेश की बिजली आपूर्ति पर पड़ेगा। ठेकेदारों से गारंटी नहीं सूत्र बताते हैं कि रोटर मरम्मत का काम जिस कंपनी को सौंपा गया है, उसने साफ कहा है कि मरम्मत के बाद रोटर कितने समय तक चलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। यानी करोड़ों का खर्च और लंबा इंतजार करने के बाद भी यूनिट का भविष्य अनिश्चित ही रहेगा। इतना ही नहीं, री-मेंटेनेंस की अवधि में भी इस यूनिट को केवल आंशिक लोड पर चलाने की बात सामने आई है। पहले भी खराब हो चुकी हैं यूनिटें यह पहला मौका नहीं है, जब केंद्र की यूनिटें तकनीकी खामी के कारण लंबे समय तक ठप हुई हों। कुछ समय पहले यहां की 210 मेगावाट क्षमता वाली एक नंबर यूनिट करीब 11 महीने बंद रही। मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वह बार-बार उत्पादन बंद करती रही। इससे केंद्र की रखरखाव व्यवस्था और तकनीकी प्रबंधन पर सवाल खड़े होते रहे हैं। अभियंता और ठेकेदारों की मिलीभगत के आरोप केंद्र के मुख्य अभियंता एच. के. त्रिपाठी पर आरोप लग रहे हैं कि वे ठेकेदारों के भरोसे यूनिटों के संचालन का काम कर रहे हैं और तकनीकी खामियों पर सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहे। यूनिटों का मेंटेनेंस अक्सर सिर्फ कागजों में दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि करोड़ों खर्च करने के बावजूद उत्पादन स्थिर नहीं हो पाता। बताया जाता है कि क्वालिटी कंट्रोल और तकनीकी जांच में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। बिजली उत्पादन पर बड़ा असर प्रदेश की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा इस केंद्र से पूरा होता है। अगर 500 मेगावाट यूनिट लंबे समय तक बंद रही तो उत्पादन में भारी कमी आएगी। नतीजतन उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही सरकार को निजी कंपनियों से महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी, जिसका अप्रत्यक्ष बोझ आम जनता पर पड़ेगा। जवाबदेही तय करना जरूरी केंद्र का इतिहास बताता है कि यहां की यूनिटें बार-बार तकनीकी खामी और खराब प्रबंधन की वजह से ठप होती रही हैं। सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिल रहा, तो आखिर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती। क्या यह केवल ठेकेदारों की गलती है या अभियंताओं की लापरवाही भी उतनी ही जिम्मेदार है? सख्त कार्रवाई की मांग विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक मरम्मत कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच और अभियंताओं से लेकर ठेकेदारों तक की जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक यह केंद्र प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर बोझ बना रहेगा। अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में बार-बार उत्पादन बंद होने की समस्या न दोहराई जाए।  

शिवपुरी में बाढ़ राहत हीरो को केंद्रीय मंत्री सिंधिया का ट्रैक्टर तोहफा

शिवपुरी, मध्य प्रदेश के गुना संसदीय क्षेत्र के शिवपुरी जिले सहित अन्य हिस्सों में बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई थी। इस दौरान कोलारस विधानसभा के गिरिराज ने अपने ट्रैक्टर के जरिए अनेक लोगों को सुरक्षित निकाला था। क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गिरिराज को ट्रैक्टर देने का वादा किया था, जिसे उन्होंने आज पूरा किया। खास बात ये है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद ट्रैक्टर ट्रॉली चलाकर पहुंचे और उन्होंने आपदा में नायक साबित हुए गिरिराज को ट्रैक्टर गिफ्ट में दिया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, ”अपनों के लिए हर पल समर्पित आपदा की घड़ी में साहस का जीवंत उदाहरण है मेरे शिवपुरी के लिलवारा गांव का यह मेरा नौजवान बेटा गिरिराज। बाढ़ के बीच अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की मदद करने वाले इस जांबाज बेटे के लिए दुनिया की हर भेंट छोटी है। लेकिन उसके पराक्रम और हुए नुकसान की भरपाई के लिए सम्मान स्वरूप उसे वादे अनुसार 12 घंटों के भीतर ट्रैक्टर भेंट किया। गिरिराज जैसे निस्वार्थ कर्मवीर ही मेरे जनसेवा पथ के प्रेरणास्रोत हैं।” दरअसल, पिछले दिनों तेज बारिश के साथ बाढ़ आई थी। तब गिरिराज ने पूरी रात बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया था। इस दौरान उसने न तो अपनी जान की परवाह की और न ही अपने ट्रैक्टर की चिंता। लगातार सेवा करते हुए उसका ट्रैक्टर गहराई में फंसकर बंद हो गया और उसका इंजन भी नष्ट हो गया। केंद्रीय मंत्री सिंधिया गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लेने पहुंचे थे। लिलवारा गांव में उन्होंने आपदा पीड़ितों से संवाद किया, जहां उन्हें ज्ञात हुआ कि गांव के युवा गिरिराज ने अपने ट्रैक्टर की मदद से कई ग्रामीणों की जान बचाई थी। इस साहसिक कार्य की सराहना करते हुए सिंधिया ने उसी समय गिरिराज को नया ट्रैक्टर देने का वादा किया था, जिसे उन्होंने मात्र 12 घंटे के समय में व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर पूरा कर दिखाया है। गिरिराज की दिलेरी और त्याग से प्रभावित होकर केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को ही लिलवारा गांव में मंच से उसे सम्मानित करते हुए गिरिराज की मां की ओर इशारा कर कहा था कि ‘अब यह सिर्फ आपका बेटा नहीं, बल्कि मेरा बेटा भी है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि गिरिराज जैसे युवाओं का साहस और सेवा-भाव पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। यह सिर्फ अपने गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का गौरव है। क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों का हाल जानने सिंधिया पिछले दिनों मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ क्षेत्र के प्रवास पर आए थे। अब वे फिर गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने कहा जहां भी ग्रामीण क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, मैं हर जगह का दौरा कर रहा हूं। भाजपा के शासन में, कठिन समय में प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया गया है। एनडीआरएफ और सेना की टीमों से लेकर हेलीकॉप्टर तक, सब कुछ तैनात किया गया है। राहत कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। मैंने मुख्यमंत्री के साथ क्षेत्र में एक दिन भी बिताया था… सभी कार्य प्रगति पर हैं, और चाहे मैं दिल्ली में रहूं या ग्वालियर में, मैं लगातार स्थिति पर नजर रख रहा हूं।  

श्रम विभाग और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के बीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित

भोपाल  श्रमिकों के कल्याण, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता को बढ़ाने की दिशा में प्रदेश श्रम विभाग और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के मध्य एक समझौता ज्ञापन पर शुक्रवार को मंत्रालय में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर सचिव श्रम विभाग श्री रघुराज राजेंद्रन, यूएनएफपीए भूटान प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोज्नार आदि उपस्थित थी। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य किशोरों और युवाओं के कल्याण को बढ़ावा देने और उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन कौशल में सुधार करने के लिए सहयोग करना है। स्वास्थ्य प्रणालियाँ सुदृढ़ होंगी समझौता ज्ञापन के अनुसार दोनों पक्ष किशोरों और युवाओं के कल्याण को सुदृढ़ करने के अवसरों की पहचान करने के लिए श्रम विभाग के अंतर्गत मौजूदा संचालित श्रमोदय विद्यालय और आईटीआई सहित अन्य कार्यक्रमों और योजनाओं का संयुक्त रूप से मानचित्रण और मूल्यांकन करने पर सहमत हैं। निष्कर्षों के आधार पर, यूएनएफपीए सबसे कमजोर आबादी तक पहुँचने के उद्देश्य से एक व्यापक, साक्ष्य-आधारित प्रस्ताव विकसित करने में विभाग का समर्थन करेगा। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष और मध्य प्रदेश सरकार का श्रम विभाग किशोरों और युवाओं के कल्याण को बढ़ावा देने और उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन कौशल में सुधार करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों पक्षों ने इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से किशोरों और युवाओं के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। समझौता ज्ञापन के प्रमुख बिंदु     किशोरों और युवाओं के लिए स्वास्थ्य और कल्याण शिक्षा सत्र आयोजित करने के लिए क्षमता निर्माण करना।     स्कूलों में सामाजिक स्वास्थ्य क्लब लागू करना और इसे सह-संस्थागत बनाना।     किशोरों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों की मदद लेना।     मानसिक स्वास्थ्य और मनो-सामाजिक सहायता प्रणालियों को बढ़ाने के लिए समर्थन।  

नगरीय निकायों की फोटोयुक्त मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी

13 नवम्बर को होगा अंतिम प्रकाशन भोपाल सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री अभिषेक सिंह ने जानकारी दी है कि नगरीय निकायों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। पुनरीक्षण 1 जनवरी 2025 की संदर्भ तारीख के आधार पर किया जाएगा। जिन नगरीय निकायों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य उप निर्वाचन वर्ष 2025 पूर्वार्ध के लिये किया जा चुका है, उनके लिये यह लागू नहीं होगा। फोटोयुक्त मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 13 नवम्बर 2025 को होगा। रजिस्ट्रीकरण, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति तथा जिला स्तरीय प्रशिक्षण 25 अगस्त तक किया जाएगा। फोटोयुक्त प्रारूप मतदाता सूची का नगर पालिका वार्ड और अन्य विहित स्थानों पर सार्वजनिक प्रकाशन 8 अक्टूबर 2025 को किया जाएगा। प्रारूप मतदाता सूची के संबंध में 8 से 17 अक्टूबर तक दावे-आपत्ति लिये जाएंगे। दावे-आपत्तियों का निराकरण 27 अक्टूबर तक किया जाएगा। फोटोयुक्त अंतिम मतदाता सूची का नगर पालिका वार्ड तथा अन्य विहित स्थानों पर सार्वजनिक प्रकाशन 13 नवम्बर 2025 को किया जाएगा। इस संबंध में विस्तृत निर्देश कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को जारी कर दिये गये हैं।  

अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री चौहान ने अलीराजपुर में किया नि:शुल्क साइकिल वितरण

सोण्डवा जनपद में 24 लाख रुपये की विद्युत डीपी का हुआ शुभारंभ भोपाल  अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने शासन की निशुल्क साइकिल वितरण योजना के तहत शुक्रवार को अलीराजपुर जिले के ग्राम मथवाड और छकतला में कक्षा 6 और 9 में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को 176 साइकिलें वितरित कीं। मंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले या छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में सुविधा प्रदान करना है, जिससे वे निरंतर शिक्षा प्राप्त कर सकें। इस पहल से जिले में स्कूली बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है और विशेषकर छात्राओं के शैक्षिक स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है। मंत्री श्री चौहान नेकहा कि सरकार बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप, स्कूटी और उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अलावा, अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को नीट, जेईई, क्लेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आकांक्षा योजना के तहत नि:शुल्क कोचिंग और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे वे प्रतिष्ठित कॉलेजों में प्रवेश प्राप्त कर चिकित्सक, इंजीनियर आदि बन सकें। नवीन विद्युत डीपी का उद्घाटन मंत्री श्री चौहान ने अलीराजपुर जिले के सोण्डवा जनपद में 24 लाख रुपये की लागत की नवीन विद्युत डीपी का उद्घाटन किया। यह डीपी ग्राम छिनकी और उमरी में विद्युत संबंधी समस्याओं के समाधान और कृषकों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्थापित की गई है। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना और समाधान किया।