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लागत तक नहीं निकलने पर किसान का छलका दर्द, खेत में चलाया ट्रैक्टर

 बड़वानी  जिले के ग्राम करी में बैंगन की फसल के दाम नहीं मिलने से परेशान एक किसान ने अपनी चार बीघा फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया। शुक्रवार को सामने आई इस घटना ने किसानों के बीच चिंता और चर्चा का विषय बना दिया है। किसान का कहना है कि मंडी में बैंगन का भाव इतना गिर गया कि तोड़ाई और ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया था। सेंगाव निवासी किसान राधेश्याम गेहलोद ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में चार बीघा जमीन पर बैंगन की खेती की थी। फसल तैयार करने में उन्होंने और परिवार के सदस्यों ने दिन-रात मेहनत की, लेकिन बाजार में उचित दाम नहीं मिलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। एक बीघा में 50 हजार तक की लागत किसान के मुताबिक, एक बीघा बैंगन की खेती में करीब 50 हजार रुपए खर्च हुए। इसमें खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी शामिल है। इस हिसाब से चार बीघा में कुल लागत दो लाख रुपए से अधिक पहुंच गई। अच्छी पैदावार होने के बावजूद लागत निकलना भी मुश्किल हो गया। 50-60 बोरी बैंगन लेकर पहुंचे मंडी     राधेश्याम गेहलोद ने बताया कि वे 50 से 60 बोरी बैंगन लेकर मंडी पहुंचे थे।     प्रत्येक बोरी में करीब 50 से 60 किलो बैंगन भरा था।     उन्हें उम्मीद थी कि बैंगन 10 से 12 रुपए किलो तक बिकेगा।     लेकिन मंडी में भाव करीब 1 रुपए किलो मिला। कई व्यापारियों ने इस भाव पर भी खरीदने में रुचि नहीं दिखाई।     किसान ने कहा कि ऐसी स्थिति में फसल तोड़ने, मजदूरी देने और मंडी तक ले जाने का खर्च भी निकलना संभव नहीं था।     मजबूरी में उन्होंने खेत में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया। “घाटे से बचने के लिए पशुओं को खिला रहे बैंगन” किसान के बेटे ने बताया कि इस बार बैंगन की बंपर पैदावार हुई थी, लेकिन दाम गिरने से किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि कुछ किसान फसल खेत में ही छोड़ रहे हैं, जबकि कई किसान बैंगन पशुओं को खिला रहे हैं, ताकि अतिरिक्त नुकसान से बचा जा सके। दीपक के अनुसार, सीजन की शुरुआत में अच्छी गुणवत्ता वाला बैंगन करीब 5 रुपए किलो तक बिका था, लेकिन पिछले 20 दिनों से लगातार भाव गिरते जा रहे हैं। अब हालत यह है कि व्यापारी एक रूपये किलो में भी बैंगन खरीदने से बच रहे हैं। महंगे डीजल और ट्रांसपोर्ट को बताया वजह किसान परिवार ने संकट के लिए बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत और सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि डीजल महंगा होने से भाड़ा बढ़ गया है, जिसके कारण बाहर के व्यापारी बड़वानी मंडी से माल उठाने नहीं आ रहे। मंडी में बैंगन की आवक तो लगातार हो रही है, लेकिन खपत नहीं होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।  

चर्चा में रहे 90 डिग्री ओवरब्रिज को सुधारने की जिम्मेदारी IIT भुवनेश्वर को, दूसरे पुलों की सुरक्षा पर बहस तेज

भोपाल मध्य प्रदेश में रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) और फ्लाईओवर के निर्माण में सामने आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए पीडब्ल्यूडी अब देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों की मदद ले रहा है. विभाग ने राज्य के कई बड़े प्रोजेक्ट्स की डिजाइन और तकनीकी जांच के लिए अलग-अलग आईआईटी के साथ अनुबंध किया है. अब तक आईआईटी दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर और इंदौर को इस काम में शामिल किया जा चुका है।  भोपाल के ऐशबाग रेलवे ओवर ब्रिज का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. इस ब्रिज के डिजाइन में 90 डिग्री का मोड़ होने के कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी. अब इस बिगड़े हुए डिजाइन को सुधारने की जिम्मेदारी आईआईटी भुवनेश्वर को सौंपी गई है. पीडब्ल्यूडी इस ब्रिज की नई डिजाइन तैयार करवा रहा है ताकि भविष्य में लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।  एलीवेटेड कॉरिडोर का सर्वे आईआईटी दिल्ली को रीवा और जबलपुर के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी दी गई है. दिल्ली आईआईटी विशेषज्ञों की टीम रीवा के एक प्रोजेक्ट और जबलपुर के एलीवेटेड कॉरिडोर का सर्वे कर रही है. इन तीनों परियोजनाओं की लागत करीब 500 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इन प्रोजेक्ट्स का पहला सर्वे पूरा हो चुका है और तकनीकी सुधारों पर काम जारी है।  इटारसी के सांवलखेड़ा में बन रहे रेलवे ओवर ब्रिज में भी कुछ तकनीकी खामियां सामने आई थीं. इस परियोजना में आईआईटी मुंबई, आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के साथ मिलकर समाधान पर काम कर रहा है. एक्सपर्ट ब्रिज की डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं।  कई गंभीर तकनीकी समस्याएं इसी तरह इंदौर में एलआईजी चौराहे से नवलखा तक बनने वाले 6.2 किलोमीटर लंबे एलीवेटेड कॉरिडोर में भी कई गंभीर तकनीकी समस्याएं मिली थीं. इस परियोजना की जांच और सुधार का काम आईआईटी इंदौर को दिया गया है।  पीडब्ल्यूडी का मानना है कि आईआईटी जैसे बड़े तकनीकी संस्थानों की मदद से ब्रिज और फ्लाईओवर की गुणवत्ता बेहतर होगी और भविष्य में डिजाइन संबंधी गलतियों को रोका जा सकेगा। 

सरकारी योजना ने दिलाई नई पहचान, झाबुआ के अर्पित अब हर महीने कमा रहे 25 हजार रुपए

सफलता की कहानी भगवान बिरसा मुण्डा योजना से झाबुआ के अर्पित बने आत्मनिर्भर  शुरू किया अमूल पार्लर अब हर माह कमा रहे 25 हजार रुपए भोपाल  जिंदगी में अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा हर इंसान के मन में होती है। हर व्यक्ति आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहता है, लेकिन सफलता उसी को मिलती है जो अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर निरंतर मेहनत करता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है झाबुआ के वार्ड क्रमांक 16, मेघनगर नाका, के अर्पित पिता पारसिंह मचार की। उन्होंने स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सतत् प्रयास किया। अर्पित ने स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद निजी क्षेत्र में कार्य किया, लेकिन वे अपने कार्य से पूर्णतः संतुष्ट नहीं थे। उनके मन में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की इच्छा थी। इसी उद्देश्य से उन्होंने अमूल पार्लर (मिल्क पार्लर) प्रारंभ करने का निर्णय लिया। व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता होने पर उन्होंने शासन की “भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना” के अंतर्गत ऋण प्राप्त करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ कार्यालय में संपर्क किया। 5 लाख के ऋण से शुरू किया अमूल पार्लर, अब हर माह हो रही 25 हजार रूपये की आय मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ द्वारा भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना अंतर्गत ऋण प्रकरण एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक, राजवाड़ा शाखा, झाबुआ को प्रेषित किया गया। बैंक द्वारा प्रकरण का परीक्षण करने के उपरांत अर्पित को 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण स्वीकृति प्राप्त होने के तुरंत बाद अर्पित ने अमूल पार्लर प्रारंभ कर अपना व्यवसाय शुरू किया। आज वे अपने व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपनी इकाई में एक अन्य व्यक्ति को सहायक के रूप में रोजगार भी प्रदान किया है। रोजगार की तलाश से आत्मनिर्भरता तक, अर्पित ने युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश  अर्पित का कहना है कि पहले वे रोजगार की तलाश में भटकते थे, लेकिन आज स्वयं का व्यवसाय संचालित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना को देते हैं। उनका मानना है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने का जज्बा हो तो सफलता अवश्य मिलती है। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं। ''भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार'' योजना के बारे में जानकारी मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से “भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना” संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र युवाओं को स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना के अंतर्गत विनिर्माण इकाई स्थापित करने हेतु 1 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही हितग्राहियों को 7 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है तथा गारंटी फीस का भुगतान मध्यप्रदेश शासन द्वारा किया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को अनुसूचित जनजाति वर्ग का सदस्य होना अनिवार्य है। आवेदक की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। साथ ही आवेदक के पास अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र, वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम होने का प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, कक्षा 8वीं उत्तीर्ण की अंकसूची, बैंक पासबुक की छायाप्रति, आधार कार्ड, पैन कार्ड, समग्र आईडी, राशन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो एवं मोबाइल नंबर होना आवश्यक है। इस योजना में सेवा इकाई एवं खुदरा व्यवसाय के लिए भी 1 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत ब्यूटी पार्लर, वाहन मरम्मत, साइकिल रिपेयरिंग, किराना दुकान, फोटोकॉपी, फोटोग्राफी, ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस, मोटरसाइकिल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, टेंट हाउस, ढाबा, होटल आदि व्यवसाय शुरू किए जा सकते हैं। वाहन संबंधी योजनाओं के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य रहेगा। पात्र युवक-युवतियां एमपी ऑनलाइन के माध्यम से अथवा अपने जिले के आदिवासी वित्त विकास निगम कार्यालय में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। 

मध्य भारत को मिलेगा नया हाईवे कॉरिडोर, सिवनी से सावनेर तक सफर होगा तेज और आसान

सिवनी/छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संपर्क पहले की तुलना में आधुनिक और सुरक्षित होगी। इस दिशा में सिवनी-छिंदवाड़ा-सावनेर फोरलेन परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। एनएचआई की तरफ से एनएच-547 और एनएच-347 के अंतर्गत प्रास्तावित परियोजना के लिए डीपीआर का कार्य प्रगति पर है। 158 किमी लंबा है यह कॉरिडोर करीब 158 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित कॉरिडोर का उद्देश्य महाराष्ट्र के सावनेर-नागपुर औद्योगिक क्षेत्र को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा एवं सिवनी के माध्यम से मध्य और उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश से बेहतर ढंग से जोड़ना है। वर्तमान में यह मार्ग महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच यातायात, औद्योगिक परिवहन, कृषि व्यापार एवं पर्यटन गतिविधियों के लिए प्रमुख संपर्क माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता है। अब इसे फोर लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। दोनों राज्यों के औद्योगिक ग्रोथ को मिलेगी नई दिशा वहीं, सिवनी–छिंदवाड़ा–सावनेर कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच आर्थिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है। यह कॉरिडोर नागपुर एवं सावनेर जैसे महाराष्ट्र के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर एवं मध्य भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। फोरलेन निर्माण के बाद महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश की ओर माल परिवहन अधिक तेज और सुगम हो सकेगा। छिंदवाड़ा–नागपुर कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा प्रस्तावित फोरलेन परियोजना छिंदवाड़ा और नागपुर के बीच संपर्क को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच यात्रा के दौरान भारी वाहनों का दबाव,सीमित सड़क क्षमता एवं कई स्थानों पर धीमी यातायात गति यात्रियों और व्यापारिक परिवहन के लिए चुनौती बनी रहती है। फोरलेन निर्माण के बाद नागपुर से छिंदवाड़ा की यात्रा अधिक तेज और सुगम हो सकेगी। यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत अभी छिंदवाड़ा से सिवनी, नागपुर और आसपास के क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मार्ग अधिकांश हिस्सों में दो-लेन या सीमित क्षमता वाला है, जबकि भारी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोयला परिवहन, औद्योगिक ट्रैफिक एवं लंबी दूरी के मालवाहक वाहनों के कारण कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती रहती है। पर्यटन एवं इको-टूरिज्म को मिलेगा लाभ यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तक पहुंच का प्रमुख मार्ग है। पेंच नेशनल पार्क, तामिया, पचमढ़ी, देवगढ़ किला, जाम सांवली हनुमान मंदिर एवं छिंदवाड़ा-सिवनी के प्राकृतिक वन क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मार्ग के निर्माण से पर्यटक इन स्थलों तक जल्दी पहुंच सकेंगे। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखकर डीपीआर यह कॉरिडोर वर्तमान में कई सड़क सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए परियोजना की DPR तैयार की जा रही है, जिसमें सड़क सुरक्षा को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। यातायात घनत्व, दुर्घटना संभावित स्थानों, शहरी क्षेत्रों में बढ़ते दबाव और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। क्षेत्रीय और रणनीतिक महत्त्व सिवनी–छिंदवाड़ा–सावनेर कॉरिडोर मध्य भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा है। यह मार्ग NH-44, NH-47 तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से संपर्क स्थापित करता है, जिससे नागपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, जबलपुर, बैतूल और सागर जैसे शहरों के बीच तेज संपर्क उपलब्ध होता है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र नागपुर को मध्य प्रदेश के वन, खनन, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों से जोड़ता है। भविष्य में यह मार्ग वैकल्पिक उत्तर-दक्षिण संपर्क कॉरिडोर के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे NH-44 पर यातायात दबाव कम करने में सहायता मिलेगी।  

स्वच्छता, आवास, तालाब सौंदर्यीकरण एवं ईको पार्क का किया अवलोकन

रायपुर स्वच्छता, आवास, तालाब सौंदर्यीकरण एवं ईको पार्क का किया अवलोकन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर. ने आज गरियाबंद में विकास कार्यों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-7 में एमआरएफ सेंटर पहुंचकर स्वच्छता दीदियों से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, कचरा कलेक्शन और कचरे के अलग-अलग वर्गीकरण के बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्वच्छता दीदियों द्वारा 110 प्रकार के कचरे को अलग-अलग वर्गीकृत किए जाने की जानकारी मिलने पर स्वच्छता दीदियों की सराहना की और कार्य के दौरान स्वास्थ्य सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने को कहा। उन्होंने मास्क, दस्ताने, जैकेट, जूते और आवश्यक सुरक्षा सामग्री का अनिवार्य रूप से उपयोग करने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने स्वसहायता समूह की महिलाओं को पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से लोन लेकर अपने स्वरोजगार को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही नागरिकों को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के साथ स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को आदत में लाने पर ही नगरीय निकाय स्वच्छ और सुंदर बन सकेगा। इस दौरान उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की 10 हजार से अधिक महिलाओं के द्वारा वर्षभर कचरा संग्रहण और पृथक्करण किए जाने की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर की गई है। शंगीता आर. ने वार्ड क्रमांक-8 में केशरी नागेश के प्रधानमंत्री आवास का निरीक्षण कर समय-सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि बरसात से पहले आवास का लाभ मिल सके। उन्होंने वार्ड क्रमांक-4 में तालाब सौंदर्यीकरण कार्य का अवलोकन करते हुए साफ-सफाई, पिचिंग और गहरीकरण का कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने को कहा, जिससे नागरिकों को पर्याप्त निस्तारीकरण जल उपलब्ध हो सके और जल संवर्धन भी सुनिश्चित हो। विभागीय सचिव ने ईको पार्क का निरीक्षण कर पौधों की सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था, लगाए गए पौधों तथा ‘वीमन्स फार ट्री’ के तहत लगाए गए पौधों की जानकारी ली। उन्होंने पार्क को बेहतर पर्यावरणीय एवं मनोरंजक स्थल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। गरियाबंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर चंद्राकर, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, संयुक्त संचालक श्री एस.के. सुंदरानी और सीएमओ संध्या वर्मा भी निरीक्षण के दौरान मौजूद थीं।

पुलिस महानिदेशक ने सभी को स्मृति चिन्ह भेंट कर किया सम्मानित

भोपाल  ​पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं से माह मई में सेवानिवृत्त 4 कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने शुक्रवार को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने सभी को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके विभिन्न स्वत्व (क्लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस मुख्यालय से लगातार अनुभवी एवं समर्पित अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिनके साथ कार्य करने का उन्हें अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में कार्य करना केवल नौकरी नहीं बल्कि चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है, जहां देर रात तक एवं अवकाश के दिनों में भी कर्तव्यों का निर्वहन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आने वाली युवा पीढ़ी को भी इसी ऊर्जा, अनुशासन एवं जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करना होगा, ताकि विभाग की गौरवशाली परंपरा निरंतर बनी रहे। नवीन पुलिस मुख्यालय भवन कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित विदाई समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक किरणलता केरकट्टा एवं अन्य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्त मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक अजाक सुनीता सिंह कुशवाह, मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा मोहन लाल मेहरा, कार्यवाहक आंकिक/सूबेदार (एम) केन्द्रीय आवक जावक मुकेश मिश्रा एवं कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक विशेष शाखा दिनेश कुमार सक्सेना को पुलिस मुख्यालय परिवार ने शुक्रवार को भावभीनी विदाई दी। सहायक पुलिस महानिरीक्षक इरमीन शाह ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कार्यकाल की जानकारी दी। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।  

जिले में कुल 41509 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध, विगत वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर राजनांदगाँव  जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में खरीफ सीजन में खेती-किसानी को ध्यान में रखते हुए किसानों को समय पर खाद-बीज का वितरण किया जा रहा है ।कलेक्टर ने कृषि अधिकारियों को कहा है कि किसानों को खाद-बीज के लिए किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष खरीफ में धान सहित दलहन-तिलहन फसलों में परम्परागत खाद के साथ वैकल्पिक खाद एवं नैनो यूरिया व डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समितियों एवं निजी क्षेत्रों में खरीफ पूर्व तैयारी के दृष्टि से वर्ष हेतु 68690 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है। जिले में सहकारी एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर जिले में कुल 41509 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। जिसमें 17153 मीट्रिक टन यूरिया, 4088 मीट्रिक टन डीएपी, 10129 मीट्रिक टन एनपीके, 3382 मीट्रिक टन एमओपी एवं 6757 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद उपलब्ध है, जो गत वर्ष इसी अवधि की तुलना से 34 प्रतिशत अधिक है।      उप संचालक कृषि  टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद वितरण किया जा रहा है। जिले में 14972 किसानों को खाद प्रदाय किया जा चुका हैं। जिसमें 7193 मीट्रिक टन यूरिया, 1807 मीट्रिक टन डीएपी, 4669 मीट्रिक टन एनपीके, 1322 मीट्रिक टन एमओपी एवं 2214 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद किसानों को आगामी खरीफ फसलों हेतु वितरण किया जा चुका है तथा समितियों में 4568 मीट्रिक टन यूरिया, 1032 मीट्रिक टन डीएपी, 3082 मीट्रिक टन एनपीके, 1364 मीट्रिक टन एमओपी एवं 1350 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट उर्वरक उपलब्ध है।      किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज प्राप्त हो सके इस हेतु 13980 क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य के विरूद्ध जिले में 6036 क्विंटल बीज, बीज निगम में उपलब्ध है। जिसमें से 3201 क्विंंटल का समितियों में भंडारण कराकर 1085 क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है। निरंतर समितियों के मांग अनुरूप जिला विपणन अधिकारी एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित से समन्वय स्थापित कर भंडारण किया जा रहा है। साथ ही किसानों को शासन द्वारा प्रदाय दिशा-निर्देशानुसार 80 प्रतिशत यूरिया एवं 60 प्रतिशत डीएपी के आधार पर वितरण समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है। उर्वरकों के कालाबाजारी, तस्करी, डायवर्सन, जमाखोरी आदि अनियमिताओं को रोकने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उडऩदस्ता टीम का गठन किया गया हैं। टीम द्वारा निरंतर उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा हैं। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाये जाने पर अब तक 28 विक्रय केन्द्रों को नोटिस, 7 विक्रय केन्द्रों में भंडारित उर्वरक मात्रा को जप्ती करते हुए सील बंद की कार्रवाई की गई है। साथ ही 5 निजी विक्रय केन्द्रों के लाईसेंस का निलंबन भी किया गया है। कृषि विभाग द्वारा जिले में निरंतर विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा है और आगे भी नियमों का उल्लंघन पाये जाने पर केन्द्रों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

किसान चोवाराम एवं बेनीराम ने खाद, बीज के वितरण की व्यवस्था की सराहना की

रायपुर      केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए किसानों को समुचित मात्रा में खाद, बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु की गई व्यवस्था के तहत बालोद जिले के सहकारी समितियों में नियमित रूप से जिले के कृषकों को नियमित रूप से खाद, बीज का वितरण किया जा रहा है। कलेक्टर मती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले के सभी सहकारी समितियों में शासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर किसानों को समुचित मात्रा में खाद, बीज की भण्डारण के साथ-साथ वितरण हेतु भी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं। बालोद जिले में खाद, बीज की समुचित वितरण हेतु की गई व्यवस्था की सराहना जिले के कृषकों ने भी की है। आगामी खरीफ सीजन हेतु समुचित मात्रा में खाद, बीज उपलब्ध होने पर गुरूर विकासखण्ड के ग्राम फागुनदाह निवासी कृषक  चोवाराम एवं ग्राम पेण्डरवानी निवासी  बेनीराम साहू ने व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे किसानों के लिए हितकर बताया है।       समय पर खाद, बीज मिलने से बहुत ही प्रसन्नचित नजर आ रहे किसान  चोवाराम ने बताया कि कुल 02 एकड़ भूमि वाले एक लघु कृषक है।  चोवाराम ने कहा कि उन्होंने एक सप्ताह पहले अपने ग्राम फागुनदाह के सहकारी समिति में पहुँचकर दो बाॅटल नैनो डीएपी, एक बाॅटल युरिया के साथ-साथ दो बोरी युरिया एवं एक बोरी सुपरफास्फेट खाद प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों में की गई बेहतर व्यवस्था के फलस्वरूप उन्हें खाद, बीज प्राप्त करने में  किसी भी प्रकार की असुविधा नही हुई। इसी तरह जिले में खाद, बीज की वितरण की व्यवस्था की सराहना गुरूर विकासखण्ड के ग्राम पेण्डरवानी के कृषक  बेनीराम ने भी किया है। किसान  बेनीराम ने बताया कि वे कुल 20 एकड़ जमीन वाले बड़े कृषक है। किसान बेनीराम ने बताया कि सहकारी समिति ग्राम पेण्डरवानी में पहुँचकर उन्होंने 05 बोरी स्वर्णा और स्वर्णा सब 1 तथा मांग के अनुरूप अन्य धान, बीज उन्होंने प्राप्त किया है। सहकारी समिति में धान, बीज के प्राप्त करने में उन्हें एवं अन्य कृषकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नही हुई। जिससे हम सभी कृषक प्रसन्नचित होने के साथ-साथ भविष्य में भी समय पर खाद, बीज प्राप्त करने के लिए पूरी तरह आशान्वित है।

कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी

 भोपाल तप रहे मध्य प्रदेश को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रदेश में प्री-मानसून ने दस्तक दे दी है। शुक्रवार को दिन के औसत तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से ग्वालियर का तापमान 34.5 और दतिया का 35.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस कम रहा। जबकि छतरपुर के खजुराहो का तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस और नौगांव का 38.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम रहा। हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी ठंडा रहा ग्वालियर बीते 24 घंटों में हुई बारिश के कारण ग्वालियर का तापमान हिल स्टेशन पचमढ़ी के 37.4 डिग्री सेल्सियस से भी कम रिकॉर्ड किया गया। इस दौरान ग्वालियर, दतिया, खजुराहो, नौगांव और बालाघाट जिले के मलाजखंड सहित कई इलाकों में बारिश हुई, जबकि छतरपुर, पन्ना, रीवा, सीधी और भिंड सहित कई जिलों में धूलभरी आंधी चली। इस दौरान नरसिंहपुर और रायसेन 43 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहे, जबकि शेष जिलों में पारा इससे कम रहा। छिंदवाड़ा का न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 6.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। यहां गर्म रात रही। मौसम वैज्ञानिकों का आकलन मौसम केंद्र के अनुसार राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा तक एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसके प्रभाव से प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों में इजाफा हुआ है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के विभिन्न इलाकों में तेज हवाओं, बारिश और ओले गिरने की संभावना जताई गई है। इन जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी ऑरेंज अलर्ट: मंदसौर, नीमच, ग्वालियर, दतिया, भिंड, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी, वज्रपात और ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है।      येलो अलर्ट: भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, धार, उज्जैन, रतलाम, गुना, शिवपुरी, मुरैना, रीवा, शहडोल और बालाघाट सहित कई जिलों में 40-50 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। वहीं विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, जबलपुर और सागर जैसे क्षेत्रों में आंधी के साथ-साथ हल्की ऊष्ण लहर (लू) का प्रभाव भी बना रह सकता है। आंधी-बारिश का कहर: भिंड और छतरपुर में छह मौतें तेज आंधी और बारिश के चलते गुरुवार रात हादसों में भिंड और छतरपुर में तीन-तीन लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल हो गए। कई घंटों तक बिजली सप्लाई बाधित रही। भिंड में गोहद के सर्वा गांव में कृषि उपज मंडी समिति के पूर्व अध्यक्ष के बेटे जितेंद्र सिंह तोमर की दीवार गिरने से मौत हो गई। चार बच्चे घायल हो गए। खरगोन में भीषण तपिश से पेड़ से गिरकर मरे बगुले खरगोन के कसरावद में तीव्र लू का प्रभाव रहा। कई स्थानों पर बगुले मर कर पेड़ से नीचे गिर गए। इसका चित्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। यह भी पढ़ें- मध्य प्रदेश में इस बार कमजोर रहेगा मानसून, मौसम विभाग की चेतावनी- 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश के संकेत प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान शहर (City) अधिकतम तापमान (°C) न्यूनतम तापमान (°C) भोपाल 40.6 29.9 इंदौर 39.4 26.4 ग्वालियर 34.5 24.4 जबलपुर 40.1 27.4 नोट – तापमान डिग्री सेल्सियस में  

देवस्थलों और पूर्वजों की आस्था स्थलों के संरक्षण पर हुई विस्तृत चर्चा’

रायपुर ’आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध: उप मुख्यमंत्री  शर्मा’ मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के वनांचल क्षेत्र पानाबरस में आदिम आस्था स्थलों के संरक्षण, संवर्धन एवं जनजातीय संस्कृति सुरक्षा अभियान के अंतर्गत महासभा का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के उप मुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री  विजय शर्मा तथा राजनांदगांव लोकसभा सांसद  संतोष पांडे शामिल हुए। कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के मांझी, गायता, ग्राम पटेल, ग्राम प्रमुख एवं समाज प्रमुख शामिल हुए।           कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज एवं पूजा-अर्चना के साथ किया गया। अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हुए आदिवासी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की गई। सभा में जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति एवं पूर्वजों की आस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई           महासभा में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आदिवासी समाज के मांझी, गायता एवं ग्राम प्रमुखों के साथ सीधा संवाद करते हुए उनकी परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था एवं धार्मिक आस्था से जुड़ी जानकारियां प्राप्त की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराएं और देवस्थल हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण करना शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित देवगुडि़यों, आस्था स्थलों एवं पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़े स्थलों का चिन्हांकन कर वहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थलों तक पहुंच मार्ग, पेयजल, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि आने वाली पीढि़यां अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहें।              उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने समाज प्रमुखों से अपील करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, बोली, रीति-रिवाज और परंपराओं से जोड़कर रखने में सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है। राजनांदगांव लोकसभा सांसद  संतोष पांडे ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक आस्था स्थलों का संरक्षण समाज की अस्मिता से जुड़ा विषय है।        उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार जनजातीय समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए अनेक योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही है।  कार्यक्रम में समाज प्रमुखों द्वारा आदिवासी संस्कृति एवं आस्था स्थलों के संरक्षण के लिए शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती नम्रता सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  भोजेश शाह मांडवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं आदिवासी समाज के विभिन्न समाज प्रमुख एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।