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लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंची रुद्रगैरा चोटी पर फहराया तिरंगा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश लेकर पर्वतारोहण अभियान पर निकलीं लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने माउंट रुद्रगैरा की 5,826 मीटर ऊंची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 10 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शिखर पर पहुंचीं पूर्वा ने कठिन बर्फीले और चट्टानी रास्तों, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच यह उपलब्धि हासिल की। अब उनका अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करना है। सीएम योगी से मुलाकात कर सौंपा था ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश मई 2018 में पूर्वा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का बैनर सौंप चुकी हैं। सीएम योगी ने शुभकामनाएं देकर उनका हौसला बढ़ाया था। पूर्वा ने रुद्रगैरा फतह का श्रेय परिवार के सहयोग और सीएम की प्रेरणा को दिया। अभियान में शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा की भी अहम भूमिका रही। क्योंकि उन्हीं के मार्गदर्शन में पूर्वा ने गंगोत्री में विशेष प्रशिक्षण लिया। गंगोत्री से दो दिन का सफर, फिर 1,300 मीटर की कठिन चढ़ाई पूर्वा, शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा ने 7 सितंबर को सुबह 9 बजे गंगोत्री से ट्रेक शुरू किया। दो दिन की चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग के बाद टीम 4,350 मीटर की ऊंचाई पर रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। 10 सितंबर को सुबह चार बजे बेस कैंप से समिट पुश शुरू हुआ। करीब आठ घंटे 30 मिनट की कठिन चढ़ाई में टीम ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई हासिल की और दोपहर 12:30 बजे 5,826 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंची। रास्ते में खड़ी बर्फ, चट्टानी हिस्से और कठिन खुले सेक्शन थे। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक थकान ने चुनौती बढ़ाई, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान मिले प्रोत्साहन को पूर्वा ने अपने अभियान की ऊर्जा बनाया और लगातार नए लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। पीक्स एंड प्लास्टिक से स्वच्छ हिमालय का संदेश, अब मिशन एवरेस्ट पूर्वा ने अपने अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ पहल के जरिए वह पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता और जिम्मेदार पर्वतारोहण का संदेश दे रही हैं। उनका कहना है कि हिमालय की चोटियों को फतह करना जितना गौरवपूर्ण है, उतना ही जरूरी उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना भी है। रुद्रगैरा पर तिरंगा फहराने के बाद अब पूर्वा की नजर 8,848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर है। उनका लक्ष्य एवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा फहराने के साथ महिला सशक्तीकरण, युवा प्रेरणा और स्वच्छ हिमालय का संदेश पहुंचाना है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कवि सम्मेलन से लखनऊ विवि की वॉल पेंटिंग तक, कई शहरों में पहुंचा अभियान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने और माफिया राज व भय की संस्कृति के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे रंग दे बसंती अभियान का कारवां लगातार बढ़ रहा है। अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित कर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में लखनऊ के राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या डिग्री कॉलेज में रंग दे बसंती टीम ने छात्राओं से संवाद किया। कार्यक्रम में छात्राओं को शिक्षा के साथ नवाचार और एआई आधारित शिक्षा के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही बदलते दौर में सोशल मीडिया की उपयोगिता, उसके सकारात्मक प्रयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए इसके इस्तेमाल को लेकर छात्राओं से संवाद किया गया। इस दौरान छात्राओं ने क्विज प्रतियोगिता, टैलेंट क्रिएशन समेत विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कॉलेज की प्राचार्य मंजुला उपाध्याय ने कहा कि रंग दे बसंती जैसे प्लेटफॉर्म छात्रों के लिए उपयोगी साबित होंगे। ऐसे मंचों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा को निखारने और उसे सामने लाने का अवसर मिल रहा है। कार्यक्रम में छात्राओं ने रैंप वॉक, सिंगिंग, डिबेट और काव्य पाठ जैसी क्रिएटिव गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का रंग दे बसंती टीम की ओर से उत्साहवर्धन किया गया। मानवी राजपूत, आमना असद, रौशनी चौधरी, वर्तिका, शगुन और कुलेष्ठा को प्रोत्साहन स्वरूप ट्रॉफी प्रदान की गई। रंग दे बसंती के प्रदेश संयोजक ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से योग्य छात्र-छात्राओं का चयन किया जा रहा है। चयनित विद्यार्थियों को शैक्षिक गतिविधियों के साथ-साथ नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने में सहायता देने के लिए 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दी जा रही है। इसके लिए प्रदेश के सभी जनपदों में फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। आवेदन फॉर्म रंग दे बसंती के इंस्टाग्राम पेज और वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। अभियान के तहत टीम प्रदेश के अनेक जनपदों में कार्यक्रम आयोजित कर तेजी से छात्र-छात्राओं तक अपनी पहुंच बना रही है। इसके तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कवि सम्मेलन, लखनऊ विश्वविद्यालय में वॉल पेंटिंग और मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज में कॉमिक बुक का विमोचन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।

रायगढ़ में कल से शुरू होगा 41वां अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह, सांस्कृतिक रंगों से सजेगा मंच

रायगढ़. कला और संस्कृति की नगरी रायगढ़ में 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का भव्य आयोजन कल से शुरू होगा। रामलीला मैदान में आयोजित होने वाला यह समारोह 23 सितंबर तक चलेगा। हर शाम 6 बजे से देश-प्रदेश के नामचीन कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह की शुरुआत पद्मश्री डॉ. उषा बारले की प्रस्तुति से होगी। इसके अलावा पद्मश्री से सम्मानित कलाकारों के साथ इंडियन आइडल फेम कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। समारोह के दौरान संगीत, नृत्य और लोककला की विविध प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। चक्रधर समारोह का भव्य समापन कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू की सुरमयी प्रस्तुतियों के साथ होगा। आयोजन की खास बात यह भी है कि स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध कलाकारों के साथ एक ही मंच साझा करने का अवसर मिलेगा। आयोजकों के अनुसार, चक्रधर समारोह रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश और दुनिया तक पहुंचाने वाला प्रमुख आयोजन है। इस बार भी बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।

फर्जी पासपोर्ट कांड में बड़ा खुलासा, भोपाल-डबरा से 70 से अधिक पासपोर्ट बने; 15 अफसर जांच के घेरे में

ग्वालियर/भोपाल. मध्य प्रदेश में जाली दस्तावेज से बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाने वाले नेटवर्क की कारगुजारियों ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच कर रही राज्य एसटीएफ ने अब तक जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से नागपुर से पकड़े गए एक आरोपित का पासपोर्ट गुजरात में कच्छ जिले के मथल गांव के पते पर बना पाया गया। कच्छ के पास पाकिस्तान बार्डर लगता है, इसलिए एसटीएफ ने इस आरोपित जाय चौधरी बरूआ से गहन पूछताछ कर रही है। बौद्ध विहार के पते पर बना प्रियान राय का पासपोर्ट वहीं महाराष्ट्र के उल्लासनगर से पकड़े गए प्रियान राय का पासपोर्ट ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर बना है। अब एसटीएफ के राडार पर सरकारी विभागों का वह सिस्टम है, जो सत्यापन से लेकर दस्तावेज बनाने वाली प्रक्रिया में शामिल है। यह वही दस्तावेज हैं, जिनके जरिये पासपोर्ट बने हैं। अब तक पुलिस और दूसरे विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर 15 लोगों के नाम सूची में हैं। इसमें ग्वालियर के डबरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला, एचसीएम भूपेंद्र गुर्जर सहित अन्य पुलिसकर्मी व पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी भी हैं। एसटीएफ ने की डबरा के पते पर बने पासपोर्टों की पड़ताल बता दें कि अभी तक मध्य प्रदेश के दतिया के डबरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर 17, भोपाल के अन्ना नगर स्थित बौद्ध मठ के पते पर 40, बैतूल से 11, छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिले से एक-एक फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला सामने आया है। एसटीएफ ने अभी डबरा के पते पर बने पासपोर्टों की पड़ताल की है। इसमें सामने आया था कि सभी के फर्जी तरीके से आधार कार्ड आरोपित रियाल चौधरी ने बनवाए थे। वह असम के कामरूप जिले का रहने वाला है। अन्य जिलों से बने पासपोर्ट में भी उसकी भूमिका हो सकती है। मामले में अभी तक चार आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। एसटीएफ की जांच के दायरे में प्रदेश के पांच जिले ग्वालियर, भोपाल, पांणूर्ना, छिंदवाड़ा, बैतूल के अलावा दूसरे जिले भी हैं। यहां बौद्ध विहार व आंबेडकर पार्क के पते पर कितने ऐसे लोगों के पासपोर्ट बने जो कुछ समय पहले ही यहां आए थे। इन सभी के दस्तावेज, पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं। 200 तक पहुंच सकती है, पासपोर्ट की संख्या जांच अधिकारियों को आशंका है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर बने पासपोर्टों की संख्या 200 तक पहुंच सकती है। अभी अन्य पासपोर्ट की जांच जारी है, जो इन्हीं पते पर बने हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में अब तक ऐसे 70 फर्जी पासपोर्ट की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अभी 100 से ज्यादा पासपोर्ट और हैं, जिनकी जांच चल रही है। यह भी संदिग्ध हैं। सत्यापन कर्मचारियों की सूची तैयार – नागपुर से पकड़े गए बांग्लादेशी का पासपोर्ट गुजरात के कच्छ के पते पर बना था। वहां भी एक टीम भेजी जाएगी। सत्यापन प्रक्रिया में शामिल पुलिस अधिकारी, पुलिसकर्मी एवं दूसरे विभागों के सरकारी कर्मचारियों की सूची तैयार की है। – राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ।

योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से 5,123 छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से भी जोड़ा जाएगा। योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से बांदा मंडल के सात आवासीय सर्वोदय विद्यालयों में अध्ययनरत 5,123 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना की तैयारियां पूरी की हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ ऐसा कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे भविष्य में उनके लिए नौकरी और स्वरोजगार के विकल्प बढ़ सकें। 7 विद्यालयों के छात्रों को मिलेगा लाभ समाज कल्याण विभाग की ओर से बांदा मंडल में 7 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें बांदा के दो, चित्रकूट के तीन तथा हमीरपुर और महोबा में एक-एक विद्यालय शामिल हैं। इन आवासीय विद्यालयों में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति वर्ग के गरीब और मेधावी विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। अब कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी नियमित पढ़ाई के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। रुचि के अनुसार ट्रेड, प्रैक्टिकल पर जोर प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत विद्यार्थियों की रुचि और उपलब्ध ट्रेड के आधार पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन से छह महीने की अवधि वाले सर्टिफिकेट कोर्स संचालित होंगे। अपैरल, आईटी-आईटीईएस, रिटेल मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में दो दिन प्रैक्टिकल क्लास भी आयोजित की जाएगी, जिससे वे सीखे हुए कौशल का व्यावहारिक इस्तेमाल कर सकें। विद्यालय परिसर में ही प्रशिक्षण, योगी सरकार उठाएगी खर्च विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए किसी दूसरे स्थान पर नहीं जाना पड़ेगा। संबंधित विद्यालय परिसरों में ही प्रशिक्षकों की तैनाती कर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी। योजना के तहत प्रशिक्षण का पूरा खर्च योगी सरकार वहन करेगी, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) का संयुक्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो देशभर में मान्य होगा। रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार होंगे विद्यार्थी इस पहल का फोकस विद्यार्थियों को केवल किसी ट्रेड का प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य की रोजगार जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। कौशल हासिल करने के बाद विद्यार्थी निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने के साथ अपनी रुचि के अनुसार स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, जल्द ही विद्यालयवार विद्यार्थियों का पंजीकरण शुरू कराया जाएगा। इसके बाद रुचि के आधार पर ट्रेड आवंटित किए जाएंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपस्थिति और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक विद्यालय में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा।

शिक्षक नियुक्ति विवाद में बड़ा अपडेट, हाई कोर्ट ने JSSC को विषयवार-कोटिवार मेरिट लिस्ट देने का दिया निर्देश

रांची झारखंड हाई कोर्ट द्वारा गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर शनिवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कमेटी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनाई गई विषयवार, कोटिवार संशोधित राज्य मेधा सूची प्रस्तुत करे। राज्य सरकार की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जेएसएससी द्वारा सरकार को उपलब्ध कराई गई अनुशंसा के आधार पर की गई नियुक्तियों के संदर्भ में शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, तान्या सिंह, राजेश कुमार एवं अन्य ने पक्ष रखा। बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की ओर से शिक्षक नियुक्ति में हुई गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। वर्ष 2016 में जेएसएससी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें नियुक्ति जिलावार मेधा सूची और राज्यस्तरीय मेधा सूची के आधार पर की गई है। एक ही नियुक्ति परीक्षा में दो तरह की मेधा सूची होने से योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो गए हैं। इसकी जांच के लिए हाई कोर्ट ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। सामुदायिक स्वास्थ्य कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को राहत हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स उत्तीर्ण अभ्यर्थियों सुनील कुमार एवं अन्य को राहत मिली है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार के वर्ष 2019 के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर इन्हें 4200 का ग्रेड पे उसी तिथि से दें, जिस तिथि से उन्होंने इस परीक्षा को पास किया है। प्रार्थियों की ओर अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने संकल्प जारी कर सामुदायिक स्वास्थ्य में स्नातक विज्ञान डिग्री लेने के बाद अभ्यार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सहायक पद पर नियुक्त कर उन्हें 4200 का ग्रेड पे देने का निर्णय लिया है। इनकी नियुक्ति के लिए सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य सहायक नियुक्ति एवं सेवाशर्त नियमावली, 2025 गठित की है, लेकिन उक्त डिग्री लेने के बाद भी इन्हें 4200 का ग्रेड पे नहीं दिया गया और इनकी नियुक्ति न कर उन्हें संविदा पर रखा गया है। सरकार के वर्ष 2019 संकल्प के तहत इनकी नियुक्ति नहीं की गई।

गीता और तीन बेटियों की हत्या से दहला जयपुर, सिर पर ईंट से वार कर मौत के घाट उतारने का खुलासा

 जयपुर कालवाड़ रोड स्थित गोविंद वाटिका में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा है। एक साथ बेटी गीता और तीन नातिनों नंदिनी, राधिका व गिरिशा उर्फ गोरी की अर्थियां उठती देख गुजरात से जयपुर पहुंची गीता की मां केतकी बेन का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटी और तीन नातिनों के शव देखकर उनकी चीख निकल पड़ी। वह बार-बार यही कहती रहीं कि राहुल ने मेरा पूरा परिवार उजाड़ दिया। केतकी बेन ने बताया कि वह घर पर टीवी देख रही थीं। इसी दौरान खबर के जरिए उन्हें बेटी गीता और तीन नातिनों की हत्या की जानकारी मिली। घटना की सूचना मिलते ही वह जयपुर पहुंचीं। पीहर पक्ष लगातार राहुल के भाई और अन्य परिजनों से आरोपी को पुलिस के सामने पेश करवाने की मांग करता रहा। सिर में गंभीर चोट से हुई चारों की मौत पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गीता और उसकी तीन बेटियों की मौत का कारण सिर में गंभीर चोट लगना सामने आया है। चारों के सिर पर सीमेंट की ईंट से वार किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब हत्या के पीछे की वजह और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। 23 साल पहले हुई थी गीता की शादी परिजन गीता के ससुराल में प्रताड़ित किए जाने के आरोप भी लगा रहे हैं। करीब 23 साल पहले शादी के बंधन में बंधी गीता की इस तरह हत्या से पीहर पक्ष सदमे में है। परिवार की चार जिंदगियां एक ही झटके में खत्म होने से हर आंख नम है। परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर हत्या की असली वजह सामने लाने की मांग की है। वहीं पड़ोसियों का कहना है कि परिवार यहां करीब सात साल से रह रहा था। इस दौरान कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि घर में मारपीट या किसी तरह का बड़ा गृहक्लेश चल रहा हो। ऐसे में चार हत्याओं की घटना ने आसपास रहने वाले लोगों को भी स्तब्ध कर दिया है। 10 सितंबर को हुई थी मां से आखिरी बातचीत गीता के भाई सतीश ने बताया कि 10 सितंबर को नंदिनी ने वीडियो कॉल किया था। हालांकि उस समय ज्यादा बातचीत नहीं हो सकी। नंदिनी ने कुछ देर बाद बात करने की बात कहकर फोन काट दिया। इसके बाद गीता ने भी अपनी मां केतकी बेन को वीडियो कॉल किया था। गीता ने मां से कहा था कि वह खाना खाने के बाद दोबारा फोन करेगी। लेकिन इसके बाद न तो गीता का फोन आया और न ही नंदिनी का। परिजनों के मुताबिक ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। गीता जब भी खाली होती थी, अपनी मां से जरूर बात करती थी। मां को क्या पता था कि बेटी का यह वादा उनकी आखिरी बातचीत बन जाएगा। चार हत्याओं के पीछे आखिर क्या थी वजह? गीता और उसकी तीन बेटियों की हत्या के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राहुल ने ऐसा कदम क्यों उठाया? परिजन इस बात को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं कि चार लोगों की हत्या के बाद घर में मौजूद उसके पिता को क्यों छोड़ दिया गया। मां केतकी बेन बेटी और तीन नातिनों को खोने के बाद बार-बार फफक पड़ती हैं। भाइयों और अन्य परिजनों की मांग है कि पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच करे और यह सामने लाए कि आखिर इस खौफनाक वारदात के पीछे क्या वजह थी।

चूल्हे-चौके से लाइब्रेरी तक पहुंचीं बिहार की महिलाएं, बनीं ‘डिजिटल एडुप्रेन्योर’; 61% छात्राएं उठा रहीं लाभ

पटना कल तक जो महिलाएं घर की चारदीवारी, चूल्हे-चौके और सामाजिक बंदिशों में कैद थीं, जिन्हें आर्थिक तंगी और रूढ़िवादी सोच के कारण कभी पढ़ाई का अवसर नहीं मिला। आज वही महिलाएं ग्रामीण बिहार में बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग की जीविका योजना के तहत संचालित जीविका-दीदी की लाइब्रेरी सशक्त माध्यम बन चुकी है। राज्य में संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) के माध्यम से 118 जीविका-दीदी की लाइब्रेरी(सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र) का सफल संचालन हो रहा है। 1 लाख से अधिक युवा एवं क‍िशोर जुड़े इनसे अब तक 1 लाख से अधिक किशोर एवं युवा जुड़ चुके हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, ये लाइब्रेरी सप्ताह के सातों दिन सुबह 9.30 से शाम 5.00 बजे तक खुलते हैं। प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 50 से 70 शिक्षार्थी पहुंचते हैं। इन शिक्षार्थियों में 61 फीसदी लड़कियां हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्यभर में रोजाना करीब 5,000 से 7,000 बच्चे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ते हैं। इसमें एक बड़ी संख्या दीदियों की बच्चों की भी है जो आज इस सुविधा के बदौलत खुद का भविष्य संवार रहे हैं। पुस्तकालयों में शांत वातावरण के साथ कंप्यूटर, टैबलेट, हाई-स्पीड इंटरनेट, किताबें, समाचार पत्र और आनलाइन पठन-पाठन की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लाइब्रेरी में बढ़ने के लिए आने वाले बच्चों में कई ऐसे हैं जिन्होंने पूर्व में अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। आज उन्हें एनआईओएस, बीबीओएसइ और इग्नू जैसे संस्थानों में नामांकन कराकर मुख्यधारा में लाया जा रहा है। साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन, ऑनलाइन आवेदन में सहायता और विशेषज्ञों द्वारा करियर काउंसिलिंग व मेंटरिंग दी जा रही है। दहलीज लांघकर विद्या-दीदी बनीं डिजिटल एडुप्रेन्योर ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समस्याओं और संसाधनों के अभाव में जो महिलाएं कभी घर से निकलने में भी झिझकती थीं, आज वे इन सेंटरों का पूर्ण स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन खुद संभाल रही हैं। प्रत्येक केंद्र पर एक प्रशिक्षित सामुदायिक पेशेवर विद्या-दीदी (डिजिटल एडुप्रेन्योर) के रूप में तैनात हैं। वे दैनिक संचालन से लेकर बच्चों को डिजिटल सेवाएं देने तक की कमान संभाल रही हैं। आर्थिक तंगी से मुक्ति और बढ़ता सामाजिक मान-सम्मान विद्या-दीदी और लाइब्रेरी मैनेजर के रूप में काम करके हजारों महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार का जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि घर और समाज के फैसलों में भी उनकी बात को सम्मान मिल रहा है। पढ़ाई और डिजिटल हुनर से जुड़कर दीदियों ने साबित किया है कि दिया है कि अगर सही अवसर मिले तो ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।     जीविका-दीदी की लाइब्रेरी केवल किताबों का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी उन बहनों के आत्मसम्मान और सफलता की कहानी है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को हराकर नया इतिहास रचा है। राज्य में संचालित 118 पुस्तकालयों के माध्यम से आज 1 लाख से अधिक युवाओं और 61 फीसदी बेटियों को अपने ही गांव में डिजिटल शिक्षा और करियर मार्गदर्शन मिल रहा है। हमारी विद्या-दीदियां आज गांव-गांव में ज्ञान का दीप जलाकर ग्रामीण बिहार को आत्मनिर्भर बना रही हैं।     श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग।  

पीछे से टक्कर को लेकर हाई कोर्ट का अहम फैसला, बीमा कंपनी की अपील हुई खारिज

चंडीगढ़. सड़क हादसे में आगे चल रहे वाहन से पीछे से टक्कर होने मात्र के आधार पर पीछे चल रहे वाहन के चालक को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट करते हुए बीमा कंपनी की तीनों अपीलें खारिज कर दी हैं। अदालत ने कहा कि सह-दोषिता यानी कार चालक की भी लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी उस पक्ष की है, जो इसका आरोप लगा रहा है। केवल पीछे से टक्कर को आधार बनाकर यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। मामला 29 मार्च 2009 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। हादसे में सुखविंदर सिंह और प्रेमचंद की मृत्यु हो गई थी, जबकि सुब्बा सिंह घायल हुए थे। तीनों एक मारुति कार से गांव थेह बुटाना से लुधियाना जा रहे थे। समराला चौक के पास आगे चल रहे ट्रक के चालक बलजिंदर सिंह ने कथित तौर पर बिना संकेत दिए बीच सड़क अचानक ब्रेक लगा दिए, जिसके कारण कार ट्रक से जा टकराई। सह-दोषिता का दावा हाई कोर्ट में खारिज बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि कार ट्रक से पीछे से टकराई थी, इसलिए कार चालक सुखविंदर सिंह की भी सह-दोषिता थी। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी ने न तो अधिकरण के समक्ष सुखविंदर सिंह की सह-दोषिता की कोई विशिष्ट दलील रखी और न ही इस संबंध में कोई मुद्दा तय कराने का प्रयास किया। वहीं ट्रक चालक खुद गवाही देने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ और यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसने अचानक ब्रेक क्यों लगाए थे या पीछे आ रहे यातायात को कोई संकेत दिया था या नहीं। हाई कोर्ट से पीड़ित परिवारों को राहत अदालत ने सुखविंदर सिंह की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 9.96 लाख रुपये निर्धारित किया। पहले अधिकरण ने 5.81 लाख रुपये दिए थे। इस तरह स्वजन को अतिरिक्त 4.16 लाख रुपये मिलेंगे। 24 वर्षीय सुखविंदर के मामले में भविष्य की संभावनाओं के लिए 40 प्रतिशत वृद्धि और 18 का गुणक लागू किया गया। वहीं 27 वर्षीय प्रेमचंद की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 11.97 लाख रुपये तय किया गया। पहले मिले 6.09 लाख रुपये के अतिरिक्त अब 5.89 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें पत्नी, तीन नाबालिग बच्चों और माता-पिता को वैधानिक अधिकारों के अनुसार मुआवजा दिया गया है। पीड़ित को मिलेगा 15 हजार अतिरिक्त सुब्बा सिंह के मामले में स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण प्रस्तुत नहीं होने के कारण भविष्य की आय में नुकसान का मुआवजा नहीं दिया गया। हालांकि चोटों की गंभीरता को देखते हुए कुल मुआवजा 60 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया। उन्हें 15 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। तीनों मामलों में बढ़ा हुआ मुआवजा बीमा कंपनी और वाहन चालक-सह-मालिक संयुक्त रूप से देंगे। इस राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

CG में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, आज कई ट्रेनें रद्द; यार्ड रीमॉडलिंग के चलते लिया फैसला

रायपुर. छत्तीसगढ़ में तीज पर्व पर मायके जाने की तैयारी कर रही महिलाओं और दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जाएगा। इसके चलते 13 और 14 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और इतवारी के बीच चलने वाली 10 ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं 2 मेमू ट्रेनों का परिचालन बिलासपुर तक सीमित रहेगा। रेलवे के मुताबिक, यह काम उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना के तहत उरकुरा स्टेशन के यार्ड रीमॉडलिंग के लिए किया जा रहा है। यात्रियों के लिए जरूरी बात तीजा पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार मायके आने-जाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में दोनों दिन यात्रा से पहले ट्रेन नंबर जरूर चेक कर लें। रद्द ट्रेन से यात्रा की योजना है तो वैकल्पिक ट्रेन या बस की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर होगा। आज रद्द रहने वाली ट्रेनें – आज रायपुर-बिलासपुर मेमू 68728 का परिचालन रहेगा रद्द आज बिलासपुर-गेवरा रोड मेमू 68734 नहीं चलेगी आज गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू 68733 रहेगी रद्द आज बिलासपुर-रायपुर मेमू 68719 का परिचालन रद्द आज कोरबा-रायपुर पैसेंजर 58203 नहीं चलेगी आज रायपुर-इतवारी पैसेंजर 58206 का परिचालन रद्द आज रायपुर-गेवरा रोड मेमू 68746 रहेगी रद्द कल रद्द रहने वाली ट्रेनें – कल रायपुर-कोरबा पैसेंजर 58204 रहेगी रद्द कल इतवारी-रायपुर पैसेंजर 58206 भी रहेगी रद्द कल कोरबा-रायपुर मेमू 68745 का परिचालन रद्द रहेगा